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धर्म परिवर्तन की कोई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया नहीं।

धर्म परिवर्तनसमस्या-

यचन्द मौर्य ने मनौवा खमरिया, जनपद मीरजापुर,  उ0 प्र0 से जानना चाहा है-

विजय मौर्य ने अपना हिंदू धर्म बौद्ध धर्म में परिवर्तन करा लिया हैं लेकिन वे इस सम्बन्ध में ज्यादा जानकारियाँ चाहते हैं – उनके प्रश्न निम्न हैं-
1.  उ0प्र0 सरकार या भारत सरकार द्वारा कोई ईमेल या विभागीय वेब साईट उपलब्ध है जहाँ से हमें धर्म परिवर्तन सम्बंधी नियम कानून व अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हो सके ?
2. यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है तो धर्म परिवर्तन करने के बाद उस व्यक्ति का नाम व जाति जो पहले था वो वही रहेगा या फिर बद्ल जायेगा ?
3. धर्म परिवर्तन द्वारा आन लाइन माध्यम से प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जाता तो फिर जाति प्रमाण पत्र व परिवार रजिस्टर में दर्ज व इसके साथ अन्य दस्तावेजों में परिवर्तन कराना जरुरी होगा या नहीं यदि नहीं तो फिर किसीभी फार्म को भरते समय यदि आवेदक मौर्य हिन्दू जाति का हो और हिन्दू धर्म से हो तो धर्म परिवर्तन के बाद वो आवेदन पत्र में अपना विवरण कैसे दर्ज करायेगा हिन्दू धर्म या बौद्ध धर्म ?
4. महोदय मेरे दोस्त के पुत्र धर्म परिवर्तन कराकर बौद्ध धर्म अपनाया है लेकिन दशमोत्तर छात्रवृत्ति आवेदन भरते समय उसने अपना विवरण मौर्य जाति के साथ व बौद्ध धर्म चुन कर आवेदन आनलाईन भरा था लेकिन इस धर्म परिवर्तन के कारण आवेदन विभाग में पता नहीं किन कारणों से रुक गया था जब उनके बेटे ने इस मामले को मुख्यमंत्री0 महोदय उ0 प्र0 को सीधा ईमेल से जब अपनी समस्या से अवगत कराया था तो शासन स्तर से मामले को प्रमुख सचिव/ समाज कल्याण पिछड़ा वर्ग् को प्रेषित कर दिया गया बाद में विजय जी के बेटे ने
अपने बारे में धर्म परिवर्तन कि जानकारी देते हुए मा0 मुख्यमंत्री जी को बौद्ध धर्म का होने की बात से दुबारा अवगत कराया गया जिस पर बाद में शासन स्तर से मामले को  अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को प्रेषित कर कार्यवाही करने हेतु सचिव को निर्देशित किया गया है। इस सम्बंध में जरा विस्तृत जानकारी ये देने की कृपा करें कि हर बार इनके बेटे को धर्म परिवर्तन कराने की बात बतानी होगी या और कोई भी रास्ता है ?
5. यदि कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है और वह जाति से मौर्य पिछड़ी जाति का है तो धर्म परिवर्तन कराने के बाद  उस व्यक्ति की जाति व धर्म वही रहेगा या फिर क्या होगा? धर्म परिवर्तन कराने वाले को किन किन दस्तावेजों में पूर्व में दर्ज विवरणों को संशोधन कराना पड़ेगा?
6. यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन कराता है तो उसके परिवार का धर्म परिवर्तन अपने आप होगा या कराना होगा ? यदि कोई लड़का धर्म परिवर्तन कराता है तो उसके माता पिता का धर्म परिवर्तन होगा या नहीं?

समाधान-

भारत में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया के संबंध में किसी तरह का कोई कानून नहीं है, उस के लिए कोई कानूनी प्रक्रिया निर्धारित नहीं है। कोई भी व्यक्ति स्वैच्छा से कोई भी धर्म अपना सकता है। कुछ राज्यों में लालच या दबाव में धर्म परिवर्तन कराने पर प्रतिबंध संबंधी कानून अवश्य हैं। इस संबंध में आप को न केन्द्र सरकार और न ही किसी राज्य सरकार की किसी वेबसाइट पर कोई जानकारी प्राप्त नहीं होगी, ऐसी कोई जानकारी किसी सरकार द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गयी है।

धर्म परिवर्तन के लिए कोई विशेष प्रक्रिया न होने के कारण कोई भी व्यक्ति जो धर्म अपनाना चाहता है वह उस धर्म के धार्मिक स्थल पर जा कर धर्मानुसार उचित प्रक्रिया जान सकता है। उस प्रक्रिया, अनुष्ठान आदि को पूर्ण कर लेने के उपरान्त यदि उस धर्म के लोग उसे अपने धर्म में स्वीकार कर लेते हैं तो उस का धर्म परिवर्तन सम्पन्न हो जाता है। धर्म विशेष के कोई पीठ आदि हों तो वे इस बात का लिखित प्रमाण पत्र जारी कर सकते हैं कि अमुक व्यक्ति ने अमुक दिन हमारे धर्म की प्रक्रिया/ अनुष्ठान संपन्न कर उन का धर्म अपना लिया है। इस प्रमाण पत्र के प्राप्त होने पर धर्म परिवर्तन करने वाला व्यक्ति स्वयं अपना एक शपथ पत्र निर्धारित स्टाप्प पेपर पर अंकित करवा कर किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट अथवा नोटेरी पब्लिक से प्रमाणित करवा सकता है। यह प्रमाणीकृत शपथ पत्र ही उस व्यक्ति के धर्म परिवर्तन का प्रमाण होगा।

धर्म परिवर्तन के लिए नाम परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है। फिर भी बहुधा लोग अपना नाम परिवर्तित कर लेते हैं, जिस धर्म में वह प्रवेश करता है उस धर्म के लोग भी उस का नया नामकरण करने का सुझाव देते हैं। लेकिन सरकारी रिकार्ड में नाम परिवर्तन करना एक दुष्कर प्रक्रिया है और इस से अनेक जटिलताएँ उत्पन्न होती हैं। इस कारण से यदि नाम परिवर्तन न हो तो बेहतर है। धर्म परिवर्तन का नाम परिवर्तन से कोई संबंध नहीं है।

जाति जन्म से होती है, धर्म परिवर्तन से उस पर कोई अन्तर नहीं पड़ता है। जाति परिवर्तन केवल किसी व्यक्ति को किसी दूसरी जाति के व्यक्ति द्वारा दत्तक ग्रहण करने और फिर उस के परिवार संबंधियों द्वारा व्यवहार में अपना लिए जाने पर ही हो सकता है अन्यथा नहीं। यहाँ तक कि विवाह से भी जाति परिवर्तन संभव नहीं है। इस कारण धर्म परिवर्तन के उपरान्त भी व्यक्ति की जाति वही रहेगी जिस में उस ने जन्म लिया है।

संविधान के अनुसार भारत में राज्य का धर्म से कोई संबंध नहीं है, उस के हिसाब से राज्य धर्म निरपेक्ष है इस कारण वह धर्म परिवर्तन के लिए कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं करता है। सरकारी रिकार्ड में जहाँ जहाँ धर्म अंकित किया  जाता है वहाँ परिवर्तन कराने के लिए वह व्यक्ति अपने सत्यापित शपथपत्र की सत्यापित प्रति तथा अंगीकार किए गए धर्म के लोगों या प्रमुखों द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति के साथ आवेदन कर सकता है। इस आवेदन के आधार पर संबंधित रिकार्ड में उस का धर्म परिवर्तित कर दिया जाएगा। किस किस रिकार्ड मेें उसे परिवर्तन कराना होगा यह तो वह स्वयं अपनी आवश्यकता के अनुसार तय कर सकता है, कोई अन्य नहीं।

धर्म परिवर्तन के कारण किसी व्यक्ति की छात्रवृत्ति रुकनी नहीं चाहिए थी। लेकिन धर्म परिवर्तन के बारे में असमंजस हो जाने से अधिकारियों ने उसे रोक दिया गया होगा। लेकिन यह गलत था। यदि ऐसा होता है तो इस के विरुद्ध लड़ा जा सकता है और न्यायालय से भी राहत प्राप्त की जा सकती है।

किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन से सिर्फ और सिर्फ उस का धर्म परिवर्तन होगा। उस के परिवार के अन्य सदस्यों का नहीं चाहे वे माता-पिता, बहिन-भाई, पत्नी या संतानें ही क्यों न हों। धर्म परिवर्तन के उपरान्त उत्पन्न हुई संतान का धर्म माता पिता का माना जाएगा। वयस्क होने पर वह चाहे तो अपना धर्म स्वयं निश्चित कर सकता है।

नाम बदलवाने की जरूरत नहीं।

name changeसमस्या-

राम सिंह ने सीकर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरी माताजी का विवाह विच्छेद हो गया है और उन्होंने दूसरा विवाह कर लिया है। मैं अपने प्रमाण पत्र में अपने पिता का नाम बदलवाना चाहता हूँ, क्यों कि मैं उन लोगों के साथ ही रहता हूँ। मरा नाम तभी उन के गाँव की वोटर लिस्ट में लिखा जाएगा और राशन कार्ड बनेगा। ये नाम कैसे बदलेगा?

समाधान

प की माता जी ने विवाह किया है। माता जी के पति ने आप को गोद नहीं लिया है। इस कारण आप के पिता का नाम तो वही रहेगा जो है। उसे बदलवाने की कोई जरूरत नहीं है। आप आज भी अपने जन्मदाता पिता के उत्तराधिकारी हैं। यदि आप के जन्मदाता पिता उन के देहान्त के समय कोई निर्वसीयती संपत्ति छोड़ते हैं तो उस में आप को हिस्सा प्राप्त होगा। यदि आप के जन्मदाता पिता की कोई पुश्तैनी संपत्ति है या किसी पुश्तैनी संपत्ति में उन का हिस्सा है तो आप का उस में आज भी हिस्सा है। यदि आप नाम बदलेंगे तो यह उस हिस्से को प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न करेगा।

प के पिता का नाम तभी बदल सकता है जब कि आप को आप की माता के वर्तमान पति गोद ले लें। उन के द्वारा गोद ले लेने पर आप उन के उत्तराधिकारी हो जाएंगे और यदि उन की कोई पुश्तैनी संपत्ति हुई तो उस में हिस्सेदार भी होंगे। गोद लेने के लिए गोदनामे का पंजीकरण कराना पड़ेगा अन्यथा वह अनेक मामलों में मान्य नहीं होगा।

दि आप यह समझते हैं कि वोटर लिस्ट में नाम अंकित कराने के लिए या राशनकार्ड में नाम जुड़वाने के लिए आप को पिता का नाम बदलने की जरूरत है तो यह आप की गलत समझ है। जिस किसी ने भी आप को यह कहा है गलत कहा है। इन दोनों कामों के लिए नाम बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है। केवल आप की माता जी और उन के वर्तमान पति के शपथ पत्र प्रस्तुत करने से ये दोनों काम हो सकते हैं। नाम बदलने से अन्य अनेक समस्याएँ हो सकती हैं। इस कारण नाम बदलना ठीक नहीं है।

नाम न ही बदला जाए तो उत्तम है, वर्ना परेशानियाँ तो आएंगी।

name changeसमस्या-

चैतन्या साहू ने लोरमी, छत्तीसगढ से समस्या भेजी है कि-

र, मैं अपना नाम विधिवत छग राजपत्र में प्रकाशित करा चुका हूँ। मेरे पुराने अभिलेख में नाम परिवर्तन करने के लिए माशिमण्डल रायपुर में आवेदन करने पर कोई जवाब नहीं आता है। विवि में आवेदन करने पर 10वीं12वीं के अंकसूची में नाम परिवर्तन पश्चात, परिवर्तित नाम से अंकसूची जारी करने हेतु पत्र प्राप्त हुआ है। छग बोर्ड में 20 साल के भीतर त्रुटिसुधार का प्रावधान है। नाम परिवर्तन का काई उल्लेख नहीं है। मैं 20 साल बाद नाम परिवर्तन कराया हूँ। छग व्यावसायिक परीक्षा मण्डल द्वारा जारी विज्ञापन में 10वीं में अंकित नाम के अनुसार फार्म भरने बाध्यता रहती है। जिस के कारण मैं वंचित रहता हूँ। पुराने रिकार्ड में नाम सुधरवाने हेतु विधि सलाह देने का कष्ट करें।

