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रजिस्टर्ड बंटवारानामा संपत्ति के स्वत्व का दस्तावेज है।

समस्या-

जितेन्द्र ने उज्जैन, से मध्य प्रदेश -समस्या भेजी है कि-

मेरे दादाजी की मुत्यु हो चुकी है। मेरे दादाजी की स्वंय अर्जित सम्पत्ति का एक मकान जो कि हॉउसिंग बोर्ड द्वारा लीज होल्ड है एवं नगर निगम सीमा में है जिसका सम्पत्ति कर वगैरह उस सम्पत्ति पर निवासरत् दादाजी के 3 पुत्रों द्वारा सम्मिलित रूप से जमा किया जाता है। दादीजी का भी देहान्त दिनांक हो गया है। दादाजी की कुल 7 संतानें (5 पुत्र एवं 2 पुत्रियां) हैं। दादाजी ने अपनी मृत्यु के पूर्व कोई भी वसियत भी नहीं की थी। इस सम्पत्ति पर वर्तमान में 3 पुत्रों के परिवार निवासरत है, अन्य में से 1 पुत्र लापता है, 1 पुत्र अन्यत्र निवासरत है, 1 पुत्री का देहान्त कुछ समय पूर्व हो चुका है एवं 1 पुत्री अन्यत्र निवासरत होकर अविवाहित है। इस सम्पत्ति का बंटवारा किस प्रकार किया जा सकता है? सभी संतानों का मालिकाना हक किस प्रकार इस सम्पत्ति पर हो सकता है? मालिकाना हक से संबंधित क्या दस्तावेज तैयार करवा सकते हैं? कृपया बतायें- 1. क्या इस सम्मत्ति की रजिस्ट्री होगी? 2. हॉउसिंग बोर्ड इस सम्पत्ति में क्या कार्यवाही कर सकता है ? 3. रजिस्टर्ड बंटवारा ओर रजिस्ट्री में क्या कोई अंतर है? क्या रजिस्टर्ड बंटवारा में रजिस्ट्री के सभी अधिकार प्राप्त होते है या नहीं?

समाधान-

ब आप रजिस्ट्री शब्द का उल्लेख करते हैं तो आम तौर पर उसका अर्थ पंजीकृत विक्रय पत्र से या पंजीकृत लीज डीड से होता है। लेकिन पंजीकरण का कानून यह है कि यदि 100 रुपए से अधिक कीमत की कोई अचल संपत्ति का हस्तांतरण हो तो उस की रजिस्ट्री होना जरूरी है। बंटवारा भी ऐसा ही एक विलेख है। पंजीकरण कानून कहता है कि बंटवारे के विलेख का पंजीकृत होना जरूरी है वर्ना वह विलेख जरूरत पड़ने पर किसी कार्यवाही में नहीं पढ़ा जाएगा।

संपत्ति के सभी साझेदारों के बीच आपसी सहमति से बंटवारा होता है तो उसे पंजीकृत कराना जरूरी है। यह पंजीकृत विलेख ही संपत्ति के स्वामित्व का विलेख होगा। हाउसिंग बोर्ड या नगर निगम में जहाँ संपत्ति का रिकार्ड रहता है वे अपने रिकार्ड में नामान्तरण करते हैं लेकिन नामान्तरण हो जाने से किसी को स्वत्वाधिकार प्राप्त नहीं होता है। नामान्तरण गलत होने पर न्यायालय के आदेश से उसे हटाया या दुरुस्त किया जा सकता है। स्वअर्जित संपत्ति में सभी पुत्रों और पुत्रियों का समान हिस्सा है। यदि किसी का देहान्त हो गया है तो उस की संपत्ति हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार उस के उत्तराधिकारियों को जाएगी। किसी के मर जाने से या गायब हो जाने से उस का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता है।

विक्रय पत्र, पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) और रजिस्ट्री क्या हैं?

समस्या-

सुनीता ने निजामुद्दीन, दिल्ली से हरियाणा राज्य की समस्या भेजी है कि-


पावर ऑफ़ अटोर्नी क्या होता है? क्या यह रजिस्ट्री जैसा ही होता है? मैंने जिससे जमीन खऱीदी है, वो यही बोल रहा है। मैं ने प्लाट बल्लबगढ़ हरयाणा में लिया है और वो जेवर, यूपी में बोल रहा है पावर ऑफ़ अटोर्नी करने के लिए। क्या यह सही है? क्या इससे हम बाद में बिना बिल्डर के ही  रजिस्ट्री करा सकते हैं?


समाधान-

आप को और लगभग सभी लोगों को यह समझना चाहिए कि रजिस्ट्री, विक्रय पत्र यानी सेल डीड और पावर ऑव अटॉर्नी अर्थात मुख्तारनामा क्या होते हैं। हम यहाँ बताने का प्रयत्न कर रहे हैं-

रजिस्ट्री या रजिस्ट्रेशन या पंजीकरण-

जब आप कोई पत्र किसी को भेजना चाहते हैं तो साधारण डाक से लिफाफे पर टिकट लगा कर डाक के डब्बे में डाल देते हैं। यह साधारण पत्र होता है। लेकिन जब आप उस पर अधिक (25 रुपए) का डाक टिकट लगा कर तथा एक अभिस्वीकृति पत्र जिस पर आपका व पाने वाले का पता लिख कर डाक घर में देते हैं तो डाक घर आप को रसीद देता है। आप उस के लिए कहते हैं की हमने रजिस्ट्री से चिट्ठी भेजी है। इस चिट्ठी को भेजने के सबूत के तौर पर आपके पास डाकघर की रसीद होती है। डाकघर यह जिम्मेदारी लेता है कि जो अभिस्वीकृति पत्र आप ने लिफाफे के साथ लगाया है उस पर पाने वाले के हस्ताक्षर करवा कर आप के पास लौटाएगा। यदि 30 दिनों में अभिस्वीकृति पत्र आप को वापस नहीं मिलता है तो आप डाकघर को पत्र दे कर पूछ सकते हैं कि उस ने उस पत्र का क्या किया। इस पर डाकघर आप को एक प्रमाण पत्र देता है कि आप का पत्र फलाँ दिन अमुक व्यक्ति को अमुक पते पर डिलीवर कर दिया गया है। अब आप रजिस्टर्ड पत्र या रजिस्ट्री शब्द का अर्थ समझ गए होंगे कि आप का पत्र आप के द्वारा डाक में देने से ले कर पाने वाले तक पहुँचने  तक हर स्थान पर रिकार्ड़ में दर्ज किया जाता है।

इसी तरह जब  कोई भी दस्तावेज जैसे विक्रय पत्र, दान पत्र, मुख्तार नामा, गोदनामा, एग्रीमेंट, राजीनामा, बंटवारानामा आदि लिखा जाता है तो उस में किसी संपत्ति के हस्तांतरण या हस्तान्तरण किए जाने का उल्लेख होता है। अधिकारों का आदान प्रदान होता है। तब उस दस्तावेज को हम डीड या विलेख पत्र, या प्रलेख कहते हैं। हमारे यहाँ पंजीकरण अधिनियम (रजिस्ट्रेशन एक्ट) नाम का एक केन्द्रीय कानून है जिस के अंतर्गत यह तय किया हुआ है कि कौन कौन से दस्तावेज हैं जिन का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा, कौन से दस्तावेज हैं जिन का ऐच्छिक रूप से आप पंजीयन करा सकते हैं। इस के लिए हर तहसील स्तर पर और नगरों में एक या एक से अधिक उप पंजीयकों के दफ्तर खोले हुए हैं जिन में इन दस्तावेजों का पंजीयन होता है। यदि पंजीयन अधिनियम में किसी दस्तावेज की रजिस्ट्री कराना अनिवार्य घोषित किया गया है तो उस दस्तावेज की रजिस्ट्री अनिवार्य है अन्यथा उस दस्तावेज को बाद में सबूत के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर किसी भी 100 रुपए से अधिक मूल्य की स्थाई संपत्ति (प्लाट या मकान, दुकान) के किसी भी प्रकार से हस्तांतरण विक्रय, दान आदि का पंजीकृत होना अनिवार्य है अन्यथा वह संपत्ति का हस्तांतरण नहीं माना जाएगा।  अब आप समझ गए होंगे कि रजिस्ट्री का क्या मतलब होता है। रजिस्ट्री से कोई भी दस्तावेज केवल उप पंजीयक कार्यालय में दर्ज होता है उस का निष्पादन किया जाना प्रथम दृष्टया सही मान लिया जाता है।

विक्रय पत्र सेल डीड –

कोई भी स्थाई अस्थाई संपत्ति जो प्लाट, दुकान, मकान,वाहन, जानवर आदि कुछ भी हो सकता है उसे कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित कर सकता है। यह हस्तांतरण दान हो सकता है अदला बदली हो सकती है, या धन के बदले हो सकता है। जब यह धन के बदले होता है तो इसे विक्रय कहते हैं। इस विक्रय का दस्तावेज लिखना होता है। इसी दस्तावेज को विक्रय पत्र कहते हैं। यदि यह संपत्ति स्थाई हो और उस का मूल्य 100 रुपए हो तो उस का विक्रय पत्र उप पंजीयक के यहाँ पंजीकरण कराना जरूरी है। यदि पंजीकरण नहीं है तो ऐसा विक्रय वैध हस्तान्तरण नहीं माना जाएगा। यह विक्रय पत्र वस्तु को विक्रय करने वाला वस्तु का वर्तमान स्वामी निष्पादित करता है और उस पर गवाहों के ह्स्ताक्षर होते हैं। यदि वस्तु का वर्तमान स्वामी किसी कारण से उप पंजीयक के कार्यालय तक पहुँचने में असमर्थ हो तो उस स्वामी का मुख्तार (अटोर्नी) यह विक्रय पत्र स्वामी की ओर से निष्पादित कर सकता है। इस के लिए उस के पास वैध अधिकार होना चाहिए।

मुख्तारनामा या पावर ऑफ अटॉर्नी-

जब कोई संपत्ति का स्वामी स्वयं पंजीयन के लिए उप पंजीयक के कार्यालय में उपस्थित होने में असमर्थ हो तो वह एक मुख्तार नामा या पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर किसी अन्य व्यक्ति को मुख्तार या अटॉर्नी नियुक्त कर देता है जो कि उस की ओर से उप पंजीयक कार्यालय में उपस्थित हो कर दस्तावेज अर्थात विक्रय पत्र आदि का विक्रय पत्र हस्ताक्षर कर सकता है और उस का पंजीयन करा सकता है विक्रय का मूल्य प्राप्त कर सकता है। इस के लिए यह आवश्यक है कि मुख्तार नामा के द्वारा मुख्तार को ये सब अधिकार देना लिखा हो। मुख्तार नामा किसी भी काम के लिए दिया जा सकता है। लेकिन वह उन्हीं कामों के लिए दिया हुआ माना जाएगा जो मुख्तार नामा में अंकित किए गए हैं इस कारण मुख्तार द्वारा कोई दस्तावेज निष्पादित कराए जाने पर मुख्तारनामे को ठीक से पढ़ना जरूरी है जिस से यह पता लगे कि वह किन किन कामों के लिए दिया जा रहा है। मुख्तार नामा का पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है वह किसी नोटेरी से तस्दीक कराया गया हो सकता है लेकिन यदि वह किसी स्थाई संपत्ति मकान, दुकान, प्लाट आदि के विक्रय के हो तो उस का पंजीकृत होना जरूरी है। कई बार जब किसी संपत्ति के हस्तांतरण पर किसी तरह की रोक होती है या कोई और अड़चन होती तब भी वस्तु को विक्रय करने के लिए एग्रीमेंट कर लिया  जाता है और क्रेता के किसी विश्वसनीय व्यक्ति के नाम मुख्तार नामा बना कर दे दिया जाता है ताकि मुख्तार जब वह अड़चन हट जाए तो क्रेता के नाम विक्रय पत्र पंजीकृत करवा ले। लेकिन इस तरह से क्रेता के साथ एक धोखा हो सकता है। मुख्तार नामा कभी भी निरस्त किया जा सकता है। यदि संपत्ति का मालिक ऐसी अड़चन समाप्त होने पर या उस के पहले ही मुख्तार नामा को निरस्त करवा दे तो फिर मुख्तार को विक्रय पत्र निष्पादित करने का अधिकार नहीं रह जाता है। इस तरह मुख्तार नामा के माध्यम से किसी संपत्ति का क्रय करना कभी भी आशंका या खतरा रहित नहीं होता है।

किसी भी पंजीयन के लिए झूठे तथ्यों का शपथ पत्र देना अपराध है।

समस्या-

मुरारी ने रामगढ़ पचवाड़ा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरा विवाह 2003 में हुआ था, 1989 जन्म तिथि है। तब में 14 वर्ष का था। तो क्या में 21 वर्ष 2010 में होने पर 21 वर्ष की डेट में विवाह पंजीयन करा सकता हूँ?  ये गलत होगा या सही? इससे पहले मेरे दो बच्चे भी हो गए अगर 2010 की डेट में करवाता हूँ तो शादी से पहले दो बच्चे नौकरी में अयोग्यता का आधार तो नही होंगे? उचित सलाह दें।


समाधान-

ब से बड़ी गलत बात तो यह है कि आप विवाह की एक ऐसी तारीख चुन रहे हैं जो सही नहीं है। जिस तिथि को आप का विवाह हुआ था उस के सिवा किसी भी अन्य तारीख का विवाह का पंजीयन कराना गलत होगा। क्यों कि इस के लिए आप झूठ बोलेंगे, झूठा शपथ पत्र देंगे जो अपराध होगा जिस के लिए आप को सजा हो सकती है। यदि नौकरी लग भी जाए तो इसी कारण छूट भी सकती है और आप को कारावास का दंड भी भुगतना पड़ सकता है।

यह सही है कि आप की शादी हुई तब आप नाबालिग थे, या विवाह की उम्र के नहीं थे। विवाह हुए 14 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। यदि वह बाल विवाह किसी के लिए आप के व आप की माता की पत्नी का अपराध था भी तो अब इतना समय गुजर चुका है कि उस मामले में पुलिस या कोई भी उन के वि्रुद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर सकता। इस कारण किसी का अपराध छुपाने के लिए झूठ बोलने की  जरूरत ही नहीं है और बोलते हैं तो अपराध छुपाना भी अपराध है। इस कारण से आप को झूठ नहीं बोलना चाहिए।

कोई भी हिन्दू विवाह यदि संपन्न हो जाता है तो वह गलत हो सकता है लेकिन समाप्त नहीं होता और वैध होता है। इस कारण कम उम्र में किया गया आप का विवाह पूरी तरह से वैध है और आप उस का पंजीयन करवा सकते हैं। मेरी राय में आप को विवाह का पंजीयन उसी तिथि का करवाना चाहिए जिस तिथि में आप का विवाह हुआ है। इस से आप को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। यदि पंजीयक पंजीयन करने से  मना करे तो न्यायालय से पंजीयक के विरुद्ध घोषणा व आदेशात्मक व्यादेश का वाद प्रस्तुत कर डिक्री पारित कराई जा सकती है और पंजीयन करवाया जा सकता है।

 

संपत्ति का बँटवारा या तो पंजीकृत या न्यायालय की डिक्री से न हो तो वह वैध नहीं है।

rp_fake-medicin.jpgसमस्या-

मीनाली जैन ने बागपत उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मारे और हमारे चाचा के बीच सपंत्ति के बटवारे को लेकर जो समझौतानामा हुआ वह गलत था और 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर हमारे चाचा ने हमारी मम्मी और भाई के हस्ताक्षर करा लिए हमारे पापा का देहान्त हो चुका है। जिन लोगों ने हमारा समझौता कराया था उन्होंने भी गवाह बन कर गलत समझौते नामा पर हस्ताक्षर कर दिए। उस पेपर पर चाचा ने हमारी एक दुकान और चाचा के घर में हमारे पापा  का जो आधा हिस्सा था वो भी अपने नाम कर लिया और पैसे भी नहीं दिए। इस समझौता नामा को रोकने के लिए मेरी मममी या भाई कुछ कर सकते हैं या उनकी जगह पुत्री होने के नाते मैं और मेरी बहन कोई कारवाई कर सकते हैं। ये दुकान और घर हमारे पापा ने खुद खरीदा था।  हमारे दादाजी के देहांत के बाद। पापा के देहान्त के बाद पापा का बिजनेस चाचा देखने लगे जो पापा के बाद अब मेरी मममी के नाम है। लेकिन चाचा ने हमें बिजनेस मे कभी कोई हिस्सा नहीं दिया और हमारी दुकान पर हैं। चाचा ने मममी से 1996 में कुछ पैसे लिए थे ब्याज पर जो चाचा ने कभी वापस नहीं किए पर हमारे पास चाचा को पैसे देने का कोई लिखित नहीं है।

समाधान-

प की मां ने चाचाजी को 1996 में जो धन उधार दिया था उस की लिखित भी नहीं है और होती तो भी अब किसी काम की न रह जाती। कोई भी उधार सिर्फ उधार देने के 3 साल के अंदर वसूला जा सकता है।

जिस समझौतानामा की आप बात कर रही हैं वह पंजीकृत प्रतीत नहीं होता है। ऐसे समझौतानामा का कोई महत्व नहीं है। आप के पिता की संपत्ति कोई पुश्तैनी संपत्ति नहीं थी। उस में आप दोनों बहनों को अधिकार प्राप्त है। आप सम्पूर्ण संपत्ति जिस में दुकान का कारोबार सम्मिलित है के बंटवारे की कार्यवाही कर सकते हैं। इस संबंध में आप को अपने दस्तावेजों के साथ किसी अच्छे स्थानीय दीवानी वकील से मिल कर सलाह प्राप्त करनी चाहिए और कार्यवाही करनी चाहिए।

संपत्ति के स्वत्व के दस्तावेज का पंजीयन अवश्य कराएँ।

sub-registrar-officeसमस्या-

तीरथ जैन ने घोरडा, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

32 वर्ष पूर्व आबादी भूमि का पट्टा बन चुका है। क्या उस की रजिस्ट्री हो सकती है? ग्रामवासी बेचने पर आपत्ति कर रहे हैं।

समाधान-

कोई भी संपत्ति हस्तान्तरण जो कि 100 रुपए से अधिक की संपत्ति का है उस का पंजीयन कराया जा सकता है। संपत्ति की कीमत 100 रुपए से कम होने पर भी संपत्ति का हस्तान्तरण ऐच्छिक रूप से पंजीकृत कराया जा सकता है। बल्कि संपत्ति के स्वत्व के दस्तावेज का पंजीयन अवश्य करा लेना चाहिए।

आप को पट्टा जिस एजेंसी (ग्राम पंचायत आदि) ने जारी किया हो वहाँ आवेदन प्रस्तुत करें और कहें कि पट्टा रजिस्ट्री कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही करें। आप के पास जो मूल पटटा है उस के संबंध में ग्राम पंचायत एक अग्रेषण पत्र उप पंजीयक के नाम जारी करे कि इस पट्टे का पंजीयन किया  जाए। उस पत्र के प्रस्तुत होने पर पट्टे का पंजीयन किया जा सकता है।

यदि ग्राम पंचायत ऐसा पत्र जारी करने से इन्कार कर दे तो भी आप सीधे उप पंजीयक के यहाँ जा कर पंजीयन की प्रक्रिया जान सकते हैं। यह हो सकता है कि आप को संपत्ति की वर्तमान कीमत पर पंजीकरण शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी अदा करनी पड़े।

 

अपनी जमीन भाई को दे कर उस से पैतृक संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने के लिए एक्सचेंज डीड निष्पादित कराएँ.

rp_property1.jpgसमस्या-
सुदर्शन यादव ने सहरसा, बिहार से समस्या भेजी है कि-

हरसा शहर में सन् 1970 में मैंने एक पैतृक जमीन से अपना हिस्सा बेचकर इसी शहर में दूसरी जगह अपने नाम से रजिस्टर्ड विक्रय पत्र द्वारा जमीन खरीदी जिसका दाखिल-ख़ारिज कर जमाबंदी भी मेरे नाम से कायम है। नए ख़रीदी गई जमीन पर उसी समय से मेरे साथ मेरा छोटा भाई भी घर बनाकर रहता आ रहा है। क्या अब मैं उससे जमीन का कब्ज़ा वापस पा सकता हूँ या नहीं तो क्या इसी आधार पर मुझे छोटे भाई के नाम पर बचे हुए पैतृक जमीन में हिस्सा मिल सकता है?

समाधान-

पैतृक जमीन में से आप ने अपना हिस्सा बेच दिया और आप उस संपत्ति की भागीदारी से अलग हो गए। अब आप का उस जमीन में कोई हिस्सा नहीं है।

प ने उसी पैसे से अलग जमीन खरीद ली। लेकिन उस पर आप के साथ साथ आप का भाई भी मकान बना कर रह रहा है। वह आप की अनुमति से उस भूमि पर रह रहा है जब कि उस भूमि का स्वामित्व आप के नाम है। इस तरह भाई आप की भूमि पर एक लायसेंसी है। आप उस के लायसेंस को नोटिस दे कर रद्द कर सकते हैं और जमीन मकान पर कब्जे के लिए वाद दायर कर सकते हैं।

दि भाई जिस मकान में रह रहा है उस भूमि को आप अपने भाई को दे सकते हैं और बदले में अपनी पैतृक संपत्ति में उस का हिस्सा ले सकते हैं। इस के लिए आप को भाई के मकान वाली जमीन का भाई के नाम तथा पैतृक संपत्ति में उस के हिस्से का आप के नाम हस्तान्तरण करने के लिए एक्सचेंज डीड लिख कर उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत करानी होगी।

पति की मृत्यु हो जाने के उपरान्त विवाह को कैसे पंजीकृत कराएँ?

ChildMarriageसमस्या-

अनिल मीणा बून्दी, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पति का स्वर्गवास जनवरी 2014 में हो गया। पति कि मृत्यु तक मैं ने अपना विवाह प्रमाण पत्र नहीं बनवाया था। अब मैं कहीं भी आवेदन करती हूँ तो सभी मुझसे विवाह प्रमाण पत्र मांगते हैं। श्रीमान क्या अब में विवाह प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकती हूँ। अगर करूँ तो पति कि जगह किस के हस्ताक्षर करवाऊँ। मेरा विवाह 17 मई 2005 को हुआ था।

समाधान-

विवाह का प्रमाण पत्र तभी मिलता है जब कि विवाह का पंजीयन हुआ हो। विवाह के एक पक्षकार का देहान्त हो जाने के उपरान्त आप के विवाह का पंजीकरण होना नियमानुसार संभव नहीं है। यही कारण है कि आप को विवाह का प्रमाण पत्र विवाह पंजीयक से नहीं मिल सकता।

हाँ भी आप आवेदन प्रस्तुत करती हैं तो आप की स्टेटस जानने के लिए विभाग अपने नियमों के अनुसार आप का विवाह प्रमाण पत्र व आप के पति का मृत्यु प्रमाण पत्र चाहते हैं जिस से आप को पति की विधवा होने का सबूत उन्हें मिल सके। आप की इस समस्या का हल केवल सिविल न्यायालय की डिक्री से हो सकता है।

प विवाह के पंजीकरण के लिए आवेदन दें। उस में पति के हस्ताक्षर का स्थान खाली छोड़ दें और अंकित करें कि पति का देहान्त हो गया है तथा साथ में पति का मृत्यु प्रमाण पत्र लगा दें। आप का यह आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। वैसी स्थिति में आप विवाह पंजीयक को प्रतिवादी बनाते हुए सिविल न्यायालय में घोषणा व स्थाई व्यादेश (Permanent Injunction) का वाद प्रस्तुत कर दें जिस में आप यह अभिवचन अंकित करें कि आप का विवाह आप के पति के साथ निश्चित तिथि को हुआ था। आप का यह विवाह पंजीकृत नहीं कराया गया और आप के पति का देहान्त हो गया। अब आप से बार बार हर स्थान पर विवाह प्रमाण पत्र मांगा जाता है लेकिन विवाह पंजीयक ने विवाह का पंजीयन करने से इन्कार कर दिया है। ऐसी स्थिति में घोषणा की जाए कि आप का विवाह आप के पति के साथ हुआ था। पति का देहान्त हो गया और आप आप के पति की विधवा हैं। विवाह पंजीयक को यह व्यादेश प्रदान किया जाए कि वे आप के विवाह का पंजीकरण कर आप को विवाह का प्रमाण पत्र जारी करें।

स मामले में न्यायालय घोषणा की डिक्री तो पारित करेगा ही। इस के साथ ही विवाह पंजीयक को आप का विवाह पंजीकृत करने और विवाह प्रमाण पत्र जारी करने का व्यादेश भी दे सकता है। यदि इस तरह का व्यादेश न भी दे तो न्यायालय की डिक्री से आप का काम चल जाएगा। आप विवाह प्रमाण पत्र के स्थान पर न्यायालय की डिक्री प्रस्तुत कर सकेंगी।

अपंजीकृत वसीयत को कैसे पंजीकृत कराएँ?

court-logoसमस्या-

अनुज जी ने मध्य प्रदेश के इंदौर से समस्या भेजी है कि

मेरे दादाजी ने एक वसीयत लिखी थी जो कि रजिस्टर्ड नहीं है। कृपया उसे रजिस्टर्ड कराने का उपाय बताएँ।

समाधान-

प के दादाजी यदि जीवित हैं तो खुद वे उप पंजीयक के कार्यालय में उपस्थित हो कर उस वसीयत को पंजीकृत करवा सकते हैं।

दि आप के दादा जी जीवित नहीं हैं तो आप उस वसीयत के गवाहों को साथ ले जा कर उक्त वसीयत को उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत करवा सकते हैं। वसीयत के गवाह यह प्रमाणित करेंगे कि यह वसीयत उन के सामने आप के दादाजी ने बिना किसी दबाव या प्रभाव के निष्पादित की थी और उन्हों ने उस वसीयत पर अपने सामने निष्पादित किए जाने के गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए थे। इस वसीयत को पंजीकृत करवाने के लिए आप किसी लायसेंस धारक डीड राइटर या फिर किसी स्थानीय वकील से सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

किसी वसीयत का पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है आप के दादा जी ने जो वसीयत की है उसे आप जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर उसे प्रोबेट करवा सकते हैं। इस के लिए आप को किसी स्थानीय वकील की सहायता प्राप्त करनी होगी। आप के दादा जी के सभी उत्तराधिकारियों को आवेदन का नोटिस भेज कर तथा एक सामान्य नोटिस अखबार में प्रकाशित करवा कर सूचित किया जाएगा और किसी को आपत्ति न होने पर वसीयत की जाँच कर के या आपत्तियाँ प्रस्तुत होने पर आपत्तियों की सुनवाई कर के वसीयत की जाँच कर के उसे न्यायालय द्वारा प्रोबेट किया जा सकता है। इस के लिए आप को किसी स्थानीय वकील से सहायता प्राप्त करनी होगी।

हस्तान्तरण विलेख के पंजीयन के बिना आप स्थावर/अचल संपत्ति के स्वामी नहीं हो सकते।

basement constructionसमस्या-

कैथल, हरियाणा से यश ने पूछा है-

मैंने कुछ जमीन लगभग २० वर्ष पहले अनुसूचित जाति के लोगो से खरीदी है, उस जमीन की असली मालिक ग्राम पंचायत है। यह जमीन ग्राम पंचायत द्वाराअनुसूचित जाति के लोगों को दी गयी थी| अनुसूचित जाति की जमीन होने के कारनउसकी रजिस्ट्री नहीं हो रही है। मैंने कुछ लोगों से पंचायत में उसकेखरीदने और उसके कब्जे का साधारण कागज पर लेख लिया है जिस में गवाह के रूप मेंग्राम पंचायत की मुहर भी सरपंच द्वारा लगाई हुई है तो कुछ स्टाम्प पेपर परनोटरी द्वारा अटेस्टेड है। अब मैं उस जमीन पर घर बनाना चाहता हूँ उस जमीन परमेरा कब्ज़ा भी तभी से है जब से वो जमीन मैंने खरीदी है। यदि मैं उस जमीन परघर बना लूँ तो कोई दुविधा तो नहीं होगी।

समाधान-

ह ठीक है कि आप ने जमीन खरीदी है जिस के सबूत के रूप में आप के पास सादे कागज पर विक्रय विलेख है और स्टाम्प पर नोटेरी का अटेस्टेशन भी है। पर ये सब मात्र एग्रीमेंट हैं। इन दस्तावेजों से अचल संपत्ति का हस्तान्तरण नहीं हो सकता। इन दस्तावेजों के आधार पर इतना तो माना जा सकता है कि आप ने उक्त जमीन खरीदने का सौदा किया। उस की कीमत अदा कर दी और कब्जा प्राप्त कर लिया। बीस साल से आप का कब्जा है। लेकिन आप किसी भी तरह उस के स्वामी नहीं हुए हैं। क्यों कि किसी भी स्थावर संपत्ति का स्वामित्व केवल रजिस्टर्ड हस्तान्तरण पत्र के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।

मुझे लगता है कि इस जमीन के विक्रय पत्र का पंजीयन न हो सकने का कारण यह नहीं है कि वह जमीन अनुसूचित जाति के लोगों की है। इस का मूल कारण यह होना चाहिए कि जमीन उन्हें पंचायत ने मकान बना कर रहने को दी। उन्हों ने मकान नहीं बनाया बल्कि उस का कब्जा आप को बेच दिया। पंचायत ने उन्हें कभी उस का स्वामित्व हस्तान्तरित ही नहीं किया था। जिस से वे उस के मालिक नहीं बन सके। जो व्यक्ति खुद किसी संपत्ति के मालिक नहीं हैं वे कैसे आप को स्वामित्व हस्तान्तरण कर सकते हैं। यदि ग्राम पंचायत उन्हें पट्टा जारी करती और वे उस पट्टे का पंजीयन करवा लेते तो वे उस जमीन के स्वामी हो सकते थे। तब वे आप को वह भूमि हस्तान्तरित कर के उस का पंजीयन करवा सकते थे।

ब आप मकान तो बना सकते हैं, हो सकता है उस में कोई भौतिक बाधा खड़ी न हो। लेकिन ग्राम पंचायत जो कि सरकार की प्रतिनिधि है। सरकार के किसी निर्णय के आधार पर उस भूमि पर से उस के अनुसूचित जाति के लोगों का आवंटन रद्द कर सकती है। वैसी स्थिति में आप का उक्त जमीन पर कब्जा भी अवैध हो सकता है। उस पर से आप को हटने के लिए भी कहा जा सकता है। हालांकि ऐसे मामलों में अक्सर यह होता है कि सरकार या ग्राम पंचायत उक्त भूमि का प्रीमियम ले कर कब्जेदार को पट्टा जारी कर देती है और कब्जेदार उस पट्टे का पंजीकरण करवा कर लीज होल्ड स्वामित्व प्राप्त कर लेता है।

विक्रय के अनुबंध का पंजीयन अनिवार्य नहीं है।

agreementसमस्या-

नितिन ने उत्तर प्रदेश गाजियाबाद से पूछा है-

मेरा एक मित्र गाजियाबाद में एक मकान लेना चाहता है। मकान मालिक से उसकीबातचीत पक्की हो गई है। लेकिन पूरे पैसे इक्टठे नहीं हो पाने के कारण अभीरजिस्ट्री नहीं करा पा रहा है। मकान मालिक को कुछ पैसे देकर विक्रय अनुबंध करवाना चाहता है। सुरक्षा के लिहाज से इस में कितने रुपयेका स्टाम्प पेपर लगेगा और क्या इसका रजिस्ट्रेशन जरूरी है? कृपया मार्गदर्शनकरें।

समाधान-

स्थावर संपत्ति के विक्रय का अनुबंध (Agreement to sale of immovable property) जिस में संपत्ति का कब्जा लेने का कथन नहीं किया गया हो और विक्रय पत्र के पंजीयन से पहले संपत्ति का कब्जा देने का उल्लेख न हो तो जितनी स्टाम्प ड्यूटी विक्रय पत्र पर लगती है उस की आधी स्टाम्प ड्यूटी पर अनुबंध होना चाहिए।

स्थावर संपत्ति के विक्रय पर उत्तर प्रदेश में संपत्ति के बाजार मूल्य के 12.5 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी है। उदाहरणार्थ यदि किसी संपत्ति का मूल्य 1,00,000/- रुपया है तो उस के विक्य पत्र पर 12500/- रुपया स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी और विक्रय के अनुबंध पर 6.25 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी। हम यह स्टाम्प ड्य़ूटी हमारे रिकार्ड के अनुसार बता रहे हैं। फिर भी आप को स्थानीय उप पंजीयक कार्यालय से स्टाम्प ड्यूटी की दर के बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए।

नुबंध पर जितनी स्टाम्प ड्यूटी अदा की जाएगी उतनी स्टाम्प ड्यूटी विक्रय पत्र के पंजीयन के समय कम हो जाएगी।

विक्रय के अनुबंध का पंजीयन अनिवार्य नहीं है। लेकिन यदि आप उस का पंजीयन करवा लेते हैं तो आप सुरक्षित रहेंगे।

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