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वाहन बेचना और कब्जा देना साबित करना होगा।

motor accidentसमस्या-

रविन्द्रसिंह ने जयपुर, राजस्थान से पूछा है-

मैं ने एक मोटरवाहन बेचा जिस का बीमा नहीं था। जिसने वाहन खरीदा उस ने स्टाम्प पर लिखित में खरीदना और कब्जा प्राप्त करना दे रखा है। 15 दिन बाद वाहन से दुर्घटना हो गयी। एक व्यक्ति को फ्रेक्चर हुआ है। वाहन अभी तक ट्रान्सफर नहीं हुआ था और बीमा भी नहीं कराया था। इस मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हो गयी है।

समाधान-

प इस बात से चिन्तित हैं कि आप दुर्घटना के दिन तक वाहन के पंजीकृत स्वामी थे इस कारण से आप पर क्षतिपूर्ति का दायित्व आएगा।

मोटर यान दुर्घटना में प्राथमिक दायित्व चालक और वाहन स्वामी का होता है, यदि दायित्व बीमित हों तो बीमा कंपनी इन दायित्वों को वहन कर लेती है।

आप के मामले में पुलिस वाहन के नंबर से आप तक पहुँचेगी और जानना चाहेगी कि दुर्धटना के समय वाहन कौन चला रहा था। आप उसे बता दीजिए कि यह आप नहीं बता सकते क्यों कि आप वाहन को बेच चुके थे। इस के साथ ही आप के पास वाहन प्राप्ति की जो रसीद स्टाम्प पर आप के पास है उस की स्वहस्ताक्षरित फोटो प्रति पुलिस को दे दें।

इस के बाद आप के विरुद्ध कोई मोटर दुर्घटना दावा होता है तो आप को वाहन का विक्रय और कब्जा हस्तान्तरित होना साबित करना होगा। आप वहाँ आप यह जवाब दे सकते हैं कि दुर्घटना से आप का कोई लेना देना नहीं था, आप पहले ही वाहन बेच चुके थे। स्टाम्प पर उपलब्ध रसीद के माध्यम से इसे साबित भी कर सकते हैं। इस से आप पर आ रहा दायित्व वाहन क्रेता पर पहुँच जाएगा।

मोटर यान दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावे कहाँ प्रस्तुत किए जा सकते हैं?

 

rp_Car-accident.jpgसमस्या-

अंश प्रताप ने उन्नाव, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी टैक्सी से एक दुर्घटना हो गया था जिस में एक आदमी की मृत्यु हो गयी थी। उस के परिवार वालों ने क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन दिल्ली में प्रस्तुत किया है जब कि मरने वाला और उस के क्लेम का दावा करने वाले और मैं सब एक ही शहर उन्नाव के हैं। वकील का कहना है कि दिल्ली में बीमा कंपनी का दफ्तर है इस लिए वहाँ मुकदमा बनता है। क्या दिल्ली में मुकदमा खारिज हो सकता है?

 

समाधान

मोटर व्हीकल एक्ट ने मोटर यान दुर्घटना दावों के संबंध में यह प्रावधान दिया गया है कि क्षतिपूर्ति का दावा करने वाला व्यक्ति उस की इच्छा से तीन तरह के स्थानों पर स्थित मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरणों में से किसी एक में अपना दावा प्रस्तुत कर सकता है। ये तीन स्थान निम्न प्रकार हैं-

  1. वहाँ जहाँ दुर्घटना घटित हुई हो;
  2. वहाँ जहाँ दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई हो; तथा
  3. जहाँ दावे के विरोधी पक्षकारों में से किसी एक का कार्यालय हो या जहाँ वह व्यापार करता हो।

स तरह यदि दिल्ली में बीमा कंपनी का दफ्तर है तो वहाँ क्षतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत किया जा सकता है और यह दावेदार पर निर्भर करता है कि वह उक्त स्थानों में से कहाँ अपना दावा प्रस्तुत करना चाहता है। आप के मामले में वकील की सलाह उचित है।

प के पास यदि बीमा है तो आप बीमा कंपनी को लिख कर दे सकते हैं कि आप बीमा धारी हैं और इस बीमा क्लेम को लड़ने का दायित्व आप का है। बीमा कंपनी आप की ओर से मुकदमा लड़ेगी यदि आप ने बीमा पालिसी की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है। यदि बीमा कंपनी कहती है कि आप ने बीमा प्रमाण पत्र की किसी शर्त का उल्लंघन किया है और आप समझते हैं कि ऐसा हुआ है तो आप को फिर अपना वकील कर के अपना पक्ष अधिकरण के समक्ष रखना चाहिए।

गायब हुए वाहन के टैक्स दायित्व से मुक्ति कैसे पाई जाए?

used carसमस्या-

जीतेन्द्र कुमार ने बिन्दापुर, नई दिल्ली से समस्या भेजी है कि-

मारी एक कंपनी है, हम 5 व्यक्ति कॉमर्शियल कार ले कर लीज पर चलाने का व्यवसाय करते हैं। हम ने कारें अलग अलग लोगों को लीज पर दी थी। कुछ दिन तो ये लोग गाड़ी की ईएमआई समय पर दे रहे थे। फिर ये लगो हमारी गाड़ी ले कर गायब हो गए। हम ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दी। जिस में धारा 406 आईपीसी के अन्तर्गत दर्ज की गई है। सभी गाड़ियों का यू.पी. का टैक्स और सभी दस्तावेजों का समय समाप्त हो गया है। गाड़ी का ईएमआई हमें अपनी ओर से भरना पड़ रहा है। हमें आगे क्या करना चाहिए, जिस से यू.पी. टैक्स माफ हो सके और गाड़ियों को पकड़ा जा सके?

समाधान-

प के वाहन को वह लोग जिन्हों ने आप से लीज पर लिया था ले कर गायब हो गए हैं। आप ने उन्हें वाहन वैध रूप से सौंपा था तथा लीज की अवधि समाप्त हो जाने पर वाहन उन्हें आप को सौंप देना चाहिए था। लेकिन वे लोग ले कर गायब हो गये। ये वाहन उन के पास अमानत थे जो उन्हों ने आप को नहीं लौटाए। इस तरह पुलिस ने धारा 406 आईपीसी में प्रथम सूचना रिपोर्ट सही दर्ज की है। इस के साथ धारा 420 आईपीसी का अपराध भी गठित होता है। इस तरह आप ने वाहन को पकड़े जाने की व्यवस्था तो कर ली है। लेकिन पुलिस के पास बहुत काम होते हैं। उन्हों ने गाड़ियों की सूचना पूरे देश में भेज दी होगी। यदि गाड़ियाँ कहीं पहचानी गईं तो पकड़ ली जाएंगी। लेकिन कोई सायास प्रयास नहीं होगा। इस तरह वाहनों को पकड़े जाने के लिए आप को स्वयं अपने स्तर पर सायास प्रयास करने होंगे। हर व्यक्ति को जो किसी भी प्रकार की निजी संपत्ति रखता है उसे यह जुमला ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति अपने माल की हिफाजत खुद करे। पुलिस या प्रशासन आम जनता की हिफाजत के लिए नहीं है। वे तो प्रथम सूचना रिपोर्ट भी आसानी से दर्ज नहीं करते हैं। यह चोरी भी नहीं है जिस के कारण आप बीमा कंपनी से कोई दावा वसूल कर सकते हों।

हाँ तक टैक्स का संबंध है तो सभी टैक्स राज्य सरकार के विभाग द्वारा वसूल किए जाते हैं जिस के लिए समय समय पर निर्देश जारी होते हैं। आप को यू.पी. सरकार के टैक्स के नियमों व निर्देशों की जानकारी कर उन का अध्ययन करना चाहिए। क्यों कि वाहन का टैक्स उस के उपयोग के लिए लिया जाता है। यदि वाहन आप के पावर और पजेशन से निकल गया है और आप ने उस की रिपोर्ट पुलिस को दर्ज करवा दी है तो आप टैक्स विभाग को आवेदन कर के रिपोर्ट दर्ज होने की तिथि से उक्त वाहनों के टैक्स के दायित्व से मुक्त होने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। यदि विभाग आप को टैक्स से मुक्ति नहीं देता है और आप के आवेदन को निरस्त करता है तो आप को उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका दाखिल करनी चाहिए। केरल उच्च न्यायालय द्वारा के के मोहनदास बनाम क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के मुकदमें में इस तरह के मामले में टैक्स से मुक्ति प्रदान की गई है। आप इस निर्णय या इस जैसे दूसरे निर्णयों की मदद ले सकते हैं।

