ललित कुमार पूछते हैं –
मेरा विवाह नवम्बर 2008 में हुआ है। मेरी पत्नी घर का काम नहीं करती है और मुझे मेरे घर से अलग रखना चाहती है। मेरे पिताजी हृदयरोगी हैं, उन्हें दो बार हृदयाघात हो चुका है और मेरी माताजी वृद्ध हैं। मेरी पत्नी अपने मायके चली गई है और कहती है कि तब तक नहीं आएगी जब तक मैं अपने पिता से अलग नहीं हो जाता हूँ। उस की इस बात में मेरे सास-ससुर भी समर्थन करते हैं। मेरे पिता जी डरते हैं कि दहेज का मामला लगा कर जेल करवा देंगे। मैं बहुत परेशान हूँ, क्या करूँ?
उत्तर –
ललित जी,

आप का विवाह हुए कुल ढाई वर्ष हुए हैं। इस पूरे काल में आप की पत्नी का व्यवहार कैसा रहा है इस संबंध में आप ने कुछ भी नहीं बताया है। स्त्रियों का विवाह होता है तो उन की कल्पना में एक सामान्य वैवाहिक जीवन होता है। लेकिन यदि किसी स्त्री को अपने ससुराल में पति और सास-ससुर तीनों की जिम्मेदारी उठानी पड़ जाए और उस काम में किसी का सहयोग प्राप्त नहीं हो, उलटे उसे ताने सुनने को मिलें तो यह स्थिति आ जाती है। हर कोई उस से अधिकार पूर्वक काम करने को आदेश देने लगता है। तब स्त्री यह सोचने लगती है कि वह कोई नौकरानी तो है नहीं जो सारे घर का काम करेगी। अति हो जाए तो आप के जैसी स्थिति आ ही जाती है। मुझे नहीं लगता कि आप के वैवाहिक जीवन में और कोई परेशानी है। आप अपनी ससुराल जाएँ और अपनी पत्नी और अपने सास-ससुर से बात करें। उन्हें कहें कि माता-पिता को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। यदि उन के स्वयं के बच्चे उन्हें ऐसी ही हालत में अकेला छोड़ दें तो उन्हें कैसा लगेगा। हाँ, वे काम का आधिक्य और ताने मारने जैसी शिकायत करें तो वह वाजिब होगी। उस का हल निकालने का प्रयत्न करें। उस के लिए घर में एक पार्ट-टाइम नौकरानी की व्यवस्था करने का प्रयत्न करें जो झाड़ू, पोचा और बरतन साफ करने जैसा काम कर ले। अपने माता-पिता को भी समझाएँ कि वे अपनी पुत्र-वधु की सेवाएँ प्रेम से ही प्राप्त कर सकते हैं, अधिकार जता कर नहीं। मेरा सोचना है कि इस तरह बात बन सकती है। एक प्रयास में न बने तो अधिक प्रयास करें।
जहाँ तक दहेज के मुकदमे से डरने की बात है। यदि आप ने या आप के परिजनों ने दहेज के संबंध में कभी कुछ भी आप की पत्नी से नहीं कहा है (जो असंभव जैसा है) तो डरने की कोई बात नहीं है। यदि कहा भी हो तो भी डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। आखिर डर कर जिया तो नहीं जा सकता है। यदि ऐसा कुछ होता है तो डरने के स्थान पर उस का मुकाबला करें। वैसे भी आज कल दहेज और स्त्री के प्रति क्रूरता के मामले पुलिस आसानी से दर्ज नहीं करती। यदि कोई मामला दर
्ज हो भी जाए तो अपना पक्ष पूरी स्पष्टता और मजबूती के साथ पुलिस के सामने रखें। यदि मामला आपसी बातचीत से हल नहीं होता है तो परिवार सलाह केंद्र में आप स्वयं आवेदन कर उन की मदद लें। यदि आप के आसपास काउंसलर सेवाएँ उपलब्ध हों तो उन की मदद भी ले सकते हैं।