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परित्याग व अन्य आधारों पर विवाह विच्छेद के लिए आवेदन करें।

समस्या-

मनोज ने भोपाल, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे मित्र का विवाह 30 अप्रेल 2005 को चित्तौड़गढ़ राजस्थान में हुआ था। मित्र मध्य प्रदेश का है, बारात राजस्थान गई थी। उसकी पत्नी 2006 में बिना कारण उसे छोड़ के अपने मायके चली गई। मेरे मित्र ने वहाँ जाकर उसे समझाने का बहुत प्रयास किया, पर वह अपनी ज़िद्द पर अड़ी रही। उसकी ज़िद्द थी कि वह घर दामाद बनकर रहे। पर मेरा मित्र ये बात नही माना, क्योंकि वह सेना में सेवारत है और उसके भी मां, बाप, बहन है जिसकी जिम्मेदारी उस पर है। इसी बीच 2007 में मेरे मित्र का एक बेबी हो गया अब बच्चा होने के बाद मेरे मित्र के सास, ससुर, साला बच्चे से मिलने नहीँ देते थे। पर उसने बार बार मिलने का प्रयास किया पर उसे  मिलने नही दिया जाता, जब वह छुट्टियां खत्म होने के बाद वह सेना में बापिस आ जाता। इसी बीच उसकी पत्नी ने 2010 में भाग कर रायपुर छत्तीसगढ़ में एक युवक से विवाह कर लिया। पर मेरे मित्र को मालूम नहीं चला। जब वह 6 माह में छुट्टी ले के जाता तो उसे ये कहा कर लौटा देते कि वह नही मिलना चाहती और वह जॉब करने लगी है। ये सिलसिला चलता रहा जब मित्र ने वहाँ के थाने में रिपोर्ट दर्ज करने गया तो वहाँ के एसएचओ ने रिपोर्ट दर्ज नही की। वह बोला वह जॉब करती है उसे परेशान मत करो नहीं उसकी कंप्लेन में बंद हो जाओगे और कोई छुड़ाने नहीं आएगा, और army की नौकरी चली जायेगी। वह वापिस गया अभी मई 2017 में उसे मालूम पड़ा कि उसने दूसरा विवाह कर लिया है। रायपुर में किसी अजय नाम के व्यक्ति से और मित्र के बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट में दूसरे पति अजय का नाम डलवा दिया है। मित्र का लड़का 5वीं में पढ़ता है और उन दोनो का रायपुर में वोटर आई डी बना हुआ है जो कि वोटर लिस्ट में है, और उन दोनों के कुछ फोटो मिले है गले मे हाथ डाले हुए और मांग में सिन्दूर है। उधर पुछा गया तो मालूम पड़ा कि उन दोनों ने प्रेम विवाह किया है। आप बताइए कि मेरा मित्र क्या करे? जिससे उसकी समस्या हल होजाये उन दोनों को सबक सिखाया जाए उसे सजा मिल सके साथ मे मित्र का बच्चा भी मिल जाये मित्र की पत्नी के दूसरी शादी का बस फ़ोटो और वोटर लिस्ट का सबूत है इन के आधार पर क्या कार्यवाही करें?

समाधान-

प के मित्र की पत्नी को छोड़ कर गए हुए 11 वर्ष हो चुके हैं और आप के मित्र ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है। 11 वर्ष से आप के मित्र की पत्नी अलग रहती है और उस ने घर भी बसा लिया है। आप का मित्र चाहता तो अभी तक परित्याग के आधार पर तलाक ले सकता था।  देरी से न्यायालय तक जाने पर राहत मिलना कठिन होता है। अब भी आप के मित्र को सभी संभव आधारों पर तलाक के लिए आवेदन करना चाहिए।

आप का मित्र फौज में है, केवल अवकाश में घर आता है। एक लंबे समय तक उस की पत्नी को अकेले उस के ससुराल में रहना होता था। जब पत्नी को अकेले ही रहना होता था तो वह आप के मित्र के परिवार के साथ क्यों रहती? अपने मायके में क्यों नहीं। यही दोनों के बीच विवाद है।

मित्र की पत्नी सैटल हो चुकी है। बच्चा अब तक उस के साथ रहा है, वह अपने पिता को नहीं जानता या पिता के रूप में किसी दूसरे व्यक्ति को जानता है। ऐसी स्थिति में बच्चे की कस्टडी मिलना कठिन है जब कि आप का मित्र खुद फौज में रहता है।

आप के मित्र को पत्नी के विरुद्ध तलाक की और बच्चे की कस्टडी का मुकदमा करना चाहिए। इन मुकदमों के दौरान अदालत दोनों के बीच राजीनामा कराने की कोशिश करेगी। दोनों का साथ रहना तो मुमकिन नहीं फिर भी जो भी आपसी रजामंदी से हो सके वह करना चाहिए। कम से कम तलाक ले लेना चाहिए जिस से आप का मित्र दूसरा विवाह कर सके। पत्नी को सबक सिखाने की बात मन से निकाल दें। कानूनी स्थिति जो भी है वह ऐसी है कि सबक सिखाने के चक्कर में आप के मित्र ही कहीं चकरी न हो जाएँ।