ग्राहक पूरे पैसे दिए बिना गाड़ी उठा ले गया, अब न गाड़ी लौटाता है और न कीमत देता है, क्या किया जाए?

used carसमस्या-
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश से सोनू कुमार शर्मा ने पूछा है –

मेरी एक गाड़ी है जिस का नंबर यूपी 81 एएफ 4965 है। मैं किसी कारणवश उसे बचान चाहता था। पास के गाँव से एक खरीददार आया उस ने 1,25,000 रुपए में गाड़ी खरीदने का सौदा किया। वह 20,000 रुपए दे कर कहा कि गाड़ी के कागज आप के पास हैं, मैं अपने पापा को दिखा कर लौटता हूँ। बाकी की रकम दे कर गाड़ी के बेचान के कागज तैयार करा लेंगे। उस दिन के बाद से न तो वह गाड़ी देता है और न ही गाड़ी की बाकी की कीमत दे रहा है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

गाड़ी आप के नाम पंजीकृत है आप ही उस के स्वामी हैं। गाड़ी के स्वामित्व का दस्तावेज पंजीकरण प्रमाण पत्र आप के नाम है और आप के पास है। गाड़ी को आप को अपने पास रखने का अधिकार है। आप या तो उस गाड़ी को जहाँ भी दिखे उठा कर अपने घर ले आइए। यदि एसा भी न हो तो पुलिस थाना में रिपोर्ट करवा दीजिए कि सौदा हुआ था लेकिन खरीदने वाला व्यक्ति पिता जी गाड़ी दिखाने ले गया था वापस नहीं लौटा है। उस ने धोखे से गाड़ी छीन ली है।

पुलिस इस मामले में धारा 420 भा.दंड संहिता में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करेगी और गाड़ी को जब्त कर लेगी साथ ही गाड़ी ले जाने वाले को गिरफ्तार भी कर लेगी। आप न्यायालय में आवेदन दे कर गाड़ी को अपने कब्जे में ले लेना।

वाहन विक्रय करते समय क्या सावधानी रखें?

समस्या-

2001 में मेरा ट्रांसफर लखनऊ से मुम्बई हो गया, मैं अपना स्कूटर भी ले आया।  जिसका पुलिस और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) लखनऊ से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया है और मुम्बई में चुंगी भी जमा हो गयी है।   मुम्बई में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। उक्त स्कूटर बहुत दिनों से खड़े खड़े खराब हो चुका है।  मैं उसे कबाड़ी को बेचना चाहता हूँ। उस की क्या प्रक्रिया होगी तथा क्या सावधानी रखें जिससे भविष्य में समस्या न हो?

-अजय कुमार, मुम्बई, महाराष्ट्र

कोई भी वाहन विक्रय करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि उस का स्वामित्व ठीक से स्थानान्तरित हो गया है।  यदि कोई भी मोटर वाहन चलाने पर कोई दुर्घटना होती है तो उस से उत्पन्न होने वाले हर्जे के दावों में दायित्व उस के पंजीकृत स्वामी पर आता है। यदि वाहन के पंजीकरण में नाम परिवर्तन हो कर नए स्वामी का नाम दर्ज न हो कर पुराने स्वामी का ही नाम बना रहे तो दुर्घटना होने पर उस के पंजीकृत स्वामी पर दुर्घटना से उत्पन्न हर्जे का दायित्व आ जाएगा जिस की कोई सीमा नहीं है।  इस दायित्व से बचने के लिए यह आवश्यक है कि बेचने वाला व्यक्ति स्वयं अपनी निगरानी में वाहन पंजीकरण में क्रेता का नाम दर्ज करवा दे।

