Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Mutation Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक नामान्तरण न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

किराएदारी की लंबी अवधि से किराएदार को कोई अधिकार नहीं मिलता।

Shopsसमस्या-

शैलेंदर तोमर ने सुन्दरवाला पोस्ट रायपुर, देहरादून, उत्तराखंड से समस्या भेजी है कि-

मारे पास 5/5 की एक चाय की दुकान मोहल्ला अफगानान स्टेशन रोड धामपुर जिला बिजनोर में 35 साल से है। दुकान मालिक दुकान खाली करवाना चाहता है। जिस पर हम 2 बार और दूकान मालिक 1 बार जीत चुके हैं।यह केस अभी हाईकोर्ट में लंबित है। मेरा सवाल यह है कि हमें दूकान का मालिकाना हक़ कैसे मिल सकता है? जबकि हमारे पास कुछ सबूत है जिस से हम यह साबित कर सकते हैं कि हम 35 साल से किरायेदार हैं। दूसरा सवाल यह है कि दुकान की छत टिन शेड की है क्या हम उस को किसी तरीके से लिंटर की करवा सकते है या नहीं?

समाधान-

म अनेक बार तीसरा खंबा पर बता चुके हैं कि कोई भी किराएदार कभी भी, कितने भी वर्ष तक किराए पर रहे वह मकान या दुकान का स्वामी नहीं होगा। किसी भी संपत्ति का स्वामित्व केवल स्वामित्व हस्तान्तरण विलेख से ही सम्भव हो सकता है। इस दुकान के स्वामी आप तभी हो सकते हैं जब दुकान का स्वामी आप को अपनी संपत्ति बेच दे और उस का विक्रय पत्र आप के नाम पंजीकृत करवा दे। आप अपने दुकान मालिक से बात करिए और कहिए कि वह दुकान आप को विक्रय कर दे। यदि संभव हो तो उसे खरीद लें। 35 वर्ष ही क्या 100 वर्ष तक भी किराएदार रहने से उस को दुकान का स्वामी होने का अधिकार नहीं मिलता।

ब तक आप उक्त दुकान के स्वामी नहीं हो जाते तब तक आप अपनी दुकान की टीन शेड की छत को पक्का नहीं करवा सकते। यह मेटेरियल आल्टरेशन होगा और इस तरह दुकान के स्वामी को आप से दुकान खाली कराने का एक और अतिरिक्त आधार मिल जाएगा। इस दुकान की छत भी आप तभी पक्की करवा सकते हैं जब आप उक्त दुकान के स्वामी हो जाएँ या दुकान के स्वामी ने ऐसा करने की आप को लिखित अनुमति दे दी हो।

किराएदार को बकाया किराया चुकाने का नोटिस दें।

for Rentसमस्या-
कमल डीडवानिया ने जयपुर, राजस्थान से पूछा है-

मेरे फ्लैट पर एक किराएदार रहता था जो 10 दिन पहले खाली कर के चला गया था।  वो मेरे 22000 रुपए किराए के बकाया छोड़ के गया था, जो कि उस ने अभी तक नहीं दिए। अभी 1 फरवरी को वो अपने पंखे जो कि मकान में लगे हुए रह गये थे लेने आया था। पंखे लेने उस के घर से तीन महिलाएँ आयी थीं। तो हम ने मना कर दिया और कहा कि कम से कम बिजली पानी के पैसे तो दे दे। वो इस पर मेरे घर के बाहर गाली गलौच करने लग गयी और मेरे छोटे बेटे से लड़ने लग गयीं। मामला हाथापाई पे आ पहुँचा और मारपीट भी हो गयी। मामला पुलिस तक भी चला गया। मुझे और मेरे बेटे को पूरी रात वहीं रखा गया, अगले दिन कोर्ट से जमानत मिल गयी। पुलिस ने मामला शांति भंग का दर्ज़ किया था।  अब वे पुलिस में कह रहे हैं कि इन्हों ने घर का ताला तोड़ दिया और हमारा बक्सा अलमारी और कीमती सामान ले लिए, धमकी दे रहे हैं और अब पुलिस मुख्यालय में भी शिकायत कर के परेशान कर रहे हैं। जबकि हमने ऐसा कुछ किया ही नहीं। बल्कि उनकी आर्थिक हालत देख कर उन से किराया भी नहीं लिया। अब हमें समझ नहीं आ रहा रहा है कि क्या किया जाए?

