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दूसरी पत्नी को विवाह अवैध होने पर भी घरेलू हिंसा अधिनियम में भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार है।

समस्या-

वंदना श्रीवास्तव ने सागर, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मेरे पति ने अपनी पहली पत्नी के होते हुए मेरे से शादी की। मुझे उनकी पहली पत्नी के बारे मे कुछ भी जानकारी नहीं थी। उनके दो बच्चे भी हैं। अब वो मुझे छोड़ कर अपनी पहली पत्नी के साथ रहते हैं और उनकी पहली पत्नी मुझे गंदा गंदा गाली गुफ्ता करती है। मेरे भी दो बेटे हैं, मेरे पति कभी भी मुझे ज़रूरत भर का पैसा नहीं देते हैं और लिए मे मेरा पूरा गहना जो मेरे मा पापा दिए थे वो भी ले लिए हैं. क्या मेरा और मेरे बच्चो का उनके या उनकी संपाति पे कोई अधिकार न्ही है? मुझे कुछ सुझाव दीजिए कि मैं क्या करूं?

समाधान-

वंदना जी, यह तो हो सकता है कि आप को  विवाह के पहले पति की पहली पत्नी और उस के बच्चों के बारे में पता नहीं हो। पर आप को अपने खुद के दो बच्चे होने तक पता नहीं लगा हो। आप आज यह शिकायत तब कर रही हैं जब आप को इस विवाह से खुद के और बच्चों के पालन पोषण में समस्या आने लगी है। कानून का कायदा है कि जब भी आप को पता लगे कि आप के साथ कुछ अन्याय हुआ है, कोई अपराध हुआ है आप तुरन्त कानून की मदद लें। जितना आप देरी करती जाएंगी आप के लिए कानूनी उपाय मुश्किल होता जाएगा। अब यह साबित करना बहुत कठिन है कि पहली पत्नी और बच्चों के बारे में आप को अब पता लगा हो। यदि आप पहली पत्नी और बच्चों के बारे में जानकारी होते ही पुलिस को रिपोर्ट करती तो वह आप के पति का अत्यन्त गंभीर अपराध था उन्हें सजा हो सकती थी।

ह आप स्पष्ट रूप से से समझ लें कि पहली पत्नी होते हुए आप के साथ किया गया विवाह वैध नहीं है और आप को वैध पत्नी के अधिकार प्राप्त नहीं हैं। लेकिन आप के दोनों बच्चें वैध हैं उन्हें अपने पिता से भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार है इस के लिए वे धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता में तथा संरक्षक एवं पतिपाल्य अधिनियम के अंतर्गत भरण पोषण के लिए प्रतिमाह धनराशि प्राप्त करने के लिए कार्यवाही कर सकते हैं। वे यदि नाबालिग हैं तो उन की ओर से आप को अपने पति के विरुद्ध कार्यवाही करने का आधिकार है, यह कार्यवाही आप कर सकती हैं।

प भी अपने पति के साथ रही हैं या फिर पति आप के पास रहे हैं, इस कारण से आप भी अपने पति से महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही कर सकती हैं और उन से अपने व बच्चों के लिए पृथक आवास की व्यवस्था करने और आप के खुद के भरण पोषण के लिए मासिक राशि निश्चित करवा सकती हैं।

प के पति के बच्चों को वे चाहें पहली पत्नी से हों या फिर आप से उन्हें या आप को या आप के पति की पहली पत्नी को पति की स्वअर्जित संपत्ति पर उ नके जीतेजी कोई अधिकार नहीं है। लेकिन यदि वे उन की मृत्यु के समय कोई संपत्ति बिना वसीयत किए छोड़ते हैं तो उस संपत्ति में आप के दोनो बच्चों और पहली पत्नी और उस के बच्चों को समान अधिकार प्राप्त होगा, प्रत्येक को 1/5 हिस्सा मिलेगा। लेकिन उस संपत्ति में आपका कोई अधिकार नहीं होगा। यदि कोई पुश्तैनी संपत्ति है और उस में आप के पति का हिस्सा है तो उस  में आप के बच्चे हिस्सा मांग सकते हैं और बंटवारे का वाद संस्थित कर सकते हैं। उन्हें उस संपत्ति मे हिस्सा प्राप्त होगा या नहीं यह अभी नहीं कहा जा सकता क्यों कि इस मामले में दोनों तरह की राय न्यायालयों ने व्यक्त कर रखी है। पर हमारे हिसाब से अवैध पत्नी के बच्चों को भी पुश्तैनी संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए।

दूसरी वैध पत्नी को भी पहली मृत पत्नी के समान ही उत्तराधिकार प्राप्त होगा।

समस्या-

हरगोबिंद सिंह ने ग्राम पो. मालारामपुरा, जिला हनुमानगढ़, राजस्थान से पूछा है-

त्नी की मृत्यु के बाद पुरूष ने किसी महिला से शादी कर ली, तो इस पुरुष की मौत के बाद इस दूसरी जीवित पत्नी का जमीन-संपत्ति पर क्या हक होगा? मृत पुरुष के दोनों पत्नियों से दो-दो बच्चे इसी पुरूष की संतान हैं।

समाधान-

पुरुष ने अपनी पहली पत्नी की मृत्यु के उपरान्त दूसरा विवाह किया है इस तरह दूसरी पत्नी उस की उसी तरह वैध पत्नी है जैसे पहली पत्नी वैध थी। इस कारण इस दूसरी पत्नी को वही अधिकार प्राप्त होंगे जो अधिकार पहली पत्नी को उस के पति के मरने के बाद हासिल होते।

इस पुरुष की दो  संतानें पहली पत्नी से और दो ही संतानें दूसरी पत्नी से हैं। इस कारण से उस की चारों ही सन्ताने भी वैध संतानें हैं। दूसरी पत्नी से उत्पन्न होने वाली संतानों को भी उसी तरह अधिकार प्राप्त होंगे जैसे पुरुष की पहली पत्नी से मृत्यु नहीं हुई थी और बाद वाली दोनों संतानों का जन्म भी पहली पत्नी से ही हुआ है।

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 से मृत हिन्दू पुरुष का उत्तराधिकार तय होगा। यदि खेती की जमीन है तो उस का उत्तराधिकार भी धारा 8 से ही तय होगा। इस धारा के अनुसार माता (यदि जीवित हो तो), पत्नी और सभी सन्तानों को बराबर उत्तराधिकार प्राप्त होगा। आप के मामले में लगता है कि माता जीवित नहीं है। वैसी स्थिति में प्रथम श्रेणी के पाँच उत्तराधिकारी हैं। चारों संतानें और पत्नी। पाँचों में से प्रत्येक को 1/5 हिस्सा प्राप्त होगा। खेती की जमीन में मृत्यु के कारण खुलने वाले नामान्तरण (फौती इन्तकाल) में पाँचों के नाम 1/5 हिस्सा दर्ज होगा। शेष अचल संपत्ति में भी पाँचो को बराबर हिस्सा प्राप्त होगा।

पति के अत्याचारों के विरुद्ध शिकायत करें और मुकदमा करें, आत्महत्या का विचार तुरन्त त्याग दें।

समस्या-

रोशनी खातून ने ग्राम हमीरपुर जिला कटिहार, बिहार से पूछा है-

मैं मुस्लिम धर्म से हूँ। मेरी शादी 7 महीने पहले हुई थी मेरे पति मेरे साथ मारपीट और दहेज़ की मांग करते थे।  उसके खिलाफ महिला थाना में आवेदन दिया।  थाने में उस ने दरोगा को पैसे देकर अपने पक्ष में कर लिया। एक एफिडेविट दिया कि मारपीट नहीं करेंगे और पति-पत्नी की तरह रहेंगे और थाने से ही मेरी विदाई हुई। ससुराल पहुँचने के बाद फिर से वही ताने, मारपीट, दहेज़ की डिमांड होने लगी। फिर मैंने अपनी माँ को फ़ोन कर के बताया तो वो मुझे ससुराल से मायके ले आयी।

अब मैं 2 महीने से गर्भवती हूँ , इसकी सूचना अपने पति को फ़ोन करके दी तो कहता है मैंने तुमसे शादी ही नहीं की है, तो ये मेरा बच्चा कैसा हुआ। अब मैं क्या करूँ? गर्भपात कराऊँ या बच्चे को इस दुनिया में आने दूँ। इस बच्चे का भविष्य क्या होगा ? मेरे पति मुझसे शादी सिर्फ दहेज़ के लिए किये थे।

अब वो दूसरी शादी करने वाले हैं। क्या वो मुझसे बिना तलाक लिए शादी कर सकता है?  इस बच्चे का क्या करूँ?  उसपर कौन सा केस करूँ।  केस कितने सालों तक चलेगा? क्या शादी में दिया हुआ सामान वो वापस करेगा? समाज में मेरे परिवार की बदनामी हो रही है, इसलिए मैं आत्महत्या करने की सोच रही हूँ क्यूंकि क़ानून से न्याय मिलने में मुझे पता नहीं कितने साल लग जाएंगे। कृपया मुझे सलाह दें।

समाधान-

प के विवाह को सात माह हुए हैं और उस में आप पर तमाम कहर टूट पड़े हैं। आप का परेशान होना स्वाभाविक है। लेकिन इन तमाम परिस्थितियों को ले कर आत्महत्या करने की सोचना बिलकुल भी ठीक नहीं है। आपने और न ही आप के परिवार ने कोई गुनाह नहीं किया है। ऐसा कोई भी काम नहीं किया है जिस से बदनामी हो।  बदनामी तो उस शख्स और परिवार की होनी चाहिए जिस ने आप के साथ इंसान की तरह नहीं। होता यह है कि जब भी कोई गलत काम करता है तो उस का परिणाम आने के पहले ही झूठा प्रचार आरंभ कर देता है। इस से पीड़ित पक्ष को लगता है कि उस की बदनामी हो रही है। लेकिन ऐसा नहीं है। आप को चाहिए कि आप धीरज रखें और अपने विरुद्ध हुई ज्यादतियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करें।

आप को जब एक बार शपथ पत्र दे कर आप का पति ले गया था और उस के विपरीत उस ने व्यवहार किया है तो आप को दुबारा पुलिस में रिपोर्ट करानी चाहिए। आप का कहना है कि पहले पुलिस ने पैसा खा कर काम नहीं किया। लेकिन यह गलत भी हो सकता है। आम तौर पर पुलिस को यह निर्देश हैं कि पहली बार में पति पत्नी के बीच समझौता कराने की कोशिश करनी चाहिए थी। उस दफे भी आप यदि जाने से इन्कार कर देतीं तो पुलिस किसी हालत में समझौता नहीं कराती। हो सकता है यह करते हुए भी पुलिस के किसी अधिकारी ने सामने वाले पक्ष से पैसा लिया हो। लेकिन आप को दुबारा पुलिस में रिपोर्ट करानी चाहिए कि आपके साथ फिर से मारपीट हुई है, ताने मारे गए हैं, दहेज मांगा गया है जिस के कारण आपको पति का निवास छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। पति ने आप का तमान स्त्री-धन भी अपने पास रख लिया है इस तरह पति ने धारा 323, 498ए, 406 आईपीसी का अपराध किया है। । यदि थाना रिपोर्ट करने से मना करे तो वही रिपोर्ट एक पत्र के साथ रजिस्टर्ड ए.डी. डाक से एस.पी. को भेजनी चाहिए। यदि फिर भी कोई कार्यवाही न हो तो  मजिस्ट्रेट के न्यायालय में वकील की मदद से परिवाद दाखिल करना चाहिए। इस के अलावा मजिस्ट्रेट के न्यायालय में तुरन्त घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के अन्तर्गत आवेदन दे कर भऱण पोषण की मासिक राशि की मांग करनी चाहिए।

