Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Judge Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक दीवानी वाद न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

वसीयत को नामान्तरण में आपत्ति होने पर प्रोबेट करा लेना उचित है।

समस्या-

हितेश गोयल ने भोपाल, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी का देहांत 2002 में हो गया है तथा मेरे दादा जी का देहांत वर्ष 2014 में हो गया मेरे दादा जी ने वर्ष 2013 में अपनी रजिस्टर्ड वसीयत की थी जिसमे उन्होंने इस बात का उल्लेख किया की उनकी चारो पुत्रियों के विवाह उन्होंने सम्पन्न करा दिया है तथा उनके कर्तव्यों का निर्वहन हो चूका है तथा मेरे पिता जी के अलावा मेरे अन्य दो ताऊ जी को कुछ भी नहीं देना है तथा जो पक्का बना मकान है वो मेरे नाम हो तथा एक जमीन है जो मेरी माता जी के नाम हो! इस वसीयत में नामंतरण करवाने की लिए सभी वारिसों के हस्ताक्षर की बात कही जा रही है तथा मेरे दोनों ताऊजी को तथा एक बुआ को इस पर आपत्ति है! मैंने ऐसा सुना है की यदि इसे प्रोबेट करा लिया जाये तो यह संपत्ति बिना आपति के हस्तांतरित करवाई जा सकती है! कृपया उचित मार्गदर्शन प्रदान करे जिस से हम इस प्रकरण को जल्द से जल्द निपटा सके!

समाधान-

ब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उस की संपत्ति उस के उत्तराधिकारियों को समान रूप से प्राप्त होती है। लेकिन यदि मृतक ने वसीयत कर दी हो तब वसीयत के अनुसार प्राप्त होती है। नामांतरण की कार्यवाही में वसीयत के आधार पर नामांतरण का आवेदन आने पर यदि आपत्तियाँ प्राप्त होती हैं तो राजस्व विभाग को यह अधिकार नहीं है कि वह इन आपत्तियों का निस्तारण कर सके। वसीयत को प्रमाणित करने पर वसीयत उचित है या नहीं यह केवल दीवानी न्यायालय ही तय कर सकता है। इसी कारण से प्रोबेट कराना उचित है। आप को प्रोबेट की यह सलाह स्वयं नामान्तरण करने वाले अधिकारी ने ही दी होगी।

प्रोबेट में सभी उत्तराधिकारियों के साथ साथ एक सामान्य सूचना समाचार पत्र के माध्यम से भी प्रकाशित होगी। उस के उपरान्त आप वसीयत को उस के गवाहों और उप पंजीयक या उस के कार्यालय के कर्मचारी के बयानों के आधार पर प्रमाणित करवा सकते हैं। प्रोबेट हो जाने पर राजस्व विभाग वसीयत के आधार पर नामान्तरण दर्ज कर देगा।

नामान्तरण सभी उत्तराधिकारियों के नाम होगा।

समस्या-

शंभू लाल सेन ने बेमाली, भीलवाड़ा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता कि मौत होने के बाद उनका मकान का पट्टा मेरे नाम पर कैसे होगा? जबकि मैं ओर मेरी मां दोनो ही वारिस हैं।

समाधान-

शंभू जी, आप की माँ और आप दोनों उक्त संपत्ति के स्वामी हैं, उत्तराधिकार से आप दोनों का स्वामित्व अस्तित्व में आया है। उत्तराधिकार के उपरान्त अलग से पट्टा नहीं बनता है बल्कि केवल नगर पालिका के रिकार्ड में नामान्तरण हो जाता है। नामान्तरण जब किसी व्यक्ति की मृत्यु के कारण होता है तो उस व्यक्ति के सभी उत्तराधिकारियों के नामही हो सकता है। फिलहाल नामान्तरण आप दोनों के नाम होगा। यदि आप चाहते हैं कि आप की माता का हिस्सा भी आप को मिल जाए तो यह आप को माँ से खरीदना होगा।

यह भी हो सकता है कि माताजी अपने हिस्से को आप के नाम रिलीज कर दें (त्याग दें) इस के लिए आप को माता जी से अपने नाम रिलीज डीड निष्पादित करवानी पड़ेगी। क्यों कि नामान्तरण से स्वामित्व हस्तान्तरित नहीं होता है। रिलीज डीड के आधार पर नामान्तरण ही पुख्ता होगा अन्यथा बिना उस के आप के नाम से हुआ नामान्तरण कभी भी रद्द किया जा सकता है।

पुत्री होने पर पुश्तैनी संपत्ति का बंटवारा 2005 के पहले भी धारा 8 उत्तराधिकार अधिनियम से ही होगा।

agricultural-landसमस्या-

मनोज राठौर ने भीलवाड़ा, राजस्थान से पूछा है-

मेरी नानाजी के 3 पीढ़ी पुरानी कृषि भूमिं है  जिसको मेरे मामा और नानी ने नामांतरण कर अपने नाम कर दिया है मेरे नानाजी की मृत्यु 2004 से पहले हो गयी है मेरी नानीजी अभी जीवित है.क्या मेरी मम्मी अपने पिता की यानि मेरे नानाजी की पुश्तेनी कृषि भूमि पर अपना हक जता सकती है ?

 

समाधान-

मीन  पुश्तैनी हो, या न हो। 2004 से पहले आप के नानाजी के देहान्त के बाद उक्त जमीन का उत्तराधिकार हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 के अनुसार ही निर्धारित होगा। 2005 के संशोधन के पूर्व भी कानून यह था कि यदि कोई संपत्ति पुश्तैनी/  सहदायिक हो तब भी यदि किसी व्यक्ति के पुत्री मौजूद है तो धारा -8 से ही उत्तराधिकार निर्धारित होगा। धारा 8 में पत्नी, पुत्र व पुत्री प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी हैं।

आप की माताजी को इस आधार पर नामान्तरण को चुनौती देते हुए नामांतरण आदेश की अपील प्रस्तुत करनी चाहिए।

नामान्तरण के पहले आप को अपने लापता पिता को मृत घोषित कराना होगा।

rp_gavel-1.pngसमस्या-

राजीव दीक्षित ने लुधियाना, पंजाब से पूछा है-

मेरे पापा ने 1975 में 200 गज जमीन अपने नाम से ख़रीदी थी। सन 2000 में उनकी दिमागी हालत ख़राब हो जाने के कारण वो कहीं भाग गए और आज तक वापस नहीं आये। उनकी जमीन हमें अपने नाम करानी है।  हमारे परिवार में मैं मेरी माता जी, मेरा भाई, चाचा, चाची, और दादा हैं। दादी का देहांत 5 साल पहले हो गया है।  तो क्या ये जमीन सबके नाम होगी या सिर्फ हमारे नाम कृपया हमारा मार्गदर्शन कीजिए।

समाधान-

ह जमीन आप के पिता जी के उत्तराधिकारियों के नाम होगी। उन के जीवित उत्तराधिकारियों में आप, आप का भाई और आप की माताजी हैं। इन तीन उत्तराधिकारियों को बराबर का हिस्सा उक्त जमीन में प्राप्त होगा। दादा और चाचा-चाची को इस संपत्ति में से कुछ भी प्राप्त नहीं होगा। इस संबंध में आप को सबूत प्रस्तुत कर के नगर निगम में नामान्तरण कराना पड़ेगा।

यह नामान्तरण तभी संभव  हो सकेगा जब कि आप अपने पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेंगे।  इस के लिए आप को नगर निगम में पहले आप के पिता की मृत्यु को पंजीकृत कराना पड़ेगा।  यह कैसे होगा इस की प्रक्रिया आप को स्थानीय नगर निगम से ही पता करना होगा। वे आप के पिता की मृत्यु का पंजीयन करने से मना कर सकते हैं। आप के पिता लापता हैं लेकिन उन्हें कानून के अंतर्गत लापता होने की तिथि से सात वर्ष के उपरान्त मृत माना जा सकता है। साक्ष्य अधिनियम के इस उपबंध के आधार पर एक दीवानी न्यायालय ही इस के लिए घोषणा की डिक्री पारित कर सकता है। तब आप नगर निगम के विरुद्ध दीवानी वाद इस आशय की घोषणा का कर सकते हैं कि आप के पिता को मृत माना जाए क्यों कि उन्हें लापता हुए 7 वर्ष से अधिक समय हो चुका है तथा आप के पिता की संपत्ति का नामान्तरण किया जाए। लापता होने की तिथि उन की गुमशुदगी रिपोर्ट में गुमशुदगी की जो तारीख अंकित है उसी तारीख से उन्हें मृत माना जाएगा।

पत्नी घोषणा अथवा विभाजन का वाद प्रस्तुत कर सकती है।

malicious prosecutionसमस्या-

शैलेश जैन ने शुजालपुर जिला शाजापुर, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मेरे दादा सुसर स्‍व० फूलचंद जी जैन के नाम पर एक मकान है, मेरे दादा ससुर उनकी पहली पत्नी के मरने के पश्‍चात दूसरी शादी की थी।  मेरे दादा ससुर फूलचंद जी की कुल ९ संताने हैं, तीन लडके एवं छ लडकियां। मेरे ससुर सबसे बडे पुत्र थे उनका देहांत हो चुका है। मेरे ससुर के मेरी पत्नी सहित पांच वारिसान हैं। इस प्रकार उक्‍त मकान में कुल चौदह वारिसान हैं। मेरी दादी सास ने मेरे ससुर के वारिसानों को अनदेखा करते हुए नगरपालिका में नांमान्‍तरण हेतु आवेदन किया जिसमें उन्‍होंने उनके नाम का नामांतरण चाहा, नामातंरण प्रकरण में मेरी पत्नी की जानकारी के बिना झूठा सहमति पत्र बनाकर लगा दिया। जिस पर मेरे द्वारा आपत्ति प्रस्‍तुत कर दी गई है। मैं जानना चाहता हूं कि अब मुझे आगे क्‍या करना चाहिए, नगरपालिका का कहना है कि, न्‍यायालय से उत्‍तराधिकार का फैसला होने के बाद ही नामातंरण प्रकरण आगे बढाया जाएगा।

समाधान-

प ने बताया नहीं कि नगरपालिका ने नामान्तरण किए जाने से लिखित में मना किया है या फिर मौखिक ही यह बात कही है कि वे उत्तराधिकार का निर्णय न्यायालय से हुए बिना नामान्तरण नहीं करेंगे। यदि नगरपालिका ने यह मौखिक ही कहा है तो आप आरटीआई में एक आवेदन दे कर नगरपालिका से पूछ लें कि नामान्तरण आवेदन जिस पर आप ने आपत्ति की है का निस्तारण क्यों नहीं किया जा रहा है। इस से नगरपालिका की ओर से आप को उत्तर मिल जाएगा। तब आप की पत्नी नगरपालिका के विरुद्ध घोषणा का वाद प्रस्तुत सकती हैं कि उन का संपत्ति में कितना हिस्सा है। इस में सभी उत्तराधिकारियों को पक्षकार बनाना होगा।

यदि आप की पत्नी चाहे तो सीधे संपत्ति के विभाजन का वाद जिला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है और उस में नगरपालिका को पक्षकार बना कर न्यायालय के निर्णय तक नामान्तरण दर्ज न करने का आदेश दे सकती है।

झूठा सहमति पत्र यदि नगरपालिका की पत्रावली में मौजूद है तो उस की प्रतिलिपि ले कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के अपराध में उसे प्रस्तुत करने वाले के विरुद्ध न्यायालय में अपराधिक परिवाद भी प्रस्तुत किया जा सकता है।

हिस्सेदार हिस्सा नहीं लेना चाहते तो उन से अपने नाम रिलीज डीड निष्पादित कराएँ।

rp_kisan-land.jpgसमस्या-

धर्मेश पटेल ने वलसाड, गुजरात से पूछा है-

मेरी मम्मी के पिताजी के मामाजी की जमीन है। मम्मी के पिताजी और उन के मामाजी दोनों का देहान्त हो चुका है। उन के खानदान में कोई नहीं बचा है। मेरी मम्मी की पाँच बहनें और हैं, पर वे खाते पीते घर से हैं, उन को जमीन नहीं चाहिए। क्या ये जमीन मेरी माँ के नाम हो सकती है?

