कब्जा Archive

मुकदमा जीतने के लिए वकील अनुभवी और जानकार हो

December 28, 2018 को वेबसाईट प्रशासक द्वारा लिखित

समस्या-

पंडित रानूकुमार ने महावीरपुरा झाँसी से पूछा है-

मेरे पिताजी के चाचा के नाम रजिस्टर्ड मकान पर लगभग 50 वर्षों से मेरे पिताजी का कब्जा है। मेरे पिताजी का निधन 2018 में हाल ही में हो गया। लेकिन सन 2017 में मेरे दादा जी के वारिसान ने मेरे पिताजी पर एक सिविल सूट फाइल कर दिया, जिसके नोटिस मेरे पिताजी ने तामील हो गए थे, लेकिन उसका जवाबदावा नहीं दिया था। अब उनकी मृत्यु के पश्चात हम लोगों ने अपना नाम नगर पालिका परिषद के अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है।  क्या नामांतरण किया जा सकता है, या नहीं? मेरे पिताजी का नाम नगर पालिका में अभिलेखों में दर्ज है, और नल, बिजली, गैस कनेक्शन इसी पते पर दर्ज हैं।  मेरे पास मकान से संबंधित किसी प्रकार के कागजात उपलब्ध नहीं हैं। मुकदमा में जीतने के लिए हमें क्या करना चाहिए? मेरे पिताजी के चाचा की वारिसान गुजरात में निवास करते हैं, हम लोगों के पास मकान से संबंधित कागजात नहीं है। आगे की कार्रवाई के लिए उचित मार्गदर्शन करें।

समाधान-

आप ने यह नहीं बताया कि आप के दादाजी के वारिसान ने किस आधार पर किस राहत के लिए सिविल सूट फाइल किया है। जब तक यह पता न हो तब तक क्या कुछ कहा जाए।  आप जानना चाहते हैं कि मुकदमे को जीतने के लिए क्या करना चाहिए तो इस सवाल का जवाब तब दिया जा सकता है जब पता है को मुकदमा किस बात का है।

यदि नगरपालिका के अभिलेख में आप के पिता का नाम उस के कब्जेदार/स्वामी के रूप में लिखा है तो नामांतरण हो जाएगा। बशर्ते कि कोई अन्य उस पर आपत्ति नहीं करे। वैसे नामान्तरण किसी संपत्ति के स्वामित्व का सबूत नहीं होता। इस कारण उस पर ज्यादा कंसंट्रेट करने की जरूरत नहीं है। बस इतना ध्यान दें कि किसी और के नाम से नामान्तरण न हो।

यदि मकान पिताजी के चाचाजी का है तो वे त आप के चाचाजी के वारिस तो नहीं थे। आप के पिता के पास कब्जा किसी खास रूप में नहीं था तो आप के पिताजी कह सकते हैं कि यह मकान चाचाजी ने  उन्हें देदिया था और अब आप के पिताजी का एडवर्स पजेशन है। केवल इसी आधार पर  ही उस संपत्ति के संबंध में आप के पिताजी के खिलाफ किया गया कोई भी मुकदमा खारिज हो सकता है। पिताजी का नाम नगर पालिका में अभिलेखों में दर्ज होना और नल, बिजली, गैस कनेक्शन इसी पते पर दर्ज होने से आप के पिताजी का उस संपत्ति पर  50 वर्षों का कब्जा  साबित हो ही जाएगा। जो मुकदमा आप के पिताजी के खिलाफ किया गया था उस में भी विधिक प्रतिनिधि /कायम मुकाम रिकार्ड पर लाने की जिम्मेदारी दावा करने वाले पक्ष की है। आप को उस की भी चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं है। जब समन मिलें तब अदालत मे हाजिर हों और अपना पक्ष रखें। सब से बड़ी बात यह कि आप अपना वकील अनुभवी और दीवानी मामलों का अच्छा जानकार रखें।

समस्या-

राहुल ने A-12 कोटला, मुबारकपुर, नई दिल्ली से पूछा है-

मेरे ताऊ मुझे मेरे मकान से हटा कर खुद कब्जा करना चाहते हैं। मेरे मकान की रजिस्ट्री नहीं है। मैं अपने मकान पर पिछले 32 सालों से रहता आ रहा हूँ। मेरे पास 1988 के गैस कनेक्शन की पासबुक है। जिस पर मेरा नाम और घर का पता लिखा हैं और 2012 के बिजली बिल, वोटर कार्ड आदि हैं। अभी मैं भी उसी पते पर रहता हूँ। मेरे ताऊ ने कुछ दिन पहले उस पर कब्जा करने की कोशिश की पर वो असफल रहे और उनके खिलाफ FIR हो गयी। जिसमें घर मे घुसने के धारायें लगी हैं। मैं उसने अपने मकान को बचने के लिए क्या करूँ?

समाधान-

आप मकान पर काबिज हैं और एक लंबे कब्जे के दस्तावेजी सबूत आप के पास हैं। जबरन कब्जा करने का आप के ताऊ का प्रयास असफल हो चुका है। ताऊ पर अपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो चुका है और चल रहा है। इस कारण आप अभी राहत में हैं। तुरन्त आप को कुछ भी करने की जरूरत नहीं है।

पहले से ही मकान पर कब्जा करने का अपराधिक मुकदमा चलते रहने के कारण यह तो साबित है ही कि कब्जा अभी आप के ताऊ का न हो कर आप का है। अब वे जबरन कब्जा करने की कोशिश नहीं करेंगे। करते हैं तो फिर से एक अपराधिक मुकदमा उन पर बन जाएगा।

फिर भी आप यदि सोचते हैं कि ताऊ किसी प्रकार से आप को मकान से बेकब्जा करने का प्रयत्न कर सकते हैं तो आप अपने ताऊ और अन्य व्यक्ति जिन से आप को ऐसा अंदेशा हो उन के विरुद्ध इस आशय स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दाखिल कर सकते हैं कि प्रतिवादीगण आप को बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए बेदखल न करें। इस वाद में ही अस्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र दाखिल कर अस्थायी निषेधाज्ञा आप प्राप्त कर सकते हैं।

प्रतिकूल कब्जे की संपत्ति को कैसे बचाएँ?

December 17, 2018 को वेबसाईट प्रशासक द्वारा लिखित

समस्या-

मुंकेश्वर सिंह ने तलाईकच्छर, जिला सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

साठ वर्षों घर और बाड़ी बना कर रह रहे हैं। हमारे पास जमीन का कोई दस्तावेज नहीं है। जमीन वाला जमीन बेचना चाह रहा है और तहमें हमारा घर और जमीन छोड़ने को कह रहा है। सरकारी आवास भी बना हुआ है। क्या हमें घर छोड़ना पडे़गा? ऐसे में क्या करें? कोई उपाय बताएँ।

समाधान-

आप को घर छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है। किसी भी संपत्ति पर आप का कब्जा बिना किसी दस्तावेज के है और आप निजी संपत्ति पर 12 वर्ष और सरकारी संपत्ति पर 30 वर्ष से अधिक समय से काबिज हैं तो आप का उस संपत्ति पर कब्जा प्रतिकूल हो चुका है और आप से ऐसी संपत्ति का कब्जा कानूनी रूप से नहीं ले सकता है। जब तक आप के विरुद्ध वह संपत्ति खाली करने की अदालत की कोई डिक्री न हो और उस के निष्पादन में जब क सरकारी मशीनरी (नाजिर और पुलिस) खुद उसे खाली कराने न आए तब तक उस स्थान को छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है।

यदि आपके विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही उस स्थान का कब्जा प्राप्त करने के लिए की जाती है तो आप को अदालत से समन या नोटिस मिलेगा और अदालत में आप अपना पक्ष रख सकते हैं कि आप उस संपत्ति पर विगत 60 वर्ष से काबिज हैं और आप को वहाँ से हटाया नहीं जा सकता है। बस आप को यह करना होगा कि विगत 30 वर्ष से आप के उस जमीन पर कब्जे के सबूत देने होंगे जो नल, बिजली के बिलों, राशनकार्ड, वोटर लिस्ट आदि हो सकते हैं। ऐसा सबूत होने के कारण आप को वहाँ से बेदखल नहीं किया जा सकेगा।

इस के बावजूद आप को यह भय हो कि आप को जबरन गुंडों के बल पर या पुलिस के दबाव आदि से उस स्थान से हटाया जा सकता है तो आप खुद यह दावा दीवानी न्यायालय में आपको हटाने की कोशिश करने वालों के विरुद्ध पेश कर सकते हैं कि आप का उस संपत्ति पर 60 वर्ष से कब्जा है और विपक्षी उसे गैर कानूनी तरीकों से हटाना चाहते हैं। इस कारण उन के विरुद्ध इस आशय की स्थायी निषेधाज्ञा की डिक्री पारित की जाए कि वे आप को कानूनी तरीके के सिवा अन्य तरीके से न हटाएँ, इसी दावे में आप विपक्षीगण के विरुद्ध तुरन्त ही अस्थायी निषेधाज्ञा प्राप्त करने के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

