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संयुक्त संपत्ति को खुर्द-बुर्द होने से रोकने रोकने के लिए विभाजन का वाद संस्थित कर अस्थायी निषेधाज्ञा प्राप्त करें

समस्या-

हरिओउम् ने झाँसी, उत्तर प्रदेश से पूझा है-

मेरी माता जी की निर्वसीयती सम्पत्ति में मेरे पिता ने नगर पंचायत में खुद को वारिस दर्ज करवा रखा है। मेरे पिता अब किसी दूसरी महिला के साथ रहते हैं।  मुझे डर है कि पिता वह सम्पत्ति उक्त महिला को हस्तांतरित न कर दें। नगर पालिका का कहना है कि एक बार जो नाम दर्ज हो गया तो हो गया, अब तुम्हारा नाम दर्ज नहीं किया जा सकता है। बगैर कोर्ट में जाये माता जी की सम्पत्ति में उत्तराधिकार दर्ज कैसे कराया जा सकता है?

समाधान-

नगर पालिका संपत्ति का जो रिकार्ड रखती है उसमें वह नामान्तरण दर्ज करती है। लेकिन कानूनन नामान्तरण संपत्ति के स्वामित्व का प्रमाण नहीं होता है। फिर भी नामान्तरण एक बार कर दिया जाए तो केवल नामान्तरण आदेश की अपील कर के अपीलीय अधिकारी के आदेश से ही परिवर्तित कराया जा सकता है। यदि नामान्तरण में परिवर्तन करा भी लिया जाए तो भी आप की समस्या बनी रहेगी।  आप के पिताजी फिर भी उस संपत्ति को किसी अन्य को विक्रय पत्र, दानपत्र या अन्य किसी प्रकार का हस्तान्तरण विलेख पंजीकृत करवा कर हस्तान्तरित कर सकते हैं।  उन्हें रोकने के लिए तो आप को न्यायालय की शरण लेनी ही पड़ेगी।

आप की माताजी की मृत्यु के उपरान्त हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार आप की माता जी के उत्तराधिकारी, आप आप के भाई और बहिन तथा आप के पिता हैं। इस तरह आज की तिथि में माताजी की वह संपत्ति एक अविभाजित संयुक्त हिन्दू परिवार की संपत्ति है। इस संपत्ति के बँटवारे के लिए कोई भी एक हिस्सेदार दीवानी वाद संस्थित कर सकता है।

सबसे बेहतर तो यही है कि आप या कोई भी अन्य हिस्सेदार उक्त संपत्ति के विभाजन और अपने हिस्से का पृथक कब्जा प्राप्त करने का दावा दीवानी न्यायालय में प्रस्तुत करे। उस के साथ ही संपति को पिता द्वारा खुर्द बुर्द करने की संभावना के आधार पर उसी दावे में अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर इस आशय की अस्थायी निषेधाज्ञा जारी करा ले कि विभाजन का वाद निर्णीत होने तक पिता उस संपत्ति या उस का कोई भी भाग खुर्द बुर्द न करें। इस के सिवा अन्य कोई उपाय पिता को रोकने का नहीं है।

संयुक्त संपत्ति में खुद के हिस्से से अधिक संपत्ति का विक्रय अवैधानिक है।

समस्या-

मोहम्मद दानिश खान ने मानिकपुर, तहसील कुन्दा, जिला प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरे दादा जी का देहांत 1953 को हुआ है, मेरे पिताजी 2 भाई और एक बहिन हैं। मेरे दादा जी का पैतृक मकान है, जिसका कुछ भाग मेरे चाचा के लड़कों ने सिर्फ़ स्टांप पेपर के ज़रिये बेच दिया है। जिसे किराएदार बनवा रहा है। मेरी फूफी की मौत हो चुकी है, उनकी लड़की ने अपने हिस्से के लिए मुक़दमा दायर किया है। क्या उन्हें हिस्सा मिलेगा? क्या मेरी फूफी की बेटी स्टे ले सकती है? मैं यह भी जानना चाहता हूँ कि हम किस तरह अर्जेंट्ली स्टे ले सकते हैं। मेरे पिता जी ने अपना हिस्सा न्ही बेचा है। अभी तक बँटवारा भी क़ानूनी तौर पे नहीं हुआ था, फिर भी मेरे चाचा के लड़कों ने कुल मकान का 1/2 भाग बेच दिया है।

