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Month: June 2010

पिता स्वअर्जित संपत्ति को कैसे भी बाँट सकता है, लेकिन पुश्तैनी संपत्ति को नहीं

अनिता सोनी पूछती हैं — पिता जीवित हैं, उन के पाँच पुत्र हैं। एक पुत्र की पिता से नहीं बनती है इसलिए वह अलग रहता है। पिता ने
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पत्नी मेरे साथ आ कर रहने को तैयार नहीं है, मुझे क्या करना चाहिए?

 अनिल सक्सेना ने पूछा है — सर! मेरी शादी 22.6.2007 को हुई थी, शादी के छः माह बाद ही मुझे पता लगा कि मेरी पत्नी की दोनों किडनी
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सर्वोच्च न्यायालय की नियम बनाने की शक्तियाँ : भारत में विधि का इतिहास-100

संविधान के अनुच्छेद 145 ने सर्वोच्च न्यायालय को न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया के सामान्य विनियमन के संबंध में नियम बनाने की शक्ति प्रदान की है जिस के
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रिसीवर नियुक्त होने पर कृषिभूमि खाली नहीं रह सकती

विजय कुमार पूछते हैं —– मेरे पिताजी चार भाई हैं, चारों भाइयों में जमीनी विवाद चल रहा है। विवाद के चलते मेरे पिताजी ने एसडीएम से प्रार्थना कर
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राजस्व रिकार्ड में मेरे नाम दर्ज भूमि में क्या मेरी बहन विभाजन मांग सकती है?

रामसेवक जी ने पूछा है — मेरी चार बहनें और मैं एक भाई हूँ। मेरे पिता जी ने अपने जीवनकाल में उन के स्वयं के द्वारा खरीदी गई
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सरकार की घोषित राष्ट्रीय मुकदमा नीति का स्वागत है

केन्द्र सरकार की ओर से आज राष्ट्रीय मुकदमा नीति जारी करते हुए कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि इस नीति में प्रस्तावित निगरानी और समीक्षा का
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तीसरे पक्ष का चैक भुगतान नहीं हुआ है, मैं क्या कर सकता हूँ?

श्री प्रेम सारस्वत ने पूछा है —  सर! मेरी समस्या ये है कि मैं एक छोटा सा दुकानदार हूँ, सूरत में मेरी एक दुकान है। एक माह पहले
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उपचारात्मक याचिका (Curative Petition) एक अंतिम न्यायिक उपाय : भारत में विधि का इतिहास-99

इन दिनों यह बात चर्चा में है कि जब भोपाल त्रासदी के अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए धारा 304 भाग दो दं.प्र.सं. के आरोपों को भारत का सर्वोच्च
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सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना के लिए दंडित करने व नियम बनाने की शक्तियाँ : भारत में विधि का इतिहास-98

अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 129 के अंतर्गत एक अभिलेख न्यायालय है। इसी कारण से इस न्यायालय को अपनी ही अवमानना
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सर्वोच्च न्यायालय की अपने ही निर्णयों और आदेशों के पुनर्विलोकन की अधिकारिता : भारत में विधि का इतिहास-97

सर्वोच्च न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 137 के अंतर्गत शक्ति प्रदान की गई है कि वह अपने ही निर्णयों और आदेशों का पुनर्विलोकन कर सकेगा। लेकिन उस की
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