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पत्नी को पत्नी समझें, और उसे अहसास कराएँ कि दुनिया में वही आप के सब से नजदीक है।

liveinसमस्या-
सतना, मध्य प्रदेश से मयंक मिश्रा ने पूछा है –

25 फरवरी, 2012 को मेरा विवाह हुआ। विवाह के समय सब कुछ ठीक था। संभवतः 3 माह तक मेरे परिवार से लड़की के संबंध ठीक थे। पर हमें बाद में पता चला की लड़की की उम्र मुझ से 8 वर्ष अधिक थी ओर उसे फिट (मिर्गी) दौरे आते हैं। वह समस्या अभी भी चल रही है। जब हमें इन बातों का पता चला तो हम ने उसको किसी भी तरह से उसके परिवार या उसे कुछ नहीं कहा। बस इतना कहा की लड़की की शादी में लड़की के परिवार वाले कभी कभी झूठ का सहारा भी लेते हैं। जो हुआ बस ठीक है अब हम मिलकर सफर कर लेंगे। उस के बाद दो माह तक सब ठीक से चलता रहा। पर एक दिन लड़की के बड़े भाई लड़की को लेने आए लेकिन मेरी माँ की तबीयत ठीक ना होने की वजह से लड़की को नहीं जाने दिया तो लड़की का भाई चला गया। अपने घर जाकर सेल फोन से धमकी देने लगा कि हम ने लड़की को ना भेजकर बहुत बड़ी ग़लती की है। हम तुम्हारे खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कर देंगे। तो हमने कहा कि लड़की तो अपने घर पर ही है। जैसे ही माँ की तबीयत ठीक होती है हम भेज देंगे। तो मेरे बड़े साले ने काफ़ी अपशब्द मुझे और मेरे परिवार को कहे। हम ने लड़की को दूसरे दिन भेज दिया। इस के 3 माह बाद हम लड़की को बुलाने गये तो लड़की नहीं आई बोली हम तुम्हारे घर में नहीं रह सकते, हम अलग घर लेकर रहेंगे। इस के 1 माह बाद मेरा छोटा भाई लड़की को लेने गया। फिर भी वह आने को तैयार नहीं हुई। उस के 15 दिन बाद मैं उसे समझा कर घर ले आया। पर हर 10-15 दिन में वो चली जाती थी और फिर काफ़ी मिन्नतों के बाद ही घर वापस आती थी। 1 साल 9 माह में केवल केवल 6 माह ही मेरे घर पर रही। लड़की के घर से हमें और मेरे पिताजी को बहुत कुछ कहा गया। मेरे पिताजी के उपर जबरन लांछन लगाए गये और धमकियाँ दी जाने लगी कि हमें जेल में भिजवा देंगे। अभी 20 दिन पहले मैं, पापा और मेरी माँ लड़की को बुलाने गये तो वह नहीं आई। उसको 7 माह की प्रेगनेंसी है ओर मिर्गी रोग के कारण उसे 3 माह में चेक अप कराना ज़रूरी है पर वो सिर्फ़ एक बार मेरे साथ गई। फिर दुबारा चेकप के लिए डॉक्टर के पास नहीं जा रही है डॉक्टर के अनुसार जो मेडिसिन्स वो लेती है बेबी पर उसका एफेक्ट होगा। ये लड़की ओर उसकी फॅमिली जान कर भी डाक्टर के पास चेक अप के लिए भेज नहीं रहे हैं। मैं तलाक़ नहीं चाहता पर उस के और उसकी फॅमिली के नेचर ओर मेरी ओर मेरी फॅमिली के साथ उनका बर्ताव काफ़ी बदतर हो चुका है। सो मुझे आप आसान सा रास्ता बताएँ जिस से मई अपनी ओर अपनी फॅमिली का ख़याल रख सकूँ। मुझे अब काफ़ी प्रॉब्लम्स हो रही है मेरे माँ बाप का ख़याल रखने वाला भी अन्य कोई नहीं है। मुझे सही रास्ता सुझाएँ।

समाधान-

ड़की का आप के साथ विवाह हुआ है। वह आप की पत्नी है। आप ने जिस भाषा में यह प्रश्न लिखा है उस से लगता है आप अभी तक लड़की को लड़की ही समझते हैं अपनी पत्नी और अपने परिवार का अभिन्न हिस्सा नहीं। जब एक तरह की भाषा और व्यवहार का आप प्रयोग करते हैं तो दूसरे को यह महसूस होता है। आप की पत्नी को भी यह महसूस होता होगा। जिस के कारण आप दोनों के बीच जो संबंध स्थापित होना चाहिए था वह नहीं हुआ।

प अपने माता-पिता को बहुत प्यार करते हैं और उन का ख्याल रखते हैं। उन का ख्याल रखने वाला दूसरा कोई नहीं है। आप की पत्नी को लगता है कि आप का जो प्रेम उसे मिलना चाहिए था वह आप के माता-पिता के कारण उसे नहीं मिल रहा है। इस कारण वह आप के माता-पिता से आप को दूर देखना चाहती है जिस से उसे उस के हिस्से का प्यार और मान मिल सके। इसी कारण वह यह कहती है कि आप दोनों माता-पिता से अलग रहें जो आप के लिए संभव नहीं है।

प की जो दूरी आप की पत्नी से बनी है उसे आप को समाप्त करना होगा। उस की तमाम कमियों के बावजूद आप को उसे अपनाना होगा। उन कमियों का उल्लेख करना बन्द करना होगा। आप को शायद पता नहीं है कि आप अनजाने में सही समझ कर जो व्यवहार कर रहे हैं उस के कारण आप की पत्नी ने यह मार्ग अपना लिया है।

माता-पिता का जीवन में बहुत महत्व होता है और उन के प्रति जिम्मेदारी भी होती है। लेकिन आप की अपने पत्नी के प्रति भी जिम्मेदारी होती है और उस का जो स्थान आप के जीवन में होता है वह सब से निकट का स्थान होता है। मेरी समझ में आप अपनी पत्नी को वह स्थान नहीं दे सके हैं। यही आप की समस्या है। आप अपनी पत्नी को अपने निकट लाएँ उसे अहसास कराएँ कि आप के सब से निकट वही है। माता-पिता निश्चित रूप से उतने निकट नहीं हैं लेकिन जन्मदाता हैं जिस के कारण उन के प्रति आप की जो जिम्मेदारियाँ हैं वह तो आप को पूरी करनी पड़ेंगी। आप के माता-पिता आप के और आप की पत्नी के संबंधों के बीच कहीं नहीं आते।

मारे विचार में आप को अकेले अपनी ससुराल जाना चाहिए। पत्नी से बात करनी चाहिए। उसे मनाना और समझाना चाहिए। सब से बढ़ कर उस से सब से अधिक निकटता का व्यवहार करना चाहिए। चाहे इस में दो चार दिन क्यों न लग जाएँ। हमें लगता है कि आप यह प्रयास करेंगे तो अवश्य सफल होंगे। यदि आप के यहाँ प्रसव में आप की पत्नी को संभालने वाला न हो तो यह प्रस्ताव दे सकते हैं कि वह अपना प्रसव मायके में करा ले। लेकिन इस बीच उस से निकटता का संपर्क बनाए रखें। संतान के जन्म के उपरान्त तक यदि आप दोनों के बीच की यह दूरी समाप्त हो सकी तो आपसी समझ से आप की समस्या दूर हो सकती है।

वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण और संरक्षण

समस्या-

मैं जानना चाहती हूँ कि यदि कोई माता या पिता अपनी संपत्ति या पुश्तैनी संपत्ति में अपना हिस्सा किसी एक संतान को दे दे और बाद में वही संतान उन का भरण पोषण न कर के उन्हें परेशान करने लगे तो ऐसे माता-पिता क्या कर  सकते हैं?

– प्रतिभा साहनी, नई दिल्ली

समाधान-

संतानों पर अपने वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके) माता-पिता  का तथा निस्सन्तान वरिष्ठ नागरिकों के ऐसे संबंधियों पर जो उन की संपत्ति पर कब्जा रखते हैं या उस का उपभोग करते हैं, या उन के देहान्त के उपरान्त उन की संपत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त करने वाले हों ऐसी रीति से भरण-पोषण का दायित्व है जिस से वे अपना सामान्य जीवन जी सकें। इस अधिनियमं के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए अभिभावकों और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम-2007 में विशिष्ठ उपबंध किए गए हैं। इस अधिनियम की शक्तियों के द्वारा प्रत्येक जिले में एक या अधिक भरण पोषण अधिकरण स्थापित किए गए हैं जिन का पीठासीन अधिकारी उपखण्ड अधिकारी या उस से उच्च पद का अधिकारी ही हो सकता है।

स अधिनियम में यह उपबंधित किया गया है कि ऐसे वरिष्ठ नागरिक जो अपना भरण पोषण करने में सक्षम नहीं हैं वे भरण पोषण और संरक्षण प्राप्त करने के लिए जहाँ वे स्वयं निवास करते हैं या जहाँ उन की संतानें निवास करती हैं उस क्षेत्र के भरण पोषण अधिकरण के समक्ष स्वयं या किसी पंजीकृत संस्था के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। सूचना प्राप्त होने पर अधिकरण स्वयं भी कार्यवाही कर सकता है। यह अधिकरण संक्षिप्त सुनवाई के उपरान्त आवेदन का निपटारा करते हुए संतानों और निस्संतान वरिष्ठ नागरिकों के संबंधियों के विरुद्ध वरिष्ठ नागरिकों को प्रतिमाह भरण पोषण की निश्चित राशि जो दस हजार रुपए प्रतिमाह तक की हो सकती है अदा करने का आदेश दे सकता है। आदेश की पालना न करने पर दायित्वाधीन व्यक्ति पर जुर्माना किया जा सकता है और एक माह तक के कारावास से दंडित भी किया जा सकता है।

स अधिनियम में यह भी यह भी उपबंधित किया गया है कि इस अधिनियम के लागू होने के उपरान्त यदि कोई नागरिक अपनी संपत्ति को इस शर्त के अंतर्गत कि संपत्ति प्राप्त करने वाला व्यक्ति संपत्ति अन्तरित करने वाले व्यक्ति को जीवन के लिए आवश्यक सुख सुविधाएँ और भौतिक साधन उपलब्ध कराएगा। यदि संपत्ति प्राप्त करने वाला व्यक्ति संपत्ति अंतरित करने वाले व्यक्ति को उक्त  आवश्यक सुख सुविधाएँ और भौतिक साधन प्रदान करने से मना करता है या प्रदान नहीं करता है तो उक्त अधिकरण संपत्ति के अंतरण को धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया मानते हुए उसे निरस्त कर सकता है।

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