तीसरा खंबा

सहदायिक सम्पत्ति में पुत्रियों को जन्म से अधिकार 9 सितंबर 2005 से ही

समस्या-

जयपुर, राजस्थान से विजय ने पूछा है –

मैं ने एक संपत्ति जिन से खरीदी है उन का एचयूएफ (हिन्दू अविभाजित परिवार) खाता है। हम ने चैक एचयूएफ के नाम से ही दिया है। जिस व्यक्ति के नाम से एचयूएफ है उस के केवल एक पुत्री है जिस के चार पुत्र हैं। सब से बड़ा लड़का अपने नाना के पास रहने लगा और एचयूएफ में शामिल हो गया। नाना के मरने के बाद एचयूएफ का कर्ता हो गया। अब उस के तीन भाई उस में हिस्सा लेंगे क्या?

समाधान-

में आप के प्रश्न में एक बात समझ नहीं आई कि जो संपत्ति जिस एचयूएफ के नाम थी उस के नाम से चैक दे कर आप ने उस सम्पत्ति को खरीद लिया।  इस तरह एचयूएफ की संपत्ति के विक्रय का मूल्य एचयूएफ खाते में पहुँच गया है। इस कारण आप के द्वारा खरीदी गई संपत्ति को तो किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। आप सुरक्षित हैं। यदि कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि एचयूएफ की संपत्ति के विक्रय का हिस्सा उसे नहीं मिला तो इस दावे से भी आप पर या आप की खरीदी हुई संपत्ति पर नहीं पड़ेगा। इस के बावजूद आप को क्या परेशानी है जो आप यह प्रश्न पूछ रहे हैं?

शायद आप को यह आशंका है कि कहीं संयुक्त हिन्दू परिवार के पूर्व मुखिया के अन्य नाती आप को उक्त संपत्ति बेचने पर आपत्ति न कर दें। लेकिन ऐसा नहीं है। किसी भी एचयूएफ का कर्ता एचयूएफ की तरफ से उस की संपत्ति विक्रय कर सकता है जिस पर एचयूएफ के सदस्य आपत्ति नहीं कर सकते। फिर जिन से आप को आशंका है वे सभी तीन भाई सहदायिक होने पर ही एचयूएफ की संपत्ति पर अपना अधिकार रख सकते हैं। उन का अधिकार सिर्फ अपनी माँ के माध्य़म से ही हो सकता है। उन की माँ एचयूएफ के कर्ता की विवाहित पुत्री है। पुत्रियों को 9 सितंबर 2005 से ही जन्म से सहदायिक संपत्ति में अधिकार प्राप्त हुआ है इस से पहले नहीं। आप का मामला इस से पहले का है। इस कारण पुत्री को सहदायिक संपत्ति में अधिकार प्राप्त नहीं हुआ है। उस के पुत्रों को भी सहदायिक संपत्ति में कोई अधिकार नहीं है। सब से बड़ा लड़का जो इस समय अपने नाना द्वारा निर्मित एचयूएफ का कर्ता है उसे भी उस सहदायिकी में प्रवेश एक गोद पुत्र के रूप में ही प्राप्त हुआ होगा। आप चाहें तो इस तथ्य की पुष्टि कर सकते हैं।

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