समाधान-

कोई व्यक्ति झूठ बोले और झूठी शिकायत करे तो उसे पकड़ा या रोका नहीं जा सकता। आप को पुलिस के सामने अपनी बात रखनी चाहिए और अपने पक्ष के गवाह भी पेश करने चाहिए। यदि पुलिस वाले आप से संतुष्ट हो जाएंगे तो शिकायत को समाप्त कर देंगे।

प का आप के किराएदार पर 22000/- रुपया बकाया है। यदि यह पिछले तीन वर्ष या उस से कम अवधि के किराए की राशि है तो आप को तुरन्त किसी वकील से संपर्क कर के एक लीगल नोटिस किराएदार को दिलाना चाहिए। इस नोटिस में यह कहना चाहिए कि उस ने बिना बकाया किराया व पानी बिजली खर्च अदा किए ही दिनांक –.01.2014 को मकान खाली कर दिया है। पंखे लगे हुए छोड़ गया था जिन्हें लेने के लिए उस ने जानबूझ कर महिलाओं को भेजा। जब उन से बकाया किराए और पानी बिजली खर्च का भुगतान करने का तकाजा करने पर झगड़ा किया और पुलिस थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाई और अब झूठी शिकायतें पुलिस को कर रहा है। वह 30 दिन की अवधि में बकाया किराया व पानी बिजली के खर्च की राशि आप के बैंक खाते में जमा कर दे और मकान को खाली करने की रसीद दे दे। अन्यथा स्थिति में यह समझा जाएगा कि अब भी मकान का वह पोर्शन उस के पास है और किराया जारी रहेगा।। नोटिस में अपना बैंक, शाखा और खाता नं. अवश्य बता दें।

हो सकता है इस नोटिस के बाद किराएदार आप के साथ समझौते पर उतर आए। यदि वह समझौते पर नहीं आता है तो आप उस के विरुद्ध आवश्यकता के अनुसार बकाया किराया, पानी बिजली खर्च का तथा मकान का कब्जा प्राप्त करने का आवेदन किराया अधिकरण में प्रस्तुत कर सकते हैं।

कानूनी आधारों पर ही किराएदार से मकान खाली कराया जा सकता है . . .

house lockedसमस्या-
जबलपुर, मध्यप्रदेश से रिकी ने पूछा है –

मेरा एक किराएदार नौ माह से मकान पर ताला लगा कर कहीं चला गया है और वह फोन भी नहीं उठा रहा है। मकान का किराया 4000 रुपए प्रतिमाह है। वह मेरे बैंक खाते में कभी 1500 रुपए तो कभी 2000 रुपए डाल देता है। मुझे मकान खाली करवाना है, मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

किसी भी नगरीय क्षेत्र में किसी किराएदार से मकान केवल किराया नियंत्रण कानून में उपलब्ध आधारों पर ही खाली कराया जा सकता है। उस के लिए भी आप को न्यायालय में वाद प्रस्तुत करना होगा। यह वाद उचित आधारों पर आधारित हो तथा आप साक्ष्य के द्वारा उन आधारों को साबित कर दें तो मकान खाली करने की डिक्री आप के पक्ष में पारित की जा सकती है। तब आप डिक्री का निष्पादन करवा कर मकान खाली करवा सकते हैं।

प का किराएदार पिछले नौ माह से मकान को बंद कर के गायब है। इस तरह उस ने छह माह से अधिक समय से मकान का उपयोग नहीं किया है। यह मकान को खाली कराने का आधार हो सकता है। वह नियमित किराया नहीं दे रहा है। यदि छह माह से अधिक का किराया उस ने अदा नहीं किया है तो उस ने किराया अदा करने में चूक भी की है यह दूसरा आधार हो सकता है।

प किरायेदार के विरुद्ध मकान खाली कराने का वाद प्रस्तुत कर दें। लेकिन उसे समन तामील कराने में परेशानी आएगी। यदि उस का वर्तमान पता हो तो आप वहाँ उसे समन तामील करवा सकते हैं। अन्यथा उस का पता न लग पाने की स्थिति में प्रतिस्थापित तामील समाचार पत्र में प्रकाशन के माध्यम से करवा सकते हैं। तामील के बाद भी वह उपस्थित न हो तो एक तरफा कार्यवाही कर के वाद को डिक्री करवा सकते हैं तथा डिक्री की अनुपालना में मकान खाली करवा कर उस का कब्जा प्राप्त कर सकते हैं।

