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महत्वपूर्ण सूचना

प्रिय पाठको!

तीसरा खंबा का सर्वर बदला जा रहा है। इस कारण से कुछ समय तक हम तीसरा खंबा में नयी पोस्ट नहीं डाल पा रहे हैं , क्यों कि वह सुरक्षित नहीं रह पाएगी।

पाठकों को इस से होने वाली असुविधा के लिए हमें खेद है।

हम जल्दी ही आप के बीच वापस लौटेंगे।

भवदीय –

संचालक

तीसरा खंबा

सूचना अधिकारी से सूचना प्राप्त न होने पर समय सीमा में अपील करें।

RTIसमस्या-

हरि शंकर ने मेरठ शहर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ का रहने वाला, पिछडी जाति (सोनार) से हूं। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है, घर पर ही कम्प्यूटर जॉब वर्क करके परिवार का पालन कर रहा हूं। मैंने अपने बेटे को वर्ष २००९ में जनपद मेरठ के ही एक इंजीनियरिंग कालेज में बीटेक में बैंक से शिक्षा ऋण लेकर प्रवेश दिलाया था। मेरे बेटे ने प्रत्येक वर्ष छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया था। वर्ष २०१३ में उसका कोर्स पूरा हो गया। इस दौरान कालेज ने उसे मात्र एक ही वर्ष की शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया। जैसा कि विदित है कि कालेज प्रबंध तंत्रों द्वारा छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले दिन प्रतिदिन उजागर हो रहे हैं। इसी को देखते हुए मैंने एक आरटीआई आवेदन कालेज सूचना अधिकारी तथा एक आरटीआई जन कल्याण अधिकारी जनपद मेरठ को दी। समय सीमा समाप्त होने पर भी कोई जवाब न मिलने पर पुन: एक रिमांइडर दिया। रिमांइडर पर मेरा प्रेषक में पता देखकर जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बिना लिफाफा खोले ‘रिफ्यूज्ड’ रिमार्क के साथ वापस भेज दिया। अत: आपसे निवेदन है कि मेरा सही मार्गदर्शन करने की कृपा करें कि मैं इस संबंध में क्या प्रक्रिया प्रयोग में ला सकता हूं। क्योंकि मुझे पूर्ण विश्वास है कि समाज कल्याण अधिकारी तथा कालेज प्रबंध तंत्र ने मिलकर छात्रवृत्ति/शुल्कप्रतिपूर्ति में भारी घोटाला कर बच्चों के हक पर डांका डाला है। यदि यह राशि हमें मिल जाये तो बैंक का कुछ भार उतर जायेगा।

समाधान-

ह एक सामान्य समस्या है। अनेक बार ऐसा होता है कि सूचना के लिए आवेदन प्रस्तुत करने पर समय सीमा में कोई उत्तर प्राप्त नहीं होता है। वैसी स्थिति में आवेदक को समय सीमा में सूचना अधिकारी से उच्च अधिकारी को अपील प्रस्तुत करना चाहिए और अपील से सन्तुष्ट न होने पर दूसरी अपील आयोग को करना चाहिए।

दि लोक सूचना अधिकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचना नहीं देते है या धारा 8 का गलत इस्तेमाल करते हुए सूचना देने से मना करता है, या दी गई सूचना से सन्तुष्ट नहीं होने की स्थिति में 30 दिनों के भीतर सम्बंधित लोक सूचना अधिकारी के वरिष्ठ अधिकारी यानि प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील की जा सकती है (धारा 19(1)।

दि आप प्रथम अपील से भी सन्तुष्ट नहीं हैं तो दूसरी अपील 60 दिनों के भीतर केन्द्रीय या राज्य सूचना आयोग (जिससे सम्बंधित हो) के पास की जा सकती है। (धारा 19(3)।

हो सकता है आप के मामले आप के द्वारा आवेदन दिए जाने के बाद अपील की अवधि समाप्त हो चुकी हो। वैसी स्थिति में आप नए सिरे से सूचना के लिए आवेदन कर सकते हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी अपने नियोजन के बारे में सूचनाएँ सूचना के अधिकार कानून में मांग सकते हैं।

RTIसमस्या-

शैलेश प्रकाश ने बेगूसराय, बिहार से समस्या भेजी है कि-

मैं आईओसीएल बरौनी रिफाइनरी में जून 2010 से पर्मनेंट एमपलोई हूँ। मेरा प्रमोशन 2014 के जुलाई में होना था, पर नही हुआ। मेरा कॉनफिडेंशियल रिपोर्ट (पर्फॉर्मेन्स रिपोर्ट) 2011, 2012, 2013, 2014 का हुआ था यह कैसे पता लगेगा। क्योंकि मैं ने जब अपनी कॉनफिडेंशियल रिपोर्ट (पर्फॉर्मेन्स रिपोर्ट) संबंधित ऑफीसर से जानना चाहा तो ओफिसर ने नहीं बताया। उन का कहना था कि ये नहीं बताया जाएगा। इस का क्या रास्ता है जिस से मुझे अपना कॉनफिडेंशियल रिपोर्ट (पर्फॉर्मेन्स) का पता लगे। जिस से मुझे पता लगे कि मेरा इस वर्ष की पर्फॉर्मेन्स कैसी रही?

समाधान-

प का संस्थान सार्वजनिक क्षेत्र का संस्थान है जिस में सूचना का अधिकार अधिनियम प्रभावी है। आप सूचना के अधिकार के अन्तर्गत आवेदन दे कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि आप के विगत वर्षों की परफोरमेंस (कॉन्फिडेंशियल) रिपोर्ट दी गई है या नहीं।

लेकिन आप कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट को देख नहीं सकते न ही पढ़ सकते हैं क्यों कि वह एक गोपनीय प्रलेख है। यदि आप को वह रिपोर्ट दे दी जाए या पढ़ा दी जाए तो वह गोपनीय नहीं रह जाएगी।

स संबंध में यह नियम है कि यदि आप की कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट में कोई नकारात्मक टिप्पणी होगी तो उसे प्रबंधन को आप को सूचित करना पड़ेगा। यदि आप की गोपनीय रिपोर्ट दी गई है और किसी नकारात्मक टिप्पणी की सूचना आप को नहीं दी गई है तो आप को यही समझना चाहिए कि आप के विरुद्ध कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं दी गई है। यदि दी भी गई हो तो उस का कोई उपयोग नहीं किया जा सकता। क्यों कि उस की सूचना आप को नहीं दी गई है। आप की पदोन्नति जुलाई 2014 में नहीं हो सकी है तो उस का कोई अन्य कारण रहा होगा। जब आप सूचना के अधिकार के अन्तर्गत सूचना मांगे तो आप यह सूचना भी मांग सकते हैं कि आप को जुलाई 2014 में पदोन्नत किया जाना था वह किस कारण से नहीं किया गया है।

केवल सूचनाएँ कृतियाँ नहीं हैं, उन पर कोई कॉपीराइट नहीं होता …

INTERESTING FACTSसमस्या-

मालेर कोटला, पंजाब से साहिल कुमार ने पूछा है-

मुझे तीसरा खंबा से कॉपीराइट से सम्बन्धित कुछ जानकारी चाहिए। मैं एक 11वीं कक्षा का छात्र हूँ और मेरा ब्लॉगर पर एक ब्लॉग www.interestingfactsinhindi.blogspot.com है। इस ब्लॉग पर मैं भिन्न-भिन्न चीजों के बारे में रोचक तथ्य डालता हूँ, जो कि मैं अंग्रेजी साइट्स से अनुवाद करता हूँ पर किसी एक साइट से नहीं बल्कि अलग अलग से करता हूँ। मेरा प्रश्न यह है कि  उन साइटस को कैसे पता चलेगा कि कोई उनकी सामग्री का अनुवाद करके कोई अपने ब्लॉग पर डाल रहा है, और वह पता चलने के बाद क्या कर सकते हैं। मैं उक्त ब्लॉग के अलावा एक ऐसा ब्लॉग भी बनाना चाहता हूँ जिस में कि मैं ज्ञान से संम्बंधित कई और भी चीजें डालना चाहता हूँ और उस की सामग्री भी शायद मैं इसी तरह से एकत्र करूँ। कृपया मेरी कॉपीराइट सम्बन्धी इस अज्ञानता और डर को दूर करें।

