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चुप बैठे रहने से हल नहीं मिलता, न्यायालय में कार्यवाही संस्थित करें।

rp_courtroom1.jpgसमस्या-

अलका ने यमुना नगर, हरियाणा से समस्या भेजी है कि-

मेरी सौतेली सास और ससुर मुझे और मेरे पति को घर में आने नहीं देते, जब कि वह मकान मेरे पति के नाम है। मेरा सारा स्त्री-धन उसी मकान में रखा है। पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती और हम किराए के मकान में हैं। मेरे पति भी बहुत परेशान हैं। उलटा सौतेली सास ने मेरे और मेरे पति पर घरेलू हिंसा का मुकदमा कर दिया है। मेरे पति प्राइवेट नौकरी करते हैं। हम क्या करें?

समाधान-

प का स्त्री-धन उस मकान में रखा है, इस से ऐसा अनुमान लगता है कि उस मकान में कम से कम एक कमरा ऐसा है जिस में आप का या आप के पति का ताला लगा है। यदि  ऐसा है और आप को और आप के पति को उस मकान में आने से रोका जाता है तो यह अपराध है। इस मामले में पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती है तो आप के पति न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर उसे जाँच हेतु पुलिस को भिजवा सकते हैं।

कान आप के पति के नाम है इस का सीधा और स्पष्ट अर्थ है कि आप की सौतेली सास और ससुर उस मकान में आप के पति की मौन सहमति से रह रहे हैं यह एक तरह का लायसेंस है। आप के पति नोटिस दे कर लायसेंस समाप्त कर सकते हैं और मकान का कब्जा प्राप्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं।

दि आप का स्त्री-धन अलग कमरे में जिस पर आप का ताला नहीं है रखा है और आप के ससुर और सास उसे आप को लेने नहीं दे रहे हैं तो इस का अर्थ है कि उस पर उन्हों ने कब्जा कर रखा है और वे अपने उपयोग में ले रहे हैं। यह न्यास भंग का अपराध है और आप इस की रिपोर्ट पुलिस थाने में दे सकती हैं या फिर न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर उसे जाँच हेतु पुलिस थाना भिजवाने का आग्रह कर सकती हैं।

प को व आप के पति को इस मामले में अधिक चुप न रहना चाहिए। शीघ्र किसी स्थानीय वकील से मिल कर कार्यवाही करनी चाहिए।

समस्या का हल बँटवारे के दावे से ही निकलेगा।

partition of propertyसमस्या-

रज़ाउल हक़ ने संभल उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

म पाँच बहने और दो भाई हैं। हमारे पिता ने अपने बाद एक मकान छोड़ा था जिसका कोई बटवारा नहीं हुआ है। लेकिन इस मकान का हाउस टैक्स मेरे भाई ज़ियॉलहक़ ने सन् 2007 में अपने नाम करवा लिया नगरपालिका के सरवे में। अब ज़ियॉलहक़ ने इस मकान में कुछ किरायेदार रखे हुए हैं, कुछ साल से। अब मैं और मेरी बहने चाहते हैं कि हमको तकसीम का दावा न करना पड़े। क्यों कि दीवानी के मुक़दमे बहुत लंबे चलते हैं। हम केवल इतना चाहते हैं कि किरायेदार किराया या तो हमें भी दें या अदालत में जमा करें। या मकान खाली कर दें। ज़ियाउल हक़ ने कोई किराया नामा नहीं लिखा रखा है, न उनको रसीद देता है। मेरे सवाल हैं कि हाउस टैक्स को कैसे सब के नाम कराया जाये? हाउस टैक्स नाम होने का स्वामित्व पर क्या असर पड़ता है? क्योंकि मेरे भाई ने कोई किरायानामा नहीं लिख रखा है तो क्या हम पुलिस द्वारा मकान खाली करा सकते हैं? क्या बिना तकसीम के दावे के किरायेदारों को किराया अदालत में जमा करने के लिए मजबूर किया जा सकता है?

समाधान-

सल में आप की समस्या है कि आप अदालत में कोई कार्यवाही नहीं करना चाहते क्यों कि वहाँ समस्या का हल बहुत देरी से होता है। आप का कहना बिलकुल वाजिब है। भारत में अदालतें जरूरत की 10-20 प्रतिशत हैं। अमरीका के मुकाबले 10 प्रतिशत और ब्रिटेन के मुकाबले 20 प्रतिशत। तो यही कारण है कि अदालत में फैसले बहुत देर से होते हैं। इस का असर यह होता है कि लोग विवादों के हल के लिए अदालत के स्थान पर गैर कानूनी तरीके अपनाते हैं। इसी कारण देश में अपराध बढ़ रहे हैं। केन्द्र और राज्य सरकारों की यह नीति देश को शनै शनै अराजकता की ओर धकेल रही है। उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था के खराब होने का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है।

पुलिस किसी भी किराएदार से या कब्जेदार से किसी संपत्ति का कब्जा वापस नहीं दिला सकती। वह ऐसा करने के लिए कोई कार्यवाही करेगी तो वह भी गैरकानूनी होगी। पुलिस ऐसी कोई कार्यवाही कर के खुद अराजकता बढ़ा रही होगी। आप को चाहिए कि आप तकसीम अर्थात बंटवारे का दावा कर दें। यही आप की समस्या का उचित हल है। आप इस दावे को प्रस्तुत करते ही अदालत को आवेदन कर के रिसीवर नियुक्त करवा सकते हैं जो मकान को अपने कब्जे में ले कर किराया वसूल करे और अदालत में जमा करे। इस से आप की बहुत सी तात्कालिक समस्याओं का हल निकल आएगा। साथ ही तकसीम का दावा भी चलता रहेगा जिस में कभी न कभी तो फैसला होगा ही।

दि कोई किरायानामा नहीं लिखाया गया है तो आप अपनी बहनों के साथ जो कि उक्त मकान के संयुक्त स्वामी हैं, मिल कर संयुक्त रूप से किराएदारों को नोटिस दें कि वे किराया अदा नहीं कर रहे हैं इस कारण मकान खाली करें। वे कहेंगे कि वे तो किराया अदा कर रहे हैं। लेकिन बिना रसीद के तो किराया बकाया ही माना जाएगा। किराया बकाया मान कर आप किराएदारों के विरुद्ध मकान खाली करने के दावे भी कर सकते हैं। ऐसे दावों में किराएदारों को किराया अदालत में जमा कराना होगा। इस तरह भी आप का आशय पूरा हो जाएगा। यदि इस विवाद के कारण आप का भाई आप के साथ सहमति से बंटवारा करने को तैयार हो जाए आप लोग मिल बैठ कर भी बंटवारा कर सकते हैं।