ह सब करने के लिए आप को किसी स्थानीय वकील की सहायता लेनी होगी। जो वकील किराएदारी के मुकदमे लड़ता हो उस से आप को संपर्क करना चाहिए। यदि आप किसी वकील से परिचित न हों तो जबलपुर में आप श्री राजेन्द्र जैन एडवोकेट, बी-2, समदरिया रेजीडेन्सी, पेट्रोल पम्प के पास, ब्योहार बाग, जबलपुर से संपर्क कर सकते हैं।

परिसर खाली कराने का कारण उत्पन्न हुए बिना नोटिस देने का कोई लाभ नहीं . . .

for Rentसमस्या-

भोपाल, मध्यप्रदेश से राम हर्ष पटेल पूछते हैं –

मेरे यहाँ एक किरायेदार हैं। जिन्हों ने जिला अभियोजन अधिकारी की नेम प्लेट लगा रखी है।  शुरू में जब कमरे की बात हुई थी तब उनकी छोटी बहनें आई थीं।  मैने एग्रीमेंट, किराया, आई डी आदि की शर्तें रख दी थी लेकिन मैं ड्यूटी चला गया और इन्हों ने कमरे में समान रख लिया।  जब एग्रीमेंट की बात की तो टालते गये। इस बीच संबंधों में कोई बुराई नहीं आई जो अब तक जारी है। उनकी उम्र लगभग 33 साल है। बहनें जबलपुर शिफ्ट हो गयी अपनी पढ़ाई के संबंध में।  लेकिन किराया देने में आदतन चूक करते हैं। जो में पर्ची देता हूँ उस में मेरे साइन मांगते हैं लेकिन जब मैं अपने रजिस्टर में उनके साइन मांगता हूँ तो कहते हैं इसकी क्या ज़रूरत है। कभी भी मकान के संबंध में बात करता हूँ तो बोल देते हैं की बहन से पूछूंगा या पापा से पूछूंगा, और ऐसा बिहेव करते हैं कि जैसे कुछ जानते ही नहीं। शांत पागल जैसे चुप हो जाते हैं। कभी-कभी मुझे लगता है कि मेंटल हैं।  लेकिन ज्यों ही मैं उन से चैक देने की बात करता हूँ तो कहते हैं कि 1-2 दिन में किराया दे दूँगा। तब मेरी राय बदल जाती है कि मेंटल नही हैं। कभी-कभी अचानक मकान से चले जाते हैं और गाँव पहुँच जाते हैं। फोन रिसीव नहीं करते हैं। ड्यूटी में भी लापरवाही करते हैं। सबसे बड़ी समस्या ये है कि इनका कोई संबंधी भोपाल में नहीं है जिसे मैं जानता। जब भी मैं कुछ बोलता हूँ तो पैसे की कमी का बहाना बनाते हैं और बाद में तीन महीने तक का किराया एक साथ दे देते हैं। इनकी मासूमियत और लापरवाही से में चिंतित हो जाता हूँ कि कोई साजिश तो नहीं है। अभी ये घर गये तो मोटरसाइकल पार्क करके रीवाँ चले गये। लौट कर आए तो मोटर सायकिल नहीं मिली। अब पता चल रहा है कि हनुमानगंज थाना भोपाल में हैं। लेकिन इन्होने अभी तक कोई उचित कार्यवाही मोटरसाइकल प्राप्त करने के लिए नहीं की।  इस प्रकार की आदत बनाए हुए हैं। मकान में किसी से कोई बातचीत नहीं, घर से ऑफिस-ऑफिस से घर। कुछ भी पूछो तो कोई जवाब नहीं यहाँ तक कि नाम पता, जन्मतिथि भी नही बताते हैं, कहते हैं कि पापा से पूछकर बताऊंगा। इनको रहते हुए साल भर हो गया। मैं कहता हूँ कि कहीं छोटा कमरा ले लो तो टाल जाते हैं।  आज रजिस्टर में साइन कर दिए हैं। क्या मैं खाली करवाने का लिखित नोटिस दे सकता हूँ या 11 महीने का एग्रीमेंट करवाकर आगे देखूँ?

