विवाह Archive

समस्या-

राकेश कुमार ने अलवर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरी ओर मेरे भाई की शादी फऱवरी 2015 में हुई। शादी के 1 साल तक सही रहा।  इसके बाद हम दोनों भाई की उनसे बनी नहीं वो बिना बात पे ही हम से लड़ाई करती थी।  फिर वो दोनों चली गई, हम लेने गए तो दोनो नहीं आई।  बड़ी बहन गर्भ से थी। हम ने धारा 9 का केस डाल दिया। चार माह बाद जब डिलीवरी होने का टाइम आया तो उन्होने कहा कि इनको ले जाओ।  हम दोनों को ले आए। डिलीवरी के दो माह बाद छोटी बहन, मेरी घरवाली कहती है कि मुझे नहीं रहना तलाक चाहिए। हम ने उसको कई बार रहने को बोला लेकिन वो अपने माँ बाप के पास चली गई और उसके बाद उसने मुझे नोटरी करवा कर रुपए 100 के स्टांप पर तलाक़ दे दिया और बड़ी बहन अभी रह रही है, क्या ये तलाक़ मान्य है।

समाधान-

प खुद हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अन्तर्गत एक आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत कर चुके हैं। इस का अर्थ है कि आप हिन्दू विवाह अधिनियम से शासित होते हैं। इस अधिनियम में कोई भी तलाक केवल तभी मान्य होता है जब कि न्यायालय से डिक्री पारित हो जाए।

आप की पत्नी आप के साथ नहीं रहना चाहती है और उस ने 100 रुपए के स्टाम्प पर आप को तलाकनामा लिख भेजा है। यह अपने आप में क्रूरता पूर्ण व्यवहार है। आप इसी स्टाम्प के आधार पर तथा अन्य आधारों पर परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी प्रस्तुत कर सकते हैं। आप को तुरन्त कर ही देनी चाहिए। न्यायालय से डिक्री पारित होने और निर्धारित अवधि में उस की कोई अपील दाखिल न होने पर यह तलाक अन्तिम हो सकता है।

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समस्या-

हेमन्त प्रताप सिंह ने कानपुर उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी 2014 में हुई थी, मेरी ससुराल वाले धनी परिवार से हैं। मैं एक प्राइवेट फर्म में काम करता हूँ। हमारे विचार एक दूसरे से कभी नहीं मिले। मेरा ससुराल पक्ष मेरे ऊपर दबाव डालता है कि आप अपने भाई से अलग रहो। छह छह माह एक दूसरे से दूर रहते हैं और मुझे कोई कमी भी महसूस नहीं होती। मेरा उन के साथ इंटीमेट होने का मन भी नहीं करता। मेरे मन में डाइवोर्स का ख्याल आया कि क्यों न हम कानूनी तौर पर अलग हो जाएँ। लेकिन घर वाले डरते हैं कि वे धनी लोग हैं हमें दहेज एक्ट में फँसा देंगे। मेरा मार्गदर्शन करें।

समाधान-

मुझे नहीं लगता कि आप के बीच कोई बड़ी समस्या है। आप ने यह तो बताया कि ससुराल पक्ष आप पर दबाव डालता है कि आप भाई से अलग रहें। लेकिन आप ने यह नहीं बताया कि जब वे यह बात करते हैं तो क्या तर्क देते हैं कि भाई से अलग क्यों रहना चाहिए। वे कुछ तो कहते होंगे कि भाई के साथ रहने में फलाँ बुराई है और इस कारण से अलग होना चाहिए। हो सकता है उन की इस बात के पीछे कोई गंभीर वजह हो। आप को अपने ससुराल पक्ष से पूछना चाहिए कि इस का कारण क्या है। यदि कारण पता लग जाए और वह वाजिब हो तो आप को उस कारण को दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए। यदि कारण ऐसा है कि उसे दूर करना संभव नहीं हो तो ससुराल पक्ष का सुझाव स्वीकार कर लेना चाहिए।