समाधान-

आप एक मुस्लिम हैं, आप का दाय मुस्लिम विधि के अनुसार तय होगा। आपके दादाजी की मृत्यु के उपरान्त आप के पिता, चाचा और फूफी तीनों का उन की संपत्ति पर अधिकार है। पुत्री का हिस्सा पुत्रों के हिस्से से आधा होता है, यह कहा जा सकता है कि पुत्री का 1 हिस्सा होता है तो पुत्रों के 2-2 हिस्से होते हैं।

इस गणना के अनुसार आप के पिता व चाचा को संपत्ति के 2/5-2/5 हिस्से पर अधिकार है और 1/5 हिस्से पर फूफी का अधिकार है। इस तरह चाचा का अधिकार संपत्ति के ½ हिस्से पर नहीं है। उसने यदि ½ हिस्सा बेच दिया है तो वह उसके हिस्से से अधिक है और अवैधानिक है।

यदि आप की फूफी ने बंटवारे का दावा किया है तो उन्हें तुरन्त उसी दावे में मकान में निर्माण कार्य को रुकवाने के लिए अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर निर्माण कार्य रुकवाना चाहिए। यह तुरन्त हो सकता है। बंटवारे के उसी दावे में आप के पिता भी पक्षकार हैं तो वे फूफी के आवेदन का समर्थन कर सकते हैं या खुद भी उसी दावे में अलग से स्टे के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्ततु कर सकते हैं।

बेदखली से बचने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा का वाद संस्थित करें और अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करें।

समस्या-

राहुल ने A-12 कोटला, मुबारकपुर, नई दिल्ली से पूछा है-

मेरे ताऊ मुझे मेरे मकान से हटा कर खुद कब्जा करना चाहते हैं। मेरे मकान की रजिस्ट्री नहीं है। मैं अपने मकान पर पिछले 32 सालों से रहता आ रहा हूँ। मेरे पास 1988 के गैस कनेक्शन की पासबुक है। जिस पर मेरा नाम और घर का पता लिखा हैं और 2012 के बिजली बिल, वोटर कार्ड आदि हैं। अभी मैं भी उसी पते पर रहता हूँ। मेरे ताऊ ने कुछ दिन पहले उस पर कब्जा करने की कोशिश की पर वो असफल रहे और उनके खिलाफ FIR हो गयी। जिसमें घर मे घुसने के धारायें लगी हैं। मैं उसने अपने मकान को बचने के लिए क्या करूँ?

समाधान-

आप मकान पर काबिज हैं और एक लंबे कब्जे के दस्तावेजी सबूत आप के पास हैं। जबरन कब्जा करने का आप के ताऊ का प्रयास असफल हो चुका है। ताऊ पर अपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो चुका है और चल रहा है। इस कारण आप अभी राहत में हैं। तुरन्त आप को कुछ भी करने की जरूरत नहीं है।

पहले से ही मकान पर कब्जा करने का अपराधिक मुकदमा चलते रहने के कारण यह तो साबित है ही कि कब्जा अभी आप के ताऊ का न हो कर आप का है। अब वे जबरन कब्जा करने की कोशिश नहीं करेंगे। करते हैं तो फिर से एक अपराधिक मुकदमा उन पर बन जाएगा।

फिर भी आप यदि सोचते हैं कि ताऊ किसी प्रकार से आप को मकान से बेकब्जा करने का प्रयत्न कर सकते हैं तो आप अपने ताऊ और अन्य व्यक्ति जिन से आप को ऐसा अंदेशा हो उन के विरुद्ध इस आशय स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दाखिल कर सकते हैं कि प्रतिवादीगण आप को बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए बेदखल न करें। इस वाद में ही अस्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र दाखिल कर अस्थायी निषेधाज्ञा आप प्राप्त कर सकते हैं।

