तीसरा खंबा

फर्म के पर्चों के आधार पर हस्ताक्षरकर्ता और फर्म मालिक दोनों के विरुद्ध अपराधिक और दीवानी कार्यवाही की जा सकती है

समस्या-

दुर्गा नगर, राजपुर चुँगी, आगरा, उत्तर प्रदेश से अनिल कुमार कुशवाहा ने पूछा है –

मैं ने अपने पिताजी के रिटायरमेंन्ट की राशि 4,20,000/- रुपए ब्याज 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह दर पर (जिसके यहाँ मैं जून 2008 से नौकरी करता था) आपसी भरोसे पर दे दिये। उसने मुझे ट्रेड स्लिप दी जो माल के दायित्व में दी जाती है जिसे पर्चा कहा जाता है। यह पर्चा सिस्टम आगरा हींग की मंडी (जूता मार्केट) में प्रसिद्ध है।  यह पर्चा फर्म के खातों में डाला जाता है एवं आगरा इनकमटैक्स में शू ट्रेडिग में मान्य है। फर्म के नाम से छपा हुआ पर्चा जिस में दुकान का पता पेमेंन्ट की तिथि और प्रोपराइटर के हस्ताक्षर हैं। अब वह कोई ब्याज नहीं दे रहा। उसने वापस धनराशि भी देने से मना कर दिया और लड़ने के लिए तैयार हो गया। मेरे पास मनी लेन्डरिंग का कोई लाइसेंन्स नहीं है। मैं मात्र 6500/रु मासिक की नौकरी करता था पिछले छ महीने से खाली बैठा हूँ। मैने कभी इनकमटैक्स नहीं भरा, आवश्यकता नहीं पड़ी। मेरे पिताजी सेना से रिटायर होकर केन्द्र सरकार के (509 वर्कशाप आगरा) में कार्यरत हैं। पिताजी के रिटायरमैंन्ट का पैसा नगद में थोडा-थोडा कर के पांच-छः बार (नवम्वर 2010 से मार्च 2011 तक) में दिया था। जिस फर्म के पर्चे दिये हैं उसका वह (रियासत हुसैन) मालिक नहीं था। वह जूते की दूसरी फर्म फैक्ट्री का प्रोपराइटर है। दोनों फर्म एक ही स्थान पर थी जहाँ मैं एकाउन्टेन्ट का काम करता था। परिवार का मुखिया या भाइयों  में बडा होने के कारण (रियासत हुसैन) का दोनो फर्मों पर कब्जा या अधिकार रखा था। शू केयर नाम की फर्म के पर्चे हैं जिसका प्रो0 (रियासत हुसैन) का छोटा भाई फिरासत हुसैन है। शू केयर फर्म से पूँजी निकाल कर वर्ष 2011 अप्रेल में नई फर्म अलोफ शू के नाम से खोल ली है तथा मार्च 2012 में बीस साल पुरानी फर्म शू केयर को बन्द कर दिया है। जून -जुलाई 2011 में पैसे वापस मांगने पर उसने नवम्बर 2011 यानि दीवाली के बाद देने को कहा। मैं इस भरोसे था कि मैं इसके यहाँ काम कर रहा हूँ अतः मेरे साथ धोखा नहीं करेगा। जनवरी 2012 से अक्टूबर 2012 तक टालता रहा। मैं ने उससे पोस्ट डेटेड चैक देने को कहा तो चैक देने के लिए उसने मना कर दिया। कहता था थोड़े-थोड़े कर के तीन-चार साल में दूँगा। तीन-चार महीने तक के तन्खवाह के पैसे नहीं देता था। साल भर तक मानसिक क्लेश सहने के बाद परेशान होकर इसकी नौकरी छोड दी। नबम्बर 2012 में पिताजी के पैसे 420,000/व तन्खवाह के शेष 24000/का तकाजा करने पर कुछ भी देने के लिए मना कर दिया। अब वह रुपये इसलिए नहीं लौटाना चाहता क्योंकि वह सोचता है प्रिन्टेड पर्चा जिस पर उसके हस्ताक्षर हैं कानूनी कार्यवाही के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कहता है भाई की फर्म थी जो कि फेल (बन्द) हो गयी। मुझे किसी का पैसा नहीं देना मेरे भाइयों (तीन छोटे भाई हैं) ने पैसा लिया था। जबकि तीनों छोटे भाईयों को सवा साल पहले इसने बिजनेस से अलग कर दिया था इस कारण अन्य तीनों छोटे भाईयों से मुझे कोई शिकायत नहीं है। विश्वास के कारण नगद उधार देने पर बहुत लोगों के साथ धोखा हो जाता है। इस आगरा शहर के जूता व्यवसाय में पर्चे की समस्या बहुत लोगों के साथ प्रतिवर्ष होती है। फाईनेंसर के नियुक्त दलाल पर्चे के काम को (पैसे के लेन देन) हींग की मँडी आगरा मैं सडक पर खडे हो कर प्रतिदिन करते हैं। इस कारण दलाल या फाईनेंसर पुलिस कार्यवाही व कानूनी कार्यवाही में नहीं पडते। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या हस्ताक्षर करे पर्चों के आधार पर दीवानी वाद कर अपना पैसा ब्याज व कानूनी खर्चे सहित वसूल सकते हैं? दीवानी वाद के लिए इसके हस्ताक्षर करे पर्चा के अलावा इसका पेन कार्ड, राशन कार्ड, प्रोपर्टी, मकान व दो प्लाट, गाडी की आर सी व 600 ग्राम सोना (इस सभी पर बैंक से लोन लिया गया है) की फोटो कापी है। मेरे अलावा छः-सात लोगों का पूरा 15 लाख रुपया पर्चों में इसी रियासत हुसैन पर फँसा है। क्या (रियासत हुसैन) पर 420 व धोखाधडी का केस लगाया जा सकता है? क्योंकि छोटे भाई की फर्म के पर्चों हस्ताक्षर क्यों करे। और फर्म फेल (शू केयर बन्द करने से पहले) नई फर्म छोटे भाई फिरासत हुसैन ने अलोफ शू के नाम से खोल ली है एफआईआर इसलिए नहीं की क्योंकि बातचीत से मामला सुलझाना चाह रहा था। तकलीफ इस बात की है कि पाँच-छः हजार रुपये माह की नौकरी करने वाले के (मेरे हाथ से) घर से चार (4,20,000$24000) लाख रुपये और फँस गये मैं बेहद परेशान हूँ मेरे पास अन्य कोई पूँजी नहीं है जिससे मै कोई व्यवसाय कर सकूँ। कृपया मेरा उचित मार्ग दर्शन करें?

समाधान-
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विश्वास और धोका दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बिना विश्वास के कोई धोखा नहीं होता। सही विश्वास तो वही होता है जब व्यक्ति लेने देन को मौखिक या मामूली दस्तावेजों के आधार पर नहीं करता है। रुपया जब भी उधार दिया जाए कभी भी फर्म या कंपनी के नाम से नहीं देना चाहिए अपितु व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर ही देना चाहिए और उस का लिखत स्टाम्प पेपर पर लिखवा कर नोटेरी से सत्यापित करवा लेना चाहिए। खैर, अभी तक जो हो चुका है उस का तो कुछ नहीं किया जा सकता। आप को आगे की कार्यवाही के बारे में सोचना चाहिए। आप का कहना है कि आप के पास मनी लेंडिंग का लायसेंस नहीं है। यदि किसी के पास रुपया है और वह उस रुपए को किसी संबंधी, मिलने वाले को या व्यापारिक संबंधों के कारण उधार देता है तो ऐसी देनदारी के लिए मनीलेंडिंग का लायसेंस होना आवश्यक नहीं है।

प का यह मामला पूरी तरह से भा.दंड संहिता की धारा 420 से 424 तक में गंभीर अपराध करने का मामला है। आप को तुरन्त प्रथम सूचना रिपोर्ट संबंधित पुलिस थाना में करानी चाहिए। यदि पुलिस थाना रिपोर्ट दर्ज करने से मना करे तो किसी अच्छे वकील के माध्यम से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करना चाहिए। इस मामले में आप को रियासत हुसैन और फिरासत हुसैन दोनों के विरुद्ध मामला चलाना चाहिए क्यों कि रियासत हुसैन के पर्चों पर हस्ताक्षर हैं तथा उस ने फिरासत हुसैन की फर्म के पर्चों का उपयोग किया। इस तरह इस छल में फिरासत हुसैन की सहमति भी थी। यह इस लिए भी जरूरी है कि फिरासत हुसैन के इस मामले में लिप्त हो जाने से वह रियासत हुसैन पर दबाव भी बनाएगा।

स के अतिरिक्त आप रूपयों व ब्याज की वसूली के लिए रियासत हुसैन के विरुद्ध दीवानी दावा भी कर सकते हैं। पर्चों पर रियासत हुसैन के हस्ताक्षर हैं। लेकिन पर्चे हिरासत हुसैन के स्वामित्व की फर्म के नाम से हैं। इस कारण से यह दावा रियासत हुसैन व हिरासत हुसैन की फर्म दोनों को प्रतिवादी बनाते हुए करना चाहिए। फर्म हिरासत हुसैन के जरिए पक्षकार बनेगी तथा फर्म के समन हिरासत हुसैन को तामील कराए जाएंगे। हमें पूरा विश्वास है कि यदि सही कानूनी कार्यवाही की गई तो आप को आप का पैसा ब्याज सहित वापस मिल जाएगा। कार्यवाही में समय तो अवश्य लगेगा।

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