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लम्बी अवधि के कब्जे से किसी संपत्ति का स्वामित्व नहीं मिलता।

समस्या-

संध्या कश्यप ने रेलवे पाड़ा, अडावल, जगदलपुर, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

35 वर्ष से हमारे ससुर ने घर के समीप एक जमीन पर कब्जा कर रका था। उस समय पर वहाँ कोई मकान नहीं था। अब सरपंच पंचायत की जमीन बता कर दूसरो को बेच रहे हैं और हमें क्या तुम्हारे पास पट्टा है कह कर डरा रहे हैं। क्या यह जमीन हमें मिल सकती है? क्या हम लोग कोई कानूनी कार्यवाही कर सकते हैं? सरपंच का काम पंचायत के लोगों को सुरक्षित करना है कि उन्हें लूटें।

समाधान-

प का घर के पास की किसी जमीन पर इतना पुराना कब्जा है इस का अर्थ ये तो नहीं कि आप उस जमीन के स्वामी हो गए हैं। यदि जमीन पंचायत की है तो वह सार्वजनिक है और उस पर कब्जा हटाने की कार्यवाही पंचायत को करने का अधिकार है। वे आप का कब्जा हटाने की कार्यवाही कर सकते हैं और किसी जरूरतमंद को जमीन मकान बनाने के लिए बेच सकते हैं। आखिर गाँव में जमीन सीमित होती है और लगातार आबादी बढ़ने से मकानों के लिए जमीन की जरूरत होती है।

लेकिन किसी भी व्यक्ति का कब्जा यदि 30 वर्ष से अधिक का है तो उसे हटाया जाना संभव नहीं है। यदि आप को आशंका है कि आप का कब्जा जबरन हटा दिया जाएगा तो आप दीवानी न्यायालय में जा कर कब्जा हटाए जाने के विरुद्ध पंचायत तथा उस के द्वारा जिस को विक्रय की जाए दोनों के विरुद्ध स्थगन आदेश प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन फिर भी उस जमीन पर आप का स्वामित्व स्थापित नहीं होगा।   उस के लिए जमीन पंचायत से खरीदनी होगी या पट्टा बनवाना पड़ेगा।

 

नामान्तरण से स्थावर संपत्ति पर स्वामित्व प्राप्त नहीं होता।

समस्या-

अशोक ने खंडवा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-


मारी पुस्तैनी अचल सम्पत्ति गाँव में है, मेरे पिताजी 3 भाई और एक बहन हैं एक ताउजी की 5 साल पहले मृत्यु हो गई, आज से 25 साल पहले 1989 में दादा जी की मृत्यु हो गई थी। दादाजी की मृत्यु के बाद 1991 में गाव की ग्राम सभा में चारो भाई बहन ने मौखिक रूप से सभी की सहमति से हमारा मकान मेरे पिताजी और ताउजी के नाम नामांतरण कर दिया। 20 सालों से उस मकान पर हमारा कब्जा है तथा हमारे द्वारा भवन कर जमा किया जा रहा है। बिजली बिल नल कनेक्सन पिताजी और ताउजी के नाम है। आज 20 साल बाद बुआ मकान में हिस्सा मांग रही है। उसके लिए दीवानी वाद दायर किया है। बुआ भी हमारे साथ ही मकान में रहती है। कृपया उचित सलाह दें।


समाधान-

म यहाँ तीसरा खंबा में कानूनी समाधान प्रदान करते हैं, आप ने उचित सलाह मांगी है।

Deokoo Bai W/O Anna Rao And Ors. vs Keshari Chand S/O Ganeshlal Jain व अन्य अनेक मामलों में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का निर्णय है कि नामान्तरण से किसी भी हिस्सेदार के अधिकार प्रभावित नहीं होते। आप उक्त मामले में उक्त निर्णय का पैरा 10 देखें। यदि कोई किसी अचल संपत्ति में अपना हिस्सा छोड़ना चाहता है तो उसे अपने हिस्से का हकत्याग विलेख उस व्यक्ति या व्यक्तियों के पक्ष में निष्पादित कर उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत कराना चाहिए। तभी हकत्याग को सही माना जा सकता है।

बुआ यदि अपने हिस्से की  मांग कर रही है तो उचित ही कर रही है। आप लोगों को बुआ का हिस्सा सहर्ष दे देना चाहिए था, उसे न्यायालय में जाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए थी। अब भी कोई देरी नहीं हुई है। आप लोग एक ही मकान में निवास करते हैं अब भी इस मामले को परिवार में ही आपस में बैठ कर निर्णय कर लेना उचित कदम होगा।

भूमि पर स्वामित्व का रिकार्ड कहाँ तलाश करें?