समाधान

प ने जब दसवीं की या माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा दी तब आप का नाम पुराना ही था। आप ने नाम अब बदला है। बदला हुआ नाम राजपत्र में प्रकाशन के बाद उपयोग में आया है। इस के पहले के प्रमाण पत्रों में नाम बदलना मुझे संभव नहीं लगता, क्यों कि जिस तिथि का प्रमाण पत्र है उस समय तो आप का नाम वही पुराना था। इस से तो आप का पुराना प्रमाण पत्र ही अप्रामाणिक हो जाएगा। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अपने नियम के अनुसार ही नाम बदलेगा अन्यथा नहीं।

प को छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल से संपर्क कर के पूछना चाहिए कि दसवीं की परीक्षा में आप का पुराना नाम था जो कि गजट नोटिफिकेशन के बाद बदल गया है। आप को वहाँ अपना नया नाम ही लिखना चाहिए, पुराने नाम का उल्लेख करते हुए तथा गजट नोटिफिकेशन की प्रतिलिपि साथ में संलग्न करना चाहिए।

ही कारण है कि नाम बदलने के लिए प्रक्रिया पूछने वाले लोगों को हम यही सलाह देते हैं कि वे नाम न बदलें तो ही ठीक है। नाम से कुछ नहीं होता। नाम तो जो माता पिता ने रख दिया वही चलते रहना चाहिए। नाम बदलने के बाद जितनी परेशानियाँ आती हैं वे सब आप ने देख ही लीं हैं।

गंगजमुनी तहजीब के नामों की परम्परा को सुरक्षित रखने की जरूरत है।

rp_father-son1.jpgसमस्या-

मोहन लाल ने दिल्ली से राजस्थान राज्य की समस्या भेजी है कि-

मेरा नाम मोहनलाल है। मेरी उम्र 32 है। मेरी समस्या ये है कि मैं अपना नाम बदलना चाहता हूँ। मैं मुस्लिम हूं लेकिन मेरा नाम हिन्दू है। वैसे हमारी कास्ट में मिले जुले नाम होतें हैं। इससे मुझे कोई दिक्कत भी नही है।  जैसे मेरे पिता का नाम मुस्लिम है। मेरे बच्चों के नाम मुस्लिम हैं। मुझे मेरे नाम के आगे पिता का नाम और बच्चों के नाम के आगे मेरा नाम लिखवाते समय हीन भावना होती है। अभी मैंनें अपने बच्चे का स्कूल में एडमिशन करवाया तो मैडम ने मुझे हैरानी से देखा और कहा कि ऐसा कैसे आपका नाम हिन्दू और आपके पिता और बच्चे का नाम मुस्लिम! इसी तरह बहुत सी बार ऐसा होता है। तो मैं यही जानना चाहता हूं कि नाम बदलने की क्या प्रक्रिया है। कितना समय लगेगा और मेरे सभी रिकार्ड में जैसे बैंक खाता, बीमा पोलिसी, पैन कार्ड, मतदाता-पत्र,स्कूल में बच्चों के नाम इत्यादि में नया नाम कैसे दर्ज होगा।  मेरे स्कूल के डोक्युमेंट कैसे काम करेंगे वैसे मेरा आधार कार्ड बना हुआ नही है। मैं राजस्थान के चुरू जिले के एक गांव का निवासी हूं और वहीं का मतदाता हूं। मैं काफी समय से इस बारे में सोच रहा हूं। उम्मीद है कि आप जरूर सुझाव देंगे

समाधान-

प का इतना प्यारा नाम है। आप द्वारा इसे बदलना चाहने का कारण मात्र इतना है कि लोगों के प्रतिक्र्या में हैरानी जताने पर आप को हीन भावना होती है। इस का सीधा अर्थ यह है कि कोई बाहरी कारण नहीं है और कौई जरूरत भी नहीं है। यदि इस हीन भावना को ही आप त्याग दें तो सब कुछ ठीक हो जाएगा।

