Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Mutation Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक नामान्तरण न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

बिजली सुविधा प्राप्त करने का अधिकार हर नागरिक को है, चाहे वह किराएदार ही क्यों न हो।

rp_judge-caricather.jpgसमस्या-

पूनम चौहान ने रतलाम, मध्यप्रदेश से पूछा है-

म किराए के मकान में 30 वर्ष से निवास कर रहे हैं। हमारे मकान मालिक द्वारा बिजली सुविधा नहीं दी गयी है जिस के कारण हम  कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हम मकान का किराया कोर्ट में जमा करते हैं। क्या हमें कानूनन बिजली सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है?

समाधान-

र नागरिक को बिजली सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है। किसी को इस कारण से बिजली सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह किराएदार है।

आप अपने मकान मालिक को नोटिस दीजिए कि वह आप के लिए बिजली सुविधा चालू करे। यदि वह नोटिस की समाप्ति के बाद भी बिजली सुविधा चालू नहीं करता है तो आप बिजली कंपनी से अपने नाम कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं।

यदि बिजली कंपनी आप को कनेक्श्न देने से मना करे तो आप न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर न्यायालय से आदेश करवा सकते हैं कि बिजली कंपनी आप को कनेक्शन प्रदान करे।

पिता की देनदारी का चुकारा तो करना होगा।

बिजली कनेक्शनसमस्या-

मुख़्तार अहमद ने सरायरंजन, समस्तीपुर, बिहार से समस्या भेजी है कि-

मने विद्युत वितरण कंपनी से विद्युत आपूर्ति प्रदान करने हेतु दिनांक 11/06/2014 को रसीद कटायी | नौ माह बाद दिनांक 15/03/2015 को विद्युत आपूर्ति मीटर सहित प्रदान कर दी गयी (किन्तु हमें लाइसेंस या आदेशपत्र का कागज नहीं दिया गया)| दिनांक 22/03/2015 को पिता के नाम पर पिछला बकाया का नोटिस दिया गया जो दिनांक 14/03/2015 को जारी किया गया है| पुत्र के नाम पर प्रदान की गयी विद्युत आपूर्ति का विच्छेदन कर दिया गया और मीटर भी जब्त कर लिया गया| पिता के नाम पर करीब 20 वर्ष पूर्व विद्युत आपूर्ति प्रदान की जाती थी| 1995 – 2003 और 2008 – 2010 के दरमियान ट्रांसफार्मर जलने के कारण विद्युत पूर्णतः ठप था| साथ ही 1995 के बाद हमारे यहां विद्युत का कनेक्शन नहीं था| किन्तु विभाग का कहना है कि पिता नाम पर विद्युत आपूर्ती चालू था और विपत्र भी ससमय प्रदान किया जाता था और 18/03/2013 को इनका विद्युत विच्छेदन कर दिया गया था| अतः परिसर पर बकाया रहने के कारण पुत्र के नाम विद्युत आपूर्ती प्रदान नहीं की गयी है| विद्युत अधीक्षण अभियंता ने बुलाई गई बैठक में निर्देश दिया है कि विद्युत आपूर्ति प्रदान करने के लिए और 1995 से आपूर्ती नहीं की गयी का आवेदन को एफिडेविट कराकर सम्बंधित अभियंता को दीजिये विद्युत आपूर्ती प्रदान कर दी जाएगी| अब मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान

जिस संपत्ति पर आप ने कनेक्शन लिया है उस पर पहले से बकाया है तो उस की देनदारी आप की है। आप को पिता की संपत्ति प्राप्त हुई है तो उस संपत्ति पर जो भी बकाया है वह तो आप को देना होगा। यदि पुरानी बकाया जो भी चली आ रही है उस का हिसाब पूछें, और बकाया गलत चली आ रही है तो हिसाब दुरुस्त कराएँ। यदि अभियन्ता शपथ पत्र मांग रहा है तो दे दें जिस से हिसाब सही हो सके और आप अपने पिता का बकाया का बिल चुका सकें।

दि शपथ पत्र देने के बाद भी आप का बिजली कनेक्शन एक दो सप्ताह में बहाल नहीं होता है तो तुरन्त उपभोक्ता मंच में शिकायत की जा सकती है। यदि उन्हें बकाय का ध्यान है तो जब नए कनेक्शन के लिए डिमांड नोटिस जारी किया गया तभी उन्हें बकाया की भी मांग करनी चाहिए थी। इस तरह कनेक्शन काटना उचित नहीं है। आप उपभोक्ता मंच में आवेदन देने के साथ ही तुरन्त बिजली कनेक्शन चालू करने की अन्तरिम राहत प्रदान करने हेतु भी आवेदन साथ में दे सकते हैं।

किराएदार किराया भी न दे, मकान खाली भी न करे और नल-बिजली के खर्चेों का भुगतान भी न करे तो क्या करें?

