Employment Law Archive

समस्या-

टीकाराम राठौर ने एलबीएस नगर, लिंक रोड-03, तहसील व जिला विदिशा – 464001, मध्य प्रदेश से पूछा है-

मैं एक ऑटोमोबाइल्स की मायकार (भोपाल) प्राइवेट लिमिटेड में लेखपाल के पद पर दिनांक 25 जुलाई 2011 से कार्य कर रहा था। लेकिन 24 अप्रैल 2018 को कंपनी के एच आर ने मुझे ईमेल करके बताया कि मेरी सेवा दिनांक 30 अप्रैल 2018 को समाप्त की जाती है। बजह बताई गई कि मैंने मालिक से फोन पर गलत तरीके से बात की, जो कि बिल्कुल झूठ बताया गया। खैर, मैंने अपना सारा हिसाब मैनेजमेंट को 27 अप्रैल को सौंप दिया हस्ताक्षर के साथ प्रति भी ले ली। मैंने श्रम विभाग विदिशा में शिकायत कर दी वहां से मुझे ग्रैच्युटी की राशि कपनी ने दे दी, सहमति से परंतु मेरा मार्च, अप्रैल माह का वेतन नहीं दिया गया। श्रम विभाग से भी सिर्फ फॉर्मेलटी की जा रही थी। अब श्रम विभाग मेरा केस श्रम न्यायलय भोपाल को भेज रहा है। मैं आपसे जानना चाहता हूं कि मुझे अब क्या करना चाहिए? -मेरी दो माह मार्च,अप्रैल की सैलरी,117 दिन की बकाया छुट्टी, पीएफ भी काटा गया पर ईपीएफ खाते में जमा नहीं किया। बिना नोटिस के निकाल दिया नौकरी से। कुछ लोगों का कहना है कि केस करोगे तो वकील पैसे खीचेंगे और कुछ नहीं होगा। अब मुझे क्या करना चाहिए जिससे मेरा हक मुझे मिल सके?

समाधान-

प को जिस तरीके से नौकरी से निकाला है वह एक स्टिग्मेटिक टर्मिनेशन (दोष मंढ़ते हुए की गयी सेवा समाप्ति) है। बिना आरोप पत्र दिए और जाँच कराए की गयी ऐसी सेवा समाप्ति वैध नहीं है। इसे चुनौती दी जा सकती है और देनी चाहिए। आजकल सेवा की समाप्ति से संबंधित औद्योगिकक विवाद के लिए उपाय यह है कि श्रम विभाग में आप अपनी शिकायत प्रस्तुत करें, शिकायत प्रस्तुत करने के 45 दिनों में शिकायत का कोई परिणाम नहीं निकलने पर श्रम विभाग से शिकायत का प्रमाण पत्र प्राप्त कर सीधे श्रम न्यायालय में अपना विवाद प्रस्तुत करें। श्रम न्यायालय में सेवा की समाप्ति से संबंधित  विवाद का न्याय निर्णयन हो कर अधिनिर्णय पारित कर दिया जाएगा। अब इस के लिए आप वकील करेंगे तो उस की फीस तो देनी होगी। वकील की फीस के अतिरिक्त विभिन्न खर्चों का सवाल है वह मात्र 500-1000 रुपए से अधिक नहीं होंगे। आप अपने वकील से इस काम की पूरी फीस एक बार में तय कर लें और धीरे धीरे देते रहें। वकील अच्छा करें, घटिया वकील न करें।

प का दो माह का वेतन अदा नहीं किया गया है तो उस की वसूली के लिए श्रम विभाग में वेतन भुगतान अधिकारी के यहाँ वेतन अदायगी का प्रार्थना पत्र वेतन भुगतान अधिनियम के अंतर्गत प्रस्तुत कर दें। बकाया अवकाश की राशि भी इसी प्रार्थना पत्र में जोड़ी जा सकती है।

पीएफ अंशदान की कटौती आप के वेतन से करने के उपरान्त उसे पीएफ स्कीम में जमा न करना अमानत में खयानत का अपराध है। आप अपना पीएफ नंबर अंकित करते हुए इस बात की शिकायत पीएफ कमिश्नर को कर सकते हैं। विभाग आप के नियोजक के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट करवा सकता है। यदि विभाग कोई कार्यवाही न करे तो आप पुलिस को एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं, पुलिस के भी कोई कार्यवाही न करने पर आप स्वयं संबंधित मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सीधे परिवाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