 

विवाह में कुछ नहीं बचा है, स्थाई पुनर्भरण और विवाह विच्छेद के लिए आवेदन करना चाहिए।

sadwomanसमस्या-

राज यादव ने जौनपुर, उत्तर प्रदेस से समस्या भेजी है कि-

मेरी बहिन की उम्र् 28 वर्ष है उस की शादी 2004 में हुई थी। एक वर्ष तक उन का आना जाना अपने ससुराल में रहा। उस के बाद कुछ अनबन हो जाने की वजह से उन लोगों ने मेरी बहिन को हमारे यहाँ छोड़ दिया। तब से ले कर अब तक उन लोगों ने अभी तक खबर नहीं ली है। मेरी बहन अब वहाँ जाना नहीं चाहती। वह उस समय के हादसे को ले कर डरी हुई है। मैं धारा 125 व धारा 498ए लगाना चाहता हूँ। कृपया मुझे सुझाव दें।

समाधान-

प की बहिन लगभग नौ वर्षों से मायके में है और उस के ससुराल वालों ने अब तक उस की खबर नहीं ली है। आप की बहन भी पुराने हादसे से बैठे हुए भय के कारण वहाँ जाना नहीं चाहती है। इस मामले में आप कुछ करना चाहते हैं लेकिन आप के करने से तो कुछ भी नहीं होगा। यदि आप की बहिन करना चाहेँ तो बहुत कुछ हो सकता है। आप केवल उन की मदद कर सकते हैं।

प की बहिन को अपने ससुराल से आए 9 वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इस बीच कोई घटना नहीं हुई है। इस कारण से 498ए आईपीसी का कोई आधार स्पष्टतः नहीं है। आप की बहिन के साथ जो भी घटना हुई थी उसे हुए भी 9 वर्ष का अर्सा हो चुका है। 498ए में प्रसंज्ञान लेने की अवधि मात्र 3 वर्ष है। वैसी स्थिति में इस मामले में को सफलता मिलना पूरी तरह संदिग्ध है और आप की बहिन को 498ए आईपीसी में नहीं उलझना चाहिए। यदि आप की बहिन का कुछ स्त्री-धन उस के ससुराल में छूट गया है और उसे उस की ससुराल वाले लौटा नहीं रहे हैं तो आप की बहिन धारा 406 आईपीसी में अमानत में खयानत के अपराध की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं या फिर मजिस्ट्रेट के न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर पुलिस को जाँच के लिए भिजवाया जा सकता है। इस प्रथम सूचना रिपोर्ट या परिवाद में 9 वर्ष पूर्व हुई घटना और क्रूरता का उल्लेख भी किया जाना चाहिए। यदि पुलिस समझती है कि धारा 498ए आईपीसी भी बनता है तो वह 406 के साथ साथ इस धारा के अन्तर्गत भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

प की बहिन धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत अपने भरण पोषण का व्यय प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकती है। इस धारा के अन्तर्गत अन्तरिम रूप से भी बहिन को भरण पोषण राशि देने कि लिए न्यायालय आदेश दे सकता है। यदि आप की बहिन को भरण पोषण की राशि मिलने लगती है तो उन्हें कुछ राहत मिलना आरंभ हो जाएगा।.

प की बहिन का विवाह हुए दस वर्ष हो चुके हैं उस में से 9 वर्ष से वह अपने मायके में है। ऐसी स्थिति में उस के विवाह में कुछ शेष नहीं बचा है। बेहतर है कि आप की बहिन उस के साथ 9 वर्ष पूर्व हुई क्रूरता और उस के बाद उस के परित्याग को आधार बना कर इस विवाह को वैधानिक रूप से समाप्त करने के लिए विवाह विच्छेद की याचिका धारा 13 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत प्रस्तुत करे और एक मुश्त स्थाई पुनर्भरण प्राप्त करने के लिए भी इसी आवेदन में प्रार्थना की जाए। यदि आप की बहिन के ससुराल वाले पर्याप्त राशि भरण पोषण के रूप में देने को तैयार हों तो सहमति से विवाह विच्छेद का आवेदन भी प्रस्तुत किया जा सकता है। एक बार आप की बहिन इस विवाह से मुक्त हो जाए तो स्वतंत्र रूप से अपना जीवन नए सिरे से जीना तय कर सकती है।

जीवन साथी के परित्याग के आधार पर विवाह विच्छेद का आवेदन किया जा सकता है।

handshakeसमस्या-

बलबीर राणा ने मानेसर गुड़गाँव, हरियाणा से समस्या भेजी है कि-

मेरे मित्र मंजुनाथ जो बैंगलौर कर्नाटक से हैं वर्तमान में भारतीय थल सेना में सेवारत हैं। उन की शादी हुए 6 साल हो गए लेकिन पत्नी शादी के बाद से ही उनके घर में नहीं रहती। वह अपने मायके रहती है। बीबी के मर्जी के मुताविक दोस्त सब कुछ करने को तैयार है। उन की बीबी के मुताविक घर मेरे मायके के पास बनाओ तब रहूंगी। दोस्त ने कई बार सैन्य परिवार आवास भी लिया। लेकिन वो आने को राजी नहीं हुयी। अब दोस्त तलाक लेना चाहता है लेकिन बीबी तैयार नहीं है, ना ही उनके घर आने को तैयार है। वह अभी किसी प्राइवेट फार्म में नौकरी कर रही है। मैं भी फौजी हूँ। प्लीज मेरे दोस्त की समस्या का समाधान बताये।

