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क्यों उठते हैं न्यायिक व्यवस्था पर प्रश्न, बार-बार

पिछले दिनों मेरे ही एक संबंधी के पुत्र को 498-ए में गिरफ्तार किया गया। हम करीब साल भर पहले से यह जानते थे कि ऐसी स्थिति आ सकती
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कोशिश करें कि पत्नी को समझ आ जाए, वह आप के साथ रहने को तैयार हो जाए

 सोनू ने पूछा है – – –  मैं अजमेर का रहने वाला हूँ, छुटपुट धंधा करता हूँ। 2006 में मेरी शादी हुई थी, शादी के कुछ दिन बाद
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मानसिक क्रूरता के लिए न्यायिक पृथक्करण प्राप्त करें

   असीमा ने अपनी समस्या इस तरह रखी है –   मेरे पति अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र हैं, मेरी कोई ननद भी नहीं है। लेकिन मुझे ससुराल
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अगले दस वर्षों में एक लाख जज नियुक्त करने होंगे

सरकारी आँकड़ों के अनुसार भारत में 4,30,000 लोग जेलों में बंद हैं, जिन में से तीन लाख बंदी केवल इसलिए बंद हैं कि उन के मुकदमे का निर्णय
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मैं वह फैसला पढ़ लेता तब भी मेरा फैसला वही होता ……

साल का आखिरी दिन है, और अपने पाठकों और मित्रों से कानून की बात नहीं, व्यवहार की बात करना चाहता हूँ। यह ब्लाग विधि और न्याय प्रणाली से
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आलोचना नहीं, तो हम न्यायपालिका जितनी निष्पक्ष रह गई है, उसे भी खो देंगे

वर्षान्त आ गया है। मैं जब इस लेख को लिखने बैठा हूँ, उस के ठीक दो घंटे बाद साल 2010 का आखिरी दिन आरंभ हो चुका होगा, फिर चौबीस
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क्यों आवश्यक है उत्तराधिकार प्रमाण पत्र? और यह कैसे प्राप्त किया जाए?

 श्री वी के श्रीवास्तव, बस्ती उत्तर प्रदेश से पूछते हैं – मेरी माता जी द्वारा एक वर्ष के लिए क्रमश: पचास, पचास  हज़ार रूपये की तीन सावधि जमा
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राजद्रोह का अपराध क्या है?

राजद्रोह के अपराध में चिकित्सक और मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ.बिनायक सेन को आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई, देश भर में बड़े पैमाने पर इस निर्णय की आलोचना
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डॉ. बिनायक सेन व अन्य दो अभियुक्तों को दंडित करने वाला मूल निर्णय अंतर्जाल पर उपलब्ध

दिसंबर 24, 2010 को रायपुर (छत्तीसगढ़) के द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी.पी. वर्मा ने अपने यहाँ लंबित सत्र प्रकरण क्रमांक 182/2007 छत्तीसगढ़ शासन बनाम पिजूष उर्फ बुबून गुहा,
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