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खराब स्टाम्प्स का क्या करें?

Sale Deedसमस्या-

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश से यज्ञदत्त त्यागी ने पूछा है-

जिस व्यक्ति के द्वारा हमको सम्पत्ति की रजिस्ट्री करानी थी उस ने सम्पत्ति केविवरण छपे हुये दोनो पक्षों के हस्ताक्षर करे हुयेस्टाम्प पेपरों को हम सेलेकर के स्टाम्प पेपरों पर छल से जहां-जहां हस्ताक्षर हो रहे थे वहां-वहां पर स्टाम्प पेपरों पर फ्ल्यूड लगा कर 20 लाख केस्टाम्प पेपर खराब कर अपठनीय कर दिये। इस में कौन कौन सी धाराएँ लगेंगी औरहम को क्या करना चाहिये।

समाधान-

ब से पहले तो आप को उन स्टाम्प पेपर्स को अपने कब्जे में ले कर ट्रेजरी में आवेदन दे कर वापस करने का प्रयास करना चाहिए। इस तरह वापस किए गए स्टाम्प पेपर्स की कीमत का एक बड़ा हिस्सा आप को वापस प्राप्त हो जाएगा और आप को जो क्षति हो चुकी है वह कम हो सकती है। इस मामले में जिस व्यक्ति से आप ने स्टाम्प पेपर्स खरीदे हैं वह आप की मदद कर सकता है।

दि रजिस्ट्री करवाने वाले व्यक्ति ने उक्त स्टाम्प पेपरों को जानबूझ कर किसी गलत इरादे से खऱाब किया है तो यह छल है और यह छल उस व्यक्ति द्वारा किया गया है जिस पर आपके हितों को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी। इस तरह के मामला धारा 418 आईपीसी के अन्तर्गत अपराध है। आप इस मामले की पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं, यदि पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर कार्यवाही करने से इन्कार कर दे तो आप न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर उसे पुलिस थाना अन्वेषण हेतु भिजवा सकते हैं या फिर स्वयं ही न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत कर न्यायालय को प्रसंज्ञान लेने के लिए निवेदन कर सकते हैं।

स के अतिरिक्त आप को जो हानि हुई है उस की क्षतिपूर्ति के लिए उस व्यक्ति के विरुद्ध दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं तथा उस से क्षतिपूर्ति प्राप्त कर सकते हैं।

क्षति की संभावना के ठोस आधार हों तो निर्माण रुकवाने की कार्यवाही की जा सकती है।

basement constructionसमस्या-
राजेश अरोरा ने फरीदाबाद, हरियाणा से पूछा है-

मेरे घर के पास वाले भूखंड पर बेसमेंट में शॉपिंग काम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। मुझे अपने घर के गिरने का डर है। मैं जब भी बेसमेंट बनवाने वालों से कहता हूँ तो वे कहते हैं कि कुछ नहीं होगा। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प का डर केवल संभावना पर टिका है जो हो भी सकती है और नहीं भी हो सकती है। किसी भी घटना की केवल संभावना होने पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकती। लेकिन आप की संभावना ठोस हो तो कार्यवाही की जा सकती है।

वैसे वे लोग अपने प्लाट पर काम कर रहे हैं, जिस की उन्हों ने नगर निगम से अनुमति प्राप्त की होगी। यदि उन के पास अनुमति है तो वे अपना काम कर सकते हैं। आप उन्हें नहीं रोक सकते। लेकिन उन का कर्तव्य है कि यदि वे अपने भूखंड पर काम करते हैं तो पड़ौसियों की संपत्ति को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचे।

दि वे लापरवाही करते हैं, या उन के कार्य से आप को नुकसान होता है तो यह उन का दुष्कृत्य (Tort) होगा। तथा ऐसे दुष्कृत्य से हुई हानि की भरपाई करने की जिम्मेदारी उन की होगी। नुकसान होने पर उस नुकसानी की भऱपाई करने के लिए आप उनके विरुद्ध दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। यदि आप को नुकसान होने की संभावना के लिए कोई ठोस आधार हों तो आप इन ठोस आधारों के साथ नुकसान होने की संभावना के आधार पर स्थाई निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर उन के निर्माण को भी रुकवा सकते हैं। लेकिन यदि ठोस आधार न हुए तो आप जो कार्यवाही करेंगे वह निष्फल हो जाएगी।