मेरे एक मित्र हैं। उन का नाम योगेन्द्र है। उन्हों ने अपनी बेटी का नाम एकता शबनम रखा। जब वे स्कूल में नाम लिखाने गए तो अध्यापिका ने कहा कि यह कैसा नाम है आगे से हिन्दू लगता है पीछे से मुस्लिम। तब योगेन्द्र ने उस अध्यापिका से कहा कि हमारी बेटी है जैसे हम ने नाम रखना चाहा रख दिया। आप तो यही लिखिए। बेटी बड़ी हो गई। उस की शादी भी हो गयी। कोई परेशानी नहीं है बल्कि वह गर्व से कहती है कि मैं भारत की गंगाजमुनी तहजीब की बेटी हूँ। हमारे एक मित्र हैं उन का नाम मोहित है, उन का परिवार मुस्लिम है। उन्हें कोई समस्या नहीं होती। बहुत से मुस्लिम अभिनेता और कलाकार हैं जिन्हों ने अपने नाम हिन्दुओं जैसे रख लिए हैं। न उन्हें कोई हीन भावना आती है न अन्य किसी को। आप के माता-पिता ने आप का नाम बहुत प्यार से रखा होगा। आप के नाम का अर्थ भी बहुत सुन्दर है। मोहन का अर्थ है मोहने वाला और लाल का अर्थ है बच्चा। पूरे नाम का अर्थ है ऐसा बालक जो सब को अपने मोहपाश में बांध लेता है। मेरी नजर में तो आप के जैसे गंगजमुनी तहजीब के नामों की परंपरा को सहेज के रखने और आगे बढाने की जरूरत है।

फिर भी आप नाम बदलना चाहें तो कोशिश कर सकते हैं। लेकिन नाम बदलना आप के लिए बहुत सारी मुसीबतें लाएगा। आप को पहले एक शपथ पत्र मजिस्ट्रेट से तस्दीक करवाना पड़ेगा। फिर उस की खबर अखबार में छपवानी पड़ेगी। सरकारी गजट में भी प्रकाशन कराना पड़ेगा। फिर गजट में प्रकाशन की प्रतिलिपि के साथ जिस जिस रिकार्ड में आप का नाम दर्ज है और आप बदलवाना चाहते हैं वहाँ वहाँ आवेदन करना पड़ेगा। हर जगह नाम बदलवाने की अलग अलग प्रक्रिया होगी और हर स्थान पर फीस भी देनी पड़ेगी। इस में बहुत सारा समय नष्ट होगा और पैसा भी बहुत खर्च होगा। उस से तो बेहतर है कि आप अपना नाम न बदलवाएँ। नाम से कोई हिन्दू या मुस्लिम नहीं होता। वह तो मन से मानने से होता है। ज्यादातर लोग ऊपर से ही हिन्दू और मुसलमान होते हैं वास्तव में तो वे किसी धर्म को मानते तक नहीं या फिर तकलीफ में हर जगह अपना सिर नवाते फिरते हैं।

ब तो भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश व अन्य अनेक देशों में बहुत लोग है जो अपना नाम अपनी मर्जी से रखते हैं और धर्म पूछे जाने पर यह कहते हैं कि यह मेरा व्यक्तिगत मामला है। मेरी तो राय यह है कि आप अपना नाम मोहनलाल ही रहने दें। जब भी कोई पूछे कि मुस्लिम हो कर ऐसा नाम क्यों तो बड़े गर्व से उन्हें बताइए कि मेरे माता-पिता भारत की गंगा जमुनी तहजीब के थे। वे किसी में भेद ही नहीं करते थे इस कारण उन्हों ने मेरा ऐसा नाम रखा, जिस पर मुझे गर्व है और हमेशा करता रहूंगा। अपनी हीन भावना को गर्व की भावना में बदल डालें। फिर आप को कहीं कोई परेशानी नहीं होगी।

नाम की स्पेलिंग के कारण आप को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