प दोनों कार्यवाहियाँ एक साथ भी कर सकते हैं। अधिकांशतः होता यह है कि लोग लम्बी कार्यवाही के भय से कार्यवाही नहीं करते और यह सब चलता रहता है। इस से मकान पर कब्जा बनाए रखने वाले व्यक्ति को नाजायज फायदा मिलता रहेगा। समस्या का हल केवल अदालत से ही निकलेगा। आप जितना देर करेंगे उतनी देर से समस्या हल होगी। इस कारण जितना जल्दी हो कार्यवाही करें।

जटिल मामलों में बिना दस्तावेजों के अध्ययन और सारे तथ्यों की जानकारी हुए बिना उचित समाधान संभव नहीं।

rp_lawyerx200.jpgसमस्या-

मनीषा सिंह ने जिला उमरिया, मध्‍यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी मौसी अविवाहित थी के घर में अज्ञात लोगों द्वारा चोरी के पश्‍चात उन की हत्‍या कर दी गई थी । मेरी माँ तीन बहने थी, भाई नहीं था, तेरहवीं के दिन पेपर में लेख छपा था कि वे एक सोनी लड्के को दत्‍त्‍ाक पुत्र मानती थी, जो हमारी जाति से विलग है। मेरी माँ एवं उनकी बडी बहन के 3 पुत्र एवं 4 पुत्रियां हैं। उस सोनी लडके की माँ को भी पता नहीं है कि कब दत्‍तक ग्रहण हो गया। दूसरा महत्‍वपूर्ण तथ्‍य यह है कि मेरी माँ के नानाजी की भूमि एवं दो मकान थे। मेरी माँ के नानाजी की छ:पुत्रियां थी उनमें एक ने विजातीय शादी की। सभी का देहांत हो चुका है, मेरे माँ के नानाजी की पुत्रियों में से एक बडी पुत्री की तीन लडकियाँ है, एवं एक जिन्‍होंने विजातीय सोनी जाति में शादी की थी उनके एक जीवित पुत्र है, जो पुलिस विभाग में डीएसपी है एवं दो विधवा भाभी एक बहन है। मेरी माँ की मौसियों के दो वर्ष पूर्व स्‍वर्गवास हो जाने के पश्‍चात मेरी माँ ने पिछले साल भूमि का नामांतरण अपनी तीनों बहनेां एवं मौसी के लडके,बहन एवं विधवा बहुओं के नाम करवा लिया। मेरी मां की छोटी बहन कुमारी थी, उनकी हत्‍या अज्ञात व्‍यक्ति द्वारा चोरी के दौरान कर दी गई, कहा गया है कि मेरी माँ की छोटी बहन ने अपने हिस्‍स्‍ो की संपत्ति मौसी के लडके जो सोनी परिवार के हैं के नाम रजिस्‍टर्ड की है, क्‍या वह जायज है। जब कि ये पूर्वज नानाजी की संपत्ति थी। जब कि उनको जितनी संपत्ति में हिस्‍सा देना था दे दिया इसके बाद भी वो ले सकते हैं,। साथ ही मेरी नाना की बनाई माँ के नानाजी की जमीन पर किराये हेतु दी थी का किराया उठाते हैं, एवं प्‍लाट की चाबी छीन लिये हम लोग 600कि.मी.दूर रहते हैं, इसलिए बार बार आना जाना नहीं कर सकते। पिछले दिनों आप से सलाह मॉगी थी तो आपने लेख किया कि उन्‍हें ही कोर्ट जाने दो अब संयुक्‍त नामांतरण पश्‍चात बंटवारा कैसे हो, एवं मेरी मां की छोटी बहन द्वारा अपने हिस्‍से की जमीन जो मृत्‍यु के दो दिन पूर्व क्‍या वह जायज है। बताने का कष्‍ट करें। , प्रार्थिनी आपकी आभारी रहेगी । साथ ही मेरी मॉ की छोटी बहन की म़त्‍यु पश्‍चात इसी मौसेरे सोनी परिवार का लड्का जिसकी उम्र 38वर्ष है अपने को दत्‍तक पुत्र मेरी मॉ की पैतृक संपत्ति हेतु घोषित कर रहा है। मेरी मॉ एवं उनकी बडी बहन के चार चार संतान पुत्र एवं पुत्रियॉ है।

समाधान-

प ने दो बातें कही हैं कि आप की मौसी ने सोनी युवक को अपना दत्तक पुत्र माना है और उन्हों ने मृत्यु के दो दिन पहले ऐसी जमीन को उन के मौसेरे भाई के नाम है रजिस्टर्ड करवा दिया है।

कोई व्यक्ति किसी का दत्तक पुत्र है यह केवल दत्तक ग्रहण दस्तावेज से पता लगाया जा सकता है या फिर न्यायालय में विवाद पहुँचने पर साक्ष्य से साबित किया जा सकता है। लेकिन कोई भी दत्तक ग्रहण उस व्यक्ति के जन्मदाता माता पिता की सहमति के बिना नहीं हो सकता। यदि उस की माता को यह पता नहीं कि कब उस का पुत्र दत्तक हो गया तो ऐसा दत्तक ग्रहण कानूनी नहीं हो सकता।

किसी भी स्त्री की संपत्ति उस की व्यक्तिगत संपत्ति होती है। एक बार किसी स्त्री को किसी पुश्तैनी संपत्ति का हिस्सा प्राप्त हो जाने पर वह हिस्सा पुश्तैनी संपत्ति का दर्जा खो बैठता है। इस कारण आप की मौसी को उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति भी उन की व्यक्तिगत है। इस कारण वे उसे हस्तान्तरित कर सकती हैं।

प ने बताया है कि जो संपत्ति मौसी ने अपने हिस्से की संपत्ति उन के कथित दत्तक पुत्र के नाम रजिस्टर्ड कराई है। लेकिन यह नहीं बताया कि क्या दस्तावेज रजिस्टर्ड कराया गया है वह दान पत्र है अथवा विक्रय पत्र है। इस तरह अधूरी जानकारी के आधार पर कोई भी सलाह ली जाएगी तो वह गलत हो सकती है। आप का मामला जटिल है तथा इस फोरम पर उस के लिए कोई अन्तिम और उचित सलाह दे पाना संभव नहीं है। आप को चाहिए कि अपने सारे दस्तावेजों के साथ आप किसी स्थानीय वकील से संपर्क करें और वह जो तथ्य और जानना चाहे उन्हें बताएँ। तभी वह आप की समस्या का कोई उचित हल बता सकता है।