ऐसा तो अक्सर होता है कि पति पत्नी के बीच के विचारों में पर्याप्त अंतर हो। लेकिन उस के बाद भी वे साथ रहते हैं। यह सब आपसी समझदारी से होता है। आप दोनों भी इस तरह अपने बीच आपसी समझदारी विकसित कर सकते हैं।  जो कि समय के साथ हो जाती है। यदि छह माह दूर रहने पर भी आप को कोई कमी महसूस नहीं होती, पत्नी के साथ इंटीमेट होने का मन नहीं होता तो यह आप के अंदर किसी तरह की हार्मोनल गड़बड़ी के कारण भी हो सकता है और यह अन्य कोई यौन समस्या भी हो सकती है। आप को चाहिए कि इस संबंध में किसी अच्छे मनोचिकित्सक से मिलें वह आप की समझाइश कर के तथा कुछ दवाएँ आदि दे कर आप के अंदर की इस उदासीनता को समाप्त कर सकता है।

यदि इन सब के बाद भी आप समझते हैं कि आप दोनों को अलग होना ही अच्छा हल है तो इस संबंध में खुल कर अपनी पत्नी से बात करें। उसे सारी समस्या बताएँ। हो सकता है आप की पत्नी इस समस्या का कोई अच्छा हल सुझा सके। हो सकता है वह भी इस समस्या को समझ कर आप से अलग होने को तैयार हो जाए। यदि ऐसा होता है तो सहमति से तलाक की अर्जी न्यायालय में दाखिल की जा सकती है। आप को यह भी सोचना चाहिए कि तलाक अपने आप में अनेक नई समस्याएँ खड़ी करता है। आप सोचें कि क्या क्या समस्याएँ तलाक से उत्पन्न होंगी और उन से कैसे निपटा जाएगा। आप यह भी सोचें कि आप के तलाक देने से आप की पत्नी के जीवन में क्या समस्याएँ पैदा होंगी और उन का क्या हल निकल सकता है।

मेरे विचार में आप और आप की पत्नी के बीच कोई बड़ी समस्या नहीं है जिसे किसी तरीके से हल न किया जा सके। इस कारण आप को इस मामूली समस्या को हल करना चाहिए। विवाहित जीवन मे डाइवोर्स तो अंतिम हल होता है इस कारण आप को फिलहाल डाइवोर्स का विचार त्याग देना चाहिए।

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समस्या-

रणधीर सिंह ने गोरखपुर, उत्तरप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरा नाम रणधीर है और मैं एक प्राइवेट जॉब करता हूँ। मेरी पत्नी सरकारी टीचर है हमारी शादी 20/05/2013 को हुई थी। हमारा एक ११ माह का बेटा भी है जिसे वो अपना साथ लेकर ८ माह से अपने मायके में रह रही है। शादी के बाद से ही उसका व्यवहार मेरे और मेरे घर वालो के प्रति ठीक नहीं था। शादी के १५ दिन बाद जब वो अपने घर गई और बाद में जब मैंने उसे आने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया । उस ने कहा कि जब आना होगा तो बता देंगे। फिर कुछ दिन बाद जब मैं उसके घर जा के बात किया तो वो आयी। कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा वो हमेशा अपने घर चली जाती है और बार बार कहने पर ही आती है। जब वो मेरे घर पे रहते तो उसके घर से किसी न किसी बहाने लोग लेने चले आते थे जिस वजह से हम में कई बार झगड़ा भी हो जाता था। उसने बिना हमें बताये बच्चे का मुंडन करा दिया है। जब इस बात को ले कर हमारा झगड़ा हो गया जिसके बाद से वो और उसके भाई मुझे बच्चे से नहीं मिलने दे रहे हैं। जब मैं बच्चे से मिलने के लिए जाता हूँ तो वो गाली गलौज करते हैं और बच्चे को कमरे में बंद कर देते हैं। वे धमकी देते हैं कि वो मुझ पे पुलिस केस कर देंगे। अभी मैंने 20/11/2016 को हिन्दू विवाह अधिनियम से विदाई का दावा किया है जिसकी तारीख  03/02/2017 को है। मैं ये जानना चाहता हूँ कि मैं अपने बच्चे से मिलने के लिए क्या कर सकता हूँ? जिससे मैं अपने बच्चे से कुछ समय के लिए मिल सकूँ? और यदि वो हम पे 498 और घरेलू हिंसा का केस करती है और हम उस से बरी हो जाते है तो मैं उस पे आपराधिक मानहानि का केस कर सकता हूँ या नहीं?

समाधान-

आप के मामले में सारा झगड़ा बराबरी के व्यवहार का प्रतीत होता है। आप की पत्नी स्वावलंबी है और आप से ही नहीं आप के परिवार के लोगों से भी समानता का व्यवहार चाहती है। लेकिन आप के पारिवारिक सेटअप में वह संभव प्रतीत नहीं हो रहा है। यदि आप और आप का परिवार समान व्यवहार की बात को स्वीकार कर ले तो आप दोनों के बीच की समस्या हल हो सकती है अन्यथा आप के पास विवाह विच्छेद का ही मार्ग रह जाएगा।

आप ने धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम के अन्तर्गत प्रकरण प्रस्तुत कर दिया है। इस कारण से आप को अधिकार है कि आप बच्चे की कस्टडी और उस से मिलने के लिए समय और तरीका निर्धारित करने हेतु न्यायालय में हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 26 के अन्तर्गत आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

यदि आप के विरुद्ध आप की पत्नी घरेलू हिंसा में कोई आवेदन प्रस्तुत करती है और वह मिथ्या सिद्ध होता है तो आप उस के विरुद्ध अपराधिक मानहानि का मुकदमा कर सकते हैं साथ ही आप दुर्भावना पूर्ण अभियोजन के लिए वाद प्रस्तुत कर हर्जाने की मांग भी कर सकते हैं।

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rp_CUSTODY-OF-CHILD-254x300.jpgसमस्या-

धीरज मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के गाँव-बहेड़वा, पोस्ट-मिर्जामुराद, जिला-वाराणसी से पूछा है-

मेरे बेटे आर्यन से स्कूल में मिलने पर उसकी नानी चंदा देवी ने स्कूल के प्रबंधक को लिखकर रोक लगा रखा है।  परंतु मैं अपने बेटे से स्कूल में मिलने का अधिकार चाहता हूँ ताकि उसकी काउंसलिंग करवा सकूँ।  कृपया उचित सलाह दें।

समाधान-

र पिता अपने पुत्र का नैसर्गिक संरक्षक है और उसे अपने पुत्र से मिलने का अधिकार है। यदि आप के पुत्र का स्कूल प्रबंधन आप को अपने पुत्र से मिलने नहीं दे रहा है तो आप स्कूल को लीगल नोटिस दे सकते हैं और कह सकते हैं कि स्कूल प्रबंधन इस तरह गलती कर रहा है।

यदि स्कूल नोटिस के बाद भी पुत्र से मिलने नहीं देता है तो आप स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध दीवानी वाद प्रस्तुत कर के न्यायालय से स्थायी व्यादेश जारी करवा सकते हैं।

यदि आप के और आप की पत्नी के बीच किसी तरह का विवाद है और परिवार न्यायालय में हिन्दू विवाह अधिनियम के अन्तर्गत किसी तरह का मुकदमा चल रहा है तो आप हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 26 के अन्तर्गत इस तरह का आदेश उसी न्यायालय से प्राप्त कर सकते हैं जहाँ यह मुकदमा चल रहा है।

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संदेह करने के स्थान पर सीधे पत्नी से बात करें।

November 30, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_love2.jpgसमस्या-

राहुल ने केरल से अपनी उत्तर प्रदेश की समस्या लिखी है-

मैं उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ और केन्द्रीय सरकार की नौकरी में हूँ। मेरे विवाह को 14 वर्ष हो गए हैं। मेरे 8 साल का एक पुत्र है। मेरी समस्या यह है की मेरी बीबी जो कि ज़्यादातर अपने मायके में ही रहती है। जब मैं लीव में होता हूँ तभी मेरे घर पर आती है और मेरे ड्यूटी आने पर कोई न कोई बहाना बना कर फिर मायके चली जाती है शुरू में तो हम लोगों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया लेकिन अभी कुछ दिनों पहले पता चला कि वह किसी से बात करती है और उसके साथ घूमती है, जिससे मुझे बहुत तकलीफ़ हुई और मैं ने कई दिनों तक खाना नहीं खाया। मैं बहुत परेशान रहता हूँ।मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्या करूँ। क्या मुझे उससे तलाक़ मिल सकता है और यदि मुझे उसको गुज़ारा भत्ता देना पड़ा तो वो कितना होगा? या फिर मुझे क्या करना चाहिए कोई अच्छी सलाह बताएँ मैं उस को छोड़ना नहीं चाहता हूं लेकिन कहीं वह फिर से दुबारा उस से बातें करने लगे तो क्या होगा?

