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हकत्याग विलेख को पंजीकृत कराए बिना हकत्याग संभव नहीं है।

समस्या-

छैल कँवर ने मेवानगर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मैं  मेरे पिता और माता की एकमात्र सन्तान हूँ। मेरे पिता का देहांत मेरे जन्म से पहले ही हो गया था। जिससे समस्त जमीन मेरे माताजी के नाम हो गई। मेरी माताजी का देहांत 1883 में हो गया उस समय में ससुराल में थी। मेरे कोई भाई या बहन नहीं है, जिसके कारण जमीन का नामानतरण मेरे नाम होना था। लेकिन मेरे दादाजी के भाई के बेटे ने जो उस समय सरपंच थे वे मेरे ससुराल आये और मुझे ये कहा कि आप मेरे साथ चलो आपकी जमीन आपके नाम करवा रहे हैं। वो मुझे एक वकील के पास लेकर गए और एक स्टाम्प पर अंगूठा लगवाया। मुझे अब पता चला हे की उन्होंने उस स्टाम्प के आधार पर मेरी समस्त जमीन अपने बेटे के नाम हकतर्क करवा ली जो उस समय मात्र 14 साल का था। जब मैंने रिकॉर्ड निकलवाया तो उसके फोतगी में पटवारी ने लिखा था की “असन कँवर (माताजी) के फौत होने पर उनकी बेटी छेल कँवर (स्वयं) इकरार नामा 7 रूपये के स्टाम्प पर मनोहरसिंह (जिसके नाम हकतर्क किया गया उम्र 14 साल) के हक में ओथ कमिश्नर द्वारा 28.1.1983 को तस्दीक दस्तावेज पर नामान्तरण खोला गया।” श्रीमान में निम्न सवालों के जवाब जानना चाह रही हूँ- 1. क्या 1983 मैं ओथ कमिश्नर द्वारा जारी स्टाम्प के आधार पर नामन्तरण खोला जा सकता था? 2. क्या मेरे दादाजी के भाई के बेटे के बेटे के नाम हक तर्क हो सकता था जो उस समय 14 साल का था?  न ही वो मेरे पिताजी द्वारा गोद लिया पुत्र है। 3.श्रीमान मैं एक निरक्षर महिला हूँ। मुझे धोखे से एक बार वकील के आगे एक स्टाम्प पर अंगूठा लगवाया था इसके अलावा मैंने न तो किसी पटवारी, तहसीलदार, या रजिस्ट्रार के आगे कोई अंगूठा लगाया हे। 4. मेरी माताजी का देहांत मेरे ननिहाल में 1983 में हुआ था, में अब उनका मृत्यू प्रमाण पत्र बनवाना चाहती हूँ लेकिन मेरे पास उनकी मृत्यु या उनसे सम्बंधित कोई दस्तावेज नहीं है? उचित सलाह प्रदान करें।

समाधान-

नामान्तरण से कभी भी किसी संपत्ति का टाइटल निर्धारित नहीं होता। चूंकि आप को अब पता लगा है कि नामान्तरण आप के नाम होने के स्थान पर आप के दादा जी भाई के पुत्र ने अपने पुत्र के नाम नामान्तरण खुलवा लिया है। इस कारण अब आप तुरन्त नामान्तरण के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर उस आदेश के विरुद्ध अपील कर सकती हैं।

हकत्याग एक प्रकार का अचल संपत्ति का हस्तान्तरण है इस कारण उस का उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत होना अनिवार्य है। इस तरह नोटेरी के यहाँ तस्दीक किए गए हकत्याग के विधि विपरीत विलेख के आधार पर नामान्तरण खोला जाना पूरी तरह गलत है।

आप को चाहिए कि राजस्व (खेती-बाड़ी) की जमीनों का काम देखने वाले किसी अच्छे वकील को अपने सारे दस्तावेज दिखाएँ और नामान्तरण की अपील प्रस्तुत करें। आप टाइटल के आधार पर भी राजस्व रिकार्ड में संशोधन और जमीन का कब्जा दिलाए जाने के लिए दावा प्रस्तुत कर सकती हैं। लेकिन जो भी करें अपने वकील को समस्त दस्तावेज दिखा कर उन की राय के अनुसार काम करें।

हक त्याग सिर्फ और सिर्फ किसी भी संपत्ति के सहस्वामी के हक में किया जा सकता है। उक्त भूमि की आप एक मात्र स्वामी थीं। इस कारण से किसी भी व्यक्ति के नाम आप के दादा जी के भाई के पोते के नाम  भी हकत्याग होना संभव नहीं था। इस कारण भी वह हक त्याग वैध नहीं है।

हिस्सेदार हिस्सा नहीं लेना चाहते तो उन से अपने नाम रिलीज डीड निष्पादित कराएँ।

rp_kisan-land.jpgसमस्या-

धर्मेश पटेल ने वलसाड, गुजरात से पूछा है-

मेरी मम्मी के पिताजी के मामाजी की जमीन है। मम्मी के पिताजी और उन के मामाजी दोनों का देहान्त हो चुका है। उन के खानदान में कोई नहीं बचा है। मेरी मम्मी की पाँच बहनें और हैं, पर वे खाते पीते घर से हैं, उन को जमीन नहीं चाहिए। क्या ये जमीन मेरी माँ के नाम हो सकती है?

 

समाधान-

स जमीन का अन्य कोई उत्तराधिकारी न होने से आप की माँ और उन की बहनें ही उत्तराधिकारी हैं, इस कारण सबूत प्रस्तुत करने पर उक्त जमीन का नामान्तरण आप की माँ और उन की बहनों के नाम खोला जाना चाहिए।

यदि आप की माँ की बहनेँ उक्त जमीन में किसी तरह का कोई हिस्सा नहीं चाहती हैं तो उन सब का हिस्सा वे रिलीज डीड आप की माँ के नाम निष्पादित कर सकती हैं और इस रिलीज डीड के पंजीकृत हो जाने पर इस के आधार पर पूरी जमीन आप की माँ के नाम नामान्तरित हो सकती है। यदि रिलीज डीड होने के पहले ही आप की माँ और उन की बहनों के नाम संयुक्त नामान्तरण खुल जाए तो भी बाद में रिलीज डीड प्रस्तुत करने पर उस के आधार पर उस बहिन का हिस्सा जिस ने रिलीज डीड निष्पादित की है आप की माँ के नाम हस्तान्तरित होने का नामान्तरण अलग से खुलवाया जा सकता है।

अपने भूखंड का भू-परिवर्तन करवा कर पट्टा प्राप्त कर पंजीकृत करवाएँ।

housing colonyसमस्या-

रितेश ने इन्दौर मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं इंदौर में नगिन नगर में पिछले 25 सालों से रह रहा हूँ। मेरे पिताजी ने यह जमीन नोटरी पर खरीदी थी। उन्हें 2001 से नजूल विभाग से कालोनी को नियमित करने का नोटिस आया था। वो पेसे जमा भी करवा रहे थे। पर कालोनी वालों ने मना कर उन्होंने पैसे जमा नही करवाने दिया। कहा कि कालोनी काटने वाला देगा। अब मैं चाहता हूँ कि मेरी जमीन का नियमितिकरण हो जाए। क्या सरकार मेरा मकान तोड सकती है? मेरे पिताजी 1990 से नगर निगम में समपत्ति भर रहे हैं। वहाँ पर कोइ सरकारी योजना नहीं है। क्या उसका नियमितिकरण हो सकता है?

समाधान-

प अपनी समस्या को नहीं समझ पा रहे हैं कि आप की समस्या क्या है? आप अपनी समस्या को यहाँ सही से प्रकट तक नहीं कर पा रहे हैं। आप को अपनी समस्या को समझने की कोशिश करनी चाहिए। आप के पिता जी ने किसी कालोनाइजर से भूखण्ड खरीदा और मकान बना कर रहने लगे। जब मकान बना तो नगर निगम ने संपत्ति कर का नोटिस भेजा और आप कर देने लगे।

नियमितिकरण और संपत्ति कर दो अलग अलग चीजें हैं। क्यों कि आप का मकान नगर निगम की सीमा में है और आप की संपत्ति है इस कारण से नगर निगम सम्पत्ति कर नियमों के अनुसार आप से कर लेने का अधिकारी है। आप कर भी जमा करवा रहे हैं। अच्छी बात यह है कि संपत्ति कर का जमा होना इस बात का बड़ा सबूत है कि वह मकान कम से कम कर देना आरंभ करने के समय से आप के कब्जे में है। कालोनाइजर से आप के पिता ने मकान खरीदा जिस के इकरारनामा जो नोटेरी से सत्यापित कराया गया है वह कब्जा वैध रीति से प्राप्त करने का सबूत है। इस तरह मकान आप का होने के संबंध में दो सबूत आप के पास हैं।

प की समस्या यह है कि भूखंड का स्वामित्व आप के पास नहीं है। इस समस्या का मूल यह है कि जिस जमीन पर आप का भूखंड और कालोनी बसी है वह कृषि भूमि थी जिस पर उस के स्वामी ने कालोनी का मानचित्र बना कर भूखंड विक्रय कर दिए। इसी के साथ उस भूमि का चरित्र बदल गया वह कृषि भूमि न हो कर आवासीय भूमि हो गयी। लेकिन वह राजस्व रिकार्ड में अभी तक कृषि भूमि के रूप में दर्ज है। आप को अपने प्लाट की भूमि की किस्म परिवर्तन करानी है।

कृषि भूमि पर स्वामित्व सरकार का होता है। कृषक उस का मात्र किराएदार होता है जो लगान के रूप में सरकार को हर साल लगान देता है। अब इस परिवर्तन से सरकार को लगान मिलना बन्द हो गया। इसी कारण सरकार चाहती है कि आप उस का नियमितिकरण करवा लें। नियमितिकरण की प्रक्रिया में उक्त भूमि नगरीय निकाय के यहाँ दर्ज होगी तथा आप के नाम पट्टा जारी कर दिया जाएगा। जिस में लगान के स्थान पर आप के नगरीय कर का उल्लेख होगा जो आप को हर साल या एक मुश्त जमा कराना होगा। यह कार्य भू-परिवर्तन अधिकारी के कार्यालय में होगा।

प को चाहिए कि आप जिला कलेक्टर कार्यालय जा कर वहाँ जानकारी करें कि भू-परिवर्तन अधिकारी का कार्यालय कहाँ है और इन्दौर में भू-परिवर्तन का काम किस प्रकार होगा। एक बार जानकारी कर के इस के लिए आवेदन दें जिस के साथ नगर निगम के टैक्स की रसीदों की प्रतियाँ और आप के जमीन खरीद के दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे। भू-परिवर्तन शुल्क भी अदा करना होगा। जिस के बाद आप के नाम लीज डीड जारी होगी जिसे आप को उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत कराना होगा। तब वह भूखंड आप के पास लीज पर होगा।

पिता के सभी उत्तराधिकारी माँ के नाम रिलीज डीड कराएँ।

Release Deedसमस्या-

राघवेन्द्र दीक्षित ने शान्ति नगर, गियासपुरा, लुधियाना, पंजाब से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता जी ने 1993 में 200 गज का प्लाट ख़रीदा था जिस में से 50 गज 2003 में चाचा जी के नाम कर दिया था जिसे 2005 में चाचा जी से झगड़े के कारन पिता जी ने चाचा जी से प्लाट खरीद कर माता जी के नाम कर दिया। अब 200 गज में से 150 गज पिता जी के नाम और 50 गज माता जी के नाम हो गया जिनकी (150 व 50 गज वाली) रजिस्ट्री हमारे पास है। 2006 में मेरे पिता जी की दिमागी हालत ख़राब हो जाने के कारन वो घर से कहीं चले गए और अभी तक नहीं आये। मेरी माता जी ने 2006 में पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई थी जिसकी कापी हमारे पास है। मै आप से जानना चाहता हूँ कि 1- बाकी बचे 150 गज प्लाट जो पिता जी के नाम है वो मैं माता जी के नाम कराना चाहता हूँ इसके लिए मुझे क्या करना होगा? 2- हम दो भाई हैं तो क्या ये जरूरी है 150 गज जमीन हम तीनों के नाम होगी या सिर्फ माता जी के नाम करा सकता हूँ 3- इस के लिए कौन से दस्तावेजो की जरूरत होगी।

समाधान

प के पिताजी 2006 में लापता हुए। तब उक्त प्लाट का 150 गज पिताजी के नाम तथा 50 गज आप की माताजी के नाम था जिस के दस्तावेज आप के पास हैं। लापता होने की तिथि से अर्थात जिस दिन प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गयी है उस दिन से 7 वर्ष पूर्ण होने पर 2013 मैं यह अवधारणा ली जा सकती है कि उन का देहान्त हो चुका है। इस तरह उन के हिस्से का प्लाट का 150 गज प्लाट का हिस्सा उन के उत्तराधिकारियों को उत्तराधिकार में प्राप्त हो गया है। अर्थात यदि आप के कोई बहिन नहीं है तो आप दोनों भाई और माताजी के नाम हो चुका है। यदि कोई बहिन है तो उस में बहिन का भी हिस्सा है।

भूखंड का 50 गज तो माताजी के नाम है ही। यदि आप पूरा भूखंड माताजी के नाम कराना चाहते हैं तो भूखंड के शेष हिस्सेदार अर्थात आप, आप का भाई और कोई बहन/ बहनें हों तो वे सभी मिल कर अपने हिस्से की एक रिलीज डीड अपनी माताजी के नाम निष्पादित करवा कर उप पंजीयक के कार्यालय में निष्पादित करवा दें। इस से आप सभी भाई बहनों के हिस्से माताजी को प्राप्त हो जाएंगे और माताजी उक्त संपूर्ण प्लाट की स्वामिनी हो जाएंगी।

पत्नी से बचाने के जुगाड़ में आप अपनी सम्पत्ति को खो न बैठें।

rp_property.jpgसमस्या-

शैल ने अहमदाबाद, गुजरात से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी 65 वर्ष के हैं, उन्हों ने अपनी कमाई से दो घर बनाए थे जो मेरी मम्मी के नाम हैं। अभी 15 दिन पहले मेरी मम्मी का हार्ट अटैक से देहान्त हो गया है। मैं ने अपनी पत्नी के विरुद्ध 2013 में विवाह विच्छेद का मुकदमा डाला हुआ है जो अभी लंबित है। क्या मेरी पत्नी उन दो मकानों में कोई हिस्सा मांग सकती है। क्या हम दो भाई और बहन उन दो मकानों को अपने पिता के नाम कर सकते हैं जिस से मेरी पत्नी उन में से हिस्सा न मांग सके?

समाधान

प की माता जी के के देहान्त के बाद उत्तराधिकार के अनुसार उन के नाम के दो मकानों पर आप दोनों भाई, बहन और पिताजी का स्वामित्व स्थापित हो चुका है। अब उक्त मकानों में आप चारों का एक एक हिस्सा है अर्थात आप का हिस्सा एक चौथाई है। आप दोनों भाई और बहन चाहें तो एक रिलीज डीड निष्पादित कर अपने हिस्से पिताजी के नाम रिलीज कर सकते हैं। इस से संपूर्ण संपत्ति आप के पिताजी के स्वामित्व की हो जाएगी। आप के पिताजी के जीवनकाल के उपरान्त उक्त संपत्ति आप को उत्तराधिकार में प्राप्त होगी। तब तीनों का व्यक्तिगत हिस्सा एक तिहाई के बराबर होगा।

र्तमान में जो कानून है उस के अनुसार विवाह विच्छेद के समय पत्नी अपने लिए स्थाई भरण पोषण के लिए एक मुश्त राशि निर्धारित करवा सकती है या वह चाहे तो जब तक दूसरा विवाह न करे तब तक निरन्तर भरण पोषण प्राप्त करती रह सकती है। इन दोनों का निर्धारण पत्नी और पति की आर्थिक सामाजिक हैसियत के अनुसार हो सकता है। यह हैसियत आप की निरन्तर आय और संपत्ति को देख कर निर्धारित की जा सकती है। लेकिन पत्नी को पति की संपत्ति में हिस्सा मांगने का कोई अधिकार नहीं है। हाँ यह प्रस्तावित कानून जरूर है, जो कब संसद पारित करेगी और कब अस्तित्व में आएगा कहा नहीं जा सकता।

ह आप को स्वयं निर्धारण करना होगा कि आप अपना ¼ हिस्सा पिता के नाम या किसी अन्य सह स्वामी अर्थात आप के भाई या बहिन के नाम हस्तान्तरित करना चाहते हैं या नहीं। यदि केवल आप अपना हिस्सा पिता के नाम हस्तान्तरित करेंगे तो उन के देहान्त के समय पिताजी के पास चार में से दो हिस्से अर्थात आधी संपत्ति होगी। आपको अपने पिता से इस आधी संपत्ति का एक तिहाई अर्थात कुल का 1-6 हिस्सा प्राप्त होगा और भाई बहनों को भी। उन के पास का एक चौथाई पहले का मिला कर 5/12 प्रत्येक के पास हो जाएगा।

प यह सब हिसाब ठीक से लगा लें और फिर निर्णय करें कि आप को क्या करना है। कहीं ऐसा न हो कि आप को जो ¼ हिस्सा अभी मिला है आप उसे पत्नी से बचाने का उपाय करने की जुगाड़ में उस से भी वंचित हो जाएँ।

उत्तराधिकार में प्राप्त मकान के पंजीयन की कोई आवश्यकता नहीं है।

house lockedसमस्या-

अंकित ने इन्दौर, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

म जिस मकान में रहते है वो मेरे दादाजी ने सन १९५८ में ख़रीदा था। मेरे दादाजी के चार बेटे हैं। दादाजी की वसीयत के मुताबिक उस मकान के चार हिस्से हुए जो कि चारों बेटो में बांट दिए जिस में से एक हिस्सा मेरे पिताजी को भी मिला और उस हिस्से में हम रहते हैं। बाकि तीनो भाई अपने-अपने हिस्से में उस मकान में कभी नहीं रहे। मेरे पिताजी का देहांत हो चुका है और अब मैं उस हिस्से को जो की मेरे पिताजी को मिला था उसे अपने नाम पर रजिस्टर्ड कराना चाहता हूँ। दादाजी और दादीजी का भी देहांत हो चुका है कृपया सुझाव दीजिये।

समाधान-

प के दादा जी ने मकान खरीदा था। उस का विक्रय पत्र आप के पास होगा। यदि नहीं है तो उस की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त की जा सकती है। वसीयत से उस का एक हिस्सा आप के पिताजी को प्राप्त हुआ है। वसीयत आप के पास होगी अन्यथा उस की प्रमाणित प्रति अपने पास रखिए। पिताजी की मृत्यु के उपरान्त मकान का पिताजी का हिस्सा उन के सभी उत्तराधिकारियों के हिस्से में आ चुका है। अर्थात आप की माताजी और भाई बहन यदि कोई हों तो उनका हिस्सा भी उस में है। यदि कोई नहीं है तो मकान का हिस्सा स्वतः ही आप के नाम है। यदि मकान इन्दौर में है तो आप नगर निगम में आवेदन दे कर उस हिस्से को अपने नाम करवा सकते हैं। इस तरह मकान आप को उत्तराधिकार में मिला है उस के लिए किसी प्रकार के रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है।

दि आप की माताजी, भाई बहन भी हैं तो उन का हिस्सा भी मकान में आप के पिता वाले हिस्से में हिस्सा है। यदि आप के अतिरिक्त मकान के उस हिस्से के हिस्सेदार अपने हिस्से को को आप के नाम रिलीज करते हुए रिलीज डीड पंजीकृत करवा दें तो मकान के आप के पिता वाले हिस्से के आप एक मात्र स्वामी हो जाएंगे। उक्त सब दस्तावेजों के आधार पर आप इन्दौर नगर निगम में मकान के उक्त हिस्से का नामान्तरण करवा सकते हैं।

संयुक्त संपत्ति में हिस्से की वसीयत की जा सकती है।

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियमसमस्या-

राजेश कुमार ने कटिहार, बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरी माँ के नाम से दो घर व खेती की जमीन है। यह मेरे पिता जी ने अपनी कमाई से खरीदा है। मेरी माँ का देहान्त 15 फरवरी को हो गया है। मेरी चार बहनें विवाहित हैं, बड़े भाई और मैं भी विवाहित हूँ। मेरे पापा की भी उम्र हो चुकी है। पर भैया हमेशा पैसा बरबाद करते रहते हैं क्यों कि उन्हें शराब और जुआ की गन्दी लत है। पापा अब चाहते है कि जमीन की वसीयत मेरे नाम हो जाए जिस से बड़े भाई बेच नहीं सकें।

समाधान-

हुत देर हो चुकी है। संपत्ति आप की माता जी के नाम से है। इस कारण उन की मृत्यु के साथ ही उस का उत्तराधिकार तय हो चुका है। आप के पिता जी, चार बहनें और दो भाई कुल 7 उत्तराधिकारी हैं। अब समूची संपत्ति में इन सभी के 1/7 हिस्से हैं। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-30 के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति किसी संयुूक्त, पुश्तैनी या सहदायिक संपत्ति में अपने हिस्से की वसीयत सकता है। आप के पिता जी यदि वसीयत करते हैं तो वह वसीयत केवल उन के 1/7वें हिस्से पर प्रभावी होगी। यदि वे वसीयत से अपना हिस्सा आप के नाम कर दें और आप की बहनें अपना हिस्सा रिलीज डीड निष्पादित कर उन का हिस्सा आप के नाम रिलीज कर दें तो आप के पास संपत्ति का 6/7वाँ हिस्सा हो जाएगा। आप के भाई के पास केवल उस का 1/7वाँ हिस्सा रह जाएगा। आप चाहें तो यह व्यवस्था कर सकते हैं। जो बेहतरीन तरीका है।

दि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी या बेटी के नाम से संपत्ति खरीदता है तो यह माना जाता है कि वह संपत्ति उस के हित के लिए खरीदी गयी है। यदि यह साबित कर दिया जाए कि यह संपत्ति आप के पिता ने पत्नी के हित के लिए खरीदी थी और उस का देहान्त हो चुका है जिस के कारण वह संपत्ति उन की स्वयं की हो गयी है तो वे समूची संपत्ति की वसीयत कर सकते हैं। पर इस वसीयत को आप के भाई द्वारा न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। इस से मुकदमे बाजी बढ़ेगी और व्यर्थ समय जाया होगा। फिर यह मुकदमा भी जटिल होगा उस में यह साबित करना होगा कि संपत्ति पिता ने अपनी निजि आय से पत्नी के हित के लिए खरीदी थी और पत्नी की मृत्यु से वे उस के असल स्वामी हो गए हैं। इस तरह के मामले कम देखने में आए हैं और अभी तक इस तरह के मामलों में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की नजीरें भी देखने को नहीं मिली हैं। इस कारण हमारी राय में आप के लिए पहला वाला उपाय ही ठीक है। पिता अपने हिस्से की वसीयत आपके नाम कर दें और बहनें सम्पति को आप के नाम रिलीज कर दें।

हिस्सा छोड़ने व पाने के लिए रिलीज डीड निष्पादित कराएँ।

basement constructionसमस्या-

संजीव अग्रवाल ने जौनपुर उत्तरप्रदेश से पूछा है-

मेरे पिताजी दो भाई हैं। मेरे ताउजी का देहांत हो चूका है। हमारे परिवार की कईअचल संपत्तियां हैं। जिन का बटवारा नहीं हुआ है। एक भूमि जिसका एरिया 4059वर्ग मीटर है, जिसका आधा हिस्सा मेरे ताऊजी के चार बेटों के नाम है एवंआधा हिस्सा मेरे पिताजी के नाम है। हम तीन भाई हैं। इस तरह कुल भूमि का एकबटा छह भाग मेरे हिस्से का है। मैं उक्त भूमि पर एक व्यावसायिक निर्माणकरना चाहता हूँ। मेरे चचेरे भाई उक्त भूमि के अपने हिस्से को मुझे बेचने कोराजी हैं एवं मेरे पिताजी एवं मेरे भाई अपने हिस्से का हक़ मुझे देना चाहतेहैं जिस के बदले दूसरी प्रॉपर्टी में मैं अपना हक़ उन दोनों भाइयों के हक़में करना चाहता हूँ। कृपया उक्त सम्पत्तियों के दस्तावेज किस तरह से तैयारकरें जिस से जिससे कम से कम स्टाम्प शुल्क देना पड़े।

समाधान-

जिस संपत्ति पर आप व्यवसायिक निर्माण करना चाहते हैं उस में आप का खुद का कोई हक आप नहीं बता रहे हैं। यदि यह सही है तो फिर उक्त संपत्ति आप के नाम दानपत्र या विक्रय पत्र द्वारा ही हस्तान्तरित की जा सकती है जिस में आप को पूरी स्टाम्प ड्यूटी अदा करनी होगी। यह सब से सुरक्षित है।

लेकिन यह संपत्ति आप ताऊजी के पुत्रों और पिताजी के नाम बता रहे हैं जिस से प्रतीत होता है कि यह संपत्ति पूर्व में आप के दादा जी के नाम थी और हो सकता है उस के पहले परदादा जी के नाम रही हो। इस से लगता है कि यह संपत्ति पुश्तैनी है। यदि ऐसा है तो उस में आप का अपना भी हिस्सा है। आप का यह हिस्सा कितना हो सकता है और कितना नहीं इस का पूरा आकलन केवल आप के परिवार के वंशवृक्ष (शजरा) तथा भूमि के स्वामित्व के दस्तावेजों को देख कर ही बताया जा सकता है।

प को चाहिए कि आप किसी स्थानीय वकील से इन दस्तावेजों के साथ मिल कर उस से सलाह लें। यदि वह इस भूमि में आप का हिस्सा निर्धारित करने में सफल रहा तो फिर शेष हिस्सेदार अपने हिस्से को आप के नाम रिलीज डीड निष्पादित कर रिलीज कर सकते हैं। उसी तरह आप अपने हिस्से की जिस संपत्ति को भाइयों को देना चाहते हैं उस में अपना हिस्सा भाइयों के नाम रिलीज कर सकते हैं।

अन्य हिस्सेदारों के हिस्से रिलीज कराएँ या खरीद कर अपने नाम कराएँ।

lawसमस्या-

रंजन कुमार ने बरौनी, बिहार से पूछा है-

मेरे दादा जी के 6 लड़के एवं 2 लड़कियाँ हैं। 2 लड़कों (मेरे पिताजी और 1 चाचाजी) की मौत हो चुकी है। दादीजी अभी जिंदा हैं। संपत्ति का बँटवारा अभी तक नहीं हुआ है। मेरे नौकरी करने और विवाह होने पर दादाजी ने अपने नाम की ज़मीन पर, जो उन्हे उनके चाचाजी से गिफ्ट मिला था, मेरे लिए घर बनवा दिया। जिस के लिए पैसा मैं ने दिया था। दादाजी मेरे नाम से कोई कागज तैयार नहीं करवाया। घर के बने हुए 7 साल और दादाजी के मरे हुए 5 साल से अधिक हो गये हैं। घर मेरे कब्ज़े में है। यद्यपि मैं नौकरी के कारण घर से बाहर बंगाल में रहता हूँ। मैं उस ज़मीन का मालिकाना हक़ पाना चाहता हूँ तथा सरकार के करों का उचित भुगतान करना चाहता हूँ। इस के लिए मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

संपत्ति दादाजी को गिफ्ट में प्राप्त हुई थी और उस पर उन का व्यक्तिगत स्वामित्व था। उस पर उन्हों ने आप से मकान बनवाने के लिए कहा और आप ने बना लिया। हो सकता है कि आप के पास इस बात के सबूत हों कि मकान आप ने बनवाया है। लेकिन उन के देहान्त के उपरान्त उस गिफ्ट में मिली जमीन के उत्तराधिकारी तो सभी छह लड़के और दो लड़कियाँ हैं। छह लड़कों में से जिन दो का देहान्त हो चुका है उन के हिस्से पर उन की पत्नियों और संन्तानों का उत्तराधिकार है। इस तरह उक्त भूखंड अविभाजित हिन्दू परिवार की संपत्ति है।

स संपत्ति के आप के नाम होने का एक ही तरीका है कि अविभाजित परिवार के शेष सदस्य आप के नाम उक्त मकान में अपने हकत्याग की डीड निष्पादित कर पंजीकृत करवा दें। आप को इस के लिए सभी को मना कर यह काम करवाना होगा। जब तक यह काम न हो तब तक आप कब्जा बनाए रखें। आप सभी अन्य हिस्सेदारों को उस जमीन में उन के हिस्से की कीमत आँक कर उस का भुगतान कर उन का हिस्सा खरीद भी सकते हैं। यदि ऐसा करते हैं तो आप को हिस्सा खरीद के विलेख का पंजीयन करवाना चाहिए।

शेष उत्तराधिकारी माँ के नाम अपने हिस्से की रिलीज डीड निष्पादित कर दें।

real5समस्या-
राघवेन्द्र दीक्षित ने लुधियाना पंजाब से पूछा है-

मेरे पिता जी ने 18-19 साल पहले 200 गज़ ज़मीन खरीदी थी जिस में से बाद में 50 गज़ ज़मीन मेरी माता जी के नाम पर कर दी। लेकिन 7 साल पहले 2006 दिसम्बर में पिता जी की दिमागी हालत खराब होने की वजह से वे घर से चले गये और अभी तक वापिस नहीं आए। हम ने पोलीस स्टेशन मे उन के गायब होने की रिपोर्ट भी दर्ज करवा दी थी। पुलिस ने एक सादे कागज पर गायब होने की रिपोर्ट लिख कर हमें प्राप्ति रसीद दे दी थी और हमने अपनी तरफ से भी बहुत ढूंढने की कोशिश की पर उन का कहीं पता नहीं चला। उन की जो 150 गज़ ज़मीन लुधियाना में है वह मैं माता जी के नाम करना चाहता हूँ। इस क़ानूनी प्रक्रिया में मुझे कौन से दस्तावेज़ो की ज़रूरत पड़ेगी और हम इसे किस तरह से करवा सकते हैं। जब पिता जी ने ज़मीन ली थी तो किसी को भी नॉमिनी नहीं बनाया था और बाद में भी नही बनाया था।

समाधान-

प के पिता जी के नाम जो जमीन है वह केवल आप के पिता ही आप की माता जी के नाम करवा सकते थे। अब आप के पिता जी को लापता हुए 7 वर्ष हो चुके हैं। इस कारण से यह अनुमान किया जा सकता है कि वे अब जीवित नहीं हैं। आप पुलिस को जो सूचना दी थी उस की प्राप्ति रसीद की प्रति के साथ तथा आप के व माता जी के शपथ पत्र के साथ उन के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर दीजिए। आम तौर पर इस तरह मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया जाता है। यदि मृत्यु प्रमाण पत्र बन जाता है तो उस के आधार पर पिता जी की संपत्ति उत्तराधिकार में आप को, आप की माता जी को तथा आप के भाई-बहनों को स्वतः ही प्राप्त हो जाएगी। यदि जन्म मृत्यु पंजीयक मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए दीवानी अदालत की डिक्री चाहेगा तो फिर आप को पिता जी को मृत घोषित करवाने के लिए दीवानी न्यायालय में घोषणा का वाद संस्थित कर के डिक्री प्राप्त करनी होगी।

 एक बार मृत्यु प्रमाण पत्र बन जाने के बाद आप और यदि आप के भाई बहिन भी हों तो वे सब मिल कर अपनी माता जी के नाम उक्त जमीन के अपने हिस्से को रिलीज करते हुए रिलीज डीड निष्पादित कर उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत करवा लें। इस तरह वह भूखंड आप की माता जी के नाम हो जाएगा।

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