खुद बदलें, आधुनिक बनें, पत्नी के उस के व्यक्तित्व के साथ स्वीकार करें।

समस्या-

अविनाश ने सागर , मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

Husband-Wife-Disputes

26/6/09 को शादी हुई। पत्नी शासकीय नौकरी में है। 3 माह बाद से आना बंद कर दिया । कई लोगों के फोन और एसएमएस आते हैं मोबाइल पर। मैंने समझाया ये ठीक नहीं है. नम्बर बदल लो या रिप्लाइ करना बंद कर दो, पर नहीं मानी। उस के घर वाले भी उस से नाराज हैं पर माँ और बहिन उस का साथ दे रहे हैं कहते है तलाक ले लो। भाई और मामा कहते हैं कि लड़की और उसकी माँ गलत है इंतेजार करो। लड़की तलाक चाहती है पैसा भी। मैं देने तैयार हूँ उसके बाद भी 4 साल निकल गया। ना आ रही है ना तलाक की कार्यवाही शुरू हो रही है अपना और मेरा समय बर्बाद कर रही है मैं क्या करूँ।

समाधान-

प ने एक शासकीय नौकरी कर रही स्त्री से विवाह किया। वह आत्मनिर्भर है और उस का अपना व्यक्तित्व है। आप का अपना व्यक्तित्व है। आप ने विवाह होते ही मात्र तीन माह में ही अपनी पत्नी के व्यक्तिगत जीवन को बदलने की अधिनायकवादी हिदायत दे दी। यदि यही बात आप की पत्नी आप से कहती कि आप या तो अपना नंबर बदल दें या फोन काल्स और एसएमएस का जवाब देना बन्द करें तो तो आप क्या करते? मान लेते?

प के मस्तिष्क में वही पुरानी बातें हैं कि पत्नी को पति के हिसाब से जीवन जीना चाहिए, आप उसे पत्नी, साथी या मित्र बनाने के स्थान पर अपनी संपत्ति समझने लगे हैं जो कन्यादान में आप को मिल गयी है। आप की पत्नी की माँ और बहन उस का साथ दे रही हैं तो ठीक दे रही हैं। वे चाहती हैं कि आप की पत्नी का अपना भी एक स्वतंत्र व्यक्तित्व है जिसे वह स्वयं तय करे। पत्नी का मामा और पिता व्यवहारिक हैं कि बेटी अभी नादान है अभी स्वतंत्र व्यक्तित्व की बात सोचती है। कुछ समय बाद उसे यह अहसास हो जाएगा कि विवाह विच्छेद कर के एक स्त्री के लिए जीवन जीना बहुत मुश्किल है और विवाह के उपरान्त पत्नी की अधीनता स्वीकार करनी होगी। विचारों और व्यवहार की इस लड़ाई में आप की पत्नी, सास और साली का पक्ष प्रगतिशील है जब कि आप का आप के ससुर और मामा ससुर अपने ढर्रे की बात सोच रहे हैं। आप दुखी हो रहे हैं कि विवाह हो जाने पर भी पत्नी पास नहीं है।

प के दुख का निवारण यही है कि आप अपनी पत्नी को समझने की कोशिश करें। उसे अपने व्यक्तित्व को जीने दें। आप ने उसे अपने पुराने मित्रों से संपर्क न बनाए रखने की हिदायत दे कर गलती की है उसे स्वीकारें। आप को समझना चाहिए कि जैसे जैसे आप के साथ पत्नी की अन्तरंगता बढ़ती जाएगी फोन एसएमएस कम होते जाएंगे। पत्नी को उस के स्वतंत्र व्यक्तित्व के साथ स्वीकारें। हमारी राय तो यही है कि पत्नी को साथ रहने को मनाएँ, पत्नी के पिता और मामा आप के साथ हैं, उस का मानना कठिन नहीं है। लेकिन केवल पत्नी को बदलने की चेष्टा न करें। आप का भी विवाह हुआ है आप खुद भी बदलें, पुराने विचारों को छोड़ कर नए जमाने के मूल्यों के हिसाब से खुद को ढालें जिस की वास्तव में आवश्यकता है। पत्नी को संपत्ति समझने के स्थान पर अपना साथी बनाने का प्रयत्न करें।

पत्नी जब साथ छोड़ फर्जी रिपोर्ट कराए तो उसे छोड़ देना ही ठीक है …

Wife 50-50समस्या-

रामकुमार ने राजगढ़, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी उम्र ३० वर्ष है मेरे एक लड़की अंजलि २५ वर्ष से पिछले ९ वर्षो से प्रेम सम्बन्ध थे, पिछले ८ वर्षो से हम दोनों ने शादी के बहुत प्रयास किये परन्तु विवाह नहीं हो पाया। क्यूंकि अंजलि भाग कर शादी के लिए राजी नहीं हुई, न अपने घर वालों से यह बात की कि वह मुझ से प्यार करती है। १ फरवरी २०१३ एक दिन घर वालों को इस बात का पता चला कि हम एक दूसरे को प्यार करते हैं तो उन्होंने लड़की को परेशान कर ब्लैक मेल करने की शिकायत आवेदन हरिजन थाने में दे दिया। जिस पर लड़की ने मेरे पक्ष में बयान दिया। मैं ने वहाँ उन के घर वालों से कहा कि मैं अंजलि से किसी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं रखूँगा इस बात पर समझौता हुआ, बात यहीं ख़त्म हो गयी। ३-४ दिन बाद हम फिर से मिलने जुलने लगे क्योंकि अंजलि हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई भोपाल में कर रही थी। मैं अपने शहर राजगढ़ से उस से मिलने जाता और वो भी मुझ से हॉस्टल से घर जाने का झूट बोल कर मिलने आया करती। २०१४ तक इसी तरह चलता रहा। फिर उसने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मेरे शहर में ही विधि पाठ्यक्रम में दाखिला ले लिया। क्योंकि हम आस पास के शहर के निवासी थे। अब हमारा सप्ताह में ३ से चार दिन मिलना जुलना होने लगा। फिर १ मई २०१४ को मेरे छोटे भाई की शादी हुई। मेरे घर में अब मैं ही अविवाहित रह गया था। मेरा एक भाई और दो बहिने हैं जिनका विवाह हो चुका है और अंजलि भी अपने घर में अकेली अविवाहित रह गयी थी। मेरे छोटे भाई की शादी के बाद मेरे ऊपर शादी का दवाब बढ़ने लगा। मैंने अब अंजलि के सामने विवाह करने का प्रस्ताव रखा जिस को उसने २८ जून को ठुकरा दिया कहा मैं घर वालों के विरुद्ध जाकर विवाह नहीं कर पाऊँगी। फिर मैं ने उस से दूरिया बढ़ानी शुरू की और बातचीत भी खत्म की। इस के बाद मैं ने ५ जुलाई २०१४ को अपने समाज यानी की स्वर्णकार में घरवालों की इच्छा के अनुसार सगाई कर ली। जब इस बात का अंजलि को पता चला कि मेरी सगाई हो चुकी है तो वो टूट सी गयी और अगस्त में उसने मेरे सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। अब मैं क्या करता कहने लगी कि मैं मर जाउंगी, अगर आप से दूर हुई तो, किसी तरह से मुझसे दूर मत हो जाना। आप एक सप्ताह के अंदर ही मुझ से शादी करलो। मैं आपके साथ ही जीवन बिताना चाहती हूँ। मैं भी उससे बहुत प्यार करता था इसलिए मैं राजी हुआ और उस से दिनांक १ सितम्बर २०१४ आर्य समाज मंदिर में शादी करली और उसका हम दोनों ने विवाह पंजीयन भी करवा लिया। अब अंजलि ने मुझे विश्वास दिलाया कि वह अपने घर वालों को १ से २ महीने में इस विवाह के लिए राजी कर लेगी। पर इस समय अवधि में वह ऐसा नहीं कर सकी। जो सगाई समाज में हुई थी उसको भी मैं ने तोड़ दिया। क्यूंकि शादी की तारीख नजदीक आने लग रही थी। एक दिन मैं ने अंजलि के चाचा को सारी बात बता डाली कि हम ने इस तरह से घर वालों से छुपा कर शादी कर ली है। इस बात से दोनों परिवार वालो तनाव चिंता की स्थिति बन गयी। अंजलि के चाचा भी राजगढ़ पुलिस में हैड के पद पर हैं और काफी समझदार भी रहे उन्होंने अंजलि के परिवार वालों को इस शादी के लिए राज़ी कर लिया। उन्होंने दिनाक १ दिसम्बर २०१४ राजगढ़ स्थित जालपा माता मंदिर से अंजलि को मेरे साथ विदा कर दिया। जिस में मेरे कुछ मित्र और अंजलि की माता जी और चाचा चाची उपस्थित रहे। अब मेरे घर वाले अंजलि को अपनाने के लिए राजी नहीं थे। और वह मुझसे २०० किलोमीटर दूर इंदौर में निवास करते थे मैने भी ठान लिया कि हम जीवन खुद जिएंगे। उन्होंने मुझे मौखिकः रूप से अपने सम्पति और जायदाद से बेदखल कर सब रिश्ते तोड़ दिए। अब हम अच्छे से प्रेम से राजगढ़ में मेरे एक घर जो कि मेरी माता जी के नाम है उसमे निवास कर रहे थे। मैं ने अंन्जलि को उसके घर वालों से कभी भी मिलने से नहीं रोका, उसका फोन से भी उसके माता पिता से संपर्क होता रहा और महीने में ४ से ५ बार मिलती रही। सब अच्छा चल रहा था। एक रिश्तेदार के शादी में २७ जनवरी को इंदौर जाना हुआ वहाँ मेरे घर वालों का भी मिलना हुआ और उन्होंने अंजलि के बारे में अपशब्द कहे। जिस से गुस्से में आकर उनसे विवाद हो गया। फिर अंजलि और मैं निज निवास राजगढ़ १ फरवरी रात को १२ बजे लौट आये। अगले दिन अंजलि का पेट दर्द हुआ तो मैं ने उसे शासकीय अस्पताल में एडमिट कराया और उसका उपचार कराया सोनोग्राफी करवाई और उसी दिन रात को छुट्टी करवा कर घर ले आया। २ दिन ठीक से रहे फिर उसको पेट दर्द की शिकायत हुई तो मैं ने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी। मैं अकेला उसे संभाल नहीं पा रहा था इस लिए मैंने अंजलि को ३००० रूपये दिए और उसकी बड़ी बहिन के यहाँ जो हमारे शहर में ही रहती है एक दिन छोड़ने का फैसला लिया। अंजलि अक्सर उनसे मिलती रहती थी मेरा सोचना था की ०७ फ़रवरी को रविवार है और उनकी बहिन की छुट्टी भी रहेगी तो बहिन से बात कर मैं ने दिनाक ०६ शनिवार शाम को उनको उनके पास छोड़ दिया। संडे उन्होंने अंजलि को दिखाया और सोमवार को मेरे पास छोड़ दिया। अब उसी दिन ०९ फरवरी सोमवार को मैं व अंजू जनपद में किसी काम से जाना हुआ और काम करने के बाद हम रवाना ही होने वाले थे की उसके चाचा जी जनपद में पहुंच गए और मुझसे और अंजलि से उनके घर चलने को कहा और खाने पर बुलाया। मैं ने कहा मैं १५ मिनिट में आता हूँ आप अंजलि को ले जाओ। दोपहर के ४ बजे अंजलि का कॉल आया आप आ जाओ फिर घर चलते हैं। मैं आधे घंटे बाद अंजलि को लेने पहुंचा और जब चलने को कहा तो उनकी चाची ने बोला आपकी बहुत शिकायतें आ रही हैं। मैं ने कहा बात क्या है, कौन सी शिकायत? उन्होंने मुझसे बोला कि आप अंजलि के साथ लात घूसों से मारपीट करते हैं और उसे अक्सर बेल्टों से मारपीट करते हैं। मुझे सब बातें सुनकर धक्का सा लगा। हम दो महीने से अच्छे से रह रहे थे कोई झगड़ा हमारा हुआ नहीं, ना ही कोई मनमुटाव हुआ। फिर एक दम से क्या हुआ इतने में अंन्जलि यही सब बातें कहने लगी। कि मेरे साथ इन्होने मारपीट की है और १५ से २० मिनिट में वही अंजलि के माता पिता भी पहुंच गए। जो कि हमारे शहर से ७० किलोमीटर दूर रहते हैं और उन लोगों ने भी मेरे साथ गाली गलौच और अपशब्द कहे। मैं समझ चुका था कि मेरे विरुद्ध कुछ तो साजिश हुई है। मैं उन लोगों से अपने रिश्ते को बनाये रखने के लिए मेरे से जाने अनजाने में हुई गलती की माफ़ी भी मांगी। पर वो अंजलि को मेरे साथ भेजने के लिए तैयार नहीं हुए और ना ही अंजलि आने के लिए तैयार हुई। उन लोगों ने मेरी पत्नी से मुझे आज दिनाक २० फ़रवरी तक कोई बात भी नहीं होने दी। उसका मोबाइल भी बंद है और दिनांक ०९ फरवरी २०१४ को रात्रि में ही महिला थाना राजगढ और हरिजन कल्याण थाना राजगढ़ में मेरे विरुद्ध, मेरे माता पिता, दोनों बहिनो के विरुद्ध अंन्जलि ने घरेलू हिंसा, शराब पीकर मारपीट और दहेज़ के लिए मांग की शिकायत कर दी है। अभी आवेदन दिया है मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। मैं सभी तरह के माध्यमों से बातचीत का प्रयास कर चुका हूँ पर कोई हल नहीं निकला है। अंजलि ने मेरे माता पिता भाई बहिन को भी इसमें आरोपी बनाया है जब कि उन से हमारे कोई सम्बन्ध नहीं हैं। न वो हमारे साथ निवास करते हैं। उनकी कोई गलती भी नहीं है। अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ मैं ने उसके साथ कोई मारपीट नहीं की, न कोई बुरा व्यवहार किया और न ही मेरे किसी घरवाले ने। अब तक मैं ने उसके पढ़ाई के सारे खर्चे विवाह पूर्व के उठाये हैं। जिस का भुगतान मेरे अकउंट से हुआ। उस ने अपने पिता के इलाज के लिए मुझ से ३ लाख रूपये भी लिए थे २०१३ में जो कि उस ने स्वयं चेक द्वारा भुनाए थे। जब दिनांक ९ रात्रि में घर पर लौटा तो अलमारी के लॉकर में २ लाख कीमत की जो रकम थी और बीस हजार नगद थे वो मेरी पत्नी ले जा चुकी थी। अब मैं अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा हूँ। आत्महत्या जैसे विचार मन में आ रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ। शिकायत उस ने जो मेरी की है मेरे परिवार वालों की क्यों की है? ऐसा क्यों किया? न कोई बात हुई है न उसके घर वाले होने दे रहे हैं। क्या मेरे माता पिता पर जो अलग शहर में रहते हैं वो भी इस प्रेम विवाह में दहेज़ प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के दायरे में आते हैं। मुझे अब क्या करना चाहिये? मुझे लगता है कि अंजलि के माँ बाप ने उस की कहीं और शादी करने का विचार बना लिया है और मेरा इस्तेमाल सिर्फ पैसों के लिए किया गया था।

समाधान-

प की कहानी पढ़ी। ऐसी ही अनेक कहानियाँ हमें प्रत्यक्ष भी देखने को मिलती हैं। आप दोनों में प्रेम भी था और आप ने अपना घर भी बसा लिया था। लेकिन आप दोनों के परिवार इस के लिए तैयार नहीं थे। अंजलि के चाचा के दबाव में आ कर उन्हों ने अंजलि को आप के साथ भेज दिया। क्यों कि तब अंजलि किसी भी कीमत पर आप के साथ रहना चाहती थी। वह पुलिस थाने में बयान दे चुकी थी और उस के परिवार वालों को एक हार का सामना करना पड़ा था। वे अंजलि को आप के साथ भेजने के बाद भी उस हार को पचा नहीं पा रहे थे। वे लगातार इस बात से दुखी रहे। चाहते रहे कि अंजलि किसी भी तरह आप से नाता तोड़ कर वापस लौट आए। अंजलि के समाज में एक विवाह टूटने पर दूसरा विवाह होना एक सामान्य बात रही होगी। इस कारण वे इस के लिए प्रयास भी करते रहे। वे लगातार अंजलि की काउंसलिंग करते रहे। जो धीरे धीरे उस पर असर करती रही। विवाह में आप के परिवार वालों ने उस के साथ जो दुर्व्यवहार किया उस ने उस असर को कई गुना बढ़ा दिया। उधर उस के परिवार वालों का उस के साथ संपर्क केवल अंजलि की काउंसलिंग के लिए था। इधर आप के परिवार वाले भी उस को अपना नहीं पा रहे थे। अंजलि दोनों तरफ से परिवार विहीन हो गई थी।

स के बीमार होने पर आप उस की खुद देखभाल नहीं कर सके। उस के लिए उस की बहिन की मदद आप को लेनी पड़ी। इस बात ने अंजलि को अन्दर तक दहला दिया। एक औरत के जीवन में अनेक अवसर होते हैं जब पति से इतर परिवार की उसे आवश्यकता होती है। जब वह एक दिन उस की बहिन के यहाँ रही तो उस के परिवार वालों ने उस की काउंसलिंग की और उसे आप से अलग होने को तैयार कर लिया। दूसरी बार उसे जो पेट दर्द हुआ वह फर्जी भी हो सकता है। हो सकता है बहिन के यहाँ दुबारा डाक्टर को बहिन के द्वारा दिखाने का सुझाव भी आप को अंजलि ने ही दिया हो। वह पूरी तैयारी से बहिन के यहाँ गयी और योजनाबद्ध तरीके से नकद और जेवर आदि साथ ले गई। अब वह उसी नक्शे पर काम कर रही है। उसे आप से प्रेम था और आप से मिलने के बाद उस का इस फर्जी नक्शे को छोड़ आप के साथ आ सकने की संभावना थी। इसी कारण उस का परिवार उसे आप से मिलने नहीं दे रहा है। अब खेल बदल गया है। इसे फिर से बदलना तभी संभव है जब आप और अंजलि मिलें और गिले शिकवे दूर करें। यह अवसर आप को अब शायद परिवार न्यायालय में होने वाली अनिवार्य काउंसलिंग में ही मिल सकता है। उस से पहले नहीं।

प के परिवार वालों ने कुछ नहीं किया है इस कारण उन के विरुद्ध शिकायत रद्द हो सकती है यदि आप प्रयत्न करें। प्रथम सूचना दर्ज हो जाए तो उसे निरस्त कराने के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष निगरानी याचिका दाखिल की जा सकती है। लेकिन आप के विरुद्ध मामला दर्ज हो सकता है और चल सकता है। अंजलि का दूसरा विवाह करने के लिए आप से तलाक होना जरूरी है। वे चाहते हैं कि आप दबाव में आप कर खुद इस की पहल करें।

प आत्महत्या की सोच रहे हैं, वह पूरी तरह गलत है। ऐसे जीवन नहीं हारा जाता। मुझे नहीं लगता कि अब अंजलि को आप वापस ला सकते हैं। यदि वापस ले भी आएँ तो फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की जो गांठ उस के और आप के बीच पड़ गयी है वह कभी नहीं निकलेगी। बेहतर है कि आप उस के परिवार से बात कर के इस रिश्ते को अब भी त्याग दें। जो लड़की कमजोर हो कर अपने माता पिता का गलत काम में सहयोग कर रही है उस के साथ जीवन ठीक नहीं निभेगा। जो चला गया है वह चला गया है। आप सहमति से विवाह विच्छेद का मार्ग निकालें और अपना जीवन नए सिरे जीने का विचार बनाएँ।

पत्नी के झगड़ा करने के कारणों को जानने और उन्हें हल करने की कोशिश करें …

divorceसमस्या-

मुकेश कुमार पटेल ने महाराजगंज, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी को ५ साल हो गए है, पर मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं रहती है। मैं एक किसान हूँ और साथ मेरा व्यापार भी है। जब साथ रहती है तो आये दिन घर में झगड़ा होता रहता है। जिसका जिम्मेदार वो मेरे माता पिता को कहती है। झगड़ा होने के 1 से 2 दिन बाद ही अपने पिता को बुलाकर मायके चली जाती है और बार बार बुलाने पर भी वापस नहीं आती है। यह सब देख कर मेरे पिता जी की तबियत खराब हो गई है, दो बार तो हॉस्पिटल में भर्ती हो चुके हैं। पूरा परिवार मानसिक रूप से बहुत ही परेशान है। मेरी पत्नी के पिता वकील हैं जिस से वो बार बार धमकाती रहती है कि केस कर दूँगी। मेरे दो बच्चे हैं, एक ४ साल के बेटी और एक 1.5 साल का बेटा। सभी बच्चों के वापस आने की आस में ही रहते हैं। परन्तु इसका कोई भी प्रभाव मेरी पत्नी या उसके माता पिता पर नहीं पड़ता है। इन सभी परिस्थितियों से परेशान हो कर मै तलाक लेना चाहता हूँ और बच्चों को अपने पास रखना चाहता हूँ कृपया आप समाधान बताएँ।

समाधान-

प का पत्नी के साथ झगड़ा होता है, फिर पत्नी बच्चों के साथ मायके चली जाती है। वह झगड़े का कारण आप के माता-पिता को बताती है। कोई न कोई समस्या तो है जिसे आप समझ नहीं पा रहे हैं या फिर समझते हुए भी अनदेखा कर रहे हैं। यदि पत्नी बेमानी झगड़ा कर रही है तो पिता भले ही वकील हो बेटी का पक्ष बिना किसी आधार के क्यों लेगा? आप झगड़े का कारण तलाश करिए। हमारे पारिवारिक वातावरण में बहुत सी चीजें खास तौर पर बहुओं के साथ व्यवहार संबंधी चीजें परंपरागत रूप से ऐसी बनी हैं कि हमें उस में कोई कमी नहीं नजर आती। लेकिन आज की महिला उन्हीं चीजों को बर्दाश्त नहीं कर पाती। इस से विवाद पैदा होते हैं। इन विवादो का एक ही हल है कि या तो बहू अपने को ससुराल के वातावरण में ढाल ले, या फिर प्रतिरोध करे। आप की पत्नी कुछ चीजों का प्रतिरोध कर रही है। उस प्रतिरोध को समझिए और हल करने की कोशिश कीजिए। कुछ अपने माता पिता को भी समझाइए। आप ने लिखा है कि पूरा परिवार बच्चों के आने का इन्तजार करता रहता है। लेकिन क्या कोई भी बच्चों की माँ के आने का भी इन्तजार करता है? आप के इस कथन से ऐसा भी लगता है कि आप की पत्नी को आप के परिवार में प्रेम, स्नेह मिला ही नहीं। वह केवल एक औजार की तरह आ कर परिवार में फिट हो गयी।

में अभी तक आप के तलाक लेने का कोई आधार नजर नहीं आता। आप मुकदमा करेंगे तो पत्नी के पिता तो वकील हैं ही। वे प्रतिवाद भी अच्छा करेंगे और आप के विरुद्ध कई मुकदमे करेंगे। बरसों तक मामला सुलझेगा नहीं। बच्चों की कस्टड़ी भी फिलहाल कुछ वर्ष आप को नहीं मिलेगी। यदि बच्चे कुछ वर्ष और आप से अलग रह गए तो फिर वे भी आप के साथ रहना नहीं चाहेंगे।

प के 1.5 और 4 वर्ष के दो बच्चे हैं, ये दोनों बच्चे बिना माँ के नहीं आ गए। आप को फिलहाल तलाक के बारे में सोचने के स्थान पर इस रिश्ते को ठीक करने और आगे बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए। आप की पत्नी जिन बातों पर झगड़ा करती है उन के बारे में विचार करें कि वह कितनी गलत या सही झगड़ा करती है। पत्नी के पिता से मिलिए। संभव हो तो काउंसलर्स की मदद लीजिए पर इस झगड़े को आपसी बातचीत के तरीके से हल कीजिए। चाहे उस का अंतिम बिन्दु साथ रहना हो या फिर विवाह विच्छेद। सहमति से मामला निपटेगा तो दोनों पक्षों को नुकसान कम से कम होगा।

आपस में मामला निपटाएँ या अच्छे काउंसलर की मदद लें।

Counsellingसमस्या-

सुजीत ने रांची, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मारी शादी एक प्रेम विवाह था। हमारी एक 6 साल की बेटी भी है। मेरी पत्नी पिछले 11 माह से मायके में है। मेरी पत्नी चाहती है कि मकान-जमीन का बँटवारा हो जाए। मेरी पत्नी बिना तलाक लिए मेरे से 5000/- रुपए गुजारा भत्ता प्राप्त करती है। वह मुझे हमेशा आत्महत्या की धमकी देती है। मेरा घर सुविधा वाला है। फिर भी वह अलग अपार्टमेंट [20 लाख ] खरीदना चाहती है। सर मैं निजी काम करता हूँ, तो मेरी क्षमता अभी अपार्टमेंट खरीदने की नहीं है। मेरी पत्नी की दो बहन भी हैं, जिन्होंने अपने-अपने पति को छोड़ रखा है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प का प्रश्न बहुत अधूरा है। आप ने यह नहीं बताया कि पत्नी किस जमीन मकान का बँटवारा चाहती है? और वे किस के स्वामित्व के हैं? आप का सुविधा वाला घर आप के स्वामित्व का है या संयुक्त स्वामित्व का है?

किसी भी पत्नी को यह अधिकार नहीं कि वह संयुक्त स्वामित्व की संपत्तियों में पति के हिस्से का बँटवारा चाहे। आप का सुविधा वाला घर भी संयुक्त स्वामित्व का प्रतीत होता है। जिस की सुविधाएँ बहुत से लोग एक साथ साझा करते हैं। आप की पत्नी ये सब सुविधाएँ स्वयं के लिए चाहती है बिना किसी के साथ साझा किए। यही कारण है कि वह आप पर अलग अपार्टमेंट लेने के लिए दबाव बना रही है। उस की दो बहनें अपने पतियों को छोड़ कर स्वतंत्र रूप से रह रही हैं। उन से भी उसे प्रेरणा तो मिलती ही है।

कोई भी व्यक्ति किसी को उस की इच्छा के विरुद्ध साथ नहीं रख सकता। इस कारण इस समस्या का हल यही है कि आप और आप की पत्नी इस मसले को आपस में बैठ कर सुलझाएँ। यदि आपस में बैठ सुलझाना संभव न हो तो किसी अच्छे काउंसलर की मदद लें। यदि आप कानूनी रास्ता चुनेंगे तो वह भी दबाव को बनाए रखने के लिए अनेक कानूनी उपायों की शरण में जा सकती है जो आप की समस्या को बढ़ाएंगे ही घटाएंगे नहीं।

पत्नी के विरुद्ध कोई भी कार्यवाही करने के पहले तीन वर्ष पूरे होने दीजिए।

divorceसमस्या-
संजय धामेचा ने चम्पा, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मेरी पत्नी पिछले ढाई साल से अपने मायके मेरे 6 साल के बच्चे के साथ रह रही है।  मेरी शादी 14 फरवरी 2007 को हुई थी। इस के बाद घर में मेरे माँ बाप के साथ इस की न बनने के चलते ये दो बार आपने मायके चली गई थी।  इस की शर्तों को मानकर मैं दोनों बार इसे ले आया। अलग से घर किराये पर ले कर रहा। लेकिन अकेले घर न सम्भाल पाने (काम वाली बाई रहने के बावजूद) के कारण ये मुझ से छोटो छोटी बातों पर झगड़ने लगी और एक दिन मेरे साथ मारपीट भी कि जिसे देखकर मेरे पिता ने इस के माँ बाप को बुलाकर इसे वापस भेज दिया।  इन ढाई साल के दौरान एक बार मेरे माँ बाप और एक बार मैं इसे लेने गए लेकिन नए या दूसरे मकान में रहूंगी बोलकर नहीं आई। पहले हम दूसरा घर भी ले चुके है लेकिन ये रह ही नहीं पाती और मेरी माँ कभी भी गलत नहीं है तो किस आधार पर मैं उसकी शर्त मानूं? मुझे मेरे बच्चे की भी चिंता है। आज ढाई साल बाद वह मुझे फ़ोन पर कहती है कि दम है तो यहाँ आकर हमें लेकर जाओ। मुझे समझ नहीं आ रहा ये किस तरह का समझौता है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

ज कल परिवारों का ढाँचा पहले की अपेक्षा बहुत बदल चुका है और लगातार बदल रहा है। शादी की उम्र बढ़ गई है। लेकिन हमारे यहाँ शादियों का ढर्रा वही पुराना चला आ रहा है। शादियों का पुराना ढर्रा नए ढाँचे के साथ मेल नहीं खा रहा है। यह अन्तर्विरोध विवाहों में बहुत खलल पैदा कर रहा है। आप को जिस तरह की समस्या आ रही है वैसी समस्याएँ बहुत आम हो गई हैं।

जिस तरह आप कह रहे हैं कि आप की माँ गलत नहीं है। आप की पत्नी भी यही सोचती होगी कि उस के माता-पिता गलत नहीं हैं। पर यह आप दोनों की सोच है। फिर भी आप की स्थिति बहुत विकट है। जिस तरह आप की पत्नी ने आप के साथ मारपीट की और अब कहती है कि दम हो तो यहाँ आ कर हमें ले कर जाओ। उस से लगता है कि उस का आप के साथ रहने का मन है। बच्चे की चिन्ता होना भी स्वाभाविक है। फिर विवाहित होते हुए अपनी पत्नी से अलग रहना आसान काम नहीं है।

प ने ढाई वर्ष जैसे निकाले हैं, कम से कम छह माह या एक वर्ष और निकालिए। इस अवधि में आप अपनी ओर से शान्त रहिए और न आप के माता पिता और न ही आप स्वयं अपनी ससुराल जाइए। इस से यह होगा कि आप दोनों का अलगाव तीन वर्ष से अधिक का हो जाएगा। तब एक संकट आप का हल हो जाएगा कि आप की पत्नी आप के विरुद्ध धारा 498-ए आईपीसी और घरेलू हिंसा की कोई झूठी शिकायत नहीं कर सकेगी। यदि वह करेगी भी तो उस में आप के लिए अच्छा प्रतिवाद होगा। यह छह माह या साल भर का समय और निकाल देने के उपरान्त आप अपनी पत्नी के विरुद्ध धारा-9 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत दाम्पत्य संबंधों की पुनर्स्थापना के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इस प्रार्थना पत्र की सुनवाई के दौरान कोई हल निकल सकता है या फिर आप के प्रार्थना पत्र पर आप को डिक्री प्राप्त हो सकेगी। आप की पत्नी फिर भी आप के साथ रहने को नहीं आती है तो आप एक वर्ष बाद विवाह विच्छेद के लिए आवेदन दे सकते हैं। बाद में आप बच्चे की अभिरक्षा के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।

पति- पत्नी एक दूसरे को समझने के लिए वक्त जुटाएँ।

liveinसमस्या-

मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश से सतीश कुमार उपाध्याय ने पूछा है-

मेरी शादी 21/01/2011 को मुरादाबाद में हिंदू रीति रिवाज़ के साथ संपन्न हुई।  शादी की पहली रात से ही मेरी पत्नी का व्यवहार आश्चर्यजनक लगा।  पहली रात को मेरा उससे कोई शारीरिक संबंध स्थपित नही हुआ। वह संबंध बनाने में हमेशा आपत्ति जताती थी, जिससे हमारा निरंतर झगड़ा होता रहता था।  उसका मेरे घर में मन ही नहीं लगता था। 2 साल 6 महीने की शादी में वह मेरे साथ मात्र 4 महीने ही रही है और 6/07/2012 से वो निरंतर अपने मायके में ही रह रही है। मैं और मेरे परिवारजन उस के पिताजी से उन के घर जाकर मिले और उसे अपने घर लाने का बहुत प्रयास किया लेकिन सफलता नही मिली। मैं ने स्वयं 16/06/1013 को अपने परिवारजनों के साथ जा कर उस से और उनके परिवारजनों से वार्ता की तो मेरी पत्नी और उसके पिताजी मुझ पर, मेरी माँ पर मारने पीटने का आरोप लगाने लगे  और कहने लगे की मेरी बेटी आपके घर सुरक्षित नहीं है।  इस पर मैं ने कहा कि अगर मुझ से और मेरे परिवार से आप को और आपकी बेटी को इतनी समस्या है तो हम दोनों अपना रास्ता अलग कर लें ताकि दोनो की जिंदगी सम्हल जाए।  तो वो इसपर भी राज़ी नहीं हैं। मेरी पत्नी कहती है कि जब मैं कुछ बन जाऊंगी तब आऊँगी जिस की उसने कोई समय सीमा भी नहीं दी और मेरे छोटे भाई पर यौन शोषण का आरोप लगाने लगी जो कि निरर्थक है। मुझ से कहने लगी कि मैं उसके घर आ के संबंध बनाऊँ। मुझे लगता है कि वो सब मेरी जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और मुझे कारण लगता है कि उस में माँ बनने की योग्यता ही नहीं है। क्यों कि जब भी डॉक्टर से चेक अप कराने की बात होती है तो उस के पिताजी अपने घर लिवा के चले जाते हैं और अब तो भेजने को तैयार भी नहीं हैं।  बस आरोप लगा रहे हैं, कोई सार्थक बात भी नहीं कर रहे हैं। बस समय खींच रहे हैं ताकि मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाए। मेरे साथ अन्याय हो रहा है।  मैं इस से निजात पाना चाहता हूँ। अपनी पत्नी के साथ रहने में अब मैं सुरक्षित भी महसूस नही कर पाता हूँ, क्यों कि उनके घरवाले अच्छे लोग नही हैं, गुंडागर्दी की बातें करते हैं और अच्छे संबंध बनाने में मेरी पत्नी भी मेरा सहयोग नहीं कर रही है। बस अपनी मनमानी कर रही है जिस में उस के पिताजी और भाई सहयोग कर रहे हैं। मैं बहुत परेशान हूँ, मुझे रास्ता बताएँ।

समाधान-

प की बात से लगता है कि आप अब अपना विवाह विच्छेद कर अपनी पत्नी से मुक्त होने की इच्छा रखते हैं। लेकिन विवाह विच्छेद के लिए कोई न कोई आधार चाहिए। वर्तमान में केवल एक आधार हो सकता है कि आप की पत्नी बिना किसी कारण के आप को छोड़ कर एक वर्ष से अधिक समय से अपने मायके में है और आना नहीं चाहती है। आप की कुछ शिकायतें तो वाजिब नहीं लगती। एक लड़की जो आप को कल तक जानती नहीं थी आप की पत्नी बन कर आती है आप घुलना मिलना चाहती है और आप पहली ही रात्रि को उस से शारीरिक संबंध बनाना चाहते हैं बिना एक दूसरे को जाने समझे। पहले ऐसा होता था लेकिन अब चीजें बदल चुकी हैं और यह लगभग संभव नहीं रहा है। वैसे भी इस की इतनी जल्दी क्या है। पति-पत्नी विवाह के उपरान्त कुछ समय एक दूसरे को समझने में ले सकते हैं। मुझे लगता है कि आप ने अपनी जल्दबाजी से यह अवसर खो दिया है।

प की पत्नी कहती है कि वह तब आएगी जब वह कुछ बन जाएगी। इस से लगता है कि आप की पत्नी को यह लगता है कि वह कुछ बन चुकने के बाद ही आप के परिवार में आत्मसम्मान पाएगी। हो सकता है तब तक वह बच्चे की माँ नहीं बनना चाहती हो। ये सब लड़कियों में विकसित हो रहे नए मूल्य हैं। आज हर लड़की आत्मनिर्भर होना चाहती है और इस में पुरुषों का ही भला है।  हमें इन नए मूल्यों का सम्मान करना चाहिए। मुझे लगता है कि आप और आप की पत्नी अभी तक एक दूसरे को ठीक से नहीं समझ सके हैं और आप दोनों को परिजनों की मध्यस्थता के स्थान पर किसी काउंसलर की मध्यस्थता की आवश्यकता है,  या संभव हो तो बिना किसी मध्यस्थता के आप दोनों एक दूसरे को समझने की कोशिश करें।

प की पत्नी का प्रस्ताव बुरा नहीं है। आप बिना कोई आग्रह दुराग्रह लिए उस के मायके में जाएँ, उस के साथ संबंध बनाए रखें। दोनों के बीच अभी प्रेम नहीं उपजा। उसे उपजने के लिए अवसर दें। एक दो दिन उस के साथ रुक कर आएँ। और हर माह इस क्रम को दो बार दोहराने का प्रयत्न करें। पत्नी को समझने की कोशिश करें और और उसे भी आप को समझने दें। मुझे लगता है इसी से आप की समस्याएँ हल हो सकती हैं।

पत्नी से मतभेद सुलझाने के लिए कानूनी उपाय करने से पहले किसी काउंसलर की मदद लें

समस्या-

वाराणसी, उत्तर प्रदेश से सुनील ने पूछा है –

मेरा विवाह 21.01.2011 को हुआ था।  मेरी पत्नी विवाह की पहली रात से ही मेरे साथ अपमानजनक व्यवहार करती है। मैं ने सामंजस्य बिठाने का बहुत प्रयत्न किया। लेकिन बात नहीं बनी। वह अधिकतर अपने मायके में रहती है और 12.07.2012 से नियमित रूप से अपने मायके में रह रही है। मेरे माता-पिता ने कई बार उस की विदाई के लिए प्रयास किया लेकिन वह नहीं आयी। उस के माता-पिता भी केवल बेटी के हिसाब से काम कर रहे हैं और मेरा जीवन बरबाद हो रहा है। कृपया बताएँ मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

Counsellingप ने अपनी यही समस्या पहले अंग्रेजी में भेजी थी। तब हम ने आप को यह सलाह दी थी कि अंग्रेजी में बहुत सी वेबसाइट्स हैं जो यह काम करती हैं आप को वहाँ सलाह लेना चाहिए। यह वेबसाइट हिन्दी वालों के लिए है जिन्हें यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। हम हिन्दी पाठकों की सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाते हैं, क्यों कि समस्याएँ अधिक मिलती हैं और हमारे पास समय और संसाधन उतने नहीं हैं। लेकिन आप ने फिर समस्या को रोमन हिन्दी में पुनः प्रेषित कर दिया। खैर¡

प ने समस्या को खोल कर नहीं रखा। आप को आप की पत्नी किस तरह अपमानित करती है? आप ने सामंजस्य बिठाने के क्या प्रयत्न किए? आप दोनों के बीच मतभेद किन बातों को ले कर हैं? आप के माता-पिता ने विदाई कराने के क्या प्रयास किए और कैसे किए? आप की पत्नी के माता पिता किस तरह अपनी बेटी के हिसाब से काम करते हैं? आप का जीवन किस तरह बरबाद हो रहा है?  कोई भी तथ्य आप ने यहाँ नहीं रखा है। आप की पत्नी आप के साथ रहने को मना करती है तो कुछ तो कारण बताती होगी, वे भी आपने नहीं बताए हैं। हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है कि आप की इन समस्याओं के बारे में जान लें। तब आप का यह अपेक्षा करना कि हम आप की समस्या का कोई समाधान बताएंगे यह कैसे संभव है?

स तरह के मामलों में जब तक पाठक समस्या से संबंधित अधिकतम जानकारी हमें नहीं देता है तब तक हम कोई उपाय नहीं बता सकते। आप की बात से सिर्फ इतना पता लगता है कि आप और आप की पत्नी के बीच आपसी व्यवहार को ले कर मतभेद हैं जिस के कारण आप की पत्नी आप के साथ नहीं रह रही है। हो सकता है उसे आप के साथ रहने में कोई परेशानी आ रही हो। मेरा सुझाव है कि किसी तरह का कानूनी उपाय करने के स्थान पर आप को किसी अच्छे काउंसलर की मदद लेनी चाहिए जो आप से तथा आप की पत्नी से आपसी विवाद को समझ कर उस का हल सुझा सके। आप बिना सोचे समझे किसी कानूनी उपाय के चक्कर में पड़ेंगे तो हो सकता है आप बहुत सारी समस्याओं से घिर जाएँ और उन से निकलने का कोई मार्ग ही सूझे।


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