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Month: December 2009

मद्रास का प्रथम नगर निगम और मेयर का न्यायालय : भारत में विधि का इतिहास-14

1683 और 1686 के चार्टर 9 अगस्त 1683 को इंग्लेंड के सम्राट चार्ल्स द्वितीय ने न्याय प्रशासन को सक्षम बनाने के लिए एक चार्टर जारी किया। इस में
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मद्रास की अंग्रेजी बस्ती : भारत में विधि का इतिहास-13

सूरत में व्यापारिक केन्द्र मजबूत हो जाने के बाद कंपनी ने अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर अपनी फैक्ट्रियाँ स्थापित करने का निर्णय किया जिस के परिणाम स्वरूप मद्रास, कोलकाता
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अंग्रेजों का भारत प्रवेश : भारत में विधि का इतिहास-12

मुगल काल में ही भारत में अंग्रेजों का प्रवेश हुआ और धीरे-धीरे उन्हों ने भारत को अपने अधीन कर लिया। पुर्तगाली नाविक वास्कोडागामा ने 22 मई 1498 को
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शपथ आयुक्त और नोटेरी का अंतर

कल शाम की पोस्ट नोटेरी द्वारा प्रमाणित दस्तावेज की साक्ष्य में क्या महत्ता है? पर अजय कुमार झा की टिप्पणी थी…. सर लगे हाथों …अगली कडी में ही
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क्या हिन्दू विवाह अधिनियम ने विवाह विच्छेद के मामलों को बढ़ाया है?

निशान्त दुबे ने पूछा है – मैं जानना चाहता हूँ कि हिन्दू विवाह अधिनियम के समाज पर क्या प्रभाव हुए हैं? क्या इस ने तलाक के मामलों में
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नोटेरी द्वारा प्रमाणित दस्तावेज की साक्ष्य में क्या महत्ता है?

कमलेश द्विवेदी पूछते हैं-  मैं जानना चाहता हूँ कि एक  स्टाम्प पेपर्स पर अंकित और नोटेरी के समक्ष पंजीकृत बयान जो किसी भी  न्यायालय अथवा अर्धन्यायिक कार्यवाही में
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समान एकल नागरिकता और न्याय की एकरूपता का बीजारोपण : भारत में विधि का इतिहास-11

मुगलकाल की दंड व्यवस्था पूरी तरह से मु्स्लिम विधि पर आधारित थी और अपराध साबित हो जाने पर अपराधी को दिए जाने वाले दंडों को चार तरह से
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मुगल कालीन न्याय प्रक्रिया और सबूत : भारत में विधि का इतिहास-10

अब तक आप ने पढ़ा कि मुगल काल में किस तरह से न्याय प्रशासन की व्यवस्था की गई थी। अपने पूर्ववर्ती राज्यों की अपेक्षा मुगल काल में न्याय
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मुगल कालीन सरकार और परगना न्यायालय : भारत में विधि का इतिहास-9

सरकार (जिला)  न्यायालय  मुगल काल में जिला न्यायालयों को सरकार कहा जाता था और उपजिलों को परगना। इसी आधार पर इन्हें सरकार न्यायालय और परगना न्यायालय कहा जाता
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