समाधान-

साहिल कुमार जी, सब सब से पहले तो मैं आप के श्रम की सराहना करना चाहता हूँ कि आप ज्ञानवर्धक तथ्यों को अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद कर के अपने उक्त ब्लाग पर डाल कर हिन्दी अंन्तर्जाल के पाठकों को यह ज्ञानवर्धक सामग्री उपलब्ध करवा रहे हैं। इस तरह आप वास्तव में हिन्दी की सेवा कर रहे हैं और उस समृद्ध भी कर रहे हैं। आप को इस कार्य के लिए बहुत बहुत बधाई¡ आप एक ब्लाग और भी ऐसा ही बनाना चाहते हैं। एक व्यक्ति के लिए दो ब्लाग निरन्तर चला पाना संभव नहीं होता। फिर वह भी तब जब आप एक विद्यार्थी हैं। आप को अभी अपने विद्यार्थी जीवन के लक्ष्य भी प्राप्त करने हैं। इस तरह आप को पूरा समय अपने अध्ययन में देना चाहिए। उस से समय बचने के बाद ही ब्लागिंग करनी चाहिए। मेरा आप को सुझाव है कि जो भी आप सामग्री प्रस्तुत करना चाहते हैं उसे एक ही ब्लाग पर डालें। इस से आप का ब्लाग जल्दी जल्दी अपडेट होगा और आप के पाठकों की संख्या में भी वृद्धि होगी। आप ने अपने ब्लाग पर सामग्री को विषयों के हिसाब से वर्गीकृत किया हुआ है इस कारण से यदि एक से अधिक विषयों की सामग्री को भी आप एक ही ब्लाग पर प्रस्तुत करेंगे तो आप के ब्लाग की रेटिंग भी अच्छी होगी। आप का ब्लाग बहुत उपयोगी सिद्ध हो और उस के पाठक निरन्तर बढ़ते रहें ऐसी मेरी शुभकामना है।

कापीराइट के संबंध में बहुत अधिक डरने की कोई जरूरत नहीं है। आप जिस तरह की सामग्री प्रस्तुत कर रहे हैं वह सामान्य ज्ञान से संबंधित सामग्री है। वह कोई कृति नहीं है। आप केवल कूछ सूचनाएँ अपनी भाषा में अपनी खुद की शैली में प्रस्तुत कर रहे हैं। इस तरह की सामग्री पर किसी तरह का कोई कापीराइट नहीं होता है। आप इस तरह की सामग्री बिना किसी भय के प्रस्तुत करते रह सकते हैं। यदि आप किसी मौलिक कलात्मक रचना का अनुवाद प्रस्तुत करेंगे तो ही कॉपीराइट का प्रश्न उत्पन्न होगा। अभी आप जो सामग्री प्रस्तुत कर रहे हैं वे किसी तरह की कृति का अनुवाद नहीं है, वे केवल सूचनाएँ मात्र हैं, उन पर किसी तरह का कापीराइट नहीं है।

केवल सूचना देने वाले के विरुद्ध ही धारा 182 भा.दं.सं. का मामला दर्ज किया जा सकता है

समस्या-

मेरे गांव के एक व्यक्ति ने एक होमगार्ड महिला के खिलाफ जिसके यहां वो पूर्व में काम किया करता था,   हरिजन उत्पीड़न अधिनियम के तहत मारपीट की रिपोर्ट लिखायी थी। पुलिस ने इस मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी है तथा अपनी रिपोर्ट में मेरे कुछ विरोधियों के इशारे पर उक्त होमगार्ड महिला के कहने पर मेरे खिलाफ 182 की रिपोर्ट भेज दी है।  जबकि उक्त व्यक्ति तथा उस मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं है।  हां, उपरोक्त महिला से हमारा विवाद है जो कि न्यायालय में प्रक्रियाधीन है।  क्या पुलिस मेरे खिलाफ कोई कार्यवाही कर सकती है? तथा क्या मैं इस मामले में पुलिस के विरुद्ध न्यायालय में कार्यवाही सकता हूँ?

-भूरिया, गोण्डा, उत्तर प्रदेश

समाधान-

भारतीय दंड संहिता की धारा 182 निम्न प्रकार है-

182. इस आशय से मिथ्या इत्तला देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग दूसरे व्यक्ति को क्षति कारित करने लिए करे- जो कोई भी लोक सेवक को कोई ऐसी इत्तला, जिस के मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, इस आशय से देगा कि वह उस लोक सेवक को प्रेरित करे या यह संभाव्य जानते हुए कि वह उस को तदद्वारा प्रेरित करेगा कि वह लोक सेवक –

(क) कोई ऐसी बात करे या करने का लोप करे जिसे वह लोक सेवक, यदि उसे उस सम्बन्ध में, जिस के बारे में ऐसी इत्तला दी गई है, तथ्यो की सही स्थित का पता होता तो न करता या करने का लोप न करता, अथवा…

(ख) ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग करते जिस उपयोग से किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ हो,

वह दोनो में से किसी भाँति के कारावास से, जिस की अवधि छह मास तक की हो सकेगी. या जुर्माने से जो एक हजारा रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

धारा 182 भा.दं.संहिता के उक्त पाठ से स्पष्ट है कि इस धारा का उपयोग केवल उस व्यक्ति के विरुद्ध किया जा सकता है जिस ने पुलिस को साशय कोई इत्तला दी हो। आप द्वारा वर्णित मामले में किसी अन्य व्यक्ति ने पुलिस को इत्तला दे कर रिपोर्ट दर्ज करवाई है।  इस मामले में आप की भूमिका केवल इतनी हो सकती है कि पुलिस ने अन्वेषण किया हो और आप का बयान धारा 161 भा.दंड.संहिता के अंतर्गत लिया हो. यदि पुलिस ने ऐसा किया है तो भी पुलिस आप के विरुद्ध धारा 182 में किसी अपराध की कार्यवाही करने हेतु न्यायालय से आवेदन नहीं कर सकती। इस कारण से आप को निश्चिंत रहना चाहिए।

स मामले में जब तक पुलिस आप के विरुद्ध कोई कार्यवाही न करे आप पुलिस के विरुद्ध न्यायालय में कोई कार्यवाही नहीं कर सकते। लेकिन यदि पुलिस आप के विरुद्ध कोई कार्यवाही करती है तो आप न्यायालय में कार्यवाही कर सकते हैं।  इस के अतिरिक्त वह व्यक्ति जिस ने होमगार्ड महिला के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवाई है वह पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट को चुनौती दे सकती है और न्यायालय में अपने साक्षियों के बयान करवा कर मामले में न्यायालय से प्रसंज्ञान लेने का आग्रह कर सकती है।

जेल से सूचना कैसे प्राप्त की जाए ?

समस्या-

मैं जिला जेल वाराणसी में दिनांक 21.04.2010 से 16.08.2010 तक एक मामले में बंद रहा।  मुझे यह सूचना चाहिए कि उस बीच मुझ से मिलने के लिए कौन कौन और किस किस तिथि को जेल आया था?  यह सूचना मुझे किस तरह मिल सकती है? इस के लिए मुझे क्या करना होगा? कृपया विस्तार से बताएँ।

अशोक तिवारी, वाराणसी, उत्तरप्रदेश

समाधान-

प को इस सूचना को प्राप्त करने के लिए एक आवेदन पत्र वरिष्ठ अधीक्षक, जिला जेल, वाराणसी (उ.प्र.) को सूचना के अधिकार के अंतर्गत देना होगा। आवेदन का प्रारूप निम्न प्रकार है –

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अनुबंध “A”

(3 नियम देखें)

आवेदन के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रारूप

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

सेवा में,

……………………………………………………………….

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1. आवेदक का पूरा नाम:  ……………………………………………………………………

2. पता:        ………………………………………………………………………………….

3. आवश्यक जानकारी के विवरण

(i) सूचना की विषय वस्तु – …………………………………………………………………..

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(ii) मांगी गई सूचना से संबंधित अवधि- …………………………………………………….

(iii) मांगी गई सूचना का विवरण -…………………………………………………………..

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(iv) सूचना डाक से प्राप्त करना चाहते हैं अथवा स्वयं -……………………………………..

(v) डाक से प्राप्त करने की स्थिति में साधारण डाक से अथवा स्पीड पोस्ट से -……………

……………………………………………………………………………………..

 

4. क्या आवेदक गरीबी रेखा से नीचे है:
(यदि हाँ, उसके सबूत की एक फोटोकॉपी दें)

स्थान:

तिथि:                                                                                        आवेदक के हस्ताक्षर

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प को इस आवेदन के साथ 10 रुपए का एक पोस्टल ऑर्डर लेखाधिकारी, वरिष्ठ अधीक्षक, जिला जेल, वाराणसी (उ.प्र.) के नाम का संलग्न करना होगा।  यह आवेदन पत्र आप स्वयं जिला जेल वाराणसी जा कर व्यक्तिगत रूप से दे सकते हैं और व्यक्तिगत रूप से सूचना भी प्राप्त कर सकते हैं।  आप चाहें तो यह सूचना आप डाक से भी प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन आवेदन व्यक्तिगत रूप से ही प्रस्तुत करना उचित होगा।

अपराध, जिनके होने या किए जाने की सूचना पुलिस या मजिस्ट्रेट को देना अनिवार्य है

कल सुमित राय की अगली जिज्ञासा है – – – 
किसी अपराध से प्रभावित वे व्यक्ति जो भय अथवा तथाकथित झंझट के नाम नाम पर अपराधियों के विरुद्ध मुख नहीं खोलते (अर्थात् स्वयं के प्रति भी मूकदर्शक बने रहते हैं), संविधान में ऐसा संशोधन किस प्रकार कराया जाये कि दूसरों अथवा स्वयं पर हुए अन्याय के प्रति मूकदर्शक बने रहने वाले, सब पता होते हुए भी विरोध न करने वाले व्यक्तियों के साथ भी अपराधियों जैसा बरताव किया जाये?
उत्तर – – – 
सुमित जी,
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 39 में यह उपबंधित किया गया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 121 से 126 और धारा 130 (राज्य के विरुद्ध विनिर्दिष्ट अपराध), धारा 143,144,145,147 और 148 (लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराध), धारा 161 से 165-क (अवैध परितोषण से संबद्ध अपराध), धारा 272 से 278 (खाद्य और औषधियों के अपमिश्रण से संबंधित अपराध), धारा 302,303 और 304 (जीवन के लिए संकटकारी अपराध), धारा 364क (फिरौती आदि के लिए अपहरण से संबंधित अपराध), धारा 382 (चोरी करने के लिए मृत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी के बाद चोरी का अपराध), 392 से 399 और धारा 402 (लूट और डकैती के अपराध), धारा 409 (लोक सेवक द्वारा अपराधिक न्यास भंग/अमानत में खयानत का अपराध), धारा 431 से 439 सं9पत्ति के विरुद्ध रिष्टी mischief का अपराध), धारा 449 व 450 (गृह अतिचार के अपराध), धारा 456 से 460 (प्रच्छन्न गृह अतिचार के अपराध) 489ए से 489ई तक (करेंसी नोटों और बैंक नोटों से संबंधित अपराधों) के  अंतर्गत दंडनीय अपराध के किए जाने या किए जाने के आशय से अवगत  व्यक्ति पर उस की सूचना निकटतम मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को देने का दायित्व निर्धारित किया गया है। 
सामान्यतया किसी अपराध की सूचना किसी मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को देने वाले व्यक्ति का यह दायित्व होता है कि वह ऐसी सूचना के लिए उचित प्रतिहेतु प्रदर्शित करे। लेकिन उक्त धाराओं के अपराधों की सूचना देने के लिए किसी उचित प्रतिहेतु की आवश्यकता नहीं है। 
क्त अपराधों की जानकारी होने पर भी किसी मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को उन की सूचना न देने के दायित्व को पूरा न करना भारतीय दंड संहिता की धारा 176 व 202 के अंतर्गत दंडनीय अपराध घोषित किया गया है जिस के लिए उस व्यक्ति को छह माह के कारावास या जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
स तरह जिस तरह का उपबंध आप कानून में देखना चाहते हैं वह कुछ गंभीर अपराधों के लिए पहले से मौजूद है। सभी तरह के अपराधों के लिए ऐसा उपबंध बनाया जाना संभव नहीं है। हाँ, यह कहा जा सकता है कि कुछ और अपराधों को धारा 39 दं.प्र.सं. की सूची में सम्मिलित किया जाना चाहिए। इस के लिए मांग उठाई जा सकती है आप भी विधि आयोग को इस संबंध में अपनी राय और सुझाव प्रेषित कर सकते हैं।

