तीसरा खंबा

ये लड़ाई लड़ना आप के लिए उचित नहीं, इस से सिर्फ आप को हानि होगी।

rp_judge-cartoon-300x270.jpgसमस्या-

अमित ने हजारीबाग, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता एक रिटायर सरकारी पदाधिकारी है। हम लोग चार भाई हैं। मेरे पिता के किसी दूसरी महिला के साथ संबध है। मेरे पिता से पूछने पर वह इस संबध होने से इनकार करते रहे। इसके अलावा वे मेरी मां को कोई पैसा नहीँ देते थे। पूछने पर वो गाली गलोज करते रहे। वो हम लोग के पास कुछ दिन रहते थे और बिना बताये एकाएक उसके पास जो दूसरे शहर मे चले जाते थे। इस बात को लेकर मेरी मां की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ा जो अक्सर बीमार रहने लगी। मेरे भाईयों की हालात भी ठीक नहीँ थी उनका बहुत मुशकिल से गुज़ारा हो पाता है। 10 नबंम्बर 2014 को मेरे मां की अचानक तबीयत ख़राब हुई तब मेरे पिता साथ में थे और भाई काम से बाहर। उस हालात में मेरे पिता छोड़कर उस महिला के पास चले गये। मैं उस समय पुलिस की ट्रेनिंग के लिए बाहर था। जब भाईयो को पता चला कि मां बीमार है तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तबतक हालात ख़राब हो चुकी थी। पड़ोसियों से पैसे लेकर एडमिट करवाया गया। 20 नवम्बर 2014 को मेरी मां का देहान्त हो गया। अभी मैं ट्रेनिंग पूरा कर घर आया हूँ। मैं ने अपने पिता से इस बारे में बात की तो उन्होने कहा मुझे झूठे केस में फंसा देंगे। उन्होंने बहुत लोगों पर केस कर रखा है। बात बात पर केस मुकदमा करना उनकी पुरानी आदत है। मेरे पिता की लापरवाही के कारण मेरी मां का देहान्त हुआ है। मेरी मां को न्याय कैसे मिलेगा मेरा मार्गदशन करें।

समाधान-

प की माता जी के साथ जो होना था हो चुका। अब वे इस दुनिया में नहीं हैं। यदि उन्हें कुछ करना था तो अपने जीते जी करना था। अब वे नहीं रही हैं तो पिता को दूसरा सम्बन्ध बनाए रखने में कोई बाधा नहीं है। अपने पिता जी की लापरवाही को साबित करने के लिए आप को सबूत भी पर्याप्त नहीं मिलेेंगे। उसे साबित करने में आप को बहुत परेशानी आएगी और फिर भी आप उसे साबित नहीं कर पाएंगे। आप पिता की शिकायत करेंगे तो आप के पिता को भी आप के विरुद्ध शिकायत और मुकदमे करने का बहाना मिल जाएगा। जिस से आप को ही परेशानी आने वाली है हो सकता है इस का असर नौकरी तक भी जाए।

प सब भाई बहन बालिग हैं और कानून के अनुसार बालिग बच्चों के प्रति पिता का कोई दायित्व नहीं होता। पिता की कमाई हुई संपत्ति पर भी उस की बालिग संतानों का कोई हक नहीं होता। इस तरह आप यदि पिता जी से लड़ेंगे तो पिताजी की जिस चल अचल संपत्ति का आप अभी उपयोग कर रहे हैं या कर सकते हैं उस से वंचित किए जा सकते हैं। माँ तो अब नहीं रहीं उन के साथ न्याय हो या अन्याय इस से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हमारी न्याय व्यवस्था की यह हालत है कि जो उस में न्याय के लिए जाता है खुद ही उलझा पड़ा रहता है। वस्तुतः हमारी न्याय व्यवस्था न्याय प्राप्त करने वालों के साथ बहुत बुरी तरह पेश आती है। यह बात आप कुछ दिन पुलिस की नौकरी कर लेंगे तो बखूबी समझ लेंगे। कम से कम मौजूदा न्याय प्रणाली तो आप को या आप की माता जी को कभी न्याय नहीं दिला सकेगी।

मारे विचार में आप अपने पिता को अपने हाल पर छोड़ दें उन के कर्मों का फल प्रकृति अपने आप उन्हें देगी, आप को कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। आप इस धारणा को छोड़ कर अपने जीवन को सुधारने, अपनी माली हालत को ठीक करने के काम में अपना समय लगाएँ।

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