जमीन पर आप का कब्जा मालिकाना है, आप मकान तुड़ा कर नया बनाने में बाधा पैदा करने के विरुद्ध निषेधाज्ञा प्राप्त कर सकते हैं।

समस्या-

अर्पण कुमार जैन ने सिद्धेकेला, जिला बोलानगीर, उड़ीसा से पूछा है-

रीब पचास साल पहले मेरे पापा ने एक जमीन खरीदी थी, पेपर में हाथ से लिखवा क़े। पर उस जमीन मेरे पापा के चाचा के लड़के ने अपने नाम पर करवा लिया।  पर उस जमीन पर हम ही इस्तेमाल करते हैं। अभी हम घर तोड़ के नया घर बना रहे हैं। तो हो नाम भी नहीं करने दे रहे और जमीन के भी एक हिस्सा मांग रहे है।

समाधान-

प की समस्या बहुत अधिक स्पष्ट नहीं है। बस यह समझ आ रहा है कि आप के पिता ने किसी से एक जमीन खरीदी जिस का एग्रीमेंट किसी कागज पर हाथ से लिखा गया। उस जमीन पर मकान बना कर आप का परिवार निवास करता है। आप के पिता के चाचा के लड़के ने उस जमीन को अपने नाम करा लिया है। यह स्पष्ट नहीं किया है कि उस ने अपने नाम कैसे कराया है? किस रिकार्ड में वह जमीन पिता के चाचा के लड़के के नाम हुई है। जिस के कारण वह नया घर बनाने में अड़चन पैदा कर रहा है और जमीन का एक हिस्सा मांग रहा है।

आप के पिता ने एक हाथ से लिखे एग्रीमेंट के अंतर्गत जमीन खरीदी और उस का कब्जा ले लिया और मकान बना कर उस पर निवास कर रहे हैं।  किसी भी स्थायी संपत्ति जिस में मकान जमीन वगैरा शामिल हैं  उस का मूल्य 100 रुपए या उस से अधिक है तो उस संपत्ति के विक्रय का पंजीकरण होना आवश्यक है। आपने जो विवरण दिया है उस से लगता है कि आप के पिता ने उस का पंजीयन नहीं कराया था।

संपत्ति अंतरण अधिनियम (Transfer of Property Act) की धारा 53 ए में यह प्रावधान है कि किसी संविदा के अंतर्गत विक्रय की गयी संपत्ति का कब्जा यदि क्रेता को दे दिया गया है तो यह संविदा का आंशिक पालन है और ऐसा आंशिक पालन हो जाने के उपरान्त यदि पंजीयन न भी हो तो उस संपत्ति का कब्जा क्रेता से वापस नहीं लिया जा सकता है। हम इस तरह की समस्या का उत्तर पहले भी एक समस्या (संपत्ति अंतरण की किसी लिखत के अनुसार कब्जा दे दिए जाने पर किसी तरह वापस नहीं लिया जा सकता।) में दे चुके हैं।

आप के मामले में भी यही स्थिति है। इस तरह आप के या आप के पिता के पास जो संपत्ति है उस का कब्जा आप से या आप के पिता से कोई नहीं ले सकता। पिता के चाचा का लड़का यदि मकान को तुड़ा कर बनाने में बाधा उत्पन्न कर रहा है तो आप के पिता या आप उस समय जमीन खरीद की कागज पर लिखत के आधार दीवानी न्यायालय में वाद संस्थित के कह सकते हैं कि जमीन आप के पिता ने इस लिखत से खऱीदी थी और उस पर मकान बना कर आप 50 वर्ष से निवास कर रहे हैं। इस तरह आप उस जमीन पर बहैसियत स्वामी काबिज हैं। इस मकान को तुड़ा कर दूसरा बनाना चाहते हैं ओर प्रतिवादी ( पिता के चाचा का लड़का) इस में बाधा बनता है और जमीन में हिस्सा मांगता है। उसे आप की जमीन पर दखल से रोका जाए और आदेश दिया जाए कि वह आप के मकान को तुड़ा कर नया बनाने में किसी तरह की बाधा उत्पन्न न करे। इसी वाद में आप इस तरह के दखल के विरुद्ध अस्थाई निषेधाज्ञा भी प्राप्त कर सकते है। बेहतर है कि आप अपने क्षेत्र के किसी अच्छे दीवानी मुकदमे लड़ने वाले वकील से मिलें और उस से परामर्श कर के यह वाद संस्थित करें। अस्थई निषेधाज्ञा प्राप्त होने के बाद आप जमीन पर बना मकान तोड़ कर नया बना सकते हैं।

दरवाजा व रास्ता कैसे बनाए रखें?

समस्या-

अन्नू पांडे ने पूछा है-

नमस्ते!
मेरे घर के पीछे कुछ खाली ग्राम समाज की जमीन है।
मेरे पिता के चाचा जी जो की मेरे घर से 200 मीटर दूर मकान मे रहते है।
मेरे घर के दवाज़े को लेकर रोज़ झगड़ा करते है की मैं उस दरवाज़े को बन्द कर दूँ।उनका कहना है के ये जमनीं उनकी है।जबकि वो ग्राम समाज है। और मेरे पिता के चाचा जी के पास 15 बीघा से ज्यादा का खेत और बाग अलग से है।
तो अब आप हमे बताइये की में अपना निर्माण कार्य किस प्रकार बिना दरवज़ा बन्द किये जारी रख सकता हूँ???

सलाह  

आप का दरवाजा पहले से है आप उसे कायम रखें।
बन्द करने की कहने वाले को कहें कि वह अदालत में जा कर नालिश करे।
यदि वह आप को तंग करता है तो पुलिस में रिपोर्ट कराएँ,  और फिर भी काम न बने तो अदालत में निषेधाज्ञा का वाद दाखिल कर  निर्माण कार्य तथा रास्ते में बाधा उत्पन्न न करने के लिए विपक्षी के विरुद्ध अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करने का प्रयत्न करें।


प्रिय पाठकों!

हम अपने पाठकों से प्राप्त सभी समस्याओं पर अपनी राय ई-मेल से दे रहे हैं।
हम उन्हें यहाँ भी प्रस्तुत कर सकते हैं, जिस से अन्य पाठकों को भी लाभ हो। हम जानना चाहते हैं कि समस्याओं के समाधान इस तरह प्रस्तुत करने का यह प्रारूप आप को कैसा लगा। आशा है आप की टिप्पणियाँ हमें प्राप्त होंगी।
-दिनेशराय द्विवेदी

 

गलत निर्माण को रोकने या हटाने के लिए निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत करें

House demolishingसमस्या-

गोविन्द गौतम ने खजुराहो, छतरपुर, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

किसी व्यक्ति द्वारा जबरन मेरी ज़मीन पर छत का छज्जा निकाला जाता है तो ऐसी स्थिति में मैं क्या कर सकता हूँ? पहले से पडौसी के पास दो दो दरवाज़े हैं फिर भी जबरन हमारी जमीन की तरफ तीसरा दरवाज़ा करना उस जगह दूसरे की ज़मीन आती है, वह भी परेशान है तो हम ऐसी स्थिति में क्या करें?

समाधान-

गरीय क्षेत्र में किसी भी आवासीय भूखंड पर निर्माण नगरपालिका या नगर विकास न्यास से बिना मानचित्र स्वीकृत कराए तथा अनुमति प्राप्त किए बिना नहीं किया जा सकता। नगर पालिका इस तरह के निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान नहीं करती है जिस से पड़ौसियों को परेशानी हो या उन के अधिकारों का अतिक्रमण हो। ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह का निर्माण किया जाए तो ग्राम पंचायत इसे रोक सकती है। इस तरह के निर्माण के विरुद्ध सब से आसान तरीका यह है कि जिसे परेशानी हो रही है उसे नगरपालिका अथवा ग्राम पंचायत को शिकायत करनी चाहिए। नगर और ग्राम में व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार इन संस्थाओँ को उचित कार्यवाही करनी चाहिए। लेकिन समस्या यह है कि इस तरह के निर्माण नगर पालिका और ग्राम पंचायत द्वारा उचित कार्यवाही समय पर नहीं करने के कारण ही होते हैं।

दि ऐसा कोई भी निर्माण होने की आशंका हो तो जिस से किसी को परेशानी हो रही हो या फिर किसी के अधिकारों का अतिक्रमण होने वाला हो तो वह सीधे न्यायालय में अस्थाई निषेधाज्ञा के लिए वाद प्रस्तुत कर उसी वाद में अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर सकता है और न्यायालय से ऐसे कार्य को रोके जाने के लिए आदेश जारी करा सकता है। यदि ऐसे निर्माण का कोई भाग या निर्माण पूरा कर लिया गया हो तो आज्ञात्मक निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए जिस में यह राहत चाही गई हो कि इस तरह का निर्माण वैध नहीं है और इस से आवेदक के अधिकारों का अतिक्रमण हो रहा है। न्यायालय ऐसे मामलों में हो चुके निर्माण को हटाने रास्ते, दरवाजे, खिड़की और पनाले को बन्द करने का आज्ञात्मक आदेश दे सकती है और उस आदेश का पालन करवा सकती है।

दीवानी मामले में दीवानी न्यायालय में कार्यवाही करें, केवल पुलिस को एफआईआर दर्ज कराने से काम नहीं चलेगा

houseconstruction
समस्या-

लखनऊ, उत्तर प्रदेश से प्रगति तिवारी ने पूछा है –

मारे दादा जी द्वारा बनाए घर में तीन परिवार रहते हैं।  उन में से एक परिवार ने घर में अवैध रूप से तोड़-फोड़ शुरू कर दी है। मेरे पिता जी प्रथम सूचना रिपोर्ट FIR लिखाना चाहते हैं लेकिन उन में से एक परिवार ने सुझाव दिया कि आरोपी परिवार के विरुद्ध एक महीने पहले भी प्रथम सूचना रिपोर्ट उसी घर से हो चुकी है इस लिए हमारी रिपोर्ट अब 5 महीने के बाद ही लिखा सकते है। क्या ऐसा कोई नियम है?

समाधान-

सा कोई नियम नहीं है। जब भी अपराधिक घटना घटित हो या होने की संभावना हो तब प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। आप के पिता जी को इस की रिपोर्ट दर्ज करवा देनी चाहिए। लेकिन आप का मामला अभी अपराधिक नहीं है। आप के तथ्यों के आधार पर केवल यह मामला बनता है कि मतभेद के कारण शान्ति भंग हो इस मामले में पुलिस अधिक से अधिक शान्ति भंग करने से रोकने के लिए परिवाद न्यायालय में प्रस्तुत करेगी और वहाँ से शान्ति भंग करने के लिए सभी पक्ष पाबन्द कर दिए जाएंगे। इस से कुछ भी हासिल होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। लेकिन रिपोर्ट पुलिस को अवश्य कर देनी चाहिए।

प का घर संयुक्त परिवार की संपत्ति है और अभी बँटवारा नहीं हुआ है। यह दीवानी अधिकारों का मामला है जिस मे दीवानी कार्यवाही करना ही उचित उपाय है। ऐसी स्थिति में आप के पिता जी को घर के बँटवारे के लिए वाद दीवानी न्यायालय में प्रस्तुत करना चाहिए और बँटवारे के विवाद का निपटारा होने तक उक्त घर में किसी भी तरह के निर्माण और तोड़ फोड़ करने से रोकने के लिए साथ में अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए तथा उस में सभी विपक्षीगण के विरुद्ध अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करनी चाहिए। इस वाद में आप  के दादा जी के सभी उत्तराधिकारी विपक्षी पक्षकार बनाए जाएंगे।

कोई जबरन लाठी के जोर से आप के कब्जे से जमीन नहीं ले सकता, आप राजस्व न्यायालय से स्थगन प्राप्त करें।

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समस्या-

कोरबा, छत्तीसगढ़ से राजेश ने पूछा है-

ज से 15 साल पहले मेरे पिताजी एक व्यक्ति (करीबी रिश्तेदार ) से २०००० रूपये में 20 डिसमिल सिंचित जमीन खरीदी थी।  जितना उन्होंने बताया  और रजिस्ट्री पेपर में भी यही लिखा हुआ है।  खेती की रजिस्ट्री एवं सारे फार्मेलिटी पूरी कर ली गई और हम पूर्ण स्वामित्व से विगत 15 सालों से खेती करते आ रहे हैं।  पर अचानक उस दुष्ट व्यक्ति द्वारा मेरे पिता जी के देहांत के बाद मुझे यह कह कर धमकाने लगा कि उसने सिर्फ 20 डिसमिल जमीन मेरे पिता को बेची थी।  बाकी के 8 डिसमिल जमीन मैं कब्जा कर रहा हूँ और कोई मना करने आया तो जान से मारने की धमकी दे रहा है।  अभी खेती का समय है हमने धान की बोवाई कर ली है और वो कब्जा करने वाला है।
वास्तविकता में वह जमीन 20 डिसमिल से कुछ ज्यादा है, पर यह पक्का नहीं है कि जमीन 28 डिसमिल ही है। पटवारी से हमने अभी तक नपवाया नहीं है।  तो क्या हमें 20 डिसमिल जमीन को छोड़कर बाकी के जितनी भी जमीन होगी उसे छोडनी पड़ेगी? मैं कैसे अपनी जमीन को बचाऊँ अगर वह इस कृत्य में दोषी है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा कैसे दिलवाऊँ? चूँकि इसके बेटे बेटियां पुलिस विभाग में नौकरी करते हैं जिसके नाम पर वह हम लोगों पर धौंस जमाता है, और अभी मैं सिर्फ 20 साल का हूँ और अपने पिता की इकलौती संतान हूँ।

समाधान-

मीन पिछले 15 वर्षों से आप के कब्जे में है। रजिस्टर्ड विक्रय पत्र में क्या लिखा है यह नहीं बताया। यदि उस में बेचने वाले ने अपनी कुल जमीन 20 डिसमल ही बताई है और सब बेच दी है तो कुछ जमीन अधिक होने पर भी आप के स्वामित्व की है। आप के कब्जे में आप के स्वामित्व से अधिक की जमीन है तो उस का निर्णय न्यायालय करेगा। यह निर्णय लाठी के जोर से नहीं किया जा सकता। यदि उस व्यक्ति को लगता है कि आप के पास बेची गई जमीन से अधिक जमीन है तो वह न्यायालय में जमीन के कब्जे का वाद प्रस्तुत कर सकता है।  इस तरह जोर जबरदस्ती के माध्यम से जमीन को आप के कब्जे से वापस लेना उचित ही नहीं अपितु गैर कानूनी है।

प को चाहिए कि आप किसी वकील से संपर्क कर के उस व्यक्ति के विरुद्ध अपने निकट के राजस्व न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त करें कि वह जमीन पर आप के कब्जे को डिस्टर्ब न करे। वह व्यक्ति धमका रहा है तो स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट करें। यदि आप को अंदेशा हो कि उस के पुलिस में कर्मचारी पुत्रों के कारण पुलिस कार्यवाही नहीं करेगी तो आप के इलाके के एस.पी. व आई जी से सीधे जा कर मिलें और सारी बात बता कर शिकायत करें।

मार्ग बन्द करने के प्रयास को रोकने के लिए नगरपालिका को शिकायत करें तथा दीवानी न्यायालय से अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करें।

समस्या-

सुमन कुमार ने देवपुरा बिहार से पूछा है-

मेरा घर से रोड की दूरी लगभग 10 मीटर है, बीच में 10 मीटर की डिस्टेन्स के सामने किसी दूसरे आदमी की ज़मीन है जो मेरा रास्ता बंद कर रहा है।  लेकिन वो रास्ता 7 फिट चौरा था, जिसका एक प्रूफ मेरे पास है।  मेरे दादा जी के समय का एक दस्तावेज जिस पर 10 लोगों के हस्ताक्षर हैं वो लोग गाली देता है और रास्ता बंद करने का धमकी दे रहा है, मुझे क्या क़ानूनी कार्यवाही मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

village roadरास्तों को अक्षुण्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों और नगरपालिकाओं की है। आप को उस व्यक्ति के विरुद्ध ग्राम पंचायत/ नगरपालिका में लिखित शिकायत करनी चाहिए। इस के अतिरिक्त वह गाली गलौच करता है और शान्ति भंग करता है इस के लिए पुलिस थाना को लिखित रिपोर्ट करनी चाहिए।

स के अतिरिक्त आप को दीवानी न्यायालय में अपने दस्तावेज के आधार पर एक वाद स्थाई निषेधाज्ञा हेतु प्रस्तुत कर उस रास्ते को बंद करने से रोकने के लिए ग्राम पंचायत/ नगरपालिका को पक्षकार बनाते हुए प्रस्तुत करना चाहिए और अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर तुरन्त अस्थाई निषेधाज्ञा का आदेश प्राप्त करना चाहिए।

दि वह व्यक्ति गाली गलौच या शान्ति भंग करने से न रुके और पुलिस उस के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं करे तो कार्यपालक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में आप धारा 107, 116 (3) दंड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत सीधे शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं। इस शिकायत पर पड़ौसी को पाबंद कर दिया जाएगा कि वह शान्ति भंग करने का कोई भी कृत्य नहीं करे।

अवैध अनधिकृत निर्माण को रोकने और हटाने के लिए स्थाई निषेधाज्ञा के लिए वाद प्रस्तुत कर तुरन्त अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करें।

समस्या-

भोपाल, मध्य प्रदेश से सौरभ ने पूछा है-

मेरी पुश्तैनी जमीन जबलपुर में है और मेरा परिवार अभी वहाँ नहीं रहता है। मेरे चाचा ने सूचना दी है कि मेरी उस जमीन पर कोई बिल्डर कब्जा कर रहा है। इस बात को अभी महिना भर हुआ है। उन लोगों को काम करने से कैसे रोकना चाहिए?

समाधान-

houseconstructionप को तुरन्त जबलपुर जा कर स्थिति को देखना चाहिए। यदि वास्तव में आप की संपत्ति पर कोई निर्माण कार्य चल रहा है तो किए गए निर्माण कार्य को और निर्माण सामग्री को आप तुरन्त अपने खुद के मजदूर लगवा कर हटवा दें, इस का आप को अधिकार है। लेकिन ऐसा करने में कोई पेरशानी हो तो इस अनधिकृत निर्माण को रुकवाने के लिए आप को स्थाई निषेधाज्ञा का दीवानी वाद प्रस्तुत करना चाहिए तथा इसी वाद में अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करनी चाहिए।

किसी भी निर्माण कार्य को करने के पहले नगरपालिका से मानचित्र स्वीकृत करवाना और निर्माण की अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है। ऐसी स्वीकृति व अनुमति निश्चित रूप से कब्जा करने वाले ने प्राप्त नहीं की होगी। इस कारण से आप नगर पालिका को भी इस मामले में पक्षकार अवश्य बनाएँ और उन के विरुद्ध यह राहत मांगें कि वह मौके पर जा कर निर्माण कार्य को रोके।

क्त मुकदमा करने के पहले आप नगर पालिका को लिखित शिकायत भी करें कि आप की संम्पत्ति पर बिना मानचित्र स्वीकृत कराए और निर्माण की स्वीकृति प्राप्त किए बिना कोई अनधिकृत व्यक्ति निर्माण करना चाहता है। उसे रुकवाया जाए और निर्माण कर दिया हो तो उसे हटाया जाए।

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