समाधान-

प के मित्र की पत्नी संभवतः आप के मित्र के साथ नहीं रहना चाहती है। कुछ तो है जिस के कारण वह आप के मित्र से दूर रह रही है। इस कारण का पता आप के मित्र को जरूर होगा। यदि यह कारण दूर हो जाए तो आप के मित्र की समस्या हल हो सकती है। यदि कारण मित्र को पता नहीं है तो पता करना चाहिए और समाधान निकालना चाहिए।

दि इस तरह के प्रयत्न हो चुके हैं और बात बनने की कोई संभावना नहीं है तो डेसर्शन (जीवन साथी के परित्याग) के आधार पर विवाह विच्छेद के लिए न्यायालय में आवेदन किया जा सकता है। यह आवश्यक नहीं है कि आपसी समझौते से ही विवाह विच्छेद हो। आप के मित्र भी अपनी ओर से विवाह विच्छेद का आवेदन कर सकते हैं।

प के मित्र सक्षम हैं। किसी अच्छे वकील से संपर्क करें और उन्हें अपनी समस्या बता कर उन से विवाह विच्छेद के लिए आवेदन तैयार करवाएँ और उन के निर्देशानुसार उस में पैरवी करें। समस्या का हल निकल आएगा। विवाह विच्छेद के लिए आवेदन करने करने का अर्थ यह नहीं कि विवाह विच्चेद ही होगा। न्यायालय भी काउंसलिंग करती और करवाती हैं। हो सकता है वहाँ कोई ऐसा हल निकल आए जिस से दाम्पत्य बना रह जाए और समस्या हल हो जाए।

परित्याग के आधार पर विवाह विच्छेद की अर्जी प्रस्तुत कर सकते हैं।

alimonyसमस्या-

विनायकराव सोनी ने बिछुआ, छिन्दवाड़ा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी पत्नी बिना कारणों से १०.१०.२०१३ से मुझे छोड़ कर अपने मायके में रह रही है। १४ माह का एक बेटा भी है। मैं उसे लाने भी गया, लेकिन वह मेरे साथ नहीं आयी और मुझे गाली गलौच कर वापस कर दिया। मैं जब भी उसे फोन करता हूँ समझाने का प्रयास करता हूँ वह मुझे खुब गलियाँ देती है जो कि मेरे फोन में रिकोड भी हैं। मैंने दाम्पत्य की पुनर्स्थापना हेतु धारा ९ हिन्दू विवाह अधिनियम का आवेदन भी १२.०३.२०१४ को न्यायालय मे पेश किया था लेकिन वह एक भी पेशी पर अदालत नहीं आई। मैंने केस वापस ले लिया है। क्या मैं तलाक का केस लगा सकता हूँ, इसके आधार क्या होंगे।

समाधान-

प ने दाम्पत्य की पुनर्स्थापना का आवेदन वापस ले कर गलती की है। यदि आप की पत्नी नहीं आ रही थी तो आप एक तरफा डिक्री करवा सकते थे और डिक्री की पालना करने के लिए नोटिस भेज सकते थे। यदि वह एक वर्ष तक नहीं आती तो आप इसी आधार पर विवाह विच्छेद की अर्जी दे सकते थे।

ब आप के पास एक आधार तो यह है कि आप की पत्नी एक वर्ष से बिना किसी आधार के आप से अलग रह रही है और उस ने आप को एक वर्ष से अधिक समय से खुद से अलग रख कर आप का परित्याग किया है। आप परित्याग के इसी आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन आप को इस अर्जी को दाखिल करने के पहले किसी अच्छे वकील से संपर्क कर के उसे पूरी बात बतानी चाहिए। शायद वह आप से बातचीत के उपरान्त कुछ और भी आधारों की तलाश कर सके।

पहले पता लगाएँ कि आप कि पत्नी आप के साथ क्यों नहीं रहना चाहती, बाद में उपाय तलाशें।

Say-Noसमस्या-

दिब्यविजय चंदेल ने भाटापारा, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मेरा विवाह 19 जून 2012 को हिन्दू रीती रिवाज सेहुआ था।परन्तु विवाहके एक सप्ताह के बाद से ही मेरी पत्नी मुझे छोड़करअपनी मम्मी पापा के यहाँ रहती है, और मेरे पास आने से इनकार करती है। मुझे उनके घर वालों से कई तरह की धमकियां भी मिलती रहती हैं। जिस के कारण मेरेमम्मी पापा और मैं दहशत में रहता हूँ। आज 2 वर्ष से अधिक समय हो चुका है इनदो वर्षो में मैं लगातार कई बार अपनी पत्नी को वापस लेने के लिए कुछ लोगों कीमदद लेकर अपनी पत्नी के घर जा चुका हूँ। परन्तु मेरे पत्नी के पिता तथा भाईने भेजने से इनकार कर दिया तथा मुझे झूठे मामले में फ़ँसाने की धमकियां दी गईँ। जिस से मुझे वापस लौटना पड़ा। अब जब मैं फोन पर संपर्क करके कहता हूँ किअगर नहीं रहना चाहती तो तलाक ले लो। पर तलाक लेने से भी इनकार करती है। कृपया मेरी मार्ग दर्शन करें कि मैं क्या करूँ?

