Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Judge Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक दीवानी वाद न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

गोद गया भाई परिवार का सदस्य नहीं है।

समस्या-

डाडम चन्द रैदास ने पनमोदी, प्रतापगढ़, राजस्थान समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी पशुपालन विभाग में कार्यरत थे, जिनका सेवाकाल के दौरान ही निधन हो गया। हम तीन भाई हैं, मेरा छोटा भाई जो मेरे चाचा जी के सन्तान नहीं होने से उनके दत्तक पुत्र के रूप में उनके पास ही रह रहा है। जो कि पशुपालन विभाग में ही डॉ. के पद पर कार्यरत है वह हमारे साथ नहीं रहता है।  मेरे पिताजी के देहान्त के दौरान मैंने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया है। लेकिन मुझे यह कह कर मना कर दिया कि आपका भाई पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। क्या मुझे यह अनुकम्पा नियुक्ति मिल सकती है।

समाधान-

दि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी या अर्धसरकारी सेवा में हो तो अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। ऐसा करना नियम विरुद्ध होगा। आप ने कहा है कि आप का भाई चाचा के यहाँ गोद चला गया था। यदि वह गोद चला गया था तो उसे आप के परिवार का सदस्य नहीं माना जा सकता है।

लेकिन उस के गोद जाने के सबूत के रूप में पंजीकृत व वैध गोदनामा होना चाहिए। मुझे लगता है कि आप ऐसा कोई सबूत प्रस्तुत नहीं कर पाए जिस से आप के भाई को गोद चले जाना सिद्ध हो सकता।

यदि आप के पिताजी के देहान्त के पूर्व कोई गोदनामा रजिस्टर हुआ हो तो आप अब उच्च न्यायालय में रिट याचिका कर सकते हैं और गोदनामा के आधार पर भाई को चाचा के परिवार का सदस्य सिद्ध करते हुए अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं।

आप को अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त होना संभव नहीं।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

मनोज राठौर ने उदयपुर, राजस्थान से पूछा है-

मेरे पिता जी चिकित्सा विभाग में एलडीसी पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2004 में मेरे पिताजी की मृत्यु हो गयी जिसके बाद मेरे विवाहित भाई ने मेरे पिताजी की सरकारी नौकरी अनुकम्पा नियुक्ति के तोर पर प्राप्त की। वर्ष 2008 में उसकी पत्नी और  ससुराल वालों के साथ पारिवारिक झगडे के कारण उसने आत्महत्या कर ली। मेरे भाई की मृत्यु के बाद मेरे भाई की सर्विस के कारण मिलने वाला पैसा लगभग 5 लाख रूपया भी भाई की पत्नी ने ले लिया और वर्तमान में विधवा कोटे में अध्यापिका के रूप में सरकारी नोकरी कर रही है। मेरे भाई की एक बच्ची भी है। मेरी भाभी और उसकी बच्ची दोनों मेरे भाई की मृत्यु के बाद उसके पीहर में रह रही हैं। मेरे भाई की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में पोइजन आया है। अब मेरा सवाल ये है की क्या मैं मेरे पिता की, अनुकम्पा नियुक्ति के रूप में मेरे भाई (मृत) द्वारा की गयी सरकारी नोकरी को पा सकता हूँ?

समाधान-

किसी सरकारी कर्मचारी की नौकरी में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर उस के एक परिजन को जो नौकरी प्रदान की जाती है वह अनुकंपा का नियम है। किसी के द्वारा की जाने वाली अनुकंपा कभी भी लाभ प्राप्त करने वाले का अधिकार नहीं होता है। उसे अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता है। किन्तु राज्य ने इस तरह के नियम बनाए हैं और उस नियम के अंतर्गत राज्य सरकार को सही तरीके से काम करना होता  है।

आप के पिता के स्थान पर आप के भाई को अनुकंपा नौकरी दे दी गयी थी। चार वर्ष उस ने नौकरी भी की। वह अनुकंपा तो सरकार कर चुकी है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि वह पीढ़ी दर पीढी दी जाती रहे। इस कारण आप को यह नौकरी प्राप्त होना संभव प्रतीत नहीं होता है।

आप के भाई के पोस्टमार्टम में जहर से मृत्यु होने का तथ्य होने से भी इस पर कोई अन्तर नहीं पड़ेगा।

अनुकंपा नियुक्ति पर कार्य ग्रहण कर लिपिक के पद के लिये उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका दाखिल करें।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

अरविन्द्र कुमार ने वाराणसी, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरे पिता वाराणसी विकास प्राधिकरण में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे, जिनका सेवाकाल के दौरान ही बीमारी की वजह से 24/6/2014 को देहांत हो गया। तत्पश्चात मेरे व्दारा  विभागीय कर्मचारियों की सलाह (मौखिक) के बाद से लिपिक के पद पर मृतक आश्रित के रुप में आवेदन किया गया। लेकिन विगत दो वर्षों तक लगातार टालमटोल विभाग के द्वारा किया जाता रहा,और दिनांक 16/10/2016 को मेरी शैक्षिक योग्यताओं को नजरअंदाज करते हुए चपरासी के पद पर नियुक्ति पत्र का आर्डर जारी कर दिया गया। तमाम अधिकारियों से संपर्क करने के पश्चात भी कोई तार्किक जवाब नहीं दिया जा रहा है और उपेक्षित रवैया अपनाया जा रहा हैं। मैंने अभी तक ज्वाइनिंग नही किया है, मुझे क्या करना चाहिए, कृपया करके मेरी सहायता कीजिए कि मुझे अब क्या करना चाहिए?

समाधान-

पिता के देहान्त के उपरान्त उन के स्थान मिली नौकरी अनुकम्पा है अधिकार नहीं। वह भी तभी दी जा सकती है जब कि विभाग में स्थान रिक्त हो। आप को जानना चाहिए कि क्या विभाग में लिपिक का पद रिक्त है। यदि लिपिक का पद रिक्त है तो विभाग द्वारा आप को लिपिक के रिक्त पद पर नियुक्ति दी जानी चाहिए थी।

लेकिन आज के भीषण बेरोजगारी के युग में कोई भी नौकरी त्यागनी नहीं चाहिए। विशेष रूप से आप की परिस्थितियों में। आज तक सरकारी नौकरी के लिए इंजिनियरिंग पास लोग तक आवेदन देते दिखाई देते हैं। वैसी स्थिति में हमारी सलाह यह है कि आप को तुरन्त प्रस्तावित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी पर ज्वाइनिंग दे देनी चाहिए। नौकरी पर जाने के बाद आप को उच्च न्यायालय के किसी वकील से संपर्क कर रिट याचिका दाखिल करनी चाहिए कि लिपिक का रिक्त पद होते हुए भी जानबूझ कर आप को चतुर्थश्रेणी कर्मचारी की नौकरी दी गयी है। विभाग को आदेश दिया जाए कि वह आप की नियुक्ति लिपिक के

छूट की सीमा से अधिक उम्र होने पर अनुकम्पा नियुक्ति नहीं।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

आशीश नामा ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है

मेरे पिताजी विद्युत विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे जिनका निधन दिसम्बर २०१५ को हुआ उस समय मेरी उम्र 38 वर्ष 5 महीने थी। मैं ने अनुकम्पा नियुक्ति  के तहत विद्युत विभाग में नौकरी पाने के लिए आवेदन किया।  आवेदन के कुछ समय के पश्चात मुझे कहा गया की आपकी उम्र 38 वर्ष  से उपर होने के कारण नियुक्ति नहीं दी जा सकती।  जबकि हमारी जानकारी के अनुसार 40 वर्ष तक के व्यक्ति को नियुक्ति दी जाती है।  में असंजस में हूँ। विभाग द्वारा बार बार मना किया जा रहा है तथा आश्वासन भी दिया जा रहा है कि आपकी नियुक्ति दी जायगी। अगर उसी विभाग में पद की भर्ती निकलेगी। सर में भ्रम की स्थिति में हूँ | मेरा गुजारा भी नही हो रहा है। कृपया हमे मार्गदर्शन कर राज्य सरकार में सेवा प्रदान करने का मौका मिले और में अपनी आजीविका को भी आसानी से चला सकूँ।

समाधान-

प ने बताया नहीं कि किस विद्युत विभाग में नौकरी के लिए आवेदन किया है। ऐसा कोई सरकारी विभाग नहीं है। राजस्थान में बिजली उत्पादन और वितरण की कंपनियाँ हैं, आप ने किस कंपनी में आवेदन किया है?

