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लम्बी अवधि के कब्जे से किसी संपत्ति का स्वामित्व नहीं मिलता।

समस्या-

संध्या कश्यप ने रेलवे पाड़ा, अडावल, जगदलपुर, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

35 वर्ष से हमारे ससुर ने घर के समीप एक जमीन पर कब्जा कर रका था। उस समय पर वहाँ कोई मकान नहीं था। अब सरपंच पंचायत की जमीन बता कर दूसरो को बेच रहे हैं और हमें क्या तुम्हारे पास पट्टा है कह कर डरा रहे हैं। क्या यह जमीन हमें मिल सकती है? क्या हम लोग कोई कानूनी कार्यवाही कर सकते हैं? सरपंच का काम पंचायत के लोगों को सुरक्षित करना है कि उन्हें लूटें।

समाधान-

प का घर के पास की किसी जमीन पर इतना पुराना कब्जा है इस का अर्थ ये तो नहीं कि आप उस जमीन के स्वामी हो गए हैं। यदि जमीन पंचायत की है तो वह सार्वजनिक है और उस पर कब्जा हटाने की कार्यवाही पंचायत को करने का अधिकार है। वे आप का कब्जा हटाने की कार्यवाही कर सकते हैं और किसी जरूरतमंद को जमीन मकान बनाने के लिए बेच सकते हैं। आखिर गाँव में जमीन सीमित होती है और लगातार आबादी बढ़ने से मकानों के लिए जमीन की जरूरत होती है।

लेकिन किसी भी व्यक्ति का कब्जा यदि 30 वर्ष से अधिक का है तो उसे हटाया जाना संभव नहीं है। यदि आप को आशंका है कि आप का कब्जा जबरन हटा दिया जाएगा तो आप दीवानी न्यायालय में जा कर कब्जा हटाए जाने के विरुद्ध पंचायत तथा उस के द्वारा जिस को विक्रय की जाए दोनों के विरुद्ध स्थगन आदेश प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन फिर भी उस जमीन पर आप का स्वामित्व स्थापित नहीं होगा।   उस के लिए जमीन पंचायत से खरीदनी होगी या पट्टा बनवाना पड़ेगा।

 

अपने कब्जे का आप विपरीत आधिपत्य के सिद्धान्त के आधार पर बचाव करें।

rp_law-suit.jpgसमस्या-

समीर ने पठानकोट, पंजाब से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी ने ज़मीन ख़रीदी और उसकी रजिस्ट्री चारों भाइयों के नाम कर दी जबकि हम पाँच भाई हैं और इस बात का पता मुझे नहीं था। फ़ौज़ से रिटायर्ड होने के बाद मैं ने उसी ज़मीन पर घर बना लिया और उस के एक साल बाद मुझे पता चला कि मेरे नाम रजिस्ट्री नहीं है। मैं उस जगह पर 18 साल से रहता हूँ। राशन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली, पानी का बिल, वोटर कार्ड सब हैं। पर अब आगे क्या करूँ कैसे रजिस्ट्री नाम हो, बताएँ। मैने पूरे जीवन की पूँजी लगा दी है।

समाधान-

जिस जमीन पर आप ने मकान बनाया उसे आप ने अपना समझ कर बनाया। इस पर आज तक किसी ने कोई आपत्ति नहीं की और आप 18 वर्षों से उस पर काबिज हैं और उस पर निवास कर रहे हैं। इस कारण उस भूमि पर आप का विपरीत आधिपत्य है। अब उस जमीन के रेकार्डेड स्वामी आप को बेदखल नहीं कर सकते। आप उस जमीन का उपयोग उपभोग कर सकते हैं और आप के उपरान्त आप के उत्तराधिकारी उस का उपयोग कर सकते हैं। केवल आप का नाम रिकार्ड में नहीं है। यदि उक्त भूमि का कोई रेकार्डेड स्वामी आप के विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही करे और मुकदमा संस्थित करे तो आप विपरीत आधिपत्य के सिद्धान्त के आधार पर अपना बचाव कर सकते हैं।

ब कभी आपके राज्य में राज्य सरकार की ओर से पट्टे आदि बनाने का अभियान चले आप अपने कब्जे के आधार पर उस जमीन का पट्टा बनवाने का प्रयत्न करें। कभी न कभी तो पट्टा आप के नाम बन ही जाएगा।