rp_land-demarcation-150x150.jpgसमस्या-

पंकज तिवारी ने झरिया, धनबाद झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मेरे पूर्वजों ने बहुत सारी जमीन अर्जित की थी, मेरे सारे पूर्वजों का देहान्त हो चुका है, पिताजी भी नहीं रहे। मुझे अपनी किसी जमीन के बारे में कुछ जानकारी नहीं है, कोई बताने वाला भी नहीं है। कृपया ऐसा कोई कानूनी जानकारी दें जिस से मैं अपनी सारी जमीन का पता कर सकूँ।

समाधान

मीन और उस से जुड़ी सभी स्थिर संपत्तियाँ स्थावर संपत्ति हैं। यदि किसी संपत्ति के कोई कागजात नहीं हैं तो उस जमीन पर आप का कब्जा ही उस जमीन पर आप के स्वामित्व का प्राथमिक सबूत है। इस तरह जितनी जमीन आज आप के कब्जे में है उस सारी जमीन के स्वामी आप हैं जब तक कि कोई अन्य उस जमीन पर अपना स्वामित्व दस्तावेजों से न्यायालय के समक्ष साबित न कर दे। कोई भी व्यक्ति किसी का कब्जा जबरन नहीं छीन सकता यह गैर कानूनी है। यदि कब्जा छीना जाता है तो कब्जा छीने जाने के 60 दिनों की अवधि में उप जिला दंडनायक को उस की शिकायत की जा सकती है और वह धारा 145 की प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए संपत्ति पर आप को कब्जा वापस दिला सकता है। 60 दिनों में शिकायत न करने पर फिर एसडीएम का क्षेत्राधिकार नहीं रहता। उस के बाद आप को कब्जे के लिए दीवानी वाद करना होगा।

दि आप की भूमि कृषि भूमि है तो उस का सारा रिकार्ड राजस्व विभाग में रहता है। आज कल तो यह इंटरनेट पर उपलब्ध है। आप उस रिकार्ड में इंटरनेट पर खोज सकते हैं कि कौन कौन सी जमीन आप की है और आप के पुरखों के नाम दर्ज है। यदि रिकार्ड में हेराफेरी दिखे तो पुराने राजस्व रिकार्ड देखे जा सकते हैं। आबादी भूमि का रिकार्ड आप को ग्राम पंचायत और नगरपालिका, नगरपरिषद या नगर निगमों में प्राप्त हो सकता है। जहाँ भी कोई जमीन आप को खुद या आप के पुरखों के नाम दर्ज मिले उसी रिकार्ड की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर संग्रह करते जाएँ। इस के साथ जो जमीन आप के कब्जे में है उसे कब्जे में बनाए रखें। हो सकता है जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज की यह तलाश लम्बे समय तक चलती रहे। पर इसे जारी रखना होगा। इसी तरह आप के पास आप की जमीन का रिकार्ड तैयार हो जाएगा।

अपने कब्जे का आप विपरीत आधिपत्य के सिद्धान्त के आधार पर बचाव करें।

rp_law-suit.jpgसमस्या-

समीर ने पठानकोट, पंजाब से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी ने ज़मीन ख़रीदी और उसकी रजिस्ट्री चारों भाइयों के नाम कर दी जबकि हम पाँच भाई हैं और इस बात का पता मुझे नहीं था। फ़ौज़ से रिटायर्ड होने के बाद मैं ने उसी ज़मीन पर घर बना लिया और उस के एक साल बाद मुझे पता चला कि मेरे नाम रजिस्ट्री नहीं है। मैं उस जगह पर 18 साल से रहता हूँ। राशन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली, पानी का बिल, वोटर कार्ड सब हैं। पर अब आगे क्या करूँ कैसे रजिस्ट्री नाम हो, बताएँ। मैने पूरे जीवन की पूँजी लगा दी है।

समाधान-

जिस जमीन पर आप ने मकान बनाया उसे आप ने अपना समझ कर बनाया। इस पर आज तक किसी ने कोई आपत्ति नहीं की और आप 18 वर्षों से उस पर काबिज हैं और उस पर निवास कर रहे हैं। इस कारण उस भूमि पर आप का विपरीत आधिपत्य है। अब उस जमीन के रेकार्डेड स्वामी आप को बेदखल नहीं कर सकते। आप उस जमीन का उपयोग उपभोग कर सकते हैं और आप के उपरान्त आप के उत्तराधिकारी उस का उपयोग कर सकते हैं। केवल आप का नाम रिकार्ड में नहीं है। यदि उक्त भूमि का कोई रेकार्डेड स्वामी आप के विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही करे और मुकदमा संस्थित करे तो आप विपरीत आधिपत्य के सिद्धान्त के आधार पर अपना बचाव कर सकते हैं।

ब कभी आपके राज्य में राज्य सरकार की ओर से पट्टे आदि बनाने का अभियान चले आप अपने कब्जे के आधार पर उस जमीन का पट्टा बनवाने का प्रयत्न करें। कभी न कभी तो पट्टा आप के नाम बन ही जाएगा।

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