भैंस का बीमा होने पर जिस की गलती से भैंस की मृत्यु हुई है वह क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी है।

समस्या-bufallow killed by electrocutiion
युनुस अंसारी ने सारंगपुर, मध्यप्रदेश से पूछा है-

क भैंस विद्युत करंट लगने की वजह से मौके पर मर गई है। पुलिस ने पंचनामा बनाया है तथा पशु चिकित्‍सक द्वारा पोस्ट मार्टम कर लिया गया है। अब भैंस के पालक मालिक को क्षतिपूर्ति हेतु क्‍या कार्यवाही करना चाहिए?  तथा आर्थिक सहायता के लिए कहां अर्जी लगाना होगी?

समाधान-

दि भैंस बीमित है तो बीमा कंपनी को दुर्घटना की सूचना देते हुए अपना क्षतिपूर्ति दावा बीमा कंपनी के दावा फार्म में प्रस्तुत करना चाहिए। बीमा कंपनी अपना अन्वेषक नियुक्त कर अन्वेषण कराएगी और फिर उस के हिसाब से क्षतिपूर्ति निर्धारित करेगी।

दि भैंस का कोई बीमा नहीं है तो उस की मृत्यु बिजली विभाग की गलती से या फिर किसी व्यक्ति की गलती से हुई है। वैसी स्थिति में दुष्कृत्य के आधार पर क्षतिपूर्ति का दावा दीवानी अदालत में करना होगा। इस के लिए भैंस मालिक को बिजली कंपनी को या जिस की गलती से करंट लगा है उसे क्षतिपूर्ति का नोटिस देना चाहिए और नोटिस अवधि की समाप्ति के बाद दीवानी न्यायालय में क्षतिपूर्ति हेतु वाद प्रस्तुत करना चाहिए।

ट्रांसपोर्टेशन में हुई क्षति की मांग के लिए नोटिस . . .

Laxmi-travels-Servicesसमस्या-
नागपुर, महाराष्ट्र  से शंकर व्यास ने पूछा है –

मैंने एक टेलीविज़न सेट इंदौर से नागपुर भेजने के लिए एक ट्रेवल्स से पार्सल बुक किया।  नागपुर तक आते आते टी.वी. पूरी तरह से फूट चुका है और ट्रेवल्स वाला मुझे हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए तैयार नहीं है।  मैं उसके खिलाफ उपभोक्ता न्यायालय जाने के लिए सोच रहा हूँ,  लेकिन उस से पहले मैं उसे एक नोटिस देना चाहता हूँ।   मुझे मदद चाहिए कि उस नोटिस का प्रारूप कैसा होना चाहिए?

समाधान-

स मामले में पहले आप को देखना चाहिए कि आप के ट्रेवल्स वाले ने पार्सल बुक करते समय जो रसीद दी थी उस पर क्या शर्तें अंकित की हुई थीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि उस ने टूट-फूट की जिम्मेदारी से मुक्त होने की कोई शर्त उस पर अंकित कर रखी हो। यदि उस रसीद पर ऐसी कोई शर्त नहीं थी तो आप को जो भी हानि हुई उस की भरपाई करने की जिम्मेदारी ट्रेवल्स वाले की है। आप उसे नोटिस दे सकते हैं।

नोटिस एक साधारण पत्र की तरह हो सकता है जिस में आप लिख सकते हैं कि आप ने एक टीवी नागपुर भेजने के लिए उस के यहाँ बुक कराया था जिसे सही सलामत नागपुर पहुँचाने की जिम्मेदारी उस की थी। लेकिन उस ने लापरवाही से यह काम किया जिस के कारण टीवी टूट-फूट गया जिस से आप को रु……….. की हानि हुई है जिसे उस से प्राप्त करने के आप अधिकारी हैं। वह यह पत्र मिलने के 15 दिनों में आप को क्षतिपूर्ति की राशि अदा कर दे अन्यथा आप 12 प्रतिशत ब्याज सहित यह राशि वसूल करने के लिए सक्षम न्यायालय में कार्यवाही संस्थित करेंगे।

प्रारूप इस तरह होगा-

नागपुर, दिनांक- ……………………

प्रति

मेसर्स ……………..

………………………..

…………………………….

विषय – क्षतिपूर्ति अदा करने हेतु

महोदय,

मैं ने आप की ट्रेवल्स से एक टीवी इन्दौर से नागपुर भेजे जाने के लिए दिनांक …………… को बुक कराया था। बुकिंग रसीद सं. ……………. दिनांक ……………….. है। दिनांक ………………. को जब मैने टीवी को नागपुर में प्राप्त करना चाहा तो वह पूरी तरह से टूट फूट चुका है। इस तरह आप ने अपने काम में घोर लापरवाही की है जिस से मुझे हुए नुकसान की भरपाई करने की जिम्मेदारी आप की है। इस टीवी के टूट-फूट जाने से मुझे रु. ………………. की हानि हुई है। मैं ने आप से मुझे हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए कहा तो आप ने मना कर दिया और अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया।

इस पत्र के द्वारा मैं आप से मांग करता हूँ कि आप टीवी को हुए नुकसान की भरपाई के लिए रु. ……………….. मात्र तथा आप के व्यवहार के लिए व टीवी का उपयोग न कर पाने के मानसिक संताप व परेशानी के लिए रुपए 5000.00  मात्र कुल रुपया  ……………. मात्र इस नोटिस की प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर मुझे अदा कर के रसीद प्राप्त कर लें अन्यथा मैं उक्त राशि को प्राप्त करने के लिए आप के विरुद्ध सक्षम न्यायालय अथवा मंच के समक्ष विधिक कार्यवाही संस्थित करने को बाध्य हो जाउंगा जिस के हर्जे खर्चों के लिए भी आप जिम्मेदार होंगे।

भवदीय

शंकर व्यास, नागपुर, महाराष्ट्र  

 

बैंक सेवा में कमी या त्रुटि एक उपभोक्ता मामला है . . .

SBIसमस्या-
बारसी, जिला शोलापुर, महाराष्ट्र से रमण कारंजकर ने पूछा है-

मेरी कपडे की दुकान है। मैंने जिस पार्टी से माल उधार लिया था, उसे पेमेन्ट के रुप में बैंक का चेक दिया था। बैंक ने मेरा सीसी खाता रिन्युअल नहीं किया इस गलती की वजह से वह चेक बाऊंस हो गया है। मैंने बैंक हेड ऑफिस पूना में शिकायत की तो बैंक मैनेजर ने अपनी गलती मान ली। शिकायत में मैंने शारीरिक, मानसिक नुकसान एवं बेइज्जती के लिए क्षतिपूर्ति की माँग की है। उस में क्षितपूर्ति की राशि नहीं बतायी है। अब बैंक मैनेजर बार बार मेरी दुकान पर चक्कर काटकर मामला रफा दफा करने की विनती कर रहा है और मेरी मांग पूछ रहा है। मैं उनसे कितनी रकम मांग सकता हूँ?  कृपया बतायें और अगर मुझे बैंक के खिलाफ केस दायर कर के क्षतिपूर्ति वसूल करनी हो तो मैं ज्यादा से ज्यादा कितनी रकम की मांग कर सकता हूँ। मेरा यह केस अदालत में किया जा सकता है या कंज्युमर फोरम में?

समाधान –

प बैंक के ग्राहक हैं, उपभोक्ता हैं इस कारण से आप के बैंक द्वारा जो गलती की है वह सेवा में त्रुटि/कमी है। आप का यह मामला उपभोक्ता मंच के दायरे में आता है। आप अपनी क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता मंच के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं।

हाँ तक सेवा में कमी के कारण क्षतिपूर्ति की राशि का मामला है कोई भी न्यायालय वही क्षति आप को दिला सकता है जो कि आप को वास्तविक रूप में हुई है। आप को बैंक की इस गलती के कारण जो भी क्षतियाँ हुई हैं। मसलन आने-जाने, भाग-दौड़ में हुआ खर्च, आप को जो नुकसान या ब्याज पार्टी को देना पड़ा हो। आप के धन्धे पर जो आर्थिक असर पड़ा हो और उस से जो नुकसान हुआ हो। और मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए जो भी नुकसान आप उचित समझते हों उस का आकलन तो सिर्फ आप ही कर सकते हैं। यह आकलन बहुत अधिक या बहुत कम नहीं होना चाहिए। कोई भी निष्पक्ष व्यक्ति यह समझ सके कि इतना पैसा मिलने से आप को नुकसान की भरपाई हो सकती है उतनी ही क्षतिपूर्ति आप को मिल सकेगी।

बैंक का मैनेजर इस मामले को आपस में निपटाने को इसलिए कह रहा है कि जब आप बैंक के विरुद्ध क्षतिपूर्ति का दावा करेंगे तो जो न्यायालय आप को दिलाएगा उस राशि को बैंक उसी कर्मचारी से वसूल कर सकता है और उसे इस गलती के लिए दंडित भी कर सकता है। इस तरह वह बैंक कर्मचारी उतनी राशि आप को आपसी निपटारे में दे सकता है जितना उसे नुकसान हो रहा हो। मेरा भी यह मानना है कि आप को आप की संतुष्टि की राशि मिल जाए तो उस कर्मचारी से आपस में बैठ कर निपटारा कर लेना चाहिए। क्यों कि उपभोक्ता न्यायालय से भी आप को क्षतिपूर्ति प्राप्त करने में कम से कम दो-चार वर्ष तो लग ही जाएंगे।

फिसल कर बाइक का स्लिप होना बाइक चालक की खुद की गलती है . . .

motor accidentसमस्या-

आगरा उत्तर प्रदेश से वरुण गुप्ता ने पूछा है –

मेरा भाई कुछ दिन पहले रोडं पर जा रहा था कि अचानक उस की बाइक स्लिप हो गयी और वह रोड़ के रोंग साइड में बाइक के साथ गिर पड़ा।  उसी साइड से एक लड़की अपनी बाइक से तेज गति से बिना हेलमट के आ रही थी, वह ब्रेक नहीं लगा सकी और गिरे हुए लड़के से टकरा कर गिर गयी लेकिन उसके ज़्यादा चोट आई थी। पुलिस दोनों को उठा कर थाने ले आई। तब मेरे भाई ने घर फोन किया और मैं और मेरे घर वाले थाने पहुँच गये। वहाँ पुलिस लड़की की तरफ दा पोलाइट थे और मेरे भाई के लिए ज़्यादा एग्रेसिव थे। जब कि गलती लड़की की थी। हम ने लड़की को हॉस्पिटल ले जा कर अपनी तरफ से इलाज कराया। जिस में हमारे 7000 रुपये खर्च हो गये। कुछ देर बाद मेरे भाई को पसलियों मे दर्द उठा और हम ने भाई को भी हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। भाई की बाइक और हमारी आई.डी. पुलिस थाने में जमा करा ली गयी। फिर अगले दिन लड़की के घर वालों का फोन आया और वो हम से लड़की की बाइक की कीमत के बराबर पैसा मांगने लगे। लेकिन हम ने  मना कर दिया। क्यूँकि हमारा भी बराबर का ही नुकसान हुआ था। इस के अलावा हम ने लड़की के लिए खर्च किया। तब लड़की के घर वालों ने मेरे भाई के खिलाफ थाने में रिपोर्ट कर दी और कोर्ट में मुक़दमा कर दिया। हमें क्या करना चाहिए? क्या मेरे भाई को सज़ा होगी?