मकान आप के स्वामित्व का है, आप पिता को उसे खुर्द बुर्द करने से रोक सकते हैं।

House and shopसमस्या-

भवेत् ने महोबा, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मारा जो नया मकान है वो मेरे और मेरे छोटे भाई के नाम है लेकिन उस में पिता जी का नाम संरक्षक के तौर पर डाला हुआ है। ये मकान उन्हीं के पैसों से बनाया हुआ है। मेरी शादी हो चुकी है मेरी शादी डरा के पैसों की धौंस दिखा के और इमोशनल ब्लैकमेल करके हुई है लेकिन मैं अभी भी बेरोजगार हूँ। जब मकान कि रजिस्ट्री हुई थी तब छोटा भाई क़ानूनी तौर पे नाबालिग था लेकिन अब बालिग़ है मेरी समस्या ये है कि पिता जी अपनी गलत आदतों की वजह से नए मकान की लोन लेते जा रहे हैं और कहीं वो पैसा लुटाते जा रहे हैं। इस के पहले जो दूसरा मकान था वो मकान संयुक्त तौर पर था उसमें दो परिवार रहते थे उस मकान में बीच में कोई दीवार नहीं थी वो तो उन्होंने अपनी गलत आदतों की वजह से उन्हीं को दे ही दिया है। अब उस पर हमारा अधिकार नहीं है। अब मेरी समस्या ये है कि क्या पिता जी इस मकान को भी इसी तरह किसी को दे देंगे और मैं मेरी वाइफ, मेरा छोटा भाई इसी तरह देखते रह जायेंगे और बाद में दर दर भीख मांगेगे या कोई एक्शन भी ले पाएंगे।

समाधान-

प की समस्या आप का चुप रहना, कोई कार्यवाही नहीं करना है। आप ने खुद कहा है कि नया मकान आप के व आप के भाई के नाम है, केवल संरक्षक के स्थान पर आप के पिताजी का नाम अंकित है। आप दोनो बालिग हो चुके हैं, वैसी स्थिति में संरक्षक का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। उक्त मकान आप दोनों की संयुक्त संपत्ति है तथा आप के पिता जी को उक्त मकान को रहन रख कर या उस की सीक्योरिटी देते हुए कर्ज लेने का कोई अधिकार नहीं है। यदि उन्होंने ऐसा किया भी है तो वह अनधिकृत है। इस से कर्ज लेने वाले को परेशानी हो सकती है, आप को नहीं।

वास्तव में आप को सन्देह इस कारण है कि वह मकान पिताजी का बनाया हुआ है। लेकिन इस से कोई फर्क नहीं पड़ता। बेनामी ट्रांजेक्शन्स प्रोहिबिशन्स एक्ट 1988 के अनुसार जो संपत्ति जिस के नाम खऱीदी गई है वह उसी की मानी जाएगी। उक्त मकान आप व आप के भाई का है इस कारण वह आप का ही माना जाएगा न कि आप के पिताजी का। आप के पिताजी किसी भी कानूनी कार्यवाही में उक्त मकान को अपना नहीं बता सकते। यदि बताते हैं तो भी उन का यह कथन नहीं माना जाएगा।

ब से पहले तो आप यह कर सकते हैं कि किसी स्थानीय वकील की मदद से स्थानीय समाचार पत्र में एक नोटिस प्रकाशित करवा दें कि उक्त मकान आप दोनों भाइयों की संपत्ति है तथा आप दोनों के अतिरिक्त किसी को भी उक्त मकान को विक्रय करने, बंधक करने या उस की सीक्योरिटी देने का अधिकार नहीं है। यदि किसी अन्य ने उक्त मकान के संबंध में किसी तरह का कोई विलेख निष्पादित किया हो तो उस का विधि के समक्ष कोई मूल्य नहीं है। इस से आप के पिताजी भी सावधान हो जाएंगे और उक्त मकान को इधर उधर करने का प्रयत्न नहीं करेंगे।

दि आप के पिता किसी तरह से उक्त मकान को खुर्द बुर्द करने के प्रायस में हों तो आप दीवानी न्यायालय में उन के विरुद्ध स्थाई निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं और उस मकान को खुर्द बुर्द करने पर रोक लगवा सकते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आप का व आप के भाई का हिस्सा उक्त मकान में चिन्हित हो जाए या उस का बँटवारा हो जाए तो आप उक्त मकान के बँटवारे का वाद भी दीवानी न्यायालय में प्रस्तुत कर सकते हैं तथा उक्त मकान के हस्तान्तरण पर रोक लगाने के लिए अस्थाई निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर निषेधाज्ञा प्राप्त कर सकते हैं।

गृह ऋण प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि मकान ऋण आवेदक के स्वामित्व का हो।

real5समस्या-

इंदौर, मध्यप्रदेश से प्रशान्त सी ने पूछा है-

मैं एक शासकीय वेतनभोगी कर्मचारीहूँ एवं अपने माता-पिता, परिवार के साथसंयुक्त रूप से निवास करतेहैं। परिवार में मेरे अतिरिक्त छोटी बहन है जोकि विवाहित होकर अपने ससुराल में निवासरत हैं। जिस भवन में हम निवास करतेहैं मैं उसके द्वितीय फ्लोर पर निर्माण कार्य करना चाहता हूँ।जिसके लिएमुझे किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक से गृह ऋण ग्राह्य करने की आवश्यकताहै।किन्तु भवन की रजिस्ट्री मेरे पिता के नाम है। आप से जानकारी चाहता हूँकि क्या मैं उस रजिस्ट्री को बैंक में बंधक रखकर होम लोन प्राप्त कर सकताहूँ? या मुझे कोई वैधानिक दस्तावेज उक्त सम्बन्ध में बनवाने होंगे? मुझेगृह ऋण प्राप्त करने में किसी तरह की कोई तकनीकी अड़चन तो नहीं आएगी? कृपया मार्गदर्शन प्रदान करें।

समाधान-

प को गृहऋण लेना है और बैंक या किसी वित्तीय संस्था से प्राप्त करना है। प्रत्येक बैंक और वित्तीय संस्था की गृहऋण की शर्तें भिन्न भिन्न होती हैं। आप को सब से पहले तो उन बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से संपर्क करना चाहिए जो गृहऋण प्रदान करती हैं और उन्हें अपने मकान के स्वामित्व के दस्तावेज बता कर उन से उन की शर्तें जाननी चाहिए। क्यों कि ऋण देने का मामला बैंक की शर्तों पर निर्भर करेगा। इस का कानून से कोई लेना देना नहीं है।

म तौर पर बैंक या वित्तीय संस्थाएँ किसी मकान के मालिक को ही उस मकान को बंधक रखते हुए गृहऋण देती हैं। आप या आप की बहिन उस मकान के मालिक नहीं हैं।

प के अनुसार आप के पिता उस मकान के स्वामी हैं। वे उस मकान को बंधक रख कर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन उस में परेशानी यह हो सकती है कि उन की आयु इतनी होगी कि उन के जीवनकाल में उस मकान के ऋण की किस्तें वे न चुका सकें। इस कारण से कोई भी संस्था उस पर ऋण देने से इन्कार कर देगी।

वित्तीय संस्थाएँ आप को ऋण दे सकती हैं यदि वह मकान आप के स्वामित्व में आ जाए। यह तभी हो सकता है कि आप के पिता उक्त मकान को दान या विक्रय के माध्यम आप के नाम हस्तान्तरित कर दें। दान और विक्रय दोनों के पंजीकरण में लगभग समान खर्च आता है। इस कारण यदि आप के पिता उक्त मकान को आप के नाम हस्तान्तरित करना चाहें तो विक्रय के माध्यम से ही किया जाना उचित है। क्यों कि तब आप मकान को क्रय करने और उस के निर्माण दोनों के लिए अपनी आय सीमा के अन्तर्गत ऋण प्राप्त कर सकते हैं। विक्रय की राशि आप के पिता भारतीय जीवन बीमा निगम जैसी वित्तीय संस्था के पास निवेश कर के उन के भविष्य की सुरक्षा भी करते रह सकते हैं जिस से उन्हें प्रतिमाह या त्रैमासिक रूप से ब्याज आदि के रूप में कुछ धनराशि प्राप्त होती रहे।

