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अनु.जनजातीय व अनु.जातीय के मध्य विवाह के विच्छेद के लिए हिन्दू विवाह अधिनियम प्रभावी नहीं।

समस्या –

दिनेश नेताम ने टिल्डा, जिला रायपुर, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मैं एक जनजाति परिवार से हूँ, मेरा विवाह 2011 में सामाजिक रीति से हुआ था। बाद में पता चला कि मेरी पत्नी और उस के परिवार के लोग अनुसूचित जाति के हैं और हम लोग अनुसूचित जनजाति के।  लेकिन दोनों समाज में बेटी रोटी व्यवहार बहुत पहले से मान्य है। मेरी पत्नी ने मेरे पूरे परिवार के ऊपर दहेज प्रथा का केस लगाया उसे मैं जीत चुका हूँ, फिर अपील की उसे भी मैं जीत चुका हूँ। अब मुकदमा हाईकोर्ट चला गया है। मैं इतना जानना चाहता हूँ कि मेरी प्तनी अनुसूचित जाति की है जिस पर हिन्दू विवाह अधिनियम प्रभावी है। क्या मैं इस विवाह को न्यायालय से निरस्त करवा सकता हूँ। मार्गदर्शन करने की कृपा करें।

समाधान-

आप की समस्या जटिल है। जहाँ तक जनजाति का प्रश्न है उस पर हिन्दू विवाह अधिनियम प्रभावी नहीं है। आप की जनजाति में एक खास अनुसूचित जाति की लड़की से विवाह को मान्यता प्राप्त है।  इस कारण आप का विवाह आप की जनजाति की सहमति से संपन्न हुआ है और आप की जनजाति ने उसे मान्य भी कर दिया है। इस कारण आप पर हिन्दू विवाह अधिनियम प्रभावी नहीं है। आप का विवाह आप की परंपरा से ही हुआ है।

ऐसी परिस्थिति में आप को अपनी जनजाति पंचायत में मामला ले जाना चाहिए और वहाँ जनजातीय विधि से पंचायत बैठा कर तलाक, झगड़ा आदि का मामला निर्णीत कराना चाहिए। जब पंचायत मामले को सुलझा ले तो पंचायत से प्रमाण पत्र ले कर पारिवारिक न्यायालय में विवाह विच्छेद की घोषणा का वाद संस्थित करना चाहिए।

इस तरह के मामले पर किसी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय की नजीर उपलब्ध नहीं है। यदि है भी तो हमारी नजर में तलाश करने पर भी नहीं आई है। इस कारण हो सकता है आप की पत्नी विरोध करे कि पंचायत द्वारा दिया गया निर्णय अवैध है और आप का विवाह हिन्दू विवाह अधिनियम से शासित होता है। पर हमारी राय में  आप की पत्नी का यह तर्क मान्य नहीं हो सकेगा।

रणनीतिक रूप से आप पहले हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 में विवाह विच्छेद के लिए आवेदन करें। यदि वहाँ जवाब में यह आए कि हिन्दू विवाह अधिनियम प्रभावी नहीं है। तो आप वहाँ से उस के जवाब की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर अपने पास रखें और उस के बाद हमारे द्वारा ऊपर सुझाई गयी प्रक्रिया का अनुसरण कर सकते हैं।

बहुत कठिन है राह पनघट की …

separationसमस्या-

रोहित ने गुना, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं बी.एस.सी. अंतिम वर्ष का छात्र हूं में पिंकी (जो कि बी.एस.सी. कॉलेज से पूर्ण कर चुकी है) नाम की लडकी से प्यार करता हूं और पिंकी भी मुझे चाहती है हम दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते हैं। हम दोनों उम्र में बालिग हैं लेकिन जब हम ने ये बात अपने परिजनों को बताई तो पिंकी के परिजनों ने मिलकर मेरी पिटाई कर दी। वो लोग राजनीतिक लोगों के संपर्क में रहते हैं इस लिये मेरे परिजनों ने पुलिस में रिर्पोट नहीं करने दी। मेरे और पिंकी के परिजनों ने मुझे और पिंकी को एक दूसरे के संपर्क में न रहने की चेतावनी दी है पिंकी और मैं अब भी एक दूसरे को चाहते हैं शादी करना चाहते हैं। मेरी अभी कोई जॉब भी नहीं लगी है और मैं निम्न श्रेणी लिपिक की तैयारी कर रहा हूँ। एक परीक्षा भी दे दी है जिस का परिणाम आने ही वाला है। हम दोनों के परिवार वाले हमारी शादी करने के विरोध में हैं। पिंकी के तीन भाई हैं और वो गुंडा टाईप के हैं। मेरे परिवार के पास कोई ताकत नहीं है लड़ने की कि हम उनकी बराबरी कर सकें। पिंकी हर हालत में मेरे साथ रहना चाहती है। उस के घर वालों ने उसका घर से बाहर भी निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। फिर भी हम एक कामवाली बाई के माध्यम से एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं। अगर मैं अकेला पुलिस के पास गया तो पुलिस हो सकता है पिंकी के परिजनों के साथ मिलकर मुझे ही किसी तरह फँसा कर मुजरिम न बना दे। पिंकी और मैं क्या करें?

