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विवाह के पूर्व जीवन के सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए।

समस्या-

दिशा शर्मा ने मुजफ्फरपुर उत्तरप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं ने 7.3.2017 को घऱ से छिप कर रजिस्टर्ड मैरिज की, दो साल से हमारे बीच प्यार था। उस का घर बनारस में बहुत दूर था, हम ट्रेन में मिले थे। हमने सोचा था कि एक साल बाद घर वालों को बताएंगे। मैं शादी के दिन ही घर आ गई किसी को पता नहीं चला। लेकिन मेरे पति ने शादी के 5 दिन बाद ही ड्रामा कर दिया। मेरे घर आ कर घरवालों और सभी रिश्तेदारों को धमकी और गालियाँ दीं। सोशल साइट पर मैरिज की फोटो डाल दी। मेरे घर पुलिस भी भेज दी कि मेरी पत्नी को मार रहे हैं। मुझे थाने जाना पड़ा। पूरे एरिया को पता चल गया। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि यह वही व्यक्ति है। मैंने उस से बात की तो कहने लगा उस ने ड्रिंक कर ली थी इस कारण यह सब हो गया। मेरे घर वाले बोले कि घर वालों के साथ आ कर विदाई करा लो। पर वह नहीं आया। उस का परिवार शादी के खिलाफ है उन्हों ने उसे घर से निकाल दिया है। वह फिर भी मेरे घर वालों को धमकी देता है। मैं ने उसे कहा है कि तुमने जो कुछ किया है उस के बाद मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकती। फिर वह मुझे बहुत बुरा भला बोला और फिर कहा कि ड्रिंक कर ली थी। अभी 100 नंबर पर काल कर के फिर से पुलिस भेज दी है। अभी धारा 9 का केस कर दिया है। मेरे पापा नहीं हैं, माँ है और दो छोटे भाई हैं। मामा मदद कर रहे हैं। मैं क्या करूँ आप बताएँ। मैं घर वालों के साथ रहना चाहती हूँ।

समाधान-

प शायद पहले भी अपनी समस्या लिख चुकी हैं। उसी दिन आप के श्रीमान जी ने भी हमें अपनी समस्या लिख भेजी थी। हम ने शायद दोनों को उत्तर भी दिया था या हो सकता है न दिया हो।

शादी इतनी हलकी चीज नहीं होती कि छोटी मोटी घटना से टूट जाए। इस कारण वह हलके में नहीं करना चाहिए। आपने केवल लड़के का बनावटी व्यवहार और बातों, वायदों पर ध्यान दिया। जिन्दगी के अन्य पहलुओं पर सोचा ही नहीं। माँ के बाद आप ही परिवार में जिम्मेदार व्यक्ति थीं। आप को अपनी माँ और छोटे भाइयों के बारे में सोचना चाहिए था। भाइयों के आत्मनिर्भर होने तक आप को परिवार को सपोर्ट करना था यह भी भूल गयीं। धारा 9 के प्रकरण में कुछ नहीं होगा। डिक्री भी हो जाएगा तो भी कोई जबरन आप को उस के साथ रहने को बाध्य नहीं कर सकता। अधिक से अधिक आप न जाएंगी तो उसे तलाक लेने का अधिकार मिल जाएगा। वह तो आप भी चाहने लगी हैं। लेकिन आप को भी तलाक के पहले खूब सोचना चाहिए। मेरी राय में अपने छोटे भाइयों के पैरों पर खड़े होने तक की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

विवाह से एक वर्ष तक की अवधि में तलाक का आवेदन नहीं दिया जा सकता। उस ने जो हरकतें की हैं वे क्रूरता की श्रेणी में आती हैं और विवाह का एक वर्ष पूर्ण होने पर इस आधार पर आवेदन दिया जा सकता है।

पत्नी से किसी तरह संपर्क साधने का प्रयत्न करें।

समस्या-

सूरज सिंह ने फ़ैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं ने 16 फरवरी 2017 को रजिस्ट्री ऑफीस और आर्य समाज मंदिर में बिना फॅमिली को बताए शादी की। उसी दिन वाइफ अपने घर गई और फिर आने से मना कर दिया। उस के घर वाले किसी कीमत पर नहीं चाहते कि हम साथ रहें।  वो उन की बात मान रही है। उस के घऱ वाले मुझे गाली देते हैं। मैं ने डिप्रेशन में आ कर शराब पी ली। और गालियाँ दे ली और उल्टा पुल्टा बोल दिया और शादी के फोटो उस के घर वालों की फेसबुक आईडी पर पोस्ट कर दिए। जब मुझे लगा कि उसे कहीं कुछ न हो जाए तो 100 नंबर पर फोन कर दिया और पुलिस को वहाँ भेज दिया। उस के घर वालों ने मेरा गाली  गलौच वाला फोन उसे सुना दिया। अब वो भड़क गयी। ना कोई बात करती है ना उस के घऱ वाले बात करते हैं। मैं अब क्या करूँ उस के बिना नहीं रह सकता। हमारे घरों में 700 किलोमीटर की दूरी है। और उस के घर के पास मेरा कोई नहीं। क्या वह उस रिकार्डिंग से डाइवोर्स ले सकती है? कुछ भी हो जाए पर मैं डाइवोर्स नहीं देना चाहता।

समाधान-

प बेकार घबरा रहे हैं। एक फोन काल रिकार्डिंग के आधार पर कोई तलाक नहीं हो सकता। यदि आप की शादी का पंजीकरण हो गया है तो या तो आप की पत्नी को अपना विवाह किसी तरह से अकृत कराना होगा या फिर आप से तलाक लेना होगा। दोनों काम अदालत में आवेदन किए बिना संभव नहीं हैं। उस का आप को नोटिस आएगा। आप चाहें तो प्रतीक्षा कर सकते हैं।

प्यार में मिलन ही नहीं होता, विछोह भी होता है। आप  ने प्यार किया और विवाह कर लिया। अब कुछ दिन विछोह के भी गुजारें। दो चार सप्ताह में बात पुरानी होने पर अपनी पत्नी से किसी तरह संपर्क साधने का प्रयत्न करें और हो सके तो बातचीत आरंभ करिए। उस का जो भी थोड़ा बहुत विश्वास टूटा है उसे फिर से जोड़िए। आप को लगे कि पत्नी में आप के प्रति थोड़ी भी सकारात्मकता है तो अदालत में धारा 9 का आवेदन लगाएँ, दाम्पत्य की पुनर्स्थापना के लिए।

बहिन को वापस उस के ससुराल कैसे भेजा जाए?

समस्या-

अनिल सिंह ने कन्नोज, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-


मेरी विवाहित बहन के कमरे और चेंजिंग रूम में ससुराल वालों ने सीसीटीवी कैमरा लगाया।  जिस पर विवाद हुआ और पुलिस को लिखित सूचना देने के बाद मैं उसको अपने घर ले आया। इसकी रिकॉर्डिंग है मेरे पास। दहेज़ उत्पीड़न और घरेलू हिंसा का मुकदमा कर दिया है।  परंतु मै चाहता हूँ कि किसी भी तरीके से मेरी बहन ससुराल पहुँच जाये। क्या मेरी बहन बगैर ससुराल वालों की मर्ज़ी के ससुराल में रह सकती है।


समाधान-

ह एक जटिल समस्या है। किसी भी घर में उस घर के स्वामी की इ्च्छा के विरुद्ध निवास करना संभव नहीं है। विशेष रूप से उस स्थिति में जब कि उस घर के स्वामी आप की बहिन पर इतनी निगाह रखते हों कि उस के निजी कमरे व चेंजिंग रूम में सीसीटीवी लगा कर रखते हों। यह तो ऐसा क्रूर कृत्य है जिस के आधार पर कोई भी स्त्री अपने पति से विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त की जा सकती है। सीसीटीवी कैमरे से प्राप्त वीडियों व चित्रों के माध्यम से आपकी बहन को आप की बहन के पति व उस के ससुराल वाले ब्लेकमेल कर सकते हैं और उसे किसी भी तरह का घिनौना कृत्य करने पर बाध्य कर सकते हैं।

आप की बहिन ने घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत मुकदमा किया है। इस अधिनियम की धारा 19 में निवास का आदेश दिए जाने की शक्ति मजिस्ट्रेट को प्रदान की गयी है। आपकी बहिन के आवेदन में इस तरह की प्रार्थना नहीं की गयी है तो आप की बहिन उक्त आवेदन में संशोधन के माध्यम से यह प्रार्थना कर सकती है कि उसे ससुराल में अपने कमरे में निवास करने से न रोका जाए। यदि परिस्थितियाँ ऐसी हों कि यह संभव न हो तो उसे ससुराल वालों, पति से ऐसा आवास उपलब्ध कराया जाए जिस में वह निवास कर सके।

इतना कुछ हो जाने के बाद आप की बहिन का क्या उस घर में रहना सुरक्षित होगा? इस प्रश्न पर विचार अवश्य करें। आप की बहिन धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम में भी दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना काआवेदन कर सकती है। धारा 125 दंड प्रकिया संहिता में भरण पोषण के आदेश के लिए आवेदन कर सकती है। तमाम परिस्थितियों में पति के साथ उस का रह पाना तभी संभव है जब कि आपसी सहमति बने। धारा9 के प्रकरण में न्यायालय इस तरह के प्रयत्न करता है। शायद उस से बात बन जाए। दोनों के बीच वैधानिक समझौता हो कर शर्तें तय हों तभी बहिन को ससुराल भेजना संभव हो सकता है।

पत्नी पर चरित्रहीनता का आरोप लगाना अत्यन्त गंभीर है, इस से पति मुसीबत में फँस सकता है।

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हिमांशु ने दिल्ली से पूछा है-

मेरी शादी को 7 महीने हुए हैं। मेरी वाइफ का किसी और के साथ चक्कर है, मेरे पास उसके सबूत हैं, और परसों ही उसके घर वाले उसको यहां से लड़ाई कर के ले गए हैं। मैं टाइम से पहले सेक्शन 9 हिन्दू मैरिज एक्ट के द्वारा उसके खिलाफ शिकायत करना चाहता हूँ सर प्लीज मेरी हेल्प’ कीजिये मुझे सेक्शन 9 हिन्दू मैरिज एक्ट के बारे में गाइड कीजिये।

समाधान-

हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 9 में यह उपबंध किया गया है कि पति या पत्नी में से कोई भी बिना किसी उचित कारण के दूसरे के साथ रहने से इन्कार करता है तो पीड़ित पक्षकार न्यायालय में आवेदन कर के दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन की डिक्री पारित करने की राहत की मांग कर सकता है।

इस मामले में पीड़ित व्यक्ति को आवेदन दे कर मात्र इतना साबित करना होता है कि उस के जीवन साथी ने बिना किसी उचित कारण से उस के साथ रहने से इन्कार कर दिया है और साथ नहीं रह रहा है। जब कि साथ रहने से इन्कार करने वाले साथी के पास इस आवेदन के बचाव में यह कथन है कि उस के पास अपने जीवन साथी का साथ छोड़ने और उस के साथ न रहने का उचित कारण है। लेकिन ऐसा उचित कारण साबित करने का दायित्व उस पक्षकार पर होता है जिस ने अपने साथी का साथ छोड़ा है।

आप के मामले में आप की पत्नी आप का साथ छोड़ कर गयी है तो आप धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 में न्यायालय के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। लेकिन पत्नी के बेवफा होने का कथन न करें। यदि आप ने ऐसा किया तो आप के द्वारा उस के चरित्र पर संदेह करना आप का साथ छोड़ने का मजबूत कारण बन जाएगा और धारा 9 के आवेदन में आप को कोई भी राहत प्राप्त नहीं हो सकेगी। आप को अपनी पत्नी से तलाक लेने के लिए विवाह के बाद उस का किसी अन्य व्यक्ति से यौन संबंध स्थापित करना साबित करना होगा। जो लगभग असंभव है और आप साबित नहीं कर सकेंगे। इस कारण से इस तरह की बात तभी कहें जब आप मजबूत साक्ष्य से पत्नी का दूसरे व्यक्ति के साथ विवाह के बाद यौन संबंध स्थापित करना साबित कर सकें।

पति या पत्नी को साथ रहने को कानून बाध्य नहीं कर सकता।

Desertedसमस्या-

ज्योतिका ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी को 25 साल हो चुके हैं. मेरा पति(49 वर्ष) कई लड़कियों से संपर्क रखता आ रहा है। अभी मोजूदा स्थिति में एक लड़की(30 वर्ष) से संपर्क बना रखा है। इस में मेरे पति के माता-पिता ने भी साथ दिया। वे दोनों नया मकान(जयपुर में) बनाकर रह रहे हैं। उस लड़की ने पहले से किसी अन्य व्यक्ति से शादी की हुई है। अब मेरे पति के साथ साल भर से है। मेरा पति सरकारी नौकरी में है। उस ने मुझ से तलाक़ माँगा था लेकिन मेने मना कर दिया। मैं जिस मकान में रह रही हूँ वो मेरे पति के नाम से है और मेरे इन-लॉज भी उसी मकान में रह रहे हैं सेपरटेली। उसे उसने बेचने की कोशिश की थी। उस पर मैं ने स्टे ले लिया और मुझे खर्चा पानी नहीं देने पर मेने भी दहेज और प्रताड़ना का केस मेरे पति पर दर्ज कर दिया जिस में ये गिरफ्तार भी हो गया और सस्पेंड भी हो गया था। इस से पहले रिश्वत लेने के चक्कर में भी दो बार सस्पेंड हो चुका है। अब मेरा आपसे ये प्रश्न है कि में उस नये मकान(जो मेरे फादर इन लॉ के नाम है) पर उस लड़की के खिलाफ कोई कार्यवाही कर सकती हूँ? नया मकान बनाते समय मुझे वहाँ जाने पर छह महीने के लिए न्यायालय द्वारा पाबंद कर दिया था और जब मैं ने पुलिस वालों से संपर्क किया तो पुलिस वालों ने मेरा साथ देने से इनकार कर दिया। लेकिन वो आज भी खुले आम रह रहा है। मेरे पास सबूत के तौर पर दोनों के साथ के कई फोटो हैं. मैं आपसे यह कहना चाहती हूँ कि मैं इस उम्र के पड़ाव पर इस आदमी के साथ ही रहना चाहती हूँ, डाइवोर्स नही चाहती।

समाधान-

प का और आप के पति का विवाह अभी तक सही सलामत है। पति ने विवाह विच्छेद का प्रयत्न किया लेकिन आप ने विरोध किया और विवाह विच्छेद नहीं हो सका। आप का विवाह कायम रहते हुए भी आप का पति अन्य स्त्रियों के संपर्क में रहा और अब भी रह रहा है। उसे आप का विवाह नहीं रोक सका। आप अपने पति को अपने साथ रहने को न प्रेरित कर सकीं और न ही बाध्य कर सकीं। आप अलग रहती हैं। आप का पति अलग रहता है। इसे ही आप साथ रहना कहती हैं तो ऐसा साथ चलाने में क्या परेशानी है। जहाँ तक कानून का प्रश्न है वह किसी भी पति-पत्नी को साथ रहने को कह सकता है लेकिन उन्हें साथ रहने को बाध्य नहीं कर सकता। यदि किसी एक की साथ रहने की इच्छा के बाद भी दूसरा साथ नहीं रहना चाहता तो उसे जबरन साथ नहीं रखा जा सकता। न्यायालय साथ रहने का आदेश दे भी दे और उस का पालन न हो तो उस से अधिक से अधिक यही लाभ मिल सकता है कि आप साथ न रहने के आधार पर विवाह विच्छेद करा ले। इस से अधिक कुछ नहीं।

प ने पूछा है कि आप उस लड़की के विरुद्ध क्या कार्यवाही कर सकती हैं? तो इस का उत्तर है आप कोई कार्यवाही नहीं कर सकतीं। किसी कानून में कोई प्रावधान ऐसा नहीं है जो आप के पति के साथ स्वेच्छा से रहने वाली लड़की के विरुद्ध किसी तरह की कोई कार्यवाही करने की अनुमति दे।

प की यह सोच सही हो सकती है कि उम्र के इस पड़ाव पर जब कि आप को कोई दूसरा साथी नहीं मिल सकता। आप अपने पति से अलग नहीं होना चाहती। लेकिन इस का नतीजा क्या है? न तो आप सुखी हैं और न ही आप का पति। आप कितने भी मुकदमे कर लें लेकिन आप के पति को आप के साथ नहीं रहना तो कोई भी उसे बाध्य नहीं कर सकेगा। आप इस विवाह में रह कर क्या प्राप्त कर रही हैं? अपने लिए रहने का घर और अपने लिए भरण पोषण। वह भी इतने सारे मुकदमे कर के और एक लंबी लड़ाई कर के।

प के पति ने जब आप से विवाह विच्छेद का प्रस्ताव किया था तब आप के पास अवसर था कि आप उस से रहने को घर और जीवन भर के लिए भरण पोषण की व्यवस्था की मांग कर सकती थीं। शायद वह इस पर तैयार भी हो जाता। रहने का घर आप सदैव के लिए अपने नाम करवा सकती थीं और भरण पोषण एक मुश्त राशि के रूप में ले सकती थीं। फिर आप का अपने पति से कोई ताल्लुक नहीं रह जाता और आप चैन से जैसा चाहती वैसा जीवन व्यतीत कर सकती थीं। उस में आज जितनी बैचेनी, भागदौड़ और परेशानियाँ शायद नहीं होतीं।

दि आप को ऐसा अवसर फिर भी मिले तो भी आप को इस अवसर को ठुकराना नहीं चाहिए। आखिर आप जीवन भर विवाह में रहते हुए अपने पति से नहीं लड़ सकतीं।ष किसी दिन आप को थक कर बैठना पड़ेगा और तब शायद आप के पति के पास आप को देने को घर और एक मुश्त भरण पोषण राशि भी नहीं होगी। पित उस की स्वअर्जित और पुश्तैनी संपत्ति से भी वसीयत के माध्यम से आप को वंचित कर सकता है। पित या उस के माता-पिता की संपत्ति पर आप का कोई अधिकार नहीं है। हमारी राय तो यही है कि आप अब भी जब भी अवसर आए। आवास और भरण पोषण प्राप्त कर विवाह को समाप्त कर लें। खुद भी अच्छा जीवन जिएँ और पति को उस के हाल पर छोड़ दें।

सब से पहले दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए आवेदन प्रस्तुत कराएँ…

father daughterसमस्या-

अनाम अग्रवाल ने होशंगाबाद मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे दोस्त की शादी जुलाई 2012 में हुई। उस की पत्नी का पहले से किसी और से अफेयर था। दोस्त की सास उन के घर में ज़्यादा इंटरफेयर करती थी। इसी बात में एक दिन उसकी पत्नी 12 जुलाई 2013 को अपने माँ बाप के घर चली गई। वहीं 3 महीने बाद सितम्बर 2013 में एक बेटे को जन्म दिया। दोस्त के घर वाले और दोस्त पत्नी को देखने भी गये और लाने की कहने पर भी पर दोस्त की सास ने नहीं लाने दिया। फिर करीब 6 महिने बाद दोस्त और उसकी पत्नी की बात शुरू हुई और वो अपने पति की शर्तों पर आने तो तैयार हो गई। दोस्त बच्चे के खातिर सब बातें भुला के उस को वापस ले आया। फिर अगस्त 2014 में राखी पर उसके मायके गई और वहाँ उसके एक्स-ब्वायफ्रेंड से मिलने के लिए रुक गई। मन से झूठी कहानी बना कर कह दिया कि मुझे ससुराल में पति मारते हैं और परेशान करते हैं, वह पति के साथ नहीं चाहती। मेरे दोस्त ने अपने बेटे के जन्म दिन पर उसे फ़ोन लगाया तो उस ने बेटे से नहीं मिलने दिया। दो दिन पहले ही उसकी बड़ी बहन के घर बेटे को ले कर चली गई और कहा कि यदि तुमने किसी को मेरे अफेयर का बताया तो मैं बेटे को जान से मार दूँगी। मेरे दोस्त ने उस की ये बातें अपने घर वालों को बता दीं लेकिन बदनामी के दर से उस के अफेयर का किसी को कुछ नहीं बता पा रहा है क्यों कि उसके पास कोई पक्का सबूत नहीं है। ना कोई कॉल रिकॉर्डिंग है। वह बहुत डिप्रेस्ड है किसी से कुछ बोल नहीं पा रहा है। वो क्या करे जिस से कि उस का एक वर्ष दो माह का बच्चा उसके पास आ जाए।

समाधान-

र्तमान परिस्थिति में किसी भी प्रकार से यह संभव नहीं है कि आप के मित्र का पुत्र उसे मिल जाए।

प के मित्र केवल संतान को चाहते हैं। लेकिन पत्नी को वह भी अपने पास नहीं रखना चाहते। पत्नी स्वयं भी नहीं आना चाहती है। स्थिति ऐसी है कि दोनों का संबंध टूटने की तरफ बढ़ रहा है। ऐसी अवस्था में आप के मित्र को तुरन्त दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अन्तर्गत आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए।

स के प्रतिवाद में पत्नी 406, 498 ए आईपीसी के अपराधों के लिए मिथ्या परिवाद प्रस्तुत कर सकती है और आप के मित्र कुछ परेशानी में पड़ सकते हैं। लेकिन केवल इन धाराओं में मुकदमा और गिरफ्तारी के भय से पुरुष कोई कार्यवाही नहीं करते हैं और देर हो जाती है। देर सबेर पत्नियाँ इन धाराओं के अंतर्गत कार्यवाही करती हैं तो तब बचाव करना भी कठिन हो जाता है। बचाव में सब से पहले धारा 9 का आवेदन प्रस्तुत करने की जरूरत पड़ती है। इस कारण यह अधिक अच्छा है कि धारा 9 का आवेदन तुरन्त प्रस्तुत किया जाए। उस का परिणाम देखा जाए। अभी आप के मित्र के पास पत्नी से विवाह विच्छेद का कोई आधार नहीं है। लेकिन यदि धारा 9 के आवेदन स्वीकार हो कर डिक्री मिल जाने के बाद भी एक वर्ष तक पत्नी और पति के बीच कोई संपर्क नहीं होता है तो उसी आधार पर विवाह विच्छेद भी हो सकता है। एक बार धारा 9 का आवेदन लंबित हो जाने पर पुत्र की अभिरक्षा के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है।

भाभी को उस के मायके वालों के बंदीकरण से छुड़ाने के लिए कार्यवाही करें..

समस्या-

यश छातर ने कैथल, हरियाणा से समस्या भेजी है कि-

domestic_violenceमेरे भाई की पत्नी ने मेरे भाई माँ बाप के खिलाफ 498A , 506 , 406 का एक मामला दायर किया हुआ है। जो कि तीन साल से कोर्ट में चल रहा है एक छोटे भाई को पुलिस जाँच में निकाल दिया गया था। वास्तविकता ये है कि मेरी भाभी को शादी के 3 -4 महीने बाद कुछ दौरे पड़ने लगे थे, वो कभी भी कही भी गिर जाती थी। जबकि ये दौरे शादी के पहले भी पड़ते थे पर हम ये प्रमाणित नहीं कर सकते। हम उसका इलाज करवाने के लिये मनोरोग विशेषज्ञ के पास ले गए वो एक बार तो वहाँ गयी उसके बाद जाने से मना कर गयी। काफी समझाने पर भी नहीं गयी! उस डॉक्टर की पर्ची हमारे पास है, उस के बाद फिर दूसरे मनोरोग विशेषज्ञ के पास ले गए वहां भी एक बार गयी, दोबारा नहीं। उसकी पर्ची भी हमारे पास है। जब उस को फिर से डॉक्टर के पास जाने के लिए कहा तो उस ने मिटटी का आयल पी लिया और उसका इलाज गाँव के ही एक बीएएमएस डॉक्टर ने किया! क्या बीएएमएस डॉक्टर की गवाही हो सकती है? क्यों कि उसी के कहने पर हम उसको मनोरोग विशेषज्ञ के पास ले गए थे! जब उस से इस का कारण पूछा तो बोली कि मुझे कुछ पता नहीं है, पता नहीं मुझे क्या हो जाता है? सभी घटनाएँ होते ही हम उनके घर वालो को बुला लेते थे और उन से इन सब घटनाओं के बारे में पूछने को कहते थे । तो वो कहते थे की ये जानबूझ कर ऐसा करती है, आप उसको डाँट कर रखें। लेकिन हमने ये उचित नहीं समझा। क्यों कि हमें ऐसा कुछ नहीं लगता था और वो हमारे साथ बिलकुल मिलीजुली हुई थी, घर में किसी प्रकार का झगड़ा भी नहीं था! कुछ दिन बाद उसके घर वाले बोले कि इस पर किसी भूत प्रेत का साया है, तो ये बात हम ने उन की नहीं मानी जिससे वो नाराज हो गए! हमारा परिवार पढ़ा लिखा परिवार है हम भूत प्रेत में विश्वास नहीं रखते। मेरे पिताजी पहले जन स्वास्थ्य रक्षक थे और छोटा भाई एमपीएचडब्लू है इसलिए वो और हम डॉक्टरी इलाज में विश्वास रखते हैं। एक बार उसने खेत में डालने वाली दवाई पिने की कोशिश की जो हमने उससे छीन ली थी! उस के बाद एक दिन सुबह चार बजे बहुत धुंध थी तो वो घर से निकल कर पास के एक गांव में चली गयी वहाँ तक जाने पर सवेरा हो गया। लोगो ने सोचा की कोई पागल है। जब हम ने देखा कि वो नहीं है तो उस को ढूंढ़ना आरंभ किया और उसके घर वालों को बुलाया गया! उस रात मेरा भाई संविदा आधार पर फायर ब्रिगेड में नौकरी पर था! इतने में एक बुढ़िया ने मेरी भाभी को अपने पास बुला कर सब कुछ पूछा तो उस ने उस बुढ़िया को बताया कि मुझे पता नहीं क्या हो जाता है और मुझे कुछ पता नहीं रहता है कि मैं क्या कर रही हूँ! जब बुढ़िया ने पूछा कि कोई ससुराल में तंग करता है क्या तो उसने बताया नहीं मुझे कोई तंग नहीं करता है बल्कि ससुराल वाले तो मेरे मायके वालों से भी ज्यादा प्यार करते हैं और मैं मायके की बजाय ससुराल जाना पसंद करुँगी। तब उस बुढ़िया ने उससे मेरे भाई का नंबर लेकर उसको बताया! तब तक भाभी का मामा, चाचा और भाई भी आगये! जब मेरा भाई उसका चाचा, मामा व उसका भाई उसको लेने गए तब उस बुढ़िया ने सब कुछ उन लोगों को भी बताया जो मेरी भाभी ने उस बुढ़िया को बताया था! बुढ़िया गवाही पर जाने में असमर्थ है। अब उसका लड़का जाना चाहता है पर वो मोके पर नहीं था। क्या उसके लड़के को ले जाया जाये? जब वो लोग उसको लेकर मेरे घर आये तो उसके भाई ने अपनी बहन को मेरे घर पर पीटना शुरु कर दिया। हम लोगों ने उसका विरोध किया तो वो हमारे साथ भी झगड़ा करने लगा! वो अपनी बहन को अपने घर ले जाने लगा तो भाभी ने मना कर दिया। लेकिन वो जबरदस्ती उसको पीटते हुए ले जाने लगा तब एक पड़ोसन ने उसको रोका भी लेकिन वो नहीं माना और उस को जबरदस्ती ले गया! क्या उस पड़ोसन की गवाही करवाई जाये? उस के बाद हम कई बार उस को लेने के लिए वहाँ गए, रिश्तेदारों को लेकर भी गए। लेकिन वो नहीं माने! उस के बाद उन्होंने 498A , 506 , 406 की दरख्वास्त दी तब फिर पंचायत हुई! पंचायत में उन्होंने तीन मांग रखी की (1) जहाँ उसका पति नौकरी करता है लड़की उस शहर में रहेगी, जो हमने मान ली। (2) गांव के 2 लोग अगर लड़की के साथ कोई घटना होगी तो जिम्मेवार होंगे सरपंच व नम्बरदार, जो हमने मान ली। (3) जो हिस्सा मेरे भाई को पिता की सम्पति में से बनता है वह मेरे भाई की पत्नी के नाम किया जाये, वो हम ने नहीं माना क्यों कि ये उनके लालच को दर्शाता था! एक बार फिर पंचायत हुई तो उन्होंने तलाक के लिए 18 लाख की मांग की जो हमने मना कर दिया क्योकि हम तलाक नहीं चाहते है और हम उसको अपने घर लाना चाहते हैं और वो कभी भी पंचायत में नहीं आई है। अभी मामला कोर्ट में है उन की गवाही होने वाली है पुलिस की गवाही हो चुकी है। हम भरण पोषण 2000/- महीना भी नहीं दे रहे हैं जिस की मांग घरेलू हिंसा अधिनियम के अनुसार की गयी थीष 125 का कोई केस नहीं है। भाई का एक 5 साल 4 महीने का लड़का भी है जो भाभी के पास ही है। भरण पोषण हम उनके लालच के कारण नहीं दे रहे हैं, मामला तीन साल से चल रहा है भाई को भरण पोषण के लिए कोर्ट द्वारा जेल भी नहीं भेजा गया है भरण पोषण के लिए भाई को कितने दिन की जेल हो सकती हैं, और मामले के अंत में भरण पोषण की राशि का क्या होगा? भाई के नाम कोई सम्पति नहीं है! 406 को मजबूत करने के लिए कुछ सामान तो वो ले गए। कुछ सामान छोड़ गए। पुलिस ने 173 की रिपोर्ट में दिया है कि बाकी सामान पति द्वारा बेच दिया गया है। क्या इसका कोई फरक पड़ेगा? क्या हमें प्रोबेशन का लाभ मिल सकता है? वो 319 की दरख्वास्त कब तक लगा सकते हैं?

समाधान-

स मामले में आप के परिवार से सब से बड़ी त्रुटि यह हुई है कि जब जब भी आप की भाभी को दौरा पड़ा तब तब आप ने उन के मायके वालों को बुला लिया। आप के उक्त विवरण से ऐसा प्रतीत होता है कि आप की भाभी की परवरिश में खुद उस के मायके वालो ने पर्याप्त भेदभाव किया। जिस के कारण हो सकता है वह द्विव्यक्तित्व विकार के रोग की शिकार हो गई हो। उस के मायके वाले अंधविश्वासी प्रकृति के हैं इस कारण वे यह मानते रहे हों कि उस पर भूत-प्रेत का असर है अथवा वह नाटक करती है। इस तरह के अंधविश्वासी लोग रोगी के शरीर में किसी अन्य व्यक्तित्व को मान कर उस के साथ मारपीट करना ही उस की चिकित्सा मानते हैं। आप की भाभी अपने पति और ससुराल वालों पर भरोसा करती रही क्यों कि उसे यहाँ प्यार मिला। लेकिन द्विव्यक्तित्व विकार की हर घटना पर उस के मायके वालों को बुला लेने ने आप के परिवार के प्रति उस के विश्वास को आघात पहुँचाया। सब से बड़ी त्रुटि यह हुई कि जब अन्तिम बार भाभी का भाई आया और भाभी को पीटने लगा तो आप ने रोका लेकिन फिर भी वह उसे पीटता हुआ उस के मायके ले गया, तब वह एक अपराध कर रहा था। आप को चाहिए था कि आप उस के भाई की तुरन्त पुलिस रिपोर्ट करते और आप की भाभी को वहाँ से ले जाए जाने से रोक लेते। खैर¡

स बार मायके चले जाने के बाद आप की भाभी को उस के मायके वालों ने अपने प्रभाव में ले कर अपराधिक मुकदमा और घरेलू हिंसा अधिनियम की कार्यवाही करवा दी। अब आप सभी खुद को फँसा हुआ महसूस करते हैं। इस समस्या का एक ही हल हो सकता है कि आप की भाभी अपने बच्चे के साथ आप के परिवार में फिर से रहने आ जाए। उस के लिए आप ने क्या कार्यवाही की यह आप ने बिलकुल नहीं बताया।

मारी राय है कि आप की भाभी को आप के घर से उस के मायके वाले जबरन उस की इच्छा के विरुद्ध ले कर गए थे। वह उस की इच्छा के विरुद्ध उस के मायके में रह रही है। उस के परिजन किसी भी स्थिति में उस से पीछा छुढ़ाना चाहते हैं या फिर यह चाहते हैं कि किसी भी तरह से आप के भाई अपनी पत्नी और बच्चे का खर्चा उन्हें देते रहें।

प की भाभी अपने मायके में बंदी है। अभी भी आप के भाई उच्च न्यायालय के समक्ष एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका प्रस्तुत कर अपनी पत्नी को मुक्त करवा कर वापस लाने के लिए कार्यवाही कर सकते हैं। यदि आप की भाभी किसी भी तरह से आप के परिवार में आ जाती है तो उक्त सभी मुकदमे समाप्त होने का आसान मार्ग निकल सकता है।

फिलहाल 498ए के मुकदमे में आप बीआईएमएस डाक्टर की गवाही प्रस्तुत कर सकते हैं। दोनों मनोरोग चिकित्सकों के पर्चे प्रस्तुत कर सकते हैं संभव है तो उन में से किसी एक मनोरोग विशेषज्ञ की भी गवाही करवाई जा सकती है। वह बुढ़िया जिस के यहाँ जा कर आप की भाभी रही थी। अच्छी प्रत्यक्षदर्शी गवाह है। उस का पुत्र उस का स्थान नहीं ले सकता। लेकिन फिर भी आप उस के पुत्र की गवाही कराएँ। यदि बुढ़िया जाने में असमर्थ है तो उसे ले जाने के साधन जुटाए जा सकते हैं या फिर उस का बयान कमीशन पर कराने के लिए न्यायालय को आवेदन किया जा सकता है। हाँ आप पड़ौसन की गवाही अवश्य करवाएँ।

प की भाभी का कुछ स्त्रीधन पुलिस ने बरामद किया कुछ नहीं किया उस से अपराधिक मुकदमे पर कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि धारा 406 का अपराध साबित होना होगा तो वह दो सामानों की बरामदगी पर भी साबित हो जाएगा। मुझे आप के मुकदमे में धारा 319 का आवेदन प्रस्तुत करने की कोई गुंजाइश नहीं लगती। वैसे यह आवेदन मुकदमे में निर्णय होने के पहले तक कभी भी प्रस्तुत किया जा सकता है। पर हमे लगता है कि ऐसा आवेदन सफल नहीं होगा।

बंदी प्रत्यक्षीकरण के साथ साथ आप के पति हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 में भी दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इस मामले में न्यायालय काउंसलिंग कराएगा जिस में आप के भाई के समक्ष यह अवसर होगा कि वे पत्नी को अपने साथ चलने के लिए सहमत कर लें और न्यायालय उन की पत्नी को उन के साथ भेज दे। यदि ऐसा होता है तो बच्चा तो अपने आप उन के साथ आ जाएगा। सारे मुकदमों की समाप्ति भी हो सकेगी।

पहले पता लगाएँ कि आप कि पत्नी आप के साथ क्यों नहीं रहना चाहती, बाद में उपाय तलाशें।

Say-Noसमस्या-

दिब्यविजय चंदेल ने भाटापारा, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मेरा विवाह 19 जून 2012 को हिन्दू रीती रिवाज सेहुआ था।परन्तु विवाहके एक सप्ताह के बाद से ही मेरी पत्नी मुझे छोड़करअपनी मम्मी पापा के यहाँ रहती है, और मेरे पास आने से इनकार करती है। मुझे उनके घर वालों से कई तरह की धमकियां भी मिलती रहती हैं। जिस के कारण मेरेमम्मी पापा और मैं दहशत में रहता हूँ। आज 2 वर्ष से अधिक समय हो चुका है इनदो वर्षो में मैं लगातार कई बार अपनी पत्नी को वापस लेने के लिए कुछ लोगों कीमदद लेकर अपनी पत्नी के घर जा चुका हूँ। परन्तु मेरे पत्नी के पिता तथा भाईने भेजने से इनकार कर दिया तथा मुझे झूठे मामले में फ़ँसाने की धमकियां दी गईँ। जिस से मुझे वापस लौटना पड़ा। अब जब मैं फोन पर संपर्क करके कहता हूँ किअगर नहीं रहना चाहती तो तलाक ले लो। पर तलाक लेने से भी इनकार करती है। कृपया मेरी मार्ग दर्शन करें कि मैं क्या करूँ?

समाधान-

प की समस्या का समाधान यह है कि आप को हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अन्तर्गत दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए। लेकिन आप को इस बात का भय है कि आप की पत्नी आप पर झूठे आरोप लगा कर आप को धारा 498-ए व 406 आईपीसी के मुकदमे में फँसा सकती है जिस में आप की तथा आप की माता जी की गिरफ्तारी हो सकती है। साथ में आप के माता पिता को भी लपेट सकती है। इस के साथ ही वह धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता, धारा 24 हिन्दू विवाह अधिनियम में तथा घरेलू हिंसा अधिनियम में आप से खर्चे की मांग भी कर सकती है। आप का यह भय अकारण नहीं है क्योंकि ऐसा सामान्य रूप से हो रहा है।

प ने अपनी समस्या तो बताई लेकिन इस बात का कारण नहीं बताया कि आप की पत्नी ऐसा क्यों कर रही है और उस के माता पिता उस का साथ क्यों दे रहे हैं? क्यों कि आप की पत्नी और उस के माता पिता के इस व्यवहार के पीछे कोई न कोई तो कारण रहा होगा।

हो सकता है उसे आप का साथ, आप के परिवार का माहौल समझ नहीं आया हो और वह आप के साथ आप के घर के माहौल में न रहना चाहती हो। हो सकता है आप की अपेक्षाएँ आज के जमाने मे पत्नी को होने वाली अपेक्षाओं से अधिक हों। हो सकता है पत्नी के अपने निजी कारण हों।

क आम कारण यह है कि हमारे यहाँ विवाह के पहले लड़के लड़की मिलते तक नहीं है। एक बार देख लेना या एक दो बार कैजुअली बात कर लेना विवाह के पहले समझ बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होता। लड़के और लड़की को पहले ही एक दूसरे को समझने का अवसर मिलना चाहिए। विशेष रूप से लड़की को उस परिवार के सभी सदस्यों और माहौल के बारे में जानने का अवसर मिलना चाहिए जिस में उसे जा कर रहना है। लड़के को भी लड़की की मनोवृत्ति और अपने परिवार में उस की एडजस्टेबिलिटी के बारे में सोचना चाहिए। पर ऐसा नहीं होता। जिस का नतीजा वही होता है जो आप भुगत रहे हैं या आप की पत्नी को देखना पड़ रहा है।

प को उन कारणों का पता लगाना चाहिए जिन के कारण आप की पत्नी एक सप्ताह आप के साथ रह कर अब आप के साथ नहीं रहना चाहती और न ही विवाह विच्छेद करने को सहमत है। इन कारणों का पता लगाए बिना कोई भी कानूनी उपाय करना आप के लिए गलत हो सकता है जिस के परिणाम बुरे भी हो सकते हैं। यदि आप किसी तरह आप की पत्नी के आप के साथ न रहने के वास्तविक कारण का पता लगा लें तो हमें बताएँ हो सकता है हम कोई उचित आप के लिए खोज कर बता सकें। आप के इतना कह देने से कि एक सप्ताह के बाद आप की पत्नी आप के साथ रहने को तैयार नहीं है हम आप की मदद करने में स्वयं को अक्षम पाते हैं।

पत्नी से संवाद स्थापित करने का प्रयत्न करें …

handshakeसमस्या-

भरत प्रजापत ने पाली, राजस्थान से पूछा है-

मेरी शादी 5 साल पहले हुई थी। हमारे समाज में प्रचलित आँटा-साटा प्रथा (पत्नी के भाई से बहन की शादी)के अनुसार यह शादी हुई थी। मेरी बहन जाना चाहती थी। अतः मेरी पत्नी मायके गई तब वहाँ 6 महीने तक रही। बाद में वो आना भी चाहती थी लेकिन उसके घर वालों ने उसे मिस करदिया तो उस ने भी मुझे आने से इनकार कर दिया। समाज की रीति से विवाह विच्छेद हो गया।मेरी एक बच्ची है मैं उसे लाना चाहता हूँ। मै ओबीसी वर्ग से हूँ। मैं  उसे कोर्ट के जरिए लाना चाहता हूँ क्यों कि एक माँ माँ होती है और सौतेलीसौतेली। क्या वो मुझे वापस मिल सकती है मैंने उसे कभी परेशान नहीं किया।उस केघरवालों ने पहले मुझ पर व मेरे घरवालो पर केस (मुकदमा) करने को कहा तोउसने मना कर दिया। मैं दूसरी औरत नहीं लाना चाहता। आप मुझेसलाह दें किक्या कोर्ट के जरिए वो मुझे मिल सकती है?क्या मैं नहीं चाहूँ तो तलाक नहीं होसकता?  क्या एक की सहमति से तलाक हो सकता है?क्या वो मुझ पर दहेज …. वअन्य मुकदमे कर सकती है? क्या ऐसी कोई कानून प्रणाली है जिस में मेरा दाम्पत्यजीवन वापस बन सकता है।

समाधान-

दाम्पत्य ऐसी चीज है जो कि दो पहियों पर चलती है। पति पत्नी दोनों की इच्छा, सहमति और साथ से दाम्पत्य चलता है। आप के मामले में विवरण से लगता है कि आप की पत्नी भी आप के साथ रहना चाहती है लेकिन उस पर अपने परिजनों का बहुत अधिक दबाव है और उस का कारण समाज में प्रचलित प्रथाएँ और स्त्री-पुरुष की असमान स्थिति है। आप की पत्नी उस के माता-पिता और भाई के दबाव के कारण आप के साथ न आई। हो सकता है उस की समझ ही ऐसी हो कि आँटा-साँटा के विवाह में यदि एक जोड़ा बिछड़ गया तो दूसरा भी अनिवार्य रूप से बिछड़ेगा।

प का समाज के माध्यम से जो विवाह विच्छेद होना आप ने बताया है उस का कानून के समक्ष कोई महत्व नहीं है। आप की पत्नी आज भी कानूनन आप की पत्नी ही है और आप उसे अपने साथ रखने के लिए धारा-9 हिन्दू विवाह अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। लेकिन इस धारा के अन्तर्गत न्यायालय पत्नी को आप के साथ रहने के लिए आदेश तो पारित कर सकता है लेकिन फिर भी वह न आए तो उसे जबरन साथ लाने का कोई प्रावधान कानून के पास नहीं है। फिर आप कानूनन तलाक ही ले सकते हैं।

दि आप अपनी पत्नी को बेटी सहित ला कर अपने साथ रखना चाहते हैं तो आप को किसी न किसी रूप में अपनी पत्नी से सम्पर्क साधना होगा और उसे मनाना होगा कि यदि उसे अदालत में बुला कर पूछा जाए कि वह आप के साथ रहना चाहती है क्या तो वह जज के सामने हाँ कर दे। और यदि जज उसे अदालत से आप के साथ भेजना चाहे तो वह बेटी के साथ अदालत से ही आप के साथ चल दे। यदि आप अपनी पत्नी के साथ संपर्क कर के इतना कर लें तो आप की राह अत्यन्त आसान हो जाएगी। तब आप धारा-9 का आवेदन प्रस्तुत कर उसे अदालत से नोटिस निकवाएँ और अदालत में उस के आने पर अदालत के माध्यम से उसे घर ले आएँ।

बिना दोनों की सहमति के विवाह विच्छेद नहीं होता है। लेकिन यदि कोई एक पक्ष किसी मजबूत कानूनी आधार को न्यायालय के समक्ष प्रमाणित कर विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त कर सकता है। जो आप दोनों के बीच संभव नहीं लग रहा है।

प की पत्नी आप के विरुद्ध मुकदमे कर सकती है। लेकिन आप के बताए तथ्यों से पता लगता है कि वह ऐसा नहीं चाहती। यदि वह दबाव में आ कर कोई मुकदमा करेगी भी तो वह न्यायालय में असफल हो जाएंगे।

मेरी राय में आप अपनी पत्नी से संवाद की स्थिति बनाने की कोशिश करेंगे तो आप को दाम्पत्य जीवन बन सकता है।

दाम्पत्य अधिकारों की स्थापना की डिक्री की पालना न करना तलाक का आधार है।

divorceसमस्या-

जयपुर, राजस्थान से संजय यादव ने पूछा है-

मेरी पत्नी ने मुझ पर विवाह विच्छेद का मुकदमा कर रखा था, जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है। मैं ने धारा 9 के तहत दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना का मुकदमा दायर कर रखा था जो मेरे पक्ष में डिक्री हो गया है। मतलब मैं दोनों जगह से मुकदमा जीत गया। मेरी पत्नी के घर वाले मुझे उस से बात नहीं करने देते। अब मुझे क्या करना होगा जिससे वह वापस आ जाये। अगर वह हाईकोर्ट में अपील करती है तो क्या होगा?

समाधान-

प ने दोनों मुकदमों में जीत हासिल की है। लेकिन आप की पत्नी को उच्च न्यायालय में इन निर्णयों के विरुद्ध अपील करने का अधिकार है। यदि वह अपील करती है तो जिन आधारों पर वह अपील करेगी आप को उन्हें गलत सिद्ध करना होगा। इस कारण से आप को चाहिए कि अपील होने पर अपनी पैरवी के लिए अच्छा वकील मुकर्रर करें।

किसी भी व्यक्ति को कानून के माध्यम से किसी अन्य के साथ रहने को बाध्य नहीं किया जा सका है। इस कारण से दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना के मुकदमें में जो डिक्री पारित की गई है उसे मानते हुए आप की पत्नी आप के साथ आ कर नहीं रहती है तो आप के पास एक ही उपाय यह है कि आप इस डिक्री की पालना न करने के कारण उस के विरुद्ध विवाह विच्छेद की डिक्री पारित करने हेतु आवेदन कर सकते हैं, यह तलाक का अतिरिक्त आधार है। इस आधार पर आप को विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त हो सकती है। आप को इस से लाभ यही होगा कि आप विवाह विच्छेद के उपरान्त अपनी पत्नी के भरण पोषण के दायित्व से मुक्त हो सकते हैं।

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