 

समाधान-

स जमीन का अन्य कोई उत्तराधिकारी न होने से आप की माँ और उन की बहनें ही उत्तराधिकारी हैं, इस कारण सबूत प्रस्तुत करने पर उक्त जमीन का नामान्तरण आप की माँ और उन की बहनों के नाम खोला जाना चाहिए।

यदि आप की माँ की बहनेँ उक्त जमीन में किसी तरह का कोई हिस्सा नहीं चाहती हैं तो उन सब का हिस्सा वे रिलीज डीड आप की माँ के नाम निष्पादित कर सकती हैं और इस रिलीज डीड के पंजीकृत हो जाने पर इस के आधार पर पूरी जमीन आप की माँ के नाम नामान्तरित हो सकती है। यदि रिलीज डीड होने के पहले ही आप की माँ और उन की बहनों के नाम संयुक्त नामान्तरण खुल जाए तो भी बाद में रिलीज डीड प्रस्तुत करने पर उस के आधार पर उस बहिन का हिस्सा जिस ने रिलीज डीड निष्पादित की है आप की माँ के नाम हस्तान्तरित होने का नामान्तरण अलग से खुलवाया जा सकता है।

संपत्ति नाना की है तो मामी के साथ आप की माँ और मौसियों के नाम नामान्तरण हो सकता है।

agriculture landसमस्या-

दीप सिंह भाटी ने फलौदी, जोधपुर से पूछा है-

मेरे मामाजी का निधन 2011 में हो चुका है। मेरे मामाजी के पीछे कोई औलाद नहीं है, मेरी मामीजी ही हैं। मेरे मामाजी के नाम से जमीन है जिस में मेरी मामाजी अपनी सहमति से मेरी मां सहित तीन ननदो के नाम अपने साथ जमीन में नामान्‍तरण कराना चाहती हैं जो कि किस प्रकार संभंव है?

समाधान-

प के मामाजी की एक मात्र उत्तराधिकारी आप की मामी जी हैं। इस कारण मामाजी की संपूर्ण संपत्ति की स्वामिनी आप की मामीजी हो गयी हैं। कानून व नियमों के अनुसार उन की समस्त भूमि का नामान्तरण उन के नाम ही होगा। अन्य किसी का नाम उस में जुड़ना संभव नहीं है। यदि आप की माँ व उन की बहनों का नाम खाते में जुड़ता है तो यह एक तरह से संपत्ति हस्तान्तरण होगा। जो किसी रजिस्टर्ड डीड के द्वारा ही संभव है, अन्य प्रकार से नहीं।

यदि यह संपत्ति मामाजी को आप के नानाजी से प्राप्त हुई थी तो उस रिकार्ड को तलाश करें। यदि वह रिकार्ड मिल जाता है उस की मदद से यह कहा जा सकता है कि आप के नाना जी के चार उत्तराधिकारी आप के मामा और आप की माँ व अन्य दो बहनें थीं। गलती से उन का नाम फौती नामान्तरण दर्ज होते समय छूट गया था। जब कि तीनों बहनें अपने भाई के साथ बराबर की हिस्सेदार थीं। इस कारण चारों का नाम नामान्तरण के माध्यम से खाते में दर्ज किया जाए। इस नामान्तरण का विरोध केवल आप की मामीजी कर सकती हैं लेकिन वे स्वयं ऐसा चाहती हैं। इस तरह यह नामान्तरण संभव हो सकता है।

नामान्तरण को अब भी चुनौती दी जा सकती है।

समस्या-

संजू देवी ने सीकर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी की मृत्यु मेरे जन्म के तीन माह पूर्व हो गयी थी। तब तक मेरे भाइयों ने सारी जमीन पर अपना नाम खातेदारी में दर्ज करवा लिया। हम तीन भाई और तीन बहनें हैं। मेरी माँ अन्धी हो गयी है। बेटों के सताने के कारण मेरे साथ ही रहती है। जमीन मेरी विरासत की है जमीन पर मेरे भाइयों ने स्टे ले रखा है। जमीन में मेरा नाम कैसे जुड़वाएँ?

