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फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त कराने के लिए दीवानी वाद और छल व फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए अपराधिक शिकायत दर्ज कराएँ।

समस्या-

दुर्गेश शर्मा ने अजमेर, राजस्थान से पूछा है-

मारे दादा जी ने ज़मीन खरीदी उस वक़्त के उनके हस्ताक्षर एवं अंगूठा निशानी रजिस्ट्रार ऑफिस में किए थे। लेकिन जब हम ने इस के बारे मे हमारे भाइयों से पूछा तो उन्होने कहा कि ये ज़मीन हमारे दादा जी ने उनको बेच दी थी। फिर जब हम ने बेचान की रजिस्ट्री की कॉपी निकलवाई तो पता चला कि जमीन बेचान की रजिस्ट्री में उन के सिग्नेचर हस्ताक्षर एवं अंगूठा निशानी मैच नहीं करते हैं। इस की हम ने एफएसएल जाँच भी करवायी है. एफएसएल की रिपोर्ट में भी ये मैच नहीं हुए हैं। कृपया हम को बताएँ कि हम क्या कर सकते हैं।

समाधान-

किसी भी मामले में कानूनी सलाह लेते समय यह आवश्यक है कि जिस विधि विशेषज्ञ से आप सलाह ले रहे हैं उस के समक्ष सभी तथ्य रखे जाएँ। आपने आपके इस मामले में दादाजी द्वारा जमीन खरीदे जाने के विक्रय पत्र की रजिस्ट्री की तिथि तथा फिर दादाजी द्वारा भाइयों के नाम किए गए विक्रय पत्र की रजिस्ट्री की तिथि नहीं बताई है। एफएसएल की रिपोर्ट कब आई है इस की तिथि भी नहीं बताई है। हर उपाय प्राप्त करने के लिए न्यायालय के ममक्ष कार्यवाही करे की एक निश्चित समयावधि होती है और कोई भी उपाय केवल सही समय पर नहीं करने के कारण असफल हो सकता है।

हली बात आप को यह देखनी चाहिए कि जब आप के दादा जी ने जमीन खरीदी थी तब रजिस्ट्री पर उन के हस्ताक्षर हुए थे क्या? यदि उन के हस्ताक्षर उस रजिस्ट्री पर हुए थे तो बेचान की रजिस्ट्री पर हुए उन के हस्ताक्षर पूर्व के हस्ताक्षरों से मिलने चाहिए थे और साथ ही अंगूठा निशानी भी मेल खानी चाहिए थी। इस का एक ही अर्थ हो सकता है कि भाइयों ने किसी अन्य व्यक्ति को आपके दादाजी बना कर रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली हो। यदि इस की जरा सी भी संभावना है तो यह गंभीर अपराध है क्यों कि इस में फर्जी दस्तावेज का निर्माण कर के छल हुआ है। इस में अनेक अपराध एक साथ हुए हैं।आप इस की रिपोर्ट पुलिस को करवा सकते हैं और पुलिस के कार्यवाही न करने पर परिवाद प्रस्तुत कर सीधे न्यायालय को कह सकते हैं कि इस मामले को दर्ज कर पुलिस को जाँच के लिए भेजा जाए।

दि आप को पक्का है कि जो रजिस्ट्री आपके दादा की ओर से भाइयों के नाम हुई है वह फर्जी है और उस में छल हुआ है तो आप इसी आधार पर उस कूटरचित रजिस्टर्ड विक्रय पत्र को निरस्त कराने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं और जमीन का बंटवारा करा कर अपने हिस्से की जमीन का पृथक कब्जा दिए जाने के लिए राजस्व न्यायालय में विभाजन का वाद संस्थित कर सकते हैं।

न्यायिक कार्यवाही में कूटकरण के अपराध का परिवाद मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करें।

Havel handcuffसमस्या-

ए के शुक्ला ने इन्दौर, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे ससुराल पक्ष ने मेरे खिलाफ जो घरेलू हिंसा का वाद लगाया था उसे मजिस्ट्रेट कोर्ट ने संभावना के आधार पर कहकर मेंटेनेंस बाँध दिया था। मैं ने कोई अपील नहीं लगाई। लेकिन मेरे ससुराल पक्ष ने फैसले के खिलाफ अपील लगाई। जिसपर मेरी पत्नी के फर्जी हस्ताक्षर थे। मैं ने हस्तलिपि विशेषज्ञ से जांच करवाकर उसी अदालत में उनकी अपील इस आधार पर खारिज करने का आवेदन मय हस्तिलिपि विशेषज्ञ के प्रमाण पत्रों के लगाया। हस्ताक्षर विशेषज्ञ ने स्थापित किया कि अपील मेमो पर हस्ताक्षर नकली हैं। वो मेरी पत्नी के द्वारा बनाये गये नहीं हैं उसी के साथ ही साले के भी हस्ताक्षर उसी आदेशिका पर मेंटेनेंस के चेक और पेशी की तारीखों पर थे। जिस से विशेषज्ञ द्वारा पाया गया कि अपील मेमो पर उक्त नकली हस्ताक्षर मेरे साले द्वारा ही बनाए गये हैं। लेकिन जज ने अचानक फैसला देने की जिद की। जब कि हम ने जवाब पेश ही नहीं किया था ना ही नकली साईन के आवेदन पर कोई फैसला ही हुआ था। जज ने प्राथमिता मेरे उस नकली हस्ताक्षर वाले आवेदन को देना था, लेकिन पिछले महीने इस फैसले में जज ने मेरे इस नये आवेदन का मात्र जिक्र भर किया। और पूर्ववर्ती मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले की समीक्षा करते हुए पत्नी की ओर से उक्त मेरे खिलाफ लगाई गयी अपील को खारिज कर दिया। अब में पशोपेश मे हूँ कि क्या करूं? वकील साहब से भी कोई सही मार्गदर्शन मिल नहीं रहा है। मैं परेशान हूँ जबलपुर में मुकदमा होने से अच्छे वकील को ढूंढ़ना मेरे लिये मुश्किल है। मुझे लगा था ससुराल पक्ष इस आवेदन के कारण फंसने से अपनी कुचक्र और कुत्सित हरकतें बंद कर देगा। लेकिन मौका हाथ से निकल गया। पत्नी से भी किसी तरह संपर्क होने नहीं देते और उनके दबाव मे वो कुछ कह नहीं पाती। मेरे एक छोटी चोटी बच्ची जो 9 महीने की थी अब 7 वर्ष की हो गयी। मैं देख नहीं पाया आज तक। कृपया उचित परामर्श दें। मेरे सामने अब क्या रास्ता है ?? क्योंकि यही एक तरीका है जिससे ससुराल पक्ष को निष्प्रभावी करके ही मैं अपने परिवार को बचा सकता हूँ। मुझे किस न्यायालय में इसे प्रस्तुत करना चाहिये अथवा पुलिस की सहायता लेनी होगी?

समाधान-

प की पत्नी के भाई ने जो कुछ किया और जिस में आप की पत्नी की मौन सहमति रही वह सब भारतीय दंड संहिता की धारा 465, 466, 471 व 474 के अन्तर्गत गंभीर अपराध है। इस संबंध में संबंधित पुलिस थाना को रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा सकती है और यदि पुलिस थाना रिपोर्ट दर्ज करने से इन्कार करे तो संबंधित मजिस्ट्रेट के न्यायालय में परिवाद भी दर्ज कराया जा सकता है।

पील न्यायालय को अपील सुनना था। अपील में दम नहीं था इस कारण उसे मेरिट पर निरस्त कर दिया गया। एक अपील के मेमो पर कूटकृत हस्ताक्षर बनाए गए यह केवल एक अपराधिक मामला है जिसे अपराधिक न्यायालय में ही साबित किया जा सकता था। अधिक से अधिक अपील न्यायालय यह कर सकता था कि कूटकरण की शिकायत को पुलिस या किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष जाँच के लिए भेज देता। उस ने वह उचित नहीं समझा। किसी कूटकरण की शिकायत को संबंधित मजिस्ट्रेट या थाने को भेजना उस अदालत का ऐच्छिक कार्य था जो उस ने नहीं किया। इस काम का कोई क्रेडिट अपील अदालत को नहीं मिलता। आज कल अदालतों के समक्ष वैसे ही काम की कमी नहीं है। वे अपने काम को बढ़ाना नहीं चाहते। इस से हतोत्साहित होने का आवश्यकता नहीं है।

प को चाहिए कि आप संबंधित मजिस्ट्रेट के न्यायालय में आप की पत्नी और उस के भाई दोनों के विरुद्ध इस कूटकरण और उस के उपयोग के संबंध में परिवाद प्रस्तुत करें। आप के पास सबूत हैं आप इस मामले को दर्ज करवा पाएंगे। जबलपुर में आप को वकील तलाशने में परेशानी हो तो आप वहाँ श्री राजेन्द्र जैन एडवोकेट से मिल सकते हैं शायद वे आप की मदद कर सकें।

अन्याय को देर तक सहन न करें, तुरन्त कार्यवाही करें।

पति पत्नी और वोसमस्या-

 

प्रियंका ने जमशेदपुर, झारखंड से पूछा है-

 

मेरी शादी दिसम्बर 2006 में हुई थी। शादी के पहले दिन से ही मेरी सास और ननदों का व्यवहार मेरे प्रति अच्छा नहीं था। उन लोगों ने मुझ से धोखे से बहाना बनाते हुए कई बार पैसे ले लिए हैं। सास के साथ रहते हुए मेरा 2 बार इन लोगों की वजह से गर्भपात हो गया जो मुझे अब समझ में आ रहा है कि ये लोग बच्चा नहीं चाहते थे। मेरी सास और ननद के व्यवहार के चलते मैं और मेरे पति अलग किराए का घर लेकर रहने लगे। 2010 में मेरा बेटा हुआ तब मैं मेरे मायके आई कुछ दिन के लिए। जब वापस गयी तो पता चला की मेरे घर का सारा सामान एक एक बर्तन भी मेरे पति ने बेच दिया है। मेरी कार जो मेरे नाम से रजिस्टर्ड थी उसको भी ड्यूप्लीकेट साइन बना कर बेच दिया। मेरे पति के दूसरी लड़की के साथ भी रिश्ता है। अब मेरा पति मुझे मेरे मायके मे छोड़ कर भाग गया है। मुझे तलाक़ चाहिए और मैं यह चाहती हूँ कि मेरे ससुराल वालों को सज़ा भी मिले। इस के लिए मुझे क्या करना चाहिए?

 

समाधान-

 

म यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इस हालत में आप इतने दिन क्या करती रहीं। आप के साथ इतना अन्याय हुआ है, आप को तो बहुत पहले कार्यवाही करनी चाहिए थी।

 

प के मामले में सब कुछ है। आप का स्त्रीधन जो आप के पति के पास था उस ने बेच कर ठिकाने लगा दिया। उस ने जिस तरह का व्यवहार किया वह क्रूरता की श्रेणी में आता है। कार को आप के फर्जी हस्ताक्षर कर के बेच दिया। आप का पति आप को मायके में छोड़ कर चला गया।

 

प तुरन्त स्थानीय वकील से सलाह कीजिए तथा विवाह विच्छेद के लिए आवेदन प्रस्तुत करिए आप को विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त हो जाएगी। इस के अतिरिक्त आप का स्त्री-धन खुर्द-बुर्द कर देने और फर्जी हस्ताक्षर कर के कार को बेच देने आप के साथ क्रूरता का व्यवहार करने के लिए पुलिस में रिपोर्ट लिखाइये या फिर न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करिए। देर मत कीजिए।

टेलीकॉम कंपनी के विरुद्ध चीटिंग और कपट की शिकायत कहाँ करें?

TELECOM COMPANYसमस्या-
मुम्बई, महाराष्ट्र से भूपेन्द्र सिंह ने पूछा है –

मैं रिलायंस कम्पनी का 3जी इंटरनेट का पोस्टपेड उपभोक्ता हूँ। पहले मैं 10GB का प्लान इस्तेमाल करता था और जुलाई महीने में मैंने अपना प्लान बदल कर 1GB का करने का रिक्वेस्ट दिया था जो कि मेरे अगस्त बिलिंग साइकिल से प्रभावी होना था।  इस प्लान मासिक किराया 250 रुपये है। लेकिन इसे परन्तु रिलायंस कंपनी ने मेरा रिक्वेस्ट प्रोसेस नहीं किया जिसकी वजह से मेरा 10GB वाला ही प्लान एक्टिव रह गया जिसका मासिक रेंट 950 रूपया है। अब चूँकि मैंने अपना प्लान बदला था और मैंने बहुत ही इन्टरनेट का लिमिटेड इस्तेमाल किया जो कि तकरीबन 1.5 GB था, परन्तु कंपनी के द्वारा मेरा प्लान नहीं बदले जाने के कारण मुझे 10 GB के आधार पर ही बिल भेज दिया गया। जब मैं ने कंपनी से अपने बिल का विस्तृत विवरण माँगा तो कंपनी ने मुझे ईमेल के जरिये मेरा बिल मुझे भेज जिस में एक ही दिन में एक ही डाटा यूजेज को कई बार दिखाया गया है। 1.5 GB यूजेज को 5 GB दिखाया गया है। जब कि मैंने अपने इस्तेमाल को चेक किया तो यह मात्र 1.5 GB ही है। जब मैंने इसकी शिकायत कंपनी को ईमेल के द्वारा और कस्टमर केयर पर फ़ोन करके दी तो कंपनी ने अपनी गलती मानने के बजाय उलटा मुझे ही ज्यादा इस्तेमाल करने का दोषी ठहराया और बिल प्लान को सही ठहराया। अब मैं अपने आप को ठगा हुआ और अपमानित महसूस कर रहा हूँ। मैं रिलायंस कंपनी के खिलाफ फ्रॉड और चीटिंग का केस करना चाहता हूँ। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें कि मुझे क्या करना चाहिए और कैसे और कहाँ मैं कंपनी के खिलाफ क्या करवाई कर सकता हूँ?

समाधान-

स मामले में रिलायंस ने आप के साथ पहले तो यह उपभोक्ता सेवा में त्रुटि की कि आप के अनुरोध पर भी उन्हों ने समय पर आप के प्लान को संशोधित नहीं किया। इस कारण से उपभोक्ता की सेवा में कमी का उपभोक्ता विवाद बनता है जिस की आप उपभोक्ता समस्या निवारण फोरम के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं।

स के बाद आप का कहना है कि उन्हों ने आप के यूसेज को फर्जी तरीके से बढ़ा कर दिखाया। इस तरह उन्हों ने आप को फर्जी बिल दिया और चीटिंग की। यह दोनों कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 468, 420 एवं 424 के अन्तर्गत अपराध हैं। ये तीनों अपराध संज्ञेय व अजमानतीय हैं और इन अपराधों में पुलिस कार्यवाही कर सकती है अपराधी को गिरफ्तार भी कर सकती है। यदि आप अपने दस्तावेजों तथा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड से यह साबित कर सकते हों कि कंपनी ने जो बिल और यूसेज दिखाया है वह फर्जी है तो आप अपने क्षेत्र के पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं। यदि पुलिस जाँच के बाद पाती है कि अपराध घटित हुआ है तो वह प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर के अन्वेषण आरंभ कर सकती है और अपराध प्रमाणित पाए जाने पर अपराधियों को गिरफ्तार कर के उन के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर सकती है।

दि पुलिस आप की शिकायत को लेने से इन्कार करे या उस पर एफआईआर दर्ज करने से इन्कार करे तो यह शिकायत आप उस पुलिस थाना पर अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं जहाँ आप अपने बयान और दस्तावेजी साक्ष्य से यह सिद्ध कर सकते हैं कि अपराध घटित हुआ है तो न्यायालय उस पर प्रसंज्ञान ले सकता है अथवा मामले को अन्वेषण के लिए संबंधित पुलिस थाना को प्रेषित कर सकता है।

ज कल कुछ ब्रांडों के विरुद्ध कुछ संस्थाएँ भी कार्यवाही करने का काम करती हैं इन में से एक कम्प्लेण्ट बॉक्स डॉट इन है। आप चाहें तो यहाँ भी ऑन लाइन शिकायत डाल सकते हैं।

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