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मां के जीतेजी उन की संपत्ति में किसी संतान को कोई अधिकार नहीं है।

समस्या-

मेरी उम्र लगभग 40 वर्ष है। हम लोग 4 भाई और एक बहन हैं, जिसमे दो भाई मुझसे बड़े हैं और बहन मुझसे छोटी है, शेष एक भाई सबसे छोटा है। मेरे पिता जी की 1984 में ही मृत्यु हो गई थी और क्योंकि मेरे पिताजी बिहार के विद्युत विभाग मे सरकारी नौकरी करते थे और नौकरी में रहते हुए ही उनकी मृत्यु हुई थी, तो मेरी माताजी को पिताजी के स्थान पर अनुकंपा के आधार पर 1987 में नौकरी हुई और वो लगभग 29 साल नौकरी करने के बाद 2016 मे रिटायर हो गई हैं। वो अभी जीवित हैं। मैं यह जानना चाहता हूँ कि मेरी माता जी ने 29 साल की नौकरी में बैंक मे जो भी रुपया जमा कर रखा है और उनको जो रिटायरमेंट के समय जो पैसा मिला है या अभी जो प्रति महीने पेंशन मिल रही है उसमे मेरा कोई क़ानूनी अधिकार है या नहीं? क्या मैं अपना अधिकार लेने के लिए कोई क़ानूनी उपाय कर सकता हूँ या नहीं? क्योंकि बॅंक मे जो भी पैसा जमा है उसमे कहीं पर भी मेरा नाम ना तो नॉमिनी में दिया गया है और ना ही सेकेंड नाम में जब कि मुझे छोड़ कर बाकी सभी भाइयों का नाम नॉमिनी में दिया गया है। सारा बैंक का पैसे में माता जी के साथ सेकेंड नाम में किसी भाई का नाम दिया गया है मेरा नाम कहीं भी नहीं दिया गया है। सब ही भाई मुझे जान मारने की धमकी देते हैं और कहते हैं की तुमको बँटवारा में एक पैसा भी नहीं मिलेगा। माता जी भी मेरा विरोध ही करती हैं और कहती हैं की तुम घर से निकल जाओ। मेरे चार भाई में सिर्फ़ एक भाई सेकेंड वाले की शादी हुई है लेकिन उसकी पत्नी उससे झगड़ा करके अपने घर चली गयी है और तलाक़ मांगती है। मेरी बहन की शादी 2005 में हो चुकी है और उसके दो बच्चे हैं। मुझे अपने हिस्से का का पैसा लेने का मेरा कोई क़ानूनी अधिकार है या नहीं और क्या हम अपनी माता जी क़ानूनी प्रक्रिया करके पैसा ले सकते हैं या नहीं?

– प्रकाश कुमार सिन्हा, जहानाबाद (बिहार)

समाधान-

किसी भी स्त्री की संपत्ति उस की एब्सोल्यूट संपत्ति होती है। आप की माता जी के पास जो भी धन है वह उन का स्वयं का अर्जित धन है। उस धन पर जीतेजी केवल माता जी का अधिकार है। उस के अलावा किसी भाई का कोई अधिकार नहीं है। नोमिनी बनाए जाने के लिए किसी पर कोई दबाव नहीं डाला जा सकता है। आप की माताजी चाहें तो किसी को भी आप के भाई बहिन के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को भी नोमिनी बना सकती हैं। आप की माताजी जीतेजी अपनी इस संपत्ति को किसी को दे सकती हैं या उसे विक्रय कर सकती हैं उन्हें रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। वे चाहे तो अपनी समस्त संपत्ति को किसी को भी वसीयत भी कर सकती हैं। आप को उन के जीतेजी उन की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं है।

हाँ यदि आप की माताजी कोई वसीयत नहीं करती हैं और उन की मृत्यु हो जाती है तो अन्य बहिन भाइयों की तरह आप को भी उत्तराधिकार में उतनी ही संपत्ति प्राप्त करने का अधिकार होगा जितना कि अन्य भाई बहिनों को होगा अर्थात आप भी 1/5 संपत्ति के अधिकारी होंगे। बैंक, बीमा आदि संस्थाओं में नोमिनी बनाने का अर्थ यह नहीं है कि उस में जमा धन उस नोमिनी का हो जाएगा। नोमिनी केवल ट्रस्टी होता है और उस की यह जिम्मेदारी होती है कि वह इस तरह प्राप्त धन को सभी उत्तराधिकारियों में उनके हिस्से के अनुसार बांट दे। पर कभी कभी इस तरह नोमिनी धन ले कर अपने पास रख लेता है और किसी को नहीं देता। लेकिन इस तरह खुद धन रख लेना धारा 406 आईपीसी का अपराध है जिस के लिए उसे दंडित किया जा सकता है। आप अपने हिस्से के धन के लिए नोमिनी के विरुद्ध दावा कर सकते हैं। आप यह भी कर सकते हैं कि जहाँ जहाँ धन जमा है और नोमिनी द्वारा धन प्राप्त कर लेने की संभावना है वहाँ तुरन्त पत्र दें कि उत्तराधिकारियों में विवाद है इस कारण नोमनी को धन का भुगतान नहीं किया जाए आप उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर रहे हैं, न्यायालय द्वारा प्रमाण पत्र मिल जाने पर उसी के अनुसार धन का भुगतान किया जाए। आप यह कर सकते हैं कि मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त होते ही उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए जिला न्यायाधीश के न्यायालय के समक्ष उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर दें।

हिन्दू माँ की संपत्ति में पिता को भी संतानों के साथ समान उत्तराधिकार प्राप्त है।

समस्या-

मेरी मां की मृत्यु 2 साल पहले हो चुकी है। मेरे पिता हम लोगो से 15 साल से अलग दुसरी औरत के साथ रह  रहे हैं। हम  जो लोग के पास जो मकान और जमीन हैं वो मां के नाम हैं। कया  मेरे पिता को यह अधिकार है कि  मेरी मां की  सपंति का दुरुपयोग कर पायेगे।

-राहुल, रांची, झारखंड

समाधान-

प की माँ के नाम से जो जमीन और मकान हैं वे सभी आप की माँ की एब्लोल्यूट संपत्ति थीं। उन की मृत्यु के साथ ही उन का उत्तराधिकार तय हो गया और संपत्ति का आधिकार उन के उत्तराधिकारियों को प्राप्त हो चुका है। हिन्दू स्त्री का उत्तराधिकार हिन्दू उत्तराधिाकर अधिनियम की धारा 15 व 16 से निर्धारित होता है।

प्राथमिक रूप से एक स्त्री की संपत्ति पर उत्तराधिकार उस की संतानों और और पति का होता है। लेकिन यदि कोई संपत्ति उसे अपने मायके से मिली हो तो उस पर पति का अधिकार नहीं होता। यदि उक्त संपत्ति या उस का कोई भाग आप की माताजी को अपने मायके से प्राप्त हुई है तो उस में आप के पिता का कोई अधिकार नहीं है।

यदि संपत्ति आप के माता पिता की आय से बनी है तो उस में आप के पिता का भी हिस्सा है। इस कारण आप यदि चार भाई बहिन हैं तो एक पिता का हिस्सा जोड़ कर कुल पाँच हिस्से हुए और पाँचवें हिस्से पर आप के पिता का अधिकार है वे चाहेँ तो उसे आप से ले सकते हैं, लेकिन उस के लिए उन्हें पहले संपत्ति का कानूनी तौर पर विभाजन करना होगा। हालांकि वे चाहें तो बिना विभाजन के अपना हिस्सा किसी को हस्तांतरित कर सकते हैं। इस से जैसे अभी वे हिस्सेदार हैं वैसे ही खरीददार हिस्सेदार हो जाएगा।

स्त्री की संपत्ति सब से पहले उत्तराधिकार में उस की संतानों को प्राप्त होगी।

समस्या-

विशाल कुमार ने मवई कलाँ, मलीहा बाद, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी समस्या यह है कि मेरे पापा ने दो शादियाँ की थी। उनकी पहली पत्नी के लडका पैदा हुआ, उसके बाद किसी बीमारी के कारण पहली पत्नी की मृत्यु हो गई उसके बाद मेरे पापा ने दूसरी शादी की जिनका पुत्र मै हूँ।  कुछ समय बाद मेरे पापा की भी मृत्यु हो गयी। उसके बाद मेरे पापा की सारी संपत्ति 1/3 हो गई जिसमें पहले पत्नी के लडके व मेरी माँ को एवम मुझे अधिकार प्राप्त हुआ था अब मेरी माता जी की भी मृत्यु हो गई है क्या मेरी माता जी की संपत्ति मुझे अकेले को प्राप्त होगी।

समाधान-

प की माता जी को जो संपत्ति आपके पिता से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई वह उन की व्यक्तिगत संपत्ति हो चुकी थी। अब आप की माता जी के देहान्त के उपरान्त आप के माताजी का उत्तराधिकार हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-15 व 16 से शासित होगा।

इन धाराओं के अनुसार सब से पहले स्त्री की संपत्ति उस के पुत्रों व पुत्रियों को प्राप्त होगी। इस तरह यदि आप के अपनी माता से कोई भाई व बहिन नहीं हैं तो फिर उनकी सारी संपत्ति आप को ही प्राप्त होगी। धारा 15 की उपधारा (2) (बी) में यह उपबंध है कि स्त्री को कोई संपत्ति यदि उस के पति या ससुर से प्राप्त हुई थी तो वह मृतका की संतानों को प्राप्त होगी। निश्चित रूप से आप का सौतेला भाई आप की माँ की संतान नहीं है। इस कारण उसे आप की माता से उत्तराधिकार के रूप में कुछ भी प्राप्त नहीं होगा।

पति से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति से पुनर्विवाह के कारण स्त्री को वंचित नहीं किया जा सकता

Muslim-Girlसमस्या-

पवन ने नरवाना, हरियाणा से पूछा है-

मेरे नाना की अचल संपत्ति है जो पुश्तैनी है। मेरे नाना के एक पुत्र और तीन पुत्रियाँ हैं। पुत्र की मृत्यु हो गयी है। उस की पत्नी ने दूसरा विवाह कर लिया है। क्या दूसरा विवाह करने के बाद भी वह स्त्री मेरे नाना की अचल संपत्ति में हिस्सा प्राप्त कर सकती है?

समाधान-

जिस क्षण एक सहदायिकी के किसी सदस्य का देहान्त होता है उस के हिस्से की संपत्ति का उत्तराधिकार निश्चित हो जाता है और उस के उत्तराधिकारी हिस्सेदार बन जाते हैं।

आप की मामी मामा का देहान्त होते ही उस सहदायिकी का हिस्सा बन गयी है जिस में आप के मामा का हिस्सा था अर्थात आप के नाना की पुश्तैनी संपत्ति में। एक बार वह हिस्सेदार हो गयी तो फिर उस के द्वारा फिर से विवाह कर लेने से उस की सहदायिकी की सदस्यता समाप्त नहीं होगी। वह अपने हिस्से के बंटवारे की मांग कर सकती है और न दिए जाने पर वह न्यायालय से बंटवारा करवा सकती है।

यदि आप के नाना की संपत्ति पुश्तैनी न हो और उन की स्वअर्जित हो तब भी हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार आप की मामी उन का हिस्सा प्राप्त करने की अधिकारी हैं। उन के दूसरा विवाह कर लेने से उन का यह अधिकार समाप्त नहीं होगा। इस संदर्भ में मद्रास उच्च न्यायालय का श्रीमती यमुना देवी बनाम श्रीमती डी नलिनी के प्रकरण में दिया गया निर्णय पढ़ा जा सकता है।

स्त्री के नाम की संपत्ति उस की व्यक्तिगत है उस में किसी का कोई हिस्सा नहीं।

rp_courtroom4.jpgसमस्या-

सर्वेश गुप्ता ने रोहता रोड़, थाना कांकेर खेड़ा, मेरठ, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मैं एक विधवा हूँ, मेरे पति का देहान्त हुए तीन वर्ष हो चुके हैं। मेरी चार बेटियाँ और 2 बेटे हैं। सभी बेटी की शादी हो चुकी है और एक बेटा विवाहित है जिसकी उमर 34 साल है और दूसरा नाबालिग जिसकी उमर 15 साल है। मेरी समस्या ये है कि मेरा बेटा और बहू मेरे मकान पर अपना कब्जा करना चाहते हैं। हम साथ ही रह रहे थे किन्तु अब उन्हें मेरे लड़के और मुझे रखने में समस्या है। वो मेरे छोटे बेटे पर झूठा मुकदमा चलवा कर उसे जेल भिजवाना चाहते हैं और मुझे घर से बाहर करना चाहते हैं। मकान में अपना आधा हिस्सा मांग रहे हैं। हमारी कमाई का कोई साधन नहीं है। मकान मेरे नाम है। क्या मेरी बहू (बड़े बेटे का मकान में हिस्सा है? क्या मैं उसे बेदखल कर सकती हूँ। अब जब उसने कब्जा कर रखा है तो क्या मैं इस मकान के सात हिस्से कर के बेच सकती हूँ। अगर बड़ा बेटा इस पर राजी नहीं होता और घर खाली नहीं करता है तो मैं मकान बेचने की हकदार हूँ? हम मकान बेचकर उसका 7वां हिस्सा देने को तैयार हैं। पर /2 हिस्सा माँग रहा है। उसके खिलाफ किस धारा के अंतगत केस कर सकती हूँ। मेरी 4 बेटी मेरी ही साइड हैं। मैं और मेरी बेटियाँ मकान बेचने को तैयार हैं क्या मे मकान बेच सकती हूँ।

समाधान-

दि यह मकान आप के नाम है तो यह आप की निजि संपत्ति है इस में किसी का कोई अधिकार नहीं हैं। आप को यह मकान स्वयं विक्रय करने, वसीयत करने, दान आदि करने का पूरा अधिकार है। आप जब चाहें यह मकान बेच सकती हैं।

आप की मूल समस्या यह है कि आप का बड़ा पुत्र और बहू इसी मकान में रह रहे हैं और एक हिस्से पर उन का कब्जा है। इस कारण कोई भी खरीददार मकान को खरीदने में हिचकेगा और मकान की कीमत कम देगा क्यों कि उसे मकान खरीदने के उपरान्त जिस हिस्से पर आप के बड़े बेटे का कब्जा है उसे भी खाली कराना पड़ सकता है।

आप को सब से पहले तो यह करना चाहिए कि सब से बेटियों और बेटों से कहना चाहिए कि मकान मेरे नाम है मेरी इच्छा होगी वैसे करूंगी, यदि ठीक से न रहे तो इस मकान को दान कर के हरिद्वार चली जाउंगी।

आप का बेटा आप की अनुमति से उस मकान में निवास कर रहा है इस का अर्थ यह है कि उस की हैसियत एक लायसेंसी की जैसी है। आप उसे नोटिस दे कर लायसेंस खत्म करें और फिर बेदखली का दावा करें। इस दावे के साथ ही इस आशय की अस्थाई निषेधाज्ञा भी प्राप्त करें कि वह जिस हिस्से में रहता है उस हिस्से के अतिरिक्त हिस्से का उपयोग न करे और अन्य हिस्से का उपयोग करने से आप को व आप के अन्य पुत्र पुत्रियों को न रोके। यदि बेटा और बहू कुछ गलत करते हैं तो आप घरेलू हिंसा अधिनियम के अन्तर्गत भी शिकायत पुलिस को कर सकती हैं।

यदि आप को कोई ऐसा खरीददार मिल जाता है जो कि आप के बड़े बेटे के रहते हुए मकान खरीदने को तैयार हो तो आप मकान बेच सकती हैं। जो धन प्राप्त हो उस का अपने हिसाब से उपयोग कर सकती हैं।

हिन्दूु स्त्री का उत्तराधिकार कैसे निश्चित होगा?

Hindu Successionसमस्या-

शोभा गुप्ता ने उज्जैन मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

क स्त्री के नाम पर एक भूखंड (स्व अर्जित आमदनी से लिया हुआ) है। वह अपने पति की दूसरी पत्नी है इस स्त्री के २ संतान हैं और २ सौतेली संतान हैं। इस स्त्री की मृत्यु के बाद इस भूखंड पर किस-किस का हक़ होगा?

समाधान-

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 14 के अन्तर्गत किसी भी हिन्दू स्त्री की संपत्ति उस की परम संपत्ति होती है। उस में किसी का अधिकार नहीं होता। वह उसे विक्रय कर सकती है, दान कर सकती है और किसी भी अन्य रीति से हस्तान्तरित कर सकती है। वह उस की वसीयत भी कर सकती है।

स्त्री के देहान्त के उपरान्त उस की संपत्ति हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 15 के अनुसार उस के उत्तराधिकारियों को प्राप्त होती है। उस के प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों में उस के पुत्र, पुत्री व पति सम्मिलित हैं, अर्थात किसी स्त्री की मृत्यु के उपरान्त जितनी संतानें होंगी उन में पति को जोड़ कर जो संख्या आएगी उन सब को उस की संपत्ति का बराबर हिस्सा प्राप्त होगा।

प के मामले में यदि उस स्त्री के पुत्री भी है तो उस की सम्पत्ति उस की मृत्यु के उपरान्त उस के दोनों पुत्रों, पुत्री व पति में बराबर बंटेगी। यदि पुत्री नहीं है तो उस के दो पुत्रों व पति तीनों को एक तिहाई हिस्सा प्राप्त होगा। उस स्त्री के सौतेले पुत्रों को और यदि सौतेली पुत्रियाँ भी हों तो उन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं होगा। क्यों कि सौतेली संतानें उस स्त्री की संतानें नहीं हैं, उस के पति की संतानें हैं। जब एक पुत्र वाली स्त्री विधवा होने या तलाक होने के बाद किसी पुरुष से विवाह करती है तो उस की संतान को अपनी माँ से तो उत्तराधिकार प्राप्त होता है लेकिन अपने सौतेले पिता से नहीं सौतेला पिता चाहे तो उस की पत्नी के पूर्व पति से जन्मी संतान को गोद ले सकता है। तब वह सौतेला न हो कर गोद पुत्र हो जाएगा और उसे औरस पुत्र की तरह सभी अधिकार प्राप्त होंगे। यही नियम माँ के संबंध में भी है, यदि सौतेली माँ अपने वर्तमान पति की पूर्व पत्नी से जन्मी संतानों को गोद ले ले तो वे भी गोद पुत्र/पुत्री हो जाएंगे और सौतेली माँ जो अब दत्तक ग्रहण करने वाली माँ हो जाएगी उस से उत्तराधिकार प्राप्त कर सकेंगे।

सब को अपने तरीके से जीने का अधिकार है।

rp_rapevictim.jpgसमस्या-

धर्मपाल ने बुधना, तहसील नारनौद, जिला हिसार हरियाणा से समस्या भेजी है कि-

मेरा छोटा भाई परमपाल हिसार जिला कारागार में धारा 302 में बन्द है भाई की घर वाली मेरे पास रहती है। कुछ समय से उस के कुछ लोगों से गलत संबंध हैं। विरोध करने पर कानूनी कार्यवाही की धमकी देती है और जान से मारने की धमकी देती है। पुलिस वाले भी उस की बात मानते हैं। उस का एक तीन साल का बच्चा है वह उस की भी केयर नहीं करती है। हमें उस औरत से जान माल का खतरा है। मैं उस से बात करता हूँ तो वह कहती है कि वह मुझे झूठे केस में सजा करवा देगी। मुझे कोई उपाय बताएँ।

समाधान-

प की समस्या मात्र इतनी है कि आप अपने छोटे भाई की पत्नी की धमकी से डर गए हैं। आप को लगता है कि वह पुलिस को झूठी रिपोर्ट करवा कर आप को फँसा देगी। आप को इस डर से निकलने की जरूरत है। डर से तो बहुत सी चीजें खराब हो जाती हैं।

प के भाई की पत्नी की स्थितियों को भी आप को देखना चाहिए। उस का पति जेल में बन्द है उसे अपने पति की अनुपस्थिति में अपने बच्चे का पालन पोषण जैसे भी करना है कर रही है। यह उस का निजी जीवन है जिसे वह अपने तरीके से अपने हिसाब से जी रही है। उसे जीने दें। आप ने यह नहीं बताया कि उस के किसी भी तरीके से जीने से आप को क्या फर्क पड़ रहा है। यदि आप को किसी तरह का नुकसान उस के आचरण से पड़ रहा हो तो आप को शिकायत हो सकती है। यदि आप ने बताया होता कि आप को क्या नुकसान हो रहा है तो हम आप को सुझाव दे सकते थे कि आप को क्या करना चाहिए।

पुलिस को आप क्या शिकायत करेंगे? यही न कि उस औरत के अनेक लोगों से नाजायज संबंध हैं। लेकिन यदि कोई औरत अपने पति के सिवा किसी अन्य से संबंध रखती है तो केवल और केवल उस औरत का पति शिकायत कर सकता है। अन्य कोई नहीं। इस कारण पुलिस को उस के निजी जीवन में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। आप पुलिस में शिकायत करेंगे भी तो पुलिस के पास ऐसा कोई कारण नहीं है जिस से वह उस के विरुद्ध कार्यवाही कर सके।

दि वह औरत आप के किसी अधिकार को नुकसान पहुँचा रही हो तो आप उस के विरुद्ध दीवानी कार्यवाही कर सकते हैं और वह कोई अपराध कर रही हो तो पुलिस को शिकायत कर सकते हैं। पुलिस वाले न सुनें तो पुलिस अधीक्षक को शिकायत की जा सकती है और आगे भी न्यायालय को सीधे परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है। लेकिन यदि उस की जीवन शैली से आप के किसी अधिकार पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा और वह कोई अपराध भी नहीं कर रही है तो आप कुछ भी नहीं कर सकते।

आप की विधवा माँ निरपराध हैं, उन्हें षड़यंत्र पूर्वक किए गए शोषण की रिपोर्ट पुलिस को करनी चाहिए।

husband wifeसमस्या-

विजय ने आगरा, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पापा का देहान्त 14.08.2002 को हुआ। हमारे पास 30 बीघा जमीन है। एक व्यक्ति ने मेरी मम्मी को बहला कर उस के साथ 2006 से अभी तक यौन शोषण किया। उस व्यक्ति का पिता हमारी मम्मी से रुपए भी लेता रहा। किन्तु वह व्यक्ति अन्य महिला से शादी कर रहा है। उस व्यक्ति के पिता को सब कुछ शुरु से ही पता था लेकिन उस ने मम्मी को अन्य लोगों को बताने से मना कर रखा था। अब मेरी माँ को क्या करना चाहिए?

समाधान-

प के पिता की मृत्यु के उपरान्त उत्पन्न परिस्थितियों में आप की माँ का किसी अन्य व्यक्ति से विवाह कर लेना अथवा लिव इन रिलेशन बना लेना कहीं भी गैर कानूनी अथवा किसी भी प्रकार से गलत नहीं है। सब से पहले तो यदि इस बात को ले कर आप की माताजी या आप के मन में किसी तरह का अपराध बोध हो तो उसे आप को निकाल देना चाहिए। तभी भविष्य में आप की माताजी और आप अपने हित सुरक्षित रख सकते हैं।

ह तो स्पष्ट हो ही गया है कि उस व्यक्ति और उस के पिता ने षड़यंत्र पूर्वक आप की व आप की माता जी की परिस्थितियों का लाभ उठाया है। किसी भी परिस्थिति में अब आप का व आप की माता जी का उस व्यक्ति और उस के पिता से संबंध रखना उचित नहीं है। आप की माताजी और आप ने किसी प्रकार का कोई गलत काम नहीं किया है इस कारण आप दोनों को डरने की कोई आवश्यक्ता नहीं है। आप दोनों को मजबूत रहते हुए उन दोंनों के षड़यंत्र को उजागर करना चाहिए।

स के पिता ने इस संबंध का लाभ उठा कर आप की माता जी से धन लिया है। यदि इस धन को लेने का सबूत हो तो आप की माताजी उस धन की वसूली के विरुद्ध दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकती हैं। य़दि सबूत न हों या हों तब भी आप की माताजी उस व्यक्ति के पिता से स्पष्ट कह सकती हैं कि वह आप का धन ब्याज सहित वापस करे अन्यथा जिस लड़की से उस का बेटा विवाह कर रहा है उसे और उस के परिजनों को सारी सच बात बता देंगी। आप की माताजी बोल्ड हो कर उस व्यक्ति के विरुद्ध षड़यंत्र करने, धन एंठने के लिए यौन संबंध बना कर आप की माताजी का शोषण करने की शिकायत पुलिस को कर सकती हैं। यदि पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती है तो किसी वकील की मदद से क्षेत्र के मजिस्ट्रेट को परिवाद प्रस्तुत करवा कर पुलिस को जाँच के लिए भिजवा सकती हैं।

औरत अगर गलती करे तो क्या कोई कानून नहीं है?

father & married daughter1समस्या-

शिवकुमार ने बहराइच, उत्तरप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी 2010 में हुई थी, तभी से मेरी बीवी अलग रहना चाहती थी पर मैं घर में अकेला कमाने वाला और सारा परिवार मेरे उपर निर्भर है। मेरे एक भाई और दो बहन हैं जो मुझ से छोटे हैं, मेरी माँ पिता जी और दादाजी सब मुझ पर निर्भर हैं। शादी के पहले महीने से घर मे क्लेश होता रहा और मेरे ससुराल वालों की नज़र मेरी प्रॉपर्टी पर थी। काफी बार झगडे हुए पर मैं ने संभाला। पर अक्सर वो मायके में ही रहना पसंद करती है और अपने माँ बाप की ही सुनती है। नतीजा यह हुआ कि मामला पुलिस तक पहुँच गया है और पिछले 4 महीनों से वह अपने मायके में रह रही है। परेशानी यह है कि मैंने उसे कई बार बुलाया पर वो आने से मना कर रही है और दहेज का केस करने को कह रही है। सब लोगों ने कहा था अगर एक बच्चा हो जायगा तो ये ठीक हो जाएगी। आज मेरे दो साल का एक सुन्दर बेटा है और वह भी सब कुछ झेल रहा है यहाँ तक कि झगड़े में मेरी बीवी ने काफी बड़ी ईंट मारी जो मेरे दो साल के बेटे के माथे में लगी। फिर भी उसे कोई गम नहीं है वह कहती कि सब आप की गलती है। अब वह अपने माँ और बाप के साथ रह रही है। मेरे अभी कुछ दिन पहले चोट लग गयी थी जब मैंने उसे बताया तो कहती कि मुझे कोई मतलब नहीं है। मैं अपना हिस्सा ले लूंगी। मैं उसे तलाक देकर अपने बेटे को पाना चाहता हूँ। क्यों कि मेरा बेटा अपनी माँ कि जगह मुझे और मेरी माँ को कि अपनी माँ कहता है। जब मेरा बेटा तीन महीने का था तब से मेरी माँ ने उसे ऊपर का दूध पिलाया और उसे संभाला। पर मेरी बीवी को तो उसकी लेट्रिन साफ़ करने में भी घिन आती थी और वो दो दो महीने तक बच्चे को छोड़ कर मायके में रहती थी। उस ने मेरे खिलाफ लगभग 6 महीने पहले वीमेन सेल में भी केस किया था। अब आप मुझे सलाह दीजिये कि किस तरह से मैं अपने बच्चे को पा सकता हूँ? क्या औरत अगर गलती करे तो कोई कानून नहीं है? सब कुछ आदमियों के लिए ही है।

समाधान-

प के परिवार में आप के सिवा आप के माताजी, पिताजी, दादाजी, भाई और दो बहनें तथा आप की पत्नी कुल आठ सदस्य हैं। आप की पत्नी को सारे घर के काम के साथ इन सब की सुनना, उन के आदेशों और इच्छाओं की पालना करना, फिर बच्चे को संभालने का काम करना है।आप यह कह सकते हैं कि सब मदद करते हैं, लेकिन फिर भी हमारे भारतीय परिवारों में इन सारे कामों का दायित्व एक बहू का ही समझा जाता है। लेकिन निर्णय करने की स्वतंत्रता सब से कम या नहीं के बराबर होती है। इस के अलावा उसे निजता (प्राइवेसी) लगभग बिलकुल नहीं मिलती। यहाँ तक कि पति के साथ बात करने का मौका रात को सोते समय मिलता है, तब तक वह इतना थक चुकी होती है कि उस स्थिति में नहीं होती। सूत्रों में बात करती है और अपनी बात तक ठीक से पति को बता तक नहीं सकती। यह मुख्य कारण है कि विवाह के बाद महीने भर बाद ही झगड़े आरंभ हो जाते हैं। ऐसे परिवारों की अधिकांश बहुएँ अलग रहने की सोचती हैं जहाँ वे हों उस का पति हो और बच्चा हो। वह केवल पति और बच्चे पर ध्यान दे। जब बहू मायके जाती है तो अपने ऊपर काम के बोझ, सुनने की बातें और भी बहुत कुछ बढ़ा चढ़ा कर बताती हैं जिस से माता पिता ध्यान दें और उस के साथ खड़े हों। फिर आप के जैसे विवाद सामने आते हैं। आप के जैसे परिवारों में इस का इलाज यही है कि परिवार को जनतांत्रिक तरीके से चलाया जाए।

मारे एक मित्र का परिवार भी इतना ही बड़ा है। यहाँ तक कि परिवार के दो सदस्य एक साथ व्यवसाय करते हैं जब कि एक सदस्य नौकरी करता है। लेकिन वे हर साल परिवार के 14 वर्ष से अधिक की उम्र के सदस्यों की एक बैठक करते हैं जिस में वे ये तय करते हैं कि कौन कौन क्या क्या काम करेगा जिस से सब को आवश्यकता के अनुसार आराम, प्राइवेसी मिल जाए। वे यह भी तय करते हैं कि परिवार की आमदनी कितनी है, उस में खर्च कैसे चलाना है, कैसे बचत करनी है। बचत में से नकद कितना कहाँ रखना है और कितना परिवार में नई वस्तुओं या स्थाई संपत्ति के लिए व्यय करना है। इस बैठक में बहुओं और बच्चों की जरूरतें और इच्छाएँ जानी जाती हैं, और उन से सभी बातों पर राय मांगी जाती है। उस के बाद लगभग सर्वसम्मति से तय होता है कि साल भर परिवार कैसे चलेगा। वर्ष के बीच आवश्यकता होने पर पूरा परिवार फिर से बैठ सकता है और महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विचार कर सकता है।

प के परिवार में भी ऐसी कोई पद्धति होती जहाँ सब अपनी बात रखते, नई बहू को भी परिवार के एक सदस्य के रूप में उस बैठक में समान महत्ता प्रदान की जाती तो शायद यह समस्या ही खड़ी नहीं होती। पर आप की पत्नी को लगता है कि परिवार में उस की महत्ता कुछ नहीं है। उस की इच्छा का कोई महत्व नहीं है। उस का काम सिर्फ लोगों के आदेशों, इच्छाओं, अपेक्षाओं की पालना करना मात्र है। सब की सारी अपेक्षाएँ उस से पूरी हो नहीं सकतीं। यही विवाद का मूल विषय है। आप की पत्नी को अपनी इस समस्या का कोई हल नहीं सूझ पड़ता है सिवा इस के कि आप, वह और बच्चा अलग रहने लगे। उस ने हल आप के सामने प्रस्तुत भी किया। आप को यह हल पसन्द नहीं। दूसरे किसी हल का प्रस्ताव आपने किया नहीं। तब उस ने अपने मायके में गुहार लगाई और मायके वालों की शरण में जा कर उस ने अपनी बात के लिए लड़ाई छेड़ दी। अब वह सारे हथियारों को आजमाने को तैयार है।

विवाह विच्छेद आप की समस्या का हल नहीं है। क्या करेंगे ऐसा कर के। बच्चा या तो आप से दूर हो जाएगा या उस की माँ से। दूसरा विवाह करेंगे, फिर एक स्त्री को पत्नी बनाएंगे। उस से भी वैसी ही अपेक्षाएँ परिवार के सब लोग रखेंगे। वह भी उन्हें पूरी नहीं कर पाएगी। फिर से एक नई जंग आप के सामने खड़ी होगी। आप की समस्या का हल है कि आप खुद समस्या के मूल को समझें फिर अपने परिवार को समझाएँ। फिर आप के मायके वालों को और सब से अन्त में अपनी पत्नी को। हमारा यह सुझाव आसान नहीं है। किसी परिवार में इस तरह का जनतंत्र पैदा करना किसी क्रांति से कम नहीं है।

प कहते हैं कि औरत की गलती के लिए कानून नहीं है। है, न वही कानून है कि यदि आप का पड़ौसी या भाई आप पर ईंट फैंकने के लिए जो कानून है वही पत्नी के लिए भी है। लेकिन एक स्त्री जो अपना परिवार छोड़ कर दूसरे परिवार को अपनाती है उसे उस परिवार में शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना मिलती है तो उस के लिए धारा 498ए आईपीसी है, उस में पति और उस के सम्बंधियों को गिरफ्तार भी किया जा सकता है और सजा भी हो सकती है। आप कहेंगे कि पुरुष के लिए भी समान कानून होना चाहिए, लेकिन मैं आप से पूछूंगा कि हमारे समाज में कितने पुरुष अपने ससुराल में बहू बन कर जाते हैं। वे जाते भी हैं तो जमाई बन कर जाते हैं। उन के लिए ऐसे कानून की जरूरत नहीं जब कि स्त्रियों के लिए वास्तव में है।

घरेलू हिंसा मामले में संरक्षा अधिकारी के कर्तव्य …

sexual-assault1समस्या-

राहुल ने कानपुर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

जिला प्रोबेशन ऑफीसर के यहाँ घरेलु हिंसा के अन्तर्गत दिया गया प्रार्थना पत्र तथा पति पत्नी से पूछताछ में पूछे गए सवाल के जवाब को जो वह नोट करता है उसे क्या कहते हैं? तथा उन जवाबों क्या महत्व है? क्या प्रोबेशन अधिकारी के यहाँ से अदालत जाने से पहले सेक्शन 9 दाखिल कर देने से 498-ए तथा अन्य में धराओं में राहत मिल सकती है। जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा भेदभाव की शिकायत किस से की जा सकती है? क्या एक महीने में एक डेट में ही प्रोबेशन अधिकारी न्यायालय को स्थानांतरित कर सकता है।

समाधान-

हिलाओँ का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम में किसी प्रोबेशन अधिकारी का उल्लेख नहीं है। इस अधिनियम में प्रोटेक्शन / संरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान है। ऐसे संरक्षा अधिकारी का कार्य किसी भी महिला के साथ घरेलू हिंसा के मामले की रिपोर्ट बना कर मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत करना तथा उस की प्रतियाँ उस थाना क्षेत्र के भारसाधक अधिकारी को व क्षेत्र के सेवा प्रदाताओं को देना है। संरक्षा अधिकारी  घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला की ओर से आवेदन भी मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है। संरक्षा अधिकारी द्वारा जो जवाब पूछे जाते हैं उन्हें उस व्यक्ति के बयान के रूप में घरेलू हिंसा की घटना की रिपोर्ट के साथ संलग्न किया जाता है। इन बयानों और घटना रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय प्रथम दृष्टया कोई राहत हिंसा की शिकार महिला को प्रदान कर सकता है।

संरक्षा  अधिकारी का कार्य हि्ंसा से पीड़ित महिला को विधिक सेवा प्राधिकरण से मिलने वाली सहायता उपलब्ध कराना,  पीडित महिला को संरक्षण गृह उपलब्ध कराना , आवश्यक होने पर पीड़िता की चिकित्सकीय जाँच करवाना, मौद्रिक अनुतोष की अनुपालना करवाना तथा घरेलू हिंसा के मामले में न्यायालय की मदद करना है।

धारा-9 का आवेदन प्रस्तुत करने का तात्पर्य मात्र इतना है कि उस से यह स्पष्ट होगा कि आप तो स्वयं ही पत्नी को रखने को तैयार है। इस से अधिक कुछ नहीं। प्रत्येक मामले का निर्णय उस मामले में साक्ष्य द्वारा प्रमाणित तथ्यों पर निर्भर करेगा।

प का अन्तिम प्रश्न समझ से बाहर है। आप किस चीज के स्थानान्तरण की बात कर रहे हैं यह लिखना शायद भूल गए। लेकिन संरक्षा अधिकारी कभी भी न्यायालय को आवेदन या घटना रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकता है।

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