समाधान-

प की समस्या का समाधान यह है कि आप को हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अन्तर्गत दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए। लेकिन आप को इस बात का भय है कि आप की पत्नी आप पर झूठे आरोप लगा कर आप को धारा 498-ए व 406 आईपीसी के मुकदमे में फँसा सकती है जिस में आप की तथा आप की माता जी की गिरफ्तारी हो सकती है। साथ में आप के माता पिता को भी लपेट सकती है। इस के साथ ही वह धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता, धारा 24 हिन्दू विवाह अधिनियम में तथा घरेलू हिंसा अधिनियम में आप से खर्चे की मांग भी कर सकती है। आप का यह भय अकारण नहीं है क्योंकि ऐसा सामान्य रूप से हो रहा है।

प ने अपनी समस्या तो बताई लेकिन इस बात का कारण नहीं बताया कि आप की पत्नी ऐसा क्यों कर रही है और उस के माता पिता उस का साथ क्यों दे रहे हैं? क्यों कि आप की पत्नी और उस के माता पिता के इस व्यवहार के पीछे कोई न कोई तो कारण रहा होगा।

हो सकता है उसे आप का साथ, आप के परिवार का माहौल समझ नहीं आया हो और वह आप के साथ आप के घर के माहौल में न रहना चाहती हो। हो सकता है आप की अपेक्षाएँ आज के जमाने मे पत्नी को होने वाली अपेक्षाओं से अधिक हों। हो सकता है पत्नी के अपने निजी कारण हों।

क आम कारण यह है कि हमारे यहाँ विवाह के पहले लड़के लड़की मिलते तक नहीं है। एक बार देख लेना या एक दो बार कैजुअली बात कर लेना विवाह के पहले समझ बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होता। लड़के और लड़की को पहले ही एक दूसरे को समझने का अवसर मिलना चाहिए। विशेष रूप से लड़की को उस परिवार के सभी सदस्यों और माहौल के बारे में जानने का अवसर मिलना चाहिए जिस में उसे जा कर रहना है। लड़के को भी लड़की की मनोवृत्ति और अपने परिवार में उस की एडजस्टेबिलिटी के बारे में सोचना चाहिए। पर ऐसा नहीं होता। जिस का नतीजा वही होता है जो आप भुगत रहे हैं या आप की पत्नी को देखना पड़ रहा है।

प को उन कारणों का पता लगाना चाहिए जिन के कारण आप की पत्नी एक सप्ताह आप के साथ रह कर अब आप के साथ नहीं रहना चाहती और न ही विवाह विच्छेद करने को सहमत है। इन कारणों का पता लगाए बिना कोई भी कानूनी उपाय करना आप के लिए गलत हो सकता है जिस के परिणाम बुरे भी हो सकते हैं। यदि आप किसी तरह आप की पत्नी के आप के साथ न रहने के वास्तविक कारण का पता लगा लें तो हमें बताएँ हो सकता है हम कोई उचित आप के लिए खोज कर बता सकें। आप के इतना कह देने से कि एक सप्ताह के बाद आप की पत्नी आप के साथ रहने को तैयार नहीं है हम आप की मदद करने में स्वयं को अक्षम पाते हैं।

पत्नी के विरुद्ध कोई भी कार्यवाही करने के पहले तीन वर्ष पूरे होने दीजिए।

divorceसमस्या-
संजय धामेचा ने चम्पा, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मेरी पत्नी पिछले ढाई साल से अपने मायके मेरे 6 साल के बच्चे के साथ रह रही है।  मेरी शादी 14 फरवरी 2007 को हुई थी। इस के बाद घर में मेरे माँ बाप के साथ इस की न बनने के चलते ये दो बार आपने मायके चली गई थी।  इस की शर्तों को मानकर मैं दोनों बार इसे ले आया। अलग से घर किराये पर ले कर रहा। लेकिन अकेले घर न सम्भाल पाने (काम वाली बाई रहने के बावजूद) के कारण ये मुझ से छोटो छोटी बातों पर झगड़ने लगी और एक दिन मेरे साथ मारपीट भी कि जिसे देखकर मेरे पिता ने इस के माँ बाप को बुलाकर इसे वापस भेज दिया।  इन ढाई साल के दौरान एक बार मेरे माँ बाप और एक बार मैं इसे लेने गए लेकिन नए या दूसरे मकान में रहूंगी बोलकर नहीं आई। पहले हम दूसरा घर भी ले चुके है लेकिन ये रह ही नहीं पाती और मेरी माँ कभी भी गलत नहीं है तो किस आधार पर मैं उसकी शर्त मानूं? मुझे मेरे बच्चे की भी चिंता है। आज ढाई साल बाद वह मुझे फ़ोन पर कहती है कि दम है तो यहाँ आकर हमें लेकर जाओ। मुझे समझ नहीं आ रहा ये किस तरह का समझौता है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

