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धारा-24 हिन्दू विवाह अधिनियम के आदेश के निष्पादन के लिए सीपीसी के आदेश 21 नियम 11(2) अंतर्गत लिखित आवेदन करें

समस्या-

ति ने झूठे आरोप लगा कर न्यायालय में तलाक की अर्जी लगा रखी थी। पति एक वर्ष में एक बार भी पेशी पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। पत्नी तलाक नहीं देना चाहती है। पत्नी ने धारा 24 हिन्दू विवाह अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन किया जिस में न्यायालय ने पत्नी और दो बच्चों के लिए 5000 रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्णय प्रदान किया। उस के बाद अंत में पति का तलाक का मुकदमा खारिज कर दिया। क्या पत्नी को तलाक का मुकदमा खारिज होने के दिन तक का खर्चा मिलेगा? अगर पति तब भी नहीं दे तो पत्नी क्या कर सकती है? यदि पति लापता हो तो क्या पत्नी अपने सास ससुर से खर्चा ले सकती है?

–    रानी आहूजा, लोहाघाट, उत्तराखण्ड

समाधान-

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-13 में तलाक की अर्जी तथा धारा-24 में मुकदमे के लंबित रहने के दौरान निर्वाह भत्ते के लिए अर्जी दोनों का अलग अलग अस्तित्व है। जहाँ धारा-24 में अर्जी मंजूर हो कर अंतरिम निर्वाह भत्ता तथा न्यायालय खर्च न्यायालय द्वारा निर्धारित कर दिया गया है धारा-13 की तलाक की अर्जी लंबित रहने के दौरान यह खर्चा पति को पत्नी और बच्चों को देना ही होगा। क्यों कि निर्वाह भत्ते और न्यायालय खर्च का आदेश अंतिम हो चुका है।

दि पति न्यायालय द्वारा आदेशित यह राशि पत्नी को अदा नहीं करती है तो पत्नी न्यायालय के समक्ष उक्त आदेश के निष्पादन के लिए आदेश 21 नियम 11(2)  सीपीसी के अंतर्गत लिखित आवेदन प्रस्तुत कर सकती है। न्यायालय उक्त आवेदन पर पति से उक्त राशि वसूल कर सकता है। पति के लापता होने पर भी उक्त राशि उस की संपत्ति से वसूल की जा सकती है।

ति के विरुद्ध किसी आदेश या डिक्री का निष्पादन पति के माता-पिता के विरुद्ध नहीं किया जा सकता। यदि कोई ऐसी संपत्ति हो जिस में पति का भी माता-पिता के साथ हिस्सा हो तो उस संपत्ति को कुर्क कर के न्यायालय उक्त राशि को वसूल कर पत्नी को दिला सकता है।

हाँ धारा 24 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत निर्वाह भत्ता केवल हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत किसी प्रकरण के न्यायालय के समक्ष लंबित रहने तक की अवधि के लिए ही दिलाया जा सकता है। पत्नी को चाहिए कि स्थाई निर्वाह भत्ते के लिए वह धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत न्यायालय को आवेदन करे। जिस में यह भी प्रावधान है कि निर्वाह भत्ते की राशि अदा नहीं करने पर पति को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा सकता है।

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