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पंजीकृत विक्रय पत्र को निरस्त कराने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर निरस्तीकरण की डिक्री प्राप्त करें।

समस्या-

संतपाल वर्मा ने मखदुमपुर, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ से पूछा है-

हमारे पिताजी से किसी व्यक्ति (क) ने धोखे से पॉवर ऑफ अटॉर्नी वर्ष 1994 में करवा ली। और उसने वर्ष 1995 में तीसरे व्यक्ति के नाम विक्रय करने का एग्रीमेंट (बिना रजिस्ट्री के) निष्पादित कर दिया। जब हमारे पिताजी को इस मामले का पता चला तो उन्होंने वर्ष 1998 में पॉवर ऑफ अटॉर्नी निरस्त करवा दी। अब उन्होंने उसी निरस्त पॉवर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर 2018 में रजिस्ट्रार विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी रजिस्ट्री करवा ली। हमने यह शिकायत पुलिस थाना में की पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है, कृपया हमें बताए हम अब क्या करें।

समाधान-

आप के पिताजी को चाहिए कि वे जिस उप पंजीयक ने यह विक्रय पत्र पंजीकृत किया है उस के उप महानिरीक्षक पंजीयन को आवेदन दें कि उक्त विक्रय पत्र निरस्त पॉवर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से कराई गयी है इस कारण उसे निरस्त किया जाए।

आप के पिताजी को यह भी करना चाहिए कि पुलिस ने जिस शिकायत पर कार्यवाही नहीं की है उस शिकायत को पूरा लिखते हुए एस पी को एक आवेदन रजि. ए.डी. डाक से भेज दें। उसी दिन या एक दो दिनों में संभव हो तो एस.पी. से मिल कर भी सारी बात उन्हें बताएँ। फिर भी एस.पी. कार्यवाही न करे तो न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष स्वयं परिवाद प्रस्तुत कर उसे धारा 156(3) में संबंधित पुलिस थाने को अन्वेषण के लिए भिजवाएँ।

आप के पिताजी को तीसरा और अंतिम काम यह करना चाहिए कि पंजीकृत विक्रय पत्र को निरस्त कराने के लिए दीवानी अदालत में वाद प्रस्तुत करें और उसे निरस्त घोषित करने की डिक्री प्राप्त करें।

उत्तराधिकार प्रमाण पत्र निरस्त करा कर सही जारी कराया जा सकता है।

rp_Two-Girls-2006.jpgसमस्या-

अंशुमान ने बहराइच, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे चाचा जी का देहांत मार्च 2015 में हो चुका है। उन के 2 पुत्र एवं 2 पुत्रियाँ हैं। पुत्र का विवाह हो चुका है। तकरीबन डेढ़ माह पूर्व उस ने चाची एवं 2 भाइयों के नाम उत्तराधिकार प्रमाणपत्र बनवा लिया है। दबाव बना कर बहनों के दस्तखत करवा लिए हैं। अब उन बहनो के नाम दुबारा उत्तराधिकार प्राप्त करने के लिए क्या किया जा सकता है?

समाधान-

त्तराधिकार प्रमाण पत्र केवल ऋणों और प्रतिभूतियों (debts & securities) के लिए जारी किया जा सकता है। प्रतिभूतियाँ क्या हैं? यह भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 370 (2) में स्पष्ट किया गया है।

(2) For the purposes of this Part, “security” means—

(a) any promissory note, debenture, stock or other security of the Central Government or of a State Government;

(b) any bond, debenture, or annuity charged by Act of Parliament 1[of the United Kingdom] on the revenues of India;

(c) any stock or debenture of, or share in, a company or other incorporated institution;

(d) any debenture or other security for money issued by, or on behalf of, a local authority;

(e) any other security which the 2[State Government] may, by notification in the Official Gazette, declare to be a security for the purposes of this Part.

त्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया ऐसी है कि सामान्य तौर पर ऐसा होना संभव नहीं है कि उस में बहनें छूट जाएँ। लेकिन फिर भी किसी तरह उन की नकली सहमति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जा कर ऐसा किया जा सकता है।

दि बहनें उत्तराधिकार प्रमाण पत्र को निरस्त कराना चाहती हैं तो उन्हें किसी वकील की सहायता प्राप्त करनी चाहिए। उन के वकील को चाहिए कि वह पहले उस न्यायालय में उस पत्रावली का निरीक्षण करे जिस में उत्तराधिकार प्राप्त किया गया है। उस के अध्ययन से यह जानकारी होगी कि उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने में चूक कहाँ हुई है। फिर उन चूकों के आधार पर न्यायालय से उस उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र को निरस्त करने के लिए धारा 383 के अन्तर्गत तथा सही उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने के लिए धारा 372 के अंतर्गत एक संयुक्त आवेदन पत्र न्यायालय में प्रस्तुत करना चाहिए। ऐसा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के साथ ही एक आवेदन पुराने उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के आधार पर प्रतिभूतियों के भुगतान पर रोक लगाने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर न्यायालय से तुरंत रोक के लिए आदेश कराना चाहिए।


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