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विधवा और उस की पुत्री को विभाजन कराने का अधिकार है।

समस्या-

सौरव ताया ने रसीना, कैथल, हरियाणा से समस्या भेजी है कि-

20 दिन पहले मेरे भाई की मौत हो गई है और अब से 2 साल पहले मेरे पापा की मौत हो गई थी। मेरे भाई की शादी को 2 साल 6 माह हो गए है। क्या उसकी पत्नी और डेढ़ साल की बेटी का उनकी सम्पत्ति पर अधिकार है? जबकि उनके पास मेरे भाई के नाम सहित कोई भी दस्तावेज नहीं है और मेरे पिता के बाद उनकी सम्पति का बंटवारा नहीं हुआ। उन की संपत्ति अपने आप मेरी मां और हम 3 भाईयों के हिस्से में आ गई थी। भाभी हमारे घर रहना नहीं चाहती और ना ही अपनी बेटी को छोड़ रही है।

समाधान-

प के पिता के देहान्त के उपरान्त पिता की संपत्ति के चार हिस्सेदार हुए आप तीन भाई और माँ। इस संपत्ति में एक हिस्सा आप के मृत भाई का था। जेसै आप के पिता की संपत्ति आप चारों के नाम अपने आप आ गयी थी, उसी तरह आप के भाई के हिस्से की संपत्ति उस की पत्नी और बेटी के नाम आ चुकी हैं।

आप की भाभी आप के साथ नहीं रहना चाहती तो यह उन की मर्जी है उन्हें साथ रहने को बाध्य नहीं किया जा सकता। डेढ़ वर्ष की उन की बेटी उन की जिम्मेदारी है, वह उन के साथ ही रहेगी जब तक वह वयस्क हो कर उस का विवाह नहीं हो जाता।

आप की जिस संपत्ति में ¼ हिस्सा आप की भाभी व भतीजी का है वे उस हिस्से को प्राप्त करने की अधिकारी हैं। आप स्वैच्छा से दें तो ठीक अन्यथा आप की भाभी विभाजन का वाद संस्थित कर के भी अपना हिस्सा अलग प्राप्त कर सकती हैं।

विधवा को ससुर की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं।

समस्या-

किरन सोनी ने गिरजाबाग, जिला उन्नाव, उत्तरप्रदेश से अपनी समस्या भेजी है-

मेरे पति का देहान्त 1987 में हो चुका है। मेरे ससुर के पास स्वअर्जित 12 बीघा सम्पत्ति है। उनकी उम्र लगभग 96 साल है। मेरे ससुर के चार लड़के और चार लडकिया हैं। इस जमीन पर मेरे पति ईट भट्ठा चलाते थे जो उनके मरने के बाद मेरे देवर सब बर्बाद कर दिया। मेरे ससुर ने अपनी जरूरत के लिये मेरे लड़के का मकान उसको बहला फुसलाकर बिकवा दिया और उसको दो बीघा जमीन रजिस्ट्री करके लिख दी। मेरा लडका प्राईवेट नौकरी करके किसी तरह अपना और मेरा गुजारा करता है। अब वो 2 बीघा जमीन फिर से वापस मांग रहे हैं। उन्होंने अपने छोटे लड़के को करीब 17 दुकानें जो कि उनका मार्केट था। उसमें बिना पैसा लिये रजिस्ट्री कर दी थी। छोटा लड़का उनका पुलिस में दरोगा है और मेरे ससुर उन्हीं के साथ रहते हैं व उनकी बात मानते हैं। बाकी दोनों लड़कों को बहुत कुछ दिया जिसमें नकदी व कुछ जमीन भी शामिल है। लेकिन पैसे के लेन देन का कोई रिकार्ड नहीं है। मेरे पति का दिया हुआ सारा जेवर और सारा सामान, बर्तन तक ले लिये और मुझसे कोई वास्ता नहीं रखा। सब मेरे व मेरे लड़के के खिलाफ हैं क्योकि हम गरीब हैं। मेरे लड़के से मेरे ससुर बात तो करते हैं लेकिन और लड़कों के मतलब के लिये। आज अपने बाकी लड़कों और लड़कियों को रजिस्ट्री करने तहसील में गये हुये है और रजिस्ट्री कर दी होगी। जबकि पैसा मेरे लड़के ने दिया है। और किसी ने कुछ नहीं दिया है मुझे आज तक कुछ नहीं मिला है। मुझे किसी प्रकार से कोई पेंशन वगैरह भी नहीं मिलती है। आज मेरी 3 ननदें मिलकर उस जमीन का बँटवारा मेरे ससुर से करवा रही हैं और मुझे कुछ भी नहीं देने को कह रही है मेरा लड़का भी परेशान है क्योंकि सारी जमा पूंजी भी मेरे ससुर ले चुके है और कुछ देने को नहीं कह रहे हैं। क्या विधवा औरत का ससुर की सम्पत्ति में कोई हक नहीं है जब उसका पति भी नहीं जिन्दा है। क्या मुझे कुछ नहीं मिलेगा? कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।

समाधान-

किसी की स्वअर्जित संपत्ति पर उस व्यक्ति के जीते जी किसी अन्य व्यक्ति का कोई अधिकार नहीं होता है। उस की स्वंय की पत्नी, माता, पिता या संतानों का भी कोई अधिकार नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति बिना कोई वसीयत किए मर जाए तो मृत्यु के उपरान्त उत्तराधिकार में उस की पत्नी, माँ व संतानों को उत्तराधिकार प्राप्त होता है। आप के पति का देहान्त हो चुका है। तथा आप के ससुर के पास स्वअर्जित संपत्ति 12 बीघा है। इस संपत्ति पर किसी का कोई अधिकार नहीं है वे जिसे चाहें दे सकते हैं। उस जमीन में से दो बीघा जमीन उन्हों ने आप के बेटे को रजिस्ट्री करवा कर दे दी है। इस के अलावा भी उन के सात लड़के लड़कियाँ हैं। इस तरह उन्हों ने पहले ही जमीन में से आप के पति को आप के ससुर के मरने के बाद मिलने वाले अधिकार से अधिक आप के बेटे को दे दिया है।

यदि आप का लड़का आप के ससुर को या परिवार के दूसरे सदस्यों को कुछ देता है तो उस की मर्जी है और आपके ससुर उस का क्या करते है यह भी उन की इच्छा पर निर्भर करता है। यदि आप के पास धन नहीं हैं तो किसी को देते क्यों हैं और ससुर की बातों में भी क्यों आते हैं। हमारी राय है कि आप के बेटे को जो दो बीघा जमीन रजिस्ट्री से मिल गयी है उसे किसी हालत में वापस न करे। अन्यथा आप को और आप के बेटे को अधिकार के रूप में कुछ भी नहीं मिलने वाला है। बाकी जमीन या संपत्ति जो भी है उसे आप के ससुर कैसे बाँटते हैं यह उन की मर्जी पर है। वे अपनी स्वअर्जित संपत्ति के स्वयं मालिक हैं उस का कुछ भी कर सकते हैं। यह सही है कि विधवा पत्नी का ससुर की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं है। उस का अधिकार सिर्फ अपने मृत पति की संपत्ति पर है।

आप की विधवा माँ निरपराध हैं, उन्हें षड़यंत्र पूर्वक किए गए शोषण की रिपोर्ट पुलिस को करनी चाहिए।

husband wifeसमस्या-

विजय ने आगरा, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पापा का देहान्त 14.08.2002 को हुआ। हमारे पास 30 बीघा जमीन है। एक व्यक्ति ने मेरी मम्मी को बहला कर उस के साथ 2006 से अभी तक यौन शोषण किया। उस व्यक्ति का पिता हमारी मम्मी से रुपए भी लेता रहा। किन्तु वह व्यक्ति अन्य महिला से शादी कर रहा है। उस व्यक्ति के पिता को सब कुछ शुरु से ही पता था लेकिन उस ने मम्मी को अन्य लोगों को बताने से मना कर रखा था। अब मेरी माँ को क्या करना चाहिए?

समाधान-

प के पिता की मृत्यु के उपरान्त उत्पन्न परिस्थितियों में आप की माँ का किसी अन्य व्यक्ति से विवाह कर लेना अथवा लिव इन रिलेशन बना लेना कहीं भी गैर कानूनी अथवा किसी भी प्रकार से गलत नहीं है। सब से पहले तो यदि इस बात को ले कर आप की माताजी या आप के मन में किसी तरह का अपराध बोध हो तो उसे आप को निकाल देना चाहिए। तभी भविष्य में आप की माताजी और आप अपने हित सुरक्षित रख सकते हैं।

ह तो स्पष्ट हो ही गया है कि उस व्यक्ति और उस के पिता ने षड़यंत्र पूर्वक आप की व आप की माता जी की परिस्थितियों का लाभ उठाया है। किसी भी परिस्थिति में अब आप का व आप की माता जी का उस व्यक्ति और उस के पिता से संबंध रखना उचित नहीं है। आप की माताजी और आप ने किसी प्रकार का कोई गलत काम नहीं किया है इस कारण आप दोनों को डरने की कोई आवश्यक्ता नहीं है। आप दोनों को मजबूत रहते हुए उन दोंनों के षड़यंत्र को उजागर करना चाहिए।

स के पिता ने इस संबंध का लाभ उठा कर आप की माता जी से धन लिया है। यदि इस धन को लेने का सबूत हो तो आप की माताजी उस धन की वसूली के विरुद्ध दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकती हैं। य़दि सबूत न हों या हों तब भी आप की माताजी उस व्यक्ति के पिता से स्पष्ट कह सकती हैं कि वह आप का धन ब्याज सहित वापस करे अन्यथा जिस लड़की से उस का बेटा विवाह कर रहा है उसे और उस के परिजनों को सारी सच बात बता देंगी। आप की माताजी बोल्ड हो कर उस व्यक्ति के विरुद्ध षड़यंत्र करने, धन एंठने के लिए यौन संबंध बना कर आप की माताजी का शोषण करने की शिकायत पुलिस को कर सकती हैं। यदि पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती है तो किसी वकील की मदद से क्षेत्र के मजिस्ट्रेट को परिवाद प्रस्तुत करवा कर पुलिस को जाँच के लिए भिजवा सकती हैं।

विधवा द्वारा दत्तक ग्रहण

lawसमस्या-
बाबू साहब ने दरभंगा, बिहार से पूछा है-

मेरे मामाजी तीन भाई थे। पहले (उम्र- 58 वर्ष) को एक पुत्र और तीन पुत्री हैं। इन का पुत्र 18 वर्ष से कम उम्र का है एवं सभी पुत्रियों का विवाह हो चुका है। दूसरे (उम्र-45) वाले नि:संतान थे जिन की मृत्यु दो साल पहले हो गई। तीसरे (उम्र-4०) वाले को पॉच पुत्र और दो पुत्रियाँ हैं। सभी संतान 18 वर्ष से नीचे के उम्र के हैं। दूसरे वाले मामा की मृत्यु के बाद उनको अग्नि तीसरे वाले मामा के तीसरे पुत्र ने दिया। कर्म समाप्त होने के बाद पंचो के समक्ष उस लड़के को दूसरी मामी को गोद दिया गया और कोर्ट से गोदनामा भी बनाया गया। दूसरी मामी स्वभाव की ठीक नहीं है। मामा की असमय मृत्यु (45 वर्ष के उम्र में) उसी के कारण हुआ। पुरे परिवार से बराबर झगड़ा किया करती थी। गोद लेने के दो महिने बाद झगड़ा करके उसने लड़के को तीसरे मामा को वापस कर दिया। अब वह जमीन बेच कर कहीं और जाना चाहती है। मामा की मृत्यु के बाद मिले बीमा के पैसों को भी इधर-उधर कर रही है। सारा खेत का जमीन पहले वाले मामा के नाम से है जो किसी तीसरे व्यक्ति से खरिदा गया था। घर वाला जमीन उनके पिता के नाम से है एवं घर के पीछे की जमीन तीनों भाइयों के नाम से है। कृपया बतायें कि क्या वो जमीन बेच सकती है। उस गोद लिये बच्चे का क्या हक है? आप को बता दें कि मेरी माँ दो बहन हैं। मैं नानी गॉव मे ही बसा हूँ। कुछ दिन पह्ले गॉव की एक अभद्र औरत के साथ मिलकर मामी ने अपराधिक मामला में फँसाने का धमकी भी दी है।

समाधान-

प के मामा का देहान्त होते ही आप के मामा की जो व्यक्तिगत संपत्ति थी वह तो उत्तराधिकार में आप की मामी को प्राप्त हो चुकी है क्यों कि मामा के कोई संन्तान नहीं थी। अब आप के तीसरे मामा की सन्तान को उस ने गोद लिया है। जिसे आप कहते हैं कि उसे वापस तीसरे वाले मामा को दे दिया है। लेकिन एक बार किसी सन्तान को गोद ले लिया जाए तो उसे वापस नहीं दिया जा सकता। इस कारण वह लड़का अभी भी मामी का गोद पुत्र है। गोद ली हुई संतान मामी ने मामा की मृत्यु के बाद गोद ली है इस कारण वह केवल मामी का गोद पुत्र है मामा जी का नहीं। इस कारण उस का मामी पर वही अधिकार है जो कि केवल मामी के पुत्र का होता। किसी भी स्त्री की संपत्ति पूरी तरह से उसी की होती है। इस कारण से आप की मामी को जो संपत्ति मामा से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है उस पर उस का पूरा अधिकार है उसे वह बेच सकती है या किसी को दे सकती है। बीमा के पैसे उस के ही हैं, वह उन का कुछ भी कर सकती है।

खेत की जमीन पहले वाले मामा के नाम है तो उन की ही है। इस कारण दूसरी मामी उस को नहीं बेच सकती। घर की जमीन मामा के पिता जी अर्थात आप के नाना के नाम है इस कारण वह उसे भी नहीं बेच सकती। यदि आप के नाना नहीं हैं तो वह उस घऱ में अपना हिस्सा जरूर मांग सकती है। लेकिन वह संपत्ति पुश्तैनी हो जाने के कारण उस में दूसरे मामा के हिस्से में मामी के साथ साथ मामी द्वारा गोद लिए पुत्र का भी बराबर का हक है। पीछे की जमीन जो तीनों भाइयों के नाम है उस में भी मामी का हिस्सा है। लेकिन उस में गोद लिए पुत्र का कोई हिस्सा नहीं है। मामी चाहे तो इस जमीन में हिस्सा मांग सकती है लेकिन इस हिस्से को प्राप्त करने के लिए उसे न्यायालय में कार्यवाही करनी होगी। मामी की मृत्यु के बाद यदि कोई संपत्ति बचती है तो उस का उत्तराधिकार उन के द्वारा गोद लिए पुत्र को प्राप्त होगा।

विदुर द्वारा विधवा पुत्रवधु से विवाह शून्य है …

hindu-marriage-actसमस्या-

दिल्ली से विनोद कुमार ने पूछा है-

क विदुर ने अपनी विधवा पुत्रवधु से विवाह किया है। क्या यह कानून के अनुसार वैध है।  क्या उस के मरने के बाद उस की यह पत्नी फैमिली पेंशन पाने की अधिकारी है?

समाधान-

प ने यह नहीं बताया कि यह विदुर और उस की विधवा पुत्र वधु किसी व्यक्तिगत विधि से शासित होते हैं। यदि वे हिन्दू विधि से शासित होते हैं तो यह विवाह वैध नहीं है।

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 5 (iv) के अनुसार वर-वधु प्रतिबंधित रिश्तेदार नहीं हो सकते। अधिनियम की धारा 3 (g) में प्रतिबंधित रिश्तेदारों को परिभाषित किया गया है। इस उपधारा के दूसरे भाग में किसी स्वशाखीय संतान या स्वशाखीय पूर्वज की पत्नी या पति से प्रतिबंधित रिश्ते के रूप में परिभाषित किया गया है। इस तरह किसी व्यक्ति की अपनी ही पुत्रवधु प्रतिबंधित रिश्तेदार है और उस के साथ हुआ विवाह वैध नहीं है। इस तरह के विवाहों को अधिनियम की धारा 11 के अनुसार शून्य माना गया है जो कि विवाह के किसी भी पक्षकार के आवेदन पर निरस्त किया जा सकता है।

र्वोच्च न्यायालय ने यमुनाबाई अनन्तराव आधव बनाम अनन्तराव शिवराम आधव (एआईआर 1988 सुप्रीम कोर्ट 644) में यह निर्णीत किया है कि किसी भी मामले में यदि किसी विवाह की वैधता का प्रश्न उठता है तो न्यायालय धारा पाँच के  भाग (i), (vi) व (v) में वर्णित विवाहों को शून्य घोषित कर सकता है।

स विदुर की मृत्यु के उपरान्त उस की परिवार पेंशन को यदि विभाग देने से मना कर दे और मामला न्यायालय में ले जाया जाए और न्यायालय में यह प्रश्न उठे कि वह वैध पत्नी नहीं थी इस कारण उसे परिवार पेंशन का अधिकार नहीं है तो न्यायालय यह निर्णय दे सकता है कि वह उन का विवाह शून्य होने के कारण वह वैध पत्नी नहीं है और उसे पेंशन पाने का अधिकार नहीं है।

ससुरालियों द्वारा विधवा की संपत्ति हड़पना और खुर्द-बुर्द करना ग़बन का संगीन अपराध है।

समस्या-

बड़नगर, उज्जैन से राधा ने पूछा है-

मेरी शादी 31 मई 2010 को राजेश से हुई थी, मेरे पति को पाएल्स हो गया था।  देवास ट्रीटमेंट करने गये।  डॉक्टर ने नींद का इंजेक्शन लगाया और वो इंजेक्शन रिएक्शन कर गया, पति की हालत ज़्यादा बिगड़ गयी तो इंदौर रेफर किया, पर फिर भी उन्हें नहीं बचा पाए, मैं उस समय मायके में थी।  3 दिन पहले ही मुझे मेरे पति छोड़ कर गये थे, मुझे ऑपरेशन के बारे में किसी ने नहीं बताया। पति सुबह 11 बजे से तो रात 10:30 मिनट तक ज़िंदगी और मौत से लड़ते रहे, पर मुझे किसी ने खबर नहीं की, उनका पोस्ट मार्टम  भी नहीं कराया गया, रात 12:50 मिनट पर मुझे मेरे बड़े ससुर जी ने कॉल किया और कहा की राजेश की तबीयत खराब हो गयी है।  उसको अचानक ही चक्कर आए और दर्द हुआ तो हम अपोलो (इंदौर) ले आए हैं ओर आईसयू में भरती किया है, बस इतना कहा।  हम रात को जैसे तैसे गाड़ी कर के गये।  रात 4 बजे हम पहुँचे, ससुराल वालों में से कोई बात करने ही नहीं आया, दूसरे रिश्तेदार थे।  मैंने पति को एक बार देखने को कहा तो टालते गये, मुझे मेरे पति से नहीं मिलाया गया।  सुबह 8 बजे मुझे घर चलने को कहा। मैं ने इनकार किया कि मैं मेरे पति को देखे बिना नही जाऊंगी, तो कहा कि वो घर ही आ रहा है। जब घर पर उनको मेरे सामने लिटाया गया तो मेरे तो होश ही उड़ गये।  कुछ पूछने पर सब मुझे गपलते रहे।  मौत का कारण और समय आखरी समय तक नहीं बताया था उन लोगो ने।  बस टालते रहे। कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था।  मेरे साथ मेरे ससुराल वालों ने धोखा किया है।  8 जून 2012 को उनका देहांत हो गया।  उनके जाने के बाद मुझे ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया।  मुझे मेरा समान, गहने और ज़रूरी दस्तावेज़ (मेरे) भी नहीं दिए जा रहे है।  घर के बड़ों ने मिल बैठ कर बात करनी चाही।  पर वो लोग घर आ के हम से बदसलूकी से पेश आए।  मुझे और मेरे परिवार वालों को गंदा गंदा बोला गया, मुझे जान से मारने की धमकी भी दी।  पहले तो मुझे मेरा सामान, मेरी चीज़ें नही दी और मेरे साथ मार पीट भी की है।  मुझे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गयी है।  मेरे पति का इधर उधर का पैसा सब खुद के पास जमा कर लिया है।  उनके अकाउंट भी बंद करा दिए हैं।  मुझे मेरा हक़ नहीं देते।  मै पिछले साल सितंबर से बीमार हूँ।  मुझे वीनस साइनस  थ्रॉम्बोसिस है। इस बीमारी के साथ और भी बीमारियों से ग्रस्त हूँ। मुझे दिमाग पर जोर डालने और तनाव से दूर रहने के लिए डॉक्टर ने कहा है। फिर भी ये लोग मुझे परेशान करते हैं जिससे मेरी बीमारी ठीक होने के बजाय बढ़ती जा रही है।  मेरे पास पैसे भी नहीं हैं जिससे मैं अपनी जाँच करा सकूँ और इलाज करा सकूँ।  12वीं फेल हूँ, आमदनी का कोई रास्ता नहीं है।  मे कहीं नौकरी भी नहीं करती हूँ।  जैसे तैसे मेरे पिताजी मुझे जीवन बसर करने मे मददत कर रहे हैं।  पिताजी की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है फिर भी मुझे थोड़ी बहुत मदद करते हैं।  शादी के बाद 4 महीने मैं ससुराल में रही।  फिर मेरे पति मुझे महाराष्ट्र ले जाए साथ रहने के लिए।  उन की नौकरी थी वहाँ पर।  मेर पति ने ईपीएफ और जीपीएफ जैसी चीज़ों में उनकी माताजी को नॉमिनी बनाया था।  मेरी शादी के ढ़ाई साल पहले।  वो नॉमिनी का नाम बदल नहीं पाए। (मेरी बीमारी के चलते और भी कुछ परेशानियों के चलते) और वो इस दुनिया से चले गये।  अब कंपनी से पैसा मिलेगा उस पर क्या मेरा अधिकार नहीं बनता? उन के ईपीएफ और जीपीएफ पर मेरे क्या अधिकार है? उन की एलआईसी भी थी शादी के पहले से ली हुई।  जो कि अभी तक चल रही थी।  उसकी जानकारी मुझ से छुपाई जा रही है मुझे पॉलिसी नंबर नहीं बताए जा रहे हैं। कहते हैं पॉलिसी तो थी ही नहीं।  मेरे पास प्रूफ है, पर पॉलिसी नंबर नहीं है। मैं उसकी जानकारी कैसे कर सकती हूँ? मे पॉलिसी ऑफिस जा चुकी हूँ, मैनेजर ने मदद करने से इनकार कर दिया।  बिना पॉलिसी नंबर के हम आपकी कोई मदद नहीं कर सकते। क्या मेरे पति के जाने के बाद पॉलिसी पर मेरा हक़ बनता है?  अगर है तो मैं कैसे इसे हासिल कर सकती हूँ? हम ने हमारे घर में बहुत सा सामान बसाया था।  महाराष्ट्र में पर पति के जाने के बाद ससुर जी वहाँ गये और सारा सामान ले आए। उस में कुछ तो बेचने की बात कर रहे थे और  मुझे देने से मना कर दिया। क्या मुझे मेरे घर का समान और बिका हुआ सामान मिल सकता है?  क्यों कि ससुरजी ने मुझसे बिना पूछे मेरा सामान बेचा हे।  मुझे मेरा सामान, मेरे कागज़ात, मेरे गहने, सभी बिना टूट फूट के बिना कटे फटे मुझे मिल सकें।  उस के लिए भी कोई क़ानून है?  ससुरजी ने मुझे घर में रखने से ही मना कर दिया और  हिस्सा माँगा तो भी मना कर दिया।  वो कहते हैं कि ये जायदाद मैं ने बसाई है, मैं इसका कुछ भी कर सकता हूँ।  चाहूँ तो दान में दे दूँ।  इसलिए मैं मेरे बेटे को जायदाद से बेदखल करता हूँ।  क्या वे मेरे पति के शांत होने के बाद वो मेरे पति को जायदाद से अलग करने को अभी नवम् में बोलते हैं जब कि मेरे पति जून में ही शांत हो गये हैं।  इसका मतलब कि उनका बेटा गया तो उन की ज़िम्मेदारी ख़त्म।  वो मुझे उन के घर में हिस्सा नहीं देना चाहते और जायदाद में भी हिस्सा नहीं देना चाहते।  उन की इकलौती विधवा बहू होने के नाते भी मेरा हक़ नहीं बनता क्या? इसमे मेरे क्या क्या हक़ हैं?  वे मुझे गालियाँ देते हैं मेरे बारे में ग़लत ग़लत बातें फैला रहे हैं।  पूरे समाज में और गाँव में।  जिस से मुझे बदनामी का सामना करना पड़ रहा है।  इसलिए क्या मैं मानहानि का दावा कर सकती हूँ? क्या इस पर भी कोई क़ानून है?  मेरे ससुराल वाले बड़े लोग है, हम को बहुत परेशान करते हैं।  मुझे आगे पढ़ाई करनी है, मेरा इलाज कराना है,  मुझे अपना भारण पोषण करना है।  पर पैसे के बिना कैसे हो? मुझे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गयी है। मुझे मेरे अधिकार के बारे मे बताइये।  मेरी उमर छोटी है।  इसलिए मुझे क़ानून की कोई जानकारी नहीं है।  कृपा कर के मेरी परेशानी का निवारण करें।

समाधान-

प की विस्तृत कहानी पढ़ी। यह भारतीय महिलाओं की सामान्य कहानी है। बहू घर में लायी जाती है पति और उस के परिवार की सेवा करने के लिए। जब पति का देहान्त हो गया हो और उस की विधवा पत्नी बीमार हो, सेवा करने लायक नहीं हो तो आम तौर पर ससुराल वालों का व्यवहार ऐसा ही हो जाता है। वे उस के पति की संपत्ति पर कब्जा कर लेते हैं और बहू को  निकाल फेंकते हैं उस के पिता-भाइयों की जिम्मेदारी पर। जिस देश में काम करने लायक सधवा बहू को दहेज लाने को बाध्य किया जाता हो, न लाने पर जला दिया जाता हो, उस देश में ऐसा व्यवहार आश्चर्य पैदा नहीं करता। लेकिन ऐसा नहीं है कि सारा समाज ऐसा ही है। अच्छे लोग भी हैं। कानून बहू के साथ है लेकिन उस का उपयोग करना बहू नहीं जानती। उसे कानून की जानकारी भी नहीं है।

ही स्थिति आप के साथ है।  लेकिन आप के साथ एक अच्छी बात है कि आप जीवन जीना चाहती हैं। अपनी बीमारी से मुक्त होना चाहती हैं। आगे पढ़ाई कर के अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हैं। अपने अधिकारों को हासिल करना चाहती हैं। जब आप में इतनी हिम्मत है तो आप को समाज में आप का साथ देने वाले भी मिलेंगे जो आप को अपने अधिकार दिलाने में मदद भी करेंगे। लेकिन आप को फर्जी मदद करने वालों से भी सावधान रहना होगा। आप के प्रति फैलाई जा रहे बुरे प्रचार का भी मुकाबला करना होगा। आप दृढ़ता से खड़ी रहेंगी तो अपना जीवन जीत सकती हैं।

ति के मरने के उपरान्त संतान न होने पर उस की समस्त संपत्ति की स्वामिनी पत्नी और मृतक की माती ही हैं।  इस तरह आप अपने पति की सम्पत्ति की स्वामिनी हैं। आप चाहें तो समस्त संपत्ति हासिल कर सकती हैं। आप के पति का जो भी रुपया उस की नौकरी से, ईपीएफ, जीपीएफ, बीमा पालिसी आदि से मिलना है वह सब आप का है। यदि नॉमिनी कोई और भी है और उसे वह धनराशि मिल भी जाती है तो ऐसा धन प्राप्त करने वाला नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी मात्र है। ट्रस्टी का कर्तव्य है कि वह मृतक के उत्तराधिकारियों को उन की धन संपत्ति सौंप दे। यदि ट्रस्टी ऐसा नहीं करता है और उस धन संपत्ति को अपने पास रख लेता है तो यह सीधे सीधे भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के अंतर्गत न्यास भंग का अपराध है, ग़बन है। आप को चाहिए कि आप अपने पति की संपत्ति आप के ससुराल वालों द्वारा ऱख लिए जाने तथा नौकरी से, ईपीएफ, जीपीएफ, बीमा पालिसी आदि से मिलने वाले धन के लिए पुलिस में रिपोर्ट कराएँ। यदि थाना रिपोर्ट न लिखे, पुलिस अधीक्षक को शिकायत करें और फिर भी काम न चले तो न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करें। आप की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हो जाने पर पुलिस का कर्तव्य है कि वह आप की संपत्ति को रखने वालों को गिरफ्तार कर उस संपत्ति को बरामद करे। इस के बाद आप न्यायालय से उस संपत्ति को अपनी सुपूर्दगी में ले सकती हैं।  जो संपत्ति न मिले और जो खराब मिले उस की प्राप्ति और नुकसान के लिए आप दीवानी वाद न्यायालय में संस्थित कर सकती हैं।

प के ससुर जी का यह कहना सही है कि जो संपत्ति उन्हों ने अर्जित की है उस पर उन का अधिकार है वे इसे कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन जो संपत्ति आप के पति ने अर्जित की है उस पर उन का कोई अधिकार नहीं है। आप के ससुर जी का यह कहने का कि वे अपने पुत्र को अपनी जायदाद से बेदखल करते हैं कोई अर्थ नहीं है।  यदि किसी जायदाद में आप के पति का अधिकार है तो उसे समाप्त नहीं किया जा सकता क्यों कि वह तो आप के पति के देहान्त के साथ ही आप का हो चुका है। यदि आप के ससुराल में कोई सहदायिकी पुश्तैनी जायदाद हो तो उस में भी आप के पति का अधिकार था। वह अधिकार अब आप के पति की मृत्यु के उपरान्त आप का है आप उस के लिए भी विभाजन का दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकती हैं। इस के लिए आप को स्थानीय वकील से सलाह करनी चाहिए और सहायता प्राप्त करनी चाहिए। आप के पास यदि मुकदमे लड़ने के लिए धन नहीं है तो आप जिला मुख्यालय पर जिला जज के कार्यालय में स्थापित विधिक सेवा प्राधिकरण में सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए। यह प्राधिकरण आप को निशुल्क वकील की मदद प्रदान कर सकता है तथा अन्य सहायता भी प्रदान कर सकता है।

बीमा पालिसी के नंबर के बिना उसे तलाश करना अत्यन्त दुष्कर काम है।  लेकिन फिर भी यदि आप को अपने पति की सही जन्मतिथि जो कि उन के सैकण्डरी बोर्ड के प्रमाण पत्र में दर्ज हो तो आप भारतीय जीवन बीमा निगम की किसी शाखा में जा कर अपने पति के नाम, पिता के नाम, निवास स्थान और जन्मतिथि के आधार पर बीमा पालिसी का पता कर सकती हैं तथा संबंधित शाखा और मंडल कार्यालय को लिख कर दे सकती हैं कि बीमा पालिसी की राशि का भुगतान आप के सिवा किसी अन्य को न किया जाए। आप को नौकरी से, ईपीएफ, जीपीएफ, बीमा पालिसी आदि से मिलने वाली धनराशि को आप के अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति को भुगतान करने पर रोक लगाने के लिए आप के सास-ससुर को पक्षकार बनाते हुए अपने पति की उत्तराधिकारी होने के आधार पर तुरंत एक दीवानी वाद कर देना चाहिए जिस में आप को अस्थाई निषेधाज्ञा का यह आवेदन करते हुए अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करना चाहिए कि जब तक वाद का निपटार न हो जाए उक्त राशियों का भुगतान किसी को न किया जाए। उक्त सभी राशियों के लिए आप के नाम नॉमिनेशन न होने के कारण आप को जिला न्यायाधीश के न्यायालय से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र हासिल करना होगा।

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