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प्रेम कोई अपराध नहीं, मन से हर तरह का भय निकाल दें।

समस्या-

संदीप ने उत्तम नगर,दिल्ली से समस्या भेजी है कि-

मेरा एक लड़की से रीलेशन था। वो मुझसे शादी भी करना चाहती थी। लेकिन उसके घर में मेरे बारे में पता लग गया और उसके मामा ने ओर माँ-बाप ने लड़की को डरा कर मुझ पर धारा 354 आईपीसी का मुकदमा दर्ज करवा दिया। क्योंकि हमारा रीलेशन इंटरकास्ट है ओर पुलिस भी उन्हीं का साथ दे रही है। जिस दिन एफआईआर हुई उस दिन भी बात हुई थी लेकिन शाम को ये जब हो गया,  मैं उनके घर पे शादी की बात करने गया।  उन्होने मुझे घर आने से पहले ये सब कर दिया। 2 महीने हो गये एफाईआर की कॉपी भी नहीं मिली थाने में जमानत हुई है। फोन भी जमा है।  लड़की वालों को जब थाने में उसके मेरे बारे में पूरा सच पता चला तो वो केस वापस लेने की कहने लगे। पुलिस वाले मुझे ही डरा रहे हैं। अब मैं क्या करूँ?

समाधान-

संदीप जी, सब से पहले तो आप डरना बंद कर दीजिए। आप ने लड़की से प्रेम किया है तो करते रहिए। पुलिस ने जब थाने में जमानत ले ली है तो अब वह अधिक से अधिक न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत करेगी। वहाँ भी आप की जमानत हो कर मुकदमा चलेगा। मुकदमा लड़िए, अच्छा वकील कीजिए। मुकदमा फर्जी है तो एक दिन खारिज हो जाएगा। आप का प्रेम देख कर हो सकता है लड़की को भी हिम्मत आ जाए और वह अदालत में सच बोले और कहे कि मैं तो संदीप से विवाह करना चाहती हूँ। लेकिन अन्तर्जातीय होने के कारण मेरे परिवार वालों ने मुझे धमका कर यह मुकदमा चलाया है। हो सकता है वह खुद अदालत से कहे कि वह अब अपने माता पिता के साथ नहीं आप के साथ विवाह कर के रहना चाहती है मुझे और संदीप को सुरक्षा प्रदान की जाए।

जो मैं ने बताया वह अच्छी वाली संभावनाएँ हैं। यदि लड़की को हिम्मत न आई तो  एक दिन यह मुकदमा खारिज हो जाएगा। लड़की का विवाह किसी दूसरे व्यक्ति के साथ हो जाएगा। आप उसे फिर भी प्रेमं करते रह सकते हैं। लेकिन इस का अर्थ यह नहीं कि आप किसी अन्य स्त्री से विवाह न करें, अपना घर न बसाएँ। बस आप के प्रेम में जो देह का मिलन था वही नहीं हो सकेगा। प्रेम में यह जरूरी भी नहीं। और यह भी किसी किताब में नहीं लिखा है कि एक व्यक्ति  किसी एक से ही प्रेम करे। प्रेम का अर्थ दैहिक संबंध नहीं है। अंत में एक बार और कहूंगा कि आप ने कोई अपराध नहीं किया है इस कारण किसी भी तरह का भय मन से निकाल दें और समस्या का मुकाबला करें।

पत्नी के साथ प्रेमिका से संबंध रखते हुए दोनों के अधिकारों की बात करना पाखंड है।

rp_two-vives.jpgसमस्या-

 दीपक शर्मा ने पानीपत, हरियाणा से पूछा है-

मेरी शादी को 7 महीने हो गये हैं, लेकिन मैं किसी और से प्यार करता हूँ, जिससे मैं शारीरिक संबंध भी बना चुका हूँ। एक माह के बच्चे का अबोर्शन भी करवा चुका हूँ। इन सब बातों को मैं अपनी पत्नी को भी बता चुका हूँ।  मैं अपनी प्रेमिका को अपने साथ ही रखना चाहता हूँ। इस से मेरी पत्नी को भी कोई परेशानी नहीं है। लेकिन मैं अपनी पत्नी को भी नहीं छोड सकता। कृपया मुझे कोई तरीका बताएँ जिससे मैं दोनों को एकसाथ रखते हुए उनको समान अधिकार दिलवा सकूँ। कृपया मुझे उचित समाधान बताएँ?

समाधान-

प ने यह क्या कर लिया है और अब क्या करने जा रहे हैं? औरत कोई वस्तु या पालतू पशु नहीं है जो पूरी तरह पुरुषों की पालतू हो कर रहने लगेगी। आप की समस्या में सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी पुरुष एक से अधिक पत्नी नहीं रख सकता। विवाह के उपरान्त पत्नी के सिवाय दूसरी स्त्री से यौन संबंध नहीं रख सकता। यदि दूसरी स्त्री से संबंध रखेगा तो पत्नी इसी आधार पर उस से अलग रहने और भरण पोषण प्राप्त करने की अधिकारी तो होगी ही वह आप से तलाक की भी अधिकारी होगी और जब तक वह पुनर्विवाह नहीं कर लेती है तब तक आप से भरण पोषण प्राप्त करने की अधिकारी होगी।

पत्नी का अधिकार तो तभी भंग हो गया जब आप ने उसे बता दिया कि आप किसी को प्रेम करते हैं और साथ रखना चाहते हैं। यदि आप उसे घर नहीं भी लाते और बाहर ही प्रेमिका से संबंध रखते हैं तब भी पत्नी का अधिकार तो बाधित हो ही गया। प्रेमिका से विवाह न कर के दूसरी स्त्री से आप ने विवाह किया इस तरह प्रेमिका के पत्नी बनने के अधिकार को समाप्त ही कर दिया है। इस कारण आप दोनों के अधिकारों की बात तो न ही करें। पत्नी के साथ प्रेमिका से संंबंध रखते हुए दोनों के अधिकारों की बात करना पाखंड है।

आप ने दूसरा विवाह कर के गलती की है। आप को दोनों में से किसी एक को त्यागना पड़ेगा। आप तीनों मिल कर यह तय कर लें कि आप किस के साथ रहेंगे। यदि पत्नी के साथ रहना है तो प्रेमिका को त्याग दें। यदि प्रेमिका को छोड़ नहीं सकते हैं तो पत्नी से तलाक ले लें। उसे जो कुछ देना हो दें और खुद उस का दूसरा विवाह कराएँ। यही बेहतर है। वर्ना आप तीनों की उम्र आपस में कानूनी लड़ाइयाँ लड़ते लड़ते गुजर जानी है।

आप के पास तलाक का कोई आधार नहीं है। पत्नी से प्रेम कीजिए, उस का इलाज कराइए, जीवन खूबसूरत हो जाएगा।

समस्या-

ग्राम मेयोहर, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश से रामलाल ने पूछा है –

मेरी शादी 2006 में हुई।  मैं ने इस लड़की को उस के घर वालों के सामने हाँ किया और घर पर आ कर अपने घर वालों से मना कर दिया। मेरे पिता जी और रिश्तेदार नाराज हो गए।  उन्होंने शादी के लिए हाँ करना पड़ा। मेरी पत्नी का कान बहता है जो उस के माता पिता ने छुपा कर शादी की। मुझ को मालूम हुआ तो रोज लड़ाई होने लगी।  इस बीच दो पुत्रियाँ हो गईं जो हम दोनों की मर्जी से नहीं हुई। वह अपनी मर्जी के अनुसार करती है। मैं ने उसे तलाक नहीं दिया क्यों कि वह अमीर परिवार की है। वे मुझे और मेरे सब घर वालों को दहेज प्रताड़ना के मामले में जेल भिजवा देंगे। आज भी उस के मुहँ से और कान से बदबू आती है। क्या मैं उसे तलाक दे सकता हूँ? कोई उपाय बताएँ।

समाधानः

loving familyभाई¡  आप का मामला बहुत विकट है। आप ने पहले जब लड़की देखने गए तो उस के परिवार के सामने हाँ किया, जिस का सब को पता है। आप ने घर में आ कर मना कर दिया, किसी को पता नहीं है। इस तथ्य का कोई अर्थ नहीं है।  आप चाहते और मना कर देते तो आप के घर वाले आप की शादी कैसे भी नहीं कर सकते थे।  वैसे भी अमीर घर की लड़की ला रहे थे तो सब को दान-दहेज का लालच तो रहा ही होगा।

शादी के बाद दो बच्चे हो गए और आप कह रहे हैं कि वे आप दोनों की मर्जी से नहीं हुए। इस बात को कोई मानेगा क्या? स्त्री-पुरुष यदि नहीं चाहेँ और सतर्क रहें तो कोई संतान नहीं होती। यह युग ऐसा नहीं है कि नहीं चाहते हुए भी संतान हो जाए।

ब आप को पत्नी के कान बहने का पता बाद में लगा इस तथ्य का भी कोई अर्थ नहीं है। कान और मुहँ से बदबू आने का कारण पत्नी को तलाक देने के लिए वैध कारण नहीं है। हर व्यक्ति को अपनी मर्जी का करने का अधिकार है। आप की पत्नी करती है तो इस से आप को क्या तकलीफ हो सकती है। हाँ उस के मर्जी का करने से आप को कोई ऐसी तकलीफ हुई हो जिसे क्रूरता कहा जा सकता हो तो बात अलग है।

कुल मिला कर जो तथ्य आप ने बताए हैं उन में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिस के आधार पर आप तलाक ले सकते हों। अच्छा तो ये है कि आप की पत्नी जैसी भी है वह आप की दो बेटियों की माँ भी है। उस से प्यार कीजिए। वह भी एक इंसान है, और प्यार तो इंसान को पूरी तरह बदल देता है। कान और मुहँ की बदबू का इलाज हो सकता है। आप उस का इलाज कराइए। आप उसे स्नेह और प्यार देंगे और उस की बीमारी का इलाज कराएंगे तो आप का यह परिवार भी बहुत खूबसूरत हो सकता है।

तलाक लेना या बिना तलाक लिए किसी अन्य स्त्री के साथ रहना गंभीर और अपराधिक गलती होगी

समस्या-

कोटा, राजस्थान से शौर्य ने पूछा है-

मैं एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूँ तथा माता-पिता और बड़े भाई के साथ रहता हूँ। मेरा विवाह हिंदू रीति रिवाज के साथ 7 मई 2009 को हुआ।  मेरा यह विवाह मुझ पर दबाव डाल कर करवाया गया था।  जिस लड़की से मेरा विवाह करवाया गया वो मुझ से उम्र में भी बड़ी है।  उस की उम्र 30 और मेरी 26 है। वह मेरे साथ मेरे घर में रहती है लेकिन हमारा रिश्ता पति-पत्नी जैसा नहीं है।  हमारे अभी तक कोई संतान भी नहीं है।  आए दिन हम दोनों में लड़ाई चलती रहती है। मैं ने मेरी पत्नी को तलाक़ के लिए कहा लेकिन वह मुझे तलाक़ भी नहीं दे रही है।  मैं उसे तलाक़ के लिए मेरे नाम की सारी प्रॉपर्टी भी देने को तैयार हूँ।  हम दोनों का जीवन बर्बाद हो रहा है। मेरा विवाह मेरे माता-पिता ने इसलिए दबाव डाल कर जल्दी करवा दिया क्योंकि मैं एक लड़की को बहुत ज़्यादा प्रेम करता था।  वह लड़की हमारी जाति की नहीं थी।  इसलिए मेरे माता पिता बड़े भाई ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए मुझे धमकी दी कि यदि मैं ने शादी से मना किया तो वे उस लड़की के घर वालों को पिटवा देंगे।  उन लोगों ने मेरा विवाह एक ऐसी लड़की से करवा दिया जिसे मैं  कभी अपनी पत्नी के रूप मैं स्वीकार नहीं कर सकता।  मैं शादी से पहले जिस लड़की से प्यार करता था उस से अब भी करता हूँ उस की उम्र 24 वर्ष है वह भी मुझे बहुत प्यार करती है और आज भी शादी करने को तैयार है।  हम दोनों के बीच 6 वर्ष से यह रिश्ता है।  हम एक दूसरे को कभी नहीं भूल सकते।  उस लड़की का कहना है कि यदि उसके परिवार वालों ने किसी और से शादी के लिए उस पर दबाव डाला तो वह आत्महत्या कर लेगी।  मेरी समस्या यह है कि मैं उस लड़की को खोना नहीं चाहता लेकिन मैं उस से बिना मेरी पत्नी से तलाक लिए विवाह भी नहीं कर सकता।  ये कानूनी रूप से अपराध होगा।  क्या मुझे मेरे पत्नी से तलाक़ मिल सकता है? क्या क़ानून मैं कोई ऐसा नियम है क्या जिस से मैं और वह लड़की बिना शादी किए एक साथ भी रह सकें। हम दोनों पति-पत्नी की तरह रहना चाहते हैं।  हम तीनों का जीवन बर्बाद हो रहा है। मुझे कोई रास्ता बताएँ?

 समाधान-

प के माता-पिता और भाई को तो सामाजिक प्रतिष्ठा बचानी थी।  लेकिन आप के लिए वह क्या चीज थी? जिस ने आप को विवाह करने को बाध्य किया। उस लड़की के घर वालों की पिटाई करवा देना तो इतना बड़ा दबाव नहीं जिस से आप विवाह करे लिए तैयार हो जाएँ।  आप बड़ी आसानी से कह सकते थे कि मैं अपने से चार वर्ष बड़ी लड़की से विवाह नहीं करूंगा। या यह भी कह सकते थे कि मुझे अभी विवाह नहीं करना है। आप वयस्क थे और आप को इस के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता था। आज यदि तीन जीवन बर्बाद हो रहे हैं तो सिर्फ इस कारण कि आप ने उस लड़की से विवाह करना स्वीकार कर लिया जो अब आप की पत्नी है।  यह तो आप को उसी समय लगने लगा होगा कि तीन जीवन बर्बाद हो जाएंगे।

प का अपनी पत्नी के साथ पति-पत्नी जैसा रिश्ता नहीं है। लेकिन यह तो आप के कारण ही है कि आप ने उसे अब तक पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं किया है। वह तो अभी भी इस बात की प्रतीक्षा कर रही है कि आप उसे पत्नी के रूप में स्वीकार कर लें। इस में आप की पत्नी का कोई दोष नहीं है।  उस तो इस बात का विवाह तक पता भी न रहा होगा कि जिस से उस का विवाह हो रहा है वह अन्य लड़की को चाहता है और उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है। उसे पत्नी के रूप में स्वीकार न कर के आप उसे किस बात की सजा दे रहे हैं? केवल यह कि वह आप से उम्र में बड़ी है कोई बात नहीं। समाज में अनेक पति-पत्नी मिल जाएंगे जहाँ पत्नियाँ पतियों से बड़ी है। आप के इलाके में तो कहावत है – बड़ी बहू, बड़ा भाग। कृष्ण और राधा का प्रेम हमारे समाज में बहुत सम्मान के साथ देखा जाता है। राधा भी उम्र में बड़ी थीं।  राधा-कृष्ण ने प्रेम किया और जीवन भर एक न हो सके। लेकिन आज भी सारी दुनिया उन की पूजा करती है।  प्रेम में जरूरी नहीं कि विवाह किया ही जाए,  शारीरिक संबंध बनें ही सही। प्रेम उस के बिना जीवित ही नहीं रह सकता बल्कि अमरत्व भी प्राप्त कर सकता है।

प ने अग्नि को साक्षी मान कर एक लड़की से विवाह किया है।  आप की पत्नी उस घड़ी की प्रतीक्षा कर रही है जिस दिन आप उसे पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेंगे।  आप दोनों के बीच लड़ाई का एक और मुख्य कारण यही हो सकता है कि आप उसे विवाह के तीन वर्ष बाद भी स्वीकार नहीं कर सके हैं। आप के पास वर्तमान में तलाक का कोई कारण नहीं है जिस से आप अपनी पत्नी से तलाक ले सकें।  आप का और आप की पत्नी में केवल सहमति से तलाक संभव है। जिस के लिए वह तैयार नहीं है। मेरी राय में तो आप को अपनी पत्नी को अपना लेना चाहिए। अपनी प्रेमिका को समझाना चाहिए कि वह भी विवाह कर के अपनी गृहस्थी बसाए।  इस से तीनों जीवन बच जाएंगे।  इस दिशा में कोशिश कीजिए शायद आप ऐसा कर पाएँ।  अपनी पत्नी के रहते हुए आप किसी दूसरी अविवाहित स्त्री के साथ रहें यह अनैतिक है और बहुत से लोगों के साथ एक तरह का धोखा भी है। निश्चित रूप से आप ऐसा कुछ नहीं कर पाएंगे। आप कोशिश तो करें। यदि आप कोशिश में सफल न हों या फिर कोशिश ही न कर सकें तो आप पुनः तीसरा खंबा को स्मरण करें। शायद कोई ऐसा मार्ग निकल सके जिस से तीनों जीवन सुधर सकें।

विवाह के लिए मैं घर से भागना नहीं चाहता

 गुरू जायसवाल ने पूछा है –

मेरी उम्र 27 वर्ष है। मैं प्रियंका नाम की लड़की से विवाह करना चाहता हूँ।  अंकतालिका में उस की जन्मतिथि 02.07.1993 अंकित है और वास्तव में 27.10.1991 है। प्रियंका के परिवार वाले इस विवाह के लिए तैयार नहीं हैं, जब कि मेरे परिवार वाले सब तैयार हैं। मैं घर से भागना नहीं चाहता हूँ। उन के घरवाले इस विवाह में बाधा उत्पन्न न कर सकें इस के लिए हमें क्या करना चाहिए।

 उत्तर –

जायसवाल  जी,

प की उम्र 21 वर्ष से अधिक है और प्रियंका जिस से आप विवाह करना चाहते हैं दोनों ही तिथियों से 18 वर्ष से अधिक उम्र की हो चुकी है। उम्र के हिसाब से आप दोनों के विवाह में कोई बाधा नहीं है आप दोनों विवाह कर सकते हैं। लेकिन कानून के अनुसार भी विवाह के लिए अन्य कुछ योग्यताएँ होनी चाहिए। जैसे पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व पति पर है, यदि वह स्वयं अपना भरण पोषण करने में असमर्थ है। यदि आप स्वयं आत्मनिर्भर हैं और दाम्पत्य का व्यय उठाने में समर्थ हैं तो समझ लीजिए आप विवाह कर सकते हैं। 
मारे समाज में जैसा प्रचलन है, एक लड़की को विवाह होते ही अपना परिवार त्याग कर अपने पति के साथ या उस के परिवार में रहना होता है। चाहे पति-पत्नी में विवाह पूर्व कितना ही प्रेम हो। एक परिवार का सुरक्षा और संरक्षा का वातावरण छोड़ कर एक नए परिवार में जाने के समय अपने नये जीवन के प्रति एक लड़की में अनेक आकांक्षाएँ और आशंकाएँ होती हैं। लड़की का अपने माता-पिता और परिवार से भी लगाव होता है। वह उन को भी सुरक्षित देखना चाहती है, चाहे वे उस की इच्छानुसार विवाह के विरोधी हो कर उस में बाधा ही क्यों न बन रहे हों। इस तरह विवाह के समय और उस के बाद भी कुछ वर्षों तक लड़की का एक पैर अपने माता-पिता की नाव पर होता है तो दूसरा पैर अपने पति की नाव पर। यह एक विचित्र स्थिति है। उस के दोनों पैर कब किस नाव पर रहेंगे यह परिस्थियों पर निर्भर करता है। इस कारण से यदि प्रेम विवाह में किसी एक परिवार की असहमति हो तो जब तक लड़का और लड़की विवाह करने और उस के उपरान्त साथ रहने की दृढ़ इच्छा नहीं रखते तब तक इस तरह का विवाह हमेशा संकट उत्पन्न करता है। आप विवाह के पहले पूरी तरह से मुतमइन हो लें कि प्रियंका बुरी से बुरी परिस्थिति में भी आप के साथ खड़ी रहेगी। हालाँकि यह तभी संभव है कि बुरी से बुरी परिस्थिति में भी, तब भी जब कि प्रियंका के परिजन आप की जान लेने तक को उतारू हो जाएँ, आप स्वयं उन के प्रति कोई दुर्भावना न रखें, कोई कार्य करें तो अपने बचाव के लिए तो करें लेकिन प्रियंका के परिजनों को हानि पहुँचाने के लिए न करें।
दि आप सब तरह से मुतमइन हो चुके हैं तो फिर आप के पास मार्ग यही है कि आप दोनों चुपचाप विवाह कर लें। यह केवल इसी तरह संभव है कि आप किसी आर्य समाज मंदिर में जा कर विवाह करें। आर्य समाज मंदिर में विवाह कानूनन मान्यता प्राप्त है और यदि सभी औपचारिकताएँ पूर्ण कर ली गई हों तो यह विवाह दो से तीन घंटे के समय में संपन्न हो जाता है। आर्य समाज वाले विवाह का प्रमाण-पत्र जारी करते हैं। यदि प्रियंका किसी तरह चार पाँ

प्रेम विवाह को सफल बनाने की चुनौती स्वीकारें

 सुधीर कुमार ने पूछा है –
मारी शादी 1.2.2010 को हुई है, शादी से पहले मैं और मेरी पत्नी दो वर्ष से प्रेम में थे। विवश हो कर दोनों परिवारों को हमारा विवाह करना पड़ा। लेकिन मेरी पत्नी अब अपने मायके में अधिक रुचि लेती है। उस के माता-पिता पत्नी को मेरे विरुद्ध भरते रहते हैं, पत्नी को मेरे साथ भेजने में आनाकानी करते हैं तथा मेरे पूरे परिवार को दहेज के मामले में फँसाने की धमकी देते हैं। मैं सरकारी कर्मचारी हूँ, मेरी मदद करें।
 उत्तर –
सुधीर जी,
प की समस्या कानूनी है ही नहीं। यह विश्वास और अविश्वास से पनपा मामला है। आजकल अरेंज विवाहों में ही अविश्वास के कारण बहुत समस्याएँ रहती हैं, आप ने तो प्रेम को अरेंज विवाह का रूप दिया है। आप और आप की पत्नी प्रेम में थे और आप के परिजनों को आप का विवाह विवशता में करना पड़ा। उन्हों ने आप को विवाह के बंधन में तो बांध दिया, लेकिन उस की सफलता में उन्हें विश्वास नहीं है। वे आज तक भी स्वीकार नहीं कर पाए हैं कि यह विवाह सफल हो सकता है। वे इस के असफल होने की प्रतीक्षा में हैं जिस से स्वयं को सही साबित कर सकें। वे विवाह में असफलता के सूत्र तलाशते रहते हैं। निश्चित रूप से यह दोनों ही परिवारों की ओर से होता होगा। जब आप की पत्नी आप के साथ रहती है तो उसे यहाँ परिवार में बहुत कुछ सुनना सहना पड़ता होगा। फिर जब वह मायके जाती है तो उस से खोद खोद कर पूछा जाता होगा कि ससुराल में वह कैसे रहती है। ससुराल वालों का व्यवहार उस के साथ कैसा है? फिर आरंभ होती है आगे की कहानी। विवाह पूर्व प्रेम और प्रेमपूर्ण विवाहित जीवन दोनों में बहुत अंतर है। 

प यदि इस पर गंभीरता से विचार करें तो आप पाएंगे कि आप और आप की पत्नी के परिवारों ने आप दोनों के सामने चुनौती रख दी है कि आप अपना विवाह सफल साबित कर के दिखाएँ। आप दोनों को इस चुनौती पर खरा उतरना है। इस के लिए जिस हथियार की जरूरत है वह आप दोनों के बीच प्रेम और विश्वास का लगातार मजबूत होते जाना है। उसे किसी भी बाहरी हमले से टूटना या कमजोर न होना चाहिए। यह साथ रहने से बनता है। यदि आप दोनों को कुछ समय दोनों परिवारों से अलग अकेले साथ रहने का अवसर प्राप्त हो तो यह प्रेम और विश्वास बढ़ेगा। उस के बढ़ने के साथ ही दोनों परिवारों में आप के विवाह की सफलता के प्रति  जो अविश्वास है वह विरल होता जाएगा। 

प सरकारी कर्मचारी हैं। एक काम कर सकते हैं, अपना स्थानान्तरण दो-चार वर्ष के लिए कुछ दूरस्थ स्थान पर करवा लें। दोनों पति-पत्नी वहाँ साथ रहें। साथ रहेंगे तो आपसी प्रेम और विश्वास बढ़ेगा। समय के साथ ये समस्याएँ समाप्त हो जाएंगी। ये सब काम आप दोनों पति-पत्नी को आपसी समझ के साथ करना होगा।

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