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फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त कराने के लिए दीवानी वाद और छल व फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए अपराधिक शिकायत दर्ज कराएँ।

समस्या-

दुर्गेश शर्मा ने अजमेर, राजस्थान से पूछा है-

मारे दादा जी ने ज़मीन खरीदी उस वक़्त के उनके हस्ताक्षर एवं अंगूठा निशानी रजिस्ट्रार ऑफिस में किए थे। लेकिन जब हम ने इस के बारे मे हमारे भाइयों से पूछा तो उन्होने कहा कि ये ज़मीन हमारे दादा जी ने उनको बेच दी थी। फिर जब हम ने बेचान की रजिस्ट्री की कॉपी निकलवाई तो पता चला कि जमीन बेचान की रजिस्ट्री में उन के सिग्नेचर हस्ताक्षर एवं अंगूठा निशानी मैच नहीं करते हैं। इस की हम ने एफएसएल जाँच भी करवायी है. एफएसएल की रिपोर्ट में भी ये मैच नहीं हुए हैं। कृपया हम को बताएँ कि हम क्या कर सकते हैं।

समाधान-

किसी भी मामले में कानूनी सलाह लेते समय यह आवश्यक है कि जिस विधि विशेषज्ञ से आप सलाह ले रहे हैं उस के समक्ष सभी तथ्य रखे जाएँ। आपने आपके इस मामले में दादाजी द्वारा जमीन खरीदे जाने के विक्रय पत्र की रजिस्ट्री की तिथि तथा फिर दादाजी द्वारा भाइयों के नाम किए गए विक्रय पत्र की रजिस्ट्री की तिथि नहीं बताई है। एफएसएल की रिपोर्ट कब आई है इस की तिथि भी नहीं बताई है। हर उपाय प्राप्त करने के लिए न्यायालय के ममक्ष कार्यवाही करे की एक निश्चित समयावधि होती है और कोई भी उपाय केवल सही समय पर नहीं करने के कारण असफल हो सकता है।

हली बात आप को यह देखनी चाहिए कि जब आप के दादा जी ने जमीन खरीदी थी तब रजिस्ट्री पर उन के हस्ताक्षर हुए थे क्या? यदि उन के हस्ताक्षर उस रजिस्ट्री पर हुए थे तो बेचान की रजिस्ट्री पर हुए उन के हस्ताक्षर पूर्व के हस्ताक्षरों से मिलने चाहिए थे और साथ ही अंगूठा निशानी भी मेल खानी चाहिए थी। इस का एक ही अर्थ हो सकता है कि भाइयों ने किसी अन्य व्यक्ति को आपके दादाजी बना कर रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली हो। यदि इस की जरा सी भी संभावना है तो यह गंभीर अपराध है क्यों कि इस में फर्जी दस्तावेज का निर्माण कर के छल हुआ है। इस में अनेक अपराध एक साथ हुए हैं।आप इस की रिपोर्ट पुलिस को करवा सकते हैं और पुलिस के कार्यवाही न करने पर परिवाद प्रस्तुत कर सीधे न्यायालय को कह सकते हैं कि इस मामले को दर्ज कर पुलिस को जाँच के लिए भेजा जाए।

दि आप को पक्का है कि जो रजिस्ट्री आपके दादा की ओर से भाइयों के नाम हुई है वह फर्जी है और उस में छल हुआ है तो आप इसी आधार पर उस कूटरचित रजिस्टर्ड विक्रय पत्र को निरस्त कराने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं और जमीन का बंटवारा करा कर अपने हिस्से की जमीन का पृथक कब्जा दिए जाने के लिए राजस्व न्यायालय में विभाजन का वाद संस्थित कर सकते हैं।

मृत पुत्र की संतानों को पुत्र के समान ही दादा की संपत्ति में उत्तराधिकार है।

समस्या-

नितिका चौहान ने ग्राम खेडली, पोस्ट भद्रबाद, जिला हरिद्वार, उत्तराखंड से पूछा है-

मेरा जन्म 1992 में हुआ था। मेरे मेरे दादाजी के दो पुत्र मेरे ताऊजी आदित्य कुमार और मेरे पिताजी रविंद्र कुमार थे। मैं रविंद्र कुमार जी की इकलौती संतान हूँ। मेरे पिताजी रविंद्र कुमार जी का देहांत 1994 में हो गया था।  उसके पश्चात मेरे दादा जी का देहांत 2011 में हो गया। मेरे दादाजी के बैंक खाते में जो धनराशि थी, मेरे दादाजी की मृत्यु के बाद मेरे ताऊजी ने उसको निकाल लिया और उसमें मुझे कोई हिस्सा नहीं दिया। मुझे बैंक जाकर पता चला कि मेरे ताऊजी ने परिवार रजिस्टर की जो नकल वहां लगाई थी उसमें मेरे ताऊजी ने मुझे अपनी पुत्री दर्शाते हुए बैंक खाते से धनराशि प्राप्त कर ली है।  मैं जानना चाहती हूं कि क्या उस धनराशि पर मेरा भी उतना ही हक था, जितना कि मेरे दादा जी की मृत्यु के बाद मेरे ताऊजी का था।

समाधान-

बिलकुल आप ने सही कहा। उस धनराशि पर आप का उतना ही अधिकार था जितना की आप के ताउजी को था। किसी पुरुष की मृत्यु के उपरान्त उत्तराधिकार धारा 8 हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अंतर्गत तय होता है। धारा 8 में सब से पहले उन लोगों का बराबर का अधिकार होता है जो अधिनियम की अनुसूची की प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी हों। उस में पुत्र और पूर्व मृत पुत्र के पुत्र-पुत्री एक साथ रखे गए हैं। क्यों कि आप अपने पिता की इकलौती संतान हैं तो आप का अपने दादाजी की संपत्ति पर उतना ही अधिकार है जितना कि आप के ताऊजी को है।

बैंक किसी भी प्रकार से आप के ताऊ जी को यह धन नहीं देता और उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की मांग करता। लेकिन आप के ताऊजी ने आप को अपनी पुत्री बता दिया। जीवित पुत्र की पुत्री तो प्रथम श्रेणी की उत्तराधिकारी नहीं है इस कारण बैंक ने वह धन आप के ताऊजी को दे दिया।

लेकिन इस तरह गलत सूचना दे कर बैंक से धन प्राप्त करना धारा 402 भारतीय दंड संहिता व अन्य कुछ धाराओं के अंतर्गत अत्यन्त गंभीर अपराध है। यदि आप पुलिस में रिपोर्ट करें या पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही न करने पर मजिस्ट्रेट के न्यायालय में परिवाद करें और आप के ताऊजी के विरुद्ध अभियोजन संस्थित हो तो उन्हें हर हाल में कारावास की सजा हो जाएगी।

स के अतिरिक्त आप जितना धन आप के ताऊजी ने बैंक से प्राप्त किया है उस के आधे धन और वह धन प्राप्त करने से लेकर उस की अदायगी तक के ब्याज प्राप्त करने के लिए आप दीवानी न्यायालय में दीवानी वाद संस्थित कर सकती हैं।

बेईमानी पूर्ण छल के लिए पुलिस में रिपोर्ट कराएँ और धन वसूली के लिए दीवानी वाद संस्थित करें।

समस्या –

मनीषा ने विकास नगर, कोंडगाँव, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मेरे समाज वाले व सहेली के पति ने अपनी पत्नी के सामने मुझसे 50000 रुपये 2 महीने के लिये मांगे थे। मैंने परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्टाम्प पर लिखवा कर उनको पैसे दिए।  1 महीने बाद शहर छोड़ कर भाग गया, अब जब मुझे अपने पैसे वापस चाहिये तो मुझे बोलते हैं कि  मैं तो कंगाल हूँ, सब अपनी बीवी के पास छोड़ आया हूँ, जा के उससे पैसे मांगो,  उसको टॉर्चर करो, मैं कहाँ से दूंगा। मैंने हर संभव कोशिश कर ली, पर वो किसी चीज़ से नहीं डरता। धीरे धीरे भी पैसे वापस करने का नाम नहीं ले रहा । उसकी पत्नी ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया के मैं खुद अपने भाई के दरवाजे पर हूँ, कहाँ से तुमको पैसे दूँ। वो आदमी और भी बहुत लोगों से पैसे लेकर गया है। मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

सा प्रतीत होता है कि सहेली के पति ने जानबूझ कर अपनी पत्नी को परेशान करने की नीयत से आप से रुपया लिया है और अब पल्ला झाड़ रहा है। यदि आपने स्टाम्प पर लिखवाया है तो आप अपने धन की वसूली के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकती हैं। यह वाद रुपया देने और स्टाम्प लिखे जाने की तारीख से तीन साल के भीतर किया जा सकता है। इस तरह आप स्टाम्प लिखे जाने की तिथि से तीन साल पूरे होने के दो माह पहले तक धन वापसी के लिए दूसरे प्रयास कर सकती हैं। लेकिन तीन साल पूरे होने के दो महीने पहले ही किसी वकील से मिल कर दीवानी वाद संस्थित कर दें, उस में कोताही नहीं करें।

इस व्यक्ति ने आप के साथ ही छल और बेईमानी की है जो कि धारा 420 आईपीसी व अन्य धाराओं के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। इस कारण आपको तुरन्त उस व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट लिखानी चाहिए। आम तौर पर पुलिस वाले इस तरह के मुकदमों को दर्ज करने में आनाकानी करते हैं। पुलिस को रिपोर्ट देने के बाद एक दो दिन में कार्यवाही न होने पर एस पी को लिखित में परिवाद पूरे विवरण के साथ रजिस्टर्ड एडी से भिजवाएँ। एक सप्ताह में भी कोई कार्यवाही न होने पर किसी वकील से संपर्क कर के न्यायालय में अपराधिक परिवाद दर्ज कराएँ। अपराधिक कार्यवाही के दबाव में आप का पैसा वसूल हो जाए तो ठीक अन्यथा स्टाम्प लिखे जाने की तिथि के तीन साल पूरे होने के पहले अपना रुपया वसूली का मुकदमा अदालत में जरूर लगा दें।

दोनों ही मामलों में आप अपनी सहली के विरुद्ध कोई कार्यवाही न करें बल्कि उसे गवाह बनाएँ क्यों कि वह इस वक्त आपका साथ जरूर देगी।

धोखाधड़ी, छल व ब्लेकमेलिंग का मुकदमा दर्ज कराएँ।

cheque dishonour1समस्या-

सुनील ने  हिरनमगरी, उदयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मैं ने दुकान की आवश्यकता के लिए डेली बेस पर डायरी खुलवाने हेतु एक खाली चैक डायरी वाले को दिया। उस के बदले उस ने एक बीस हजार का चैक दिया। जब मैं ने चैक बैंक में डाला तो उसने चैक स्टॉप करा दिया। जब मैं उसके पास गया तो उस ने रूपया नहीं होना बताया। कुछ समय बाद दूसरा चैक देने की बात की। मैं ने भी जरूरत के कारण हाँ भर दी कॉफी समय निकलने के बाद भी उस ने चैक नहीं दिया। जब फिर से उसके आफिस गया तो पता चला कि उसने आफिस खाली कर दिया। फिर मैं ने उसे बहुत तलाश किया पर उसका कोई पता नही चला। करीब दो साल बाद उस ने मेरे चैक में राशि भरकर मुझ पर केस कर दिया। उस से मिलने पर वह बात करने को भी तैयार नहीं है। बात जिरह तक पहुँच गई है। मुझे कानूनी ज्ञान बिलकुल नहीं है और वकील साब भी कुछ नहीं बताते। कृपया उचित सलाह दें।

समाधान-

ह समझ नहीं आया कि दैनिक आधार पर यह किस तरह की डायरी खुलवाने की बात आप कर रहे हैं। उस व्यक्ति ने आप को 20000/- हजार का चैक दिया और आप ने उसे खाली चैक हस्ताक्षर कर के दे दिया। फिर उस का चैक डिसऑनर हो गया। उसी वक्त आप उस के विरुद्ध चैक डिसऑनर के लिए नोटिस दे कर कार्यवाही कर सकते थे लेकिन उस ने आश्वासन दे कर आप को टाल दिया। फिर दो साल का वक्त निकाल कर उस ने चैक में राशि भर कर बैंक में प्रस्तुत किया और डिस ऑनर करवा कर मुकदमा लगा दिया।

स तरह के मुकदमों में कोई मजबूत डिफेंस नहीं होता। सजा और चैक की राशि से अधिक राशि जुर्माना होता है। इसी परिस्थिति के आधार पर वह व्यक्ति आप को ब्लेक मेल कर रहा है। जब वह व्यक्ति आप का हस्ताक्षर युक्त खाली चैक ले कर फरार हुआ था तभी आप को पुलिस में उस के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराना चाहिए था। खैर।

ब भी जब कि आप जान चुके हैं कि आप के साथ छल हुआ है और वह व्यक्ति ब्लेकमेलिंग कर रहा है आप को चाहिए कि आप पुलिस में उस के छल, धोखाधड़ी और ब्लेकमेलिंक के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए। यदि पुलिस इस तरह कोई मुकदमा दर्ज करने से इन्कार करे तो न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर उसे पुलिस को जाँच के लिए भेजा जाना चाहिए तभी आप को कोई राहत इस मुकदमे में मिल सकती है। यदि आप के पास उस का डिसऑनर हुआ चैक हो तो उसे तथा आप के बैंक खाते में उस चैक के डिसऑनर होने का जो रिकार्ड है उसे भी प्रतिरक्षा में न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सकता है। लेकिन इन सब का लाभ आपको तभी मिलेगा जब आप उस व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा देंगे।