समस्या-

रूपिन्दर जीत सिंह ने लुधियाना, पंजाब से पूछा है-

मेरा नाम Rupinder jit Singh है मैने 1991 में दसवीं की परीक्षा पास की थी मुझेदसवीं के दो सर्टिफिकेट्स दिए गए एक डिटेल मार्क्स कार्ड जिसमे मेरा नामसिर्फपंजाबी में है और दूसरा सर्टिफिकेट जिसमें मेरा नाम पंजाबी औरअंग्रेजी में है दोनों सर्टिफिकेट्स में पंजाबी में मेरा नाम ठीक है परअंग्रेज़ी में मेरा नाम Rupinder Jeet Singh है। मेरे बाक़ी सब एजुकेशनलसर्टिफिकेट्स में मेरा नाम Rupinder Jit Singh है jeet और jit मेंस्पेलिंग मिस्टेक है। मैं ने पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड से दसवीं की थी। अब नाम rectify करवाने के टाइम लिमिट भी खत्म हो चुकी है। मेरी प्रॉब्लम अब ये हैकि मैंने गवर्नमेंट जॉब के लिए अप्लाई किया है और मैं सारे पड़ाव पार कर चूकाहूँ। अब काउंसलिंग की तिथि नजदीक आ चुकी है। मुझे डर है इस स्पेलिंग मिस्टेककी वजह से मुझे कोई समस्या न आए। वैसे मैंने किसी के कहने परएकएफिडेविट भी बनवा लिया कि Rupinder jit Singh और Rupinder Jeet Singh एक हीव्यक्ति है और मैं ने 2 लोकल अखबारों में भी पब्लिकेशन करवा दिया है। क्या येमेरे लिए सेफ है? कृपया मेरी मदद कीजिए इस वजह से मैं बहुत टेंशन मेंहूँ।

 name change

समाधान-

प की कोई समस्या ही नहीं है। यदि यह गलती हुई है तो बोर्ड से हुई है। आप का नाम मूलतः पंजाबी में लिखा गया है। अंग्रेजीकरण बोर्ड ने किया है। बात सिर्फ आप की पहचान की है और इस बात की कि कहीं कोई गलत प्रमाण पत्र का प्रयोग तो नहीं किया जा रहा है न?

प पहले ही सब कुछ कर चुके हैं और आगे कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। आप निडर हो कर काउंसलिंग में जाइए। आप को कोई समस्या नहीं आएगी। हमारी शुभकामनाएँ आप के साथ हैं।

फिर भी आप को पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड में खुद पता करना चाहिए। मेरे विचार में नाम की स्पेलिंग के लिए संशोधन की कोई समय सीमा नहीं है, बस कुछ शुल्क अधिक चुकाना पड़ सकता है। आप को जब भी समय मिले इसे दुरुस्त करवा लीजिए। यदि अभी समय हो तो अभी करवा लें। अन्यथा बाद में इस का प्रयास अवश्य करें। अभी तो आप निडर हो कर काउंसलिंग में जाएँ। वहाँ अपनी ओर से कोई संदेह प्रकट न करें। यदि कोई इस मिसस्पेलिंग के बारे में बात करें तो उसे नरमी से समझाएँ। केवल इस कारण से आप को नियोजन देने से कोई इन्कार नहीं कर सकता।

विवाह के बाद नाम, उपनाम बदलना उचित नहीं

समस्या-

सिगरौली वैधान, मध्य प्रदेश से ए.के. साहु ने पूछा है-

अन्तर्जातीय विवाह के उपरान्त डिग्री या डिप्लोमा में पत्नी का उपनाम क्या होना चाहिए? पति का या फिर पहले वाला।

समाधान-

त्नी के जन्म प्रमाण पत्र से ले कर विवाह तक जितने भी प्रमाण पत्र बने हैं उन में निश्चित ही उस का उपनाम उस के पिता के परिवार का रहा होगा। यदि विवाह के उपरान्त उस का उपनाम बदला गया तो उस के पास दो तरह के उपनाम वाले प्रमाण पत्र हो जाएंगे। जिस से उसे बार बार यह स्पष्टीकरण देना होगा कि ये दोनों नाम उसी के अर्थात एक ही व्यक्ति के हैं। इस प्रकार एक नई परेशानी खड़ी हो जाएगी।

दि उपनाम बदला जाता है तो उस के लिए पूरी प्रक्रिया अपनानी होगी। शपथ पत्र मजिस्ट्रेट के समक्ष तस्दीक कराना होगा। अखबार व राज्य के गजट में सूचना का प्रकाशन करवाना होगा। फिर हर बार जहाँ भी उसे प्रमाण पत्रों से जरूरत होगी तीनों दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियाँ साथ में लगानी होंगी। इस से उस के और उस के पति के कष्ट बढ़ेंगे कम नहीं होंगे।

पनाम बदले जाने से सिर्फ पति के परिवार के पुंसवादी अहम् की तुष्टि के सिवा कुछ नहीं होगा। इस कारण से प्रमाण पत्रों में पत्नी का नाम जो चला आ रहा है वही चलते रहने देना चाहिए। इस से भविष्य में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। आज कल यह खूब प्रचलन में भी है। मेरी राय में विवाह के कारण किसी का नाम या उपनाम बदला जाना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।

विवाह के उपरान्त नाम न बदलना अधिक अच्छा है, इस से पहचान का कोई संकट नहीं होता।

समस्या-

इंदौर, मध्यप्रदेश से पिंकी परिहार ने पूछा है –

मैं विवाहित हूँ और एक शासकीय कर्मचारी हूँ। विवाह पूर्व एवं पश्चात मेरे समस्त दस्तावेजों शासकीय नौकरी, बैंक, वोटर कार्ड, आधार कार्ड इत्यादि में मेरा नाम वही है जो विवाह पूर्व था। दस्तावेजों में विवाह पश्चात नाम परिवर्तन इत्यादि की कोई अनिवार्यता न होने के कारण मैं ने अपना नाम परिवर्तन अर्थात विवाह पश्चात मेरे पति का उपनाम मेरे नाम के आगे नहीं जुडवाया है। मेरे पति को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं है। मैं भी अपना विवाह पूर्व का नाम बदलना नहीं चाहती हूँ। विवाह पश्चात बैंक, राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड इत्यादि में मेरे पति का ही पूर्ण नाम अंकित है। अभी मुझे वर्तमान में पासपोर्ट बनवाना है। पासपोर्ट आवेदन में मैंने अपना विवाह पूर्व का नाम एवं अपने पति का पूर्ण नाम अंकित किया है। क्या मुझे उक्त वजह से कोई अड़चन तो नहीं आएगी?

समाधान-

no-problemब आप का नाम आरम्भ से एक ही चला आ रहा है और विवाह के बाद भी नहीं बदला है और न ही पति का नाम/उपनाम नहीं जोड़ा गया है तो आप को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप को पासपोर्ट बनवाने में कोई परेशानी नहीं आएगी। किसी भी व्यक्ति का नाम उस की पहचान होता है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब कुछ दस्तावेजों में एक नाम हो और कुछ दस्तावेजों में दूसरा नाम हो। कई परिवारों में ऐसी परंपरा है कि जब कोई लड़की विवाह कर ससुराल के परिवार का सदस्य बनती है तो वह ससुराल का उपनाम धारण कर लेती है। कई परिवारों में यह परंपरा है कि मूल नाम ही बदल दिया जाता है। इस से पहचान बदल जाती है। पुराने प्रमाण पत्रों में एक नाम होता है जब कि बाद के दस्तावेजों में दूसरा नाम। वैसी स्थिति में नाम परिवर्तन की घोषणा करते हुए गजट में प्रकाशन आवश्यक हो जाता है। जिस से यह स्पष्ट हो सके कि इन दो नामों वाला व्यक्ति एक ही है।

प के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है। आप का नाम परिवर्तित नहीं हुआ है। इस कारण से आप के मामले में किसी तरह के संदेह की कोई स्थिति नहीं है। आप को पासपोर्ट बनवाने में नाम के कारण कोई समस्या नहीं होगी। अपितु नाम / उपनाम नहीं बदले जाने से आप के मामले आसानी होगी।

नाम या पिता का नाम परिवर्तन की प्रक्रिया

समस्या-

दिल्ली से मनोज शर्मा ने पूछा है –

मेरा पहली पत्नी से तलाक होने के बाद मेरा दूसरा विवाह हुआ,  मेरी दूसरी पत्नी मुझसे विवाह पूर्व {विधवा} थी ,तथा उनके पास एक दस वर्षीय बिटिया भी थी, जो अब हमारे साथ ही है,  तथा केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ती है,  मेरा पहली पत्नी से एक [दस वर्षीय] बेटा है,  अब हमारे दोनों बच्चे हमारे साथ रहते हैं , मगर दोनों बच्चों के स्कूल रिकॉर्ड में माता/पिता का नाम भिन्न है जैसे बिटिया के उन [मृत] पिता के नाम के साथ [ Late.sh….] लगाया जाता है, जो मुझे और मेरी पत्नी को ठीक नहीं लगता,  मैंने कुछ अध्यापकों से बात कर , प्रिंसिपल से मिला और उनके कहने पर पहले नोटरी से ,फिर रजिस्ट्रार दफ्तर से अडॉप्ट डीड रजिस्टर करवा कर, तथा शादी के फोटो, और प्रार्थना पत्र [ पत्नी की तरफ से] पूरी फाईल बनाकर स्कूल में दे दी,  दो-तीन महीने बाद प्रिंसिपल महोदय ने कहा कि ये फाईल कमिश्नर साहब ने रोक दी है, कि ऐसे नाम नहीं बदला जाता है, इससे थक कर मैंने बेटे के स्कूल [जो DAV में पढता है] में पिता का नाम बदलवाने की अपनी कोशिश रोक दी ,कृपया मार्गदर्शन करे क्या हम ये काम कानूनन करवा सकते है …यदि हाँ …तो कैसे?

समाधान-

name changeकिसी भी बालक को दत्तक ग्रहण के बाद माता पिता का नाम कभी भी बदलवाया जा सकता है। लेकिन प्रत्येक राज्य में उस की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। आप ने उस का प्रारंभिक चरण दत्तक विलेख को पंजीकृत करवा कर पूरा कर भी लिया है। लेकिन यह सब अधूरा है। आप के नाम बदलने के आवेदन की पत्रावली कमिश्नर कार्यालय में अटकी है। आप को कमिश्नर कार्यालय में पूछना चाहिए कि नाम बदलवाने के लिए क्या प्रक्रिया और होनी शेष है और उन के द्वारा बताई गई प्रक्रिया को पूर्ण कर लेना चाहिए। तब फिर नाम बदलने में कोई बाधा नहीं रहेगी।

म तौर पर नाम परिवर्तन के लिए प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के समक्ष इस आशय का एक शपथ पत्र तस्दीक करवाना पड़ेगा जिस में आप यह लिखेंगे के आप ने उक्त बालक को दत्तक ग्रहण कर लिया है। इस कारण पिता का नाम बदल गया है। अब इसे रिकार्ड में बदलवाना चाहते हैं। इस शपथ पत्र को अपने पास रखें और इस की एक सूचना स्थानीय अखबार में प्रकाशित करवाएँ कि दत्तक ग्रहण के कारण पिता का नाम परिवर्तित हो गया है। शपथ पत्र और अखबार में प्रकाशित सूचना की कटिंग के साथ आप सरकारी प्रेस से फार्म ले कर उसे भर कर वहाँ दे दें आवश्यक फीस जमा करवा दें। इस से दिल्ली/भारत सरकार के गजट में नाम परिवर्तन की सूचना प्रकाशित होगी। इस गजट सूचना को संभाल कर रखें। अब आप शपथ पत्र, अखबार की सूचना और गजट प्रकाशन की प्रतियों के साथ विभाग में आवेदन करें। रिकार्ड में नाम परिवर्तित हो जाएगा। लेकिन इस प्रक्रिया में प्रत्येक राज्य में मामूली हेर-फेर हो सकता है, इस कारण पहले कमिश्नर कार्यालय से पता कर लें कि उक्त प्रक्रिया के अतिरिक्त और क्या क्या करना होगा। यदि कमिश्नर कार्यालय तुरंत जवाब न दे तो आरटीआई के अंतर्गत एक आवेदन प्रस्तुत कर दत्तक ग्रहण विलेख के आधार पर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पूछ लें।

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