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पति को कानूनन संपत्ति का केवल चौथाई हिस्सा ही प्राप्त होगा।

समस्या-

श्रुति शर्मा ने सीतापुरा, जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे ससुर जो की एक सरकारी नौकरी में थे ओर उनकी नौकरी में रहते हुए मृत्यु हो गई। मेरे पति के छोटे भाई को उन के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त हुई है। मेरे पति से सब रिश्तेदारों ने जबरदस्ती दबाव दे कर अनापत्ति लिखाई कि उन्हें संपत्ति दे दी जाएगी। लेकिन मेरे पति को कोई संपत्ति नहीं दी गयी है। अब हमारी कोई आर्थिक सहायता भी नहीं करता है।  मेरी सास के नाम एक मकान है जो कि मेरे ससुर  ने ही किया था। उस मकान को वो 4 हिस्सों में बाटने को बोलती है। एक बेटी का, एक खुद का, एक मेरे पति का और एक हिस्सा उसे देगी जो नौकरी लग चुका है। मैं सिर्फ़ ये जानना चाहती हूँ कि ऐसा क्या करें जो कि वो पूरा मकान मेरे पति का हो जाए। क्योंकि की मेरी सास को पेंशन मिलती है ओर ननद की शादी के पैसे पहले ही जमा हैं मेरे देवर को नौकरी मिल गई। लेकिन मेरे पति अभी बेरोज़गार हैं। एक मकान मेरे ससुर के नाम का है जो कि कच्ची बस्ती में आता है उसे में भी सिर्फ़ हम रहते थे। हम अब हम सीतापुरा वाले मकान में आए हैं जो कि मेरी सास के नाम का है उसमें भी सिर्फ़ रहते ही हैं। जबकि मेरे पति के पास कुछ भी नहीं है। हमें क्या करना चाहिए।

समाधान-

ब आप के पति ने अनापत्ति की थी तभी उन्हें रिश्तेदारों को कहना चाहिए था कि पहले संपत्ति मेरे नाम करवा दें। जो भी संपत्ति आप के नाम हस्तांतरित हो जाती हो जाती। अब तो आप के पति अपनी अनापत्ति दे चुके हैं और देवर की नौकरी भी लग चुकी है। अब आप के पति को केवल उन के हिस्से की संपत्ति प्राप्त हो सकती है। आप की सास यदि उन के नाम के मकान का बंटवारा करना चाहती हैं तो जो वे कर रही हैं वह कानूनी रूप से सही है। आप के पति का एक चौथाई हिस्सा बनता है। वह उन्हें ले लेना चाहिए। इस के अलावा आप के पति कच्ची बस्ती वाले मकान को अपने नाम करवा सकते हैं इस के लिए जिन रिश्तेदारों ने आप पर दबाव बनाया था उन्हें फिर से इकट्ठा कर के आप की सास, देवर व ननद पर दबाव बनाया जा सकता है। यदि आप के पति कुछ नहीं करते तो यह सब से बड़ी कमी है। उन्हें कुछ न कुछ तो करना होगा। कुछ नहीं करने वालों के पास जो कुछ भी होता है वह भी चला जाता है। अपने परिवार के जीवन यापन के लिए उन्हें पर्याप्त कमाई करना चाहिए। अब तो स्थिति यह है कि कानूनी रूप से आप के पति का सारी संपत्ति में जो चौथाई हिस्सा है वही मिल सकता है अन्य कोई संपत्ति नहीं मिल सकती। ऐसा कुछ नहीं किया जाना संभव नहीं है जिस से पूरा मकान आप के पति को मिल जाए।

पुश्तैनी जमीन में आप का हक है, बँटवारे का वाद संस्थित करें।

समस्या-

वर्षा देवी ने रानीवाड़ा, जालोर राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मैं विवाहित हूँ, हम दो बहन और तीन भाई हैं। पिता भी जीवित हैं। हाल में मेरे पिता के यहाँ रहती हूँ और पिताजी ने मुझे उनकी जमीन पर मकान बंनाने की इजाजत दी थी तो मैं ने उनकी ही जमीन पर मकान बना दिया है और लाइट भी उनके नाम से ही ली थी। मेरे पास में कोई दस्तावेज भी नहीं है। अब मेरे पिताजी और मेरे भाइयो से अनबन चल रही है। मेरे पिता और भाई सब मिल कर मकान खाली करने को बोल रहे हैं और कई बार तो बवाल भी कर् चुके हैँ। अभी मेरी बेटी की 29/6/2017 को शादी थी तो गणेश पूजा के दिन ही सब मेहमानों के सामने घर बुला के मार पीट भी की है, मेरे पति के साथ और पुलिस भी बुलवाई थी फ़ँसाने को। उनकी ये साजिश थी वो नाकाम हो गई। फिर मैंने शादी के बाद पुलिस में रिपोर्ट की मगर कोई कार्यवाही नहीं हुई पैसो के बल पर। मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की भी धमकी देते हैँ।  अब मुझे क्या और कैसे करना होगा जो मेरा परिवार शान्ति से रह पाये। रही बात जमीन की मेरे पिताजी के पिताजी के पिताजी से मिली थी अब मेरे साथ इतना सब कुछ हो गया है सब रिश्तों की हत्या हुई है तब मैंने अपना हक माँगा तो मेरे पिता ने सारी सम्पति मेरे तीन भाइयों को दान पत्र कर दी है और रजिस्ट्री और नामांतरण भी कुछ दिन पहले हो गया है। अब मुझे मेरा हक कैसे मिलेगा कैसे ले सकती हूँ अब मुझे क्या करना होगा कृपिया उचित सलाह दें।

समाधान-

प के पिता की समूची जमीन पुश्तैनी है और उस जमीन में आप का भी हक 2005 से कानून के माध्यम से बन गया है। आप उक्त दानपत्र को चुनौती दे कर निरस्त करवाने की कार्यवाही कर सकती हैं तथा समूची जमीन और उस पर निर्मित संपत्ति के बंटवारे का वाद संस्थित कर सकती हैं। यह वाद संस्थित करने साथ ही आप जिस जमीन पर कब्जे में हैं, मकान बना रखा है उस जमीन पर अपने पिता, तीनों भाई और उन के बच्चों के विरुद्ध आप के कब्जें में दखल देने, धमकाने मारपीट का प्रयास करने आदि के विरुद्ध स्टे प्राप्त कर सकती हैं।

इस के बाद भी पिता या भाई वगैरह धमकी या मारपीट करने जैसी अपराधिक कार्यवाही होने पर पुलिस को रिपोर्ट कर सकती हैं। पुलिस कार्यवाही न करे तो एस पी को शिकायत करें और उस के एक दो दिन में ही न्यायालय में अपना परिवाद प्रस्तुत करें।

 

मुस्लिम विधि में पत्नी, पुत्रियों व भाई का उत्तराधिकार में हिस्सा।

समस्या-

जमीला खातून ने सीतापुर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पति ने एक जमीन 1998 में खरीदी थी। मेरे पति की मृत्यु हो गयी। उन से मेरी चार लड़कियाँ हैं। मेरा और मेरी लड़कियों का जमीन में कितना कितना हिस्सा होगा। मेरे देवर जो मेरे पति के सगे भाई हैं उन का क्या हक है, जब कि वह जमीन उन की पुश्तैनी नहीं है यह जमीन मेरे पति ने अकेले ही खरीदी थी। कृपया मुस्लिम ला के मुताबिक पूरी जानकारी दें।

समाधान-

मुस्लिम व्यक्तिगत विधि में पुश्तैनी जमीन जैसा कोई सिद्धान्त नहीं है और कोई संपत्ति पुश्तैनी नहीं होती। जो भी संपत्ति होती है वह व्यक्तिगत होती है हाँ यदि किसी मृतक व्यक्ति की संपत्ति का बंटवारा न हो और किसी उत्तराधिकारी की पहले ही मृत्यु हो जाए तो वैसी संपत्ति में मृतक का हित बना रहता है और वह उस के उत्तराधिकारियों को प्राप्त हो जाता है। इस तरह आप के पति की जमीन चाहे उन्हों ने खुद खरीदी हो या पूर्वजों से प्राप्त हुई है वह व्यक्तिगत ही है।

मुस्लिम विधि के अनुसार आप के पति की संपत्ति में से 1/8 आप को, 2/3 सभी लड़कियों को मिला कर और 1/6 हिस्सा आप के पति के भाई अर्थात आप के देवर को मिलेगा। शेष बचा हुआ हिस्सा भी लड़कियों को मिलेगा। आप अपने पति की संपत्ति के 24 हिस्से बनाएँ, उस में से 3 हिस्से आप के, 4 हिस्से आप के देवर के तथा 17 हिस्से लड़कियों को संयुक्त रूप से प्राप्त होंगे।। प्रत्येक लड़की को कुल संपत्ति का 4.25 हिस्सा मिलेगा।

जो बंटवारा चाहता है उसे कार्यवाही करने दें।

समस्या-

सुनील शर्मा ने कोटा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे दादा जी ने उनके चारो बेटो को बराबर जमींन बाट दी, लेकिन जमीन नाम पर नहीं हुई। सिर्फ एक पेपर पर लिखा है और सभी के साइन हैं उस पर। लेकिन हमारे हिस्से की जमीन में शहर का रोड निकल गया हे तो बाकी के भाई उस जमींन में हक़ मांग  रहे हैं।  हमें हमारी जमीन अपने नाम पर करवानी है। दादा जी का देहांत हो गया है।

समाधान-

दि आप के दादाजी सभी बेटों को बराबर जमीन बांट गए थे तो उन्हें उसी समय राजस्व रिकार्ड में अलग अलग खाते बनवा देने चाहिए थे, यह काम वे जीतेजी नहीं कर गए। उन की मृत्यु के उपरान्त भी बंटवारा किया जा कर सब के खाते अलग अलग करवा लेने चाहिए थे। लेकिन तब भी नहीं हुआ। अब दादाजी की जमीन का रिकार्ड एक साथ है और उस में सभी पुत्रों के नाम अंकित हैं। इस कारण सारी जमीन अभी तक संयुक्त स्वामित्व मे ंहै। हो सकता है जमीन के कब्जे अलग अलग हों, लेकिन स्वामित्व सारी जमीन पर सब का है।

आप के पास जो दस्तावेज है यदि वह  किसी मौखिक बंटवारे के स्मरण पत्र के रूप में है और उस पर सभी हिस्सेदारों के हस्ताक्षर हों तो न्यायालय उसे बंटवारे के समान मान सकता है। पर इस के लिए आप को कानूनी कार्यवाही करने की जरूरत नहीं है। यदि आप कानूनन बंटवारा करेंगे तो भी सब को आज की स्थिति में बराबरी से देखा जाएगा और सब को समान रूप से हिस्सा मिलेगा। यदि बंटवारे के स्मरण पत्र को वैध मान लिया गया तो हो सकता है आप के कब्जे की जमीन आप के ही हिस्से में रह जाए।  यदि आप जमीन का खाता अपने नाम कराने जाएंगे तो आप को हानि ही हो सकती है। इस कारण से आपके जो भाई हिस्सा चाहते हैं उन्हें कहें कि वे अपने हक के लिए अपने हिसाब से कार्यवाही करें।

बंटवारे का वाद प्रस्तुत कर न्यायालय से बंटवारा कराएँ।

समस्या-

उमाकान्त ने देवी तहसील सौसर, जिला छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

दादाजी ने अपने जीवनकाल में कोई बंटवारा नहीं किया और न ही नाप के हिसाब से जोतने के लिए दिया। लेकिन उन की मृत्यु के बाद जिन्हें जोतने को ज्यादा मिला वे बंटवारा नहीं चाहते लेकिन बाकी हिस्सेदार बंटवारा चाहते हैं। हमन कुछ कानूनी कार्यवाही की लेकिन उन्हों ने जानपहचान से रद्द करवा दी। बताए हमें क्या करना चाहिए।

समाधान-

प ने क्या कानूनी कार्यवाही की यह नहीं बताया। हमें लगता है कि आप ने कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की बल्कि आप राजस्व अधिकारियों को फिजूल मैं आवेदन देते रहे। अब आप की समस्या का हल न्यायालय द्वारा बंटवारे में है। आप ने यह भी नहीं बताया है कि दादाजी के देहान्त के बाद नामान्तरण भी हुआ है या नहीं। यदि नहीं हुआ है तो नामान्तरण कराना चाहिए।

यदि नामान्तरण हो गया है तो ठीक वर्ना नामान्तरण की कार्यवाही के साथ साथ आप को चाहिए कि आप राजस्व न्यायालय में अपनी जमीन के बंटवारे, खाते अलग अलग करने और अपने हिस्से पर पृथक कब्जा दिलाए जाने के लिए वाद प्रस्तुत करें। बाकी सभी हिस्सेदार और राज्य सरकार जरिए तहसीलदार पक्षकार बनेंगे। यह वाद तब तक चलेगा जब तक कि बंटवारा हो कर सब को अपने अपने हिस्से पर अलग कब्जा न मिल जाए।

अपना खाता अलग कराने और पृथक कब्जा प्राप्त करने के लिए बंटवारे का वाद संस्थित करें।

समस्या-

रोहन ने लुधियाना, पंजाब से उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मेरे नाना का देहान्त2015 में हुआ। वो हमारे साथ लुधियाना ही रहते थे। सारी संपत्ति हरदोई उत्तर प्रदेश में है। मृत्यु के पहले उन्हों ने वसीयत की इच्छा की थी, वो हमने करवाई। उन्हों ने 4 हिस्सों में अपनी सम्पति वसीयत की क्यों कि उनके 3 लड़के थे। चौथा हिस्सा उन्हों ने हमारी मां को वसीयत किया। उत्तराधिकार में उस सम्पति का नामान्तरण नायब की कोर्ट से 3 लोगो के हक़ में था। बाद में वसीयत दाखिल की हमने और तहसीलदार ने पंजीकृत वसीयत के आधार पर मेरी माँ का नाम भी नामान्तरण करवा दिया। समस्या ये है कि आर्डर के 70 दिन बाद एक मामा ने आर्डर के खिलाफ अपील की है। क्या अपील अवधि बाधित नहीं है?  क्या नामान्तरण हो जाने से भी हमें कोई लाभ नहीं मिलेगा? नाना ने चौथा हिस्सा हमारे नाम किया है क्या उस पे हम कब्जा नहीं ले सकते।  वसीयत के समय छोटे मामा साथ थे, उन्होंने हमारे हक़ में एफिडेविट भी लगाया था । क्या एसडीएम ऑर्डर बदल सकते हैं। हम को कब्जा कैसे मिलेगा एग्रीकल्चर लैंड का,वो 14 बीघा का है? उसका पार्टीशन कैसे करवाए? उसका अलग खाता कैसे करवाएँ?

समाधान-

दि  किसी नामान्तरण के मामले में वसीयत प्रस्तुत हो और  उसे चुनौती दी जाए तो तहसलीदार या नायब उस मामले में नामान्तरण नहीं कर सकता। वैसी स्थिति में नामान्तरण कराने के लिए न्यायालय ही जाना होगा। इस  मामले में आप ने जब वसीयत पेश की तो तहसलीदार ने अन्य पक्षकारों को बुलाया या नहीं या आपत्तियाँ ली या नहीं उस पर बहुत कुछ निर्भर करता है। अपील तो व्यथित पक्षकार का अधिकार है, इस कारण उस पर सुनवाई होगी और तभी उस का निर्णय होगा। अपील यदि अवधि बाधित है तो आप अपील में यह आपत्ति ले सकते हैं। यदि वसीयत में कोई खेोट नहीं है तो अपील भी आप की माँ के पक्ष में निर्णीत हो जाएगी। लेकिन अपील आप के हक में निर्णीत हो जाने मात्र से आप को जमीन का कब्जा नहीं मिल जाएगा। .

नामान्तरण से किसी भी कृषि भूमि में उस के हिस्सेदारो का हिस्सा निर्धारित हो जाता है लेकिन भूमि संयुक्त बनी रहती है उस पर सभी हिस्सेदारों का संयुक्त स्वामित्व बना रहता है। अलग अलग खाता करने के लिए और अपने खाते की भूमि पर अलग कब्जा प्राप्त करने के लिए आप की माता जी को संयुक्त स्वामित्व की भूमि के बंटवारे और अपने हिस्से पर कब्जा दिलाए जाने का दावा करना पड़ेगा। चूँकि नामान्तरण आज भी आप के पक्ष में है इस कारण आप यह दावा तुरन्त कर सकते हैं। आप को अपील का निर्णय होने का इन्तजार किए बिना बंटवारे का दावा कर देना चाहिए।

हिस्से के लिए विभाजन का वाद करें।

समस्या-

हेमन्त मिश्रा ने अजमेर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मैं जिस मकान में रहता हूँ वो मेरे दादाजी के नाम है। उनकी कोई वसीयत नहीं है, रजिस्ट्री की कॉपी मेरे पास है। ओरिजनल रजिस्ट्री मेरी दादी और बुआ ने गायब कर दी है। मेरे दादाजी का देहांत 1992 में हो गया था। मेरे पिताजी का देहांत भी 2015 में हो गया है। अब घर में मैं, दादी, मम्मी, एक क्वांरी बहिन, मेरी पत्नी और मेरा बच्चा रहता है। हम यहाँ लगभग 30 साल से रह रहे हैं। अब दादी कहती है कि मैं अपनी लड़कियों को हिस्सा या इस मकान को बेच कर पैसे दूंगी। तुम सब जाओ यहाँ से ये मेरे पति का घर है। जबकि मेरे पिताजी ने अपनी बहनों (5) में से (3) की शादी की। अपने जीवित समय तक सारी रस्में निभाई। पर अब दादी अपनी उम्र का फायदा उठा कर मुझे और बाकी सब को परेशान करती रहती है। उन्होंने मेरी छोटी बुआ के साथ मिलकर मेरे खिलाफ झूठी पुलिस कंप्लेन भी की थी। इसके कारण मैं बहुत परेशान रहता हूँ। मैंने घर का हिस्सा करने की बात भी कह दी उनसे पर न तो दादी हिस्सा कर रही है न कोई वसीयत और न ही घर में कुछ मरम्मत करवाती है। घर भी जर्जर हो रहा है। मैं इसमें पैसे लगाने से डरता हूँ क्यूंकि कब दादी और बुआ मिलकर क्या कर दे कुछ पता नहीं। कुछ समाधान बताये।

समाधान-

दि मकान की रजिस्ट्री की मूल प्रति आप को नहीं मिल रही है तो उस की फोटो कॉपी में दर्ज विवरण के आधार पर रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रतिलिपि सहायक कलेक्टर स्टाम्प के यहाँ से प्राप्त की जा सकती है।

मकान दादा जी के नाम था। इस कारण उन की मृत्यु के उपरान्त आप की दादी, आप के पिता और आप की 5 बुआओं के कुल सात हिस्से हुए। इस में से एक हिस्सा आप का है। आप के पिता ने अपनी बहनों का विवाह किया है तो वह उन का पारिवारिक दायित्व था। इस से बहनों का अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा कम नहीं हो जाता है।

आप की दादी आप के कहने पर भी हिस्से नहीं कर रही है तो आप न्यायालय में विभाजन का वाद प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि आप की बुआओं में से कोई अपना हिस्सा नहीं लेना चाहती है तो उस से आप अपने नाम या अपनी माँ के नाम रिलीज डीड करवा सकते हैं। यदि आप विभाजन का वाद प्रस्तुत करने के पहले बुआओं से रिलीज डीड पंजिकृत करवा लेते हैं तो बेहतर होगा।

संयुक्त स्वामी तंग करते हैं तो विभाजन का वाद संस्थित करें।

समस्या-

राकेश कुमार ने बी-21/ 12 बी, ब्लॉक-बी, ओम नगर, मीठापुर, बदरपुर, दिल्ली से समस्या भेजी है कि-


र्तमान में मैं जिस मकान में रहता हूँ वह मेरी माँ के नाम है। माँ का देहान्त दिसम्बर 2014 में हो चुका है। मेरे पिता और भाई मुझ से और मेरी पत्नी से रोज लड़ाई करते हैं और कहते हैं कि यहाँ तेरा कोई हक नहीं है तू अपने बीवी बच्चों को ले कर यहाँ से निकल जा। मेरे दो छोटे छोटे बच्चे हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि उस संपत्ति में मेरा कोई अधिकार है या नहीं है। मैं अपने पिता और भाई के विरुद्ध क्या कार्यवाही कर सकता हूँ?


समाधान-

जिस स्थान पर जो निवास करता है अथवा जिस मकान /जमीन पर जिस का कब्जा है वहाँ उसे कब्जा बनाए रखने और निवास करने का अधिकार प्राप्त है। किसी भी व्यक्ति से जिस  संपत्ति पर वह काबिज है उसे जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता। इस तरह आप को भी मकान के उस परिसर से जिस पर आप का कब्जा है और जिस में आऐप रहते हैं जबरन नहीं निकाला जा सकता।

यह मकान माँ के नाम था तो माँ के देहान्त के साथ ही उस का उत्तराधिकार निश्चित हो चुका है। यदि वह मकान किसी के नाम वसीयत था तो उस का स्वामी वह वसीयती हो चुका है। यदि कोई वसीयत नहीं की थी तो माँ के सभी उत्तराधिकारी उस के संयुक्त रूप से स्वामी हो चुके हैं। कोई भी उत्तराधिकारी उस मकान का बँटवारा करवा कर अपने हिस्से का पृथक रूप से कब्जा प्राप्त करने का अधिकारी है। यदि आप के केवल एक भाई है और बहिन नहीं है तो माँ के केवल 3 उत्तराधिकारी आप, आप के पिता और भाई है। इस तरह आप को उस मकान के एक तिहाई हिस्से का स्वामित्व प्राप्त है।

आप चाहें तो तुरन्त उक्त मकान का विभाजन करने और आप के हि्स्से का पृथक कब्जा देने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। इसी वाद में आप यह आवेदन भी दे सकते हैं कि जब तक इस वाद का निर्णय न हो तब तक आप के पिता और भाई आप को उस मकान के उस परिसर से बेदखल न करें और न आप को सामान्य रूप से उस परिसर में रहने में किसी तरह की बाधा उत्पन्न करें। आप को इस वाद के निर्णय तक इस आशय की अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त हो सकती है।

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