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Category: Legal Remedies

वसीयत में प्राप्त संपत्ति पैतृक नहीं…

समस्या- भोपाल, मध्यप्रदेश से विनय ने पूछा है- पिता ने अपनी स्वअर्जित संपत्ति को अपने पुत्र को वसीयत कर दिया। पिता की मृत्यु हो चुकी है। क्या अब
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चेक अनादरित होने पर उसे कानूनी रूप से प्रवर्तनीय ऋण या अन्य देनदारी के भुगतान के लिए देना माना जाएगा।

समस्या- गंगानगर, राजस्थान से विजय जसुजा ने पूछा है- मैं एक वकील हूँ, मैं ने एक मुकदमा धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के अंतर्गत अपने मुवक्किल का प्रस्तुत
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मोबाइल टॉवर को रिहायशी बस्ती से कैसे हटवाएँ?

समस्या- पूर्णिया, बिहार से राजीव रंजन ने पूछा है- मेरे घर के पास मेरे पड़ौसी ने अपनी जमीन को एक मोबाइल टॉवर स्थापित करने के लिए पट्टे पर
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मकान में अपना पृथक हिस्सा प्राप्त करने के लिए संपत्ति के बँटवारे का दीवानी वाद करें।

समस्या- मुम्बई, महाराष्ट्र से संजय परब ने पूछा है – हमारा पुश्तैनी मकान गाँव में है और मैं मुंबई में स्थाई रूप से रह रहा हूँ। गाँव का
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पिता अपने जीवनकाल में स्वअर्जित संपत्ति का कुछ भी कर सकते हैं।

समस्या- बाराबंकी, उत्तर प्रदेश से राजेन्द्र ने पूछा है- मेरे पिता जी की दो शादियां हुई है। पहली शादी 1964 में हुई थी।  पहली पत्नी का देहान्त 1978
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नॉमिनी केवल ट्रस्टी होता है, मृतक की संपत्ति का स्वामी नहीं…

समस्या- लखनऊ, उत्तर प्रदेश से वीर बहादुर ने पूछा है- मेरे पिताजी की घर के बाहरी हिस्से में दो दुकाने थी। एक मुझे और एक मेरे बड़े भाई
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केवल आत्मनिर्भर होना ही स्त्री के भविष्य की गारण्टी हो सकती है …

समस्या- नोएडा से नदीम अहमद खान ने पूछा है- मेरी बहन का विवाह ११ साल पहले हुआ था लड़का ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था और अपने पिता के साथ
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भूमि पर कृषक के अधिकार में कमी होने पर रेकार्ड में परिवर्तन करने वाले आदेश की अपील करे।

समस्या- इन्दौर, मध्य प्रदेश से अमित ने पूछा है- एक मंदिर है, जिसमें हम वर्षो से निरंतर सेवा, पूजा-अर्चना आज तक करते चले आ रहे हैं। वर्षों पूर्व
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ग्राम पंचायत बिना वैधानिक कारण किराए पर दी गई दुकान खाली नहीं करवा सकती।

समस्या- चौथ का बरवाड़ा, राजस्थान से अशफाक अब्बासी ने पूछा है – मैं जनवरी 2008 से ग्राम पंचायत का किराएदार हूँ। सरपंच मौखिक रूप से दुकान खाली करने
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तदर्थ नियुक्ति, नियमितिकरण और वरिष्ठता

समस्या- कोटद्वार, उत्तराखंड से मंजू कापर्वान ने पूछा है – मेरी नियुक्ति 1990 में तदर्थ सहायक अध्यापिका के पद पर हुई थी और मेरा 1999 में नियमितिकरण हुआ
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