समाधान-

पिंकी के परिवार वालों ने आप को मिल कर पीट दिया। यह एक अपराध था जिस की रिपोर्ट थाने में कराना चाहिए था। क्यों कि आप का परिवार उन का मुकाबला नहीं कर सकता इस कारण से आप के परिवार ने आप को रिपोर्ट नहीं कराने दी और आप मान गए। आप में इतना भी साहस नहीं कि अपने परिवार वालों के विरुद्ध जा कर आप अपने साथ हुए अपराध की रिपोर्ट करा सकें। आप परिणामों से डर गए। आप के परिवार वाले पिंकी के परिवार वालों से डरते हैं। इस कारण यदि आप यह विवाह करते हैं तो वे आप का साथ नहीं देंगे। पिंकी के परिवार वाले पहले ही आप से और पिंकी से खफा हैं। फिर भी किसी तरह आप यह विवाह कर लेते हैं तो दोनों परिवार आप के विरुद्ध हो जाएंगे। यदि दोनों परिवार आप के विरुद्ध कुछ भी न करें तब भी वे आप को अपने साथ तो नहीं रखेंगे। आप और पिंकी दोनों बेरोजगार हैं। आप दोनों की आय का कोई और साधन नहीं है। आप दोनों अपने अपने परिवारों पर निर्भर हैं। जब यह सहारा आप से छिन जाएगा तो आप दोनों जिएंगे कैसे?

पिंकी बी.एससी. कर चुकी है, आप अभी बी.एससी. में अटके हैं। नौकरी के लिए आवेदन दिया है लेकिन उस का मिलना कितना कठिन है उस का अनुमान आप को नहीं है। ऐसे में आप दोनों विवाह की सोच रहे हैं यही आप दोनों का सब से बड़ा दोष है। जो बच्चे परिवार की इच्छा से विवाह कर रहे हैं वे भी जब तक स्वयं के पैरों पर खड़े नहीं हो जाते विवाह नहीं करते। कानून ने विवाह की उम्र कुछ भी क्यों न तय कर दी हो। लेकिन विवाह की उम्र तब तक नहीं होती जब तक कि लड़का और लड़की दोनों अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाएँ और अपने जीवन को एक दूसरे के बिना भी सुचारु रूप से चलाने में सक्षम न हो जाएँ। अभी तो आप के पनघट की राह बहुत कठिन है।

दि आप दोनों एक दूसरे से वास्तव में प्रेम करते हैं और यह केवल मात्र यौनाकर्षण नहीं है तो आप दोनों को चाहिए कि पहले दोनों पैरों पर खड़े हो जाएँ। कमाई करें और कम से कम एक-एक दो-दो लाख रुपये का बैंक बैलेंस बना लें। समाज में कुछ अपने समर्थक भी बनाएँ, क्यों कि आप को उस समाज से टकराना है जो आप के विवाह को होते नहीं देखना चाहता। फिर सोचें कि आप दोनों को क्या करना है? यदि इतना आप ने यह सब कर लिया तो आप दोनों अपने अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध जा कर विवाह करने की सोच सकते हैं। इस से पहले कुछ भी करना बचपना है। अभी तो आप को विवाह की सोच को त्याग देना चाहिए। आप इतना कुछ कर लें, तब भी आप दोनों यह विवाह करना चाहेंगे तो आप को अपना रास्ता भी मिल जाएगा। न मिले तो तब तीसरा खंबा से फिर से पूछ लेना तब हम आप को उपाय बता देंगे।

नवविवाहित अन्तर्जातीय युगल को अपने परिजनों से खतरा हो तो पुलिस संरक्षण के लिए रिट याचिका प्रस्तुत करे।

liveinसमस्या-

सुरभित ने सीतापुर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैंने अपनी प्रेमिका से एक साल पहले शादी की थी, आर्य समाज में। अभी ये बात दोनों में से किसी के घर वालों को नहीं मालूम है। पत्नी अभी अपने घर पर ही रहती है। अब हम लोग साथ रहना चाहते हैं। दोनों ही अलग अलग जाति के हैं लेकिन हिन्दू दोनों लोग है। कौन सा ऐसा कदम उठायें कि जिस से पत्नी के घर वाले मेरे और मेरे घर वालों को कोई नुक्सान न पहुँचाएँ।

समाधान-

प इस बात से डरे हुए हैं कि जैसे ही आप की पत्नी अपने परिवार को छोड़ कर आप के साथ रहने लगेगी वे आप के विरुद्ध पुलिस में शिकायत करेंगे या फिर आप के साथ कोई अपराधिक गतिविधि करेंगे। यदि वे पुलिस में शिकायत करते हैं तो आप की पत्नी के बयान पर निर्भर करेगा कि वे आप के व आप के परिवार वालों के साथ क्या करते हैं। यदि आप अपनी पत्नी पर विश्वास करते हैं तो उसे अपने साथ ला कर रह सकते हैं।

दि आप को पत्नी के परिजनों द्वारा आप के या आप के परिवार के साथ कोई अपराध करने का अंदेशा है तो आप दोनों सीधे उच्च न्यायालय में एक संयुक्त रिट याचिका लगाएँ कि आप विवाहित हैं लेकिन आप के परिजन इस अंतर्जातीय विवाह के कारण आप दोनों के साथ और एक दूसरे के परिजनों के साथ कोई भी अपराध घटित कर या करवा सकते हैं। आप को पुलिस और प्रशासन के संरक्षण की आवश्यकता है। उच्च न्यायालय आप को पुलिस संरक्षण प्रदान करने का आदेश संबंधित पुलिस अधिकारियों को दे सकता है।

सामाजिक समस्या से सामाजिक रूप से ही निपटना होगा।

domestic quarrelसमस्या-

सुमित कुमार ने अम्बाला (हरियाणा) से समस्या भेजी है कि-

मैं ने अपनी मर्जी से क़ानूनी तौर पर शादी की है।  हम उँची जाति के है और मेरी पत्नी निम्न जाति की है।  जबकि मैं जाति -पाती में विश्वास नहीं करता  और मेरा परिवार भी मेरी इस शादी से खुश है।  परन्तु समस्या यह है कि हम एक गांव में रहते हैं जिसके कारण मेरी इस शादी से गांव के कुछ लोग मेरे परिवार वालों के ऊपर ताने कसते हैं और बे-वजह की बातों से मेरे परिवार वालों को तकलीफ देते रहते हैं।  यहाँ तक कि मेरे परिवार वालों का घर से बाहर निकलना मुस्किल हो गया है।  सबसे बड़ी समस्या तो ये है कि मुझसे बड़ा एक मेरा भाई भी है जो कि अभी कुंवारा है, उसके रिश्ते में मेरी शादी विशेष रूप से रोड़ा साबित हो रही है, क्योंकि मेरे परिवार वाले भले ही मेरी शादी से खुश हों लेकिन समाज के हर उस व्यक्ति को समझाना मुश्किल है जो जाती-पाती में आज भी विश्वास करते हैं और ऐसी शादी को नहीं मानते।  इसी कारणवश मेरा बड़ा भाई भी मुझसे नफरत करने लगा है।  क्योंकि कानून जो भी हो लेकिन रिश्ता करने वाले कानून को नहीं बल्कि समाज को देखते हैं, मेरा भाई परिवार की सहमति से शादी करना चाहता है वो कानूनन की जाने वाली शादी को नहीं चाहता। कृपया मुझे बताएं की समाज  (गांव) के अपशब्द बोलने वाले लोगों के खिलाफ हम कैसे क़ानूनी हल निकल सकते है और मेरे भाई की शादी की समस्या कैसे हल हो।  ये भी बताएं कि क्या मेरे और मेरी पत्नी के खिलाफ मेरा भाई क्या कोई मुकदमा पेश कर सकता है तथा मेरा और मेरी पत्नी का पैतृक जायदाद में कोई अधिकार है।  जायदाद मेरे दादा जी की है और दादा जी का स्वर्गवास हो चुका है।