राजस्थान की बिजली कंपनियों में अनुकम्पा नियुक्ति के लिए राजस्थान सरकार के नियमों को प्रभावी मान रखा है। इन नियमों में किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित उम्र की ऊपरी सीमा  से 5 वर्ष अधिक या 40 वर्ष में से जो भी कम हो है। यह उम्र उस दिन देखी जाएगी जिस दिन आप ने आवेदन किया है।

आप ने किस पद के लिए आवेदन किया है तथा उस की अधिकतम उम्र सीमा क्या है इस से निर्धारित होगा कि आप को नियुक्ति प्राप्त होगी अथवा नहीं।आप अपने आवेदन के तथ्यों को देख कर स्वयं निर्धारित कर सकते हैं कि आप को नौकरी मिलेगी अथवा नहीं।

हमारी राय में आप को देरी करने के स्थान पर जयपुर में उच्च न्यायालय में सेवा मामलों की प्रेक्टिस करने वाले किसी वकील से अपने तमाम दस्तावेज दिखा कर तुरन्त राय करना चाहिए और आगे की कार्यवाही करनी चाहिए।

नोशनल परिलाभ आप को न्यायालय ही दिला सकता है।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

हरीश गुप्ता ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता का स्वर्गवास 1999 में हुआ उस वक्त वह निलंबित थे। मेरे द्वारा 45 दिन के अन्दर निवेदन किया गया था तब विभाग ने कहा आपके पिता निलंबित होने के कारण आपको अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा सकती है। 2015 में राजस्थान उच्च न्यायालय में उन्हें निरंतर सर्विस में माना है।| परिणामस्वरूप विभाग द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति दे दी है, परन्तु अभी से सेवा में माना है। मैं चाहता हूँ कि मुझे 1999 से मेरे निवेदन को मान कर नियुक्ति मानी जाये। क्या ये हो सकता है तथा क्या मुझे नोशनल परिलाभ मिल सकता है?

समाधान-

प का प्रश्न अधूरा और विवरणहीन है। उच्च न्यायालय ने 2015 में उन्हें निरन्तर सेवा में माना है। यह किस प्रकरण में हुआ है? क्या यह आप के पिता के द्वारा संस्थित किसी प्रकरण पर हुआ है? यदि ऐसा है तो उस प्रकरण में तो आप को यह लाभ मिल नहीं सकता था। आप ने उसी प्रकरण के आधार पर पूर्व में प्रस्तुत आप के नियुक्ति आवेदन पर निर्णय लेने को कहा होगा जिस पर विभाग ने आप को अनुकम्पा नियुक्ति दे दी।

राज्य सरकार ने तो उक्त निर्णय के अनुसार आप को नियुक्ति दे दी है। वे अपना दायित्व पूर्ण कर चुके हैं। अब यदि आप नोशनल परिलाभ चाहते हैं तो राज्य सरकार के पास ऐसा कोई नियम नहीं है जिस के अन्तर्गत आप को यह परिलाभ दिए जा सकें।

स के लिए आप को पुनः राज्य सरकार को नोशनल परिलाभ देने के लिए लिखना चाहिए। जैसा की संभावित है यदि राज्य सरकार आप को नोशनल परिलाभ देने से मना करेगी। तब आप न्यायालय की शरण ले सकते हैं। हो सकता है न्यायालय आप को नोशनल परिलाभ देने का आदेश राज्य सरकार को दे दे। यह आप के पिता के संबंध में हुए निर्णय का अध्ययन कर के ही कहा जा सकता है। आप के पिता के प्रकरण को जो वकील साहब उच्च न्यायालय में देख रहे थे आप को उन्हीं से संपर्क कर के इस संबंध में राय करते हुए तुरन्त कार्यवाही करना चाहिए।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन दें, मना करने पर रिट याचिका प्रस्तुत करें।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

गुड्डू कुमार ने रामगढ़ केन्ट, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

दिनांक 02.12.2014 को मेरे पिता एक सड़क दुर्घटना में घायल हुए और दिनांक 04.12.2014 को उन का देहान्त हो गया। वे स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लि. के स्थाई कर्मचारी थे और उन का सेवा काल दो वर्ष शेष था। मैं ने फैक्ट्री में संपर्क किया तो मुझे बताया गया कि कंपनी की इस यूनिट में अनुकम्पा नियुक्ति का नियम नहीं है। सेल की अन्य यूनिटों में अनुकम्पा नियुक्ति दी जाती है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

ह सही है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लि. की अलग अलग इकाइयों में अलग अलग नियम हैं। हो सकता है आप जिस इकाई की बात कर रहे हैं वहाँ इस तरह का कोई नियम नहीं हो। लेकिन सेल की इकाइयों में इस तरह के अलग अलग नियमों के होने पर आपत्तियाँ उठी हैं और एक कमेटी भी बनाई गयी है जिस के द्वारा सेल की सभी इकाइयों में एक समान नियम बनाने पर विचार हुआ है। यह काम कितना आगे बढ़ा है इस की हमें वर्तमान में जानकारी नहीं है।

सी अवस्था में आप को चाहिए कि आप समस्त दस्तावेजों की प्रतियों सहित उस युनिट में जिस में आप के पिता सेवा में थे लिखित आवेदन अनुकम्पा नियुक्ति के लिए दे दें। उस युनिट के ऊपर के अधिकारियों और कम्पनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को भी इस तरह का आवेदन करें। इस से यह होगा कि आप के पार्ट पर आवेदन देने का काम पूरा हो जाएगा। आप की तरफ से कोई कमी नहीं रहेगी। प्रत्येक आवेदन जो आप दें उस की प्रतिलिपि और आवेदन प्रस्तुत करने का सबूत अर्थात प्राप्ति स्वीकृति आदी संभाल कर रखें। स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया सार्वजनिक क्षेत्र का संस्थान है और आप के आवेदन पर अनुकम्पा नियुक्ति देने से इन्कार करने पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की जा सकती है।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पुत्रवधु आश्रित की श्रेणी में नहीं।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

हरिओम सोनी ने कोटा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरे अॉफिस में एक वर्कचार्ज कुली की मृत्यु दिनांक 02.09.2015 को गई।  मृतक के एक मात्र पुत्र था, जिस की भी वर्ष 2012 में मृत्यु हो चुकी है। मृतक कुली की अब मात्र एक वारिस पुत्रवधु ही है।  क्या पुत्र वधु को अनुकंपा नियुकि़त मिल सकती है? यदि हां तो किस नियम के तहत कृपया शीघ् अवगत कराने की कृपा करें।

समाधान-

राजस्थान के अनुकम्पा नियुक्ति नियमों में विधवा पुत्रवधु को आश्रितों में सम्मिलित नहीं माना गया है। इस कारण सामान्य नियमों के अन्तर्गत पुत्र वधु को नियुक्ति मिलना संभव नहीं है। लेकिन यदि परिवार में वह एक मात्र आश्रित है तो उस से आवेदन प्रस्तुत करवाया जा सकता है। यह आवेेदन सामान्य नियमों में निरस्त किए जाने योग्य है। इस कारण से इसे नियम 13 के अन्तर्गत राय प्राप्त करने के लिए विभाग द्वारा राज्यसरकार को भेजा जा सकता है। फिर भी अधिक संभावना है कि यह निरस्त ही होगा।

लेकिन इस मामले में एक मात्र आश्रित होने के कारण इस मामले में आवेदन निरस्त होने पर आवेदन निरस्त होने के आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की जा सकती है और न्यायालय उसे स्वीकार करते हुए उसे नियुक्ति देने का आदेश दे भी सकता है और नहीं भी दे सकता है। लेकिन इस मामले में पुत्र वधु को इस तथ्य के मजबूत सबूत देने होंगे कि वह पूरी तरह मृतक कर्मचारी की आश्रिता थी। हमारी राय में उस महिला को आवेदन तुरन्त प्रस्तुत कर देना चाहिए। आगे की कार्यवाही को आगे की परिस्थितियों पर छोड़ देना चाहिए।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए कर्मचारी की मृत्यु के दिन कोई आश्रित सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

