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बेईमानी पूर्ण छल के लिए पुलिस में रिपोर्ट कराएँ और धन वसूली के लिए दीवानी वाद संस्थित करें।

समस्या –

मनीषा ने विकास नगर, कोंडगाँव, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मेरे समाज वाले व सहेली के पति ने अपनी पत्नी के सामने मुझसे 50000 रुपये 2 महीने के लिये मांगे थे। मैंने परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्टाम्प पर लिखवा कर उनको पैसे दिए।  1 महीने बाद शहर छोड़ कर भाग गया, अब जब मुझे अपने पैसे वापस चाहिये तो मुझे बोलते हैं कि  मैं तो कंगाल हूँ, सब अपनी बीवी के पास छोड़ आया हूँ, जा के उससे पैसे मांगो,  उसको टॉर्चर करो, मैं कहाँ से दूंगा। मैंने हर संभव कोशिश कर ली, पर वो किसी चीज़ से नहीं डरता। धीरे धीरे भी पैसे वापस करने का नाम नहीं ले रहा । उसकी पत्नी ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया के मैं खुद अपने भाई के दरवाजे पर हूँ, कहाँ से तुमको पैसे दूँ। वो आदमी और भी बहुत लोगों से पैसे लेकर गया है। मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

सा प्रतीत होता है कि सहेली के पति ने जानबूझ कर अपनी पत्नी को परेशान करने की नीयत से आप से रुपया लिया है और अब पल्ला झाड़ रहा है। यदि आपने स्टाम्प पर लिखवाया है तो आप अपने धन की वसूली के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकती हैं। यह वाद रुपया देने और स्टाम्प लिखे जाने की तारीख से तीन साल के भीतर किया जा सकता है। इस तरह आप स्टाम्प लिखे जाने की तिथि से तीन साल पूरे होने के दो माह पहले तक धन वापसी के लिए दूसरे प्रयास कर सकती हैं। लेकिन तीन साल पूरे होने के दो महीने पहले ही किसी वकील से मिल कर दीवानी वाद संस्थित कर दें, उस में कोताही नहीं करें।

इस व्यक्ति ने आप के साथ ही छल और बेईमानी की है जो कि धारा 420 आईपीसी व अन्य धाराओं के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। इस कारण आपको तुरन्त उस व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट लिखानी चाहिए। आम तौर पर पुलिस वाले इस तरह के मुकदमों को दर्ज करने में आनाकानी करते हैं। पुलिस को रिपोर्ट देने के बाद एक दो दिन में कार्यवाही न होने पर एस पी को लिखित में परिवाद पूरे विवरण के साथ रजिस्टर्ड एडी से भिजवाएँ। एक सप्ताह में भी कोई कार्यवाही न होने पर किसी वकील से संपर्क कर के न्यायालय में अपराधिक परिवाद दर्ज कराएँ। अपराधिक कार्यवाही के दबाव में आप का पैसा वसूल हो जाए तो ठीक अन्यथा स्टाम्प लिखे जाने की तिथि के तीन साल पूरे होने के पहले अपना रुपया वसूली का मुकदमा अदालत में जरूर लगा दें।

दोनों ही मामलों में आप अपनी सहली के विरुद्ध कोई कार्यवाही न करें बल्कि उसे गवाह बनाएँ क्यों कि वह इस वक्त आपका साथ जरूर देगी।

बड़े चारसौबीस हो जी!

श्री विजय धाकड़ जानना चाहते थे कि धारा-420 क्या है? पिछले आलेख में चारसौबीस को जानने के लिए हमने जाना कि छल क्या है? जो धारा-415 भा.द.संहिता में वर्णित है। आज जानते हैं कि धारा-420 भा.दं.संहिता क्या है?