सफसइस

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समस्या-

अजय कोशले ने तिकरापारा, रायपुर, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मै शासकीय सेवा मे साल 2009 से कार्यरत हूँ। मेरे सेवा में आने के लगभग 9 साल बाद मेरा पुलिस चरित्र सत्यापन कराया गया जिस में मेरे विरुद्ध साल 2007 में (जुआ एक्ट-13 क) के तहत 100 रुपये का अर्थदंड होना पाया गया। अनुप्रमाणन फार्म भरते समय इस बात का ध्यान न रहने के कारण मेरे द्वारा अनुप्रमाणन फार्म में इस तथ्य दर्शाया नही गया था। अब इस बात की वजह से मेरे विभाग मे मुझे सेवा से वंचित कर दिया जाऊंगा, इस तरह की बाते हो रही है। कृपया मुझे मार्गदर्शन देने का कष्ट करें कि क्या मै सेवा में रहने योग्य हूँ अथवा नहीं? इस तथ्य से संबंधित यदि कोई क़ानूनी नियम अथवा न्यायालयीन आदेश है तो कृपया मुझे अवगत कराए जाने का विनम्र निवेदन है, जिससे मुझे सेवा से वंचित न किया जा सके।

समाधान-

भी आप का पुलिस चरित्र सत्यापन विभाग द्वारा कराया गया है, इस सत्यापन की वजह क्या है यह आपने यहाँ नहीं बताई है। केवल इस तरह के सत्यापन में आप के बताई वजह से आप को दोषी पाने और 100 रुपए के अर्थदंड़ से दंडित किए जाने का तथ्य आया है। अब आप को यह चिन्ता सता रही है कि आप ने इस तथ्य को पूर्व में अनुप्रमाणन फार्म में प्रदर्शित नहीं किया था और इस वजह से आप को सेवा से वंचित कर दिया जाएगा।

किसी भी शासकीय कर्मचारी को जो विगत 9 वर्ष से सेवा में इतनी आसानी से नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। इस के पहले यह जाँच की जाएगी कि क्या किसी कर्मचारी को अनुप्रमाणन फार्म में यह तथ्य बताना जरूरी था, और क्या यह तथ्य कर्मचारी ने जानबूझ कर छुपाया है? यदि यह माना जाता है कि कर्मचारी द्वारा यह तथ्य अनुप्रमाणन में बताना जरूरी था और उसे जानबूझ कर छुपाया गया है तो फिर आप को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। तभी आप की असली चिंता आरंभ होगी।

ब आप को ऐसा कोई कारण बताओ नोटिस मिले या आरोप पत्र मिते तो तुरन्त किसी अच्छे वकील से मिल कर उस का जवाब लिखाएँ, जरूरत हो तो जवाब को प्रमाणित करने के लिए शपथ पत्र और दस्तावेज भी उस के साथ संलग्न करें। हमारा मानना है कि मात्र इस कारण से आप की नौकरी नहीं छीनी जा सकती है। फिर भी सतर्क रहना जरूरी है। यदि आप को कारण बताओ नोटिस मिलता है तो आप तीसरा खंबा पर उस के तथ्य बताते हुए पुनः समाधान के लिए अपनी समस्या भेज सकते हैं।

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अनुकंपा नियुक्ति केवल नियमों केअनुरूप ही संभव है।

January 14, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

राजेश ढंगारे ने नासिक, महाराष्ट्र से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी पशु संवर्धन में परिचर पद पर थे। उन का देहान्त 8 अगस्त 2000 को हुआ। मेरे पिताजी के दो पत्नियाँ थीं। उन्हों ने दूसरा विवाह लड़का न होने के कारण किया था। मैंने पापा के गुजरने के बाद 2001 में अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। 2008 में उन्हों ने पत्र भेजा कि आप की माँ शासकीय सेवा में परिचर थी इस कारण आप को अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल सकती। मम्मी को 2008 में पैरालीसिस हुआ तो उन्हों ने स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति प्राप्त कर ली। क्या मुझे पिताजी या माताजी के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है?

समाधान-

प को और सभी लोगों को यह जान लेना चाहिए कि अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं है बल्कि केवल अनुकंपा मात्र है। सुप्रीम कोर्ट बार बार यह कह चुका है कि सरकारी और सरकारों के नियंत्रम वाले नियोजनों में नियोजन खुले निमंत्रण द्वारा योग्यता के आधार पर दिया जाना चाहिए। अनुकंपा नियुक्ति भी केवल परिवार को तुरन्त आर्थिक संकट से बचाने के लिए नियमों के अनुसार ही दी जानी चाहिए। अन्यथा ऐसी नियुक्तियाँ असंवैधानिक होंगी।

आप के पिता का देहान्त हुआ तब आप की माता जी राजकीय सेवा में थी इस कारण नियमों के अंतर्गत अनुकम्पा नियुक्ति आप प्राप्त नहीं कर सकते थे। आप की माताजी ने उन्हें पैरालिसिस हो जाने के कारण सेवा निवृत्ति प्राप्त कर ली। स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति पर अनुकम्पा नियुक्ति दिए जाने का कोई नियम नहीं है। इस कारण आप को नौकरी मिलना संभव नहीं है।

समस्या-

अफजल खान ने टीकमगढ़, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरा एक दोस्त है जिस के बडे भाई न्यायालय में थे, उनकी वाहन दुघर्टना में मृत्यु हो गई है। उनकी शादी को अभी केवल 15 माह ही हुए हैं। उनके घर में वृद्ध माता-पिता व एक बेरोजगार पुत्र है। मृत भाई की पत्नी को वृद्ध माता पिता के साथ रहना नहीं है इसलिए लडकी के माता पिता लड़-झगड़ कर अपनी लड़की को ले गये हैं। अब वृद्ध माता पिता का वही सहारा एक मात्र पुत्र है। नोमिनेशन में बडे लडके ने अपनी मां को ही नोमिनेट किया था। कृपया बतायें कि अनुकम्पा नौकरी किसको मिल सकती है, मेरे दोस्त को या उस लडकी को?

समाधान-

प का मामला मध्यप्रदेश में राज्य सरकार के अधीन अनुकम्पा नियुक्ति का है। यह नियुक्ति मध्यप्रदेश अनुकंपा नियुक्ति के नियमों के अनुसार होनी है। इन नियमों में नियुक्ति हेतु पात्रता के उपबंध निम्न प्रकार हैं-

  • दिवंगत शासकीय सेवक की पत्नी, अथवा पूर्णत: आश्रित पति को, अथवा
  • दिवंगत शासकीय सेवक का पुत्र अथवा अविवाहित पुत्री अथवा ऐसी विवाहित पुत्री जिसके पति की मृत्यु हो चुकी हो अथवा जो तलाकशुदा हो, किन्तु शर्त यह होगी कि ऐसी पुत्री दिवंगत शासकीय सेवक की मृत्यु के समय उस पर पूर्णत: आश्रित होकर उसके साथ रह रही हो, अथवा
  • अविवाहित दिवंगत शासकीय सेवक के भाई अथवा अविवाहित बहन को दिवंगत शासकीय सेवक के माता-पिता की अनुशंसा के आधार पर।
  • एक से अधिक अनुकम्पा नियुक्ति के पात्र होने पर दिवंगत शासकीय सेवक की पत्नी#पति की अनुशंसा एवं पति#पत्नि के न होने पर परिवार की सर्वसम्मति से किसी एक सदस्य को अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता होगी। परिवार में सहमति न होने पर संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा यह निर्णय लिया जावेगा कि किसे अनुकम्पा नियुक्ति दी जाये।

उक्त नियमों के अनुसार मृत्तक की पत्नी के जीवित होने की स्थिति में केवल उसे अथवा उस की अनुशंसा पर अन्य पात्र को अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त हो सकती है। आप के मामले में तो मृतक की पत्नी के सिवा कोई अन्य ऐसा आश्रित नहीं है जो अनुकम्पा नियुक्ति हेतु पात्रता रखता हो।

जहाँ तक मृतक के भाई को अनुकम्पा नियुक्ति का प्रश्न है किसी भी मृतक शासकीय कर्मचारी के भाई को उस के माता पिता की अनुशंसा पर तभी अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त ह सकती है जब कि मृतक अविवाहित हो। आप के मामले में मृतक विवाहित था वैसी स्थिति में उस का भाई या अविवाहित बहिन नियुक्ति हेतु पात्र नहीं है। अनुकम्पा नियुक्ति के लिए कोई नामांकन नहीं होता है। नामांकन अन्य उद्देश्यों से होता है। इस कारण मृतक ने किसे नामांकित किया है इस का कोई प्रभाव अनुकम्पा नियुक्ति पर नहीं पड़ेगा।

आप के मित्र के मामले में यदि मित्र की पत्नी अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन करती है तो उसे ही अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त होगी। मृतक के भाई को नहीं।

समस्या-

अक्कू यादव ने प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मको हमारे पिता के चाचा ने 2012 में कानून के अनुसार सब रजिस्ट्रार के सामने गोद लिया गया था। उनकी दो शादी शुदा बेटी है, जिन की गोद लेने के पहले शादी हो गयी थी। उनकी पत्नी का देहांत 2008 में हो गया। तब उन्होने अपनी सेवा और वंशज के लिए हमको पंजीकृत गोद ले लिया, वे सरकारी सेवा पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान उनकी 2016 में देहांत हो गया। उनकी जो दो बेटियाँ हैं उन्होंने गोद नामा कैंसल करवाने के लिए मुकदमा किया है। जब गोद लिया गया था तब उनको कोई समस्या नहीं थी। परन्तु अब मरने के बाद बोल रही 30 लाख रुपये दो तब अनुकम्पा के लिए सहमति पत्र दूँगी। अनुकम्पा के लिए मैने बिभाग में अबेदन किया तो बोले बिना सहमति के अनुकम्पा नहीं मिल सकती है तो क्या हम हाईकोर्ट में बिभाग के खिलाफ याचिका कर सकते हैं? हमको अनुकंपा कैसे मिल सकती है और क्या पंजीकृत गोद नामा कैंसल हो सकता है? जब कि सभी दस्तावेज में पिता के स्थान पर दत्तक पिता का नाम है और नॉमिनी फॉर्म भी मेरे नाम है जिला अधिकारी द्वारा वारिस पत्र भी है हम क्या करें हमे बतायें?

समाधान-

प को सही प्रकार से गोद लिया गया है और गोदनामा निरस्त होना असंभव प्रतीत होता है। लेकिन अनुकंपा नियुक्ति के लिए बहिनों की सहमति आवश्यक है। गोद लिए जाने से आप को गोद पुत्र के रूप में वही अधिकार प्राप्त हुए हैं जो एक पुत्र को होते। यदि आपके गोद पिता के कोई पुत्र होता तब भी यही स्थिति बनती। ऐसा लगता है कि आप कुछ छिपा रहे हैं। आप के गोद पिता ने और भी संपत्ति छोड़ी होगी। उस की कीमत भी कम नहीं होगी। बहनें उस संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने की अधिकारी हैं और अनापत्ति देने के पहले उस संपत्ति का हिस्सा आप से प्राप्त कर लेना चाहती हैं जिस के कारण बाद में उन्हें बंटवारे आदि की कार्यवाही न करनी पड़े।

आप ने यह नहीं बताया कि आप किस विभाग में नौकरी चाहते हैं। यदि अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में विवाहित बहनें आश्रित हैं तो यह स्पष्ट है कि बिना बहनों की अनापत्ति के अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकती। वैसे भी अनुकंपा नियुक्ति मात्र अनुकंपा है कोई अधिकार नहीं है और इस कारण दी जाती है कि परिवार को सहारा मिले। लेकिन आपके मामले में परिवार तो है ही नहीं। बहने शादीशुदा हैं। और आप के अलावा परिवार में कोई अन्य नहीं। तो सरकार वैसे भी नौकरी देने से इन्कार कर सकती है। यह दूसरी बात है कि उस स्थिति में आप उच्च न्यायालय में रिट याचिका कर सकते हैं।

हमारी राय है कि यदि आप की विवाहित बहनें आश्रित अनुुकंपा नियुक्ति नियमों में आश्रित की परिभाषा में हैं तो आप को बहनों से कोई समझौता कर लेना चाहिए और सहमति प्राप्त कर अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने की कोशिश करें। अन्यथा अनुकंपा नियुक्ति को भूल जाएँ तो बेहतर है। यदि विवाहित बहने आश्रित की श्रेणी में नहीं आती हैं और विभाग आप से उन की अनापत्ति मांग रहा है तो आप विभाग के पत्र के आधार पर रिट याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

 

समस्या-

संगीता ने प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं शादी शुदा हूँ और मेरी एक बहन है, वो भी शादी शुदा हैं। मेरे पिता जी सरकारी नौकरी पर कार्यरत थे। दोनों बेटियों की शादी कर देने पर उन्होंने हम दोनों बहनो को बिना बताये अपने सगे भतीजे के बेटे को पंजीकृत गोद ले लिया। उसे  अपनी सम्पति का मालिक बना दिया सेवा के दौरान उनका देहांत हो गया तो क्या हम दोनों बहनो गोद नामा कैंसल करवा सकती हैं और अनुकम्पा के आधार पर नौकरी किसे मिल सकती है? हम को या दत्तक पुत्र को और मेरी सहमति के बिना दत्तक पुत्र को नौकरी मिल सकती है?

समाधान-

आप कैसे कहती हैं कि दत्तक पुत्र को आप के पिता ने संपूर्ण संपत्ति का स्वामी बना दिया? क्या उन्हों ने कोई वसीयत की है। यदि कोई वसीयत नहीं की है तो जैसे एक पुत्र के होते हुए विवाहित पुत्रियों को जो अधिकार प्राप्त हैं वे सभी अधिकार आपको प्राप्त हैं। आप कृषि भूमि के अतिरिक्त तमाम संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार हैं और दत्तक पुत्र भी। आप तीनों  में से प्रत्येक पिता की छोड़ी हुई संपत्ति में एक तिहाई हिस्से की हकदार हैं। अनुकंपा के आधार पर उस आश्रित को नियुक्ति मिल सकती है जो शेष आश्रितों की अनापत्ति ले आए।  आप की आपत्ति करेंगी या अनापत्ति नहीं देंगी तो दत्तक पुत्र अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकेगा। गोदनामा आप तभी निरस्त करवा सकती हैं जब कि वह कानून के अनुसार न हो। इस के लिए आप गोदनामा की प्रति प्राप्त कर किसी स्थानीय वकील से सलाह कर सकती हैं और गोद के नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो उसे निरस्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकती हैं।

समस्या-

सुनील पवार ने वापी, वलसाड़ से गुजरात राज्य की समस्या भेजी है कि-

मैं वैलसपन कम्पनी में 6 माह से काम कर रहा हूं । फाईनल चैकर का काम कर्ता था । अचानक ही मुझे HR बालो ने आफिस में बुलाकर कहा कि हमारे पास कोई काम नहीं है । आप अपना राजिनामा लिख दो। और कल से कम्पनी मत आना । मैने कारण पुछा तो गाली देने लगे । पिछले कुछ दिनों से ये लोग हमसे जबरदस्ती ओवर टाइम्स काम करने के लिए रोक रहे थे और मना कर दिया तो कम्पनी से निकाल देने की बात कहते थे । अगर काम नहीं है तो ओवर टाईम्स कैसे करा रहे हैं । और पुरा दिन जमकर काम कराया जाता है । थोड़ी सी भी गलती हुई तो बहुत गाली दी जाती है । बताईये अब क्या करें ।

समाधान-

प किसी कंपनी में काम कर रहे हों। अब आप को समझ लेना चाहिए कि जब तक आप किसी कंपनी में एक वर्ष की लगातार सेवा पूरी नहीं कर लेते हैं तब तक कानून आप को किसी तरह की कोई सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता। एक वर्ष की लगातार सेवा का अर्थ है कि आप ने नौकरी लगने से एक साल पूरा करने की अवधि में 240 दिन काम कर लिया हो। उस काम करने का सबूत भी आप के पास होना चाहिए। आप का नियुक्ति पत्र हो, वह न हो तो उपस्थिति कार्ड हो, वेतन भुगतान का कोई सबूत हो, परिचय पत्र आदि हों।

इतना होने पर भी यदि आप किसी राज्य के श्रम विभाग में जाएंगे तो आप को हतोत्साहित किया जाएगा। भ्रष्टाचार भले ही जनता के लिए समाप्त कर दिया गया हो पर कंपनी के मालिकों के लिए वह ईश्वर की पूजा की तरह है। इस विभाग के अधिकांश अफसर मालिकों की भाषा ही बोलते दिखाई देंगे। विभाग की मर्जी के बिना आप अदालत में अपनी अर्जी नहीं दे सकते। आप को क्या परेशानी है, प्रधानमंत्री जी ने कल घोषणा कर ही दी है कि भारत में बेरोजगारी समाप्त हो गयी है। कुछ लोग दलाल थे उन की दलाली खत्म की है तो वे ही बेरोजगारी का हल्ला मचा रहे हैं। वैसी स्थिति में आप को तुरंत ही कहीं न कहीं अच्छा काम मिल ही जाएगा।

वैसे यदि आप के पास छ माह काम करने का सबूत हो और आप से जूनियर अर्थात आप को नौकरी पर रखने के बाद किसी अन्य मजदूर को नौकरी पर रखा गया कर्मचारी आप को नौकरी से हटाने के समय काम कर रहा हो और आप ये अदालत में साबित कर सकते हों तो आप तुरन्त श्रम विभाग में शिकायत करें। शिकायत की एक प्रति पर प्राप्ति के हस्ताक्षर विभाग के प्राप्ति लिपिक से करवा कर मुहर लगा कर रखें। 45 दिन में विभाग द्वारा कोई समझौता नहीं करवाने पर आप विभाग से 45 दिनों में समझौता न होने का प्रमाण पत्र प्राप्त कर श्रम न्यायालय में सीधे अपना विवाद प्रस्तुत करें। इस मामले में आप अपने उद्योग की श्रमिकों की किसी यूनियन या किसी स्थानीय वकील जो श्रम न्यायालय के मामले देखता है उस की मदद ले सकते हैं।

समस्या-

महेन्द्र सिंह ने पोर्वोरिम, गोआ से समस्या भेजी है कि-

मै उत्तराखण्ड का रहने वाला हूँ, मैं गोआ के 4 स्टार होटल मे काम करता था। एक साल काम करने के बाद कुछ कारणवश मुझे काम छोड़ना पडा। उसके बाद जल्दी कहीँ काम न मिलने पर मैं एक छोटा होटल में जनवरी से मई तक 5 माह काम किया। उनसे 10 हजार रुपयोँ पगार की बात हुई थी। जिसमें उसने केवल जनवरी का एक महिने का पगार दिया था।  उसके वह बात टालने लगा। कल दूँगा.परसोँ दूँगा. 2-3 दिन मेँ दूँगा, ऐसे करके बात टालने लगा। मैंने मई लास्ट में काम छोडा। उनकी ओर  मेरा 40 हजार रुपया बाकी है। घर वालोँ ने मेरी सगाई तय किया था, जिससे मुझे जून मे घर जाना था पैँसे न मिलने के कारण घर नहीं जा पाया। मेँ घर मै खाली बैठा पडा हूँ। मालिक से पैसो की प्रतीक्षा करते-2 दो महिना हो गया है और वह पैसे देने का नाम नही ले रहा है। मुझे गोआ में 2 वर्ष होने वाला है और मैं घर नही जा पा रहा हूँ। घर वालोँ का कॉल पे कॉल आ रहा है, लेकिन शर्म के मारे मैं उनका कॉल रिसीव नहीं कर पाता हूँ और हाल ही में मेरे पास एक भी रुपया नहीं है। ऐसे लाईफ से सुसाईड बेहतर है। मेरी बातोँ का बुरा मत मानना सर। आप ही बताईए इसका हल किस प्रकार करुँ।

समाधान-

प को सब से पहले तो यह समझना चाहिए कि आप ने मेहनत की है और आप के मालिक ने आप को चार माह की मजदूरी नहीं दी तो इस में आप का कोई कसूर नहीं है। इस के लिए परिवार वालों या किसी भी अन्य व्यक्ति के सामने आप को शर्मिन्दा होने की जरूरत नहीं है। इस तरह आप अपनी तकलीफ और अपने विरुद्ध हुए अन्याय को छुपा रहे हैं और आप अन्याय करने वाले आप के उस मालिक को जो आप की मजदूरी को दबाए बैठा है और डकार जाना चाहता है उस की मदद कर रहे हैं। आप को तो इस अन्याय के विरुद्ध पूरी ताकत से चिल्लाना चाहिए। मजदूरी न देने वाले मालिक की उस के आसपास के इलाके में खूब बदनामी करनी चाहिए कि इस होटल वाला बेईमान है, उस के हर ग्राहक को बताना चाहिए कि होटल वाला कितना बेईमान है।

आप ने जिस छोटे होटल में काम किया उस के मालिक से आप का मजदूरी का जो कांट्रेक्ट हुआ वह लिखित में नहीं केवल मौखिक हुआ होगा। आप के पास इस तरह का कोई सबूत नहीं होगा जिस से आप साबित कर सकें कि मजदूरी की क्या दर तय हुई थी। आप ने वहाँ वाकई 5 माह काम किया है। न तो कोई हाजरी रजिस्टर होटल वाले ने रखा होगा और रखता होगा तो उस में आप का नाम नहीं लिखा होगा।

देश में वेतन भुगतान अधिनियम 1936 नाम का एक कानून है। मजदूरी न देने पर कोई भी मजदूर जिस का नहीं दिया गया है, वेतन बकाया होने के एक वर्ष की अवधि में इस अधिनियम में नियुक्त प्राधिकारी के यहाँ बकाया वेतन की वसूली के लिए दावा कर सकता है। गोआ में जहाँ आप ने काम किया है उस इलाके के श्रम विभाग में जा कर बकाया वेतन का दावा कर दें। यदि आप यह साबित करने में सफल हुए कि आप कि मजदूरी बकाया है तो प्राधिकारी आप को वेतन देने का आदेश नियोजक को देगा। और न देने पर वेतन की वसूली जुर्माने की तरह वसूल कर आप को दिलाएगा। लेकिन यह प्रक्रिया ऐसी है कि इस में कम से कम साल दो साल लग जाएंगे। तब तक आप गोआ में नहीं रह सकते। आप नहीं रहेंगे तो आप का यह मुकदमा खारिज हो जाएगा। इस तरह मजदूर को मजदूरी दिलाने का जो सरकारी इन्तजाम है वह केवल दिखावे का है। उस के भरोसे रहना बेवकूफी है। असल में इस देश में कोई इन्तजाम नहीं है कि एक मजदूर की बकाया मजदूरी सरकार उसे शिकायत मिलने के बाद एक दो माह में मजूर को दिला दे।

बेहतर यह है कि उस इलाके के अपने परिचितों और अन्य व्यक्तियों को जो आप के साथ खड़े होने को तैयार हों ले कर होटल मालिक के सामने जाएँ और मजदूरी देने को कहें। कहें कि यदि मजदूरी न दी तो होटल की बदनामी करेंगे, यदि होटल वाला इस तरह मजदूरी दे तो ठीक है वर्ना सोच लें कि यह मजदूरी बट्टे खाते गई।

 

समस्या-

राहुल ने ट्रांजिट कैंप रुद्रपुर (उत्तराखंड) से समस्या भेजी है कि-

मैं रूद्रपुर में दिनांक 01-06-2015 से एक निजी आटो पार्ट्स कंपनी में पे रोल पर डिप्लोमा मैकेनिकल इंजिनियर की हैसियत से कार्यरत था। लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से मैं पूरा महीने (जनवरी 2017) अनुपस्थित रहा। मैंने अपने सुपरवाइजरों को फोन द्वारा सूचित किया तो उन्होंने कोई दिक्कत न होने की बात कही। परन्तु मेरे मेडिकल लेकर वापस आने के बाद एचआर विभाग द्वारा यह कह कर कि तुम्हारा नाम कट गया है। एक महीने बाद रीजोइनिंग करानी पड़ेगी। धोखे से कैजुअल ट्रेनिंग में डाल दिया है और सैलरी के नाम पर छह महीने से स्टाईपेंड दे रही है। अब कम्पनी बार बार कहने पर भी रीजोइनिंग नही करा रही है। अब एक्जिट क्लियरिंग फार्म में रिजाइन दिखा कर साइन करने के लिये दबाव बना रही है, ऐसा न करने पर कम्पनी नो एंट्री लगाने की धमकी दे रही है। कृपा करके मुझे बतायें कि क्या मैं स्थानीय श्रम न्यायालय में शिकायत दर्ज करा सकता हूं? कम्पनी ने एक साल पूरे होने पर मुझे इंक्रीमेंट दे रखा है।

समाधान-

आप 01.06.2015 से पे-रोल पर डिप्लोमा मैकेनिकल इंजिनियर की हैसियत से नियोजित थे। आप का काम जिस तरह का है आप एक श्रमिक हैं। दिसम्बर 2016 तक आप ने काम किया, इस तरह आप एक वर्ष सात माह काम कर चुके थे। आप इन्क्रीमेंट भी प्राप्त कर चुके थे। इस तरह आप स्थाई कर्मचारी हो चुके थे। इस के बाद आप बीमारी के कारण उपस्थित नहीं हो सके और फोन पर सुपरवाइजरों को सूचित किया। फिर आप फरवरी में ड्यूटी पर उपस्थित हुए। लेकिन आप को ड्यूटी पर नहीं लिया गया, बल्कि कहा गया कि आप का नाम पे-रोल से कट गया है। इस तरह आप की सेवा समाप्त हो गयी। पे रोल से नाम काट देने को सुप्रीम कोर्ट ने कई मुकदमों में छंटनी माना है। इस तरह आप की यह सेवा समाप्ति आप की छंटनी है। इस सेवा समाप्ति के पहले आप को एक माह का नोटिस दिया जाना चाहिए था या उस की एवज में एक माह का वेतन सेवा समाप्ति के दिन दिया जाना चाहिए था। इस के साथ ही छंटनी का मुआवजा भी दिया जाना चाहिए था। इस छँटनी के पहले नियोजक को एक वरिष्ठता सूची भी प्रकाशित करनी चाहिए थी। यह भी कि छंटनी केवल सब से नए कर्मचारी की की जा सकती है। किसी सीनियर की नहीं।

अब छंटनी के इन मानदंडों पर आप की छंटनी को परखेंगे तो वह अवैधानिक है। आप इस के विरुद्ध श्रम विभाग में शिकायत कर सकते हैं। शिकायत प्रस्तुत करने की रसीद शिकायत की दूसरी प्रति पर प्राप्त कर अपने पास अवश्य रखें जिस पर प्राप्त करने की तिथि और प्राप्त करने वाले कर्मचारी के हस्ताक्षर व विभाग की सील जरूर लगी हो। विभाग उस में समझौते के लिए प्रयास करेगा या फिर नहीं करेगा। दोनों ही स्थितियों में यदि 45 दिन में कोई परिणाम नहीं मिलता है तो आप श्रम विभाग से शिकायत प्रस्तुत होने के 45 दिन पूरे हो जाने का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर प्राप्त कर लें। तब आप सीधे श्रम न्यायालय के समक्ष अपना अवैधानिक छंटनी का मुकदमा पेश कर सकते हैं। इस मुकदमे में आपकी जीत होगी। अदालत से आप को नौकरी पर वापस लेने, सेवा की निरन्तरता बनाए रखने और पिछला पूरा वेतन या उस का कोई अंश दिए जाने का अधिनिर्णय पारित किया जाएगा।

कंपनी भी जानती है कि आप मुकदमा कर सकते हैं और कंपनी को उस में नुकसान उठाना पड़ेगा। पर वे आप की अनभिज्ञता और मजबूरी का लाभ उठा रहे हैं। आप को किसी रिजाइन या त्याग पत्र पर अपने हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए। वैसे भी कंपनियों की नौकरियों का कोई भरोसा तो है नहीं। इस कारण आप को तुरन्त श्रम विभाग में शिकायत करें। किसी स्थानीय वकील से मदद लें। आप नौजवान हैं, डिप्लोमा इंजिनियर हैं, आप को कहीं भी काम मिल जाएगा। घबराएँ नहीं और अपने अधिकारों के लिए लड़ें।

समस्या-

ना़जिया खान ने लखनऊ, उत्तर प्रदेश  से भेजी है कि-

क्या सरकारी नौकरी वाला बिना सरकारी इजाजत के दूसरी शादी कर सकता है? और दूसरी बात ये कि क्या पीएफ में जिस का नाम नौमिनी के रूप में दर्ज  है उसी को मिलता है?

समाधान-

दि किसी व्यक्ति की पर्सनल लॉ में दूसरा विवाह करना अवैध नहीं है तो वह व्यक्ति दूसरा विवाह कर सकता है। यदि किसी नौकरी के नियमों में यह शर्त है कि वह दूसरा विवाह बिना अनुमति के नहीं कर सकता तो वैसी स्थिति में दूसरा विवाह करने के बाद शिकायत हो जाने पर ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध नौकरी मेें अनुशासनिक कार्यवाही की जा सकती है और परिणाम स्वरूप नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है। लेकिन यदि उस की मृत्यु हो गयी है तो फिर कुछ भी नहीं किया जा सकता।

यदि कोई आपत्ति नहीं करे तो पीएफ अर्थात भविष्यनिधि की राशि नौमिनी को ही दी जाती है। लेकिन नौमिनी के पास यह राशि एक ट्रस्टी के रूप में होती है और नौमिनी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह इस राशि को उस के उत्तराधिकारियों में नियम के अनुसार वितरित कर दे। यदि किसी उत्तराधिकारी को आशंका हो कि नौमिनी सारी राशि उस के उत्तराधिकारियों को देने के बजय खुद रख सकता है तो वे उस की विभाग को शिकायत कर सकते हैं और जिला न्यायाधीश के यहाँ उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं और पीएफ की राशि के भुगतान को रोकने का आदेश जिला न्यायाधीश से प्राप्त कर सकते हैं।

 

 

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