समाधान-

भी तक किराएदारी के संदर्भ में आप के किराएदार ने ऐसी कोई समस्या उत्पन्न नहीं की है जिस के कारण आप के पास उस से मकान खाली कराने का कोई अधिकार उत्पन्न हुआ हो।  इस कारण से आप के द्वारा मकान खाली करा सकना संभव नहीं है। यदि मकान खाली करा सकना संभव नहीं है तो खाली कराने के नोटिस से कुछ नहीं होगा। इस से तो अच्छा है कि आप उस से मौखिक रूप से कहते रहें जब वे मकान खाली कर दें करा लें।

दि आप दोनों के बीच आज तक कोई किरायानामा नहीं लिखा गया है, तो लिखवा लें। क्यों कि किरायानामा इस बात का सबूत होता है कि वह आप के किराएदार की हैसियत से वहाँ रहता है, किराए की राशि क्या है? किराए पर मकान का कितना और कौन सा हिस्सा दिया गया है? किस उद्देश्य के लिए परिसर किराए पर दिया गया है? बाकी सब चीजें इतनी कानूनी हैं कि उन के लिए किरायेनामे का कोई महत्व नहीं है।

दि किराएदार किराया अदायगी में चूक करे और छह माह से अधिक का किराया बकाया हो जाए, या किराया कानून में वर्णित कोई अन्य कारण पैदा हो जाए तो आप मकान खाली कराने का नोटिस दे सकते हैं और खाली कराने के लिए न्यायालय के समक्ष कार्यवाही कर सकते हैं।

अपंजीकृत किरायेनामे से उत्पन्न किराएदारी मासिक है।

समस्या-

eviction of houseसागर, मध्य प्रदेश से राजू ने पूछा है-

म ने 1 अगस्त 2013 को एक हाल 11 माह के लिए किराए पर दिया था किन्तु 1 माह बाद ही किराएदार कहने लगा कि मेरे लिए किराया अधिक है, इसलिए इस माह मैं हाल खाली कर दूंगा। क्या यह उचित है। जब कि हम ने 11 माह का एग्रीमेंट किया था।

समाधान-

क्या आप जानते हैं कि आप ने ग्यारह माह की ही किराएदारी का एग्रीमेंट क्यों किया था? निश्चित रूप से नहीं जानते। यह इसलिए है कि इस से अधिक की कोई भी किराएदारी हो उस के एग्रीमेंट को उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत कराना पड़ता है तथा किराए की राशि के हिसाब से स्टाम्प ड्यूटी अदा करनी होती है। एक वर्ष से कम की किराएदारी यदि उत्पादन प्रक्रिया या कृषि से संबंधित न हो तो वह मासिक किराएदारी होती है, जो हर माह आरंभ होती है और माह के समाप्त होने के साथ ही समाप्त हो जाती है।

स तरह आप के और किराएदार के मध्य जो किराएदारी है वह मासिक है। इस किराएदारी को कोई भी किराएदार पन्द्रह दिन का नोटिस दे कर समाप्त कर सकता है। आप सिर्फ उस से चालू माह का किराया ले सकते हैं। इस तरह किराएदार द्वारा किराएदारी समाप्त करना उचित है।

मकान मालिक द्वारा मकान बेचने पर किराएदार को कोई पूर्व-क्रयाधिकार नहीं होता।

eviction of houseसमस्या-

जबलपुर, मध्य प्रदेश से मोहनलाल ने पूछा है –

मेरे पिता जी ने वर्ष 1979 में एक किराये का मकान लिया था और विधिवत वो उसका किराया मनीआर्डर से देते रहे।  मकान मालिक व हमारे बीच कोई एग्रीमेंट किरायेनामे को लेकर कभी नहीं हुआ। वर्ष 2000 में मेरे पिता जी का देहांत होने के बाद किराया माता जी के नाम से दिया जाता रहा।  इस बीच मेरे मकान मालिक ने मकान के बिक्रीनामा का एग्रीमेंट शहर के एक अन्य व्यक्ति के साथ कर लिया।  मकान के प्लाट पर दो किराये के मकान थे जिस में एक पर दूसरे व्यक्ति जिस से हमारे मकान मालिक ने बिक्री नामा का एग्रीमेंट किया था कब्जा कर लिया । एक मकान पर हमारा परिवार रहता रहा और मकान का किराया हमारे मकान मालिक लेते रहे।  इस बीच वर्ष 2010 में मेरी माता जी का देहांत हो गया मकान का किराया मेरे द्वारा मकान मालिक को मनीआर्डर के माध्यम से दिया जाता रहा और वे उसेलेते रहे। अभी माह जून में भेजे गए किराये को मेरे मकान मालिक द्वारा वापस कर दिया गया और मनीआर्डर वापस आ गया।  मेरे मकान मालिक ने अभी तक मकान का केवल बिक्री एग्रीमेंट की है मकान की रजिस्ट्री अभी तक नहीं हुई है ।  मैं इस मकान को लेना चाहता हूँ तो मुझे क्या करना होगा? मैं ने अपने मकान मालिक से बात की थी तो उनका कहना था की हम ने तो मकान बेच दिया है अब आप जिसे मकान बेचा है उससे बात करें। उस व्यक्ति का कहना है कि मै आप को मकान नहीं दूंगा।  मेरे मकान मालिक ने आज तक मुझे कोई नोटिस नहीं दिया है। वे केवल मौखिक रूप से मकान खाली करने को कह रहे हैं उनका कहना है कि हमने अब यह मकान बेच दिया है।  मैं आप से सलाह चाहता हू कि इस स्थिति में मकान मुझे खरीदना हो तो क्या करना होगा?  क्या मुझे मकान के बिक्री पर रोक लगाने का अधिकार है?  क्या मैं मकान मालिक द्वारा किये गए एग्रीमेंट को निरस्त करवा सकता हूँ।  क़ानूनी रूप से मेरे क्या अधिकार है?

समाधान-

प के मकान मालिक मकान को खाली करने को कह रहे हैं। लेकिन मकान खाली कराने के लिए मकान बेच देना कोई कानूनी आधार नहीं है। वैसे भी उस ने मकान बेचने की संविदा कर ली है तो वह अब मकान खाली करने को नहीं कह सकता। हाँ, जिस व्यक्ति ने  मकान खरीदा है वह विक्रय पत्र का पंजीयन कराने के उपरान्त आप को अन्य किसी आधार पर मकान खाली करने को कह सकता है।

प के मकान मालिक ने किराया मनिआर्डर से लेना बंद कर दिया है तो आप न्यायालय में आवेदन कर के किराया न्यायालय में जमा करवाना आरम्भ कर दें। अन्यथा आप किराया अदायगी में चूक कर बैठेंगे और मकान मालिक के पास मकान खाली कराने का एक कानूनी आधार उत्पन्न हो जाएगा।

किराएदार को ऐसा कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होता जिस से मकान मालिक के मकान विक्रय कर देने पर वह मकान उसे बेचने को बाध्य कर सकता हो। पूर्वक्रयाधिकार की विधि मौजूद तो है लेकिन यह विधि केवल उन्हीं पड़ौसी सम्पत्तियों के स्वामियों को उपलब्ध है जिन के किसी प्रकार के हित बेची जाने वाली अचल संपत्ति से सम्बद्ध हों। जैसे मकान की कोई कॉमन दीवार, छत या मार्ग हो या खिड़की उस संपत्ति में खुलती हो। आप को उस मकान को क्रय करने का कोई पूर्वाधिकार नहीं है।

क्या मकान मालिक की अनुमति के बिना दुकान में हो रहा व्यवसाय बदला जा सकता है?

समस्या-

बीकानेर, राजस्थान से विमल शर्मा ने पूछा है-

मारे पास एक दूकान 35 साल से किराये पर है हम अब अपना काम बदलना चाहते हैं। क्या हमें दुकान मालिक मलिक से अनुमति प्राप्त करनी होगी?

समाधान-

clothshopप ने अपनी समस्या में केवल एक तथ्य बताया है कि आप 35 वर्ष से किसी परिसर (दुकान) में किराए पर हैं और परिसर में व्यवसाय कर रहे हैं।  आप ने अन्य तथ्य नहीं बताए हैं, जैसे आप वर्तमान में उक्त परिसर में क्या व्यवसाय कर रहे हैं और उसे बदल कर क्या व्यवसाय करना चाहते हैं? आप ने यह भी नहीं बताया कि 35 वर्ष पहले जब दुकान किराए पर ली गई थी तब या उस के बाद अब तक कोई किरायानामा लिखा गया था या नहीं? यदि कभी कोई किरायानामा लिखा गया था तो उस में या एक से अधिक लिखे गए थे तो अंतिम किराएनामे में इस तरह की कोई शर्त है या नहीं जिस से आप को उस परिसर में केवल मात्र कोई एक विशेष प्रकार का अथवा कुछ विशेष प्रकार के व्यवसाय करने के लिए लिए ही परिसर किराए पर दिया गया हो तथा अन्य किसी प्रकार का व्यवसाय करने पर प्रतिबंध लगाया गया हो? इस तरह इन सूचनाओं के अभाव में आप को कोई मुकम्मल विधिक राय दिया जाना संभव नहीं है।

र्तमान में राजस्थान में राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 दिनांक 1 अप्रेल 2003 से प्रभावी है।  इस अधिनियम में इस तरह का कोई प्रतिबंध किरायेदार पर नहीं लगाया है कि किराए पर लिए गए परिसर का उपयोग वर्तमान उपयोग से भिन्न प्रयोजन के लिए उपयोग नहीं कर सके। लेकिन इस अधिनियम की धारा 9 (घ) में यह उपबंधित किया गया है कि यदि किराएदार ने ऐसा कोई न्यूसेंस पैदा किया हो या ऐसा कोई कार्य किया हो जो उस प्रयोजन से असंगत हो जिस के लिए उस परिसर को किराए पर दिया गया था या जिस के कारण भू-स्वामी के हित पर प्रतिकूलतः और सारतः प्रभाव पड़ता हो तो ऐसे कारण से भू-स्वामी अपना परिसर खाली करवाने का अधिकारी होगा।

Sweetsshopदि आप के व भू-स्वामी के मध्य किसी तरह का कोई किरायानामा लिखा गया हो और उस में यह शर्त हो कि आप उस परिसर में केवल मात्र कोई एक विशेष प्रकार का अथवा कुछ विशेष प्रकार के व्यवसाय ही कर सकते हैं, और आप उस व्यवसाय अथवा उन व्यवसायों के अतिरिक्त कोई अन्य व्यवासाय के लिए उस दुकान का उपयोग करने वाले हैं तो आप को व्यवसाय बदलने के पहले भू-स्वामी से लिखित अनुमति प्राप्त करनी होगी। यदि आप के बीच कोई कोई किरायानामा नहीं लिखा गया है तो आप उस परिसर में कोई भी व्यवसाय करने को स्वतंत्र हैं।

लेकिन किराएनामे पर कोई भी व्यवसाय करने की छूट मिली होने के बाद भी आप उस में कोई ऐसा व्यवसाय या काम नहीं कर सकते जिस से न्यूसेंस उत्पन्न होता हो या उस काम को करने से भू-स्वामी के हितों पर सारतः या प्रतिकूलतः प्रभाव पड़ता हो।

मारी राय में आप को दुकान में व्यवसाय बदलने के पहले अपने नगर के किसी वरिष्ठ दीवानी मामलों के वकील से राय करनी चाहिए।  उस की राय के उपरान्त ही आप को व्यवसाय बदलने के बारे में सोचना और निर्णय करना चाहिए।

बिना वैध कारण के मकान मालिक किराएदार से दुकान खाली नहीं करवा सकता

समस्या-

भरतपुर, राजस्थान से गुरदीप सिंह ने पूछा है-

मेरे पापा ने 1986 में एक होटल खोली थी जो आज भी चालू है। पापा का 2005 में देहान्त हो गया है। मैं उन का बड़ा बेटा हूँ। उस समय मेरी उम्र 14 वर्ष थी। मुझ से बड़ी 5 बहिनें हैं। चार की शादी हो चुकी है एक की शादी करवानी ह। मैं ने दुकान मालिक से तीन साल का समय और मांगा है दुकान चलाने के लिए लेकिन वह मान नहीं रहा है। इस के सिवा मेरा कोई रोजगार नहीं है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

दि किसी व्यवसाय के स्वामी का पुत्र खुद उस व्यवसाय को कर रहा है जिसे अपने जीवनकाल में स्वयं व्यवसाय का स्वामी कर रहा था तो पुत्र भी उसी तरह किराएदार है जिस तरह दिवंगत व्यवसाय का स्वामी था।

कोई भी दुकान का मालिक बिना किसी ऐसे कारण से जिस का उल्लेख राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम में दिया गया है अपने किराएदार से दुकान खाली नहीं करवा सकता। इस कारण आप से दुकान खाली करवाने का कोई वैध और कानूनी कारण न होने पर आप का दुकान मालिक आप से दुकान खाली नहीं करवा सकता।

प दुकान मालिक को कह सकते हैं कि जब आप को उचित दुकान किराए पर मिल जाएगी तब आप दुकान खाली कर देंगे, आप दुकान तलाश कर रहे हैं। यदि दुकान मालिक फिर भी दुकान खाली करने को कहता है तो आप लगातार कह सकते हैं कि दुकान तलाश रहा हूँ।  दुकान मालिक के पास दुकान को खाली कराने का एक मात्र मार्ग अदालत में दुकान को खाली करने का आवेदन करना है जिस के लिए उस के पास कोई वैध कारण उपलब्ध होना प्रतीत नहीं हो रहा है। इस कारण अदालत भी उस के आवेदन पर दुकान खाली करने का आदेश नहीं देगी।

दि दुकान मालिक के पास दुकान को खाली कराने का कोई वैध कारण उपलब्ध हो भी तो अदालत में कार्यवाही चलने में दो-तीन वर्ष लगना आम बात है। यदि अदालत दुकान खाली करने का प्रमाण पत्र जारी भी कर दे तो भी आप उस की अपील कर सकते हैं जिस में दो-तीन वर्ष और लग जाएंगे। इस तरह आप चार-पाँच वर्ष का समय निकाल सकते हैं। आप को तो केवल तीन वर्ष का समय चाहिए। तब तक आप अपनी वैकल्पिक व्यवस्था कर लें।

दि दुकान मालिक आप को तंग करे या गैरकानूनी तरीका दुकान खाली कराने के लिए कराए तो आप पुलिस में उस की रिपोर्ट कर सकते हैं तथा दुकान को कानूनी तरीके के अलावा खाली न कराने व आप के व्यवसाय में बाधा न डालने के लिए स्थाई निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर सकते हैं और तत्काल अस्थाई निषेधाज्ञा दुकान मालिक के विरुद्ध पारित करवा सकते हैं।

नगरों में किराएदारों से परिसर नगरीय किराया नियंत्रण कानूनों में उपलब्ध आधारों पर ही खाली कराए जा सकते हैं

समस्या-

मेरा एक फ्लेट है जिसको 11 महीने के एग्रीमेंट के साथ किराये पर दिया गया है।  यदि किरायेदार का चाल-चलन ठीक रहता है,  तो क्या 11 महीने बाद उसी किरायेदार को नये इकरानामा पर दिया जा सकता है।  ऐसी स्थिति में किरायेदारी की मियाद कुल समय सीमा से मानी जायेगी या नई इकरारनामा की समय सीमा से।  साथ ही इकरारनामा के लिए कितने रुपये का स्टाम्प पेपर जरूरी होता है।

-अजित कुमार मिश्रा, कानपुर, उत्तर प्रदेश

समाधान-

प के प्रश्न से प्रतीत होता है कि आप का यह फ्लेट कानपुर के नगरीय क्षेत्र में स्थित है।  कानपुर के नगरीय क्षेत्र में उत्तर प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम  प्रभावी है।  जहाँ भी किराया नियंत्रण अधिनियम प्रभावी हैं वहाँ किराएदारी के इकरारनामे (किरायानामा) का अधिक महत्व नहीं रहता है।  इस का महत्व केवल कुछ तथ्यों का सबूत भर होने तक का रह जाता है।  जैसे मकान मालिक और किराएदार के बीच ऐसा सम्बन्ध है, किराएदारी किसी निश्चित तिथि को आरंभ हुई थी और उस का किराया क्या तय हुआ था? किराएनामे में यह शर्त हो कि किराएदार किसी परिसर का इकरारनामे में अंकित उपयोग के अतिरिक्त अन्य उपयोग नहीं करेगा तो किराएदार को वैसा उपयोग करने से रोका जा सकता है।

हाँ भी नगरीय किराया नियंत्रण अधिनियम प्रभावी हैं वहाँ एक बार किराए पर दिया गया परिसर केवल उस अधिनियम में वर्णित आधारों के उपलब्ध होने से ही खाली कराया जा सकता है।  किराएदारी की अवधि समाप्त होने या किरायानामा में अंकित किसी अन्य शर्त के कारण परिसर खाली कराया जाना संभव नहीं है।  हाँ यदि किराएदार स्वयं ही परिसर खाली करना चाहे तो उस में कोई बाधा नहीं है।  यदि कभी भविष्य में आप  परिसर खाली कराना चाहेंगे और किराएदार परिसर को खाली न करे तो आप को भी उत्तर प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम में वर्णित आधारों पर ही खाली करा सकेंगे।  इन आधारों को जानने के लिए आप किसी भी विधि पुस्तक विक्रय करने वाले पुस्तक विक्रेता से उत्तर प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम का बेयर एक्ट खरीद लें आपको उस में सभी आधारों की जानकारी हो जाएगी।  यहाँ इस स्थान पर सारे आधारों को बता पाना संभव नहीं है।

स तरह किराएदारी की कोई समय सीमा नहीं है।  आप किराएनामे के स्टाम्प के लिए आप के यहाँ के किसी भी स्टाम्प वेंडर से पूछ लें वह बता देगा।  हर राज्य में स्टाम्प ड्यूटी अलग अलग है।

बिजली का कनेक्शन जिस के नाम है बकाया राशि का भुगतान भी उसी को करना होगा

समस्या-

मेरे पिताजी ने दुकान किराए पर दी थी।  जिसे किराएदार ने किसी और को आगे किराए पर दे दिया।  हम ने दुकान तो कोर्ट केस कर के खाली करवा ली।  लेकिन उस दुकान पर बिजली का बिल बकाया था।  जिस का हमें कुर्की का नोटिस आ रहा है।  बिजली कंपनी कहती है कि ये आप को भुगतान करना है।  आप बताएँ कि हम क्या कर सकते हैं?

-गुरविंदर सिंह, कोटा, राजस्थान

समाधान-

मुझे लगता है कि आप की समस्या यह है कि दुकान में बिजली का कनेक्शन आप ने लिया था और किराएदार को किराए पर परिसर देते समय आप ने उस के साथ जो कंट्रेक्ट किया उस में यह शर्त रख दी कि बिजली के बिलों का भुगतान वह स्वयं करेगा।  लेकिन किराएदार ने बिजली के बिलों का भुगतान नहीं किया और अब कंपनी आप से बिलों की बकाया राशि का भुगतान मांग रही है।

दि स्थिति ऐसी ही है कि आप की दुकान में कनेक्शन आप के नाम था तो बिजली कंपनी ने कनेक्शन आप को दिया था और बिजली कंपनी की संविदा आप के साथ थी।  ऐसी स्थिति में बिजली कंपनी आप के किराएदार को नहीं जानती थी।  वह तो आप को ही बिजली सप्लाई कर रही थी।  उस कनेक्शन के बिलों के भुगतान की जिम्मेदारी भी आप की ही थी, आप को बिजली की बकाया राशि का भुगतान करना ही होगा।  आप उस भुगतान की जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।

लेकिन यदि बिजली का कनेक्शन आप के नाम न हो कर किराएदार के नाम था तो फिर बिजली कंपनी आप से बिजली के बकाया की राशि का भुगतान नहीं मांग सकती।   क्यों कि बिजली सप्लाई की संविदा किराएदार के साथ थी और बिजली के बकाया बिलों का भुगतान किराएदार ही करेगा।   आप पर उस का कोई दायित्व नहीं है।  आप उस दुकान में नया कनेक्शन ले सकते हैं।  यदि बिजली कंपनी नया कनेक्शन देने से इन्कार करती है तो इस के लिए न्यायालय से आदेश प्राप्त किया जा सकता है।  आप ने किराएदार के विरुद्ध दुकान को खाली कराने का मुकदमा जीता है और दुकान खाली कराई है।  इस काम के लिए आप ने अवश्य ही किसी वकील की सेवाएँ प्राप्त की होंगी।  आप को उन्हीं वकील से इस मामले में सलाह करनी चाहिए।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada