Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Mutation Supreme Court wife Will अदालत अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक दूसरा विवाह नामान्तरण न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

माँ के पूर्व पति की संपति में हिस्सा।

 

समस्या-

ब कोई विधवा स्त्री अपने पति की मृत्यु के बाद किसी अन्य व्यक्ति के साथ शादी कर लेती है, तो क्या दूसरे पति से जन्मे बच्चे उस स्त्री के पहले पति की संपति में हिस्सा ले सकते हैं? क्या उस पहले पति के लड़के को उस स्त्री के दूसरे पति से जन्मे लड़के को हिस्सा देना पडेगा?

-विजय कुमार, ग्राम दरौली, जिला, सिवान (बिहार)

समाधान-

कोई भी स्त्री विधवा तब होती है जब उस के पति की मृत्यु हो जाए। मृत्यु के साथ ही उस के पति की संपत्ति का उत्तराधिकार तय हो जाता है। यदि उस के पति के एक पुत्र था तो दो उत्तराधिकारी हुए एक पुत्र और दूसरा पत्नी। इस तरह मृत व्यक्ति की संपत्ति में दो लोग हिस्सेदार हो गए।

विधवा स्त्री ने दूसरे व्यक्ति से विवाह कर लिया। उसके वहा और संतानें हो गयीं। उन संतानों का अपनी माँ के पूर्व पति की संपत्ति के उस हिस्से पर कोई अधिकार नहीं है जो उन के सौतेले भाई का है। लेकिन उन की माँ को जो आधा हिस्सा मिला है उस पर उस की मृत्य के उपरान्त पूर्व पति व दूसरे पति से उत्पन्न सभी संतानों को समान उत्तराधिकार मिलेगा।

आप ने अपनी समस्या न पूछ कर केवल एक कानूनी प्रश्न पूछा है। हम आम तौर पर ऐसे प्रश्नों का उत्तर नहीं देते। लेकिन इस तरह की भ्रान्तियों को दूर करने के लिए हम उत्तर दे रहे हैं। सभी पाठको से अनुरोध है कि हमें समस्या भेजें तो हम समाधान कर पाएंगे। कानूनी प्रश्नों का जवाब पाने के लिए किसी दूसरे साधन का उपयोग करें या फिर खुद कानून का अध्ययन करें।

हिन्दू स्त्री की संपत्ति का उत्तराधिकार हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-15 से शासित होगा।

समस्या –

क अचल संपत्ति मकान जिसकी रजिस्ट्री वर्तमान में मेरी दादी के नाम पर है एवं मेरी दादी का स्वर्गवास वर्ष 2009 में हो चुका है एवं मेरे दादा जी का भी स्वर्गवास वर्ष 2002 में हो चुका है।  मेरी दादी की चार संतानें जिसके अंतर्गत मेरे पिताजी, मेरे ताऊजी एवं मेरी दो बुआजी (पिताजी की बहनें) हैं एवं मेरे पिताजी की दो संताने जिसके अंतर्गत मैं स्वयं एवं मेरी बहन शामिल है एवं मेरी स्वयं की चार संताने जिसके अंतर्गत मेरे चार पुत्र हैं।  मेरे ताऊजी की तीन संताने जिसके अंतर्गत ताऊजी का एक पुत्र और दो पुत्रियाँ हैं एवं ताऊजी का जो पुत्र है उसकी भी चार संतानें जिसके अंतर्गत उसके चार पुत्र हैं। अब सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि उपरोक्त वर्णित अचल संपत्ति मकान में उपरोक्त वर्णित सभी सदस्यों में से कौन-कौन कानूनी रूप से हिस्सेदार हैं। उपरोक्त वर्णित अचल संपत्ति मकान में उक्त वर्णित मेरी दोनों बुआजी की संतानें भी क़ानूनन भागीदार है क्या? उपरोक्त वर्णित अचल संपत्ति मकान में उक्त वर्णित मेरे ताऊजी की दोनों बेटियों की संतानें एवं मेरी बहन की संतानें भी कानूनन भागीदार हैं क्या? उपरोक्त लिखित समस्या के प्रत्येक बिन्दु पर विस्तृत जानकारी देने का आभार करें।

– अभिषेक बंसल, तहसील व जिला ग्वालियर, मध्यप्रदेश

समाधान-

कान का स्वामित्व आप की दादी का था। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 14 के अंतर्गत यह उपबंध है कि किसी भी हिन्दू स्त्री की संपत्ति उस की एब्सोल्यूट संपत्ति होती है। अर्थात उस में कोई भागीदार नहीं होता। इस कारण आप की दादी के नाम की यह संपत्ति पुश्तैनी संपत्ति नहीं है।

आप की दादी के देहान्त के उपरान्त अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत इस संपत्ति का उत्तराधिकार खुला है। धारा 15 में किसी भी स्त्री की संपत्ति के उत्तराधिकारी प्रथमतः उस स्त्री के पुत्र पुत्री व पति हैं। आप के दादाजी का देहान्त पूर्व में ही हो चुका है। इस कारण से आप की दादी की उक्त संपत्ति के उत्तराधिकारी उन के पुत्र अर्थात आप के पिता, आप के ताऊजी और आप की बुआएँ हुई हैं। सभी एक चौथाई हिस्से के अधिकारी हैं। जब तक ये चारों जीवित हैं इस संपत्ति पर किसी भी अन्य व्यक्ति का कोई अधिकार नहीं है। इन चारों में से किसी की मृत्यु हो जाने पर उस के हिस्से का उत्तराधिकार खुलेगा जो कि या तो उस व्यक्ति की वसीयत के अनुसार होगा और यदि कोई वसीयत नहीं की गयी तो पुरुष के मामले में उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-8 से तथा स्त्री होने पर धारा-15 के आधार पर खुलेगा। यदि इन चारों में से कोई हिस्सेदार चाहे तो बंटवारा करवा सकता है, या बिना बंटवारे के अपने हिस्से को विक्रय कर सकता है।

स्त्री के स्वामित्व की सभी संपत्तियाों की वह एक मात्र स्वामिनी है।

समस्या-

आलमबाग, लखनऊ से नरेश कुमार श्रीवास्तव ने पूछा है-

मेरा बेटा 12 वर्षो से अलग रहता है,,, और गलत काम करता है । मेरा मकान मेरी माँ यानी मेरे बेटे के दादी के नाम से है। वह जबरदस्ती मुझसे बेचवाना चाहता है।  घर मे हक बता रहा है।  मैं क्या करूँ?

समाधान-

प का मकान आप की माँ के नाम है। आप की माताजी स्त्री हैं। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 14 के अनुसार उन के नाम जो भी संपत्ति है उस की वे एब्सोल्यूट ऑनर हैं। उन के उस मकान पर स्वामित्व में किसी का हिस्सा नहीं है। इस संपत्ति में आप का भी कोई हिस्सा नहीं है, आप के पुत्र का होना तो दूर की बात है।  आप का पुत्र कोई बंटवारा नहीं करवा सकता है। यदि आप का पुत्र कोई मुकदमा करता भी है तो वह इसी आधार पर निरस्त हो जाएगा कि उस का इस संपत्ति में कोई अधिकार नहीं है।

फिलहाल आप की माताजी उस संपत्ति की एकमात्र स्वामी हैं। आप की माँ उक्त संपत्ति की वसीयत कर सकती हैं, उस का दान कर सकती हैं उसे विक्रय सकती हैं। यदि वे इन में से कुछ नहीं करती हैं तो उन के बाद उक्त संपत्ति उतराधिकार में उन के पुत्रों और पुत्रियों को समान रूप से  हिस्से प्राप्त होंगे। आप के पुत्र को फिर भी कुछ नहीं मिलेगा। अब आप स्वयं तय करें कि आप को क्या करना चाहिए।

हिन्दू स्त्री उस के द्वारा धारण की गई सभी संपत्ति की पूर्ण स्वामी है।

समस्या-

मेरे मामा जी ने मेरी माँ को एक घर गिफ्ट दिया उस पर क्या मेरा या मेरे बेटे का कोई अधिकार है? 

कृष्ण लाल. श्री गंगानगर, राजस्थान 

समाधान-

 

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा-14 कहती है कि किसी भी स्त्री द्वारा जो भी संपत्ति धारण की जा रही है वह स्त्री उस की पूर्ण स्वामी होगी। इस तरह किसी भी हिन्दू स्त्री को कहीं से भी किसी भी प्रकार से कोई भी संपत्ति प्राप्त हो वह उस की पूर्ण संपत्ति होती है और उस के जीवनकाल में उस पर किसी का कोई अधिकार नहीं होता। उस स्त्री के देहान्त के उपरान्त यदि उस स्त्री ने कोई वसीयत नहीं की हो तो वह संपत्ति उस स्त्री के उत्तराधिकारियों को उत्तराधिकार में प्राप्त हो जाती है।

इस कारण  से आप की माँ को जो घऱ उपहार में आप के मामा से मिला है उस में आप का व आप के पुत्र का कोई अधिकार नहीं है। आप की माताजी के जीवन काल के बाद वह घर उत्तराधिकार में आप को प्राप्त हो सकता है, यदि आप की माता जी उसे किसी अन्य को वसीयत न कर दें।

स्त्री के उत्तराधिकार में पति का हिस्सा

समस्या-

अभिलाषा प्रसाद ने मुरी, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मेरी माँ ने अपनी शादी में मिले गहनों को बेच कर जमीन खरीदी अपने नाम से और उस पर घर भी बनाया। लेकिन कुछ दिनों बाद बीमारी से उनकी मृत्यु हो गई है। इस के बाद मेरे पिता ने दूसरी शादी कर ली है। अब वह मेरे माता की सम्पत्ति मांग रहा है क्या मेरे पिता या सौतेले भाई को इस सम्पत्ति में हिस्सा मिलेगा। मेरी माता के हम चार सन्तान हैं तीन बेटी और एक बेटा। एक सौतेला बेटा है। कैसे हिस्से होंगे?

समाधान-

किसी भी स्त्री की संपत्ति उस की संपत्ति होती है। उस में किसी का अधिकार नहीं होता। यदि वह स्त्री कोई वसीयत नहीं करती है तो उस संपत्ति उत्तराधिकार के नियमों से उस के उत्तराधिकारियों को प्राप्त हो जाती है।

आप की माता की संपत्ति उन की स्वयं की स्वअर्जित है। उन्हों ने कोई वसीयत नहीं की थी। इस कारण वह संपत्ति उन के उत्तराधिकारियों को प्राप्त होगी।

आप की माता जी के उत्तराधिकारियों में आप के पिता, आप स्वयं और आप की तीन बहनें, कुल पाँच उत्तराधिकारी हैं। सौतेला पुत्र आप की माँ का उत्तराधिकारी नहीं है। इस तरह माँ की संपत्ति के पाँच समान हिस्से होंगे और उन में से एक हिस्सा अर्थात कुल संपत्ति का पाँचवा हिस्सा ही आप के पिता प्राप्त करने अधिकारी हैं। एक एक हिस्सा आप चारों भाई बहन प्राप्त करने के अधिकारी हैं।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada