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चैक दाता की मृत्यु हो जाने पर चैक के आधार पर संक्षिप्त प्रक्रिया दीवानी वाद संस्थित किया जा सकता है।

समस्या-

देशराज सिहँ ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से पूछा है-

मैंने दिनांक 22.12.2017 को एक व्यक्ति को तीन लाख रुपये उधार दिये थे जो उसके बैंक खाते में ट्रांसफर किये थे (जिसका मेरे पास एक गवाह भी है) और उसने मुझे वापस भुगतान हेतु उसी बैंक खाते के तीन हस्ताक्षर युक्त पोस्टडेटेटेड चैक मार्च, 2019 के थे। परंतु दुर्भाग्यवश ब्रेन-हैमरेज हो जाने के कारण दिनांक 17.02.2019 को उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी है। हालांकि उसके घरवालों द्वारा मेरे रुपये चुकाने का आश्वासन दिया गया है। यदि उसके घरवाले अपनी बात से मुकर जाते हैं तब फिर मेरे लिये उपलब्ध उपचार बताये।

समाधान-

यदि किसी व्यक्ति ने किसी आर्थिक दायित्व के निर्वहन के लिए आपको चैक दिए हों तो सब से पहले यही बात आप के दिमाग में आती है कि यदि चैक अनादरित (डिसऑनर) हुए तो उसे नोटिस दे कर धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम की कार्यवाही करने से चैक की राशि मिल जाएगी और हर्जाने के बतौर कुछ लाभ भी मिल जाएगा। लेकिन किसी को भी उधार दिए गए धन को वापस प्राप्त करने का यह तरीका नहीं है। उधार दिए गए धन या किसी की ओर किसी भी रूप में प्राप्त किए जाने वाले धन की वसूली के लिए सब से बेहतरीन उपाय दीवानी वाद संस्थित करना ही है। यदि आप को चैक प्रदान करने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो गयी है तो आप चैक देने वाले के उत्तराधिकारियों के विरुद्ध धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम की कार्यवाही तो नहीं कर सकते लेकिन दीवानी वाद कर सकते हैं।

एक चैक परक्राम्य विलेख अधिनियम के अंतर्गत परक्राम्य विलेख है। इस के साथ ही इस अधिनियम की धारा 6 के अनुसार यह बिल ऑफ एक्सचेंज भी है। एक बिल ऑफ एक्सचेंज के आधार पर दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 37 के अंतर्गत संक्षिप्त प्रक्रिया अपनाते हुए दीवानी वाद संस्थित किया जा सकता है। इस आदेश के अंतर्गत प्रस्तुत दावों की प्रक्रिया संक्षिप्त होने के कारण इन दावों का निस्तारण शीघ्र होना संभव है और इस में प्रतिवादी के पास कोई खास प्रतिवाद भी नहीं होता है। बस अंतर यही है कि इस मामले में जितनी राशि के लिए आप दावा करते हैं उतनी राशि पर आप को कोर्ट फीस (न्यायशुल्क) दावे के साथ ही कोर्ट फीस स्टाम्प के रूप में देनी पड़ती है। आप यह दावा चैक पर अंकित तिथि से तीन वर्ष की अवधि पूर्ण होने के पहले कर सकते हैं। इस तरह आप प्रतिवादी को आपका बकाया धन चुकाने के लिए नोटिस दे कर पर्याप्त समय और अवसर भी दे सकते हैं।

 

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