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राजस्व और दीवानी न्यायालयों का फिर से पृथक्करण : भारत में विधि का इतिहास-47

लॉर्ड कॉर्नवलिस 1787 और 1790 के अपने सुधारों से संतुष्ट न हुआ। ऐसा प्रतीत होता है कि ये दोनों कदम उस के अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के
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दांडिक न्याय प्रशासन में 1790 के सुधार : भारत में विधि का इतिहास-46

लॉर्ड कार्नवलिस द्वारा किए गए सुधार के प्रयत्न महत्वपूर्ण थे। उस ने न्यायालय के कर्मचारियों के वेतनों में वृद्धि कर दी थी, जिन में भारतीय सहायक कर्मचारी भी
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लार्ड कॉर्नवलिस को 1790 के दाण्डिक न्याय प्रशासन में बदलाव : भारत में विधि का इतिहास-45

लॉर्ड कॉर्नवलिस के गवर्नर बनने के समय अपराधिक न्याय प्रशासन में पूरी अराजकता थी। दंड न्यायालयों में शोषण, दमन और भ्रष्टाचार व्याप्त था। जेलें अपराधियों से भरी पड़ी
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लॉर्ड कॉर्नवलिस की 1787 की न्यायिक योजना : भारत में विधि का इतिहास-44

हेस्टिंग्स की वापसी हुई, और लॉर्ड कॉर्नवलिस को 1786 में बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया गया। उस ने 1793 तक इस पद पर बना रहा। उस ने अपने
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निवास का पता, स्थायी पता, अस्थायी पता, इत्यादि क्या हैं?

महेश कुमार वर्मा ने पूछा है– कृपया बताने की कृपा करें कि आवासीय पता, निवास का पता, स्थायी पता, अस्थायी पता, इत्यादि ………….. इन सब में क्या अंतर
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मुस्लिम तलाक को अदालत में किस तरह से साबित किया जाए?

फीरोज अहमद साहब ने अपने एक प्रश्न में पूछा था–  ‘मुस्लिम तलाक को अदालत में किस तरह से साबित किया जाए? ‘ उत्तर- फीरोज़ अहमद जी, एक मुस्लिम
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ठेकेदार श्रमिकों के लिए न्याय की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं

बालकिशन पूछते हैं– मैं एक कंपनी में 6 साल से कार्यकर रहा हूँ, मेरा केवल ठेकदार बदला जाता है और कार्मिकों को नहीं बदला जाता है।  जब संविदा
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नियमित कर्मचारी और दैनिक वेतन भोगी का वेतन समान नहीं हो सकता

धर्मेन्द्र कुमार प्रजापति पूछते हैं– क्या यह उचित है कि किसी विश्वविद्यालय में संविदा-कर्मी और एजेंसी-कर्मी के मानदेय (वेतन) में अंतर हो सकता है। या यदि ऐजेंसी का
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मुस्लिम विधि में पुरुष का एक से अधिक, चार तक विवाह करना अधिकार नहीं, एक सशर्त छूट है

फीरोज़ अहमद पूछते हैं, सर !  हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने “मुस्लिम सरकारी कर्मचारी के दूसरे विवाह” पर  एक असमंजस भरा निर्णय दिया है, जो कि संविधान
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