तीसरा खंबा

मुस्लिम तलाक़ और भरण पोषण की विधि

समस्या-

जयपुर, राजस्थान से साबिर अली ने पूछा है –

मेरी बीवी को मैं ने दो साल पहले तलाक़ दे दिया। लेकिन उस ने महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम-2005 व धारा 498-ए में मुकदमे कर दिए हैं। न्यायालय ने उसे 1000 रुपए प्रति माह भरण पोषण राशि देने का आदेश दिया था। इस आदेश की अपील करने पर दो हजार रुपया प्रतिमाह भरण पोषण राशि देने का आदेश दिया है। मैं कुल 4000 रुपए प्रतिमाह कमाता हूँ। जब कि उस की माँ सरकारी नौकरी करती है और उस का वेतन 25000 रुपए प्रतिमाह है। अब मैं क्या करूँ?

समाधान-

तलाकप कहते हैं कि आप ने अपनी बीवी को दो साल पहले तलाक दिया। लेकिन ये तो आप समझते हैं कि आप ने तलाक दे चुके हैं, लेकिन इस बात को अदालत समझेगी तब न। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि एक बार कागज पर तलाक लिख कर दे देना या एक बार में तीन दफे तलाक कह देने से तलाक नहीं होता। शमीम आरा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गोहाटी उच्च न्यायायलय के रूकिया ख़ातून के केस में प्रतिपादित सिद्धान्त को मुस्लिम तलाक के मामले में अंतिम माना है। इस में कहा गया है कि –

(i)                 that ‘talaq’ must be for a reasonable cause; and

(ii)               that it must be preceded by an attempt of reconciliation between the husband and the wife by two arbiters, one chosen by the wife from her family and the other by the husband from his. If their attempts fail, ‘talaq’ may be effected.

 अर्थात तलाक़ के किसी भी मामले में दो बातें जरूरी हैं।

(1)     तलाक़ किसी उचित कारण के लिए होना चाहिए,

(2)     तलाक़ के पहले शौहर और बीवी के बीच दो मध्यस्थों के माध्यम से समझौते की कोशिश होनी चाहिए जिस में से एक शौहर द्वारा चुना गया होना चाहिए और दूसरा बीवी द्वारा चुना गया होना चाहिए। समझौते की कोशिश असफल होने पर ही तलाक को प्रभावी माना जा सकता है।

ब आप खुद परख लें कि आप ने अपनी बीवी को जो तलाक दिया वह वास्तव में तलाक है या नहीं है। आप के दवारा दिए गए तलाक में यदि ऊपर लिखी दोनों बातें हैं तो फिर आप का तलाक सही है अन्यथा अदालत यह मानेगी कि आप दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ है।

प की पत्नी ने आप के विरुद्ध खर्चे के लिए मुकदमा किया और धारा 498-ए की शिकायत भी की। जहाँ तक 498-ए की शिकायत का सवाल है तो वह बीवी होने पर ही की जा सकती है। यदि आप का तलाक सही होगा और बीवी की क्रूरता पूर्ण व्यवहार की शिकायत उस समय के बाद की होगी तो वहाँ इस आधार पर आप को कुछ राहत मिल सकती है। खैर यह तो गवाहों और सबूतों पर निर्भर करेगा कि धारा 498-ए के मामले में आप को राहत मिलेगी या नहीं।

भारत में बीवी के भरण पोषण दिलाने का जो कानून है उस के संबंध में डेनियल लतीफ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बीवी को तलाक के बाद भी जब तक बीवी दूसरा निकाह नहीं कर लेती है तब तक भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार है। इस कारण आप का तलाक सही मान लेने पर भी आप को कोई राहत नहीं मिल सकेगी।

प का कहना है कि अदालत ने हजार रुपया प्रतिमाह खर्चा देने को कहा। फिर अपील कोर्ट ने उसे 2000 रुपया महिना कर दिया।  आप ने नहीं बताया कि अपील किस ने की थी। यदि आप ने की थी तो आप ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी। इधर आप अकेले हैं उधर आप की बीवी अकेली है अदालत ने 1000 बीवी को दिलाया और 3000 आप के पास छोड़े तो निश्चित ही बीवी के साथ इंसाफ नहीं हुआ था। अब अपील में दोनों के पास बराबर रहने दिया तो क्या गलत किया? आप कहते हैं कि बीवी की माँ सरकारी नौकरी में है और उस की तनख्वाह 25000 रुपया प्रतिमाह है। तो वह उस की माँ की बात है। आप की बीवी आप की जिम्मेदारी है उस की माँ की नहीं।

प यदि वास्तव में केवल 4000 हजार कमाते हैं, तो कम कमाते हैं। आप को कोशिश करनी चाहिए कि आप ज्यादा कमाएँ। जितना ज्यादा कमाएंगे उतना ही आप के काम आएगा या बचेगा। यही एक मात्र रास्ता है। दूसरा रास्ता ये है कि आप मान लें कि तलाक गलत हुआ था। बीवी को साथ रहने के लिए मनाएँ और उस के साथ जिन्दगी बिताएँ। परिवार में मियाँ बीवी के बीच झगड़े आम बात है लकिन परिवार एक दूसरे को मनाते रहने से ही चलता है, झगड़े बढ़ाने से नहीं।

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