समाधान –

प ने दुर्घटना का पूरा विवरण नहीं दिया है। फिर भी जो विवरण दिया गया है उस से लगता है कि या तो यह एक संयोगवश घटी घटना है या फिर आप के भाई की गलती है। एक लड़की अपने मार्ग पर अपनी गति से चली आ रही थी। अचानक उस के सामने एक मोटर सायकिल स्लिप हो कर गिर गई। वह चाह कर भी अपनी बाइक को रोक नहीं सकती थी। आप के भाई की मोटरसाइकिल किस कारण से स्लिप हुई है यह पता नहीं है। यदि वहाँ कोई भौतिक कारण नहीं हुआ तो यही माना जाएगा कि आप के भाई मोटरसाइकिल लापरवाही से चला रहे थे।

पुलिस वालों की लड़की से सहानुभूति होना अस्वाभाविक नहीं है। क्यों कि आप के भाई की गलती स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्हों ने रिपोर्ट भी तब तक नहीं लिखी जब तक कि लड़की ने खुद रिपोर्ट नहीं लिखा दी। अब फौजदारी मुकदमा तो आप के भाई के विरुद्ध चलेगा। उन्हें सजा होगी या नहीं होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अभियोजन के साक्षियों की साक्ष्य से दुर्घटना में आप के भाई की लापरवाही साबित होती है या नहीं। आप के भाई को अपने बचाव के लिए अच्छा वकील करना चाहिए।

ह लड़की अभी आप के विरुद्ध मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरण में भी हर्जाने का दावा कर सकती है। यदि आप के भाई के पास वैध एवं प्रभावी ड्राइविंग लायसेंस था और बीमा कराया हुआ था तो आप के भाई को दुर्घटना से हर्जाने के दावे के बारे में बीमा कंपनी को सूचित करना चाहिए। बीमा कंपनी मुकदमा लड़ेगी और हर्जाना भी बीमा कंपनी ही अदा करेगी। लेकिन यदि आप के भाई के पास वैध एवं प्रभावी ड्राइविंग लायसेंस न हुआ या बीमा कराया हुआ नहीं था तो हर्जाने के दावे में अदालत जो भी हर्जाना लड़की को दिलाएगी वह आप के भाई को देना होगा। यदि ऐसा है तो आप ने लड़की के इलाज में जो खर्चा किया है उस के बिल आदि आप के पास होने चाहिए। वह खर्च उस में से कम हो जाएगा।

घर तक पहुँचने का मार्ग सुखाधिकार है जिस में बाधा डालने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा प्राप्त की जा सकती है

Farm & house
समस्या-

ग्राम चिव्ताहिन, उत्तर प्रदेश से मोहम्मद फरहान अहमद ने पूछा है-

मेरा घर ग्राम की मुख्य सड़क से थोड़ी दूरी पर स्थित है, घर तक जाने के लिए अलग अलग पड़ौसियों के कब्जे की ज़मीनों से हो कर जाना पड़ता है।  पड़ौसी बार बार अवरोध उत्पन्न करते हैं  ऐसी स्थिति में मैं अपना घर तो छोड़ नहीं सकता और आने जाने के लिए रोज़ रोज़ कहा सुनी और मारपीट भी नहीं की जा सकती। मैं ये जानना चाहता हूँ कि ऐसी स्थिति होने पर कानून क्या मार्ग बताता है?

समाधान-

प के प्रश्न से स्थिति स्पष्ट नहीं है। आप का घर आबादी भूमि में है या कृषि भूमि में है? फिर जो कब्जे की जमीनें हैं जिन पर से हो कर घर आने जाने में आप को गुजरना पड़ता है वे कृषि भूमि है या फिर आबादी की भूमि है? आप का घर कब से स्थित है और कब से आप उस रास्ते से आ जा रहे हैं? यदि ये तथ्य भी होते तो आप का प्रश्न अधिक स्पष्ट होता।

दि आप के उक्त मकान में आने जाने का और कोई मार्ग नहीं है तो जिस मार्ग से आप अपने मकान के लाभकारी उपयोग के लिए निरन्तर आ जा रहे हैं, वह चाहे किसी भी व्यक्ति की भूमि में से क्यों न गुजरता हो, उस मार्ग से आने जाने का आप को सुखाधिकार प्राप्त है। कोई भी व्यक्ति जो उन भूमियों का स्वामी है आप के आने जाने के सुखाधिकार में किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। यदि आप को आशंका है तो आप विशिष्ठ अनुतोष अधिनियम की धारा 52 से 54 तथा सुखाधिकार अधिनियम की धारा 35 के अन्तर्गत दीवानी वाद प्रस्तुत कर ऐसी बाधा उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध निषेधाज्ञा की डिक्री प्राप्त कर सकते हैं। इसी वाद में आप अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर वाद के चलने तक आप को अपने घर आने जाने के मार्ग को अवरुद्ध न करने संबंधी अस्थाई निषेधाज्ञा भी प्राप्त कर सकते हैं।

दि किसी ने आप का मार्ग अवरुद्ध किया है और उस से आप को परेशानी, आर्थिक नुकसान और मानसिक संताप हुआ है तो आप सुखाधिकार अधिनियम की धारा 33 के अन्तर्गत इन के लिए क्षतिपूर्ति की मांग कर सकते हैं और उसे प्राप्त करने के लिए वाद प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि दोनों कारण उपलब्ध हों तो आप निषेधाज्ञा तथा क्षतिपूर्ति के लिए एक ही संयुक्त दीवानी वाद भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

मिथ्या अपमानजनक कथन के लिए अपराधिक व मुआवजे के लिए दीवानी मुकदमा किया जा सकता है।

Desertedसमस्या-

दिल्ली से विनय पाण्डे ने पूछा है –

मेरे चाचा की लड़की की शादी होने वाली थी और मेरे एक रिश्तेदार ने लड़के से जा कर कहा कि लड़की ने पहले ही किसी के साथ कोर्ट मैरिज कर रखी है। इस से मेरे चाचा की लड़की की शादी नहीं हो सकी रिश्ता टूट गया। जब कि ऐसा कुछ भी नहीं था। क्या मैं इस के लिए उस रिश्तेदार पर मानहानि का दावा कर सकता हूँ जिस ने ये झूठी बात फैलाई थी?

समाधान-

दि आप यह प्रमाणित कर सकते हैं कि जिस रिश्तेदार के खिलाफ आप मुकदमा करना चाहते हैं उसी रिश्तेदार ने स्वयं यह बात किसी व्यक्ति से कही थी और उस व्यक्ति ने यह बात आप के चाचा की लड़की के होने वाले ससुराल तक यह बात पहुँचाई है तो आप निस्संकोच मानहानि के लिए अपराधिक व मुआवजे के लिए दीवानी न्यायालयों में कार्यवाही कर सकते हैं। इस बात को प्रमाणित करने के लिए आप को ऐसे व्यक्ति की गवाही करानी होगी जिस के सामने यह बात उस रिश्तेदार ने किसी व्यक्ति को कही हो और फिर जिसे यह बात कही हो और फिर यह बात किसी तरह आप के चाचा की लड़की के होने वाले ससुराल पहुँची हो। आप जिस पर आरोप लगा रहे हैं उस से बात के कहने से ले कर चाचा की लड़की के होने वाले ससुराल तक पहुँचने की हर कड़ी को आप को गवाहियों से साबित करना होगा।

मारी राय है कि यदि आप इन सारी कड़ियों को प्रमाणित करने में सक्षम हों तो एक विधिक नोटिस उस व्यक्ति को किसी वकील के माध्यम से भिजवाएँ जिस में यह संदेश दें कि उस व्यक्ति के द्वारा मिथ्या और अपमानजनक बात कहने और वह चाचा की लड़की के होने वाले ससुराल पहुँचा देने से न केवल लड़की, अपितु उस के सारे परिवार का घोर अपमान हुआ है और समाज में प्रतिष्ठा को आघात पहुँचा है और रिश्ता टूट गया है। वे उस लड़की और आप के चाचा को अमुक राशि मुआवजा के बतौर दें, साथ ही इस कृत्य के लिए न केवल सार्वजनिक रूप से अपनी गलती को स्वीकार करें अपितु सार्वजनिक रूप से क्षमा भी मांगें, अन्यथा उस के विरुद्ध दंड दिलाने हेतु अपराधिक और दुष्कृत्य विधि में मुआवजा प्राप्त करने के लिए दीवानी मुकदमा चलाया जाएगा।  यह विधिक नोटिस देने के बाद नोटिस की अवधि व्यतीत हो जाने पर आप अपराधिक व दीवानी मुकदमा चला सकते हैं। ध्यान रखें कि दोनों मामलों में समयावधि निश्चित है अवधि समाप्त हो जाने के बाद आप दोनों ही कार्यवाही नहीं कर सकेंगे। अपराधिक मामलों में यह अवधि अपराध घटित होने तीन वर्ष तक की है वहीं दीवानी मामलों में यह अवधि एक वर्ष तक की ही है।

फर्जी चैक अनादरण का अभियोजन निरस्त होने पर क्षतिपूर्ति के लिए दुर्भावनापूर्ण अभियोजन का वाद प्रस्तुत करें।

malicious procecutionसमस्या-

उज्जैन, मध्यप्रदेश से मिलन गुप्ता ने पूछा है –

मेरे विरुद्ध एक व्यक्ति ने  5, 25, 000 रु. का चैक बाउंस का प्रकरण चलाया था, जो कि पूरी तरह से फर्जी था। करीब 5 साल तक प्रकरण चलने के बाद अंतत: मुझे बरी कर दिया गया। इस दौरान मुझे करीब 60 हजार रुपए वकील फीस व अन्य खर्च करने पड़े, इस के साथ ही मुझे बहुत परेशानी भी झेलनी पड़ी। अब इस केस में मैं बरी हो गया हूँ तो मुझे आगे क्या कार्रवाई करना चाहिए जिससे उसे सबक मिले और जितना भी खर्च मेरा हुआ है वह मुझे मिले।

समाधान –

प के विरुद्ध जो प्रकरण चलाया गया था वह एक अपराधिक अभियोजन था। इस अभियोजन के निरस्त हो जाने से यह सिद्ध हुआ है कि यह दुर्भावना पूर्ण अभियोजन था। इस अभियोजन से आप को बहुत खर्च करना पड़ा और लगातार पेशियों पर जाने से काम का नुकसान हुआ। इस के अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक पीड़ा भी भुगतनी पड़ी। समाज में भी आप की प्रतिष्ठा इस अपकीर्ति के साथ कम हुई कि आप चैक दे कर उसे अनादरित करवा देते हैं जिस से समाज में आप का भरोसा टूटा और पाँच वर्षों तक आप को अपकीर्ति का दोष भुगतना पड़ा।

मुकदमे में हुए खर्च अर्थात वकील की फीस की रसीद और अन्य खर्चों का विवरण तैयार करें। मानसिक व शारीरिक पीड़ा व अपकीर्ति से हुई क्षतियों का अपनी हैसियत के अनुसार मूल्यांकन करें और एक विधिक नोटिस उस व्यक्ति को प्रेषित करवाएँ जिस ने उक्त अभियोजन चलाया था। इस नोटिस में लिखें कि आप को जो क्षतियाँ हुई हैं, आप ने उस का मूल्यांकन इस प्रकार किया है और वह व्यक्ति आप को उतनी धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करे। यदि वह नियत समय में यह क्षतिपूर्ति अदा नहीं करता है तो आप उस के विरुद्ध दुर्भावना पूर्ण अभियोजन के लिए वाद प्रस्तुत कर उक्त क्षतिपूर्ति राशि की वसूली करेंगे। उक्त वाद में जो खर्च आएगा और जो हर्जा होगा वह भी उसे भुगतना पड़ेगा।

ह नोटिस उक्त व्यक्ति को मिल जाने तथा आप के द्वारा क्षतिपूर्ति के भुगतान के लिए दिया गया समय व्यतीत हो जाने पर आप दुर्भावनापूर्ण अभियोजन तथा क्षतिपूर्ति का वाद उक्त व्यक्ति के विरुद्ध प्रस्तुत कर दें।

मिथ्या तथ्य वाला अपमानजनक समाचार प्रकाशन अपराध है जिस के लिए दंडित कराया जा सकता है और हर्जाना भी लिया जा सकता है।

समस्या-

नोयडा, उत्तर प्रदेश से अनिल कुमार त्रिपाठी ने पूछा है-

मेरे छोटे भाई की शादी साल २०११ में अप्रैल माह में होना तय हुआ।  लड़की के पिता का देहांत हो जाने के कारण हमारे बड़े पिता जी ने ज्यादा जोर देकर हमारे पिताजी से शादी के लिए हामी भरवा ली जबकि उनकी इच्छा नहीं थी।  तिलक लेकर लड़की वाले हमारे यहाँ निर्धारित तिथि को आये।  कार्यक्रम चल रहा था कि अचानक लड़की वालों ने कहा कि लड़का पोलियो का शिकार है।  इसलिए हम शादी नहीं कर सकते इस बात का हमें अभी चला है।  इस के पीछे गाँव के कुछ लोगों ने लड़की वालों को भड़का दिया था।  मेरे भाई को एक सड़क दुर्घटना में हाथ में गंभीर चोट आयी थी जो आपरेशन के बाद ठीक है।  शादी से इनकार करने के बाद ठीक उसी समय लोगों ने समझाने की कोशिश की।  बाद में वो लोग पुलिस के पास गए।  फिर उसी समय पुलिस आयी और मामले की जानकारी लेकर सुबह थाने में आने को कहकर चली गयी।  वहाँ जाने पर सारे पुलिस वाले लडकी वालों की गलती बताने लगे और कहने लगे की अगर तुम्हे शादी नहीं करनी थी तो इसके बारे में पहले ही जानकारी कर लेनी चाहिए थी।  हमारी तरफ से कुछ भी छुपाया नहीं गया था।  लड़का लड़की के यहाँ जा कर लोगों से बात करके भी आया था।  वहाँ पर ये तय हुआ कि जो भी सामान लो तिलक में लेकर आये थे सारा वापस कर दिया। अगले दिन गांव के लोगों द्वारा ही समाचार पत्र में गलत समाचार प्रकाशित करवाया गया कि लड़के के लंगड़े होने के बारात वापस हो गयी।  क्या हम समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के खिलाफ कानूनी कार्यावाही कर सकते हैं। यदि हाँ तो किसके विरुद्ध यदि नहीं तो क्यों?

समाधान-

defamationमाचार पत्र में जो भी समाचार प्रकाशित हुआ है वह यहाँ हमारे सामने नहीं है।  किसी भी समाचार में गलत तथ्य प्रस्तुत कर किसी की मानहानि की जाए या वह किसी के लिए अपहानि का कारण बने तो ऐसे समाचार के लिए दीवानी व फौजदारी दोनों प्रकार की कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।  लेकिन इस के पहले यह जाँचना आवश्यक है कि उस समाचार में गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं जिस से किसी की अपहानि हुई है।

से समाचार के लिए समाचार पत्र के संपादक, प्रकाशक और मुद्रक तीनों जिम्मेदार हैं। इस के लिए जिस व्यक्ति या व्यक्तियों की अपहानि हुई है उन्हें इन तीनों को विधिक नोटिस भिजवा कर अपहानि के लिए हर्जाने की मांग करनी चाहिए  और कहना चाहिए कि अपहानि के लिए हर्जाने की राशि का भुगतान न करने पर  उन के विरुद्ध न केवल हर्जाने के लिए दीवानी वाद प्रस्तुत करना होगा। अपितु किसी की अपहानि करना भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है और उन के विरुद्ध इस के लिए भी मुकदमा चलाया जाएगा।

स नोटिस की अवधि समाप्त हो जाने के उपरान्त समाचार पत्र के संपादक, प्रकाशक और मुद्रक के विरुद्ध धार 500 भारतीय दंड संहिता के अन्तर्गत सक्षम न्यायालय के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है। लेकिन ऐसा परिवाद समाचार पत्र में समाचार प्रकाशन की तिथि से तीन वर्ष पूर्ण होने के पूर्व ही किया जाना संभव है।

पहानि के लिए हर्जाना प्राप्त करने के लिए दीवानी वाद भी प्रस्तुत किया जा सकता है लेकिन यह वाद समाचार प्रकाशित होने की तिथि के केवल एक वर्ष की अवधि में ही प्रस्तुत किया जा सकता है। इस वाद में जितनी राशि हर्जाने के रूप में मांगी जाएगी उस पर आप को न्याय शुल्क भी वाद प्रस्तुत करने के साथ ही न्यायालय को अदा करना होगा।

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