धारा-420 
छल करना और संपत्ति परिदत्त करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करना
जो कोई छल करेगा और उस के द्वारा उस व्यक्ति को जिसे प्रवंचित किया गया है, बेईमानी से उत्प्रेरित करेगा कि वह कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे, या किसी मूल्यवान प्रतिभूति को, या किसी चीज को जो हस्ताक्षरित या मुद्रांकित है, और जो मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किए जाने योग्य है, पूर्णतः या अंशतः रच दे, परिवर्तित कर दे, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिस की अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा।
हम ने विगत आलेख में छल को जाना था, जिस में कपट पूर्वक या बेईमानी से प्रवंचना से उत्प्रेरित कर किसी व्यक्ति को आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, सांपत्तिक या ख्याति संबंधी क्षति पहुँचाना सम्मिलित था। लेकिन जब यही छल किसी संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति को परिदत्त  कर देने के लिए  या मूल्यवान प्रतिभूति या किसी अन्य हस्ताक्षरित या मुद्रांकित वस्तु जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता हो की रचना करने के लिए किया जाता है तो वह और गंभीर अपराध हो जाता है जो कि इस धारा-420 के अंतर्गत दण्डनीय है।
से हम इस तरह समझ सकते हैं कि कोई व्यक्ति छल कर के किसी व्यक्ति को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है जिस से वह व्यक्ति अपनी किसी संपत्ति या उस के अंश को किसी अन्य व्यक्ति को परिदत्त कर दे तो यह धारा-420 के अंतर्गत दंडनीय अपराध का दोषी होगा।
दि कोई व्यक्ति किसी कागज पर किसी व्यक्ति के हस्ताक्षर बना कर उस के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति से कोई संपत्ति प्राप्त करता है तो वह इस धारा के अंतर्गत दंडनीय अपराध करेगा।
कोई व्यक्ति एक सही दस्तावेज हासिल करता है जिस के माध्यम से कोई संपत्ति हस्तांतरित होनी है। यदि वह व्यक्ति उस दस्तावेज को आंशिक रूप से बदल देता है कि उसे संपत्ति का अधिक भाग प्राप्त हो जाता है तो वह इस धारा के अंतर्गत दंडनीय अपराध करता है।
स तरह छल कर के बेईमानी से संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति या मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित होने वाली हस्ताक्षरित या मुद्रांकित कोई वस्तु प्राप्त करने या किसी अन्य व्यक्ति को प्राप्त कराने के लिए किया गया हर कृत्य धारा-420 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ जाता है। इस धारा का बहुत व्यापक प्रभाव है। इस कारण से इस का उपयोग बहुत होता है। यही कारण है कि बेईमानी करने वाले हर व्यक्ति को चारसौबीस कहा जाने लगा है। यहाँ तक कि मजाक करने पर भी यह तमगा मिल सकता है कि चारसौबीस है। कभी तो प्रेमिका या पत्नी भी किसी बहाने से उस के साथ शरारत करने पर कह सकती है कि -बड़े चारसौबीस हो जी! 

चारसौबीसी के पहले जानिए कि छल क्या है?

ताश खेली जा रही है। एक खिलाड़ी चुपके से पत्ता बदल लेता है। दूसरा कहता है -देख भाई खेल में चारसौबीसी नहीं चलेगी। हम होली पर आलू से एक मोहर बनाया करते थे जिस का ठप्पा मार देने पर ‘420’ छप जाया करता था। होली पर यह आसान मजाक था। चारसौबीस का यह अंक इतना नामी या बदनाम है कि इस का उपयोग बेपढ़े लिखे से लेकर पीएचडी किया डाक्टर तक करता है। लेकिन यह पैदा कहाँ से हुआ? आज यही बताया जाए। वास्तव में तीसरा खंबा के एक पाठक श्री विजय धाकड़ ने पूछा है कि ये चारसौबीस धारा क्या है? 
तो चलिए जानते हैं ये चारसौबीस और चारसौबीसी असल में क्या है?
भारतीय दंड संहिता की धारा चारसौबीस (420) छल करने और छल के माध्यम से संपत्ति परिद्त्त करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करने के लिए दंड का प्रावधान करती है।
स धारा में ‘मूल्यवान प्रतिभूति’ शब्द का प्रयोग हुआ है, जिस का अर्थ है ऐसा कोई दस्तावेज जिस पर हस्ताक्षर किए गए हों या मुहर अंकित की गई हो और जिसे किसी संपत्ति में परिवर्तित किया जा सकता हो। यह कोई भी दस्तावेज हो सकता है, यहाँ तक कि खाली कागज भी हो सकता है जिस पर किसी के हस्ताक्षर ले लिए गए हों।
स के अतिरिक्त ‘छल’ शब्द का भी प्रयोग हुआ है जिसे भारतीय दंड संहिता की धारा-415 में अलग से परिभाषित किया गया है।  अब 420 को समझने के लिए यह जरूरी है कि पहले 415 को समझ लिया जाए।
धारा-415 भा.दं.सं.
कोई किसी व्यक्ति से प्रवंचना कर के इस तरह प्रवंचित किए गए व्यक्ति को कपटपूर्वक या बेईमानी से उत्प्रेरित करे कि वह कोई संपत्ति किकसी अन्य व्यक्ति को परिदत्त कर दे या सम्मति दे दे कि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को रखे या इरादे के साथ उस व्यक्ति को जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है उत्प्रेरित करे कि वह ऐसा कार्य करे या न करे जिसे वह इस तरह प्रवंचित नहीं किया गया होता तो नहीं करता या करने का लोप नहीं करता, और जिस कार्य या लोप से उस व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक. ख्याति संबंधी या सांपत्तिक नुकसान या अपहानि कारित होती है या कारित होनी संभाव्य हो जाती है तो यह कहा जाएगा कि उस व्यक्ति ने छल किया है। किसी या किन्हीं तथ्यों को छिपाना यहाँ प्रवंचना करना है।
म इसे कुछ उदाहरणों से समझ सकते हैं-
1. कोई व्यक्ति यह झूठ बोल कर कि वह सरकारी नौकर है इरादतन किसी दुकानदार को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है जिस से वह दुकानदार उसे उधार माल दे देता है जिस का मूल्य चुकाने का उस का कोई इरादा नहीं है,तो यह कहा जाएगा कि वह छल करता है।
2. कोई व्यक्ति किसी वस्तु पर फर्जी चिन्ह बना कर यह प्रदर्शित करता है कि वह वस्तु किसी प्रसिद्ध कंपनी द्वारा बनाई हुई है और उसे खरीदने और उस का मूल्य चुकाने के लिए प्रेरित करता है, तो यह कहा जाएगा कि वह छल करता है।
3. कोई व्यक्ति नकली सेंपल दिखा कर किसी को कोई वस्तु खरीदने और उस का मूल्य प्रदत्त करने के लिए प्रेरित करता है तो कहा जाएगा कि वह छल करता है।

4. कोई ऐसे नगों को जो कि हीरे नहीं है हीरा बता कर विक्रय करता है या गिरवी रख कर धन प्राप्त करता है तो कहा जाएगा कि वह छल करता है।
5. कोई यह विश्वास दिलाता है कि उस के पास माल तैयार है, आप धन दे दीजिए आप को माल तुरंत भिजवा दिया जाएगा। लेकिन उस वक्त तक माल तैयार नहीं किया गया है। तो कहा जाएगा कि वह छल करता है।
इस तरह अब आप समझ गए होंगे कि ‘छल’ करना क्या है। हम अब यह समझ सकते हैं कि ‘420’ क्या है? लेकिन आज ‘छल’ का पाठ ही बहुत लंबा हो गया है। चलिए चारसौबीसी को अगले आलेख के लिए बचा कर रखते हैं। 
अगले आलेख में जानिए चारसौबीसी क्या है?
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