समाधान-

प के मामले में तलाक जैसा कुछ भी नहीं है। न तो तलाक का कोई आधार उत्पन्न हुआ है और न ही ऐसी कोई बात जिस से पत्नी से आप को किसी प्रकार की नाराजगी हो।  आप नौकरी पर चले जाते हैं उस के बाद पत्नी आप के घर रहे या फिर उस के पिता के यहाँ इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पत्नी ने विवाह की शर्तों का कहीं भी उल्लंघन किया हो ऐसा कोई तथ्य आप की समस्या में नहीं है।

आप एक लंबे समय तक बाहर रहते हैं। पत्नी अपने मायके चली जाती है तो इस में तो कोई दोष नहीं है। वहाँ वह किसी पुरुष से मिलती है उस के साथ बाहर आती जाती है।  उस के साथ फोन आदि पर बात भी करती है तो यह तो हर नागरिक का अधिकार है। कोई भी कैसे किसी को इस अधिकार से वंचित कर सकता है?

मुझे तो लगता है कि समस्या की जड़ आप के विचारों में है। आप को लगता है कि एक पत्नी को ऐसा नहीं करना चाहिए। जब वह ऐसा करती है तो आप को धक्का लगता है और आप परेशान होने लगते हैं। सब से पहले तो आप को अपने आप को समझाना चाहिए कि आप जो शक कर रहे हैं वह गलत है। फिर भी निवारण न हो तो पत्नी के साथ इस विषय पर खुल कर बात करें। यदि वह व्यक्ति आप की पत्नी का शुभचिंतक है तो उसे आप का भी शुभचिंतक होना चाहिए। आप पत्नी से कहें कि यदि वह उस का दोस्त है तो उस से परिचय प्राप्त करने का उसे भी हक है वह उस से आप को मिलाए। आप भी उस से बात करें और पत्नी व अन्य पुरूष के संबंध को बिना किसी शक और शुबहे के समझने की कोशिश करें। फिर यदि कहीं लगता है कि इस संबंध में कुछ बुराई है तो पत्नी से बातचीत कर के उस समस्या का हल निकालें। इस तरह शक के आधार पर तलाक की सोचना और उस समस्या पर पत्नी से बात न करना उचित नहीं है। हमारी समझ में तो आप खुद पत्नी से अपनी समस्या पर बात करेंगे तो आप की समस्या खुद हल हो लेगी।

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दूसरा विवाह करने वाले पति के विरुद्ध अपराधिक शिकायत कीजिए।

November 7, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_two-vives.jpgसमस्या-

नीलम ने बदायूँ उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरे पति ने मेरे होते हुए दूसरी शादी कर ली। ये दूसरी औरत बहुत खराब है। सब कुछ मिलने के बाद भी वह पति पर गलत आरोप लगाती है और उस ने मेरे पति के ऊपर सरकार केस 125, और 498 लगाया है। जब कि उस के घर वालों ने दहेज के नाम पर कुछ भी नहीं दिया और पति को जेल भिजवा दिया। मेरे पति एक सरकारी कर्मचारी हैं। वह औरत बेहद परेशान करती है यहां तक कि खुद मरने की बात करती है जिस से मैं डर जाती हूँ। वह औरत रुपए पैसे किसी भी चीज से दुखी नहीं रहती फिर भी ये औरत गलत बोलती है और गालियाँ भी देती है। ये औरत अनपढ़ है। मैं बहुत दुखी हूँ। कृपा कर के आप मुझे बताएँ कि मुझे क्या करना चाहिए जिस से इस औरत से पीछा छूट जाए।

समाधान-

दूसरी औरत तो हमें खराब नहीं लग रही है। खराब तो आप के पति हैं जो आप के होते हुए भी दूसरी औरत ला कर आप की छाती पर बिठा दी है। इस कारण पीछा छुड़ाना है तो अपने पति से छुड़ाइये, दूसरी औरत तो अपने आप छूट जाएगी। लगता है आप अपने पति को भगवान समझती हैं। पर भगवान तो वह नहीं है। वह तो ढंग का इन्सान भी नहीं है। वह भगवान होता तो ऐसे कोई औरत उसे परेशान कर लेती? हो सकता है दूसरी औरत से आप के पति ने अपने को अविवाहित बता कर शादी की हो और बाद में उसे पता लगा हो तो जो कुछ वह कर रही है, क्या गलत कर रही है?

आप के पति ने दूसरी शादी कर के गुनाह किया है, यह क्रूरता भी है। आप इस गुनाह की शिकायत पुलिस को कर सकती हैं। दूसरी शादी करने के कारण आप अपने पति से तलाक ले सकती हैं और गुजारा भत्ता मांग सकती हैं। आप अपना स्त्रीधन भी अपने पति से मांग सकती हैं।

आप को चाहिए कि आप पति के विरुद्ध धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता का आवेदन न्यायालय में भरण पोषण के लिए प्रस्तुत करें, घरेलू हिंसा अधिनियम में पति से अलग आवास की व्यवस्था करने और भरण पोषण की मांग करते हुए आवेदन करें तथा धारा 498-ए, 406, 494 के अंतर्गत पुलिस में रिपोर्ट लिखाएँ या न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करें। इतनी कार्यवाही करने पर ही आप के लिए कोई मार्ग निकल पाएगा।

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तलाक के स्थान पर न्यायिक पृथक्करण के लिए अर्जी दें।

November 6, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

सुशील कुमार ने जहाँनाबाद, बिहार से पूछा है-

मेरी शादी को दस साल हुए हैं एक पुत्र आठ वर्ष का है। मेरी पत्नी मेरी माँ से बहुत झगड़ा करती है, बहुत गंदी रहती है, पागलों जैसा व्यवहार करती है, गंदी गंदी गालियाँ देती है। उस के साथ पाँच वर्ष से मेरा कोई शारीरिक संबंध नहीं है। मैं तलाक चाहता हूँ लेकिन वह नहीं चाहती। मैं किस आधार पर तलाक ले सकता हूँ? क्या मैं दूसरे जिले में अपना मुकदमा पेश कर सकता हूँ, मेरी स्थिति कुछ करने या मरने जैसी है मैं अपने पुत्र और माँ के साथ रहना चाहता हूँ।  मैं एक सरकारी कर्मचारी हूँ, मुझे स्थाई पुनर्भरण के बारे में भी बताएँ।

समाधान-

प क्रूरतापूर्ण व्यवहार के आधार पर तलाक ले सकते हैं अथवा न्यायिक पृथक्करण करवा सकते हैं। यदि फिलहाल आप का दूसरा विवाह का कोई इरादा न हो तो हमारी सलाह है कि आप तलाक के लिए अर्जी देने स्थान पर न्यायिक पृथक्करण (Judicial Separation) के लिए अर्जी प्रस्तुत करें। वास्तव में पत्नी के व्यवहार के कारण ही सारी परेशानी है। हो सकता है आप की पत्नी को कोई मानसिक रोग हो और उसे चिकित्सा की जरूरत हो। दस साल के विवाह के बाद तलाक हो जाने पर वह कहाँ जाएगी? उस का भरण पोषण तो आप को ही करना होगा। जैसी उस की स्थिति है उसे देखभाल और चिकित्सा की जरूरत भी हो सकती है।

हमारा सुझाव है कि आप न्यायिक पृथक्करण के लिए अर्जी दें। जो क्रूरता के आधार पर दी जा सकती है, आप किसी स्थानीय वकील से मिलेंगे तो वह अन्य आधार भी आप से बातचीत कर के जोड़ देगा। न्यायिक पृथक्करण के बाद आप अपनी पत्नी को अलग आवास में अपने घऱ से दूर रख सकते हैं और आप अपने घर माँ और बेटे के साथ रह सकते हैं। यदि आवश्यक हुआ तो न्यायिक पृथक्करण की डिक्री के वर्ष भर बाद आप तलाक का आवेदन भी कर सकते हैं। स्थाई पुनर्भरण का जहाँ तक प्रश्न है तो यह तो तलाक के साथ ही तय हो सकता है, उस के पहले नहीं।

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संभव हो तो पत्नी का विवाह उस के प्रेमी से करवा दें।

October 31, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_gavel2.jpgसमस्या-

मुकेश प्रसाद ने जम्मू कश्मीर से पूछा है-

मैं पिछले १० सालों से इंडियन आर्मी में देश की सेवा में लगा हूँ। मेरी पोस्टिंग इस समय  जम्मू कश्मीर के बॉडर क्षेत्र में है। मेरी शादी इसी साल २२ अप्रेल 2016  को प्रिया के साथ हुई थी।  मैं  अपनी   शादी से  बहोत  खुश  था।  शादी के  बाद  मैं ड्यूटी  पर  चला  आया,  और  देश  की  सेवा  में  लग  गया,  जब  भी   मुझे  समय  मिलता  मैं  उस से फ़ोन  पर  बात  करता  और  खुश  होता  रहता। पर  प्रिया  का  शादी  से  पहले  कुछ  गैर  मर्दों  के  साथ  गलत  सम्बन्ध  भी  थे  जो  कि  उसने  मुझे  नहीं  बताया  था। शादी के   बाद  भी   वो  उन  लोगो  के  साथ  फ़ोन  और  व्हाटसअप  पर  बातें  करते  रहती थी। मेरे  जाने  के  बाद  उसे  का  उन  लोगो  के  साथ  फिर  से  मिलना  शुरु  हो  गया। घर  पर  कोई  भी  न  होने  पर  वो  उन  लोगो   के  साथ  गलत  सम्बन्ध  बनाने  लगी। एक  दिन  इसे   मेरे  रिस्तेदार  ने  उसे  ऐसा  करते  हुवे  देख  लिया।  फिर  मुझे  पता  चला। मैं  आर्मी  के (SPL .  डिपार्टमेंट ) से तालुक रखता  हूँ। मेरे  इन्वेस्टीगेशन  करने  पर उसने  मुझे  सब  कुछ  बता  दिया। इन   सब  बातों  का  मेरे  पास वीडियो  भी  है। उनसे बात करने का कॉल  रिकॉर्ड भी है। मैं  अब  उसके  साथ  नहीं  रहना  चाहता हूँ। तलाक  लेकर नई जिंदगी शुरु करना चाहता  हूँ। पर   उसके  पिता  और  समाज  के  लोगो  ने कहा  कि  आगे  ऐसी  गलती  नहीं  होगी। पर  उसने  मुझे  कहा  कि  मैं   उस  लड़के  से  शादी    कर  लूंगी। मेरे  तलाक  देने  की  बात  पर  वो   आत्महत्या  की   धमकी  देती  है।  दहेज़ पाऔर मार पीट के केश में फाँसने की बात करती है।  पहले ही मैंने शादी  लेट की अब इन सब क़ानूनी दाव पेंच में फंस  कर बाकी की जिंदगी भी ख़राब नहीं करना चाहता हूँ और किसी भी सूरत मे उसे कबुल नहीं करूँगा। जबरदस्ती कबूल करवाने पर मैं आपने आप को गोली मार कर या कोर्ट के इसे फैसले पर में आत्मदाह कर लूंगा। परंतु मेरे कमांडिंग अफसर के कहने पर  ये  सब   भूल  कर  उस  तलाक  दे  कर  दूसरी  जिंदगी  की  सुरुवात  करना  चाहता  हूँ। अब मैं क्या करूँ?

समाधान-

ड़कियाँ/ औरतें आज भी पराधीन हैं। विवाह के पहले आप की पत्नी पिता के अधीन थी अब आप के अधीन है। उस ने डर छुप कर प्रेम किया। विवाह आप से कर लिया। प्रेम को छुपाती रही। आप के ड्यूटी पर आने पर उस के प्रेम को फिर से फलने का अवसर मिल गया। उस ने आप से प्रेमवश नहीं बल्कि माता पिता की इच्छा से विवाह किया था। इन परिस्थितियों में बेहतर उपाय तो यह है कि जिस लड़के से वह प्रेम करती है विवाह करने की बात करती है उसे बुलाइये और उस से स्पष्ट रूप से बात कीजिए। उसे कहिए कि वह आप की पत्नी से विवाह कर ले। यदि वह और आप की विवाहिता इस के लिए तैयार होते हैं तो ठीक है, वर्ना उसे कहिए कि वह आप की पत्नी के जीवन से दूर चला जाए।

यदि वे दोनों विवाह के लिए राजी हो जाएँ तो आप अपनी पत्नी से सहमति से तलाक ले कर उस का विवाह करा दीजिए और स्वतंत्र हो जाइए। यदि वह लड़का आप की पत्नी के जीवन से हट जाता है तो आप पत्नी के साथ अपना जीवन बिताइए। इस से आप के औऱ आप की पत्नी के बीच प्रेम पनपने के भी अवसर हैं।

यदि यह सब नहीं होता है तो अपनी पत्नी से तलाक के लिए आवेदन कीजिए। यह आवेदन आप अप्रेल 2017 में विवाह को एक वर्ष हो जाने पर ही हो सकेगा। तब तक यह सब प्रयत्न कर के देख लें। नहीं तो बाद में तलाक के लिए अर्जी पेश करें। दहेज या मारपीट के केस की धमकी पर ज्यादा ध्यान न दें। वह आरोप गलत है तो गलत सिद्ध हो जाएगा। हाँ वह यदि कोई मुकदमा करती है तो आप को जमानत करानी पड़ेगी। एक बार जमानत हो जाने पर आगे ठीक से पैरवी करवा कर आप बरी हो सकते हैं।

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बेहतर यही है कि तलाक हो जाए।

September 29, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_judicial-sep8.jpgसमस्या-

मितेश पालीवाल ने नाथद्वारा, जिला राजसमंद, राजस्थान से पूछा है-

मेरी शादी को करीब चार साल हो चुके है मेरी पत्नी ने बी .एड कर रखी है मेरे एक तीन साल का लड़का भी है। मेरी पत्नी सरकारी नौकरी (अध्यापिका) के लिये मुझसे तलाक लेना चाहती थी जब मैं ने तलाक के लिए मना किया तो मेरी पत्नी ने 17/07/2015 को मुझ पर मेरे भाई, बहन, माता-पिता सभी पर 498ए,  दहेज़ 67, 125 दं.प्र.संहिता, 13 हिन्दू विवाह अधिनियम व घरेलु हिंसा आदि केस कर दिए हैं।  मैं ने दहेज़ का सारा सामान, पीहर व् ससुराल की सारी सोने चांदी की रकमें भी उसको क़ानूनी तरीके से दे दी, अब मेरी पत्नी न तो मेरे साथ रहना चाहती है न ही तलाक देना चाहती है। वह तलाक के साथ  खर्चा भी लेना चाहती है। मुझे सिर्फ तीन सवालों के जवाब नहीं मिल रहे हैं  1- मेरा लड़का जो मेरी पत्नी के पास है में उससे रोज दो घन्टे मिल सकता हूँ या नहीं?  2- जब मैं मेरी पत्नी को अपने घर पर, किराये पर या फिर उसी के घर में उस के साथ रहने के लिये तेयार हूँ  लेकिन मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं रहना चाहती और महीने के 10,000 हजार रुपये की मांग कर रही है तो क्या मुझे खर्चा देना पड़ेगा?  3- मैं अगर खर्चा देने के लिये पूरी तरह से मना कर दू तो मेरी सजा क्या होगी?

समाधान-

ऐसा लगता है कि आप की पत्नी एक स्वतंत्र जीवन जीना चाहती थी। यह पिता के घर में संभव नहीं था। क्यों कि हमारे अधिकांश मायके आज भी विवाह तक ही बेटी की नियमित जिम्मेदारी उठाना चाहते हैं उस के बाद वे भूल जाते हैं कि वह भी उन के परिवार का हिस्सा है। इस कारण उस ने विवाह कर लिया। यहाँ भी वह यह सपना पूरा नहीं कर सकी, संतान और हो गयी। इसी स्वतंत्र जीवन के लिए वह तलाक लेकर परित्यक्ता के रूप में अनुकंपा नियुक्ति चाहती थी। उसे आपने सफल नहीं होने दिया। आज आप सोचते होंगे कि उस का वही प्रस्ताव मान लेना ठीक था।

आप के तीनों प्रश्नों के उत्तर अनेक अन्य तथ्यों को जान कर ही दिए जा सकते हैं जो इस प्रश्न में नहीं हैं। बेहतर है कि आप इस मामले में अपने नजदीक के किसी अच्छे वकील से सलाह लें।

आप की पत्नी के लगाए केस अधिकांश खारिज होंगे। लेकिन बेहतर यही है कि सहमति से या जैसे भी हो। आप उसे तलाक दे दें, उसे नौकरी मिल जाए। तब वह खर्चा नहीं मांग सकेगी। आप बच्चे से मिलने के लिए न्यायालय में आवेदन करें, हो सकता है आप को अपने बेटे के साथ रहने का समय मिल जाए।

एक बात निश्चित है कि जितना खर्चा आप की पत्नी ने मांगा है नहीं मिलेगा। दूसरे आप यदि खर्चा देने से मना करेंगे तो न्यायालय आप को जेल भेज देगी। हर माह के खर्चे के लिए एक माह जेल भुगतनी पड़ सकती है। यह बात तो आप के वकील आप को ठीक से समझा भी देंगे।

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गलतियों की माफी से ही आगे का रास्ता बनेगा।

September 22, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_two-vives.jpgसमस्या-

रशीद वारसी ने आगरा, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरी शादी 2012 में हुई थी। 3 साल बाद मैं ने अपनी बीवी को कुछ गलतफहमियों की वजह से छोड़ दिया और मैं किसी और के साथ लिव इन में रहने लगा। मुझे पता लगा कि मेरी बीवी मुझ पर केस करने जा रही है तो मैं ने बिना पूछे 10 रुपए के स्टाम्प पेपर पर उसे तीन बार तलाक लिख कर भेज दिया। क्या मेरी तलाक हो गयी? मेरी उस से एक बेटी भी है। वो मुझे उस से भी नहीं मिलने देती। मैं क्या करूँ? मैं अपनी बीवी को वापस लाना चाहता हूँ। कोई कानूनी तरीका हो तो बताएँ।

समाधान-

प बड़े अजीब आदमी हैं। आप ने गलतफहमी के चलते अपनी बीवी को छोड़ दिया। किसी अन्य महिला के साथ लिव इन में रहने लगे। गलतफहमी आप को थी बीवी को नहीं। बीवी ने बिना किसी कसूर के दंड भुगता। जब आप को पता लगा कि वह मुकदमा करेगी तो डर के मारे आप ने 10 रुपए के स्टाम्प पेपर पर तीन बार तलाक लिख कर भेज दिया। अब आप को बेटी याद आ रही है। आप औरतों और लड़कियों को समझते क्या है? तीन औरतों को आप ने परेशान कर दिया है। बीवी को छोड़ा, बेटी को पिता के स्नेह से वंचित किया और जिस के साथ लिव इन में रहे हैं उस का क्या उस की तो कोई चिन्ता तक आप ने इस सवाल में व्यक्त नहीं की है। यदि आप धार्मिक व्यक्ति हैं तो खुद सोचिए इन तीन इंसानों के साथ जो गुनाह आपने किए हैं क्या आप का खुदा उन्हें माफ कर देगा? क्या वे माफ कर दिए जाने के काबिल हैं? और यदि नहीं हैं तो उस की सजा आप को क्या मिलनी चाहिए?

आप को सब से पहले तीनों से अपने रिश्ते तय करने होंगे। आप अब अपनी लिव इन वाली स्त्री के साथ किस तरह के संबंध रखने चाहेंगे। यदि आप उस से संबंध न ऱखेंगे तो क्या वह बखेड़ा नही ख़ड़ा करती रहेगी। आप को उस से माफी मांग कर उस से अपने संबंध समाप्त करने होंगे। अपनी पत्नी से भी आप को माफी मांगनी चाहिए। उस के बाद यदि वह वाकई आप को माफ कर दे तो ठीक वर्ना आप अपनी बीवी को कभी साथ नहीं रख पाएंगे और जीवन भर बीवी और बेटी के लिए भरण पोषण का खर्च देते रहने पड़ेगा।

आप ने पूछा है कि क्या आप का तलाक हो गया है? यदि आप ने एक ही स्टाम्प पेपर पर तीन जगह तलाक लिख कर भेजा है तो इसे शरीयत के मुताबिक तलाक नहीं माना जा सकता। भारतीय न्यायालयों की व्याख्या यह है कि तीनों के तलाकों के बीच में पर्याप्त अंतर होना चाहिए जिस से खाविंद और बीवी दोनों को सोचने का अवसर मिले और दोनों के बीच समझौते की बात चल सके। इस तरह यदि आप अदालत जाएंगे तो आप का तलाक अवैध माना जाएगा। इस तरह आप की बीवी अब भी आप की बीवी है। उसे वापस लाने के लिए आप को हलाला की जरूरत नहीं पड़ेगी। पर आप की समस्या का हल यही है कि आप अपनी लिव इन को छोड़ें, बीवी और बेटी के साथ न्याय पूर्वक अपना जीवन बिताएँ। इस के लिए आप को प्रयास करने होंगे। आप फिलहाल आप के दाम्पत्य जीवन की पुनर्स्थापना के लिए वाद संस्थित कर सकती हैं। जब एक बार दावा अदालत में जाएगा तो बातचीत और समझौते का मार्ग भी निकलेगा।

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