उमा शंकेर जायसवाल ने जयपुर, राजस्थान से की समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी की मृत्यु दिनांक 06.06.2007 को एक सड़क दुर्घटना में हो गयी है। मैं ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया और मुझे 2008 में राजस्थान के शिक्षा विभाग में नियुक्ति मिल गयी। इस बीच मेरे छोटे भाई को भी सरकारी विभाग में नौकरी मिल गयी। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या मैं अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए अर्हता रखता था।

समाधान

राजस्थान में अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों का प्रासंगिक नियम निम्न प्रकार है-

Government service subject to the condition that employment under these rules shall not be admissible in cases where the spouse or at least one of the sons, unmarried daughters, adopted son/adopted unmarried daughter of the deceased Government servant is already employed on regular basis under the central / any State Government or Statutory Board, Organisation/Corporation owned or controlled wholly or partially by the Central/ any State Government at the time of death of the Government servant.

न नियमों में स्पष्ट है कि जिस दिन सरकारी कर्मचारी का देहान्त हुआ है उस दिन पुत्रों, अविवाहित पुत्रियों, दत्तक पुत्र/पुत्री में से कोई एक भी स्थाई आधार पर राज्य या केन्द्र के सरकारी विभाग, विधिक निकाय, संगठन, निगम में नियुक्त नहीं होना चाहिए। आप के भाई को जो नौकरी प्राप्त हुई है वह आप के पिता जी की मृत्यु के उपरान्त प्राप्त हुई है इस कारण से आप अनुकम्पा नियुक्ति के लिए अर्हता रखते थे। आप को नियक्त किया जाना नियमों के अनुकूल है।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए विवाहित बहिन की अनापत्ति आवश्यक नहीं।

Compassionate Appointmentसमस्या-

आकाशदीप ने बिजनौर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी माताजी शिक्षा विभाग में कार्यरत थीं। उनका स्वर्गवास दिंनाक 14 अक्टूबर 2012 को हो गया था। हम दो भाई-बहन हैं। बहन छोटी है तथा विवाहित है। मेरा बहनोई व उसका परिवार लालची किस्म के हैं। मेरे बहनोई ने मेरी माताजी को डरा धमकाकर अपने पक्ष में कर लिया था तथा हम से सम्बन्ध विच्छेद करा दिया था।

हमारी माताजी हम से अलग बिजनौर में मकान खरीद कर रहने लगी तथा मेरी बहन व बहनोई भी जबरदस्ती उनके साथ रहने लगे। मेरी माताजी से जबरदस्ती पी.एफ. में भी मेरी बहन को नोमिनी करा लिया तथा वह मकान भी अपने नाम लिखवा लिया। उस के बाद उन्होनें एक वसीयत अपने पक्ष में लिखवा कर रजिस्टर्ड करा ली। उस वसीयत में यह भी उल्लेख नहीं है कि मेरी बहन विवाहित है। वसीयत के बाद मेरी माताजी को घर से निकाल दिया। मेरी माताजी उनसे अलग होकर वहीं पडोस में किराये पर रहने लगी। मेरी माताजी के स्वर्गवास बाद उनका सारा सामान एवं सारे कागजात उन्होने अपने कब्जे में कर लिये तथा हमसे मना कर दिया कि उनके पास कुछ भी नहीं हैं।

उनकी मृत्यु के बाद इसकी सूचना मैं ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में दी तथा अनुकम्पा नियुक्ति के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया। मेरा वारिसान प्रमाण पत्र जिलाधिकारी बिजनौर द्वारा निर्गत किया जा चुका है। महोदय अभी तक पी.एफ. का पैसा भी नहीं निकला है और न ही मेरी नियुक्ति हुई है। क्या विवाहित पुत्री उत्तराधिकारी बन सकती है? मेरी बहन व बहनोई नौकरी एवं पैसा दोनों लेना चाहते हैं। क्या विवाहित पुत्री को अनुकम्पा में नियुक्ति मिल सकती है? क्या मुझे नौकरी पाने के लिए मेरी बहन की अनापत्ति की आवश्यकता पडेगी। मैं बडी मुसीबत में हूँ। नियुक्ति ना मिलने की दशा में मुझे क्या करना चाहिए। मैं क्या करूं?