यह सही है कि मुस्लिम विधि में चार विवाह तक किए जा सकते हैं। लेकिन यह भी प्रावधान है कि सभी पत्नियों को एक जैसा व्यवहार मिलना चाहिए तथा दूसरी शादी के लिए पहली की सहमति होनी चाहिए। आप चाहें तो दूसरा विवाह रुकवाने के लिए दीवानी अदालत से स्थायी व अस्थायी निषेधाज्ञा जारी करने के लिए वाद व प्रार्थना कर सकती हैं। यदि फिर भी पति दूसरा विवाह कर ले तो आप को हक है कि आप भी अदालत से तलाक के लिए प्रार्थना पत्र दे कर तलाक ले सकें।

जहाँ तक गर्भ रह जाने की बात है। बच्चे का भविष्य तो अभी अनिश्चित ही है। पिता गंभीर नहीं है तो उसे पिता का प्रेम और स्नेह तो मिलने से रहा। वैसी स्थिति में हमारी नजर में उस का दुनिया में आना ठीक नहीं है। फिर भी यह निर्णय तो केवल माँ ही ले सकती है कि उसे अपनी संतान को दुनिया में लाना है या नहीं। यदि अभी गर्भाधान को तीन माह नहीं हुए हैं तो स्वैच्छिक गर्भपात कराया जा सकता है।

जहाँ तक मुकदमों के चलने के समय की बात है तो यह स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है कि वहाँ अदालतों में कितने मुकदमें हैं। कितने ही मुकदमे चल रहे हों पर अन्याय के विरुद्ध लड़ने का आपके पास यही रास्ता है और आपको मजबूती के साथ इस लड़ाई को लड़ना चाहिए। आप अवश्य जीतेंगी।

पत्नी को पति से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति पर उस का अधिकार दूसरा विवाह करने पर भी बना रहता है।

समस्या-

मेरे पति की असामयिक मृत्यु हो गयी है।  मेरे पति को पैतृक संपत्ति में 4 बीघा जमीन हिस्से में आई थी।  क्या मेरे पति की मृत्यु के बाद मेरा कोई हक उस पैतृक संपत्ति में बनेगा अथवा नही?  मैंने अभी कोई दूसरी शादी नही की है। अगर मेरे मां बाप मेरी दूसरी शादी कर देते हैं तो मेरा पैतृक संपत्ति जो मेरे पति की थी क्या मैं उस पर दावा कर सकती हूँ?

-लता देवी,  2/881 कोर्ट रॉड सहारनपुर

समाधान-

प के पति की जो भी स्वअर्जित संपत्ति थी अथवा पुश्तैनी सहदायिक संपत्ति में जो भी उन का हिस्सा था वह आप के पति की मृत्यु के साथ ही उत्तराधिाकार में आप को प्राप्त हो चुका है। आप उसे प्राप्त करने के लिए दावा कर सकती हैं।

यदि आप दूसरा विवाह करती हैं तो भी आप का इस संपत्ति पर यह अधिकार बना रहेगा। वह आप के विवाह करने से समाप्त नहीं होगा। आप चाहें तो विवाह के बाद भी दावा कर सकती हैं। लेकिन आप को यह दावा समय रहते करना चाहिए। क्यों कि अक्सर ऐसा होता है कि आप दावा करते हैं तब तक दावा करने की कानूनी समयावधि समाप्त हो जाती है और आप दावा करने से वंचित हो सकती हैं। इस कारण आप को चाहिए कि तुरन्त किसी वकील से परामर्श कर के कार्यवाही करें।