ज कल परिवारों का ढाँचा पहले की अपेक्षा बहुत बदल चुका है और लगातार बदल रहा है। शादी की उम्र बढ़ गई है। लेकिन हमारे यहाँ शादियों का ढर्रा वही पुराना चला आ रहा है। शादियों का पुराना ढर्रा नए ढाँचे के साथ मेल नहीं खा रहा है। यह अन्तर्विरोध विवाहों में बहुत खलल पैदा कर रहा है। आप को जिस तरह की समस्या आ रही है वैसी समस्याएँ बहुत आम हो गई हैं।

जिस तरह आप कह रहे हैं कि आप की माँ गलत नहीं है। आप की पत्नी भी यही सोचती होगी कि उस के माता-पिता गलत नहीं हैं। पर यह आप दोनों की सोच है। फिर भी आप की स्थिति बहुत विकट है। जिस तरह आप की पत्नी ने आप के साथ मारपीट की और अब कहती है कि दम हो तो यहाँ आ कर हमें ले कर जाओ। उस से लगता है कि उस का आप के साथ रहने का मन है। बच्चे की चिन्ता होना भी स्वाभाविक है। फिर विवाहित होते हुए अपनी पत्नी से अलग रहना आसान काम नहीं है।

प ने ढाई वर्ष जैसे निकाले हैं, कम से कम छह माह या एक वर्ष और निकालिए। इस अवधि में आप अपनी ओर से शान्त रहिए और न आप के माता पिता और न ही आप स्वयं अपनी ससुराल जाइए। इस से यह होगा कि आप दोनों का अलगाव तीन वर्ष से अधिक का हो जाएगा। तब एक संकट आप का हल हो जाएगा कि आप की पत्नी आप के विरुद्ध धारा 498-ए आईपीसी और घरेलू हिंसा की कोई झूठी शिकायत नहीं कर सकेगी। यदि वह करेगी भी तो उस में आप के लिए अच्छा प्रतिवाद होगा। यह छह माह या साल भर का समय और निकाल देने के उपरान्त आप अपनी पत्नी के विरुद्ध धारा-9 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत दाम्पत्य संबंधों की पुनर्स्थापना के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इस प्रार्थना पत्र की सुनवाई के दौरान कोई हल निकल सकता है या फिर आप के प्रार्थना पत्र पर आप को डिक्री प्राप्त हो सकेगी। आप की पत्नी फिर भी आप के साथ रहने को नहीं आती है तो आप एक वर्ष बाद विवाह विच्छेद के लिए आवेदन दे सकते हैं। बाद में आप बच्चे की अभिरक्षा के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।

पति और पुत्र को छोड़ कर प्रेमी के साथ भाग कर आप प्रेमी को अपराधी बना देंगी।

समस्या-

नागपुर, महाराष्ट्र से संजना ने पूछा है –

separationमेरी शादी को सात साल हुए हैं। मेरे एक चार वर्ष का बच्चा भी है। मैं अपने पति से खुश नहीं हूँ। मैं ने अपने पति से तलाक मांगा भी, लेकिन उस ने देने से इन्कार कर दिया। मैं किसी और से प्यार करती हूँ और वह भी मुझे बहुत प्यार करता है। उस की अभी तक शादी नहीं हुई है। हम दोनों शादी करना चाहते हैं। हम दोनों भाग जाएँ तो क्या होगा?

समाधान-

प के नाम से पता लगता है कि आप हिन्दू हैं। हिन्दू विधि के अनुसार हिन्दू विवाह एक विधिक संस्था है जो एक स्री व एक पुरुष का विवाह होने से अस्तित्व में आता है। जब एक बार कोई भी स्त्री-पुरुष एक विवाह में बंध जाते हैं तो दोनों एक दूसरे से विधिक रूप से कर्तव्यों और अधिकारों में बंध जाते हैं। हिन्दू विवाह केवल न्यायालय की डिक्री से अथवा जीवन साथी के मृत्यु पर ही समाप्त हो सकता है। एक विवाह में रहते हुए एक स्त्री और एक पुरुष दूसरा विवाह नहीं कर सकता। आप की भी स्थिति यही है कि जब तक आप अपने पति से विवाह विच्छेद की डिक्री न्यायालय के माध्यम से प्राप्त नहीं कर लेती हैं तब तक आप दूसरा विवाह नहीं कर सकतीं।