समस्या-

पानीपत, हरियाणा से दीपक पूछते हैं-

दि कोई किराएदार मकान खाली न करे और किराया भी न दे तो मकान मालिक को न्यायालय में जाना पड़ता है जिस से वह मकान खाली करवा सके और बकाया किराया वसूल कर सके। लेकिन जब तक न्यायालय का निर्णय नहीं आ जाता है तब तक क्या मकान मालिक को किराएदार का बिजली का खर्च भी भुगतना पड़ेगा? कृपया इस मामले में स्थिति स्पष्ट करें।

समाधान-

कानूनी सलाहबिजली और पानी की सुविधा का उपयोग एक मानवीय अधिकार है, वह किराएदार के लिए किराएदारी से जुड़ी एक सुविधा है और किराएदार का अधिकार भी है।  इन सुविधाओं को किराएदार सीधे बिजली व पानी की सप्लाई करने वाली संस्थाओं/ विभागों/ कंपनियों से प्राप्त कर सकता है। यदि मकान मालिक उस के इन अधिकारों में हस्तक्षेप करे तो किराएदार न्यायालय में अलग से प्रार्थना पत्र/ वाद प्रस्तुत कर इस तरह का आदेश प्राप्त कर सकता है कि किराएदार इन संस्थाओं/ विभागों/ कंपनियों से कनेक्शन  प्राप्त करे और मकान मालिक उस में कोई हस्तक्षेप न करे।

नेक मामलों में यह भी होता है कि पूरे मकान में एक ही बिजली पानी के कनेक्शन लगाए होते हैं और मकान मालिक और किराएदार या बहुत से किराएदार इन सुविधाओँ के खर्च को आपस में बाँट लेते हैं। जिस के लिए मकान मालिक और किराएदार के बीच कोई शर्त भी तय हो सकती है कि किराएदार बिलों का कुछ प्रतिशत हर माह मकान मालिक को देगा या कोई नियत तयशुदा राशि वह मकान मालिक को अदा करेगा। ऐसी स्थिति में किराएदार बिजली और पानी मकान मालिक के माध्यम से उन्हीं संस्थाओं/ विभागों/ कंपनियों से प्राप्त करता है। कभी कभी ऐसा भी होता है कि बिजली पानी का खर्च किराए की राशि में शामिल कर लिया जाता है। तब ऐसा माना जाएगा कि जो किराया किराएदार प्रतिमाह मकान मालिक को अदा करता है उस में बिजली पानी का पैसा भी सम्मिलित है।

न परिस्थितियों में पहली स्थिति में जब कि किराएदार संस्थाओं/ विभागों/ कंपनियों से सीधे अपने नाम बिजली पानी कनेक्शन ले कर इन सुविधाओँ का उपभोग करता है और सीधे उन्हें भुगतान करता है तब कोई झगड़ा मकान मालिक और किराएदार के बीच नहीं होगा। यदि किराएदार इन संस्थाओं/ विभागों/ कंपनियों को बिल का भुगतान नहीं करेगा तो वे उस का कनेक्शन काट देंगी और बकाया राशि का भुगतान प्राप्त करने के लिए उस के विरुद्ध कार्यवाही करेंगी। हाँ, यदि दोनों कनेक्शन पहले से मकान मालिक के नाम चल रहे होंगे तो ऐसी स्थिति में जो बकाया के बिल होंगे ये संस्थाएँ/ विभाग/ कंपनियाँ मकान मालिक से वसूल करेंगी। वैसी स्थिति में मकान मालिक के पास यही चारा है कि वह इन संस्थाओं/ विभागों/ कंपनियों को आवेदन कर के कनेक्शन को बंद करवा ले या कटवा ले और बकाया बिलों का भुगतान कर के उस राशि की वसूली के लिए किराएदार के विरुद्ध कार्यवाही करे।

दूसरी स्थिति तब उत्पन्न होती है जब बिल खुद मकान मालिक जमा करवाता है और किसी शर्त के अंतर्गत उस धन को या किराएदार वाले हिस्से को उस से किराए की राशि से अलग धनराशि के रूप में अथवा किराए की राशि में शामिल धनराशि के रूप में प्राप्त करता है।  इस दूसरी स्थिति में मकान मालिक किराएदार को पानी बिजली की राशि की बकाया का भुगतान करने और न देने की स्थिति में उस की दोनों सुविधाए समाप्त करने का नोटिस दे कर पर्याप्त समय के बाद इन सुविधाओं को बंद कर सकता है, किराएदार के नल बिजली के कनेक्शन काट सकता है।

किराएदारी के संबंध में जो कानून हैं वे भारत में अलग अलग राज्यों में भिन्न भिन्न हैं। प्राय: उन सभी में यह उपबंध है कि मकान मालिक किराएदार द्वारा नल बिजली की राशि का भुगतान अदा न करने पर किराया नियंत्रक के यहाँ आवेदन कर के नल बिजली के कनेक्शन काटने की अनुमति प्राप्त कर के नल बिजली के संबंध विच्छेद कर सकता है। लेकिन यदि वह इन की राशि बकाया होने की स्थिति में बिना किराया नियंत्रक की अनुमति के भी इन संबंधों का विच्छेद कर देता है तो किसी भी कानून में उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। किराएदार को भी यह अधिकार है कि यदि नल बिजली की कोई राशि बकाया नहीं है और नियमित रूप से इन राशियों को चुकाने को तैयार है तो वह न्यायालय से निर्देश प्राप्त कर सकता है कि मकान मालिक उस की इन सुविधाओं को चालू रखे और मकान मालिक द्वारा पुनः चालू न करने पर पृथक से लगवा ले।

प को चाहिए कि किराएदार से मकान खाली कराने व बकाया किराया वसूल करने का मुकदमे में आप ने जिस वकील की सेवाएँ प्राप्त की हैं उस से यह सलाह लें कि आप को किराएदार का कनेक्शन किराया नियंत्रक (अदालत) से अनुमति प्राप्त कर के काटना चाहिए या फिर बिना ऐसी कोई अनुमति प्राप्त किए काट देना चाहिए, और उस की सलाह के अनुसार कार्यवाही करनी चाहिए।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada