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किराया बढ़ाने के लिए अदालत में वाद संस्थित करें।

rental-agreementसमस्या-

सैफ उल्लाह खान ने बरेली उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मैं ने अपने कुछ गोदाम 800 माहवार पर 2001 से 2006 के मध्य 11 माह किराये के एग्रीमेंट पर दिए। जिस पर एक लाइन यह लिखी कि यदि किरायेदार अपनी किरायेदारी आगे भी कायम रखना चाहेगा तो हर 3 साल के बाद किराये में 10% कि वृद्धि करेगा। आज 10 साल से अधिक हो जाने के बाद भी किराया केवल 1100-1200 तक ही पहुँच पाया है जबकि मार्किट वैल्यू इस समय 2500-3000 है। मैं आपसे ये जानना चाहता हूँ कि क्या इस एग्रीमेंट में एक लाइन हर 3 साल के बाद किराये में 10% कि वृद्धि लिखने से ये तमाम उम्र (मेरी अगली कितनी पीढ़ी तक) वैध हो गया या इस एग्रीमेंट को मैं 5,10 या 15 साल बाद नवीनीकृत करवा सकता हूँ। क्यों कि किरायेदार मुझे हमेशा 3 साल के बाद किराये में 10% कि वृद्धि का ही उल्लेख कर देता है।

समाधान-

क्या आप बता सकते हैं कि आप ने किरायानामा केवल 11 माह की अवधि का ही क्यों कराया? और बाद में तीन साल और किराया वृद्धि की बात क्यों अंकित कर दी गयी? इस का जवाब आप को पता नहीं, बस सब लोग 11 माह का किरायानामा लिखाते हैं तो आपने  भी लिख दिया। सड़क पर, अदालत के आसपास अनेक टाइपिस्ट अपनी मशीनें कम्प्यूटर लिए बैठे हैं, उन के पास किराएनामे के ड्राफ्ट हैं। आप भी उन के पास गए और टाइप करवा लिया तथा नोटेरी से अटेस्ट करवा कर काम पूरा कर लिया। भाई जब पहली बार किरायानामा लिखवा रहे थे तो किसी ढंग के वकील से बात करते। एग्रीमेंट में अंकित एक एक शब्द का अर्थ समझने की कोशिश करते तो यह परेशानी नहीं होती।

ग्यारह मार का किरायानामा मात्र इस कारण लिखाया जाता है कि एक वर्ष का होते ही किरायानामा उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत कराना जरूरी हो जाता है वर्ना उसे साक्ष्य में पढ़ने योग्य नहीं समझा जाता है। उस पर स्टाम्प ड्यूटी भी अधिक लगती है। इन सब से बचने के लिए किरायानामा 11 माह का लिखाया जाता है। फिर यह किरायानामा तो 11 माह के बाद समाप्त हो गया। उस के बाद से वह किराएनामे के कारण नहीं बल्कि किराया कानून के कारण किराएदार है। किराया कानून में यह अंकित है कि किराया बाजार दर के अनुसार कराने  के लिए दावा किया जा सकता है और न्यायालय किराया निर्धारित कर सकता है।

आप को चाहिए कि आप किसी स्थानीय वकील से सलाह ले कर किराया बढ़ाने के लिए वाद संस्थित करें। और इस काम में जल्दी करें क्यों कि किराया उसी तारीख से बढ़ाया जाएगा जिस तारीख को आप वाद न्यायालय में प्रस्तुत कर देंगे।

मकान मालिक किराया बढ़ाने को कहता है क्या करें?

for Rentसमस्या-
गौरव पाटनी ने मालवीय नगर जयपुर से पूछा है-

मैं ने सितम्बर 2012 में एक दुकान 2000/- रुपया प्रतिमाह में किराए पर ली थी। मकान मालिक ने मौखिक आश्वासन दिया था कि वह दो वर्ष तक किराया नहीं बढ़ाएगा। लेकिन उन्हों ने 2 वर्ष पूरे होने के पहले किराया 500 रुपया प्रतिमाह बढ़ा दिया। अब मकान मालिक का देहान्त हो गया है और उस की लड़की मकान की देखरेख करती है। वह फिर किराया बढ़ाने के लिए कह रही है। वह कोई किरायानामा लिखने को भी तैयार नहीं है। वह 2500/- रुपए पर 10% किराया बढ़ाना चाहती है। मैं किराया नियमित रूप से अदा कर रहा हूँ। उस की तीन दुकानें हैं, एक खुद उस के पास है एक उस के मित्र के पास है पहले एक किराएदार से कमरा खाली कराने के लिए उस के मित्र ने एक रात बहुत न्यूसेंस किया था। पुलिस उसे थाने भी ले गई थी लेकिन राजनैतिक पहुँच के कारण दूसरे दिन ही वह वापस आ गया। मैं नियमित रूप से किराए की रसीदें ले रहा हूँ। कृपया मुझे बताएँ कि मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

राजस्थान के जिला मुख्यालयों पर राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम-2001 प्रभावी है। मकान मालिक और किराएदार के बीच के संबंध और जरूरी शर्तें इस अधिनियम से प्रभावी हैं। इस अधिनियम की हिन्दी व अंग्रेजी की द्विभाषी प्रति कानून की किताबों की दुकान पर 100 रुपए से भी कम कीमत पर उपलब्ध है। प्रत्येक उस व्यक्ति को जो किराएदार है या ऐसा भूस्वामी है जो अपनी संपत्ति को किराए पर देता है या देने की इच्छा है, यह पुस्तक खरीद लेनी चाहिए। जिस से उसे किराएदार और मकान मालिक के बीच के कानूनी संबंधों के बारे में जानकारी हो सके और जब भी कभी जरूरत हो उस किताब से स्वयं निर्देश प्राप्त कर सके।

स कानून के अध्याय-2 धारा 6 व 7 में यह निश्चित किया गया है कि किराया प्रतिवर्ष कितना बढ़ाया जा सकता है। यदि किराएदार इस कानून के अनुसार प्रतिवर्ष किराया बढ़ाने से इन्कार करे तो मकान मालिक और यदि मकान मालिक किराया अधिक बढ़ा कर देने का आग्रह करे तो किराएदार किराया अधिकरण में आवेदन प्रस्तुत कर कानूनी किराया तय करवा सकता है।

प ने जिस तिथि को दुकान किराए पर ली थी उस के ठीक एक वर्ष बाद कानून के अनुसार उस के किराए में 5% की वृद्धि होनी चाहिए थी। अर्थात सितम्बर 2013 से किराया 2000 के स्थान पर 2100 हो जाना चाहिए था। इसी तरह सितम्बर 2014 में 2200 होना चाहिए। अर्थात आप बेसिक किराए का 5% प्रत्येक वर्ष बढ़ाएंगे। यहाँ बेसिक किराया वही है जिस पर आप ने दुकान पहले पहल किराए पर ली है। दस वर्ष तक किराया बढ़ाने की दर यही रहेगी। लेकिन दस वर्ष बाद बढ़ा हुआ किराया बेसिक में शामिल हो कर नया बेसिक बन जाएगा। आप के मामले में सितम्बर 2022 के पहले यह किराया 3000 प्रतिमाह हो जाएगा जो नया बेसिक होगा। सितम्बर 2022 में आप को किराए में 150 रुपए प्रतिमाह की वृद्धि करनी होगी। इस तरह सितम्बर 2022 से यह किराया 3150 होगा इसी तरह सितम्बर 2023 से यह किराया 3300 प्रतिमाह हो जाएगा।

ब यदि आप का मकान मालिक दुकान का किराया बढ़ाने को कहता है तो आप उस से झगड़ा न करें। किराया बढ़ा कर दें, लेकिन रसीद तुरन्त प्राप्त करें। क्यों कि मकान मालिक ने किराया कानून के खिलाफ बढ़ाया है इस कारण आप किराया पूनरीक्षण के लिए किराया अधिकरण में आवेदन करें कि आप का किराया निर्धारित किया जाए। इस काम के लिए आप को किसी स्थानीय वकील की सहायता प्राप्त करनी होगी।

छह माह से अधिक का किराया बकाया होते ही किराया वसूली और मकान/दुकान खाली करने का दावा करें।

Shopsसमस्या-
विपिन कुमार पाण्डे ने मेहर जिला मध्य प्रदेश से पूछा है-

मेरे किराएदार का सन 2007 में देहान्त हो गया है। मृत्यु के उपरान्त मैं ने उस के दोनों लड़कों से जब भघी दुकान को खाली करने को कहा तो दोनों लड़के टालमटोल कर रहे हैं। वे किराया भी नहीं दे रहे हैं। कई बार कहने पर भी बात को अनसुना कर देते हैं। बात करने जाता हूँ तो हील हवाली करने लग जाते हैं। अब मैं क्या करूँ?

समाधान-

प बड़े कमाल के दुकान मालिक हैं। किराएदार सात साल से किराया नहीं दे रहे हैं और आप सिर्फ उन से बात कर के आ जाते हैं। इतने वर्ष उन्हों ने गुजार दिए हैं फिर भी आप बात का ही सहारा ले कर बैठे हैं। आप को उन से दुकान खाली कराने के लिए तुरन्त कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए।

प का नगर एक छोटा कस्बा है। हमारे पास यह जानने का साधन नहीं है कि वहाँ मध्यप्रदेश स्थान नियंत्रण अधिनियम 1961 प्रभावी है अथवा नहीं। फिर आप की दुकान के मामले में प्रभावी है या नहीं। यदि यह प्रभावी है तो आप को इस कानून के अन्तर्गत किराया वसूली और दुकान खाली कराने के लिए किसी वकील से नोटिस दिलवा कर न्यायालय में दावा दाखिल करना चाहिए। यदि यह प्रभावी नहीं है तो संपत्ति हस्तान्तरण अधिनियम के अन्तर्गत लीज को समाप्त करने का नोटिस दे कर बकाया किराए और दुकान के कब्जे के लिए कार्यवाही करनी चाहिए।

क्सर लोग यह सोच बैठते हैं कि इस तरह का मुकदमा करने पर बरसों लग जाएंगे और दूसरे तरीके आजमाते रहते हैं और कभी कभी इतने वर्ष निकल जाते हैं जितने साल में तो कानूनी तरीके से दुकान का कब्जा मिल जाए और किराया भी वसूल हो जाए। इस कारण से यदि आप का किराएदार छह माह से अधिक का किराया बकाया कर दे तो उसी समय किराया वसूली और दुकान मकान खाली कराने के लिए दावा कर देना चाहिए। आप के मामले में भी अभी देरी नहीं हुई है। आप को तुरन्त किसी स्थानीय वकील से सलाह कर के दुकान खाली कराने और बकाया किराया वसूली का दावा कर देना चाहिए।

क्या मकान मालिक की अनुमति के बिना दुकान में हो रहा व्यवसाय बदला जा सकता है?

समस्या-

बीकानेर, राजस्थान से विमल शर्मा ने पूछा है-

मारे पास एक दूकान 35 साल से किराये पर है हम अब अपना काम बदलना चाहते हैं। क्या हमें दुकान मालिक मलिक से अनुमति प्राप्त करनी होगी?

समाधान-

clothshopप ने अपनी समस्या में केवल एक तथ्य बताया है कि आप 35 वर्ष से किसी परिसर (दुकान) में किराए पर हैं और परिसर में व्यवसाय कर रहे हैं।  आप ने अन्य तथ्य नहीं बताए हैं, जैसे आप वर्तमान में उक्त परिसर में क्या व्यवसाय कर रहे हैं और उसे बदल कर क्या व्यवसाय करना चाहते हैं? आप ने यह भी नहीं बताया कि 35 वर्ष पहले जब दुकान किराए पर ली गई थी तब या उस के बाद अब तक कोई किरायानामा लिखा गया था या नहीं? यदि कभी कोई किरायानामा लिखा गया था तो उस में या एक से अधिक लिखे गए थे तो अंतिम किराएनामे में इस तरह की कोई शर्त है या नहीं जिस से आप को उस परिसर में केवल मात्र कोई एक विशेष प्रकार का अथवा कुछ विशेष प्रकार के व्यवसाय करने के लिए लिए ही परिसर किराए पर दिया गया हो तथा अन्य किसी प्रकार का व्यवसाय करने पर प्रतिबंध लगाया गया हो? इस तरह इन सूचनाओं के अभाव में आप को कोई मुकम्मल विधिक राय दिया जाना संभव नहीं है।

र्तमान में राजस्थान में राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 दिनांक 1 अप्रेल 2003 से प्रभावी है।  इस अधिनियम में इस तरह का कोई प्रतिबंध किरायेदार पर नहीं लगाया है कि किराए पर लिए गए परिसर का उपयोग वर्तमान उपयोग से भिन्न प्रयोजन के लिए उपयोग नहीं कर सके। लेकिन इस अधिनियम की धारा 9 (घ) में यह उपबंधित किया गया है कि यदि किराएदार ने ऐसा कोई न्यूसेंस पैदा किया हो या ऐसा कोई कार्य किया हो जो उस प्रयोजन से असंगत हो जिस के लिए उस परिसर को किराए पर दिया गया था या जिस के कारण भू-स्वामी के हित पर प्रतिकूलतः और सारतः प्रभाव पड़ता हो तो ऐसे कारण से भू-स्वामी अपना परिसर खाली करवाने का अधिकारी होगा।

Sweetsshopदि आप के व भू-स्वामी के मध्य किसी तरह का कोई किरायानामा लिखा गया हो और उस में यह शर्त हो कि आप उस परिसर में केवल मात्र कोई एक विशेष प्रकार का अथवा कुछ विशेष प्रकार के व्यवसाय ही कर सकते हैं, और आप उस व्यवसाय अथवा उन व्यवसायों के अतिरिक्त कोई अन्य व्यवासाय के लिए उस दुकान का उपयोग करने वाले हैं तो आप को व्यवसाय बदलने के पहले भू-स्वामी से लिखित अनुमति प्राप्त करनी होगी। यदि आप के बीच कोई कोई किरायानामा नहीं लिखा गया है तो आप उस परिसर में कोई भी व्यवसाय करने को स्वतंत्र हैं।

लेकिन किराएनामे पर कोई भी व्यवसाय करने की छूट मिली होने के बाद भी आप उस में कोई ऐसा व्यवसाय या काम नहीं कर सकते जिस से न्यूसेंस उत्पन्न होता हो या उस काम को करने से भू-स्वामी के हितों पर सारतः या प्रतिकूलतः प्रभाव पड़ता हो।

मारी राय में आप को दुकान में व्यवसाय बदलने के पहले अपने नगर के किसी वरिष्ठ दीवानी मामलों के वकील से राय करनी चाहिए।  उस की राय के उपरान्त ही आप को व्यवसाय बदलने के बारे में सोचना और निर्णय करना चाहिए।

किरायानामा अक्सर 11 माह की अवधि के लिए क्यों लिखा होता है?

समस्या-

जोधपुर, राजस्थान से प्रहलाद ने पूछा है –

मैं अपनी दुकान किराए पर देना चाहता हूँ। दुकान का किरायानामा 11 माह के लिए लिखाया जाए या पिर पाँच वर्ष के लिए? किराएदार जान-पहचान का है। पाँच वर्ष का किरायानामा बना लें तो कैसा रहेगा?

समाधान-

पंजीयन अधिनियम के अनुसार यदि किराएदारी एक वर्ष या इस से अधिक काल के लिए की जाती है तो ऐसा किरायानामा रजिस्टर्ड होना चाहिए। यही कारण है कि लोग ग्यारह माह का किरायानामा लिखाते हैं जिस से उस का पंजीयन नहीं कराना पड़े।  यही कारण है कि अधिकांश किराएनामें 11 माह की अवधि के लिए लिखे होते हैं।  पाँच वर्ष का किरायानामा लिखवाने पर आप को किरायानामा पंजीकृत कराना होगा तथा दो वर्ष के किराए की राशि के बराबर राशि की संपति के विक्रय पत्र पर निर्धारित स्टाम्प ड्यूटी अदा करनी होगी।  शायद स्टाम्प ड्यूटी के रूप में इतनी राशि देने पर किराएदार सहमत नहीं होगा।

लेकिन यदि किरायानामा पांच वर्ष की अवधि के लिए लिखा और पंजीकृत कराया जाता है और उस में यह शर्त होती है कि आप पाँच वर्ष के पूर्व आप दुकान को खाली नहीं करा सकेंगे। तो फिर आप केवल इस आधार पर कि किराएनामे की अवधि समाप्त हो गई है अपनी दुकान को खाली करवा सकते हैं।

क्या आज के हिसाब से किराया प्राप्त करने के लिए न्यायालय में अर्जी लगाई जा सकती है?

समस्या-

हाँसी, हरियाणा से हरीश कुमार ने पूछा है-

मने एक दुकान पिछले 25 वर्षों से किराये पर दे रखी है। इस दुकान का किराया आज भी केवल एक हज़ार रुपये मात्र है।  जबकि इस दूकान के साथ की दुकानों का किराया दस हज़ार रुपये के आस पास है।  इस से पहले मेरे पिता जी ने इस दुकान के लिए न्यायालय में केस लड़ा था तब केवल 700 रुपये किराया मुकर्रर हुआ था जो की आज 1000 रुपये हो चुका है।  क्या मैं आज के किराये के हिसाब से किराया प्राप्त करने के लिए न्यायालय में अर्जी लगा सकता हूँ?

समाधान-

ह सही है कि मकानों व दुकानों के किराए में वृद्धि होती रहती है और उस के अनेक कारण होते हैं। कोई बाजार अधिक व्यस्त होता है तो उस में स्थित दुकानों का किराया बहुत बढ़ जाता है।  नई दुकानों के किराए अत्यधिक होने का कारण यह भी होता है कि किसी बाजार में दुकानों की उपलब्धता बिलकुल नहीं होती या फिर नहीं के बराबर होती है।  तब कोई दुकान उपलब्ध हो जाने पर उसे किराए पर लेने वाले बहुत होते हैं और वह बहुत अधिक किराए पर उठती है।  लेकिन इस का अर्थ यह नहीं है कि पहले से जो किराएदार हैं वे भी नयी दुकान के समान किराया दें।

रियाणा में जो किराया कानून प्रभावी है उस में उचित किराया तय कराने का प्रावधान है। लेकिन एक बार न्यायालय द्वारा उचित किराया तय कर देने की तिथि से अगले पाँच वर्ष तक पुनः किराया बढ़ाने की अर्जी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की जा सकती है।  फिर किराया वर्तमान दर तक नहीं बढ़ाया जा सकता है। केवल महंगाई के बढ़ने की दर के अनुसार ही बढ़ाया जा सकता है। इस मामले में आप को स्थानीय वकील ही ठीक से बता सकते हैं कि यदि आप किराया बढ़ाने की अर्जी लगाएँ तो किराया कितना बढ़ाया जा सकता है। यदि आप के पिता द्वारा न्यायालय के माध्यम से किराया बढ़ाए पाँच से वर्ष से अधिक समय हो चुका है तो आप दुकान का किराया बढ़ाने के लिए न्यायालय में अर्जी प्रस्तुत कर सकते हैं।

लीज अवधि समाप्त होने पर बेदखली और कब्जे का वाद

समस्या-

मेरे पापा ने सन् 2000 में 11 बीघे जमीन एग्रीमेंट के माध्यम से 11 साल के लिये अखिलेस को दी थी।  उसने वहां पे एक होटल बनवाया और किराया देता रहा।  जब 11 साल बीत गये तो उसने उस जमीन को 5 साल के लिये फिर से जबरदस्ती एग्रीमेंट करवा लिया है।  क्या वह जमीन फिर से मिल सकती है?  उस जमीन का आगे एग्रीमेंट नहीं करेंगे। कया 16 साल बीत जाने के बाद वह जमीन हमारी हो सकती है?

-विनय पाण्डे, ग्राम काशीपुर, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश

समाधान-

प ने यह नहीं बताया कि एग्रीमेंट किस बात का था तथा कैसा था। इस तथ्य के अभाव में तथा एग्रीमेंट का अध्ययन किए बिना कोई पुख्ता उत्तर/सलाह दिया जाना संभव नहीं है। लेकिन आप के प्रश्न से ऐसा लगता है कि उक्त जमीन आप के पिता जी ने ग्यारह वर्ष के लिए अखिलेस को लीज पर दी थी। अब उसी लीज को पुनः पाँच वर्ष के लिए नवीकृत कर दिया गया है।

कोई भी संपत्ति किसी व्यक्ति को लीज पर दे दिए जाने से लीज पर लेने वाले की नहीं होती। वह उस के पास किराए पर होती है। लीज की अवधि समाप्त होने पर वह संपत्ति लीज पर लेने वाले व्यक्ति को मूल स्वामी को लौटानी होती है। यदि आप के पिता जी ने लीज को और पाँच वर्ष के लिए नहीं बढ़ाया होता तो अखिलेस को वह भूमि उस पर किए गए निर्माण सहित आप के पिता को लौटानी होती।

प के पिता 16 वर्ष व्यतीत हो जाने पर यदि पुनः लीज को न बढाएँ तो अखिलेस को उक्त भूमि उस पर बने होटल सहित आप के पिता को वापस लौटानी पड़ेगी। यदि वह लौटाने से इन्कार करता है तो आप के पिता अखिलेस के विरुद्ध लीज अवधि समाप्त हो जाने के आधार पर बेदखली का वाद प्रस्तुत कर सकते हैं और अपनी भूमि का कब्जा वापस प्राप्त कर सकते हैं।

परिसर का किराया बढ़ाने के लिए क्या किया जाए?

समस्या-

मारे घर में 25 व 28 वर्ष से दो किराएदार हैं। एक किराएदार द्वारा किराए में चूक करने के कारण उस से मकान खाली कराने का केस अदालत में चल रहा है।  3 साल हो गए हैं।  वह किराया हमारे बैंक खाते में जमा करवा रहा है।  किराए का कोई लिखित सबूत नहीं है। उस का किराया 2500 रुपया महिना था, वह हाउस टैक्स की रसीद को आधार बना कर उस में अंकित किराया 400 महिना ह्मारे बैंक खाते में जमा करवा रहा रहा है। उस से मौजूदा किराया कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

दूसरा किराएदार केवल 100 रूपया महिना किराया देता है किराया कहने पर भी नहीं बढ़ाता है।  उस के पास खुद का घर है, लेकिन सिर्फ पैसा वसूल करने के लिए कब्जा कर रखा है। उस के पास एक कमरा है। उस का किराया कैसे बढ़वाया जाए? किराएदारी मौखिक है उस का किराया भी हाउस टैक्स में 100 रुपया ही है। आज का मौजूदा किराया 2000 रुपए होना चाहिए। उस पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं कर रखी है। बताएँ हमें क्या करना चाहिए?

-रईस खान, जयपुर, राजस्थान

समाधान-

राजस्थान में नया किराया कानून 1 अप्रेल 2003 से लागू हुआ है। यह कानून पुराने कानून से अलग है। इस में किराए में चूक का आधार इस प्रकार है कि चार माह का किराया बकाया हो जाने पर मकान मालिक बकाया किराया अदा करने का नोटिस देगा जिस में वह अपना बैंक व खाते का विवरण (नंबर आदि) बताएगा। यह नोटिस प्राप्त होने के एक माह के अंदर यदि किरायेदार बकाया किराया अदा कर देता है या बैंक खाते में जमा करवा देता है तो किसी तरह की चूक नहीं मानी जाएगी। लेकिन यदि किराएदार एक माह में किराया अदा नहीं करता है या उस के बाद करता है तो फिर किराए में जो चूक होगी वह अक्षम्य होगी। इस चूक के आधार पर परिसर खाली करने का प्रमाण पत्र किराया अधिकरण जारी कर सकता है। यदि आप के किराएदार ने ऐसी ही चूक की है तो फिर आप समझिए आप का परिसर खाली होने की डिक्री आप को प्राप्त हो जाएगी। बस इतना ध्यान रखें कि मुकदमा लड़ने में आप की ओर से कोई चूक न हो।

प का कोई किराए का एग्रीमेंट न होने से दोनों किराएदार मूल किराया अदा न कर के आप के द्वारा हाउस टैक्स में प्रदर्शित किराया अदा कर रहे हैं। यदि आप ने हाउस टैक्स बचाने के लिए सही किराया प्रदर्शित किया होता तो ऐसा न होता। लेकिन आप के लिए किराया बढ़वाने का एक मार्ग है। नए कानून में यह प्रावधान है कि यदि किराया कभी न बढ़ाया हो तो परिसर किराए पर देने की तारीख से प्रत्येक वर्ष किराया पाँच प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है। दस वर्ष होने पर जो किराया हो गया है उस का पाँच प्रतिशत प्रतिवर्ष पुनः बढ़ाया जाएगा। यदि यह मान लिया जाए कि आप ने पहले किरायेदार को पच्चीस वर्ष पहले 400 रुपए प्रतिमाह पर किराए पर परिसर दिया था तो उस का किराया प्रतिवर्ष 20 रुपया बढ़ाए जाने पर दस वर्ष पश्चात 640 रुपए प्रतिमाह हो जायेगा। ग्यारहवें वर्ष में 640 रुपए का पाँच प्रतिशत 32 रुपया मासिक किराया प्रतिवर्ष बढ़ने लगेगा। इस तरह बीसवें वर्ष में किराया 384 रुपया बढ़ कर 1224 रुपया हो जाएगा तथा इक्कीसवें वर्ष से मासिक किराया 1224 का पाँच प्रतिशत अर्थात 61.20 रुपए प्रतिवर्ष बढ़ेगा और पच्चीसवें वर्ष में 1530 रुपए हो जाएगा। यदि आप किराया अधिकरण में किराया बढ़ाने का मुकदमा करें तो यह किराया आप को मिल सकता है। इस से अधिक किराया नहीं बढ़ाया जा सकता। इसी तरह आप दूसरे किरायेदार का किराया 28 वर्ष पूर्व 100 रुपया मान कर किराया बढ़ाने का मुकदमा कर सकते हैं। आप को बढ़ा हुआ किराया मुकदमा करने की तिथि से ही प्राप्त होगा इस के पहले का नहीं।

मेरी राय में आप को दोनों किराएदारों के विरुद्ध किराया बढ़ाने के लिए किराया अधिकरण के समक्ष तुरन्त अर्जी प्रस्तुत करना चाहिए।

क्या किराएदार को स्टे मिल सकता है?

समस्या-

मैं ने एक मकान 2011 में खरीदा था। जिसका मेरे पास फुल एण्ड फाइनल  एग्रीमेंट है, जो रजिस्टर्ड नहीं है। मैंने वह मकान किराये पर उसी आदमी को दे दिया जो उस मकान में पहले से किराये पर रहता था। किरायेदार ने बिजली का बिल नहीं भरा तो बिजली बोर्ड ने कनेक्शन काट दिया। जब मैंने किरायदार को मकान खाली करने को कहा तो उसने कोर्ट में दावा डाल दिया और कोर्ट से यथा-स्थिति बनाए रखने का आदेश हो गया। अगली तारीख जवाब के लिये लगी है। किरायेदार ने कोर्ट में दावा डाल कर उस मकान पर जो मीटर लगा हुआ था, कोर्ट की अनुमति से दुबारा लगवा लिया है, जिसमें कोर्ट ने जीने के अधिकार का हवाला दिया है। मुझे मीटर लगने के बाद पता चला। किरायदार के पास कोई किरायानामा नहीं है, न ही कोई रसीद है। कोर्ट फाइल में किरायदार ने 2011 से पहले के पत्र जो उपरोक्त मकान पर उसके नाम से आये हैं, वह पत्र लगा रखे हैं। जिस से मैंने मकान खरीदा था वह कभी मेरी तरफ तो कभी किरायदार की तरफ होता है। किरायदार ने पिछले ४-५ महीने किराया नहीं दिया है। क्या मैं उस मकान से बिजली का मीटर उतरवा सकता हुँ? क्या किरायदार को स्टे मिल सकता है? क्या मैं किराए के लिए कोई दावा डाल सकता हूँ? मैं ने विक्रय पत्र को पंजीकृत करवाने के लिए संविदा के विशिष्ठ पालन (specific performance) का दावा कोर्ट में डाल रखा है। उस दावे में किरायदार ने पार्टी बनने का आवेदन प्रस्तुत कर दिया है। कृपया मुझे बताएँ कि मुझे क्या करना चाहिए?

-हरीश रोहिल्ला, सोनीपत, हरियाणा

समाधान-

ब से पहले तो आप को यह समझना चाहिए कि आप ने अभी मकान खरीदा नहीं है, केवल मकान को खरीदने का एग्रीमेंट किया है। मकान के मालिक आप तब होंगे जब आप के नाम उस के विक्रय पत्र का पंजीकरण हो जाएगा।  आपने यह नहीं बताया कि मकान विक्रय करने वाला मकान के विक्रय पत्र का पंजीकरण क्यों नहीं करवा रहा है? खैर, आप ने उस के लिए संविदा के विशिष्ठ पालन का मुकदमा कर ही दिया है। लेकिन आप के प्रश्न से लगता है कि एग्रीमेंट के द्वारा मकान का कब्जा आप को मिल गया था।

प ने गलती यह की है कि पुराने किराएदार को ही फिर से किराए पर मकान दे दिया है। इस से वह स्वयं को पुराना किराएदार प्रदर्शित कर सकता है। चूंकि पूरा मकान उस के पास कब्जे में है इस कारण से बिजली का बिल न देने से बिजली कट जाना स्वाभाविक है और बिल जमा करने पर कनेक्शन फिर से जुड़ जाना भी स्वाभाविक ही है। इस के लिए आप को परेशान होने की जरूरत नहीं है। बिजली चालू रहने या बंद होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि किराएदार ने जो दावा न्यायालय में किया है उस में उस ने स्वयं को किराएदार बताया है अथवा नहीं। यदि उस ने स्वयं को किराएदार बताया है तो अच्छा है। क्यों कि एक किराएदार की हैसियत सदैव ही किराएदार की रहती है। लेकिन यदि वह किराएदार नहीं बताता तो फिर वह उस पर एडवर्स पजेशन का दावा भी कर सकता था।

प का किराएदार यदि किराया नहीं दे रहा है और चार-पाँच माह हो चुके हैं तो आप एक दो माह और प्रतीक्षा कर लीजिए। उस के बाद अपने वकील से सलाह ले कर किराया अदायगी में चूक के आधार पर और अन्य आधारों पर जो भी आप को उपलब्ध हों किराएदार से मकान खाली कराने का दावा करें। इसी दावे में आप बकाया किराया भी प्राप्त कर सकते हैं।

दि पूरा मकान किराएदार के पास है और वह बिजली का पैसा भर रहा है तो आप उस का बिजली का मीटर नहीं उतरवा सकते। लेकिन यदि उस के कारण बिजली का पैसा बकाया छोड़ रखा है तो आप न्यायालय में आवेदन कर बिजली का कनेक्शन हटवाने के लिए कार्यवाही कर सकते हैं लेकिन वह फिर से अपने नाम से कनेक्शन लेने की अनुमति न्यायालय से प्राप्त कर सकता है। किराएदार को स्टे सिर्फ इतना मिल सकता है कि आप उस से कानूनी कार्यवाही के बिना मकान खाली न कराएँ। संविदा की विशिष्ठ अनुपालना के दावे में किराएदार पक्षकार नहीं बन सकता, आप उस के आवेदन का विरोध कर सकते हैं और करना चाहिए।

पुलिस की मदद से किराए पर दिया कमरा खाली नहीं करवाया जा सकता

समस्या-

मने एक कमरा किराये पर दिया हुआ है ( ५-६ साल से ) ! शुरू के तीन चार वर्ष तो वो किराया समय पर देता रहा किन्तु अब न तो वो किराया ही समय पर देता है और न ही जगह खाली कर रहा है ! अब तो पिछले पांच महीनों से उसने किराया नहीं दिया है ! किरायेनामे में साफ़ लिखा है कि किराया न देने कि सूरत में उसे जगह खाली करनी होगी ! मुझे आपसे इस विषय पर राय चाहिए थी कि क्या हम किरायेनामे के आधार पर पुलिस कि मदद से जगह खाली करवा सकते हैं या फिर हमें अदालत में उस पर केस करना होगा ??? और यदि हम उस पर केस कर भी देते हैं तो क्या किराया न देने के आधार पर जगह खाली हो सकती है और वो भी कितनी देर में ??? कृपया उचित मार्गदर्शन करें !!!

-विवेक सिंह, लुधियाना, पंजाब

समाधान-

प ने कमरा किराए पर दिया है। आप दोनों के मध्य मकान मालिक व किराएदार का संबंध है। आप अपने किराएदार से मकान या तो उस की सहमति से खाली करवा सकते हैं या न्यायालय से डिक्री प्राप्त कर उस का निष्पादन करवा कर ही मकान खाली करवा सकते हैं। पुलिस आप की मदद सिर्फ तभी कर सकती है जब आप न्यायालय से कमरा खाली करवा लेने की डिक्री प्राप्त कर लें और वह अपील न करने के कारण या अपील न्यायालय से किराएदार की अपील खारिज हो जाने पर अंतिम हो जाए और आप निष्पादन कार्यवाही में न्यायालय से पुलिस मदद प्राप्त करने का आदेश प्राप्त कर लें। इस के पहले आप किराएदार से कमरा खाली नहीं करवा सकते

प के किराएदार ने पाँच माह से किराया नहीं दिया है। आप को चाहिए कि छह माह का किराया बकाया होने पर आप किराएदार को कानूनी नोटिस दे दें कि उस ने छह माह से किराया न दे कर किराया अदायगी में छह माह तक लगातार चूक की है और वह पन्द्रह दिनों में कमरा खाली कर के आप को सौंप दे अन्यथा आप कमरा खाली कराने के लिए न्यायालय में मुकदमा दायर करेंगे। अच्छा हो कि यह नोटिस आप किसी ऐसे वकील से दिलवाएँ जो किराएदारी के मुकदमों को लड़ने का अनुभव रखता हो। इस नोटिस के बाद उस के देने पर भी किराया न लें। मनिआर्डर से भेजने पर मनिआर्डर को भी वापस लौटा दें। यदि आप ने किराया प्राप्त कर लिया तो यह माना जाएगा कि आप ने उस के द्वारा किराया अदायगी में की गई चूक को माफ कर दिया है। जब आप द्वारा दिए गए कानूनी नोटिस की अवधि समाप्त होने पर मुकदमा अवश्य दाखिल कर दें।

प ने पूछा है कि मुकदमे के माध्यम से कितने दिन में कमरा खाली हो जाएगा? आप का यह प्रश्न बिलकुल बेमानी है। एक तो किसी भी मुकदमे की अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि जिस अदालत में आप का मुकदमा दर्ज होगा उस अदालत की स्थिति क्या है? उस में कितने मुकदमे लंबित हैं? आदि आदि। यूँ आम तौर पर भारत में अदालतों की संख्या बहुत कम है। यदि आप तीसरा खंबा का पिछला आलेख पढ़ेंगे तो आप को पता लगेगा कि भारत में दस लाख की आबादी पर केवल 13.5 जज हैं। जब कि विकसित देशों में दस लाख की आबादी पर जजों की संख्या 140 से 150 तक की है। इस कारण भारत में न्याय प्राप्त करने में देरी लगना स्वाभाविक है। देरी तो आप को लगेगी। आप इस काम के लिए जो वकील करेंगे वह आप को बता देगा कि जिस अदालत में मुकदमा लगेगा उस में निर्णय अक्सर कितने समय में हो जाते हैं। वह उस के बाद अपील में लगने वाला संभावित समय भी बता देगा। लेकिन आप को पास मुकदमा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। कमरा सिर्फ और सिर्फ मुकदमा दाखिल कर के प्राप्त की गई डिक्री के आधार पर ही खाली कराया जा सकता है। इस लिए जरूरी यह है कि यह सोचनें में समय व्यर्थ न किया जाए कि मुकदमा करने पर कितने दिन में कमरा खाली होगा। क्यों कि जितने दिन आप यह सोचने में बिताएंगे उतना समय और बढ़ जाएगा। आप को छह माह का किराया बकाया होते ही मुकदमा करने की प्रक्रिया आरंभ कर देनी चाहिए। हो सकता है नोटिस पर ही अथवा मुकदमा दाखिल होने पर ही किरायेदार कमरा खाली कर दे।

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