छोटी धनराशि की वसूली के लिए मुकदमा करना लाभदायक नहीं।

5000 Rs Noteसमस्या-

प्रमोद कुमार ने हरिद्वार, उत्तराखंड से महाराष्ट्र राज्य की समस्या भेजी है कि-

मैं 2008 से 2012 तक मुंबई में एक उद्योग में प्रोडक्शन इंजिनियर की पोस्ट पर जॉब करता था। उसी दौरान मेरी मुलाकात एक शख्स से हुई जिसका नाम विजय माली था। वाह मुंबई में दूरदर्शन चैनल में आने वाले एक सीरियल मैं असिस्टेंट डाइरेक्टर की हैसियत से काम करता था। उसने मुझ से अपना खुद का सीरियल शुरू करने के लिए पैसे माँगे। उस ने कहा मुझे अपना सीरियल पास करना है और उसके लिए मुझे एक लाख रुपए की ज़रूरत है अगर तुम कर सकते हो तो कर दो। मेरे पास 30000 रु. अकाउंट में थे। कुछ दिन तक तो मैं उसको ना में जवाब देता रहा। फिर उस ने मुझ से कहा की प्रमोद भाई एक दो महीने में मेरा सीरियल शुरू हो जायगा। अगर तुम मेरे सीरियल मे काम करने में इंट्रेस्टेड हो तो मैं तूम्हें भी कोई अच्छा रोल दे दूंगा। पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैने उसे हाँ कर दी। लेकिन मैने उसे कहा कि मैं पैसे चेक से दूँगा और मैंने उसे 2 चेक 15000/- रुपए के दिए। फिर अचानक मुझे मुंबई छोड़ना पड़ा। आज तक ना तो उसका सीरियल शुरू हुआ है और ना ही उसने मेरे पैसे लौटाए। कुछ दिन तक उसने मुझे फोन पर बात की और आज कल में पैसे देने को कहा। लेकिन अब वो मेरा फोन नही उठता है और ना ही मेरे मैसेज का जवाब देता है। वैसे तो वह गाज़ियाबाद का रहने वाला है। उस का पता मेरे पास है। मुम्बई में वह रेंट पर रहता था। मगर अब पता नहीं। सर, मेरी मेहनत की कमाई को मैं ऐसे नहीं जाने दूँगा। मैं उस पर केस करना चाहता हूँ ताकि मुझे मेरे पैसे वापस मिल सकें। कृपा मुझे बताएँ कि मैं उस पर कैसे केस करूँ?

समाधान-

प ने विश्वास पर धन दिया है। कोई लिखा पढ़ी नहीं, कोई सीक्योरिटी नहीं। केवल इतना विश्वास कि यदि सीरियल आरंभ हुआ तो वह आप को भूमिका देगा। बेचारा सपने देखता था खुद का सीरियल बनाने का। जुगाड़ लग जाता तो बना भी लेता। हो सकता है उस का जुगाड़ न लग सका हो। यह भी हो सकता है भविष्य में लग जाए। यदि जुगाड़ लग गया होता तो आप को भूमिका भी देता और धन भी वापस आ जाता। अब यदि आप उस से पैसा वसूल करने के लिए मुकदमा भी करेंगे तो उस के पास होगा तो देगा। अदालत से फैसला भी हो गया तो भी उस की कौन सी संपत्ति है जिस से आप वसूल कर पाएंगे? कुल तीस हजार रुपए की राशि है। इस के लिए दीवानी मुकदमा करेंगे तो मुम्बई में उस ने पैसा लिया है वह रहता भी मुंबई में है तो मुकदमा करना पड़ेगा। आप को वकील करना पड़ेगा। मुम्बई में कोई भी वकील इतनी छोटी राशि की वसूली के लिए मुकदमा करने को तैयार न होगा। होगा भी तो कम से कम 10-15 हजार रुपया फीस मांगेगा। चार पाँच हजार रुपया खर्च हो जाएगा। बाकी वकील से मिलने, अदालत आने जाने में खर्चा हो जाएगा। कम से कम मुम्बई में इतनी छोटी राशि के लिए कोई मुकदमा करने की सलाह हम नहीं देंगे। हमारा खुद का सिद्धान्त है कि 50000/- रुपए तक की धनराशि तभी देना चाहिए कि यदि न भी लौटाएगा तो सोचेंगे मदद की थी।

हाँ, आप के साथ विश्वासघात हुआ है। आप को यह कह कर कि आप का सीरियल आरंभ होने जा रहा है आप से धन लिया गया है। आप चाहें तो उस के विरुद्ध पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट करवा सकते हैं। यदि पुलिस रिपोर्ट लिखने से मना करे तो न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर उसे पुलिस के पास अन्वेषण के लिए भिजवा सकते हैं। अपराधिक कार्यवाही के भय से आप का पैसा वापस मिल जाए तो मिल जाए। लेकिन यदि पैसा न मिला या पुलिस ने माना की मामला अपराधिक नहीं है केवल लेन-देन का है और आप के मित्र को पता लग गया तो हमेशा के लिए संबंध भी खराब हो जाएंगे और आप का पैसा तो कभी भी नहीं मिलेगा। हमारी राय में इतनी छोटी राशि के लिए कोई कानूनी कार्यवाही करना किसी भी तरह से लाभ का सौदा नहीं होगा। यदि आपसी बातचीत से पैसा मिल जाए तो ही ठीक है।

फाइनेंस कम्पनी के विरुद्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट कराएँ और उपभोक्ता विवाद उठाएँ

Havel handcuffसमस्या-
राजीव ने पूर्णिया बिहार से पूछा है-

म ने माइक्रो फाइनेंस नाम की एक कंपनी में मासिक जमा योजना के अन्तर्गत छह हजार रुपया प्रतिमाह जमा कराया। 11 माह जमा करने के बाद कंपनी ने खाता अद्यतन करने के लिए पूरे साल की रसीदें मांगी। नहीं देने पर कंपनी ने खाता अद्यतन करने में असमर्थता जताई है। अब धन वापस करने की मांग करने पर कंपनी ने जवाब दिया है कि ये स्कीम तीन साल के लिए ब्लाक कर दी है। तीन साल बाद संपर्क करें। जब कि कंपनी के पास हमारे पूरी जमा राशियों की विगत भी नहीं है। क्या कदम उठाना चाहिए?

समाधान-

ह सीधे सीधे धोखाधड़ी का मामला है। आप को तुरन्त पुलिस स्टेशन में कम्पनी के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवानी चाहिए। यदि पुलिस कार्यवाही करने से इन्कार करे तो इलाके के एसपी को रिपोर्ट देना चाहिए। फिर भी कार्यवाही न हो तो न्यायालय में परिवाद दर्ज करवा कर उसे जाँच के लिए पुलिस को भिजवाना चाहिए।

स के अलावा आप कंपनी को नोटिस दे कर अपना रुपया वापस देने की मांग करें। रुपया न देने, नोटिस का कोई जवाब न देने या आप का रुपया देने से इन्कार कर देने पर आप को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच के समक्ष अपना परिवाद प्रस्तुत करना चाहिए।

छल कर के जमीन दूसरे को बेच देना छल है, मामले की प्र.सू.रिपोर्ट दर्ज कराएँ व संविदा भंग का दीवानी वाद करें

Jail-inmate-looks-outसमस्या-
सीमा ने गुड़गांव, हरियाणा से पूछा है-

क आदमी से मेरी जमीन के लिए डील हुई। सौदा तय हो गया। उसने बयाने के तौर पर मुझसे 1 लाख 50 हज़ार रुपया कैश लिया। जोकि एक 10 रुपए के स्टाम्प पेपर पर नोटरी से बनवाया गया। उस आदमी ने भी अपने हस्ताक्षर किये और मैंने भी अपने हस्ताक्षर किये। ओरिजनल कॉपी मेरे पास है। उसने अपने पास फोटो कॉपी रख ली। लेकिन ये बयाना उसने मेरे कहने के बावजूद भी तहसीलदार के पास रजिस्टर्ड नहीं करवाया। ठीक 2 महीने बाद रजिस्ट्री का वादा बयाना एग्रीमेंट में किया गया। जब में रजिस्ट्री के लिए पहुंचा तो वो नहीं आया। काफी फोन किये लेकिन जमीन बेचने वाला आदमी फोन नहीं उठाता है। उसके घर पर संपर्क किया गया तो पता चला कि वो उस जमीन को किसी दुसरे आदमी को बेचकर कहीं नामालूम जगह चला गया है। तहसील में से पता किया गया तो वो जमीन बेचीं गयी पायी गयी। उसने मेरे से पहले तो बयाना ले लिया फिर जमीन किसी और को बेच दी। लेकिन प्रूफ के तौर पर मेरे पास सिर्फ एक 10 रुपए का स्टाम्प पेपर एग्रीमेंट है।

क्या मुझे मेरे रुपए कोर्ट से वापिस मिल सकते हैं? क्या उस जमीन को बयाने के आधार पर मुझे बेचा जा सकता है? क्या उस जमीन की रजिस्ट्री मेरे बयाने के आधार पर निरस्त हो सकती है? क्या उस जमीन पर मुझे स्टे मिल सकती है? मुझे क्या कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए, कृपया मेरी समस्या का समाधान करें।

समाधान-

प ने अपनी समस्या तो रख दी है लेकिन तथ्य ठीक से नहीं बताए हैं। इस तरह के मामलों में प्रत्येक व्यवहार की तिथि और स्थान अवश्य बताया जाना चाहिए तभी कोई समाधान ठीक से बताया जा सकता है। हमारे पास रोज ही ऐसी अनेक समस्याएँ आती हैं। लेकिन उन में व्यवहारों कि तिथियाँ और स्थान ठीक से नहीं बताए गए होते हैं, इस कारण उन के समाधान नहीं सुझाए जाते हैं। आप के मामले में भी आप ने बयाना देने, उस का एग्रीमेंट लिखने व नोटेरी से प्रमाणित कराने, आप के तहसील में रजिस्ट्री के लिए जाने और जमीन दूसरे को बेची हुई देखने, तथा उसे बेचने की तारीखें आपने बताई होतीं और यह बताया होता कि बयाना देने के एग्रीमेंट पर आप दोनों के अतिरिक्त गवाहों के हस्ताक्षर हैं या नहीं तो हमें समाधान प्रस्तुत करने में आसानी होती और समाधान शुद्ध होता। समाधान चाहने वाले सभी पाठकों से हमारा आग्रह है कि वे अपनी समस्या में यदि इन आवश्यक तथ्यों को नहीं लिखेंगे तो हम उन की समस्या का समाधान प्रस्तुत करने में असमर्थ रहेंगे।

प ने बयाना दे कर जो एग्रीमेंट कराया है वह जमीन के विक्रय की संविदा है। जिस में वह व्यक्ति आप से जमीन की कीमत का एक हिस्सा प्राप्त कर चुका है। बाद में वह उस का विक्रय पत्र पंजीकृत कराने के स्थान पर गायब हो गया है। आप को पता चला है कि वह जमीन को अन्य व्यक्ति को विक्रय कर चुका है। आप को दूसरे व्यक्ति को जमीन बेचने के विक्रय पत्र की प्रतिलिपि तहसील से प्राप्त करनी चाहिए। आप के साथ छल किया गया है, आप को तुरन्त धारा 420 भा.दं.संहिता में थाने में रिपोर्ट करानी चाहिए, पुलिस थाना रिपोर्ट लिखने और कार्यवाही करने से इन्कार करे तो न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करना चाहिए।

प से एग्रीमेंट कर के उस ने आप से रुपया लिया है। बाद में जमीन बेचने से इन्कार कर दिया है। इस तरह वह आप के साथ हुई संविदा का पालन नहीं कर रहा है। दूसरे व्यक्ति को जमीन बेच देने के कारण अब उस संविदा का पालन कर भी नहीं सकता। इस कारण आप को उस के विरुद्ध अपनी राशि व क्षतिपूर्ति प्राप्त करने हेतु संविदा भंग का दीवानी मुकदमा करना चाहिए।

संविदा के विशिष्ट पालन का मुकदमा कर के उस से जमीन की रजिस्ट्री कराने का मुकदमा करने से कोई लाभ नहीं है, उस में जमीन के खरीददार को भी पक्षकार बनाना पड़ेगा तथा उस के नाम हुए पंजीकृत विक्रय पत्र को भी निरस्त कराना पड़ेगा जिस में बहुत अधिक न्यायालय शुल्क देना होगा और मुकदमा भी जटिल हो जाएगा। हमारी राय में पहले आप को अपराधिक मुकदमा करना चाहिए और उस के बाद आप को संविदा भंग का दीवानी मुकदमा करना चाहिए। आप ने जमीन पर कब्जा नहीं लिया है इस कारण से आप को उस मामले में कोई स्टे नहीं मिलेगा। इस मामले में आप को सारे दस्तावेज दिखा कर किसी स्थानीय वकील से सलाह ले कर ही कार्यवाही करना चाहिए।

आप के साथ छल हुआ है, धारा 420 आईपीसी में मुकदमा दर्ज करवाइए।

police stationसमस्या-
महेन्द्र शर्मा ने, भिलाई, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मैंने अपने पड़ोस में रहने वाले से एक जमीन का दुकड़ा ख़रीदा, जो मेरे जन्म से पहले ही हमारे कब्जे में दीखता था अर्थात उस पर बाउंड्री है। पर नक्शा में उनके नाम से दिख रहा था तो मैंने उनसे बात कर के उपरोक्त जमीन हेतु पैसा दिया। इस हेतु मैंने उन्हें पहले चेक दिया था पर बाद में परिवार में विचार कर संयुक्त परिवार के नाम से जमीन की रजिस्ट्री करेंगे निर्णय लिया क्यों कि सारा जमीन संयुक्त नाम से है। इस बात से उन्हें अवगत कराया तो वो राजी हो गए। मेरा उन पर विश्वास है क्योकि मेरे ससुराल पक्ष के तरफ से वो करीबी होते हैं।  अत: संयुक्त रूप से हमने नगदी रकम दिया और इकरारनामा बनवाया। पर पैसा लेने के बाद वो रजिस्ट्री के लिए ना नुकुर करने और विवाद करने लगे। जिस पर मैंने उन्हें क़ानूनी नोटिस भिजवाया कि रजिस्ट्री करवाएँ। उन्होंने ने जवाब में लिखा कि रजिस्ट्री की कोई बात नहीं की गई। जमीन का जो हिस्सा लिखा गया है वो गलत है और पैसा चैक से मिला है। जब कि मैंने पैसा नगदी भी दिया था। जो चेक मैंने पहले दिया था उन्हों ने ने उसे भी कैश करवा लिया था। जो मुझे उनके नोटिस मिलने के बाद जानकारी मिला। जमीन कम ज्यादा लिखने का सवाल ही नहीं होता क्यों कि तहसीलदार के नक़्शे में जो लिखा गया है वही इकरारनामा में लिखा गया है और उस पर पहले से ही बाउंड्री है। हम लोगों को बाद में ज्ञात हुआ कि उपरोक्त जमीन पर पूर्व से ही अदालत में प्रकरण चल रहा है। हमें यह ज्ञात था की उपरोक्त जमीन दो भाइयों की है। जिस मे हमने जिससे जमीन ख़रीदा है उन्होंने इकरारनामा में लिखा है कि मैं अपने हिस्से की जमीन बेच रहा हूँ। मेरा प्रश्न यह है कि उपरोक्त विवाद पर क्या किया जा सकता है? किस अधिनियम के तहत मामला चलाया जा सकता है? क्या वह जमीन मुझे मिल सकता है? और कौन कौन सा मामला उपरोक्त विवाद में हो सकता है। मुझे उपरोक्त जमीन पर दावा करने के क्या अधिकार प्राप्त है?

समाधान-

प ने अपनी गलती से खुद धोखा खाया है। पहले जाँच लेना चाहिए था कि जमीन पर कोई विवाद तो नहीं है। जब आप को जानकारी थी कि जमीन दो व्यक्तियों के नाम से है तो दोनों से इकरारनामा करना चाहिए था। अब इकरारनामे से केवल वही पाबंद है जिस ने वह लिखा है। फिर उस में उस के हिस्से की संपत्ति बेचने की बात है। यदि दूसरे का भी उस में हिस्सा है तो वह उस इकररारनामे से बाध्य नहीं है। आप चैक से पैसा दे चुके थे तब आप को दुबारा सारा पैसा नकद देने के समय उन से चैक वापस लेना चाहिए था। आप तयशुदा राशि से अधिक दे चुके हैं और जमीन का इकरारनामा भी आप के हिस्से का ही है।

प इकरारनामे में लिखे गए जमीन के हिस्से मात्र के विक्रय पत्र की रजिस्ट्री करवाने के अधिकारी हैं और उस के लिए भी आप को दीवानी अदालत में संविदा के विशिष्ट पालन का मुकदमा करना पड़ेगा। जिस पर जमीन के विक्रय की कीमत पर न्याय शुल्क भी अदा करना होगा।

प के साथ छल हुआ है, जो कि धारा 420 आईपीसी के अन्तर्गत अपराध है, आप उस के लिए पुलिस थाने में रिपोर्ट करवा सकते हैं। यदि पुलिस थाना रिपोर्ट दर्ज करने से इन्कार करे तो आप एसपी को उस की शिकायत दे सकते हैं। उस पर भी काम न बने तो न्यायालय के समक्ष अपना परिवाद दर्ज करवा सकते हैं। इस के लिए आप को स्थानीय वकील से सलाह लेना चाहिए और उस के अनुरूप कदम उठाना चाहिए।

अपराधिक शिकायत दर्ज कराएँ और संविदा के विशिष्ट पालन का वाद प्रस्तुत करें . . .

Havel handcuffसमस्या-
मोनिका यादव ने गुड़गाँव, हरियाणा से पूछा है-

मेरे पिता जी की पहली पत्नी का देहांत हो गया था। उस पहली पत्नी से एक लड़का था। जोकि मेरा भाई है। फिर मेरे पिता ने दूसरी शादी कर ली। जो दूसरी पत्नी है वह मेरी माता जी हैं और मेरे भाई की सौतेली माँ हैं। लगभग 8-10 साल पहले मेरे पिता जी ने 160 गज का एक प्लाट खरीदा। बेचने वालों ने इस प्लाट की जी०पी०ए० करवाई। उसके बाद मेरे पिता जी का देहांत हो गया। मेरे भाई ने बालिग़ होने के बाद बेचने वालों से मिलकर अपने नाम रजिस्ट्री करवा ली। इस बात का हमें पता तक नहीं लगा। जिन लोगों ने मेरे पिता जी को जमीन बेचकर जी०पी०ए० करवाई थी। उन्ही लोगों ने मेरे भाई के नाम रजिस्ट्री करवा दी। इसके कुछ साल बाद 2013 में मेरा भाई सभी कागज़ लेकर घर छोड़ कर कहीं भाग गया। अब पता चला कि उसने वह प्लाट किसी को बेच दिया है। पक्की रजिस्ट्री भी करवा दी है। हम मैं उसकी बहन और मां अपना हक़ चाहते हैं। मैं भी उसकी सौतेली बहन हूँ और मां भी उसकी सौतेली मां है।
क्या ये रजिस्ट्री केंसल हो सकती है? क्या हमें हमारा हक़ मिल सकता है? क्या इस जमीन में हमें हमारा हिस्सा मिल सकता है? क्या इस प्लाट पर स्टे हो सकती है?

समाधान-

दि उक्त प्लाट को खरीदने का सौदा आप के पिता के द्वारा किया गया था और खरीदने का इकरारनामा उन के नाम था तो उन की मृत्यु के उपरान्त प्लाट के विक्रय पत्र की रजिस्ट्री भी बेचने वाले को आप के पिता जी के सभी उत्तराधिकारियों के नाम करवानी चाहिए थी। यदि आप के भाई ने बेचने वाले से मिल कर प्लाट की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली है तो यह गैर कानूनी भी है और षड़यंत्र पूर्वक किया गया अपराध भी है।

भूखंड के विक्रय पत्र की रजिस्ट्री बेचने वाले व्यक्ति ने आप के भाई के नाम गलत करवाई है। आप को बेचने वाले को नोटिस देना चाहिए कि वह उस रजिस्ट्री को निरस्त करवा कर आप तीनों के नाम रजिस्ट्री करवाए। यदि वह नोटिस के उत्तर में कुछ नहीं करता है तो आप तुरन्त पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाएँ। पुलिस कार्यवाही न करे तो आप सीधे न्यायालय में अपराधिक शिकायत दर्ज करवा कर न्यायालय से उसे पुलिस को अन्वेषण के लिए भिजवाने का निवेदन करें।

स के अतिरिक्त आप बेचने वाले व्यक्ति के विरुद्ध आप के पिता जी के साथ हुए विक्रय के इकरारनामे के आधार पर आप के पिताजी के तीनों उत्तराधिकारियों के नाम विक्रय पत्र की रजिस्ट्री करवाने के लिए विशिष्ठ पालन का दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकती हैं। इस वाद में उस प्लाट को अन्यत्र बेचने पर अस्थाई निषेधाज्ञा भी प्राप्त कर सकती हैं। इस दीवानी वाद में आप को प्लाट बेचने वाले व्यक्ति को, आप के भाई को और जिसे आप के भाई ने प्लाट बेचा है उसे पक्षकार बनाना होगा।

ग्राहक पूरे पैसे दिए बिना गाड़ी उठा ले गया, अब न गाड़ी लौटाता है और न कीमत देता है, क्या किया जाए?

used carसमस्या-
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश से सोनू कुमार शर्मा ने पूछा है –

मेरी एक गाड़ी है जिस का नंबर यूपी 81 एएफ 4965 है। मैं किसी कारणवश उसे बचान चाहता था। पास के गाँव से एक खरीददार आया उस ने 1,25,000 रुपए में गाड़ी खरीदने का सौदा किया। वह 20,000 रुपए दे कर कहा कि गाड़ी के कागज आप के पास हैं, मैं अपने पापा को दिखा कर लौटता हूँ। बाकी की रकम दे कर गाड़ी के बेचान के कागज तैयार करा लेंगे। उस दिन के बाद से न तो वह गाड़ी देता है और न ही गाड़ी की बाकी की कीमत दे रहा है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

गाड़ी आप के नाम पंजीकृत है आप ही उस के स्वामी हैं। गाड़ी के स्वामित्व का दस्तावेज पंजीकरण प्रमाण पत्र आप के नाम है और आप के पास है। गाड़ी को आप को अपने पास रखने का अधिकार है। आप या तो उस गाड़ी को जहाँ भी दिखे उठा कर अपने घर ले आइए। यदि एसा भी न हो तो पुलिस थाना में रिपोर्ट करवा दीजिए कि सौदा हुआ था लेकिन खरीदने वाला व्यक्ति पिता जी गाड़ी दिखाने ले गया था वापस नहीं लौटा है। उस ने धोखे से गाड़ी छीन ली है।

पुलिस इस मामले में धारा 420 भा.दंड संहिता में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करेगी और गाड़ी को जब्त कर लेगी साथ ही गाड़ी ले जाने वाले को गिरफ्तार भी कर लेगी। आप न्यायालय में आवेदन दे कर गाड़ी को अपने कब्जे में ले लेना।

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