प के एक चार वर्ष का पुत्र भी है। आप पति से अप्रसन्न हैं और इसीलिए आप उन से तलाक चाहती हैं और एक अन्य युवक से जिसे आप प्यार करती हैं और वह भी प्यार करता है के साथ भाग जाना चाहती हैं। जब आप ने विवाह किया था तब आप अपने पति से न तो प्रसन्न थीं और न अप्रसन्न। क्यों कि आप अपने पति के साथ नहीं रही थीं। साथ रहने पर ही पता लगा कि आप उस के साथ प्रसन्न नहीं हैं।  आप ने उन के साथ सात वर्ष बिताए और अब अप्रसन्न हैं। अप्रसन्नता के कारण आप ने नहीं बताए हैं। लेकिन जिस युवक से आप प्यार करती हैं उस के साथ भी आप भी अभी तक नहीं रही हैं। आप यह निर्णय कैसे कर सकती हैं कि आप उस के साथ प्रसन्न ही रहेंगी? अर्थात् आप के जीवन में पति से अप्रसन्न रहते हुए भी एक निश्चितता है। लेकिन यदि आप उस युवक के साथ भाग गईं तो आप का जीवन पुनः अनिश्चित हो जाएगा। आप उस के साथ प्रसन्न रह सकती हैं यह निश्चित नहीं किया जा सकता।

प निश्चित रूप से अपने पुत्र को तो प्रेम करती होंगी। आप के भाग जाने से उसे भी आप को छोड़ना पड़ेगा और उस से व उस के प्रेम से वंचित हो जाएंगी। आप एक बच्चे को माँ के स्नेह और संरक्षण से वंचित कर देंगी। आप उसे साथ ले जाएंगी तो फिर आप उसे अपने पिता के संरक्षण और प्रेम से वंचित करेंगी। आप ने यह नहीं बताया कि आप के पति आप से प्रेम नहीं करते हैं। लगता तो यही है कि वे आप से प्रेम करते हैं, अन्यथा वे आप को तलाक देने को तैयार हो जाते।

प के उस युवक के साथ भाग जाने के बाद। आप के पति आप की तलाश करेंगे। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएंगे। पुलिस आप को व आप के प्रेमी को पकड़ कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी। आप की चिकित्सकीय जाँच भी होगी। जिस में सहज रूप से यह प्रमाणित हो जाएगा कि आप ने उस युवक के साथ यौन संबंध बनाए हैं। आप तो इस में किसी तरह के अपराध की दोषी नहीं होंगी लेकिन वह युवक आप के साथ यौन संबंध बनाने का अर्थात जारता का दोषी होगा क्यों कि वह जानबूझ कर एक ऐसी स्त्री के साथ यौन संबंध स्थापित करेगा जो कि किसी दूसरे की पत्नी है। उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 497 में पाँच वर्ष के लिए दंडित किया जा सकता है। ऐसी अवस्था में आप उस युवक के साथ किसी भी स्थिति में प्रसन्न नहीं रह सकेंगी। आप का घर उस प्रेमी युवक के साथ भी नहीं बसेगा। आप न तो घर की रहेंगी और न घाट की।

स अवस्था में आप के पास दो ही विकल्प हैं। एक तो आप अपने पति से विवाह विच्छेद के लिए न्यायालय को आवेदन करें और विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त करें फिर उस युवक के साथ संबंध बनाएँ। दूसरा विकल्प यह है कि आप जिन कारणों से अपने पति से अप्रसन्न हैं उन्हें अपने पति को बताएँ और उन से अपने मतभेद दूर कर के उन के साथ प्रेम पूर्वक जीवन निर्वाह करें। इस से आप को अपने पुत्र को भी नहीं छोड़ना पड़ेगा। आप चाहें तो अपनी इस समस्या के लिए किसी पारिवारिक काउंसलर की मदद भी ले सकती हैं जो आप को और आप के पति की काउंसलिंग कर के मतभेदों को सुलझाने में बड़ी भूमिका अदा कर सकता है।

विवाह विच्छेद हेतु क्रूरता और परित्याग के आधार

समस्या-

बीकानेर, राजस्थान से महेश कुमार पूछते हैं …

मैं पाँच वर्ष से विवाहित हूँ।  मेरी पत्नी विगत 10 वर्षों से द्विध्रुवीय विकार तथा तीव्र अवसाद (Bipolar disorder and acute depression) की समस्या से पीड़ित है।  मुझे अपनी पत्नी कि उक्त समस्या की जानकारी विवाह के दो वर्ष के बाद हुई।  मैं ने पतनी और उस के मायके वालों से इस संबंध में बातद की लेकिन वे इस समस्या को हल करने में मदद को तैयार नहीं हैं।  पत्नी ने मुझे धमकाया है कि वह मेरे ही सामने कूद कर आत्महत्या कर लेगी। अब वह पिछले दो वर्षों से अपने पिता के घर पर है।  मुझे वैधानिक विवाह विच्छेद के लिए क्या करना चाहिए?  मैं जानता हूँ कि उस की स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण मुझे विवाह विच्छेद प्राप्त नहीं हो सकता।

समाधान-

प का यह कहना सही है कि आप की पत्नी को जो स्वास्थ्य संबंधी समस्या है उसे आधार बना कर आप का विवाह विच्छेद नहीं हो सकता। यदि आप उन सारी परिस्थितियों और तथ्यों को कुछ विस्तार से प्रकट करते जिन के चलते आप की पत्नी उस के मायके में दो वर्ष है तो हमें आप को समाधान बताने में कुछ आसानी होती।

दि दो वर्ष से आप की पत्नी मायके में है तो संभवतः इस कारण से कि वह यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि उसे कोई स्वास्थ्य समस्या है और यदि है तो वह विवाह के पहले से है। संभवतः वे यह समझते हैं कि यह स्वीकार कर लेने से वे दोषी सिद्ध हो जाएंगे। आप को उन्हें यह समझाने का प्रयत्न करना चाहिए था कि यदि वे ये दोनों बातें स्वीकार कर भी लेते हैं तो भी विवाह पर कोई अंतर नहीं पड़ेगा। हो सकता है कि वे इस समस्या के चिकित्सकीय हल के तैयार हो जाते। खैर, वह समय निकल चुका है।

प ने पूरी सद्भावना के साथ अपनी पत्नी और उस के मायके वालों के समक्ष अपनी पत्नी के स्वास्थ्य के बारे में बात की उस समस्या के चिकित्सकीय हल की बात की है। यदि वे इस सद्भावना पूर्ण कृत्य को अन्यथा लेते हैं और आप को धमकाते हैं और आप की पत्नी अपने मायके जा कर बैठ जाती है तो निस्सन्देह यह आप के प्रति क्रूरतापूर्ण व्यवहार है। इस के साथ ही आप की ओर से कोई कारण न होने पर भी आप की पत्नी ने अपने मायके जा कर बैठ कर आप को दांपत्य जीवन से वंचित किया है। इस तरह उस ने विगत दो वर्षों से आप का परित्याग किया हुआ है।

प अपनी पत्नी के विरुद्ध क्रूरता और परित्याग के आधारों पर विवाह विच्छेद हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि इस बीच कोई समझौते की गुंजाइश निकलेगी भी तो न्यायालय के समक्ष निकल जाएगी। न्यायालय का स्वयं यह दायित्व है कि तलाक के प्रत्येक मामले में वह दोनों पक्षों के मध्य एक बार दाम्पत्य को बचाने हेतु समझाइश करे और दोनों के मध्य समझौता कराने का प्रयत्न करे।

पत्नी 6 वर्ष से नहीं आ रही है तो परित्याग के आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री हेतु आवेदन प्रस्तुत करें

समस्या-

रायसिंहनगर, राजस्थान से कृष्णलाल ने पूछा है-

मेरी शादी 21/05/06 को सीकर हुई थी।  शादी के बाद मेरी पत्नी केवल एक दिन के लिए ही मेरे घर आई।  शादी के साढ़े छः वर्ष बीतने के पश्चात भी मेरे ससुराल वाले मेरी पत्नी को मेरे साथ नहीं भेज रहे हैं।   मैंने सारी पंचायतें, रिश्तेदार बुलवाकर मसला हल करने की हर संभव कोशिश की पर कोई नतीजा नहीं निकला।   कृपया करके इसका उचित हल बताएं कि हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत मैं क्या कदम उठा सकता हूँ?  फिर तलाक के विकल्प के बारे में भी उचित सलाह दें?

समाधान-

विवाह के छह वर्ष से आप की पत्नी आप से पृथक है इस तरह उस ने आप का परित्याग किया हुआ है।  आप के पास तलाक के लिए परित्याग का मजबूत आधार है।  आप पत्नी को लाने के लिए समस्त प्रयत्न पंचायत और रिश्तेदारों के माध्यम से कर चुके हैं।  परित्याग को साबित करने के लिए पंचायत के सदस्य और रिश्तेदार मौजूद हैं जिन की गवाही और पंचायत ने कोई लिखित निर्णय किए हों तो वे सब आप को उपलब्ध हैं।  ऐसी स्थिति में आप को तुरंत इसी आधार पर हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 के अंतर्गत विवाह विच्छेद हेतु आवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। विवाह से संबंधित विवादों में देरी का परिणाम ठीक नहीं होता इस से एक साथ दो जीवन नष्ट होते हैं।

प के प्रश्न से ऐसा प्रतीत होता है कि आप अभी भी यह आस लगाए हैं कि शायद न्यायालय के दखल से आप की पत्नी आप के पास आ कर रहने लग सकती है। लेकिन इस की संभावना कम प्रतीत होती है।  फिर भी हर वैवाहिक मामले में न्यायालय का कर्तव्य है कि वह पति पत्नी के बीच समझौते का प्रयत्न करे।  आप के द्वारा विवाह विच्छेद हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर भी न्यायालय द्वारा यह प्रयत्न किया जाएगा। यदि आप को लगे कि पत्नी वापस आ कर आप के साथ रहने को तैयार है तो वहाँ समझौता किया जा सकता है।  यदि नहीं तो साक्ष्य से परित्याग साबित कर के विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त की जा सकती है।

मध्यस्थों के माध्यम से दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना अथवा सहमति से तलाक के लिए प्रयत्न करें

समस्या-

मेरा विवाह मई 2003 में हुआ था। पत्नी मार्च 2004 में मेरे परिवार वालों पर गलत आरोप लगा कर और मेरे परिवार को बदनाम कर के चली गई तथा मार्च 2004 से उस के मायके में रह रही है।  हम कई बार उसे लेने भी गए पर वह वापिस नहीं आई। अभी जनवरी 2012 में हमारे समाज के कुछ लोग बीच में पड़े और मेरी पत्ती को मेरे घर छोड़ गए।  वह रात भर रही और दूसरे दिन सुबह वापस अपने मायके चली गई। जाते समय बोलती गई कि यदि तुम अपने माता-पिता से अलग रहो तो ही मैं आप के साथ रहूंगी। मैं अपने माता-पिता से अलग नहीं रहना चाहता हूँ। क्या मैं तलाक के लिए अर्जी दे सकता हूँ।

-शैलेष श्रीमाली, अहमदाबाद, गुजरात

समाधान-

प की पत्नी मार्च 2004 से जनवरी 2012 तक स्वैच्छा से आप से अलग रही। आप के कई बार लेने जाने पर भी वह नहीं आई। उस ने किसी तरह की कोई कार्यवाही न्यायालय में भी संस्थित नहीं की। इस का सीधा अर्थ यह है कि वह आप के साथ नहीं रहना चाहती है। यदि वह आप को अपने माता-पिता से अलग कर के आप के साथ रहना चाहती है तो उस के पीछे कोई ठोस कारण होना चाहिए। इस तरह यदि आप की पत्नी के पास इस के लिए कोई ठोस कारण नहीं है तो इस का अर्थ यह है कि उस ने आप को पिछले आठ वर्ष से वैवाहिक संबंधों से दूर रखा है। यह एक आधार है जिस के आधार पर आप उस के विरुद्ध तलाक का मुकदमा दाखिल कर सकते थे। लेकिन आप ने भी उस के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की। आप उस के विरुद्ध दाम्पत्य संबंधों की पुनर्स्थापना के लिए भी कार्यवाही संस्थित कर सकते थे वह भी आपने नहीं की है।

ब जनवरी में आप की पत्नी एक रात आप के घर में रही है। उस रात आप के संबंध उस के साथ कैसे रहे हैं यह स्पष्ट नहीं है। यदि उस रात आप के साथ उस का कोई शारीरिक संबंध नहीं रहा है तो आप उस के विरुद्ध धारा 13 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत तलाक का मुकदमा इस आधार पर कर सकते हैं कि उस ने विगत आठ वर्षों से आप के साथ दाम्पत्य जीवन का त्याग कर रखा है। आप चाहें तो तलाक का मुकदमा न कर के हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा- 9 के अंतर्गत दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना का मुकदमा भी दायर कर सकते हैं। यदि उस मुकदमे में उस का जवाब नकारात्मक रहता है तो उसी मुकदमे को आप विवाह विच्छेद के मुकदमे में परिवर्तित करवा सकते हैं।

दि आप तलाक के लिए अथवा दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए अपनी पत्नी के विरुद्ध मुकदमा करते हैं तो आप की पत्नी धारा-24 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत मुकदमे का खर्चा, आने जाने का खर्चा और मुकदमे के दौरान भरण पोषण के खर्चे की मांग कर सकती है, न्यायालय इस आवेदन को सहज ही स्वीकार कर लेगा और आप को न्यायालय के आदेश के अनुसार धन आप की पत्नी को देना होगा। इस के अतिरिक्त आप की पत्नी आप के विरुद्ध धारा 125 दं.प्र. संहिता के अंतर्गत भी भरण पोषण का आवेदन प्रस्तुत कर सकती है जो स्वीकार किया जा सकता है और वह भऱण पोषण राशि भी आप को देनी होगी। इन में से जो भी भरण पोषण आदेश बाद में होगा उस में न्यायालय पिछले आदेश को तब ध्यान में रखेगी जब आप उसे इसे ध्यान में रखने का निवेदन करेंगे। आप की पत्नी आप के विरुद्ध धारा 498-ए व धारा 406  भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत फर्जी या वास्तविक अपराधिक मामला भी चला सकती है। जिस में साक्ष्य प्राप्त होने पर आप को पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी किया जा सकता है।

प को इन सभी बातों को ध्यान में रख कर कोई विधिक कार्यवाही करनी होगी।  इस के लिए आप को अपने नजदीक के अच्छे वकील से राय करनी चाहिए। मेरी राय यह है कि आप दोनों के बीच यदि दाम्पत्य की कोई संभावना नहीं है और आप की पत्नी आप के साथ रहने की इच्छुक नहीं है तो आप के समाज के जो लोग आप की पत्नी को आप के घर छोड़ कर गए थे उन की मध्यस्थता का लाभ उठा कर बातचीत करनी चाहिए और हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के अंतर्गत दोनों पक्षों की सहमति से विवाह विच्छेद के लिए आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए। यह आवेदन का निर्णय एक वर्ष से कम की अवधि में हो सकता है।

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