समाधान

प को तुरन्त किसी राजस्व का काम करने वाले अच्छे वकील से संपर्क करना चाहिए जो कि आप के पिता की मृत्यु के उपरान्त हुए कृषि भूमि के नामान्तरण आदेश की अपील कर सके। आप सोच रही होंगी कि यह अब कैसे होगा। लेकिन नामान्तरण के समय आप का जन्म ही नहीं हुआ था। लेकिन आप जन्म से उस संपत्ति में हिस्सेदार हो चुकी हैं। अन्य बहनों और आप की माँ का भी खातेदारी मे नाम नहीं है। आप बालिग हुई और जब आप को पता लगा तब आप ऐसा कर सकती हैं। इस का साधन वकील बता देगा।

स के अतिरिक्त आप जमीन के बंटवारे का मुकदमा भी कर सकती हैं। यह भी वकील से सलाह ले कर करें। भाइयों ने किस मामले में किस के विरुद्ध स्टे ले रखा है यह आप ने स्पष्ट नहीं किया है इस कारण उस पर कुछ कहना संभव नहीं है। आप कोई अच्छा वकील करेंगी तो वह आप को सही मार्ग दिखाएगा। अब तक आप बैठी रहीं। लेकिन आप को अब देरी न करनी चाहिए और तुरन्त कील से मिल कर यह काम करना चाहिए।

गलत नामान्तरण की अपील तुरन्त बिना देरी के करें और नामान्तरण को सही करवाएँ।

rp_kisan-land3.jpgसमस्या-

श्रवण राठौर ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता जी का स्वर्गवास दिनांक 01/03/1999 को हो गया। मुझे 2008 में पता चला कि खेत का म्यूटेशन वारिसों के नाम करवाना है। मैं 26/07/2008 को गाँव कोयल, पंचायत दुजार, तहसील लाडनूं आया। सरपंच जी से मिला वो बोले पिता जी का मृत्यु प्रमाण पत्र है? मैंने कहा नहीं। तो ग्रम सेवक के नम्बर दिये बोले बनवा लाओ। मैं बनवा लाया। पटवारी जी के नम्बर दे के बोले पैसे दे आओ म्यूटेशन हो जायेगा। पटवारी के पास गया। वह बोले 3-4 दिन मेरे पास वक्त नहीं है सरपंच को पैसे दे जाओ। मैं ने सरपंच को 4000 रुपए दिये और जयपुर चला आया। फोन पर बात करता रहा, 6 महीने तक सरपंच कहते रहे, हो जायेगा। बाद में पता चला जमीन 08/09/2008 को 2 व्यक्तियों के नाम नामान्तरकरण हो गई। आज मैंने नकल निकलवाई तो पता चला 02/08/2008 को ही सरपंच ने जमीन दूसरे के नाम चढ़वा दी। कानून के अनुसार किसी की मृत्यु होने के 10 वर्ष बात वारिसों की सहमति के बिना जमीन किसी दूसरे के नाम कर सकते हैं क्या?

समाधान

म्यूटेशन या नामान्तरकरण कानून के अनुसार होता है। कृषि भूमि का स्वामित्व राज्य का होता है तथा कृषक उस जमीन पर केवल टीनेंट होता है। जिस की हैसियत एक किराएदार जैसी होती है। जब किसी टीनेंट का देहान्त हो जाता है तो टीनेन्ट की व्यक्तिगत विधि के अनुसार जो भी उस के उत्तराधिकारी होते हैं तो उन के नाम उत्तराधिकार के अनुसार राजस्व विभाग के भूमि अभिलेख में हिस्से दर्ज हो जाते हैं। उदाहरण के रूप में आप के पिता जी के उत्तराधिकारी आप की माता जी, आप के भाई व बहनें और आप की दादी होंगे जिन के नाम बराबर हिस्से दर्ज होंगे। इन में से से यदि दादी और माता जी नहीं हैं तो केवल भाई व बहिन ही उत्तराधिकारी होंगे। यदि किसी भाई या बहिन की पहले ही मृत्यु हो चुकी है तो उस का हिस्सा उस के उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज होगा। यदि इन में से कोई व्यक्ति अपना हिस्सा किसी अन्य उत्तराधिकारी को देना चाहता है या फिर शेष उत्तराधिकारियों के नाम छोड़ना चाहता है तो उसे अपना हिस्सा छोड़ने के लिए एक रिलीज डीड निष्पादित करनी चाहिए।

प के पिता के खाते का जो नामान्तरण दर्ज हुआ है वह गलत दर्ज हुआ है। आप ने अभी नकल निकलवाई है। आप को चाहिए कि तुरन्त इस नामान्तरण को रद्द करने व कानून के अनुसार नामांतरण करने के लिए इस नामांतरण आदेश की अपील जिला कलेक्टर को प्रस्तुत करें। देरी न करें। कहीं ऐसा न हो अपील का समय निकल जाए और आप की अपील देर से प्रस्तुत करने के आधार पर निरस्त हो जाए।

 

नामान्तरण आदेश की प्रतिलिपि प्राप्त कर उस की अपील प्रस्तुत करें।

ऊसरसमस्या-

भानु शुक्ला ने सिवनी, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे दादा की पैतृक सम्पति में से पांच एकड़ मेरे पिताजी को मिला है। परन्तु मेरे दादा की कुल जमीन का ढाई एकड़ बिना जानकारी के किसी और के खाते में चढ़ा दिया गया। मेरे दादा ने ध्यान नहीं दिया। ये कार्यवाही १९८४ में हुई है। हालाँकि जिस के नाम से ये जमीन चढाई गयी है उसे भी ये नहीं पता कि जमीन उसके नाम पर है। हम खुद खेती नहीं करते और पिछले १५ साल से ठेके पर दे रखे हैं। अब हम अपनी पुरानी रजिस्ट्री और खसरे के आधार पर खेती वापस चाहते हैं। उस पर कब्ज़ा किस का माना जायेगा। हमारा या जिस के नाम पर गलती से चढ़ा दी गयी है उस का या हमारे ठेकेदार किसान का जो कई सालों से उस पर खेती कर रहा है, हम कैसे उस जमीन को वापस प्राप्त कर सकते हैं।

समाधान-

प की जो ढाई एकड़ जमीन किसी दूसरे के नाम चढ़ा दी गई है उस का जरूर कोई नामांतरण हुआ होगा। आप उस नामान्तरण आदेश तथा उस से पहले की जमाबंदी की प्रतिलिपियाँ प्राप्त करें। ये प्रमाणित प्रतिलिपियाँ प्राप्त होने पर ही आप को इस नामान्तरण की वास्तविक जानकारी होगी। तब आप जानकारी की तिथि से नामान्तरण आदेश की अपील प्रस्तुत करें। नामान्तरण आदेश निरस्त होने पर जमीन फिर से आप के खाते में आ जाएगी।

मीन आप हमेशा से बंटाई पर देते रहे हैं। बंटाईदार को आप ठेकेदार कह रहे हैं ठेकेदार का कब्जा तो इस कारण से है कि आप ने उसे जमीन बंटाई पर दी है। इस कारण ठेकेदार का पैर तो आप के जूते में है। इस तरह ठेकेदार का कब्जा भी आप का कब्जा माना जाएगा।

स मामले में आप राजस्व मामलों की पैरवी करने वाले किसी स्थानीय वकील से सलाह लेकर आगे की कार्यवाही करें।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada