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दूसरा विवाह साबित हुए बिना जारकर्म का अपराध साबित नहीं किया जा सकता।

rp_188157_142310595795100_543578_n.jpgसमस्या-

सीता गुप्ता ने मैसूर, कर्नाटक से समस्या भेजी है कि-

में सीता गुप्ता मैसूर निवासी हूँ। वर्ष 2000 में मेरा विवाह दिल्ली निवासी आर एस अग्रवाल के साथ हुआ था। विवाह के 4 वर्ष बाद पारिवारिक कलह के कारण मैं अपने दो बच्चों को लेकर मायके आ गयी और 125 के मुक़दमे से गुज़ारा भत्ता मुझे मिलने लगा। 2004 से मैं अपने पति से किसी संपर्क या सम्बन्ध के बिना अपने माता-पिता के पास अपने दो बच्चों उम्र 14 साल और 12 साल के साथ रह रही हूँ। मुझे पता लगा है कि मेरे पति ने किसी महिला से अपने सम्बन्ध बना लिए और उनके एक पुत्र भी है। मैंने प्रयास करके उनके पुत्र के पासपोर्ट की नक़ल प्राप्त कर ली जिसमें माता-पिता के स्थान पर मेरे पति और उस महिला का नाम लिखा हुआ है। मेरे पति और उस महिला के पासपोर्ट की नक़ल भी मुझे मिल गई है जिसमें महिला के पासपोर्ट में पति के नाम का स्थान और मेरे पति के पासपोर्ट में पत्नी के नाम का स्थान खाली है। उन दोनों के विवाह का कोई सबूत मेरे पास नहीं है लेकिन वे रहते इक्कठे ही हैं। मेरे वकील का कहना है कि उन्हों ने शादी नहीं की है वे लिव-इन-रिलेशन में रहते हैं इसलिए कोई कारवाई नहीं की जा सकती है। चूँकि, मेरे पति ने उस बच्चे को अपना नाम पासपोर्ट में दिया हुआ है तो क्या इन परिस्थितियों में मैं अपने पति के खिलाफ बायगेमी या अडलट्री या कोई अन्य केस कर सकती हूँ?

समाधान-

बायगेमी का तो कोई अपराध आप के पति के विरुद्ध नहीं बनता है। धारा 494 आईपीसी में बायगेमी का जो अपराध है उस में कोई पति किसी पुरुष के विरुद्ध तभी संस्थित कर सकता है जब दूसरे पुरुष ने उस की पत्नी के साथ यौन संबंध बनाए हों।

धारा 497 में (Adultery) जारकर्म का जो अपराध वर्णित है वह भी तभी अपराध है जब कि पति या पत्नी ने अपने पति या पत्नी के रहते दूसरा विवाह कर लिया हो। यदि आप के पति किसी स्त्री के साथ लिव इन में रहते हैं तो इसे दूसरा विवाह होना नहीं कहा जा सकता। इस कारण आप धारा 497 में भी कोई परिवाद न्यायालय मे तभी दर्ज करवा सकती हैं जब कि पति ने दूसरा विवाह कर लिया हो। पति के पासपोर्ट में पत्नी का नाम और पत्नी के पास पोर्ट में पति का नाम दर्ज नहीं है लेकिन पुत्र के पासपोर्ट में पिता का नाम दर्ज है। यह लिव इन में होना संभव है।

किसी का पुत्र होने के लिए यह कतई जरूरी नहीं है कि उस के पिता का उस की माता के साथ विवाह हुआ ही हो। लिव इन रिलेशन से भी संतान का जन्म हो सकता है और उस की मां या पिता जन्म-मृत्यु पंजीयक के यहाँ पुत्र का जन्म पंजीकृत करवा सकता है। उस जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर पुत्र का पासपोर्ट बन सकता है।

ब तक आप यह सिद्ध करने की स्थिति में न हों कि आप के पति ने दूसरा विवाह कर लिया है आप यदि परिवाद करेंगी तो वह मिथ्या साबित हो सकता है और आप एक दुर्भावनापूर्ण अभियोजन के मामले में फँस सकती हैं।

दूसरा विवाह करने से पूर्व पति से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति का अधिकार समाप्त नहीं होता।

rp_gavel10.jpgसमस्या-

कंचन ने पाली, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरा नाम कंचन है। मेरी शादी शिवगंज जिला सिरोही में हुई। मेरे एक पुत्र और एक पुत्री है। मेरे पति का ज्यादा शराब पीने की वजह से स्वर्गवास हो गया। मेरी उम्र 28 वर्ष की है। मेरे परिवार वाले मेरा नाता विवाह ब्यावर करना चाहते हैं। क्या मेरा नाता विवाह होने के बाद मेरे शिवगंज वाले पुत्र व् पुत्री को मेरे स्व पति के पैतृक जायदाद से कानूनन अधिकार मिलेगा?

समाधान

कोई भी ऐसी संपत्ति जिस में आप के पति को हिस्से का अधिकार प्राप्त था तथा ऐसी संपत्ति जो उन के स्वयं के स्वामित्व की थी उस का उत्तराधिकार आप के पति के देहावसान के समय ही निश्चित हो चुका है उस संपत्ति में आप के पुत्र व पुत्री को तथा आप का हिस्सा निहीत हो चुका है। दूसरा विवाह करने से उत्तराधिकार में प्राप्त संपति पर आपका अधिकार समाप्त नहीं होगा।

दि आप विवाह या नाता कुछ भी करती हैं तो उस से यह अधिकार समाप्त नहीं हो सकता। ने केवल आप के पुत्र पुत्री का अपितु आप का भी, तीनों का अधिकार उस संपत्ति में बना रहेगा। आप या आप के पुत्र पुत्री जब चाहें तब उस संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने के लिए बंटवारे का वाद संस्थित कर सकती हैं। बेहतर तो यह है कि आप का नाता विवाह होते ही आप इस संपत्ति के बंटवारे का वाद संस्थित कर दें जिस से उक्त संपत्ति खुर्द बुर्द नहीं की जा सके।

दूसरा विवाह कर लेने से पूर्व पति से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति का अधिकार समाप्त नहीं होता।

rp_gavel11.jpgसमस्या-

कंचन ने पाली, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरा नाम कंचन है। मेरी शादी शिवगंज जिला सिरोही में हुई। मेरे एक पुत्र और एक पुत्री है। मेरे पति का ज्यादा शराब पीने की वजह से स्वर्गवास हो गया। मेरी उम्र 28 वर्ष की है। मेरे परिवार वाले मेरा नाता विवाह ब्यावर करना चाहते हैं। क्या मेरा नाता विवाह होने के बाद मेरे शिवगंज वाले पुत्र व् पुत्री को मेरे स्व पति के पैतृक जायदाद से कानूनन अधिकार मिलेगा?

समाधान

कोई भी ऐसी संपत्ति जिस में आप के पति को हिस्से का अधिकार प्राप्त था तथा ऐसी संपत्ति जो उन के स्वयं के स्वामित्व की थी उस का उत्तराधिकार आप के पति के देहावसान के समय ही निश्चित हो चुका है उस संपत्ति में आप के पुत्र व पुत्री को तथा आप का हिस्सा निहीत हो चुका है।

दि आप विवाह या नाता कुछ भी करती हैं तो उस से यह अधिकार समाप्त नहीं हो सकता। ने केवल आप के पुत्र पुत्री का अपितु आप का भी, तीनों का अधिकार उस संपत्ति में बना रहेगा। आप या आप के पुत्र पुत्री जब चाहें तब उस संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने के लिए बंटवारे का वाद संस्थित कर सकती हैं। बेहतर तो यह है कि आप का नाता विवाह होते ही आप इस संपत्ति के बंटवारे का वाद संस्थित कर दें जिस से उक्त संपत्ति खुर्द बुर्द नहीं की जा सके।

आप को अपने प्यार की अवश्य मदद करनी चाहिए।

handshakeसमस्या-

अनाम चंद ने बागपत, उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मैं एक लड़की को पिछले १२ सालो से प्यार करता हूँ और वो भी मुझे बेपनाह चाहती है। मगर गोत्र एक होने के कारण हमारी शादी नहीं हो पायी। तब हम दोनों ने अपने घर वालों की इज्जत के कारण एक दूसरे से अलग होने का फैसला किया। उसके बाद उस लड़की ने अपने बीमार पिता की इज्जत रखने के लिए कहीं और उनके कहने पर शादी कर ली। इस तरह हम दोनों अलग हो गए। मैंने कभी उससे कांटेक्ट करने की कोशिश नहीं की। मैं नहीं चाहता था कि मेरे कारण उसका वैवाहिक जीवन बाधित न। उसके माँ और पिताजी की मृत्यु हो गयी। इस बीच मेरे भी पापा जी भी नहीं रहे। मगर मैंने अपने से छोटी दोनों बहनों की शादी कर दी है। मगर मुझे अब पता चला कि उस लड़की की किस्मत खराब निकली। उसका पति पागल है कई बार उसे मारने की कोशिश कर चुका है। एक बार उसका गला घोंटकर और एक बार चाकू से, दोनों बार उसे उसके घरवालों ने बचाया। होने को तो उसके तीन बच्चे भी हैं मगर वो उसने ससुरालवालों के दबाव में किये थे। उन्हें डर था कि कहीं वो उन्हें छोड़कर न चली जाये। उस लड़की का नाम कविता है कविता बताती है कि उसका पति कई कई दिन बाहर घूमता रहता है, काफी इलाज भी करा लिया उसका मगर कोई फायदा नहीं है। जब भी घर आता है तब गाली गलौच करता है, मारपीट तो आम बात है। सास ससुर भी बाहर से दरवाजा बंद करके निकल जाते हैं। कोई छुड़ाने की कोशिश नहीं करता। क्योकि फिर वो उनके साथ भी मारपीट करता है। जब भी कोई मेहमान घर आता है तो उनसे पैसे मांगने लगता है। अगर कोई बच्चा कुछ चीज खाता हुआ मिल जाता है तो उससे छीन लेता है और न देने पर उसे मारता है। कविता बताती है कि वो अपने पति के घर आने पर डर जाती है कई बार वो डर के कारण पशुओं के कमरे में भी सोई है और एक बार जिंदगी से तंग आकर आत्महत्या की कोशिश भी कर चुकी है। मगर उसके ससुरालवालों ने उलटी करवाकर उसे बचा लिया। मुझ से ये सब नहीं देखा जाता। में उस से शादी करना चाहता हूँ। वो मेरे साथ कहीं भी चलकर रहने को तैयार है। मगर उस के पहले पति से बिना तलाक के ये सब नहीं हो सकता। और उसके मायके में कोई भी ऐसा नहीं है जो उसकी तलाक के मामले में मदद कर सके। क्यों कि वो सब अपनी झूठी इज्जत के कारण चुप रहेंगे। कविता ने अपने ताऊ और बाकी सब से भी बात करने की कोशिश की। मगर सब यही कहते है के जहाँ दस साल काट लिए वहाँ और वक़्त भी कट जायेगा। अभी एक महीने पहले कविता ने मायके आकर वापस जाने से मना कर दिया था। तब उसके ससुराल वालों ने उसके पति को पागलखाने एडमिट करने का वादा करके उसे नशा मुक्ति केंद्र में एडमिट करा दिया है और वो दो महीने से वहीं है। मगर लगता है वो लोग जल्दी ही उसकी छुट्टी कराकर उसे वापस ले आयेंगे और फिर से वही सब आरम्भ हो जायेगा। मुझे क्या करना चाहिए मुझे कुछ समझ नहीं आता मैं उसके लिए कुछ करना चाहता हूँ। मैंने आज तक शादी नहीं की और उसके अलावा किसी से करना भी नहीं चाहता। आप मेरी मदद करें। क्या उस की पहली शादी से तलाक लिए बिना मैं किसी तरीके से क़ानूनी रूप से उसे अपना बना सकता हूँ।

समाधान

नाम चन्द जी¡ आप उस महिला कविता से प्यार करते हैं तो आप को उस की मदद अवश्य करनी चाहिए। लेकिन तलाक लिए बिना कविता से विवाह नहीं कर सकते। इस कारण सब से पहला काम यह होना चाहिए कि आप उसे तलाक लेने में मदद करें। फिलहाल वह अपने मायके में रह रही है। आप उस से मिल कर उसे तलाक लेने के लिए तैयार करें। उसे क्रूरता और पति के पागलपन के कारण तलाक मिल सकता है। यदि तलाक की अर्जी लगाने के पहले या बाद में उस के मायके वाले भी उस का साथ देने या उस के तलाक लेने में अड़चन पैदा करें तो आप उसे अपने घर ला कर रख सकते हैं। लेकिन उस का यह रहना एक आश्रित का आप के साथ रहना होगा, एक पत्नी की तरह आप उसे नहीं रख सकेंगे।

प के घर या आप के साथ आ कर रहने के पहले उस का शपथ पत्र नोटेरी पब्लिक के पास जरूर करवा कर रख लें जिस में उस की सारी परिस्थितियों का संक्षेप में वर्णन करते हुए वह कहे कि पति के साथ ससुराल में रहना संभव नहीं रह गया है और मायके में कोई नजदीकी रिश्तेदार नहीं है। इस परिस्थिति में आप उस की मदद करते हुए एक आश्रित के रूप में उसे अपने पास रखने को तैयार हैं और वह स्वैच्छा से आप के साथ रह रही है।

ब कविता का तलाक हो जाए तो उस के बाद आप उस महिला से विवाह कर सकते हैं। सगोत्रीय विवाह आप के इलाके में बहुत खराब नजर से देखे जाते हैं। इस से आप को कुछ सामाजिक परेशानियाँ हो सकती हैं। उन का ध्यान रखें और उन का मुकाबला कर सकने की स्थिति हो तो यह सब करें।

दूसरी पत्नी और पुत्र के होते हुए क्या पूर्व पत्नी को साथ रखा जा सकता है?

rp_two-vives2.jpg1समस्या-

सुशील ने चंदुआ, कांचरपारा पश्चिम बंगाल से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी 15 एअर पहले हुई थी। हम दोनों के बीच तनाव रहता था, बच्चों को लेकर मेरी पत्नी की तबीयत हमेशा खराब रहती थी। उन को बच्चे नहीं आ रहे थे, खराबी पत्नी को थी। हम ने बहुत ट्रीटमेंट भी लिया, पर हासिल कुछ भी नहीं हुआ। मेरी पत्नी ने अपने मायके वालों की बातों में आकर मुझ से 3 साल पहले डाइवोर्स ले लिया है। मैंने दूसरी शादी कर ली। मेरा दो वर्ष का बेटा है। अभी मेरी डाइवोर्स्ड पत्नी वापस मेरे पास आना चाहती है और बोलती है कि वाकई में खराबी उसके शरीर में है। उस के पेरेंट्स एक्सीडेंट मे मारे गये हैं। अभी वह बिल्कुल अकेली है। संबंधी भी सपोर्ट नहीं कर रहे हैं वह दूसरी शादी ना करके वापस मेरी दूसरी वाइफ और मेरे साथ रहना चाहती है। कृपया बताइए मुझे क्या करना होगा उस को अपना लू या नहीं।

समाधान-

पूर्व पत्नी से आप का कोई कानूनी रिश्ता नहीं है। यदि वह आप के घर में आप के साथ रहना चाहती है तो अब एक पत्नी की तरह नहीं रह सकती। उसे पूर्व जैसा सम्मान प्राप्त नहीं होगा। उसे हमेशा एक परित्यक्ता जैसा अहसास बना रहेगा। आप की दूसरी पत्नी को भी लगेगा कि उस के हिस्से का प्यार बंट गया है। इस से आप के वर्तमान वैवाहिक जीवन पर प्रभाव पड़े बिना नहीं रह सकता। इस बात पर पूरी तरह विचार कर लीजिए। आप को सहमति लेनी है तो अपनी वर्तमान पत्नी से लीजिए। यदि वह आप की इच्छाओँ का सम्मान करने के लिए नहीं अपितु स्वतंत्र रूप से मानवीयता के आधार पर प्रसन्नता पूर्वक सहमति देती है तो आप पूर्व पत्नी को साथ रख सकते हैं।

प पूर्व पत्नी से दुबारा विवाह नहीं कर सकते। क्यों कि यह अवैध होगा। यदि वह आप के साथ एक परिचित के रूप में रहती है तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। पर वह पूर्व पत्नी है। जीवन के अंतरंग हिस्से आप के साथ गुजारे हैं। यदि उस के और आप के बीच शारीरिक संबंध बनते हैं तो यह जारता होगी। उस पर आप की वर्तमान पत्नी को भविष्य में आपत्ति हो सकती है। इस से आप के अपनी वर्तमान पत्नी के साथ संबंध खराब हो सकते हैं।

मने आप को इस समस्या के विभिन्न पहलू बताए। फिर भी यदि पूर्व पत्नी के मायके में कोई नहीं है और वह आप के साथ रहना चाहती है तो उसे बेसहारा छोड़ देना भी अमानवीयता होगी। आप उसे साथ रख सकते हैं लेकिन यह तभी ठीक से चलेगा जब तक आप, आप की पत्नी, आप की पूर्व पत्नी और बच्चे के बीच समरसता बनी रहती है।

आवास और भरण पोषण मांगा जा सकता है और दूृसरे विवाह पर रोक भी लगाई जा सकती है।

rp_two-vives.jpgसमस्या-

अपर्णा ने खोपोली, महाराष्ट्र से समस्या भेजी है कि-

मेरा विवाह 28 अप्रेल 2008 को हुआ था, मेरे पति नपुंसक हैं, लेकिन उन्हें एक बाबा ने कहा है कि वे दूसरा विवाह करेंगे तो उन्हें सन्तान हो जाएगी। इस कारण वे अब दूसरा विवाह करना चाहते हैं। मेरी ननदें, सास मुझे कहती हैं कि मैं उन्हें दूसरे विवाह की अनुमति दे दूँ। लेकिन मैं इस से सहमत नहीं हूँ। अन्त में उन्हों ने मुझे घर से निकाल दिया है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प अनुमति दे देतीं और आप के पति दूसरा विवाह कर लेते तब भी वह दूसरा विवाह अकृत और अवैध होता, क्यों कि हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 5 की उपधारा (i) का उल्लंघन होता।  अब जो कुछ आप के साथ हुआ है वह घरेलू हिंसा है, 498-ए आईपीसी में अपराध भी है। आप को सब से पहले तो पुलिस में रिपोर्ट लिखाना चाहिए। पुलिस न सुने तो आप को सीधे न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करना चाहिए। एक दीवानी वाद प्रस्तुत कर आप के पति के विरुद्ध इस आशय की निषेधाज्ञा प्राप्त करनी चाहिए कि वे आप के साथ विवाह विच्छेद होने तक दूसरा विवाह न करें।

स के अलावा आप निवास के लिए स्थान और अपने गुजारे के लिए गुजारा भत्ता भी मांग सकती हैं और इन दोनों के लिए आप घरेलू हिंसा अधिनियम और धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं।

लेकिन अब लगता है कि आप के पति में जो स्नेह था वह भी समाप्त हो गया है। इस स्थिति में आप अपने पति से लड़ तो सकती हैं और आवास व गुजारा भत्ता तो प्राप्त कर सकती हैं लेकिन एक सामान्य गृहस्थ जीवन संभव नहीं है। अभी आप के विवाह को अधिक समय नहीं हुआ है और आप की उम्र भी अधिक प्रतीत नहीं होती। आप यदि अपने पैरों पर खड़ी हो कर आत्म निर्भर हो सकती हैं तो उस के लिए प्रयत्न कीजिए। यदि आप के लिए संभव हो कि दूसरा बेहतर जीवनसाथी तलाश सकें तो अपने इस पति से तलाक ले कर आप दूसरा विवाह कर अपनी गृहस्थी बसा सकती हैं। हमारा मानना है कि एक विवादित संबंध में बने रहने से अच्छा है उसे समाप्त कर एक नए संबंध के लिए प्रयास करना। जीवन का काल बहुत सीमित है उसे बेहतर से बेहतर तरीके से जीने का प्रयास करना चाहिए।

मुस्लिम पुरुष का दूसरा विवाह कानून से रोक पाना संभव नहीं।

rp_Muslim_Women1.jpgसमस्या-
फऱहा ने सूरत गुजरात से समस्या भेजी है कि –
मैं मुस्लिम लड़की हूँ। मैं ने अपने पति पर 125 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत केस किया है।  उन्होंने मुझे कुछ समय पहले तलाक़ नामा भेजा वो इस्लाम के हिसाब से सही तलाक़ नहीं है। मैं जानना चाहती हूँ कि क्या मैं उन को दूसरी शादी करने से रोक सकती हूँ? वो दूसरी लड़कियाँ देख रहे हैं और शादी करेंगे। तो क्या क़ानूनी या किसी भी तरह से मैं उन को रोक सकती हूँ? उन का वेतन 45000 प्रतिमाह है उन की जिम्मेदारी में उन की माँ है और उन के 5 भाई दूसरे भी हैं ओर मेरा एक 3 साल का बेटा है तो मुझे कितना पैसा मिल सकता है।

समाधान-

दि आप का तलाक इस्लाम के हिसाब से सही नहीं है तो न्यायालय भी इसे तलाक नहीं मानेगा। भारतीय न्यायालयों का मानना है कि पहले तलाक के उपरान्त बिना समझाइश की प्रक्रिया के अन्तिम तलाक देने से तलाक नहीं होता। ऐसे तलाकों को भारतीय न्यायालयों ने अकृत तलाक माना है।

स्लामी विधि शरीया के अनुसार है। जिस में एक पुरुष एक साथ चार पत्नियाँ रख सकता है। इस तरह एक मुस्लिम पुरुष एक विवाहिता के होते हुए भी तीन और विवाह कर सकता हैं। दूसरा विवाह करने के लिए किसी मुस्लिम पुरुष को उस की पहली पत्नी की अनुमति लेना भी जरूरी नहीं है। इस कारण से किसी प्रक्रिया के द्वारा किसी मुस्लिम पुरूष द्वारा किए जाने वाले दूसरे निकाह को रोक पाना संभव नहीं है।

प के पति पर उस की माँ और आप के पुत्र की जिम्मेदारी है। पाँच भाई यदि अवयस्क हैं तो उन की जिम्मेदारी भी मानी जाएगी। यदि सब के पालन पोषण की जिम्मेदारी भी आप के पति की मानी जाए तब भी धारा 125 के अन्तर्गत रुपये 5000 से 10,000 तक भरण पोषण राशि प्रतिमाह आप को अपने पति से प्राप्त हो सकती है।

पूर्व पत्नी से विवाह विच्छेद की डिक्री न्यायालय से प्राप्त नहीं की, वही वैध पत्नी है और भरण पोषण की अधिकारी है।

समस्या-

लोकनाथ साहु ने छत्तीसगढ़ के टिकारापाड़ा से समस्या भेजी है कि-

मैं रायपुर के एक स्कुल मे व्याख्याता पद पर कार्यरत हूँ। मेरा विवाह 1986 में हुआ था। और कुछ दिनों बाद मेरी पत्नी से मेरा झगड़ा होना चालू हो गया, घर में भी सभी सदस्यों से उनका हमेशा झगड़ा होता रहता था। मेरी पत्नी बार बार मायके चली जाती थी और मैं बार बार उनको लेने जाता था। मेरी पत्नी के मायके वाले मुझे धोखा देकर ये ‘शादी करवाये थे। मेरी पत्नी बचपन से ही विकलांग थी। ये सब ‘शादी के बाद पता चला जब मेरी पत्नी की विकलांगता बढ़ती गई, इस विकलांगता के कारण मेरा वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं रह पाता था। उन्होने मुझे धोखा देकर मेरी दांपत्य जीवन से खिलवाड़ किये। तभी मैंने अपनी ‘शादी के 6 महीने बाद सामाजिक तौर से उन्हे तलाक दे दिया उसके बाद वो अपनी मायके में रहने लगी और 3 माह बाद पुत्र को जन्म दिया। मैं पुत्र को लेने भी गया मगर उन्होंने मुझे पुत्र को देखने भी नहीं दिया और मेरे उपर दबाव बनाया गया कि मैं दूसरी ‘शादी कर लूँ। मैं कब तक उनका और अपने पुत्र का इंतजार करता। मुझे भी तो अपने जीवन में आगे बढ़ना था। इसलिए मैं ने उनकी सहमति से दूसरी ‘शादी कर लिया। उसके बाद भी मैं अपने पहली पत्नी और बच्चे से कभी कभी मिलने जाता था और मुझसे जैसा बन पाता मैं उनकी आर्थिक मदद करता था। मैं उस समय एक प्राइवेट नौकरी करता था मुझसे ज्यादा मेरी पहली पत्नी के मायके वाले सम्पन्न थे। मैं जब भी जाता मुझे अपने पुत्र से मिलने नहीं दिया जाता था। 1995 में मुझे सरकारी नौकरी मिली व्याख्याता पद पर। उसके बाद मैं बीच बीच में जाकर उनकी आर्थिक मदद करता रहा और अपनी पहली पत्नी के पुत्र की पढ़ाई का खर्चा उठाता रहा फिर 2010 में मेरा पुत्र मेरे पास आया पढ़ाई के लिये और ज्यादा आर्थिक मदद मांगने के लिए। उस समय मैं ने अपने पहली पत्नी के पुत्र को 3 लाख रु. दिया जिसका मेरे पास कोई लिखित साक्ष्य नहीं है। इसी बीच मेरी पत्नी ने मुझ से अपने भरण पोषण की मांग कि मगर मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी उसके बाद भी मुझे मजबूरी वश कर्ज लेकर उन्हे समाजिक तौर पर 3 लाख रु. एकमुश्त राशि देना पड़ा, उस राशि को मैं ने उसके पुत्र के खाते में डलवाया जिसका पर्ची मेरे पास है। वर्तमान में मैं कुल 10 लोगों का भरण पोषण कर रहा हूँ। मेरी दुसरी पत्नी और दुसरी पत्नी से प्राप्त दो पुत्री और दो पुत्र, अपनी माता जी और अपनी विधवा बहन जिसका इस दुनिया मे मेरे सिवा कोई नहीं है और मेरी विधवा बहन की तीन पुत्रियों का, सभी के भरण पोषण का भार मेरे ही उपर है। मेरी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है हमेशा कर्ज से लदा रहता हूँ। जिसकी वजह से मैं अपने वर्तमान 4 बच्चो को उच्च शिक्षा नहीं दे पाया, मगर मै अपनी पहली पत्नी के पुत्र को एमबीए कोर्स करवाया ताकि आगे भविष्य मे मेरा पुत्र अपना और अपनी माँ का भरण पोषण कर सके। मेरी पहली पत्नी का पुत्र 27 वर्ष का है जो 2010-2012 तक एमबीए कोर्स पूरा कर लिया था। अब वर्तमान (जनवरी 2014) में मेरी पहली पत्नी भरण पोषण के लिए और राशि मांगने लगी मगर मेरी स्थिति किसी भी प्रकार से राशि देने लायक नही थी मुझ पर बहुत कर्ज था मैं 2011-2012-2013 में अपने तीनो भांजी की शादी की, जिसका कर्ज आज तक चुका नहीं पाया हूँ और अब मुझे अपनी दोनों पुत्रियों की ‘शादी करना है मेरी पहली पत्नी ने जनवरी 2014 से मार्च 2014 तक भरण पोषण की राशि के लिए बहुत दबाव बनाया मगर मेरी स्थिति ही देने लायक नही थी तो मै कहाँ से लाकर उनको पैसा देता। उसके बाद जून 2014 में मेरी पहली पत्नी और उनका पुत्र मिलकर कुटुम्ब न्यायालय रायपुर में धारा 125 के तहत भरण पोषण के लिए केस कर दिए हैं और मेरे द्वारा बताए गए सभी उपरोक्त कथन को झूठा करार दिया जा रहा है मुझे जबरदस्ती फँसाया जा रहा है कि मैं ने बिना तलाक के दूसरी ‘शादी की है और आवेदिका को मार पीट कर प्रताडित करके अपने घर से भगाया जिसकी वजह से आज आवेदिका विकलांग हो गयी है। इस तरह से न्यायालय में झूठा, बनावटी आवेदन प्रस्तुत किया गया है। मेरा वेतन 50000 महिना है और मेरा किसी भी प्रकार से आय का साधन नहीं है मेरी पहली पत्नी ने महिना 15000 और अंतरिम राशि भी 15000 की मांग की है जिसका न्यायालय द्वारा अंतरिम राशि 8000 रु फैसला किया गया है जिसे वर्तमान में मै देने के लिए सक्षम नहीं हूँ। पर भी मजबूरीवश देना पड़ रहा है। महोदय मेरा सवाल यह है कि मैं ने अपनी पहली पत्नी और पुत्र के लिए इतना सब कुछ किया उसके बाद भी उन लोगों ने मुझसे दुश्मनी रखी। उन्होने तलाक के 27 वर्ष बाद केस दायर किये हैं। आपके हिसाब से न्यायालय द्वारा अंतरिम राशि के लिए कितना रु. फैसला दिया जाना चाहिये था और अंतिम फैसला कितना रु. तक का दिया जा सकता है वैसे आवेदिका विकलांग है। न्यायालय द्वारा मेरे पक्ष मे फैसला नहीं हो सकता क्या? मेरे पक्ष के लिए आपके हिसाब से अच्छे से अच्छा समाधान बताइए, और वे लोग आपसी समझौते के लिए भी तैयार नहीं हैं। मेरा एक और सवाल है कि मेरी पहली पत्नी के पुत्र ने बंजर भूमि सम्पत्ति के लिए जिला न्यायालय रायपुर में भी केस दायर किया है मेरे पास जो भी भूमि है सभी अपने आय से अर्जित (स्वअर्जित) भूमि है मेरे पास एक भी भूमि पैतृक सम्पत्ति नहीं है क्या मुझे अपने पुत्र को भूमि में हिस्सा देना पड़ेगा?

समाधान-

प का विवाह 1986 में सम्पन्न हुआ था उस के 31 वर्ष पूर्व भारत में हिन्दू विवाह अधिनियम पारित हो कर अस्तित्व में आ चुका था। जिस में यह उपबंधित किया गया था कि कोई भी व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते उस से विवाह विच्छेद किए बिना दूसरा विवाह नहीं कर सकता। यदि ऐसा दूसरा विवाह किया जाता है तो वह अवैध होगा। इस अधिनियम के पूर्व की स्थिति यह थी कि हिन्दू विवाह में विवाह विच्छेद संभव नहीं था। एक बार विवाह हो जाने के उपरान्त दोनों सदैव के लिए पति पत्नी रहते थे। इस अधिनियम से पहली बार हिन्दू विधि में विवाह विच्छेद होना आरंभ हुआ। लेकिन यह विवाह विच्छेद केवल न्यायालय की डिक्री से ही हो सकता था।

स तरह आप की जो स्थिति है उस के अनुसार आप ने अपनी पहली पत्नी से विवाह विच्छेद की डिक्री न्यायालय से प्राप्त नहीं की है और वह अभी भी आप की वैध पत्नी है। आप का कथन है कि आप ने अपनी पहली पत्नी और उस के मायके वालों की सहमति से दूसरा विवाह किया है। लेकिन इस सहमति का कोई सबूत नहीं है। पत्नी से विवाह विच्छेद किए बिना आप उस की सहमति से भी विवाह नहीं कर सकते थे। इस कारण से आप का दूसरा विवाह वैध नहीं है। हालांकि दूसरे विवाह से उत्पन्न आप के सभी बच्चे आप की वैध संतानें हैं।

प आप की विधिक स्थिति यह है कि पहली पत्नी आप की वैध पत्नी है जिस से आप के एक वयस्क पुत्र है। दूसरी पत्नी आप की वैध पत्नी नहीं है लेकिन उस से उत्पन्न संताने वैध हैं। इस तरह आप की पहली पत्नी को आप से भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार है। आप ने पूर्व में उसे मदद की है और पुत्र को पढ़ाया लिखाया है तो ये आप का कर्तव्य था। उस को करने के कारण आप आज अपनी पहली पत्नी को भरण पोषण देने बच नहीं सकते। उसे भरण पोषण देना पड़ेगा। न्यायालय ने जो राशि आप की पत्नी के भरण पोषण के लिए अंतरिम रूप से तय की है वह भी उचित प्रतीत होती है और आप पर 10 व्यक्तियों के भरण पोषण का भार होने की स्थिति को देखते हुए ही दिलायी जानी प्रतीत होती है। अन्यथा स्थिति में यह 15-20 हजार तक की हो सकती थी।

प का पूर्व पत्नी से उत्पन्न पुत्र वयस्क है और अपना भरण पोषण करने में समर्थ है इस कारण से वह आप से भरण पोषण व अन्य खर्चे मांगने का अधिकारी नहीं है। यदि न्यायालय किसी भी प्रकार से इस 8000 रुपए प्रतिमाह के भरण पोषण के खर्चे को स्थाई कर देता है तो आप को इसे बड़ी राहत समझना चाहिए। आप पर बहुत खर्चे हैं आप की आय कम है। यह तो आप को उस समय सोचना चाहिए था जब आप अपने परिवार को बढ़ा रहे थे। अब सोचने से कुछ नहीं होगा। आप केवल एक स्थिति में इन परिस्थितियों से बच सकते थे कि पहले ही पूर्व पत्नी से सहमति से विवाह विच्छेद और स्थाई भरण पोषण की राशि न्यायालय से तय करवा लेते जिस से आप को उन दायित्वों से मुक्ति मिल जाती। लेकिन अब यह सब संभव प्रतीत नहीं होता।

प की जो भी संपत्ति आप की स्वअर्जित है उस पर आप की किसी भी पत्नी या संतान का कोई अधिकार नहीं है। आप के पहले पुत्र ने जो दावा किया है वह चलने योग्य नहीं है। आप अपनी स्वअर्जित संपत्ति को किसी को भी विक्रय कर सकते हैं या हस्तान्तरित कर सकते हैं या उस की वसीयत भी कर सकते हैं। उस में कोई बाधा नहीं है।

परित्यक्त गर्भवती पत्नी तुरन्त घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम में आवेदन करे।

victim womenसमस्या-
कंचन ने इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

रीब 2.5 साल पहले हमरा प्रेम विवाह हुआ था। हम साथ रहते थे। अचानक एक दिन ऑफिस का कुछ काम बता कर 4 दिन के लिए चले गये और फिर मुझे 15 दिन बाद पता चला कि अपने घर वालो की मर्ज़ी से दूसरी शादी कर लिए हैं। जब मैं उनके घर गई तो उस समय डर की वजह से मेरे पति को मेरे साथ भेज दिया। मेरे पति 6 दिन मेरे साथ रहे उन 6 दिनों के अंदर उन्होने तलाक़ के लिए मुक़दमा कर दिया। लेकिन मैं तलाक नहीं चाहती हूँ। क्यूंकि मैं 6 माह की प्रेग्नेंट हूँ और मैं अपने पति के साथ रहना चाहती हूँ। जो दूसरी शादी हुई है लड़की के घर वाले सब कुछ जान चुके हैं। लेकिन वे मेरे ससुराल वालों का साथ दे रहे हैं। वे चाहते हैं मुझे मेरा पति छोड़ दे और वे अपनी बेटी को उस घर मे रखें। अभी मेरे पति  1 माह से मुझे छोड़ कर जा चुके हैं। मैं चाहती हूँ कि मुझे उस घर में और मेरे पति के साथ रहने का न्याय मिले और इस में टाइम ना लगे। फिलहाल मुझे तलाक देने का कोई सुबूत उन के पास नहीं है। अगर मैं उस घर में क़ानून के साथ रहने का परमीशन मिल जाए और वे लोग मुझे कोई क्षति ना पहुँचा पाएँ। कृपया इसका कोई रास्ता बताएँ।

समाधान-

ब भी आप कानून के पास जाएंगी तो वह आप से सबूत मांगेगा। आप ने प्रेम विवाह किया था तो आप के पास उस का सबूत होना चाहिए। आप ने यह नहीं बताया कि आप ने विवाह किस विधि से किया था। यदि आप के विवाह का ठोस सबूत है तो आप को कार्यवाही करने में आसानी होगी। विवाह का पंजीकरण कहीं हुआ है और उस का प्रमाण पत्र आप के पास है तो यह एक ठोस सबूत है।

कोई भी कानून किन्हीं दो व्यक्तियों को साथ रहने को बाध्य नहीं कर सकता। लेकिन यदि वे पति पत्नी हैं तो उन्हें दाम्पत्य निभाने का आदेश दे सकता है। यदि ऐसे आदेश का निर्वाह कोई पक्ष नहीं करता है तो पीड़ित पक्ष दूसरे से तलाक प्राप्त कर सकता है। मेरी समझ में जो व्यक्ति दो वर्ष में ही अपनी पत्नी को छोड़ कर परिवार के दबाव में दूसरा विवाह कर ले उस के साथ रहना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है। यह आप के आत्मसम्मान के भी पूरी तरह विरुद्ध है।

प के पति द्वारा दूसरा विवाह किए जाने के सबूत आप के पास हैं और आप कानून के समक्ष सिद्ध कर सकती हैं कि पति ने दूसरा विवाह किया है तो यह एक अपराध है आईपीसी की धारा 494 के अन्तर्गत अपराध है। यदि आप के और आप के पति के बीच विवाह का कोई ऐसा सबूत नहीं है जिस से विवाह प्रमाणित किया जा सकता हो और आप के पति आप के साथ हुए विवाह से इन्कार करें तो आप के साथ बिना विधिपूर्वक विवाह के रहना, सहवास करना और आप का गर्भवती हो जाना आप के पति का गंभीर अपराध है जिस में उन्हों ने धारा 393 का अपराध किया है। साथ ही धारा 376 के अन्तर्गत बलात्कार का अपराध भी किया है। निश्चित ही ऐसे अपराधी के साथ आप का जीवन निर्वाह नहीं हो सकता है।

वास्तव में आप की समस्या और उस लड़की व उस के परिवार वालों की समस्या एक ही है जो इस सामाजिक मूल्य के कारण है कि यदि कोई जानबूझ कर या धोखे से भी किसी लड़की के साथ कोई यौन अपराध घटित कर दे तो उस के लिए अपराधी को सजा हो या न हो। लेकिन समाज उस लड़की को हमेशा दोषी और अपवित्र मानने लगता है। यदि प्रेम विवाह हुआ हो, पत्नी गर्भवती हो और पति उसे छोड़ दे, तलाक की कार्यवाही कर दे या फिर बच्चे व उस की माता की परवरिश करने से इन्कार कर दे तो निश्चित ही उस महिला और बच्चे के लिए सब से बड़े संकट की बात है।

प ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि पति ने तलाक की अर्जी लगा देने की बात आपने कही है वह किस आधार पर की है, क्या आप को न्यायालय से समन मिला है? आप के पति के पास कोई मजबूत आधार तलाक प्राप्त करने के लिए नहीं दिखाई देता है इस कारण से यदि अर्जी लगा भी दी गई हो तो भी तलाक मंजूर होना संभव नहीं है।

 यदि आप के पास अपने विवाह का सबूत है तो आप को तुरन्त पुलिस में यह शिकायत दर्ज करानी चाहिए कि आप के पति ने आप को छोड़ कर दूसरा विवाह कर लिया है। आप के साथ क्रूरता का व्यवहार किया है। इस के साथ ही आप को से ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम’ के अंतर्गत न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करते हुए तुरन्त इस अंतरिम राहत की प्रार्थना करनी चाहिए कि आप को अपने पति के घर में अथवा अन्यत्र आवास के लिए पृथक स्थान दिलाया जाए। आप के पति, उन के परिवार वाले और दूसरी लड़की व उस के परिवार वाले आप को किसी भी तरह से हानि न पहुँचाएँ, तथा आप को प्रतिमाह पर्याप्त राशि भरण पोषण और खर्चे के लिए दी जाए। इस आवेदन पर न्यायालय तुरन्त आदेश पारित कर सकता है।

दि आप के पास अपने विवाह का कोई सबूत नहीं है तो आप सीधे धारा 493, 494 तथा 376 आईपीसी के अन्तर्गत आप के पति के विरुद्ध पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएँ। पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने से मना करे तो न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर पुलिस थाने में दर्ज कराएँ। यदि ऐसा हुआ तो पुलिस कार्यवाही और गिरफ्तारी के भय से ही आप के पति आप की सभी मांगे मानने पर बाध्य हो सकते हैं।

विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह के बाद जबरन किया गया विवाह अवैध है . . .

loveसमस्या-
बेगूसराय, बिहार से शैलेषप्रकाश ने पूछा है –

मैं ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी की है। पर मेरे घरवालों ने मुझे जबरदस्ती डरा-धमका कर घर से दूर दूसरी शादी कर दी, साथ में वीडियोरिकॉर्डिंग भी शादी की करवा ली। 10 महीने तक मुझे डरा धमका कर रखा गया जिस से मैं डर कर मैं अपने पहले पति से ना बात की और ना मिली। पर एक दिन वो मेरे पास आए और बोले क्या हुआ? मुझे क्यों छोड़ दिया। तब मैं ने सब बात कह सुनाई।  तब हम दोनों घर से भाग गये (मैं हॉस्टिल में रहती हूँ)। तब मेरे पापा ने मेरे पहले पति पर अपहरण का एफ.आई.आर दर्ज करा दी। तब मैं ने सीजेएम कोर्ट में उपस्थित हो कर ये बताया कि मैं अपनी मरजी से अपने पति के साथ आई हूँ। दिक्कत यह है कि मेरे दूसरे पति ने रेस्टिट्यूशन ऑफ कंजुगल राइटस् का मुकदमा फैमिली कोर्ट में फाइल किया है। दूसरे विवाह का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। मैं क्या करूँ?

समाधान –

प व्यर्थ ही घबरा रही हैं। आप का जो पहला विवाह विशेष विवाह अधिनियम के अन्तर्गत हुआ है वह जिला विवाह अधिकारी जो कि सामान्य रूप से एक जिले का जिला कलेक्टर होता है के समक्ष हुआ है तथा पूरी जाँच के उपरान्त कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हुआ है। यह विवाह वैध है।

विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह होने के उपरान्त जब तक यह विवाह न्यायालय द्वारा डिक्री पारित कर के विच्छेद नहीं हो जाता है तब तक पति या पत्नी कोई भी दूसरा विवाह नहीं कर सकता है और न ही उस का दूसरा विवाह किया जा सकता है। यदि कोई खुद दूसरा विवाह करता है या किसी जबर्दस्ती के अन्तर्गत उस का दूसरा विवाह कर दिया जाता है तो ऐसा दूसरा विवाह हर हालत में अवैध है।

स तरह आप का दूसरा विवाह जो आप के पिता ने जबरन करवाया है वह पूरी तरह अवैध है। आप के दूसरे विवाह का पति कानूनन आप का पति नहीं है। उसे यह अधिकार प्राप्त नहीं है कि वह आप के विरुद्ध किसी भी तरह से रेस्टीट्यूशान ऑफ कंजूगल राइटस् की डिक्री पारित करवा सके।

प को चाहिए कि आप परिवार न्यायालय में अपना जवाब प्रस्तुत कर दें कि आप का विवाह पहले ही विशेष विवाह अधिनियम के अन्तर्गत हो चुका था जिस का पंजीयन जिला पंजीयक के यहाँ हो रहा है। यह विवाह कभी समाप्त नहीं हुआ है। आप का दूसरा विवाह जबरन आप के माता पिता ने करवाया था जो कि पूरी तरह अवैध है। आप के विरुद्ध आवेदन प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति आप का पति नहीं है इस कारण से उस का आवेदन निरस्त कर दिया जाए। सबूत के बतौर आप अपना विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत जारी किया गया विवाह प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकती हैं और अपने, अपने पति के तथा गवाहों के बयानों से अपने विवाह को साबित कर सकती हैं। आप बेधड़क अपने वास्तविक और कानूनी पति के साथ निवास कर सकती हैं। जबरन विवाह करने वाला पति का आवेदन निरस्त हो जाएगा।

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