अपने कब्जे की भूमि पर डीडीए से पट्टा प्राप्त करने की कार्यवाही करें।

property-partition1समस्या-

मनोज शर्मा ने खुरेजी खास, दिल्ली से पूछा है-

मारी एक खसरे की ज़मीन दिल्ली में थी। उस को 1971 में सरकार ने अधिग्रहीत कर लिया था और उस का मुआवजा भी मेरे परिवार ने मेरे दादा के टाइम में ही ले लिया था। लेकिन 1400 गज आज भी हमारे पास है। जिस में हम ने एक मंदिर बनवा रक्खा है और मेरे पिताजी जिनका देहांत हो गया। वे उस पर काबिज थे, आज मैं और मेरे दो भाई इस ज़मीन पर काबिज हैं। हम लोग इस ज़मीन पर 42 साल से काबिज हैं। डीडीए ने भी इस ज़मीन पर कोई कब्जा कार्यवाही नहीं की है। मैं आप से पूछना कहता हुँ कि क्या आज हम लोग इस ज़मीन के असली मालिक हैं या डीडीए इस ज़मीन का मालिक है।

समाधान-

मीन के मालिकाना हक का सब से प्राथमिक सबूत यह है कि उस पर किस का कब्जा है। यदि आप का 30 वर्ष से अधिक से कब्जा है तो वह जमीन आप के मालिकाना हक की है। लेकिन जमीन पहले कृषि भूमि थी। अधिग्रहण करने के बाद उस जमीन को आबादी भूमि में परिवर्तित किया गया और डीडीए ने उसे काम में ले लिया। अधिग्रहण के समय कुछ जमीन जमीन के मालिक को उपयोग के लिए छोड़ दी जाती है लेकिन उस के लिए डीडीए आबादी भूमि पर मालिकाना हक का प्रमाण पत्र या पट्टा जारी करता है।

प को चाहिए कि आप डीडीए जा कर अधिग्रहण के समय छोड़ी गई जमीन तथा 30 वर्ष से अधिक से आप का उक्त भूमि पर कब्जा होने के आधार पर मालिकाना हक का पट्टा प्राप्त करने की कोशिश करें। इस सम्बंध में आप को डीडीए के मामले में काम करने वाले स्थानीय वकील से सलाह ले कर आगे बढ़ना चाहिए।

भूखंड के विक्रय पत्र में जिस का नाम है कानून के समक्ष वही उस का स्वामी है।

Farm & houseसमस्या-
पवन भटनागर ने दिल्ली से पूछा है-

मेरे पिताजी ने 15/10/1981में मध्यप्रदेश के एक छोटे शहर छतरपुर मे मकान बनाने हेतु 40 X 60 वर्ग फुट की एक जमीन खरीदी। जिस की रजिस्ट्री के समय मेरे पिताजी ने अपने भाई का नाम अपने साथ विक्रय पत्र में दर्ज करवा दिया था। रजिस्ट्री विक्रय पत्र में जो लिखा है वे इस प्रकार हैं। विक्रय पत्र मूल्य-1000-00 रूपये – मुद्रांक शुल्क 60-00 रूपये वर्तमान समय वाजार भाव – ब्लॉक ड्यूटी 10-00 रूपये सही मूल्य – 1000-00 रूपये – स्टाम्प ड्यूटी————–यॊग 80-20 रूपये ब्लॉक छतरपुर यदि कम हो तो क्रेता जिम्मेदार हैं।  विक्रेता – महेश कुमार वर्मा उमर 25 साल पुत्र श्री नरेश कुमार वर्मा निवासी छतरपुर तहसील ब जिला मध्यप्रदेश क्रेता — 1 – विनय कुमार उमर 25 साल पुत्र श्री विक्रम भटनागर,  2 – रमेश कुमार उमर 10 साल नावालिग पुत्र श्री विक्रम भटनागर जरिये भाव वासते संरक्षक विनय कुमार पुत्र श्री विक्रम भटनागर निवासी छतरपुर तहसील ब जिला मध्यप्रदेश। प्रति फल प्राप्त करने का विवरण – मु . 1000  रू एक हजार रुपये केवल जो पूर्व रजिस्ट्री क्रेता से नगद प्राप्त कर लिये थे। तब से अभी तक मेरे पिताजी उसी मकान में रहते हैं तथा पिताजी के भाई अलग दूसरी जगह पर रहते हैं। ओरिजनल रजिस्टर्ड विक्रय पत्र पिताजी के पास है। मकान टैक्स पिताजी जमा करते हैं। बिजली का बिल ,पानी का बिल, राशन कार्ड ,वोटर आईडी ,आधार कार्ड , सभी पिताजी के नाम हैं। अब पिताजी के भाई मकान खाली करवाने की धमकी दे रहे हैं। मकान पिताजी ने बनवाया है। क्या इस स्थिति में मकान पिताजी के नाम हो सकता है?

समाधान-

मीन आप के पिताजी और आप के चाचा जी दोनों के नाम से खरीदी गई थी। रजिस्टर्ड विक्रय पत्र में दोनों के नाम हैं इस कारण से कानून के समक्ष उक्त भूमि पर आप के पिता और चाचा दोनों का स्वामित्व है। तदनुसार उस पर निर्मित मकान भी दोनों की ही सम्पत्ति है।

चूँकि मकान पर आप के पिता जी का कब्जा है इस कारण आप के चाचा को मकान खाली कराने के लिए मकान का विभाजन कराने तथा अपने हिस्से का पृथक कब्जा करने के लिए दीवानी वाद प्रस्तुत करना होगा। इस के अतिरिक्त अन्य सभी तरीके गैर कानूनी माने जाएंगे। यदि आप के चाचा ऐसा कोई दावा करते हैं और आप के पिता उस के उत्तर में ये कथन प्रस्तुत करें और साबित करें कि उस भूमि पर जो मकान बनाया गया था तथा जो टैक्स आदि दिया गया था वह सभी आप के पिता ने अपनी निजी आय से खर्च किया है तो वे उस पर निर्मित मकान पर अपना दावा कर सकते हैं। लेकिन भूखंड तो दोनों भाइयों की ही संपत्ति माना जाएगा। वैसी स्थिति में न्यायालय आप के पिता के दावे को उचित मानते हुए दो तरह के निर्णय कर सकता है। पहला तो ये कि आप के पिता उक्त भूखंड की वर्तमान कीमत की आधी राशि आप के भाई को भुगतान करें और मकान की रजिस्ट्री अपने नाम करवा लें। दूसरा ये कि आप के चाचा आप के पिता को भूखंड पर निर्मित मकान की वर्तमान कीमत का आधी राशि आप के पिता को भुगतान करें और मकान व भूखंड दोनों आधे आधे दोनों भाइयों में बाँट दिए जाएँ।

ह उपाय एक सुझाव मात्र है। बहुत कुछ आप के पिता जी के द्वारा मुकदमे में ली गई प्रतिरक्षा और उसे साबित करने पर निर्भर करेगा।

भूस्वामी होने के दावेदार का पिछले 30 साल से कब्जा नहीं है तो उस का दावा नहीं चलेगा।

Slum_in_Mumbaiसमस्या-
मुम्बई, महाराष्ट्र से चन्द्रपाल सिंह ने पूछा है –

मैं ने अभी एक प्रॉपर्टी मुंबई के विख्रोली एरिया में खरीदी है। सारे दस्तावेज बिजली का बिल, पानी का बिल,  कलेक्टर आइडेंटिटी कार्ड और घर का कब्जा मेरे पास है। मेरा पड़ौसी कहता है कि ये जगह का असाइनमेंट टैक्स मैं भरता हूँ, ये जगह मेरी है। जब कि उस व्यक्ति का कभी उस घर पर मालिकाना हक नहीं रहा और न कभी वह व्यक्ति वहाँ रहा है। 1973 में श्रीमती अनुष्का शिवलकर,  बाद में वैशाली राजू भोंसले और अब मैं वहाँ रह रहा हूँ। 1973 के लाइट बिल और वोटर पहचान पत्र भी है। घर लेने के बाद मैं ने उस घर को रिपेयर किया तो पड़ौसी ने बीएमसी में शिकायत की कि यह जगह मेरी है और आप यहाँ अनधिकृत निर्माण कर रहे हैं। जब कि असलियत यह है कि वह 1973 से बना घर पूरी तरह जर्जर हालत में था और उस को रिपेयर करना ज़रूरी था। बीएमसी मुझे 354 ए (स्टॉप वर्क) का नोटिस जारी किया। मैं ने मुंबई सिटी सिविल कोर्ट से स्टे ले लिया है। स्टे वर्तमान में प्रभावी है। पड़ौसी जो यह दावा कर रहा है कि वह प्रोपर्टी उस की है उसे सिविल कोर्ट ने पार्टी भी बना लिया है। आप की सलाह चाहता हूँ कि आगे क्या संभावना है? मेरा मकान टूटेगा तो नहीं?

उत्तर –

प के प्रश्न से पता लगता है कि जमीन सरकारी है जिस पर बरसों पहले लोगों ने अनधिकृत कब्जा कर के मकान बना लिए। उस के बाद जब किसी को धन की आवश्यक्ता हुई या फिर किसी अन्य कारण से वह स्थान छोड़ना हुआ तो वे कब्जा बेच गए। कालांतर में आप ने उस जमीन पर कब्जा और उस पर बना हुआ जर्जर मकान खरीद लिया।

सी जमीन पर स्वामित्व तो सरकार का या बीएमसी का है। आप के पास कब्जा मात्र है। 1973 में जिस का उस जमीन मकान पर कब्जा था, उस ने किसी अन्य को कब्जा बेच दिया और खरीदने वाले ने फिर किसी और को और इस बार खरीदने वाले ने आप को बेच दिया है। 1973 से आज तक कब्जा बेचान के समस्त दस्तावेज आप के पास हैं और कड़ियाँ टूटी नहीं हैं तो आप का कब्जा 40 वर्ष पुराना है। इस कब्जे को किसी भी तरह से नहीं हटाया जा सकता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उस जमीन का टैक्स कोई और भरता है। आप अपने कब्जे के आधार पर उस का टैक्स भरना आरंभ कर सकते हैं।

ड़ौसी ने उस भूमि व मकान पर मालिकाना हक होने के आधार पर जो आपत्ति की है तो उसे साबित करना होगा कि उस का मालिकाना हक कैसे है। यदि मालिकाना हक है भी तो उस संपत्ति पर चालीस वर्ष से उस का कब्जा नहीं है। इस तरह अन्य लोगों का विपरीत कब्जा हो चुका है जिसे हटाने के लिए दावा करने की अवधि समाप्त हो चुकी है।

प को केवल यह साबित करना होगा कि आपत्ति करने वाले का उस संपत्ति पर पिछले 30 वर्षों में कोई कब्जा नहीं रहा है तथा आप को जिस से कब्जा मिला है वह 30 वर्ष से अधिक से निरन्तर कब्जे में है। यदि आप ये साबित करने में सफल हो जाते हैं तो आप के मकान को कोई आँच नहीं आएगी और लम्बे कब्जे के आधार पर भविष्य में बीएमसी से पट्टा प्राप्त कर के वैध लीजी हो सकते हैं।

माँ के नाम की जमीन मुझे मिल सकती है या नहीं?

agricultural-landसमस्या-
आपा राव ने छत्तीसगढ़ से पूछा है –

पुरखों की ज़मीन जो कि मेरी माँ के नाम की थी। वह लगभग 30 साल से जब मैं 4 साल का था। मेरे मामा लोगों ने दबा रखी है। आज मेरे माँ पिताजी नहीं हैं।  अब जब मुझे पता चला है तब मेरी उम्र 36 साल है। ज़मीन के कुछ पेपर तो हैं पर उन की स्याही थोड़ी धुंधली हो गई है और पढ़ने में नही आ पा रही है। क्या वो जमीन मेरी हो पाएगी या नहीं?

समाधान-

दि कोई कृषि भूमि आप की माँ के नाम थी तो उसे राजस्व रिकार्ड में आप के माता-पिता की मृत्यु के उपरान्त आप के और आप के भाई बहनों के नाम दर्ज होनी चाहिए थी। पर यह हो सकता है कि वह जमीन आप के मामा लोगों के पास कब्जे में हो और उन्हों ने उस का नामान्तरण ही नहीं करवाया हो या फिर गलत करवा लिया हो।

कृषि भूमि पर स्वामित्व सरकार का होता है। कृषक केवल खातेदार होता है। इस जमीन का रिकार्ड राजस्व विभाग में होता है। आप को राजस्व विभाग में तलाश कर के उस जमीन के अपनी माँ के समय से ले कर अब तक के सारे रिकार्ड की तलाश करवा कर उस की प्रमाणित प्रतिलिपियाँ प्राप्त करनी चाहिए। यदि आप की माँ के नाम की जमीन अभी भी उन के नाम ही है तो आप को अपने और आप के भाई बहनों के नाम उस का नामांतरण करवाना चाहिए। यदि उस का नामान्तरण गलत रीति से आप के मामा लोगों के नाम हो गया है तो उस नामान्तरण को चुनौती दे कर निरस्त करवाना चाहिए और फिर आप लोगों के नाम नामान्तरण करवाना चाहिए। आप के नाम नामान्तरण हो जाने पर आप जमीन पर कब्जा प्राप्त करने के लिए दावा कर सकते हैं।

स के लिए आप की जमीन जिस तहसील जिले में स्थित है वहाँ के किसी राजस्व मामलों के वकील से संपर्क करना पड़ेगा तथा उस की सलाह और मदद से कार्यवाही करनी होगी। आप की माँ के नाम की जमीन आप को मिल सकती है।

कोई जबरन लाठी के जोर से आप के कब्जे से जमीन नहीं ले सकता, आप राजस्व न्यायालय से स्थगन प्राप्त करें।

agricultural-land
समस्या-

कोरबा, छत्तीसगढ़ से राजेश ने पूछा है-

ज से 15 साल पहले मेरे पिताजी एक व्यक्ति (करीबी रिश्तेदार ) से २०००० रूपये में 20 डिसमिल सिंचित जमीन खरीदी थी।  जितना उन्होंने बताया  और रजिस्ट्री पेपर में भी यही लिखा हुआ है।  खेती की रजिस्ट्री एवं सारे फार्मेलिटी पूरी कर ली गई और हम पूर्ण स्वामित्व से विगत 15 सालों से खेती करते आ रहे हैं।  पर अचानक उस दुष्ट व्यक्ति द्वारा मेरे पिता जी के देहांत के बाद मुझे यह कह कर धमकाने लगा कि उसने सिर्फ 20 डिसमिल जमीन मेरे पिता को बेची थी।  बाकी के 8 डिसमिल जमीन मैं कब्जा कर रहा हूँ और कोई मना करने आया तो जान से मारने की धमकी दे रहा है।  अभी खेती का समय है हमने धान की बोवाई कर ली है और वो कब्जा करने वाला है।
वास्तविकता में वह जमीन 20 डिसमिल से कुछ ज्यादा है, पर यह पक्का नहीं है कि जमीन 28 डिसमिल ही है। पटवारी से हमने अभी तक नपवाया नहीं है।  तो क्या हमें 20 डिसमिल जमीन को छोड़कर बाकी के जितनी भी जमीन होगी उसे छोडनी पड़ेगी? मैं कैसे अपनी जमीन को बचाऊँ अगर वह इस कृत्य में दोषी है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा कैसे दिलवाऊँ? चूँकि इसके बेटे बेटियां पुलिस विभाग में नौकरी करते हैं जिसके नाम पर वह हम लोगों पर धौंस जमाता है, और अभी मैं सिर्फ 20 साल का हूँ और अपने पिता की इकलौती संतान हूँ।

समाधान-

मीन पिछले 15 वर्षों से आप के कब्जे में है। रजिस्टर्ड विक्रय पत्र में क्या लिखा है यह नहीं बताया। यदि उस में बेचने वाले ने अपनी कुल जमीन 20 डिसमल ही बताई है और सब बेच दी है तो कुछ जमीन अधिक होने पर भी आप के स्वामित्व की है। आप के कब्जे में आप के स्वामित्व से अधिक की जमीन है तो उस का निर्णय न्यायालय करेगा। यह निर्णय लाठी के जोर से नहीं किया जा सकता। यदि उस व्यक्ति को लगता है कि आप के पास बेची गई जमीन से अधिक जमीन है तो वह न्यायालय में जमीन के कब्जे का वाद प्रस्तुत कर सकता है।  इस तरह जोर जबरदस्ती के माध्यम से जमीन को आप के कब्जे से वापस लेना उचित ही नहीं अपितु गैर कानूनी है।

प को चाहिए कि आप किसी वकील से संपर्क कर के उस व्यक्ति के विरुद्ध अपने निकट के राजस्व न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त करें कि वह जमीन पर आप के कब्जे को डिस्टर्ब न करे। वह व्यक्ति धमका रहा है तो स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट करें। यदि आप को अंदेशा हो कि उस के पुलिस में कर्मचारी पुत्रों के कारण पुलिस कार्यवाही नहीं करेगी तो आप के इलाके के एस.पी. व आई जी से सीधे जा कर मिलें और सारी बात बता कर शिकायत करें।