प के मामले में आप स्कूटर को कबाड़ी को बेचना चाहते हैं। ऐसी अवस्था में पंजीकरण स्थानान्तरित करवाने का कोई औचित्य नहीं है।  सिर्फ एक विक्रय का इकरारनामा उचित मूल्य के स्टाम्पों पर दो प्रतियों में तैयार किया जा कर निष्पादित किया जाए।  जिस पर खरीददार और विक्रेता दोनों के हस्ताक्षर हों।  इस विक्रय पत्र में लिखा जाए कि विक्रेता (वर्तमान स्वामी) स्कूटर को स्क्रेप के रूप में बेच रहा है तथा क्रेता द्वारा स्कूटर का वाहन के रूप में किसी तरह से उपयोग नहीं किया जाएगा। उक्त विक्रय के इकरारनामे की एक-एक प्रति दोनों के पास अर्थात क्रेता और विक्रेता के पास रहे।  यदि विक्रय के इकरारनामे की प्रति आप के पास रहेगी तो स्कूटर को वाहन के रूप में प्रयोग करने पर भी उस से उत्पन्न होने वाला दायित्व आप पर नहीं आएगा।

नई बाइक चोरी हो गई, क्या चोरी का बीमा होता है? मैं बीमा दावा कैसे करूँ?

राकेश ने पूछा है …..
मेरी नई बाईक घर से चोरी हो गई है, उसका बीमा है।  क्या चोरी का बीमा मिलता है? बाईक का मूल्य 40000 है,  मै बहुत परेशान हो गया हूँ।  कृपया  जल्दी समाधान भेजें, मै आपका आभारी रहूँगा।
समाधान ……
राकेश जी,
प तो मोटर सायकिल के चोरी जाने से बिलकुल घबरा गए हैं। स्वाभाविक भी है। बमुश्किल और बहुत अरमानों के साथ एक नौजवान अपनी पसंद की मोटर सायकिल खरीदता है। वह नई की नई चोरी चली जाए घबराना स्वाभाविक है। 
किसी भी मोटर सायकिल के दो प्रकार के बीमे हो सकते हैं। एक तो अधिनियम दायित्व बीमा होता है, अर्थात जिन चीजों का बीमा कराना कानूनन जरूरी है, जैसे किसी तीसरे पक्ष को होने वाली जन-धन-स्वस्थ्य की हानि का बीमा। यह तो हर मोटर वाहन के स्वामी को कराना जरूरी है। लेकिन इस में चोरी का बीमा शामिल नहीं होता है। इस के अलावा एक पैकेज पॉलिसी बीमा होता है। इस में सभी तरह का बीमा शामिल होता है. जिस में चोरी व किसी दुर्घटना में आप के वाहन को होने वाली हानियों की भरपाई शामिल होती है।
म तौर पर नई मोटर सायकिल किसी न किसी ऋण के माध्यम से खरीदी जाती है। यदि ऐसा है तो ऋणदाता स्वयं ही पैकेज पॉलिसी बीमा कराता है। यदि ऋण नहीं भी लिया होता है तो भी नए वाहन का बीमा पैकेज पॉलिसी के अंतर्गत करने का पूरा प्रयत्न बीमा कंपनी करती है। आप अपना बीमा प्रमाण पत्र देखें कि आप की बाइक का किस तरह का बीमा किया गया है।
दि आप का पैकेज पॉलिसी बीमा है तो आप को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आप ने चोरी की रपट तो पुलिस को लिखवा ही दी होगी। आप बीमा कंपनी को भी चोरी की सूचना दे दें और आप के द्वारा की गई रपट की प्रतिलिपि संलग्न कर दें। बीमा कंपनी वाले आप से एक दावा फार्म भरवाएंगे। आप से वाहन का पंजीकरण,  आप का ड्राइविंग लायसेंस, बीमा प्रमाणपत्र की प्रति और मोटर सायकिल की दोनों चाबियाँ मांगेंगे। आप इन्हें जमा करा दीजिए। बीमा कंपनी अपने अन्वेषक से अन्वेषण कराएगी कि वाकई मोटर सायकिल चोरी हुई है अथवा नहीं। फिर वह पुलिस अन्वेषण की रिपोर्ट की प्रतीक्षा करेगी। यदि इस बीच मोटर सायकिल पुलिस बरामद कर लेती है तो आप उसे न्यायालय में आवेदन कर के अपने कब्जे में ले सकते हैं। इस बीच यदि बाइक में कोई नुकसान हुआ है तो उस की भरपाई बीमा कंपनी कर देगी।
दि आप की मोटर सायकिल वापस नहीं मिलती है तो पुलिस मामले में अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करेगी। न्यायालय प्रतिवेदन की जाँच कर के उसे स्वीकार कर लेता है तो आप अंतिम प्रतिवेदन तथा उस की स्वीकृति के न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रतियाँ न्यायालय से प्राप्त कर बीमा कंपनी को दे दें। बीमा कंपनी आप की मोटर सायकिल की कीमत में से घिसाई (Depreciation) काट कर आप को नुकसान की भरपाई कर देगी। आप बीमा दावा से प्राप्त राशि से नई मोटर सायकिल खरीद लें। इस काम में पाँच-छह माह लग सक

फाइनेंसर का ऋण चुकाए बिना वाहन न बेचें और बेचने पर क्रेता के साथ जा कर पंजीयन हस्तातंरण का आवेदन प्रस्तुत कर रसीद प्राप्त करें


कमलेश गोस्वामी पूछते हैं –

मैं ने मेरी एक कार बेची, वह एक प्राइवेट कंपनी से फाइनेंस थी। जिस को बेची उस को फाइनेंसर की बकाया रकम की जिम्मेदारी दे कर बाकी केश ले लिया और स्टाम्प लिख कर एक खाली चैक फाइनेंस की सुरक्षा के लिए ले लिया था। उक्त क्रेता को कंपनी को मासिक किस्त देनी थी पर क्रेता ने किस्तें समय पर नहीं दीं, जिस से कंपनी ने चार्जेज जोड़ दिए। क्रेता किस्तें अभी भी नहीं दे रहा है और गाड़ी सोंपने के समय हमने बीमा करा कर दिया  था। क्रेता उस के बाद दो साल से कार बिना बीमा के चला रहा है और संबंध भी नहीं रख रहा है। कंपनी को जब से काफी भुगतान कर चुके हैं। क्या हम खाली चैक से अपना पैसा वसूल कर सकते हैं?

उत्तर –

कमलेश जी,

प ने अपनी वह कार बेची है जिस पर आप ने वित्तीय सहायता ली हुई थी और वित्तदाता का ऋण चुकाया जाना शेष था। प्रत्येक वित्तदाता जब भी किसी वाहन को वित्तीय सहायता प्रदान करता है तो वह उस के पंजीयन प्रमाण पत्र में यह अंकित करवाता है कि वह वित्तीय सहायता प्राप्त है। इस तरह जब तक वित्तदाता का ऋण पूरा अदा किया जा कर उस से भारमुक्ति का प्रमाण पत्र तथा हस्तांतरण प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर लिया जाता है तब तक वाहन के पंजीयन प्रमाण-पत्र में वाहन के स्वामी का नाम नहीं बदला जा सकता है। यदि यही स्थिति है तो आज तक भी आप के द्वारा बेची गई कार के पंजीयन के अभिलेख में जो कि पंजीयन अधिकारी के कार्याल य में रखा जाता है तथा वाहन के पंजीयन प्रमाण-पत्र के अनुसार आप ही उस कार के पंजीकृत स्वामी हैं।

सी स्थिति में यदि वाहन से कोई दुर्घटना होती है और उस से हुई क्षतियों का कोई दायित्व कार के स्वामी पर उत्पन्न होता है तो वह आप पर ही उत्पन्न होगा, अर्थात जिस व्यक्ति को क्षतियाँ हुई हैं वह क्षतियों की पूर्ति के लिए कोई दावा न्यायालय में प्रस्तुत करता है तो वह वाहन के पंजीकृत स्वामी के विरुद्ध ही प्रस्तुत करेगा। आप ने कार को बेचते समय वाहन का बीमा कराया था। लेकिन वह बीमा भी आप के नाम पर ही रहा होगा। उस के बाद तो आप स्वयं ही बता रहे हैं कि वाहन का बीमा क्रेता करवा ही नहीं रहा है। यदि ऐसी स्थिति में कोई दायित्व कार के स्वामी पर उत्पन्न होता है तो उस का दायित्व आप पर ही आएगा। कभी भी इस तरह की गलती नहीं करनी चाहिए कि आप एक वाहन को विक्रय करें और उस का पंजीयन प्रमाण-पत्र हस्तांतरित न कराएँ। वास्तव में वाहन का कब्जा देने के साथ ही विक्रेता को क्रेता के साथ जा कर पंजीयन अधिकारी के यहाँ हस्तांतरण का आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए और उस की शुल्क जमा करवा कर आवेदन शुल्क की रसीद की फोटो प्रति अपने पास रखनी चाहिए। जिस से किसी तरह का कोई दायित्व आने पर विक्रेता यह कह सके कि उस ने न केवल वाहन विक्रय कर दिया था, साथ ही उस के पंजीकृत स्वामी का नाम बदलने के लिए भी आवेदन कर दिया था।
प की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। फाइनेंसर से ऋण आप ने लिया  है, वह तो उस की वसूली आप से ही करेगा। आप का कार विक्रय का केवल अनुबंध हुआ है, उस का पूर्णतः विक्रय नहीं हुआ है, आप  आज भी उस कार के स्वामी हैं।  फाइनेंसर को जो भी राशि दी जानी है उस का दायित्व भले ही क्रेता ने ले लिया हो लेकिन उसे न चुकाए जाने के कारण क्रेता चूक कर चुका है। आप के पास जो चैक है, जो भी दायित्व क्रेता के हैं उस के बराबर राशि भर कर उसे बैंक में प्रस्तुत कर सकते हैं। लेकिन यदि उस के खाते में धन न हुआ तो वह बिना भुगतान के वापस लौट जाएगा, तब आप को धारा 138-परक्राम्य विलेख अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही करनी होगी, जो बरसों तक चलती रह सकती है। इस बीच कार से कोई दुर्घटना हो गई तो क्षतियों का दायित्व आप के ऊपर आ जाएगा। आप अभी यह निर्धारित नहीं कर सकते कि क्रेता का अंतिम दायित्व क्या हो सकता है, जिस के कारण कितनी राशि का चैक आप बैंक में प्रस्तुत करेंगे यह भी निर्धारित नहीं किया जा सकता। वैसी स्थिति में यह उपाय उचित नहीं है। वैसे भी आप को इस चैक को केवल अंतिम अस्त्र के रूप में ही उपयोग में लेना चाहिए।
र्तमान में आप के पास यह उपाय उपलब्ध है कि आप क्रेता को कहें कि वह एक-दो सप्ताह में ही फाइनेंसर का ऋण चुकता कर के कार को अपने नाम हस्तांतरित कराए, अन्यथा आप कार का कब्जा वापस प्राप्त कर लेंगे। कार का कब्जा फाइनेंसर भी प्राप्त कर सकता है। यदि क्रेता इस के लिए तैयार न हो तो आप कार को अपने कब्जे में ले लें। यदि वह कार को जबरन ले जाता है तो आप कार की चोरी की रपट पुलिस को दे सकते हैं।  एक बार कार जब्त हो जाने के उपरांत उस के पंजीकृत स्वामी होने के कारण अदालत उसे केवल आप की सुपूर्दगी में ही दे सकती है। लेकिन यदि  आप ने कार क्रेता के कब्जे में रहने और न्यायालय आदि से उस की सुपूर्दगी प्राप्त करने का अधिकार किसी मुख्तारनामे के माध्यम से क्रेता या उस के किसी अभिकर्ता को प्रदान किया हो तो पहले उस मुख्तारनामे को निरस्त कर दें और उस की सूचना पंजीकृत डाक से क्रेता को दे दें, उस के उपरांत ही सारी कार्यवाही करें। यह सभी कदम उठाने के पहले आप द्वारा अपने नगर के किसी वकील से सलाह कर लेना  बेहतर होगा। इस से आप को सारी कार्यवाही करने में आसानी होगी।
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