विस्तृत लोक हित का समर्थन करने वाली सूचनाएँ

मृत्युञ्जय जी ने पूछा है…..
कृपया मुझे सूचना का अधिकार  अधिनियम 2005 की धारा 8 (1) के (घ) और (ङ) को सामान्य भाषा में बताने का कष्ट  करेंगे(व्याख्या)?  मैंने इस कानून के तहत स्थानीय बी एस एन एल कार्यालय से कुछ जानकारीयाँ प्राप्त करना चाहा परंतु उपरोक्त कंडिकाओं का सहारा लेकर जानकारी देने से इंकार किया जा रहा है। 
उत्तर…..
मृत्युञ्जय जी,
आप ने सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 8 के बारे में पूछा है।  इस कानून की इस धारा के अंतर्गत यह कहा गया कि मांगे जाने पर किन बातों की सूचना देने की बाध्यता नहीं होगी।  धारा 8 (1) के अंतर्गत कंडिका (घ) और (ङ) निम्न प्रकार हैं-
(घ) सूचना जिस में वाणिज्यिक विश्वास, व्यापार गोपनीयता, या बौद्धिक संपदा सम्मिलित है।, जिस के प्रकटन से किसी तृतीय पक्ष की प्रतियोगी स्थिति का को नुकसान होता है, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी को यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसी सूचना के प्रकटन से विस्तृत लोकहित का समर्थन होता है। 
(ङ) किसी व्यक्ति को उस की वैश्वासिक नातेदारी में उपलब्ध सूचना, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता कि ऐसी सूचना के प्रकटन से विस्तृत लोक हित का समर्थन होता है
आप ने बीएसएनएल से सूचनाएँ चाही हैं जो कि एक व्यापारिक संस्थान है और अनेक अन्य व्यापारिक संस्थानों के साथ अनुबंध रखता है जो कि उसी प्रकार के व्यवसाय में हैं जिस में बीएसएनएल भी है।  यदि आप के द्वारा चाही गई सूचनाओं में (वाणिज्यिक विश्वास) उदाहरणार्थ कोई ऐसी सूचना जो दो व्यापारियों के बीच है और ग्राहकों तक नहीं पहुँचनी चाहिए,  कोई व्यापारिक गोपनीयता या बौद्धिक संपदा सम्मिलित है उस सूचना के देने से बीएसएनएल और आप के अतिरिक्त किसी भी तीसरे पक्ष की व्यापार में प्रतियोगी स्थिति को नुकसान पहुँचता है तो ऐसी सूचना आप को नहीं दी जा सकती है। 
इसी तरह यदि कोई सूचना किसी को विश्वासिक नातेदारी के माध्यम से प्राप्त हुई है, अर्थात काम के सामान्य व्यवहार के अलावा किसी मित्र, संबंधी या मालिक नौकर जैसे संबंधों के माध्यम से प्राप्त हुई हो तो ऐसी सूचना भी आप को नहीं दी जा सकती। 
इस तरह की सूचनाएँ तभी दी जा सकती है जब कि यह समाधान हो जाए कि यह आम जनता या आम ग्राहकों के हित में है। सूचना प्राप्त करने के लिए आप को यह बताना पड़ेगा कि मांगी गई सूचना में कोई वाणिज्यिक विश्वास, व्यापार गोपनीयता, या बौद्धिक संपदा सम्मिलित नहीं है अथवा वह वैश्वासिक नातेदारी के माध्यम से प्राप्त होने के स्थान पर व्यवहार के सामान्य क्रम में प्राप्त हुई है। 
आप के द्वारा चाही गई सूचनाएँ यदि उक्त कोटि की हैं तो भी आप उन्हें प्राप्त कर सकते हैं लेकिन आप को यह बताना होगा कि मांगी गई सूचना लोक हित में आवश्यक है। यदि दोनों में से कोई एक या दोनों बातें आप के पक्ष में हैं तो आप  सूचना अधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपनी शिकायत आगे दर्ज करवा सकते हैं। 


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