समस्या-

भागलपुर, बिहार से अभिषेक शर्मा ने पूछा है-

मारा पुश्तैनी मकान है और मेरे पिताजी हमें अपने मकान में जाने नहीं देते हैं, इसलिए हम 10 बरसों से बाहर रह रहे हैं। जब मैं अपने पिताजी से अपना हक़ हिस्सा माँगने के लिए गया तो मेरे पिताजी ने एक स्टाम्प पेपर बनवा के रखा था,जिस पर लिखा था कि मैं अपनी मर्ज़ी से प्रॉपर्टी कुछ पैसे के लिए पिता के ना कर रहा हूँ और उन्होने हस्ताक्षर करवा कर मुझे बेदखल कर दिया। क्या मैं अपनी प्रॉपर्टी वापस ले सकता हूँ, उनके उपर 420 का केस कर सकता हूँ। मेरे पिताजी ने सिग्नेचर प्रेशर डाल कर के मुझसे ज़बरदस्ती करवाया है, इस घटना को एक साल हो गया। हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, अब अपना हिस्सा कैसे ले सकते हैं?

समाधान-

भिषेक जी, आप के पिता ने आप से एक वर्ष पूर्व दबाव डाल कर जबरन आप से दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवा लिए। इस दस्तावेज में मकान में अपना हिस्सा पैसा ले कर छोड़ने की बात लिखा जाना आप बताते हैं। लेकिन आपने यह नहीं बताया कि कितना पैसा लेना लिखा है? आप पिता के विरुद्ध 420 का केस करने की इच्छा रखते हैं, पर इस में 420 जैसा क्या है? फिर आप उस की शिकायत एक साल बाद कैसे कर सकते हैं? इस तरह की शिकायत इतने दिन बाद करने का आधार क्या है? इस कारण धारा 420 या किसी अन्य अपराधिक मामले की रिपोर्ट करना तो इस मामले में बिलकुल असंभव है। आप करेंगे तो भी उस का कोई नतीजा नहीं निकलेगा।

यदि आप की संपत्ति पुश्तैनी है और उस में आप का भी हिस्सा है इस बात की पुष्टि इस बात से होती है कि आप के पिता ने स्टाम्प पर लिखवा कर वह हिस्सा छुड़वाने की कोशिश की है।

किसी भी पुश्तैनी / सहदायिक संपत्ति में बच्चे का जन्म से ही अधिकार होता है। आप का भी उस संपत्ति में जन्म से अधिकार है और आप का हिस्सा उस संपत्ति में है। यह हिस्सा रजिस्ट्रार के कार्यालय में विक्रय पत्र या रिलीज डीज निष्पादित कर उस का पंजीयन कराए बिना पिता के हक में चला जाना संभव नहीं है। आप के पिता द्वारा स्टाम्प पर लिखा लिए जाने के बावजूद भी आप का हिस्सा आप का ही है। अब आप का हिस्सा प्राप्त करने के लिए आप अपने पिता के विरुद्ध बंटवारे का दावा दीवानी न्यायालय में कर सकते हैं और अपना हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं। इस के लिए आप आप के क्षेत्र के जिला न्यायालय में जा कर किसी अच्छे दीवानी वकील से मिलें और विभाजन का वाद पेश करवाएँ। इसी तरीके से आप पुश्तैनी जायदाद में हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं।

समस्या-

अर्पण कुमार जैन ने सिद्धेकेला, जिला बोलानगीर, उड़ीसा से पूछा है-

रीब पचास साल पहले मेरे पापा ने एक जमीन खरीदी थी, पेपर में हाथ से लिखवा क़े। पर उस जमीन मेरे पापा के चाचा के लड़के ने अपने नाम पर करवा लिया।  पर उस जमीन पर हम ही इस्तेमाल करते हैं। अभी हम घर तोड़ के नया घर बना रहे हैं। तो हो नाम भी नहीं करने दे रहे और जमीन के भी एक हिस्सा मांग रहे है।

समाधान-

प की समस्या बहुत अधिक स्पष्ट नहीं है। बस यह समझ आ रहा है कि आप के पिता ने किसी से एक जमीन खरीदी जिस का एग्रीमेंट किसी कागज पर हाथ से लिखा गया। उस जमीन पर मकान बना कर आप का परिवार निवास करता है। आप के पिता के चाचा के लड़के ने उस जमीन को अपने नाम करा लिया है। यह स्पष्ट नहीं किया है कि उस ने अपने नाम कैसे कराया है? किस रिकार्ड में वह जमीन पिता के चाचा के लड़के के नाम हुई है। जिस के कारण वह नया घर बनाने में अड़चन पैदा कर रहा है और जमीन का एक हिस्सा मांग रहा है।

आप के पिता ने एक हाथ से लिखे एग्रीमेंट के अंतर्गत जमीन खरीदी और उस का कब्जा ले लिया और मकान बना कर उस पर निवास कर रहे हैं।  किसी भी स्थायी संपत्ति जिस में मकान जमीन वगैरा शामिल हैं  उस का मूल्य 100 रुपए या उस से अधिक है तो उस संपत्ति के विक्रय का पंजीकरण होना आवश्यक है। आपने जो विवरण दिया है उस से लगता है कि आप के पिता ने उस का पंजीयन नहीं कराया था।

संपत्ति अंतरण अधिनियम (Transfer of Property Act) की धारा 53 ए में यह प्रावधान है कि किसी संविदा के अंतर्गत विक्रय की गयी संपत्ति का कब्जा यदि क्रेता को दे दिया गया है तो यह संविदा का आंशिक पालन है और ऐसा आंशिक पालन हो जाने के उपरान्त यदि पंजीयन न भी हो तो उस संपत्ति का कब्जा क्रेता से वापस नहीं लिया जा सकता है। हम इस तरह की समस्या का उत्तर पहले भी एक समस्या (संपत्ति अंतरण की किसी लिखत के अनुसार कब्जा दे दिए जाने पर किसी तरह वापस नहीं लिया जा सकता।) में दे चुके हैं।

आप के मामले में भी यही स्थिति है। इस तरह आप के या आप के पिता के पास जो संपत्ति है उस का कब्जा आप से या आप के पिता से कोई नहीं ले सकता। पिता के चाचा का लड़का यदि मकान को तुड़ा कर बनाने में बाधा उत्पन्न कर रहा है तो आप के पिता या आप उस समय जमीन खरीद की कागज पर लिखत के आधार दीवानी न्यायालय में वाद संस्थित के कह सकते हैं कि जमीन आप के पिता ने इस लिखत से खऱीदी थी और उस पर मकान बना कर आप 50 वर्ष से निवास कर रहे हैं। इस तरह आप उस जमीन पर बहैसियत स्वामी काबिज हैं। इस मकान को तुड़ा कर दूसरा बनाना चाहते हैं ओर प्रतिवादी ( पिता के चाचा का लड़का) इस में बाधा बनता है और जमीन में हिस्सा मांगता है। उसे आप की जमीन पर दखल से रोका जाए और आदेश दिया जाए कि वह आप के मकान को तुड़ा कर नया बनाने में किसी तरह की बाधा उत्पन्न न करे। इसी वाद में आप इस तरह के दखल के विरुद्ध अस्थाई निषेधाज्ञा भी प्राप्त कर सकते है। बेहतर है कि आप अपने क्षेत्र के किसी अच्छे दीवानी मुकदमे लड़ने वाले वकील से मिलें और उस से परामर्श कर के यह वाद संस्थित करें। अस्थई निषेधाज्ञा प्राप्त होने के बाद आप जमीन पर बना मकान तोड़ कर नया बना सकते हैं।

समस्या-

अन्तर सोहिल ने सांपला मंडी, जिला रोहतक, हरियाणा से पूछा है-

मुरारीलाल और लाजसिंह दोनों चचेरे भाई प्लाट नम्बर 13, सांपला मण्डी हरियाणा में रहते थे। दोनों का कारोबार और परिवार एक साथ रहता था। गोहाना मंडी हरियाणा में दोनों, एक दुकान खसरा नमबर 30 और एक प्लाट खसरा नम्बर 31 में बराबर के साझीदार थे। मुरारीलाल की एक जमीन सांपला मंडी हरियाणा में दुकान नम्बर 13 की अकेले की मलकियत की थी।

मुरारीलाल का एक पुत्र शिवकरन और दो पुत्रियां हैं। मुरारीलाल की मृत्यु के कुछ वर्षों बाद सन 1973 में शिवकरन पुत्र (1973 में उम्र लगभग 30 वर्ष) और लाजसिंह के बीच एक अदला-बदली का समझौता सवा दो रुपये के स्टाम्प पेपर पर हुआ जिसमें लिखा गया कि लाजसिंह गोहाना की दोनों मलकियत से अपने साझेदारी का हक समाप्त करता है और शिवकरन गोहाना के दोनों जमीनों नम्बर 30 और 31 का अकेला मालिक होगा और सांपला की जमीन नम्बर 13 में कुछ हिस्सा लाजसिंह को कब्जा और मालिकाना हक देता है। दोनों भागीदार जब चाहे रजिस्ट्री करा सकते हैं। इस पत्र पर दोनों जगहों के नक्शे हैं, लाजसिंह और शिवकरन के साथ दो गवाहों के हस्ताक्षर हैं और यह पत्र उर्दू भाषा में लिखा हुआ है।

इसके बाद दोनों ने अलग-अलग कारोबार कर लिया और सांपला में नम्बर 13 पर अपने अपने हिस्से में रहते रहे। लाजसिंह का परिवार केवल उस हिस्से में रहता है, जिसपर समझौता पत्र में शिवकरन द्वारा लाजसिंह को हक और कब्जा दिया गया। 1996 में लाजसिंह की मृत्यु के पश्चात शिवकरन ने सांपला के अपने हिस्से में से आधी जमीन बेच दी और गोहाना की सारी जमीन पहले ही 1980 के आसपास बेच चुका था।

अब शिवकरन लाजसिंह के पुत्रों को जो लाजसिंह की अदला-बदली में मिली जमीन पर काबिज हैं उनकी रजिस्ट्री नहीं करवा रहा है। वो कहता है कि सारी जमीन मेरी है और तहसील में जमाबन्दी में और इंतकाल में मेरा और मेरी बहनो का नाम है। (जोकि उसने अक्तूबर 2018 में अपने नाम लिखाया है इससे पहले उसके पिता मुरारीलाल का नाम था) अब वो कहता है कि मैं ये सारी जमीन बेच दूंगा और लाजसिंह के पुत्रों को खाली करने के लिये कहता है। जबकि लाजसिंह के पुत्र और परिवार उस हिस्से में जन्मसमय से ही रहते आये हैं। 45 वर्षों से राशनकार्ड, वोटर कार्ड, बिजली का बिल और नगरपालिका में 8 वर्षों से हाऊसटैक्स (नगरपालिका बने 8 वर्ष ही हुये हैं) और पानी के बिल लाजसिंह के पुत्रों के नाम हैं।

अब लाजसिंह के पुत्रों को क्या करना चाहिये। उनके पास अदला-बदली के समझौते पत्र के अलावा कोई रजिस्ट्री नहीं है। उन्हें अपनी जगह बेचे जाने का डर है और मकान को तोडकर बनाना चाहते हैं। लाजसिंह के पुत्रों को क्या करना चाहिये?

समाधान-

प की इस समस्या में मूल बात यह है कि चचेरे भाइयों के बीच सहमति से पारिवारिक समझौता या बंटवारा (दोनों ही संविदा भी हैं) हो गया, जिस की लिखत भी मौजूद है। दोनों अपने अपने हिस्से पर काबिज हो गए। इस तरह काबिज हुए 45 वर्ष हो चुके हैं और किसी ने कोई आपत्ति नहीं की। लेकिन राजस्व रिकार्ड में टीनेंट के रूप में जो भी अंकन है वह अलग प्रकार का है। राजस्व रिकार्ड में जो भी अंकन है वह नामांतरण के कारण हुआ है। कानून यह है कि नामान्तरण किसी संपत्ति पर स्वामित्व का प्रमाण नहीं है। स्वामित्व का प्राथमिक प्रमाण तो कब्जा है और द्वितीयक प्रमाण संपत्ति के हस्तान्तरण के विलेख हैं।

हाँ लाजसिंह के पुत्रों के पास हस्तान्तरण के विलेख के रूप में 45 वर्ष पूर्व हुए बंटवारे / पारिवारिक समझौते की जो लिखत है उस के अनुसार दोनों पक्ष अपने अपने हिस्से पर काबिज हैं। इस तरह दोनों का अपने अपने हिस्से की जमीन पर कब्जा है जो प्रतिकूल कब्जा हो चुका है। किसी को भी उस कब्जे से दूसरे को हटाने के लिए किसी तरह का कानूनी अधिकार नहीं रहा है। यदि इसे बंटवारा न माना जा कर सम्पत्ति की अदलाबदली (एक्सचेंज) भी माना जाए तब भी अदला बदली की इस संविदा के अनुसार जब कब्जे एक दूसरे को  दे दिए गए हैं तो संविदा का भागतः पालन (पार्ट परफोरमेंस) हो चुका है और संपत्ति हस्तान्तरण अधिनियम की धारा 53-ए के अनुसार अब इस कब्जे को कोई भी नहीं हटा सकता है।

स तरह लाजसिंह के पुत्र जिस संपत्ति पर काबिज हैं उन का उस पर अधिकार एक स्वामी की तरह ही है। इस में उपाय यह है कि वे शिवकरण और मुरारीलाल के तमाम उत्तराधिकारियों को संपत्ति का पंजीयन कराने के लिए कानूनी नोटिस दें और नोटिस की अवधि समाप्त हो जाने पर पंजीयन कराने के लिए वाद संस्थित करें और वाद के दौरान अपने कब्जे में किसी तरह का दखल न करने के लिए मुरारीलाल के उत्तराधिकारियों के विरुद्ध अस्थायी निषेधाज्ञा हेतु आवेदन कर अस्थाई निषेधाज्ञा पारित कराएँ। इस काम के लिए कोई वरिष्ठ दीवानी मामलों के वकील की स्थानीय रूप से मदद लें तो बेहतर होगा।

समस्या-

स्वाति साहू ने राजा तालाब, गाँधी चौक, रायपुर, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मेरे दादा जी ने अपने स्वयं के पैसे से लिये हुए मकान में मेरी बेवा माता जी और हम पांच बहनों को अपने साथ रखा है, पिछले 30 साल से। दादा जी का निधन होने पर मेरे बड़े पापा और चाचा हम लोगों को घर खाली करने के लिए धमकी दे रहे हैं। दादा जी ने मम्मी के नाम पर वसीयत किये हैं। पर वो रजिस्टर्ड नहीं हुआ है, नोटरी से अटेस्टेड कराया है। जो कि तहसील में मान्य नही है। हमे क्या करना चाहिए जिससे हमें कोई घर से निकाल न पाए?

समाधान-

दादाजी की वसीयत के अनुसार मकान आप की मम्मी का है और आप को वहाँ से निकाला जाना गैर कानूनी होगा। इस कारण से आप सभी वहाँ से निकलने से साफ मना कर दें। बड़े पापा और चाचा वगैरा से कह दें कि वे यदि यह समझते हैं कि वे मकान खाली कराने के अधिकारी हैं तो अदालत में दावा करें, यदि अदालत से फैसला हो जाता है कि मकान हमें खाली करना होगा तो कर देंगे। पर किसी के कहने से न करेंगे।

किसी भी वसीयत का रजिस्टर्ड होना जरूरी नहीं है, यहाँ तक कि किसी स्टाम्प पेपर तक पर होना जरूरी नहीं है। वसीयत एक खाली कागज पर भी लिखी जा सकती है। आप को किस ने कह दिया कि यह तहसील में मान्य नहीं है? वसीयत पर वसीयत करने वाले के हस्ताक्षर होने चाहिए और दो गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए जिन की उपस्थिति में वह वसीयत की गयी हो. नोटेरी से अटेस्टेशन हुआ है इस से नोटेरी एक और गवाह हो गया है तथा नोटेरी का रजिस्टर वसीयत के सही होने का एक ठोस सबूत है। इस वसीयत को आप लोग जब भी कोई मुकदमा चलेगा तब अदालत में गवाहों के बयान से प्रमाणित करा सकते हैं।

आप के चाचा ताऊ को उन के पिता की संपत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त करने का आधिकार है। लेकिन आप की माँ के नाम मकान की वसीयत है तो उसे प्राप्त करने का चाचा ताऊ का अधिकार समाप्त हो चुका है।  यदि आप को लगता हो कि आप के चाचा, ताऊ जबरन आप को मकान से बेदखल कर सकते हैं तो आप अदालत में दावा कर के गैर कानूनी तरीके से मकान से बेदखल करने पर रोक लगाने के लिए स्थायी और अस्थायी निषेधाज्ञा प्राप्त कर सकते हैं।

समस्या-

रियाज़ुद्दीन ने बिलासपुर, जिला गौतम बुद्ध नगर, (उ.प्र.) से पूछा है-

मेरे ससुर साहब ने 15 साल पहले एक प्लॉट खरीदा था शाइन बाग दिल्ली में उस समय किसी व्यक्ति ने मेरे ससुर साहब से कह कर कि एक ग़रीब फैमिली है अपने यहाँ रेंट पर रख लो। उन्होंने उस को रख लिया, वो भी विना रेंट के  15 साल तक उस से कोई किराया भी नहीं लिया। अब उनको उस प्लाट पर निर्माण करना है। लेकिन वह औरत उस प्लाट को खाली नहीं कर रही। बोलती है मुझ को दो फ्लोर बना कर दो या आधा मकान दो। मेरी पास इस के पेपर हैं, सब कुछ है, और एक दो बदमाशों से भी जा कर मिल ली है वो। उस औरत के आदमी की मृत्यु भी हो चुकी है। अब हम क्या कर सकते हैं। कृपया हमारी मदद करें।

समाधान-

रियाजुद्दीन जी, अपनी किसी संपत्ति पर जब भी किराएदार या लायसेंसी के रूप में किसी को व्यक्ति को कब्जा दिया जाए तो उस की लिखित संविदा की जानी चाहिए, जिस पर दोनों पक्षकारों के सिवा कम से कम दो गवाहों के हस्ताक्षर हों।  बेहतर हो यदि उस संविदा को उचित मूल्य के गैरन्यायिक स्टाम्प पर लिखा जाए और नोटेरी से तस्दीक करा ली जाए। नोटेरी के रजिस्टर में पक्षकारों के साथ-साथ गवाहों के भी हस्ताक्षर कराए जाएँ। इस दस्तावेज को सुरक्षित रखा जाए। इस से भविष्य में यह साबित करने में आसानी रहे कि भूमि या परिसर किराए पर या लायसेंस पर उपयोग के लिए दिया गया था। यदि आप के ससुर साहब के पास इस तरह का कोई दस्तावेज या मामूली लिखत भी हो तो इस स्थिति में वह काम आएगा। यदि कोई भी दस्तावेज नहीं हो तो वहाँ जिस का कब्जा है उसकी किसी तरह की अभिस्वीकृति हो जिस का कोई सीधा या परिस्थिति जन्य सबूत हो।

यदि यह सब नहीं है तो यह माना जाएगा कि आप के ससुर ने उक्त संपत्ति को खुला छोड़ दिया था और फिर वर्तमान कब्जाधारी उस पर अपना काम करने लगा और आप के ससुर ने 12 वर्ष से अधिक से उस संपत्ति पर अपना कोई दावा नहीं किया। अवधि अधिनियम (लिमिटेशन एक्ट) के अनुसार 12 वर्ष से अधिक का कोई कब्जा हो जाने पर उस से कब्जा वापस लेने के लिए दावा नहीं किया जा सकता। इसी को एडवर्स पजेशन कहा जाता है। यदि उस से जबरन कब्जा लिया जाता है तो यह गैर कानूनी होगा और वर्तमान कब्जाधारी धारा  145 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कब्जा वापसी का प्रार्थना पत्र दे सकता है और उसे कब्जा वापस दिलाया जा सकता है।

आप के ससुर साहब के पास उस प्लाट के स्वामित्व का कोई सबूत जरूर होगा। उस के साथ यदि आप उस कब्जाधारी का कब्जा 12 वर्ष से कम का साबित कर सकें, या फिर यह साबित कर सकें कि वह जमीन / परिसर किराए पर दिया गया था और कम से कम एक बार किराया जरूर लिया गया था। तो आप को दीवानी का कोई अच्छा वकील उस प्लाट पर अपना कब्जा वापस प्राप्त करने का रास्ता सुझा सकता है। इसलिए हमारा सुझाव है कि आप ये सब सबूत या गवाही इकट्ठा करें और फिर किसी अच्छे दीवानी काम करने वाले वकील से मिलें और रास्ता निकालें। वैसे हमें लगता है कि इस जमीन का कब्जा वापस लिया जा सकता है। कानूनी रास्ते में अभी हमारे देश में बहुत समय लगता है। इस कारण लोग मजबूरी में कानूनी रास्ता अपनाने के स्थान पर बहुत कम प्रतिफल में समझौते करना पसंद करते हैं। यदि आप को लगे कि कोई सबूत नहीं हैं जिस से कानूनी तरीके से संपत्ति को वापस लिया जा सके तो बेहतर है कि आपस में ऊंच नीच कर के ही किसी तरह से संपत्ति वापस प्राप्त की जाए। पूरी नहीं तो आधी ही प्राप्त की जाए।

समस्या-

मेरे पति की असामयिक मृत्यु हो गयी है।  मेरे पति को पैतृक संपत्ति में 4 बीघा जमीन हिस्से में आई थी।  क्या मेरे पति की मृत्यु के बाद मेरा कोई हक उस पैतृक संपत्ति में बनेगा अथवा नही?  मैंने अभी कोई दूसरी शादी नही की है। अगर मेरे मां बाप मेरी दूसरी शादी कर देते हैं तो मेरा पैतृक संपत्ति जो मेरे पति की थी क्या मैं उस पर दावा कर सकती हूँ?

-लता देवी,  2/881 कोर्ट रॉड सहारनपुर

समाधान-

प के पति की जो भी स्वअर्जित संपत्ति थी अथवा पुश्तैनी सहदायिक संपत्ति में जो भी उन का हिस्सा था वह आप के पति की मृत्यु के साथ ही उत्तराधिाकार में आप को प्राप्त हो चुका है। आप उसे प्राप्त करने के लिए दावा कर सकती हैं।

यदि आप दूसरा विवाह करती हैं तो भी आप का इस संपत्ति पर यह अधिकार बना रहेगा। वह आप के विवाह करने से समाप्त नहीं होगा। आप चाहें तो विवाह के बाद भी दावा कर सकती हैं। लेकिन आप को यह दावा समय रहते करना चाहिए। क्यों कि अक्सर ऐसा होता है कि आप दावा करते हैं तब तक दावा करने की कानूनी समयावधि समाप्त हो जाती है और आप दावा करने से वंचित हो सकती हैं। इस कारण आप को चाहिए कि तुरन्त किसी वकील से परामर्श कर के कार्यवाही करें।

समस्या-

मखदूमपुर गोमती नगर विस्तार लखनऊ से संतपाल ने पूछा है-

मेरे पिता जी पिता के नाम एक ४ बिस्वा प्लाट है।  पर उस प्लाट मे एक व्यक्ति ३५ साल से घर बनवाकर रह रहा है । अब वह अपना हक बताता है इस स्थिति मे उसे किस प्रकार घर से बेदखल किया जाये।

समाधान-

मारे पास अक्सर आप के जैसे सवाल आते है ंकि हमारी पुश्तैनी, या दादा जी की, या पिताजी की जमीन है उस पर कुछ लोगों ने कब्जा कर के 15, 20, 25, 35 या अधिक वर्ष से मकान बना लिया है या उस पर खेती कर रहे हैं या फिर और कुछ कर रहे हैं।

भाई जब किसी ने आप की जमीन पर कब्जा किया और वहाँ अपना निर्माण या काम करने लगा तब क्या आप सोए हुए थे? और फिर उस के बाद अभी तक 12-13 या उस से अधिक सालों से क्या आप और आप के तमाम परिवार वाले सोए रहे? आपने सुना होगा कि सोते रहने वाले सब कुछ खो देते हैं।

आप बताइए कि आप की सम्पत्ति पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है लेकिन संपत्ति अभी तक आप के स्वामित्व की है तो आप को चाहिए क्या? आप उस का कब्जा ही तो वापस लेना चाहते हैं? यदि आप कब्जा वापस लेना चाहते हैं तो आप को अचल संपत्ति के कब्जे के लिए वाद संस्थित करना पड़ेगा। वैसी स्थिति में कब्जा आप के हाथ से निकल जाने की तिथि से केवल 12 वर्ष की अवधि में आप ऐसा कर सकते हैं।  इस से अधिक अवधि हो जाने पर आप का अचल संपत्ति के कब्जे का वाद इसलिये खारिज हो जाएगा कि आप ने दावा करने की निर्धारित अवधि में यह दावा पेश नहीं किया।

आप सभी इसे ठीक से पढ़ लें, और हमें ऐसे सवाल न भेजें जिन में आप अपनी अचल संपत्ति पर 12 वर्ष से पहले हो चुके कब्जे को वापस लेना चाहते हों। हम आज के बाद से इस तरह के सवालों का कोई उत्तर नहीं देंगे।


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