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संविदा के माध्यम से किसी बालक / बालिका को पालन पोषण के लिए अभिरक्षा में लिया जा सकता है।

समस्या-

ईशा ने झारिया, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मैं एक 2 साल की लड़की को गोद लेना चाहती हूूँ जो मेरे रिश्ते में ही आती है,  लेकिन कानूनी रूप से नहीं। मैं उसे हायार एजुकेशन देकर सेल्फ़ डिपेंड बनाना चाहती हूँ और विवाह का दायित्व लेना चाहती हूँ। लेकिन भविष्य में अपनी संपत्ति का कोई अधिकार उसे नहीं देना चाहती हूँ। मेरा स्वयं का एक बेटा है। क्या ऐसा संभव है।

समाधान-

क्यों कि आप का स्वयं का एक पुत्र है इस कारण से आप किसी भी संतान को विधिक रुप से गोद नहीं ले सकती हैं। आप ऐसा खुद भी नहीं करना चाहती हैं। इस कारण इसे गोद लेना तो कहा नहीं जा सकता। लेकिन जो कुछ आप उस के लिए करना चाहती हैं वह भी एक उत्तम विचार है। इस के लिए यदि उस लड़की के माता पिता तैयार हों तो ऐसा आपस में संविदा के माध्यम से किया जा सकता है।

लड़की के माता पिता और आप व आपके पति के मध्य एक लिखित संविदा निष्पादित हो जाए जो एग्रीमेंट के लिए आवश्यक स्टाम्प पर लिखी जाए और बाद में नोटेरी से तस्दीक करा ली जाए। इस दस्तावेज को उप पंजीयक के यहाँ भी एक संविदा के रूप में पंजीकृत कराया जा सकता है। इस संविदा के अनुसार लड़की के माता पिता लड़की की अभिरक्षा उस के विवाह तक के लिए आप को देंगे। आप लड़की की परवरिश अपनी स्वयं की संतान की तरह करेंगी, उसे स्वावलंबी बनाने की कोशिश करेंगी और उस के विवाह योग्य होने पर विवाह का व्यय उठाएंगी। बदले में उस के माता पिता अपनी बेटी की अभिरक्षा का दावा नहीं करेंगे। इस एग्रीमेंट की एक शर्त यह भी होगी कि वह लड़की कभी भी स्वयं को आप की पुत्री होने का दावा नहीं करेगी, आप की संपत्ति पर अथवा बाद में उत्तराधिकारी के रूप में किसी तरह का दावा नहीं करेेगी। इस तरह की संविदा होने के बाद आप लड़की को अपनी अभिरक्षा में ला सकती हैं।

पुत्र से मिलने व संरक्षा हेतु धारा 26 हिन्दू विवाह अधिनियम में आवेदन करें।

rp_CUSTODY-OF-CHILD-254x300.jpgसमस्या-

धीरज मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के गाँव-बहेड़वा, पोस्ट-मिर्जामुराद, जिला-वाराणसी से पूछा है-

मेरे बेटे आर्यन से स्कूल में मिलने पर उसकी नानी चंदा देवी ने स्कूल के प्रबंधक को लिखकर रोक लगा रखा है।  परंतु मैं अपने बेटे से स्कूल में मिलने का अधिकार चाहता हूँ ताकि उसकी काउंसलिंग करवा सकूँ।  कृपया उचित सलाह दें।

समाधान-

र पिता अपने पुत्र का नैसर्गिक संरक्षक है और उसे अपने पुत्र से मिलने का अधिकार है। यदि आप के पुत्र का स्कूल प्रबंधन आप को अपने पुत्र से मिलने नहीं दे रहा है तो आप स्कूल को लीगल नोटिस दे सकते हैं और कह सकते हैं कि स्कूल प्रबंधन इस तरह गलती कर रहा है।

यदि स्कूल नोटिस के बाद भी पुत्र से मिलने नहीं देता है तो आप स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध दीवानी वाद प्रस्तुत कर के न्यायालय से स्थायी व्यादेश जारी करवा सकते हैं।

यदि आप के और आप की पत्नी के बीच किसी तरह का विवाद है और परिवार न्यायालय में हिन्दू विवाह अधिनियम के अन्तर्गत किसी तरह का मुकदमा चल रहा है तो आप हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 26 के अन्तर्गत इस तरह का आदेश उसी न्यायालय से प्राप्त कर सकते हैं जहाँ यह मुकदमा चल रहा है।

बच्चे की अभिरक्षा उस के हितों को सर्वोपरि देख कर ही माँ या पिता को प्राप्त होगी।

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

पवन ने हरिद्वार उत्तराखंड से पूछा  है-

मेरा विवाह नवंबर 2009  में एक पढ़ी लिखी (BA BEd पास) मेरठ उत्तर प्रदेश की रहने वाली अनामिका के साथ हिन्दू रीतिरिवाज के अनुसार हरिद्वार उत्तराखंड में संपन्न हुआ था।  वह शुरू से ही मुझे व मेरे परिवार वालों को परेशान करती थी,   शादी के दो माह बाद गर्भवती होने पर वह जिद करके मायके चली गई और वहां जाकर मुझे सूचना दिए बगेर बिना मेरी इच्छा व अनुमति के उसने अपना गर्भपात करवा लिया। इसके बाद कुछ समय ठीक चला लेकिन दिसम्बर 2010 मायके जाकर अपने के पिता के घर से उसने दहेज़ मांगने व दहेज़ के लिए परेशांन करने का आरोप लगाते हुए एक पत्र मेरे पिताजी के पास भेजा था जिसकी एक एक  नक़ल महिला आयोग उत्तराखंड ,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार व समाचार पत्र को भेजनी बताई थी। मैंने तब वकील की सलाह पर तलाक  का एक वाद स्थानीय परिवार न्यायालय में दायर कर दिया था।  लेकिन कुछ समय बाद ही एक मध्यस्थ के माध्यम से समझौते के बाद मेरी पत्नी घर आकर मेरे माता पिता से अलग रहने लगी तलाक के केस में कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।  दिसम्बर 2011 में हमारे बेटा होने के बाद मेरी पत्नी फिर मेरे साथ बुरा व्यवहार करने लगी व मुझे मरने मारने की धमकी देने लगी। वह मेरे व मेरे बेटे का कोई ख्याल नहीं रखती थी, केवल टीवी आदि  में लगी रहती थी। घर की शांति के लिए मैं सब कुछ सहता रहा। इसके बाद उसने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया तथा बेटे को मेरे या मेरे माता पिता के पास सुबह सात बजे से रात के दस बजे तक छोड़ कर मस्त रहने लगी। लेकिन केवल तीन माह में ही उसने नौकरी छोड़ दी। अगस्त 2014 से अप्रैल 2015 के बीच वह कई बार मेरे कार्यस्थल में लड़ाई झगडे करने के लिए गई और वहां उपस्थित मेरे सहयोगियों व बाहरी व्यक्तियों के सामने मुझसे गाली गलौज की और सितम्बर 2014 में महिला हेल्प लाइन हरिद्वार में उसने मेरे विरुद्ध शिकायत कर दी कि मैं ध्यान नहीं रखता हूँ व उसे जरुरी सामान नहीं लाकर देता हूँ। महिला हेल्प लाइन में मुझे व उसको समझा बुझा कर केस समाप्त कर दिया। इसके बाद 7 अप्रैल 2015 में मुझे परेशान करने के लिए महिला हेल्प लाइन में फिर से उसी प्रकार की शिकायत कर दी। 20 दिनों तक मुझे वहा बुलाया गया लेकिन परिणाम इसकी इच्छा के मुताबिक न होने पर इसने  हेल्प लाइन में यह कह कर की आगे की कार्यवाही मैं अपने मायके मेरठ से करुँगी ये केस बंद हो गया। 30 अप्रैल को वह मेरे बेटे रुपेश को लेकर मेरे घर से मेरी अनुपस्थिति में कमरों में ताले लगा कर चली गईं। मेरा बेटा प्री नर्सरी पढ़ चुका था और उसका एडमिशन LKG में करवा दिया था। पर सब बेकार गया वह मुश्किल से 6 दिन स्कूल गया और उसकी माँ उसे लेकर चली गई। उसने मेरा फोने उठाना भी बंद कर दिया, फिर मैंने रुपेश की तबियत व स्कूल में अनुपस्थिति व नाम काटने की चिंता जताते हुए Whatapp पर मेसेज भी भेजे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला और उसने मुझे ब्लोक कर दिया। मैं मजबूर होकर चुप बैठ गया क्योंकि उसके पिता इंडियन आर्मी के बहुत बड़े अफसर है और वे मुझे कई बार गली गलौज तथा मारने की धमकी दे चुके हैं। मेरी पत्नी 1 साल 3  माह से बेटे के साथ  मायके में है अब मैं अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता हूँ और बेटे की कस्टडी लेना चाहता हूँ।|   मेरे प्रश्न ये हैं 1. क्या मैं उन कमरों के ताले तोड़ कर उन्हें इस्तेमाल कर सकता हूँ?

  1. मैं अपने बेटे से मिलना चाहता हूँ तो में क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाऊँ जिससे मैं अपने बेटे से हर महीने मिल सकूँ। क्योंकि मेरा अपनी पत्नी और उसके घरवालो से कोई संवाद नहीं है न ही कोई बीच में बात करने वाला बिचौलिया है?
  2. मुझे मेरे बेटे जिसकी उम्र 4 वर्ष 9 माह है की कस्टडी कैसे ले सकता हूँ?
  3. मैं अपनी पत्नी से कैसे तलाक ले सकता हूँ?
  4. क्या मेरी पत्नी अब भी मेरे या मेरे परिवार पर 498(A), घरेलू हिंसा, या कोई अन्य केस फाइल कर सकती हे जेसे उसको गये हुए 1 साल से ऊपर हो गया है?

समाधान-

प की समस्या का हल तो तलाक ही है। तलाक लेने के लिए आप को आधार चाहिए। एक आधार तो यही है कि वह एक वर्ष से अधिक से आप से अलग निवास कर रही है। इस के अतिरिक्त जो कुछ उस ने किया है वह क्रूरता की श्रेणी में आता है। इस कारण दो मजबूत आधार आप के पास हैं। आप किसी भी वकील से मिल कर उन्हें तथ्य बता कर और आपसी विचार विमर्श करते हुए तलाक का एक मजबूत मुकदमा प्रस्तुत कर सकते हैं। इसी मुकदमे को पेश करने के उपरांत आप उसी न्यायालय में हर माह अपने बेटे से मिलने और उस की कस्टडी के लिए आवेदन कर सकते हैं।

बच्चे की कस्टड़ी का आधार बच्चे का हित होता है। इस के लिए आप को यह साबित करना होगा कि बच्चे का हित उस की माँ के साथ नहीं बल्कि आप के साथ है और उस की माँ उस की परवरिश ठीक से नहीं कर पा रही है। यदि आप यह साबित कर सके तो आप को पुत्र की कस्टड़ी मिल जाएगी।

कोई भी मुकदमा करने के लिए कुछ नहीं करना पड़ता है। आप वकीलों से जा कर कहें दीजिए कि मुझे फलाँ व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा करना है, उसे परेशान करना है। तो आप को कुछ वकील तो ऐसे भी मिल जाएंगे जो पूरी कहानी और तथ्य खुद गढ़ लेंगे। इस कारण यह बिलकुल नहीं कहा जा सकता कि आप की पत्नी आपके विरुद्ध कौन से मुकदमे कर सकती है या करेगी। वह किसी भी तरह का मुकदमा आप के विरुदध कर सकती है। हाँ आप ने इस तरह के मुकदमों में पैरवी ठीक से कराई और सतर्क रहे तो किसी मुकदमे में आप की पत्नी को सफलता प्राप्त नहीं होगी।

 

पति और ससुराल वालों ने क्रूरता का व्यवहार किया है तो उस की रिपोर्ट जरूर दर्ज कराएँ।

sexual-assault1समस्या-
संजना लववंशी ने इंदौर, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मेरी शादी हिंदू रीति रिवाज से राजेश लववंशी से ग्राम छनेरा, जिला खंडवा में हुई थी। हमारा 1साल का बेटा है। मेरी समस्या यह है कि मेरे ससुराल वालों ने मुझे शादी के 2 महीने के बाद से मारना पीटना शुरू कर दिया था। पर ये सोच कर मेरे मायके में नहीं बताया कि मेरे मायके वाले बहुत ग़रीब ओर सीधे सादे हैं और मेरे ससुराल वाले बहुत अमीर हैं। सभी जगह उन लोगों की काफी पहचान है। अधिकतकर काम पैसों से करवाते हैं। मुझे 15 जुलाई 2013 को घर से राजेश की बहन ने मेरे पति के कहने पर मार मार कर बच्चे सहित निकाल दिया। मेरे पति की टूरिंग जॉब है सेलेरी 250000/- रूपए है। वो उस समय टूर पर थे। मेरे पति ने मेरी झूठी रिपोर्ट 17 जुलाई 2013 को थाने में लिखवाई। मुझे जब घर से निकाला तब मुझे समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूँ। उस समय मेरी हालत बहुत खराब थी। मैं खंडवा की बस में बैठी जहाँ पर मैं और मेरा परिवार रह चुका है। खंडवा अपने दोस्त के घर जिसे मेरा परिवार जानता है उस के किराए के रूम पर सिर्फ़ अपने बच्चे के साथ 7 दिन तक रही। पुलिस ने मेरा बयान दबाब दे कर बदल लिया और मुझे उस में चरित्रहीन साबित कर दिया। साथ ही मुझ पर चोरी का इल्ज़ाम लगा दिया। मेरे परिवार वालों को धमकी दी कि हमारे विरोध में कुछ मत कहना नहीं तो हम तुम्हारी बेटी को नहीं ले जाएंगे। मेरा परिवार भी मेरा दूसरी बार घर बस जाए इस लिए मेरे ससुराल वाले जैसे बोलते गये वैसा करता गया। मुझसे भी वैसा ही करवाया। मैं 3 महीने अपने मायके में रही। उस के बाद इंदौर अलग से किराए के रूम में 6 महीने से अपने बेटे के साथ रह रही हूँ। मैं ने अदालत में भरण पोषण केस 20 ऑक्टूबर 2013 को लगाया है। मेरे पति ने लिखित जबाब में कहा है कि उसे जॉब से निकाल दिया गया है और वो अब बेरोज़गार है। मैं जानना चाहती हूँ कि मुझे और मेरे बेटे को गुजारा भत्ता मिलेगा या नहीं? मिलेगा तो कितना मिलेगा? ओर यदि तलाक़ चाहिए तो मिलेगा या नहीं? मेरे बेटे को हमेशा के लिए मैं रखना चाहती हूँ। इस के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा? इस में कितना सम लगेगा।  मेरी हालत बहुत कराब चल रही है। मेरी समस्या का समाधान जल्दी दें।

समाधान-

प के पति व ससुराल के सदस्यों ने आप के साथ अत्यधिक क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया है। उन का यह कृत्य धारा 198-ए आईपीसी में अपराध है। आप को इस के लिए पुलिस में रिपोर्ट करानी चाहिए या फिर अपने वकील की मदद से परिवाद प्रस्तुत कर पुलिस को भिजवाना चाहिए। जिस से अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही हो सके। उन के अपराध को साबित करने के लिए आप का बयान भी पर्याप्त है।

प भरण पोषण का मुकदमा कर चुकी हैं। उस मुकदमे के बारे में आप के वकील आप को बेहतर बता सकते हैं कि उस में कितना समय लगेगा। लेकिन अन्तरिम रूप से भरण पोषण आरंभ करने के लिए आवेदन न दिया हो तो उसे अवश्य प्रस्तुत कराएँ और मामले में गवाहियाँ होने के पहले अन्तरिम भरण पोषण आरंभ कराएँ। पति को खुद साबित करना पड़ेगा कि उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। यदि साबित न कर सके तो आप को उस के वेतन के आधार पर पाँच हजार अपने लिए और पाँच हजार अपने बेटे के लिए प्रतिमाह तक गुजारा भत्ता मिल सकता है। कुछ तो अवश्य ही मिलेगा। अन्तरिम रूप से इतना नहीं मिलेगा।

प का बेटा आप के साथ है। उसे अपने पास रखने के लिए आप को कुछ नहीं करना है। यदि आप के पति उसे अपनी अभिरक्षा में लेने के लिए कार्यवाही करें तो आप को उस कार्यवाही में अपना पक्ष मजबूती से रखना है। बच्चे का भविष्य सदैव माँ के साथ बेहतर होता है और बच्चे की अभिरक्षा उसी को मिलती है जिसे मिलने में बच्चे की भलाई हो।

प को क्रूरतापूर्ण व्यवहार और अभित्यजन के आधार पर विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री प्राप्त हो सकती है।

कुछ भी हो। लेकिन यदि आप को अपना जीवन सुधारना है तो स्वयं अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा। यदि आप किसी तरह अपने पैरों पर खड़ी हो जाती हैं तो ही आप खुद को मजबूत पाएंगी। यदि आप अच्छा कमाने लगती हैं तो आप का भरण पोषण भले ही बन्द हो जाए लेकिन बच्चे का मिलता रहेगा।

न्यायिक पृथक्करण की डिक्री के लिए आवेदन करें . . .

two wives one husbandसमस्या-
मुम्बई, महाराष्ट्र से शालिनी सिंह ने पूछा है –

मेरी एक मित्र की शादी 25-4-2012 को हुई है, उसकी शादी के कुछ दिन का बाद ही उस की वाइफ हर बात पर झगड़ा करने लगी।  वो ये कहती है कि मेरी शादी तुम्हें देख कर नहीं हुई है तेरी प्रॉपर्टी देख कर हुई है तो मुझे प्रॉपर्टी में आधा हक चाहिए। शादी में मेरे दोस्त की माँ  ने अपनी बहू को काफ़ी गोल्ड ज्वेलरी चढ़ाई थी वो ये भी बार बार मांगती है कि मैं अपनी माँ के पास रखूंगी। वह इन बातों को ले कर सभी को तंग करती है। बात बात पर घर छोड़ कर चली जाती है। एक बार पुलिस स्टेशन चली गई थी। जिसकी वजह से वो लोग डर कर  बहू-बेटे को अलग कर दिया। ताकि वो समझने लगे।  अलग होने के बाद भी वह वही बात बार बार कहती है। कई बार तो पुलिस में शिकायत भी कर चुकी है कि मेरा पति मुझे मारता है।  अभी उसका  एक बच्चा है जो कि 7 माह का है। सब को लगा कि वो बच्चा होने के बाद बदल जाएगी पर इस का उलटा हुआ। अब तो ये कहती है की मुझे गहने दो नहीं तो बच्चे को जान से मार डालूंगी और ये कहूँगी कि मेरे पति ने दहेज के लिये अपने बच्चे को मार दिया है।  इतना सब हो जाने के बाद अब वो पत्नी के साथ नहीं रहना चाहता है पर वो फिर से वापस आना चाहती है पर पति तैयार नहीं है। कहता है कि उसके साथ रहने में उस की जान को भी खतरा है। अब वो उस लड़की से तलाक लेना चाहता है और बच्चा भी लेकिन पत्नी तलाक़ नहीं देना चाहती है। साथ में रहने के लिए भी पुलिस में शिकायत कर के आई है। लड़की पाँच बार पुलिस में शिकायत कर चुकी है। पर लड़के वालों ने कुछ भी नहीं किया है सिर्फ़ अपनी साफ़्टी का लिया 2 बार न.सी. किया है। अब क्या लड़की से तलाक़ लिया जा सकता है?

समाधान-

दि आप के मित्र की पत्नी उस की सास द्वारा चढ़ाए गए गहने मांगती है तो उस में कुछ गलत बात नहीं है। वे गहने यदि उसे उपहार में मिले हैं तो स्त्री-धन हैं तथा उस की संपत्ति हैं। वह उन्हें मांग सकती है। नहीं देने पर यह अमानत में खयानत होगी जो कि धारा 406 आईपीसी के अंतर्गत एक अपराध है। हाँ, यदि इस में कोई शंका हो कि पत्नी यह सब किसी झगड़े के उद्देश्य से या अन्य किसी कारण से ऐसा कर रही है तो उसे कहा जा सकता है कि पति-पत्नी के नाम से बैंक में एक लॉकर ले कर रख दिए जाएँ जिसे दोनों के साथ जाए बिना नहीं खोला जा सकता हो। वैसी स्थिति में गहनों पर दोनों का संयुक्त नियंत्रण स्थापित हो सकता है।

लेकिन उस का यह कहना की मेरी शादी तुम्हें देख कर नहीं बल्कि तुम्हारी प्रोपर्टी देख कर हुई है तो यह पति के साथ हद दर्जे की क्रूरता है। बार बार बिना किसी कारण के पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराना भी क्रूरतापूर्ण व्यवहार है। बच्चे को मार डालने की धमकी देना तो निहायत दर्जे का क्रूरतापूर्ण व्यवहार है। इन कारणों से पति अपनी पत्नी से अलग रह सकता है।

न परिस्थितियों में पति को चाहिए कि वह हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 10 के अन्तर्गत न्यायिक पृथक्करण की डिक्री के लिए अदालत में आवेदन करे कि मैं अपनी पत्नी के साथ नहीं रह सकता तथा बच्चे की अभिरक्षा के लिए भी आवेदन प्रस्तत करे। इन आवेदनों में उसे यह भी कहना होगा कि वह पत्नी को उसी मकान में जिस में अभी वह रहता है रहने का पूरा खर्चा उठाएगा। इस तरह न्यायालय से सारी परिस्थितियाँ होते हुए भी वह न्यायिक पृथक्करण की डिक्री पारित करवा सकता है। डिक्री पारित होने पर पृथक रह सकता है। बच्चे की अभिरक्षा मिल जाए तो उसे भी अपने साथ रख सकता है। लेकिन इस के लिए उसे सारी परिस्थितियों को प्रमाणित करना होगा। यदि बाद में भी परिस्थितियाँ ऐसी ही रहें तो लंबे न्यायिक पृथक्करण के आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री के लिए भी आवेदन किया जा सकता है। इस कार्यवाही के लिए किसी अच्छे स्थानीय वकील की सहायता लेनी होगी।

ह सब करने के पहले पति को अपनी पत्नी या पुलिस कार्यवाही से डरना छोड़ना पड़ेगा। अधिकांश मामलों में पतियों को असफलता इसी लिए प्राप्त होती है कि वे पुलिस कार्यवाही से तथा पत्नी द्वारा किए जाने वाले फर्जी मुकदमों से भयभीत रहते हैं। यह फिजूल का भय त्यागना होगा और पत्नी यदि ऐसा करती है तो निर्भय हो कर उस का मुकाबला करना होगा।

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