समाधान-

प ने यह उल्लेख नहीं किया है कि माताजी की वसीयत में क्या लिखा है। अर्थात उन्हों ने वसीयत के माध्यम से अपनी किस किस संपत्ति के लिए किस किस को अपना वसीयती घोषित किया है।

हाँ तक पीएफ का प्रश्न है तो उस पर सभी उत्तराधिकारियों का उन के हिस्से के समान हक है। यदि वसीयत में पी.एफ. का किसी को अधिकारी घोषित नहीं किया गया है तो पीएफ सभी उत्तराधिकारियों को प्राप्त होगा। नोमिनी केवल उसे प्राप्त करने की अधिकारी है लेकिन प्राप्त राशि को उत्तराधिकार विधि के अनुसार उत्तराधिकारियो में वितरित करने की उस की ड्यूटी है। आप को पी.एफ. व अन्य सभी संपत्तियों व धरोहरों के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जिला न्यायालय से प्राप्त कर विभागों को प्रस्तुत करना चाहिए जिस से आप को अपना हिस्सा प्राप्त हो सके।

त्तर प्रदेश के अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों में क्या प्रावधान हैं जो आप की माताजी के विभाग पर प्रभावी हैं उन की जानकारी हमें नहीं मिल रही है। फिर भी सामान्य रूप से विवाहित पुत्री जिस का पति जीवित हो उसे अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। उस की अनापत्ति की भी कोई आवश्यकता नहीं है। क्यों कि वह अपने पति के परिवार की सदस्या है न कि आप की माताजी के परिवार की सदस्य है।

दि किसी प्रकार से विभाग आप को अनुकम्पा नियुक्ति देने से इन्कार करता है तो आप को तुरन्त नियुक्ति से इनकार करने वाले आदेश के विरुद्ध रिट याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए तथा अन्य व्यक्ति को नियुक्ति देने से रोकने का स्थगन आदेश प्राप्त कर लेना चाहिए। हमारी राय में आप अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्र हैं और आप की बहिन से आप को अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि विभाग आप से इस तरह की अपेक्षा करता है और कोई पत्र जारी करता है तो आप उस पत्र के विरुद्ध भी रिट याचिका कर सकते हैं। इस मामले में आप को आप के उच्च न्यायालय में प्रेक्टिस कर रहे सेवा मामलों के वकील से राय करनी चाहिए।

पुत्री या दत्तक पुत्री ही आश्रित हो सकती है, पति की पूर्व पत्नी की पुत्री नहीं।

courtroomसमस्या-

बबिता वाधवानी ने मानसरोवर, जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरी माताजी का देहान्‍त 26 जनवरी 2013 में हो गया था । मेरे पिता ने दो शादियाँ की थी। पहली की मृत्‍यु हो जाने पर दूसरा विवाह हुआ था।  मेरे पिता की म़त्‍यु हो जाने पर मेरी माता को उनके स्‍थान पर अनुकम्‍पा नौकरी मिली थी। उनकी मौत पर हमें अनुकम्‍पा नौकरी फार्म भरना था जिसे मेरी बड़ी बहन ने भर दिया जो पूर्व पत्‍नी की संतान हैं। हालाँकि वो पिछले 15 सालों से एक ही कम्‍पनी में काम कर रही है। उस ने हमेशा यही कहा कि मुझे 3000 रू ही तनख्‍वाह मिलती है, वो भी समय से नहीं मिलती। अभी वर्तमान में पता चला है वो अचल सम्‍पति भी रखती है और उसकी तनख्‍वाह पूरे तौर पर तो नहीं पता पर अन्‍दाजा ही लगाया जा सकता है कि 10000 रू से ज्‍यादा ही होगी। घर वालों के दबाव में मुझे उस धोषणा पत्र पर हस्‍ताक्षर करने पडे जिस में उन्‍होने दर्शाया कि वो नौकरी नहीं करती व टयूशन से 2500 ही कमाती है अत उन्‍हे नौकरी दी जाये। उनका फार्म आफिस से रिजेक्‍ट हो गया और बीएसएनएल से मुझे फार्म भरने को कहा गया। मैंने फार्म भर दिया व सभी दस्‍तावेज लगा दिये। पर मुझे अपनी इस बहन का अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा करवाने को कहा गया जो बहन ने देने से मना कर दिया है। मम्‍मी की पेन्‍शन मेरे नाम से बनी है। उस फार्म के साथ पेन्‍शन के कागज भी लगते है जो मैंने लगा दिये हैं। क्‍या आप बता सकते हैं कि बहन के अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना मैं अनुकम्‍पा नौकरी प्राप्‍त कर सकती हूँ। बहन ने बीएसएनएल पर मुकदमा कर दिया है कि मुझे नौकरी दी जाये। व मेरे भाई जिसको मम्‍मी अन्‍य सभी लाभों के लिए नामिनी कर गयी है उसमें से भी हिस्‍सा चाहती है। मैं अपनी बहन का झूठ साबित नहीं कर सकती क्‍योंकि मेरे पास ऐसा कोई सबूत नहीं, दूसरा मेरे घर के दूसरे बडे लोग ये सोचते है‍ कि मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ तो मिलने वाले लाभ को सामाजिक कार्यो में लगा दूंगी। वे किसी प्रकार का सहयोग करने को तैयार नहीं। पेन्‍शन प्राप्‍त करने के लिए भी मुझे राज्‍य महिला आयोग की मदद लेनी पडी थी क्‍योंकि उसमें भी बडी बहन ने अनापत्ति प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया था । मेरी उम्र 41 साल हो चुकी है। प्राइवेट सेक्‍टर में मैंने काम किया लेकिन कभी भी किसी आफिस में 2 से 3 महीने से ज्‍यादा नहीं टिक पायी। मुझे अपनी बेटी की उच्‍च शिक्षा के लिए इस नौकरी की जरूरत है।

समाधान-

बिता जी¡ आप ने यह नहीं बताया कि बड़ी बहिन का आवेदन क्यों निरस्त किया गया है? बीएसएनएल ने उन का आवेदन निरस्त करने का कारण जरूर प्रदर्शित किया होगा। हो सकता है आप को यह पता नहीं हो पर आप को यह पता करना चाहिए।

में लगता है कि आप की बहिन का आवेदन इस कारण निरस्त हुआ है क्यों कि वह नियमानुसार आप की माता की आश्रित नहीं मानी जा सकती क्यों कि वह उन की पुत्री नहीं बल्कि आप के पिता की पहली पत्नी की पुत्री है, उसे आप की माता जी की दत्तक पुत्री भी नहीं कहा जा सकता क्यों कि दत्तक ग्रहण के लिए प्रक्रिया आवश्यक है वह नहीं हुई है। नियम यह है कि केवल पुत्री या दत्तक पुत्री ही आश्रित हो सकती है। इस नियम के कारण आप की बहिन इस नियुक्ति के योग्य नहीं है। आप इस के लिए सर्वथा योग्य हैं।

प की बहिन ने मुकदमा कर दिया है उस मुकदमे में आप भी आवश्यक पक्षकार हो गई हैं यदि नहीं हैं तो आप पक्षकार बनें और मुकदमे में अपना प्रतिवाद प्रस्तुत करें। अपने अधिकार के लिए लड़ना बुरी बात नहीं। आप बीएसएनएल को भी कह सकती हैं कि आप की बहिन आप की माता की नियमानुसार आश्रित नहीं है इस कारण आप की नियुक्ति के लिए उन की अनापत्ति की किसी तरह की कोई आवश्यकता नहीं है। बीएसएनएल को आप के तर्क को स्वीकार कर के आप को नियुक्ति दे देना चाहिए।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada