तीसरा खंबा

सशुल्क सेवा (value added services) की संविदा को साबित करने का भार मोबाइल कंपनी पर है

 जीवाश्व ने पूछा है –
 
मोबाइल कंपनी ने ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ के वायदे को तोड़ा। खुद कंपनी की ओर से अनचाहे व्यवसायिक फोन आए जिन में सशुल्क सेवाएं (value added services) आरंभ करवाने का आग्रह किया गया। फिर बिना अनुमति सशुल्क सेवाएँ आरंभ कर दी गईँ। जब मोबाइल कंपनी को शिकायत की गई तो कस्टमर केयर पर बात करने वाला शख्स अनजान बन गया। जब उसे बार-बार कहा गया कि ऐसा किया गया है तो उस ने बद्तमीजी के साथ बात करते हुए कहा कि तुम्हारी अनुमति पर ही सशुल्क सेवाएँ आरम्भ की गई हैं और आगे बात करने से इन्कार कर दिया। जब कि मुझे पता है कि मुझे जब भी सशुल्क सेवाओं के लिए कोई फोन मिला तो मैं ने हर बार उन के लिए मना किया था। लेकिन मना करने की कोई साक्ष्य मेरे पास नहीं है। जब मैं ने कंपनी से इस की साक्ष्य मांगी तो उन्हों ने देने से मना कर दिया। मुझे अब क्या करना चाहिए?
 उत्तर – 

जीवाश्व जी,

प व्यर्थ ही परेशान हो रहे हैं। इस का कारण है कि आप को विधि और उस की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। सब से पहले तो कंपनी के पास इस बात का सबूत होना चाहिए कि आप ने उन्हें आप को व्यवसायिक फोन करने की अनुमति दे रखी है। यह उन के पास नहीं है। कंपनी ने आप को बार-बार सशुल्क सेवाएँ आरंभ कराने को फोन किया और आप ने ऐसी सेवाएँ आरम्भ कराने से इन्कार कर दिया। यदि आप ने अपनी सहमति दी है तो भी कंपनी के पास सहमति का सबूत होना चाहिए। यदि ऐसी सहमति कंपनी के पास नहीं है तो सशुल्क सेवाएँ प्रदान करने की कोई संविदा कंपनी की आप के साथ हुई ही नहीं है। ऐसी स्थिति में आप को सशुल्क सेवाएँ प्रदान करने और प्रदान की हुई सेवाओं का शुल्क वसूल करने का कोई अधिकार कंपनी को नहीं है। यह साबित करने का भार कंपनी का है कि आप के और कंपनी के बीच सशुल्क सेवाएँ प्रदान करने के लिए कोई संविदा हुई थी।

प को चाहिए कि आप किसी वकील के माध्यम से कंपनी को एक विधिक सूचना (Legal Notice) रजिस्टर्ड ए.डी. डाक से भिजवाएँ। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से अंकित करें कि कंपनी ने ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ के वायदे को तोड़ा है और खुद कंपनी की ओर से अनचाहे व्यवसायिक फोन कर के सशुल्क सेवाएं आरंभ करवाने का आग्रह किया गया। फिर बिना अनुमति सशुल्क सेवाएँ आरंभ कर दी गईँ। जब मोबाइल कंपनी को शिकायत की गई तो कस्टमर केयर पर बात करने वाला शख्स अनजान बन गया। जब उसे बार-बार कहा गया कि ऐसा किया गया है तो उस ने बद्तमीजी के साथ बात करते हुए कहा कि तुम्हारी अनुमति पर ही सशुल्क सेवाएँ आरम्भ की गई हैं और आगे बात करने से इन्कार कर दिया। ऐसी अनुमति का सबूत मांगे जाने पर देने से इन्कार कर दिया। ऐसा करके कंपनी ने आप की मानसिक शान्ति भंग की है, आप को आर्थिक नुकसान पहुँचाया है। वह सभी सशुल्क सेवाएँ बन्द करे और अब उन के लिए लिया जा चुका धन ब्याज सहित आप को वापस लौटाए, मानसिक संताप पहुँचाने के लिए हर्जाना अदा करे और यदि निश्चित समय में कंपनी ऐसा नहीं करती है तो आप उपभोक्ता अदालत में कंपनी के विरुद्ध मुकदमा करेंगे।
स नोटिस के बाद कंपनी आप से बात कर के मामले को आपस में सुलझा लेती है तो ठीक है अन्यथा आप को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच के समय़ अपनी शिकायत प्रस्तुत करनी चाहिए।
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