दीवानी न्यायालय से विक्रय पत्र निरस्त होने तक कोई अन्य विक्रय पत्र निष्पादित न करें।

समस्या-

नोएडा  से सुरेन्द्र सिंह तोमर ने पूछा है –

मेरी एक भूमि जिला इंदौर म.प्र. में है।  मैं स्‍वयं नौकरी के चलते सपरिवार नोएडा में रहता हूँ।  मेरे भाई ने मेरी भूमि को स्‍वयं भू-स्‍वामी दर्शा कर अन्‍य व्‍यक्ति को बेच दिया और उसका नामांतरण भी करा दिया। इसका पता जब मुझे चला तो इसके विरुद् मैं ने एसडीएम के यहाँ आवेदन किया जिस पर नामांतरण निरस्‍त हो गया और भूमि पुनः मेरे नाम कर हो गई है।   इस में आदेश दिया गया कि रजिस्‍ट्री निरस्‍त कराने हेतु मैं अलग से मुकदमा करुँ। मैं ने रजिस्‍ट्री निरस्‍त कराने बावत अपने भाई व खरीददार के विरुद्ध मुकदमा दायर कर दिया है जो अभी इंदौर न्‍यायालय मे चल रहा है।  मैं अब इस भूमि को अपने एक  मित्र को बेचना चाहता हूँ।  क्‍या बिना रजिंस्ट्री शून्‍य कराए मैं यह भूमि उसे बेच सकता हूँ।  क्‍योंकि इसकी संभावना हमेशा बनी रहती है कि कही मेरी अनुपस्थिति में फिर से फर्जीवाडा कर जमीन को बेच न दिया जाये। इस में मुझे व मेरे मित्र को कोई परेशानी तो नही आयेगी?

समाधान-

किसी भी संपत्ति का स्वामित्व उस के स्वामित्व के दस्तावेजों से निर्धारित होता है। नामान्तरण स्वामित्व का सबूत नहीं है। वस्तुतः कृषि भूमि की स्वामी agricultural-landतो राज्य सरकार है। कृषक उस में केवल एक किराएदार की हैसियत से कब्जे में रहता है। अब आप की हैसियत अपनी भूमि पर किराएदार जैसी है। आप खातेदार कृषक हैं। आप अपना किराएदारी का यह अधिकार भी हस्तांतरित कर सकते हैं। लेकिन उस का हस्तान्तरण केवल रजिस्टर्ड विक्रयपत्र से ही किया जा सकता है। उक्त भूमि के संबंध में एक विक्रय पत्र उस व्यक्ति के नाम पंजीकृत है जिसे आप के भाई ने जमीन बेची है। उस रजिस्टर्ड विक्रय पत्र को निरस्त कराने के लिए आप ने मुकदमा किया हुआ है। जब मुकदमा लंबित है आप के भाई द्वारा पुनः कोई गलत काम करने का अंदेशा अत्यन्त कम है। जब तक वह पंजीकृत विक्रय पत्र न्यायालय द्वारा निरस्त नहीं कर दिया जाता है रिकार्ड में आप के भाई से जमीन खरीदने वाला व्यक्ति स्वामी है। इस कारण से इस समय आप के द्वारा विक्रय पत्र निष्पादित करना न तो उचित है और न ही संभव है।

नामान्तरण केवल इस बात का सबूत है कि आप उस भूमि पर एक खातेदार कृषक हैं। एसडीओ ने आप के तर्क को मान कर आप के भाई द्वारा निष्पादित रजिस्टर्ड विक्रय पत्र को गलत मानते हुए आप के खातेदारी अधिकार को माना और नामांतरण पुनः आप के नाम कर दिया। लेकिन एक रजिस्टर्ड विक्रय पत्र को केवल दीवानी न्यायालय ही निरस्त कर सकता है। उस का निर्णय होने दें।

मारी सलाह है कि आप अभी कोई भी विक्रय पत्र निष्पादित न कराएँ। यदि आप जमीन बेचना ही चाहते हैं तो केवल उस का एग्रीमेंट करें और विक्रय मूल्य प्राप्त कर के जमीन का कब्जा खरीददार को दे दें। जब भी आपके भाई द्वारा कराई गई रजिस्ट्री निरस्त हो जाए तब आप खरीददार के नाम विक्रय पत्र निष्पादित करा दें।

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