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नोशनल परिलाभ आप को न्यायालय ही दिला सकता है।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

हरीश गुप्ता ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता का स्वर्गवास 1999 में हुआ उस वक्त वह निलंबित थे। मेरे द्वारा 45 दिन के अन्दर निवेदन किया गया था तब विभाग ने कहा आपके पिता निलंबित होने के कारण आपको अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा सकती है। 2015 में राजस्थान उच्च न्यायालय में उन्हें निरंतर सर्विस में माना है।| परिणामस्वरूप विभाग द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति दे दी है, परन्तु अभी से सेवा में माना है। मैं चाहता हूँ कि मुझे 1999 से मेरे निवेदन को मान कर नियुक्ति मानी जाये। क्या ये हो सकता है तथा क्या मुझे नोशनल परिलाभ मिल सकता है?

समाधान-

प का प्रश्न अधूरा और विवरणहीन है। उच्च न्यायालय ने 2015 में उन्हें निरन्तर सेवा में माना है। यह किस प्रकरण में हुआ है? क्या यह आप के पिता के द्वारा संस्थित किसी प्रकरण पर हुआ है? यदि ऐसा है तो उस प्रकरण में तो आप को यह लाभ मिल नहीं सकता था। आप ने उसी प्रकरण के आधार पर पूर्व में प्रस्तुत आप के नियुक्ति आवेदन पर निर्णय लेने को कहा होगा जिस पर विभाग ने आप को अनुकम्पा नियुक्ति दे दी।

राज्य सरकार ने तो उक्त निर्णय के अनुसार आप को नियुक्ति दे दी है। वे अपना दायित्व पूर्ण कर चुके हैं। अब यदि आप नोशनल परिलाभ चाहते हैं तो राज्य सरकार के पास ऐसा कोई नियम नहीं है जिस के अन्तर्गत आप को यह परिलाभ दिए जा सकें।

स के लिए आप को पुनः राज्य सरकार को नोशनल परिलाभ देने के लिए लिखना चाहिए। जैसा की संभावित है यदि राज्य सरकार आप को नोशनल परिलाभ देने से मना करेगी। तब आप न्यायालय की शरण ले सकते हैं। हो सकता है न्यायालय आप को नोशनल परिलाभ देने का आदेश राज्य सरकार को दे दे। यह आप के पिता के संबंध में हुए निर्णय का अध्ययन कर के ही कहा जा सकता है। आप के पिता के प्रकरण को जो वकील साहब उच्च न्यायालय में देख रहे थे आप को उन्हीं से संपर्क कर के इस संबंध में राय करते हुए तुरन्त कार्यवाही करना चाहिए।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन दें, मना करने पर रिट याचिका प्रस्तुत करें।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

गुड्डू कुमार ने रामगढ़ केन्ट, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

दिनांक 02.12.2014 को मेरे पिता एक सड़क दुर्घटना में घायल हुए और दिनांक 04.12.2014 को उन का देहान्त हो गया। वे स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लि. के स्थाई कर्मचारी थे और उन का सेवा काल दो वर्ष शेष था। मैं ने फैक्ट्री में संपर्क किया तो मुझे बताया गया कि कंपनी की इस यूनिट में अनुकम्पा नियुक्ति का नियम नहीं है। सेल की अन्य यूनिटों में अनुकम्पा नियुक्ति दी जाती है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

ह सही है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लि. की अलग अलग इकाइयों में अलग अलग नियम हैं। हो सकता है आप जिस इकाई की बात कर रहे हैं वहाँ इस तरह का कोई नियम नहीं हो। लेकिन सेल की इकाइयों में इस तरह के अलग अलग नियमों के होने पर आपत्तियाँ उठी हैं और एक कमेटी भी बनाई गयी है जिस के द्वारा सेल की सभी इकाइयों में एक समान नियम बनाने पर विचार हुआ है। यह काम कितना आगे बढ़ा है इस की हमें वर्तमान में जानकारी नहीं है।

सी अवस्था में आप को चाहिए कि आप समस्त दस्तावेजों की प्रतियों सहित उस युनिट में जिस में आप के पिता सेवा में थे लिखित आवेदन अनुकम्पा नियुक्ति के लिए दे दें। उस युनिट के ऊपर के अधिकारियों और कम्पनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को भी इस तरह का आवेदन करें। इस से यह होगा कि आप के पार्ट पर आवेदन देने का काम पूरा हो जाएगा। आप की तरफ से कोई कमी नहीं रहेगी। प्रत्येक आवेदन जो आप दें उस की प्रतिलिपि और आवेदन प्रस्तुत करने का सबूत अर्थात प्राप्ति स्वीकृति आदी संभाल कर रखें। स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया सार्वजनिक क्षेत्र का संस्थान है और आप के आवेदन पर अनुकम्पा नियुक्ति देने से इन्कार करने पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की जा सकती है।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पुत्रवधु आश्रित की श्रेणी में नहीं।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

हरिओम सोनी ने कोटा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरे अॉफिस में एक वर्कचार्ज कुली की मृत्यु दिनांक 02.09.2015 को गई।  मृतक के एक मात्र पुत्र था, जिस की भी वर्ष 2012 में मृत्यु हो चुकी है। मृतक कुली की अब मात्र एक वारिस पुत्रवधु ही है।  क्या पुत्र वधु को अनुकंपा नियुकि़त मिल सकती है? यदि हां तो किस नियम के तहत कृपया शीघ् अवगत कराने की कृपा करें।

समाधान-

राजस्थान के अनुकम्पा नियुक्ति नियमों में विधवा पुत्रवधु को आश्रितों में सम्मिलित नहीं माना गया है। इस कारण सामान्य नियमों के अन्तर्गत पुत्र वधु को नियुक्ति मिलना संभव नहीं है। लेकिन यदि परिवार में वह एक मात्र आश्रित है तो उस से आवेदन प्रस्तुत करवाया जा सकता है। यह आवेेदन सामान्य नियमों में निरस्त किए जाने योग्य है। इस कारण से इसे नियम 13 के अन्तर्गत राय प्राप्त करने के लिए विभाग द्वारा राज्यसरकार को भेजा जा सकता है। फिर भी अधिक संभावना है कि यह निरस्त ही होगा।

लेकिन इस मामले में एक मात्र आश्रित होने के कारण इस मामले में आवेदन निरस्त होने पर आवेदन निरस्त होने के आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की जा सकती है और न्यायालय उसे स्वीकार करते हुए उसे नियुक्ति देने का आदेश दे भी सकता है और नहीं भी दे सकता है। लेकिन इस मामले में पुत्र वधु को इस तथ्य के मजबूत सबूत देने होंगे कि वह पूरी तरह मृतक कर्मचारी की आश्रिता थी। हमारी राय में उस महिला को आवेदन तुरन्त प्रस्तुत कर देना चाहिए। आगे की कार्यवाही को आगे की परिस्थितियों पर छोड़ देना चाहिए।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए कर्मचारी की मृत्यु के दिन कोई आश्रित सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

उमा शंकेर जायसवाल ने जयपुर, राजस्थान से की समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी की मृत्यु दिनांक 06.06.2007 को एक सड़क दुर्घटना में हो गयी है। मैं ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया और मुझे 2008 में राजस्थान के शिक्षा विभाग में नियुक्ति मिल गयी। इस बीच मेरे छोटे भाई को भी सरकारी विभाग में नौकरी मिल गयी। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या मैं अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए अर्हता रखता था।

समाधान

राजस्थान में अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों का प्रासंगिक नियम निम्न प्रकार है-

Government service subject to the condition that employment under these rules shall not be admissible in cases where the spouse or at least one of the sons, unmarried daughters, adopted son/adopted unmarried daughter of the deceased Government servant is already employed on regular basis under the central / any State Government or Statutory Board, Organisation/Corporation owned or controlled wholly or partially by the Central/ any State Government at the time of death of the Government servant.

न नियमों में स्पष्ट है कि जिस दिन सरकारी कर्मचारी का देहान्त हुआ है उस दिन पुत्रों, अविवाहित पुत्रियों, दत्तक पुत्र/पुत्री में से कोई एक भी स्थाई आधार पर राज्य या केन्द्र के सरकारी विभाग, विधिक निकाय, संगठन, निगम में नियुक्त नहीं होना चाहिए। आप के भाई को जो नौकरी प्राप्त हुई है वह आप के पिता जी की मृत्यु के उपरान्त प्राप्त हुई है इस कारण से आप अनुकम्पा नियुक्ति के लिए अर्हता रखते थे। आप को नियक्त किया जाना नियमों के अनुकूल है।

मृतक आश्रित को उस की योग्यता के अनुरूप नियुक्ति दी जानी चाहिए

No employmentसमस्या-

प्रिंस ने कुशीनगर , उत्तर प्रदेश से उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता जी एक इंटर कालेज मे चपरासी के पद पर कार्यरत थे. 2010 में उनकी आकस्मिक मृत्यु एक दुर्घटना में हो गयी, उस समय मैं नाबालिग था। मैं ने अब मृतक आश्रित नौकरी के लिये आवेदन किया है। मेरी योग्यता इंटर तक है तथा मैं ने सी.सी.सी. भी किया है सम्बन्धित कालेज में लिपिक के लिये 6 पद हैं, उन में से इस समय 2 पद रिक्त हैं। क्या मेरी नियुक्ति इन दोनों रिक्त पदों में से एक पद पर मृतक आश्रित के आधार पर की जा सकती है? क्या प्रमोशन कोटा की वजह से आश्रित को किसी पद से (जिसे पाने की वह योग्यता रखता हो) वंचित किया जा सकता है?

समाधान-

प के राज्य के मृतक आश्रित नियम यह कहते हैं कि किसी भी मृतक आश्रित को उस की योग्यता के अनुसार रिक्त पद पर नौकरी दी जानी चाहिए। इस तरह आप अपनी योग्यता के अनुसार लिपिक पद पर नियुक्ति पाने के अधिकारी हैं। इस पद पर आप की नियुक्ति की जा सकती है।

मृतक आश्रित नियमों के अनुसार पदोन्नति कोटा आप की नियुक्ति में बाधक नहीं है। मृतक आश्रित को नियुक्ति दिए जाने के लिए केवल मात्र पद का रिक्त होना पर्याप्त है। आप को चाहिए कि आप आवेदन के पश्चात नियुक्ति अधिकारी से लगातार मिलते रहें। कुछ समय के अन्तराल से आप उन्हें स्मरण पत्र भी लिख सकते हैं। वे यदि नियुक्ति देने से मना करते हैं, अथवा आप की योग्यता के अनुरूप पद पर आप की नियुक्ति नहीं करते हैं तो आप उच्च न्यायालय में रिट दाखिल कर के उपाय प्राप्त कर सकते हैं।

तदर्थ नियुक्ति, नियमितिकरण और वरिष्ठता

justiceसमस्या-

कोटद्वार, उत्तराखंड से मंजू कापर्वान ने पूछा है –

मेरी नियुक्ति 1990 में तदर्थ सहायक अध्यापिका के पद पर हुई थी और मेरा 1999 में नियमितिकरण हुआ है। मुझे 1999 से वरिष्ठता प्रदान की गई है। 1990 से आज तक मैं ने बिना व्यवधान के नौकरी की है और सभी  वेतनवृद्धियाँ नियमित कर्मचारी की तरह मिली हैं। केवल मुझे और मेरे साथ के 3000 शिक्षकों को वरिष्ठता 1999 से दी गई है। एक शिक्षक सुप्रीम कोर्ट गया था उसे वरिष्ठता नियुक्ति से मिली थी लेकिन अब विभाग ने उसे अमान्य कर दिया है। तदर्थ नियुक्ति को कितने वर्ष में नियमित करने का नियम है? और मुझे वरिष्ठता कब से मिलनी चाहिए?

समाधान-

प की वरिष्ठता इस बात से निर्भर करेगी कि 1990 में जब आप को तदर्थ नियुक्ति दी गई तब आप के चयन के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 12 फरवरी 2008 को Z. Ajeesudeen vs Union Of India & Ors के मुकदमे में यह निर्णीत किया है कि …..

“In our opinion, for adhoc service to be counted it is not enough that there is a rule permitting adhoc appointment. It is also necessary that the appointment was made after following the procedure prescribed for making a regular appointment. Only then will the adhoc service be counted, otherwise it will not.”

दि सेवा नियम तदर्थ नियुक्ति को अनुमत करते हैं तो नियुक्त किए कर्मचारी को तदर्थ नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता नहीं दी जा सकती। उस के लिए यह आवश्यक है कि उस की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया भी वही अपनाई गई हो जो कि नियमित नियुक्ति के लिए आवश्यक है।

स तरह यदि आप के चयन और नियुक्ति के लिए वही सारी प्रक्रिया अपनाई गई थी जो कि एक नियमित नियुक्ति के लिए अपनाई जानी चाहिए थी तो आप को वरिष्ठता आप की तदर्थ नियुक्ति की तिथि से ही प्राप्त होगी अन्यथा आप का नियमितिकरण होने की 1999 की तिथि से प्राप्त होगी।

अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन अवश्य करें और नियत अवधि में करें।

समस्या-

महासमुंद, छत्तीसगढ़ से आदित्य अग्रवाल ने पूछा है-

मेरी माताजी सरकारी स्कूल में अध्यापिका थीं। उन का देहान्त 16.02.2013 को हो गया। मैं ने इंजिनियरिंग किया है और मेरे पापा भी शासकीय कर्मचारी हैं। विभाग वाले यह कहते हैं कि यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी हों को अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल सकती। इस नियम को बदलने के लिए विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत किया गया है कृपा कर के मुझे बताएँ कि क्या मैं अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर सकता हूँ या नहीं?

समाधान-

भी राज्य सरकारों के अनुकंपा नियुक्ति के नियम भिन्न भिन्न हैं। राज्य सेवा में होते हुए मृत शासकीय कर्मचारी के आश्रितों में से एक को नियुक्ति देने के लिए छत्तीसगढ़ के लिए निर्मित नियमों की प्रति हमारे पास उपलब्ध नहीं है। इस कारण से हम इस संबंध में निश्चित राय दे सकने में असमर्थ हैं।  आप को चाहिए कि आप छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस संबंध में निर्मित नियमों को ध्यान से पढ़ें और उस के अनुसार कार्यवाही करें।

नुकंपा नियुक्ति किसी मृत शासकीय कर्मचारी के आश्रित का अधिकार नहीं है। यह सरकार की अनुकंपा है। साधारणतया सभी राज्यों में प्रचलित नियमों में यह प्रावधान है कि यदि परिवार में कोई अन्य व्यक्ति पहले से शासकीय सेवा में है तो उस मामले में किसी को भी अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जाएगी। किन्तु केंद्र सरकार ने वर्तमान में जो निर्देश जारी किए हैं उन में कहा है कि यदि विशेष परिस्थितियाँ हुई तो ऐसी अवस्था में भी अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है। आप की विशेष परिस्थितियाँ हैं या नहीं यह आप ने नहीं बताया है।

मारी राय है कि आप अपनी माता जी के विभाग में जा कर नियमों की एक प्रतिलिपि प्राप्त करें और उस का अध्ययन करें। आप को विभाग से आवेदन प्रपत्र प्राप्त कर नियमानुसार सभी प्रमाण पत्रों व अन्य औपचारिकताओं के साथ नियत अवधि में आवेदन अवश्य कर दें। जिस से इन परिस्थितियों में नियुक्ति होने का नियम होने पर आप नियुक्ति से वंचित न हों। यदि नियम न होगा तो विभाग आप के आवेदन को कारण बताते हुए निरस्त कर देगा। बाद में इन कारणो की जाँच पड़ताल नियमों के अनुसार की जा सकती है और यदि आवेदन गलत तरीके से निरस्त किया जाता है तो उसे न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।

अनुकंपा नियुक्ति के लिए बिना देरी आवेदन करना चाहिए

समस्या-

 मेरा जन्म 1990 में हुआ। 1985 में ड्यूटी के दौरान पुलिस डकैत मुठभेड़ में नेत्रहीन हो गए सिपाही के आश्रित को क्या अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति मिल सकती है जिसे चिकित्सकीय कारणों से सेवा निवृत्त कर दिया गया हो? आवेदक किस आयु तक आवेदन कर सकता है?

-शुभम कुशवाहा, झींझक, कानपुर देहात, उत्तरप्रदेश

समाधान-

प्रत्येक राजकीय विभाग में ड्यूटी के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुए व्यक्तियों के आश्रितों को नियोजन देने के नियम या फिर आदेश हैं।  आप को सेवा निवृत्त व्यक्ति के विभाग में पता करना चाहिए कि इस तरह के क्या नियम हैं? राजस्थान पुलिस में इस तरह का नियम है और ऐसी नियुक्तियाँ दी गई हैं। उत्तर प्रदेश में भी ऐसे नियम अवश्य बने होंगे। अनुकंपा नियुक्ति के लिए जितना जल्दी हो आवेदन कर देना चाहिए, बिलकुल देरी नहीं करना चाहिए।

दि आप स्वयं आश्रित हैं और यह नियुक्ति चाहते हैं तो आप की उम्र अभी 22 वर्ष है आप नियोजन प्राप्त कर सकते हैं।  आप को इस नियुक्ति के लिए तुरंत आवेदन करना चाहिए। जितनी देरी होगी आप का मामला उतना ही हलका होता जाएगा।

एलआईसी में मृतक आश्रितों के लिए अधिकतम आयु सीमा

 विवेक कुमार द्विवेदी सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश से पूछते हैं –
                                   
मेरे पिता जी भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा सुलतानपुर में लिपिक पद पर कार्यरत थे। उनकी आकस्‍मिक मृत्‍यु उनके सेवाकाल में ही दिनांक 19.10.2009 को हो गयी।  मेरे परिवार की सहमति से मैंने मृतक आश्रित रूप में सेवा प्राप्‍त करने के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम को आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन के कुछ दिन बाद मंडल कार्यालय फैजाबाद से मृतक आश्रित के लिए प्रार्थना का प्रारूप आया। मुझे निर्देशित किया गया था कि मैं इसे पूर्णत: भरकर सारे शैक्षिक प्रमाण पत्र लगाकर अविलम्‍ब भेजूँ। मैंने फार्म को भरकर शैक्षिक योग्‍यता एम.ए. बी.एड. तथा जन्‍मतिथि दिनांक 25.08.1978 का प्रमाण पत्र संलग्न कर भेज दिया। उसके बाद मण्‍डल कार्यालय से विभागीय जांच आयी और जांच के पश्‍चात साक्षात्कार के लिए पत्र आया। मेरा साक्षातकार 4 मई 2010 को मण्‍डल कार्यालय फैजाबाद में हुआ। तब से लेकर आज तक कार्यालय की तरफ से मुझे कोई सूचना प्राप्‍त नहीं हुई है। जानकारी करने पर पता चला कि मेरी उम्र अधिक होने के कारण मुझे नौकरी नहीं दी गयी। विभाग की अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष है। जबकि जब मैंने आवेदन किया था। तभी मैं 30 वर्ष से अधिक था। इसके बावजूद निगम ने सारी प्रक्रिया पूरी करवायी और इतना समय बीतने के बाद भी आज तक मुझे कोई जबाव नहीं दिया। मैंने निगम को पत्र लिखकर जानकारी मांगी लेकिन उसका भी आज तक कोई जबाव नहीं आया। मुझे क्या करना चाहिए? 

 उत्तर –

विवेक जी,

प का आवेदन बिलकुल सही है। आप का कहना है कि भारतीय जीवन बीमा निगम में मृतक आश्रित को नियुक्ति देने के लिेए अधिकतम सीमा 30 वर्ष है। जब कि मेरी जानकारी के अनुसार निगम में मृतक आश्रित के रूप  में नियुक्ति देने के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष तथा पुत्र या पुत्री के लिए यह सीमा 35 वर्ष है। यदि आयु सीमा के कारण आप की नियुक्ति में बाधा आ रही होती तो आप के आवेदन के तथ्यों की जाँच ही नहीं की जाती साक्षात्कार तो बहुत दूर की बात है। इस तरह आप निश्चिंत हो सकते हैं कि आयु सीमा के कारण आप का आवेदन अस्वीकृत नहीं किया जाएगा।
मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आप की नियुक्ति के मामले में विभागीय अनुमति के कारण देरी हो रही है। अन्य कोई कारण दिखाई नहीं दे रहा है। आप को चाहिए कि आप स्वयं अपने मंडल कार्यालय में जा कर व्यक्तिगत रूप से मंडल प्रबंधक से मिलें और उन से जानकारी प्राप्त करें कि आप को नियुक्ति दिए जाने में देरी क्यों हो रही है। आप को वे सारी जानकारी दे देंगे। यदि आप को फिर भी जानकारी नहीं मिलती है तो आप लिखित में आवेदन दें और उस आवेदन की दूसरी प्रति पर प्राप्ति स्वीकृति प्राप्त कर लें। तब आप को एक निश्चित समय में भारतीय जीवन बीमा निगम से उत्तर प्राप्त हो जाएगा। यदि फिर भी कोई उत्तर प्राप्त नहीं होता है या नियुक्ति में कोई
अड़चन बताई जाती है तो आप पुनः सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए यह नहीं देखा जाएगा कि मृतक कर्मचारी को किस आधार पर सेवा में नियुक्ति प्राप्त हुई थी

 आनन्द शर्मा ने पूछा है –
मेरे पिता सेलटेक्स में सहायक ग्रेड-3 के पद पर काम करते थे। उन के निधन के उपरान्त मेरी माँ को नौकरी मिली। अब मेरी माँ का भी निधन हो गया है।  लोग कहते हैं कि अनुकम्पा पर अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल सकती। क्या ये सही है और क्या क्या ये नौकरी मुझे मिल सकती है?
 उत्तर –
आनन्द जी,
ब से पहले तो आप को यह जान लेना चाहिए कि अनुकम्पा नियुक्ति केवल एक राहत है और अनुकम्पा के आधार पर मिलती है। यह किसी का अधिकार नहीं है। यह नियुक्ति प्रत्येक राज्य में उस राज्य के अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों के अन्तर्गत मिल सकती है और उपयुक्त पद उपलब्ध होने पर ही मिल सकती है। इस के लिए अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता।
नुकम्पा नियुक्ति का आधार यह है कि जब एक परिवार में परिवार के लिए कमाने वाला व्यक्ति चला जाता है तो उसे तुरन्त सहारे की आवश्यकता होती है। सरकारी विभागों में और कुछ सरकारी कंपनियों में इस तरह की नियुक्तियाँ देने का प्रावधान है। इस तरह की नियुक्तियों के लिए किसी भी सरकारी कर्मचारी की नौकरी में रहते हुए निधन हो जाने पर उस के आश्रितों (पति, पत्नी और उस की संतानों) में से किसी एक को प्रदान की जाती है। आप की माता सरकारी कर्मचारी थी औऱ आप के परिवार का खर्च चलाती थी, आप उस के आश्रित थे तो आप अपनी माँ की मृत्यु के उपरान्त अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह बात बेमानी है कि आप की माता को भी अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त हुई थी। लेकिन आप को नियमों के अनुसार निश्चित अवधि में इस नियुक्ति के लिए आवेदन करना होगा। यदि अवधि निकल गई तो फिर आप नियुक्ति प्राप्त करने से वंचित हो सकते हैं। इस कारण से आप को तुरन्त इस के लिए आवेदन कर देना चाहिए। 
हो सकता है कि आप के राज्य में कोई ऐसा नियम हो कि अनुकम्पा के आधार पर नियुक्त कर्मचारी की नौकरी में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर अनुकम्पा नियुक्ति न दी जाए। हालाँकि ऐसा उपबंध अभी तक किन्हीं भी नियमों मुझे देखने को नहीं मिला है। आप सब से पहले तो अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन कर दें। यदि आप को इस आधार पर नियुक्ति नहीं दी जाती है कि आप की माता स्वयं अनुकम्पा नियुक्ति के माध्यम से नौकरी में आई थीं, तो आप ऐसे नियुक्ति नहीं देने के आदेश के विरुद्ध अपने राज्य के उच्चन्यायालय के समक्ष रिट याचिका प्रस्तुत कर राहत प्राप्त करने का प्रयत्न कर सकते हैं। यदि आप के राज्य में अनुकम्पा के आधार पर नियुक्त कर्मचारी की नौकरी में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर अनुकम्पा नियुक्ति न दिए जाने का नियम न हुआ तो आप को अवश्य ही राहत मिल जाएगी। 
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