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प्रक्रियागत नियम न होने पर न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियाँ

समस्या

राहुल ने अजमेर राजस्थान से पूछा है-

हमने उपखण्ड अधिकारी न्यायालय में राजस्थान कास्तकारी अधिनियम की धारा 251 अ के अंतर्गत नए रास्ते के लिए आवेदन कर रखा है। उपखण्ड अधिकारी के आदेशानुसार पटवारी ने नए रास्ते के लिए 2 विकल्प बातये हैं, और कुछ विकल्प छोड़ दिए हैं।  जब कि उपरोक्त दोनों विकल्पों से अच्छा विकल्प छोड़ दिया है।  मैंने जब पटवारी से बात करी तो उसने कहा की उपखण्ड अधिकारी से रिवाइज्ड रिपोर्ट बनवाने का आर्डर करवा दो, फिर मैं रिवाइज्ड रिपोर्ट बना दूंगा।  क्या उपखण्ड अधिकारी से वापस मौके की रिवाइज्ड रिपोर्ट बनवाने का निवेदन किया जा सकता है? यदि निवेदन किया जा सकता है तो किस आधार पर किया जा सकता है? क्या रिवाइज्ड रिपोर्ट मंगवाने का कोई विधि सम्मत नियम है क्या? और क्या उपखण्ड अधिकारी रिवाइज्ड रिपोर्ट के निवेदन को मान सकता है?

समाधान –

आप की समस्या न्यायालय की प्रक्रिया से संबद्ध है। राजस्थान कास्तकारी अधिनियम तथा भू-राजस्व अधिनियम दोनों में तहसीलदार या पटवारी की रिपोर्ट मंगाने के संबंध में किसी तरह का कोई उपबंध नहीं है। लेकिन तहसीलदार और पटवारी दोनों एक उपखंड अधिकारी के अधीनस्थ होते हैं और वे न्याय करने में आसानी के लिए उन से मदद ले सकते हैं। न्यायालय ने मौके की स्थिति और रास्ते के विकल्प जानने के लिए पटवारी की रिपोर्ट मंगाई है। आप के अनुसार मौके की रिपोर्ट में कुछ विकल्प और सब से आसान विकल्प छूट गए हैं।

राजस्थान के राजस्व न्यायालयों में प्रक्रिया के दीवानी प्रकिया संहिता प्रभावी है। इस की धारा 151 में न्यायालयों को अंतर्निहित शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं जो निम्न प्रकार है-

  1. Saving of inherent powers of court.-Nothing in this Code shall be deemed to limit or otherwise affect the inherent power of the court to make such orders as may be necessary for the ends of justice, or to prevent abuse of the process of the court.

151- न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियोँ की व्यावृत्ति – इस संहिता की किसी भी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह ऐसे आदेशों के देने की न्यायालय की अन्तर्निहित शक्ति को परिसीमित या अन्यथा प्रभावित करती है, जो न्याय के उद्देश्यों के लिएया न्यायालय की आदेशिका के दुरुपयोग का निवारण करने के लिए आवश्यक है।

इस तरह जब प्रक्रियागत किसी बात के लिए संहिता या अन्य कानून में कोई विधि या नियम न हो तो न्याय हित में न्यायालय अपनी अंतर्निहित शक्तियों के अंतर्गत आदेश दे सकता है।

आप के मामले में भी यह हो सकता है। आप धारा 151 सीपीसी के अंतर्गत आवेदन न्यायालय को दे सकते हैं, और न्यायालय को यह बता सकते हैं कि पटवारी की रिपोर्ट में इस से भी आसान रास्ते का विकल्प छूट गया है, इस आवेदन में आप स्वयं विकल्प सुझाते हुए यह निवेदन कर सकते हैं कि आप के द्वारा बताए गए विकल्प या विकल्पों पर पटवारी की रिपोर्ट मंगाई जाए। इस आवेदन की सुनवाई कर न्यायालय पुनः पटवारी की रिपोर्ट मंगा सकता है अथवा आप के द्वारा इस आवेदन में सुझाए गए आसान विकल्प के संबंध में स्वयं निर्णय दे सकता है।


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