विधवा को पति से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति का स्वामित्व दूसरा विवाह कर लेने पर भी उसी का रहेगा।

समस्या-

पटना से हर्ष कुमार ने पूछा है-

म तीन भाई थे,  जिसमें सबसे बड़ा मैं हूँ और मेरे बाद वाले भाई का निधन हो गया, जिसकी पत्नी से सबसे छोटे भाई ने  शादी कर लिया।  तो कृपया मुझे ये बताएं कि मेरे पुस्तैनी संपत्ति में सबसे छोटे भाई का क्या हिस्सा होगा?  क्या मंझले भाई की पत्नी के छोटे भाई से शादी करने के बाद उनका हिस्सा भी छोटे भाई को हस्तांतरित हो जायेगा।

समाधान-

मँझले भाई की मृत्यु के साथ ही मँझले भाई का हिस्सा उस की पत्नी को मिल गया है। यदि उस के कोई संतान थी तो आधा संतान को आधा उस की पत्नी को मिला है। वह तो उस का हो चुका। शादी कर लेने के कारण उस से वापस नहीं लिया जा चुका है। यदि आप के कोई बहिन नहीं है तो जमीन के आप, छोटा भाई और मँझले की पत्नी तीनों बराबर के हिस्सेदार हैं। पत्नी की जमीन पर छोटे भाई का कोई अधिकार नहीं है। वह उस की पत्नी को उस से विवाह के पहले ही मिल चुका था।

अब आगे आप तीनों के जीवन काल में यह हिस्से इसी तरह रहने हैं। जीवन काल के बाद जिस की मृत्यु होगी उस के उत्तराधिकारियों को मृतक की संपत्ति प्राप्त होगी।  हाँ एक छूट जरूर है कि आप चाहेँ तो अपना अपना हिस्सा किसी और को बेच सकते हैं। एक दूसरे को रिलीज कर सकते हैं या फिर बेच सकते हैं उस पर कोई पाबंदी नहीं है।

माँ के नाम से खरीदी गयी संपत्ति में पिता और भाई उत्तराधिकार में हिस्सा मांग सकते हैं।

समस्या-

मोहित ने सहारनपुर उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी उम्र २७ वर्ष है।. मेरा एक बड़ा भाई है जो मुझसे १ या दो साल बड़ा होगा, उसकी शादी हो चुकी है। वो पिताजी के साथ रहता है ओर मैं माता जी के साथ। मेरी माता जी मेरे जन्म के वर्ष से ही ससुराल पक्ष द्वारा मारपीट किए जाने के कारण अपने मायके आ गई थी। सुलह की तमाम कोशिशों के बाद पिता जी पर मारपीट ओर भरण-पोषण का मुक़दमा दर्ज किया गया। आज २७ साल बाद भी वो मुक़दमा चल रहा है। वो थोड़ा बहुत खर्च देते है कोर्ट के द्वारा। पर इसी बीच उन्होने (वर्ष २००० के लगभग) दूसरी शादी कर ली और दूसरी पत्नी से उनको एक पुत्र, एक पुत्री है। दूसरी पत्नी, दोनो बच्चे और मेरा बड़ा भाई पिताजी के साथ ही हरियाणा के गाँव में रहते हैं जहा पिता जी का बाकी परिवार भी रहता है। ज़मीन जयदाद के नाम पर कुछ नहीं हैं केवल मकान हैं (मेरे संज्ञान मे) जिसपर मैं दावा कर सकूँ। मैंने अपना घर सहारनपुर में बना लिया है जो की मेरी मम्मी के नाम है। मैं उनपर कार्यवाही चाहता हूँ कि उन्होंने अपनी पत्नी और पुत्र के लिए कुछ नहीं किया और बिना तलाक़ लिए दूसरी शादी कर ली है। इसके लिए मुझे क्या करना होगा और क्या सबूत पेश करने होंगे।

समाधान-

प ने जिस तरह तथ्य सामने रखे हैं उस से पता लगता है कि आप अपने पिता पर कोई मुकदमा करते हैं तो भी आप को कुछ हासिल नहीं होगा। लगता है आप के मन में पिता से बदला लेने की भावना है, यह होना स्वाभाविक भी है। आखिर आप का भी हक था पिता पर। पर किसी भी तरह से बदले की भावना तो उचित नहीं है।

पहला अपराध आप के पिता ने आप की माताजी के प्रति किया था। माताजी उन के विरुद्ध दूसरी शादी के लिए पुलिस में जा सकती थीं और उन्हें सजा हो सकती थी। पर या तो माताजी ने ऐसा करना ठीक नहीं समझा या फिर पुलिस ही यह साबित करने में असमर्थ रही कि आप के पिताजी की दूसरी शादी शादी न हो कर केवल लव इन रिलेशन है। और कोई अपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती।

संपत्ति के नाम पर आप के पिता के पास मकान हैं। हो सकता है वे संयुक्त संपत्ति हों। यह भी हो सकता है कि आप की माताजी के भय से उन संपत्तियों में से पिता ने अपना अधिकार अलग कर लिया हो जिस से आप की माताजी या आप हक न जता सकें।

आप ने अपनी और अपनी माँ के लिए एक अलग दुनिया बना ली है। वह बेहतर है। पिता से बदले के चक्कर में न पड़ें। इस से आप अपने लिए बेवजह परेशानियाँ मोल लेंगे, मिलेगा कुछ नहीं। एक सलाह बिना मांगे दे रहे हैं कि आप ने अपना पैसा लगा कर सहारनपुर में जो मकान बनाया है वह माताजी के नाम से है। उसे अपने नाम हस्तांतरित करवा लें या फिर उस की पंजीकृत वसीयत अपने नाम करवा लें। आप की माताजी अभी भी आप के पिता की पत्नी हैं जिस के कारण पिता उन के उत्तराधिकारी हो सकते हैं। आप का बड़ा भाई तो उत्तराधिकारी है ही। ऐसी कोई व्यवस्था न होने पर माताजी के देहान्त के बाद आप का बड़ा भाई और पिता दोनों इस मकान में आप से हिस्सा मांग सकते हैं। इसे गंभीरता से लें।

दूसरा विवाह करने वाले पति के विरुद्ध अपराधिक शिकायत कीजिए।

rp_two-vives.jpgसमस्या-

नीलम ने बदायूँ उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरे पति ने मेरे होते हुए दूसरी शादी कर ली। ये दूसरी औरत बहुत खराब है। सब कुछ मिलने के बाद भी वह पति पर गलत आरोप लगाती है और उस ने मेरे पति के ऊपर सरकार केस 125, और 498 लगाया है। जब कि उस के घर वालों ने दहेज के नाम पर कुछ भी नहीं दिया और पति को जेल भिजवा दिया। मेरे पति एक सरकारी कर्मचारी हैं। वह औरत बेहद परेशान करती है यहां तक कि खुद मरने की बात करती है जिस से मैं डर जाती हूँ। वह औरत रुपए पैसे किसी भी चीज से दुखी नहीं रहती फिर भी ये औरत गलत बोलती है और गालियाँ भी देती है। ये औरत अनपढ़ है। मैं बहुत दुखी हूँ। कृपा कर के आप मुझे बताएँ कि मुझे क्या करना चाहिए जिस से इस औरत से पीछा छूट जाए।

समाधान-

दूसरी औरत तो हमें खराब नहीं लग रही है। खराब तो आप के पति हैं जो आप के होते हुए भी दूसरी औरत ला कर आप की छाती पर बिठा दी है। इस कारण पीछा छुड़ाना है तो अपने पति से छुड़ाइये, दूसरी औरत तो अपने आप छूट जाएगी। लगता है आप अपने पति को भगवान समझती हैं। पर भगवान तो वह नहीं है। वह तो ढंग का इन्सान भी नहीं है। वह भगवान होता तो ऐसे कोई औरत उसे परेशान कर लेती? हो सकता है दूसरी औरत से आप के पति ने अपने को अविवाहित बता कर शादी की हो और बाद में उसे पता लगा हो तो जो कुछ वह कर रही है, क्या गलत कर रही है?

आप के पति ने दूसरी शादी कर के गुनाह किया है, यह क्रूरता भी है। आप इस गुनाह की शिकायत पुलिस को कर सकती हैं। दूसरी शादी करने के कारण आप अपने पति से तलाक ले सकती हैं और गुजारा भत्ता मांग सकती हैं। आप अपना स्त्रीधन भी अपने पति से मांग सकती हैं।

आप को चाहिए कि आप पति के विरुद्ध धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता का आवेदन न्यायालय में भरण पोषण के लिए प्रस्तुत करें, घरेलू हिंसा अधिनियम में पति से अलग आवास की व्यवस्था करने और भरण पोषण की मांग करते हुए आवेदन करें तथा धारा 498-ए, 406, 494 के अंतर्गत पुलिस में रिपोर्ट लिखाएँ या न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करें। इतनी कार्यवाही करने पर ही आप के लिए कोई मार्ग निकल पाएगा।

पति से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति से पुनर्विवाह के कारण स्त्री को वंचित नहीं किया जा सकता

Muslim-Girlसमस्या-

पवन ने नरवाना, हरियाणा से पूछा है-

मेरे नाना की अचल संपत्ति है जो पुश्तैनी है। मेरे नाना के एक पुत्र और तीन पुत्रियाँ हैं। पुत्र की मृत्यु हो गयी है। उस की पत्नी ने दूसरा विवाह कर लिया है। क्या दूसरा विवाह करने के बाद भी वह स्त्री मेरे नाना की अचल संपत्ति में हिस्सा प्राप्त कर सकती है?

समाधान-

जिस क्षण एक सहदायिकी के किसी सदस्य का देहान्त होता है उस के हिस्से की संपत्ति का उत्तराधिकार निश्चित हो जाता है और उस के उत्तराधिकारी हिस्सेदार बन जाते हैं।

आप की मामी मामा का देहान्त होते ही उस सहदायिकी का हिस्सा बन गयी है जिस में आप के मामा का हिस्सा था अर्थात आप के नाना की पुश्तैनी संपत्ति में। एक बार वह हिस्सेदार हो गयी तो फिर उस के द्वारा फिर से विवाह कर लेने से उस की सहदायिकी की सदस्यता समाप्त नहीं होगी। वह अपने हिस्से के बंटवारे की मांग कर सकती है और न दिए जाने पर वह न्यायालय से बंटवारा करवा सकती है।

यदि आप के नाना की संपत्ति पुश्तैनी न हो और उन की स्वअर्जित हो तब भी हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार आप की मामी उन का हिस्सा प्राप्त करने की अधिकारी हैं। उन के दूसरा विवाह कर लेने से उन का यह अधिकार समाप्त नहीं होगा। इस संदर्भ में मद्रास उच्च न्यायालय का श्रीमती यमुना देवी बनाम श्रीमती डी नलिनी के प्रकरण में दिया गया निर्णय पढ़ा जा सकता है।

विदुर होने पर दूसरे विवाह पर कोई कानूनी बाधा नहीं।

rp_arya-marriage4.jpgसमस्या-

अभय ने ग्वालियर मध्यप्रदेश से पूछा है-

मैं दूसरी शादी करना चाहता हू पत्नी का देहान्त हो गया है। मेरे दो पुत्रियाँ हैं। एक की शादी कर दी है। ससुराल वाले और बेटियाँ शादी में रोक लगा रही हैं, समाधान बताएँ।

समाधान-

प की पत्नी का देहान्त हो चुका है, अब आप विदुर हैं। आप की कोई विवाहिता पत्नी जीवित नहीं है। आप के विवाह करने में किसी तरह की कोई कानूनी बाधा नहीं है। आप दूसरा विवाह कर सकते हैं।

आप की ससुराल वाले और बेटियाँ शादी न होने देने के लिए प्रयत्न कर रहे हैं। उन की सोच है कि आप की नयी पत्नी आने पर जो कुछ आप की बेटियों को आप से मिल रहा है अर्थात आप का प्यार और आप की संपत्ति उसे बाँटने वाला एक और प्राणी आ जाएगा। तब विवाहित पुत्री का हो सकता है मायके में पहले जैसा स्वागत और व्यवहार न मिले।  दूसरी बेटी जो अविवाहित है उस के लिए आप अच्छा वर न ढूंढेंगे। उस के विवाह में कसर रखेंगे। विवाह होने तक आप की नयी पत्नी से उन्हें सौतेला व्यवहार मिलेगा। आप के ससुराल वालों का कद आप के परिवार में पहले जैसा न रह कर घट जाएगा।

आप की ये समस्याएँ पारिवारिक व सामाजिक है। आप इन सब को इन बिन्दुओं पर विश्वास दिलाएंगे तो ये भी आप के दूसरे विवाह के प्रति सहमत हो जाएंगे। यदि यह संभव न हो तो भी आप इन सब की अवहेलना कर के विवाह कर सकते हैं। बाद में सब अपने आप एडजस्ट हो जाता है।

हिन्दू विधि में पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह अनुमत नहीं,अपराध भी है।

rp_judicial-sep8.jpgसमस्या-

डीके ने मिर्जापुर उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरी शादीको तीन वर्ष हो गये जिस में मेरी पत्नी मेरे साथ केवल सात माह रही है। मेरी एक बेटी है जो मेरी पत्नी को पसन्द नहीं थी। 4 दिन की थी तब से मेरे पास थी, मुश्किल से मैं ने उसे पाला। बच्चा उस के पास रहे इस के लिए अनेक बार कोशिश की पर उस के माता पिता ने हर कोशिश को असफल कर दिया। मैं ने बाध्य हो कर धारा 9 में दाम्पत्य की पुनर्स्थापना का आवेदन प्रस्तुत किया। तब पुलिस के माध्यम से बेटी को उस ने ले लिया। पत्नी को मिर्गी आती है, वह मेरे परिवार के पूर्ण नहीं कर पा रही है। मुझे क्या करना चाहिए क्या तलाक की अर्जी प्रस्तुत करनी चाहिए या फिर बीमारी को सामने रखते हुए दूसरे विवाह की अनुमति प्राप्त करनी चाहिए?

समाधान-

हिन्दू विवाह अधिनियम में एक पत्नी के रहते दूसरा विवाह पूरी तरह से वर्जित है। किसी न्यायालय को इस तरह की अनुमति देने का क्षेत्राधिकार ही नहीं है। यदि आप को वैध दूसरा विवाह करना है तो आप को अपनी पहली पत्नी से विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त करनी होगी। अन्यथा यह विवाह अपराध भी हो जाएगा।

यदि आप दूसरा विवाह करना चाहते हैं तो आप को विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त करनी होगी। इस के लिए आप को तुरन्त आवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर देना चाहिए। मिर्गी आना तलाक का आधार नहीं हो सकता, इस कारण पत्नी द्वारा आप का लम्बे समय से त्याग और क्रूरता पूर्ण व्यवहार उस का आधार हो सकता है। किसी स्थानीय अच्छे वकील से सलाह करें जिस से वह आप से बातचीत कर के अन्य आधारों की तलाश कर के कार्यवाही कर सके।

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