समाधान-

प की समस्या कानूनी नहीं अपितु सामाजिक है। हमारा कानून आगे बढ़ गया है और समाज बहुत पीछे छूट गया है। समाज में परिवर्तन का काम नहीं के बराबर है। आप की समस्या तभी समाप्त हो सकती है जब कि समाज बदले। आप की समस्या यह है कि आप उसी जाति समाज से सम्मान पाना चाहते हैं जिस के कायदों का आप ने उल्लंघन किया है। वह आप को सम्मान तभी दे सकता है जब कि वह आप के इस विवाह को स्वीकार कर ले। यह कानूनन नहीं किया जा सकता। इस के लिए तो समाज को बदलना होगा। यदि समाज में 5 प्रतिशत विवाह भी आप जैसे विजातीय संबंधों में होने लगें तो समाज का नियंत्रण समाप्त होने लगेगा। इस के लिए आप को समाज में चेतना का संचार करना पड़ेगा। जो जाति समाज रूपी कीचड़ से निकल कर खुली हवा में साँस लेना चाहते हैं उन्हें इस के लिए काम करना पड़ेगा। आप के विवाह के बाद जाति समाज ने जो व्यवहार आप के साथ किया है उस से आप का भाई व परिवार डर गया है। आप को उस का भय निकालना होगा। आप के प्रति जो व्यवहार किया जा रहा है उस का उद्देश्य यही है कि आप और आप का परिवार डरा रहे। लेकिन यदि यह भय निकल जाता है तो समय के साथ गाँव वालों का व्यवहार भी सामान्य होने लगेगा। यदि आप का भाई अच्छा खाता कमाता है तो यह समस्या कुछ समय बाद स्वतः सामान्य हो जाएगा और उसी जाति समाज से आप के भाई के लिए रिश्ते आने लगेंगे। इस समस्या का कोई कानूनी हल नहीं हो सकता।

हाँ तक आप के व आप के परिवार के अपमान का प्रश्न है। आप को लगता है कि आप का कुछ अधिक ही अपमान किया जा रहा है तो आप अपमान करने वालों के विरुद्ध मानहानि के अपराधिक और दीवानी मुकदमे दायर कर सकते हैं। ऐसे एक दो मुकदमे दायर होने से इस तरह का व्यवहार करने वालों में मुकदमे का भय होगा और वे ऐसा व्यवहार करना बंद कर देंगे। लेकिन मुकदमा करने के बाद भी आप का व्यवहार ऐसे लोगों से शत्रुतापूर्ण न हो कर सबक सिखा कर पुनः मित्रता स्थापित करने वाला होना चाहिए तभी आप इस सामाजिक समस्या का मुकाबला कर सकेंगे। वे लोग जो कर रहे हैं वे नहीं जानते कि गलत कर रहे हैं उन्हें बाद में इस का अहसास होगा। वे अभी अपनी सड़ी गली परंपराओं की रक्षा कर रहे हैं।

प की पुश्तैनी संपत्ति का प्रश्न है तो उस में आप का हिस्सा पूरी तरह बना हुआ है। यदि उस में आप का हिस्सा है तो वह अन्तर्जातीय विवाह करने के कारण आप से नहीं छीना जा सकता है। उस पर आप का अधिकार है। आप विभाजन का मुकदमा कर के अपने हिस्से का पृथक कब्जा प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन आप की पत्नी का उस में कोई हिस्सा नहीं होगा। वैसे भी आप जाति में परिवार की सहमति से विवाह करते तब भी आप की पत्नी का उस में कोई हिस्सा नहीं होता।

कोर्ट मैरिज क्या है? यह कैसे की जाती है?

समस्या-

श्री विजयनगर, जिला गंगानगर, राजस्थान से विजय जसूजा ने पूछा है-

मैं एक लड़की के साथ विवाह करना चाहता हूँ।  लेकिन समस्या यह है कि हम दोनों भिन्न जातियों के हैं और लड़की के माता-पिता इस विवाह से सहमत नहीं हैं। कृपया बताएँ कि हमारा विवाह कैसे हो सकता है? कोर्ट मैरिज के बारे में विस्तार से बताएँ।

समाधान-

दि आप दोनों वयस्क हैं तो आप विवाह कर सकते हैं।  इस के लिए माता-पिता की सहमति की आवश्यकता नहीं है। लेकिन इस अंतर्जातीय विवाह के लिए आप को समाज में विरोध सहन करना होगा।  यह भी हो सकता है कि लड़की के माता-पिता आप के विरुद्ध लड़की को बहला फुसला कर ले जाने उस का अपहरण करने और उस के साथ बलात्कार करने जैसे आरोप भी लगा सकते हैं।  एक बार पुलिस द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर लेने के उपरान्त आप को गिरफ्तार भी किया जा सकता है।  लड़की को उस के माता-पिता के संरक्षण में दिया जा सकता है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि लड़की पुनः अपने माता-पिता के संरक्षण में जाने के उपरान्त भी आप के पक्ष में यह बयान दे कि उस ने आप से स्वेच्छा से विवाह किया है और वह आप के साथ रहना चाहती है। यदि आप के विरुद्ध की मुकदमा दर्ज हो जाए और आरोप पत्र दाखिल हो तो आप को उस का मुकाबला करना होगा।  यदि आप इन सब के लिए तैयार हैं तो आप यह विवाह कर सकते हैं।

कोर्ट मैरिज नाम की कोई चीज नहीं होती है।  लेकिन हमारे यहाँ विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत होने वाले विवाह को ही कोर्ट मैरिज कहा जाता है।  इस के अलावा कछ वकील लड़के-लड़की दोनों से एक एक शपथ पत्र लिखवा कर एक दूसरे को दे देते हैं जिस में लिखा होता है कि वे बालिग हैं और पति-पत्नी के रूप में स्वेच्छा से साथ रहने को सहमत हैं।  इस तरह स्त्री-पुरुष का साथ रहना विवाह कदापि नहीं है। इसे अधिक से अधिक लिव इन रिलेशन कहा जा सकता है।

विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत स्त्री-पुरुष जाति के अंतर और धर्म के अंतर के बावजूद भी विवाह कर सकते हैं।  इस के लिए स्त्री-पुरुष को निर्धारित प्रपत्र में विवाह करने के आशय की एक सूचना ऐसे जिले के जिला विवाह अधिकारी को जो कि राजस्थान में जिलों के कलेक्टर हैं, प्रस्तुत करना होता है जिस में विवाह के पक्षकारों में से कोई एक निवास करता हो। साथ ही नोटिस जारी करने की शुल्क जमा करनी होती है जो कि नाम मात्र की होती है। इस आवेदन के साथ दोनों स्त्री-पुरुषों के फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत करने होते हैं। इस संबंध में पूरी जानकारी जिला कलेक्टर कार्यालय में विशेष विवाह अधिनियम के मामले देखने वाले लिपिक से प्राप्त की जा सकती है।  यह आवेदन प्रस्तुत करने पर यह कलेक्टर  के कार्यालय की नोटिस बुक में रहता है जिसे कोई भी व्यक्ति देख सकता है और कार्यालय के किसी सार्वजनिक स्थान पर चिपकाया जाता है।  यदि विवाह के इच्छुक दोनों व्यक्ति या दोनों में से कोई एक किसी दूसरे जिले का निवासी है तो यह नोटिस उस जिले के कलेक्टर को भेजा जाता है और वहाँ सार्वजनिक स्थान पर चिपकाया जाता है। इस नोटिस का उद्देश्य यह जानना है कि दोनों स्त्री-पुरुष विवाह के लिए पात्रता रखते हैं अथवा नहीं। यदि विवाह में कोई कानूनी बाधा न हो तो नोटिस जारी करने के 30 दिनों को उपरान्त तथा आवेदन प्रस्तुत करने के तीन माह समाप्त होने के पूर्व कभी भी जिला विवाह अधिकारी के समक्ष विवाह संपन्न कराया जा सकता है। जिस के उपरान्त जिला विवाह अधिकारी विवाह का प्रमाण पत्र जारी कर देता है।

प चाहें तो आप हिन्दू विधि के अनुरूप किसी पंडित से भी अपना विवाह करवा सकते हैं और पंडित द्वारा प्रदत्त विवाह प्रमाण पत्र, विवाह के चित्रों और विवाह के साक्षियों के हस्ताक्षरों के साथ विवाह का पंजीयन नगर या ग्राम के विवाह पंजीयक के कार्यालय में करवा सकते हैं।


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