Consumer Archive

consumer protectionसमस्या-

देवेन्द्र ने अमृतसर, पंजाब से पूछा है-

मैं ने अगस्त 2012 में आईओबी बैंक से कम्यूटर का शोरूम बनाने के लिए 11 लाख रुपए का ऋण लिया था। बैंक ने मेरे घर को सीक्योरिटी में रख कर मुझ 11 लाख की लिमिट दी थी। अप्रेल 2013 में मेरी दुकान में चोरी हो गई। मेरा सारा सामान चोरी हो गया। बैंक ने स्टाक का बीमा करवा रखा था लेकिन बीमा कंपनी ने मेरा दावा अस्वीकार कर दिया। मेरे पास बैंक का ऋण चुकाने के लिए कुछ भी नहीं है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

बैंक तो अपना ऋण आप से वसूल करेगा क्यों कि उस ने ऋण आप को दिया था। वह सीक्योरिटी में रखे मकान को कुर्क कर के ऐसा कर सकता है।

मूल समस्या बीमा कंपनी द्वारा आप का दावा अस्वीकार करना है। बीमा कंपनी ने आप का दावा किस आधार पर खारिज किया है यह जानने की कोशिश करें। यदि वह आधार गलत है तो आप बीमा कंपनी को नोटिस दे कर उपभोक्ता न्यायालय में अपना परिवाद बीमा कंपनी के विरुद्ध प्रस्तुत करें। चूंकि बीमा बैंक द्वारा कराया गया था, इस कारण आप इस परिवाद में बैंक को भी प्रतिपक्षी पक्षकार बना सकते हैं और उपभोक्ता न्यायालय से यह निवेदन कर सकते हैं कि जब तक आप के परिवाद का निर्णय न हो जाए बैंक आप से ऋण की वसूली को स्थगित रखे।

स परिवाद को करने के लिए आप को किसी अच्छे वकील की मदद लेनी होगी जो कि बीमा कंपनी से इस परिवाद के माध्यम से चोरी से हुई आप की क्षतियों की क्षतिपूर्ति दिलवा सके।

Havel handcuffसमस्या-
राजीव ने पूर्णिया बिहार से पूछा है-

म ने माइक्रो फाइनेंस नाम की एक कंपनी में मासिक जमा योजना के अन्तर्गत छह हजार रुपया प्रतिमाह जमा कराया। 11 माह जमा करने के बाद कंपनी ने खाता अद्यतन करने के लिए पूरे साल की रसीदें मांगी। नहीं देने पर कंपनी ने खाता अद्यतन करने में असमर्थता जताई है। अब धन वापस करने की मांग करने पर कंपनी ने जवाब दिया है कि ये स्कीम तीन साल के लिए ब्लाक कर दी है। तीन साल बाद संपर्क करें। जब कि कंपनी के पास हमारे पूरी जमा राशियों की विगत भी नहीं है। क्या कदम उठाना चाहिए?

समाधान-

ह सीधे सीधे धोखाधड़ी का मामला है। आप को तुरन्त पुलिस स्टेशन में कम्पनी के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवानी चाहिए। यदि पुलिस कार्यवाही करने से इन्कार करे तो इलाके के एसपी को रिपोर्ट देना चाहिए। फिर भी कार्यवाही न हो तो न्यायालय में परिवाद दर्ज करवा कर उसे जाँच के लिए पुलिस को भिजवाना चाहिए।

स के अलावा आप कंपनी को नोटिस दे कर अपना रुपया वापस देने की मांग करें। रुपया न देने, नोटिस का कोई जवाब न देने या आप का रुपया देने से इन्कार कर देने पर आप को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच के समक्ष अपना परिवाद प्रस्तुत करना चाहिए।

lawसमस्या-
प्रशांत चौहान ने इंदौर, मध्य प्रदेश से पूछा है-

मेरी एक निकटतम महिला पारिवारिक मित्र मूलतः मुम्बई के निवासी हैं। वे कुछ माह पूर्व अपने परिजनो से मिलने अहमदाबाद गई थीं। वहाँ से कुछ दिन पश्चात पुनः मुम्बई वापसी हेतु उनके द्वारा अहमदाबाद के रेलवे आरक्षण कार्यालय से फ़ार्म भरकर टिकट बुक कराया था। उस फ़ार्म में जो दिनांक उन्होंने अंकित की थी, रेलवे के आरक्षण कर्मचारी लिपिक ने उसके स्थान पर उसी दिन को आगामी माह का टिकट बना दिया। इस बात का पता जब चला जब वे अपनी निर्धारित तय तिथि पर स्टेशन पहुँची। टिकट चूँकि आगामी माह का था तो वे टिकट में दर्शायी सीट एवं कोच में यात्रा करने की पात्र नहीं थी। काफी जद्दोजहद एवं टिकट परिचारक से निवेदन एवं दंड राशि भुगतान पश्चात वे उसी दिनांक को अन्य कोच कि अन्य सीट पर दण्डित किराए के साथ उसी ट्रेन से अपनी यात्रा संपन्न की। इस बीच काफी परेशानी उन्होंने भुगती क्योकि उनके साथ और कोई सम्बन्धी यात्रा में नहीं था| उक्त त्रुटि एवं परिस्थितियों के लिए वे जिम्मेवार नहीं थीं। जिम्मेदार थे रेलवे आरक्षण कार्यालय एवं तत्कालीन लिपिक जिसने सही जानकारी देने के बावजूद सही दिनांक टिकट में अंकित नहीं की।  उक्त परिस्थितियो के निर्मित होने, एक अकेली महिला को परेशानी भुगतने इत्यादि के सम्बन्ध में योग्य क्षतिपूर्ति सम्बन्धी “सेवा में कमी” किये जाने सम्बन्धी वाद वे रेलवे प्रशासन अहमदाबाद के विरुद्ध उपभोक्ता फोरम में वाद दायर करना चाहती हैं। किन्तु वे खुद अपना प्रकरण लड़ पाने में असमर्थ हैं। उन्होंने मुझे उक्त कार्यवाही हेतु अधिकृत किया है। मेरे द्वारा गत माह उनके अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में सेवा में कमी किये जाने सम्बन्धी वाद पूर्व सुचना पत्र रेलवे प्रशासन अहमदाबाद को भेजा गया है जिसका कि आज तक योग्य प्रतिउत्तर प्रतीक्षित है।
पसे यह मार्गदर्शन चाहिए कि क्या मैं उनके अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में उक्त प्रकरण को जिला उपभोक्ता फोरम , जिला इंदौर में दायर कर सकता हूँ? क्योंकि मेरे मित्र मुम्बई के निवासी हैं एवं सेवा में कमी का मामला अहमदाबाद रेलवे के विरुद्ध है।

समाधान-

पभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 11 (2) (ए) देखें। इस में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी परिवादी अपना परिवाद जहाँ विपक्षी पक्षकार, विपक्षी पक्षकारों में से कोई एक, वास्तव में स्वेच्छा से निवास करता है या जहाँ वह व्यवसाय करता है और जिस का शाखा कार्यालय है या व्यक्तिगत लाभ के लिए काम करता है उस क्षेत्र के जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है।

प के इस मामले में यदि भारतीय रेल को आप विपक्षी पक्षकार बनाते हैं तो उस का कार्यालय इन्दौर में है। आप इन्दौर में परिवाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

लेकिन तथ्यात्मक रूप से इस विवाद में यह परेशानी हो सकती है कि आप ने जो स्लिप भर कर दी है वह रिकार्ड में उपलब्ध होगी और उस में आप की मित्र ने ही गलती से माह अगला भर दिया होगा तो आप का परिवाद निरस्त हो सकता है। इस के अतिरिक्त यह तर्क भी रेलवे की और से आ सकता है कि टिकट को तुरन्त देख लिया जाना चाहिए था कि वह सही समय व तिथि का दिया गया है या नहीं और उस की शिकायत तुरन्त ही करनी चाहिए थी। मुकदमा लड़ने पर इस तर्क को असफल करने की तैयारी भी साथ ही कर लें।

प्री-पेड से अनधिकृत कटौती अमानत में खयानत है।

December 12, 2013 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित
consumercomplaintसमस्या-
मुम्बई, महाराष्ट्र से भूपेन्द्र सिंह ने पूछा है –

मेरे पिताजी आईडिया मोबाइल कंपनी, मुम्बई का एक नंबर इस्तेमाल करते हैं, जो कि मेरे भाई के नाम पर रजिस्टर्ड है। मेरे पिताजी सिर्फ फ़ोन रिसीव करने और फ़ोन करना ही जानते हैं। कुछ दिन पहले मैंने उनका हैंडसेट देख रहा था तो मैंने पाया कि उनके नंबर पर फ़िल्मी पैक सर्विस एक्टिवेट थी जिसका प्रति सप्ताह १० रुपये कम्पनी द्वारा काटा जा रहा है। जबकि मेरे पिताजी ने ऐसा कोई सर्विस एक्टिवेट ही नहीं कराया है। जब मैंने कस्टमर केअर पर बात करने कि कोशिश कि तो कंपनी ने उल्टा हमारे ही ऊपर इल्जाम लगा दिया कि आपने ही सर्विस चालू किया है, कंपनी ने नहीं। जब मैंने और अधिक जानकारी मांगी तो सर्वर डाउन है ऐसा करके मेरी शिकायत को नहीं लिया और बाद में दोबारा फ़ोन करने के लिए कहा। जब मैंने दुबारा फ़ोन किया तो फिर से सर्वर डाउन है ऐसा करके मेरी शिकायत को नहीं लिया और बाद में दोबारा फ़ोन करने के लिए कहा।

मैं कंपनी के इस व्यवहार से काफी दुखी हूँ और ऐसा पहले भी हो चुका है।  मैं कंपनी के इस व्यवहार को अपने साथ धोखाधड़ी और ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट समझता हूँ।  मैं कंपनी के खिलाफ क्रिमिनल करवाई करना चाहता हूँ ताकि कंपनी को सबक मिले और दुबारा कोई कंपनी ऐसा न करे किसी ग्राहक के साथ।  कृपया मेरा मार्गदर्शन करें कि मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

दि यह मोबाइल कनेक्शन प्रीपेड है तो आप से सहमति है कि इस तरह की अनधिकृत कटौती अमानत में खयानत है। क्यों कि प्रीपेड में आप के द्वारा रिचार्ज करायी गई राशि यूज करने तक कंपनी के पास आप की अमानत होती है। उस से अनधिकृत रूप से कटौती करना अमानत में खयानत है।

कंपनी जिस दिन से सर्विस एक्टीवेट करना कहती है उस दिन से अभी तक का सारा यूसेज डाटा आप कंपनी से प्राप्त कर लीजिए, कंपनी से लिखित में पूछिए कि आप के भाई के फोन नं. से कब उक्त सेवा चालू कराई गई थी। जब यह सब डाटा आप को लिखित में उपलब्ध हो जाए तो आप कंपनी के चेयरमेन, डायरेक्टर्स व सेक्रेटरी को नोटिस भेज सकते हैं कि आप के पास प्री-पेड नंबर है और आप एडवांस में कंपनी को पैसा जमा करवाते हैं जिस का बैलेंस कंपनी के पास ट्रस्ट के रूप में रहता है। उस ने प्रति सप्ताह यह रुपया काट कर अमानत में खयानत की है। अब तक जितनी राशि काटी गई है वह ब्याज व हर्जाने समेत 30 दिन में लौटाएँ। यदि 30 दिन में कंपनी कोई जवाब नहीं देती है तो आप के भाई पुलिस थाना में अपनी रिपोर्ट दर्ज कराएँ। यदि पुलिस थाना रिपोर्ट दर्ज करने में या कार्यवाही करने में आनाकानी करे तो आप के भाई सीधे न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

भारत के उद्योगपतियों ने एक कंजुमर कम्प्लेंट रिड्रेसल काउंसिल (इंडिया) बना रखी है। यह एक सेल्फ रेगुलेटरी संस्था है। इस की वेबसाइट पर शिकायत प्रपत्र मौजूद है। आप चाहें तो यहाँ भी कार्यवाही कर सकते हैं। इस के लिए आप इस यूआरएल (http://ccrc.in/index.php) वेबसाइट खोल सकते हैं और वहाँ सबमिट कम्प्लेंट पर क्लिक करने पर खुलने वाले पेज पर अपनी शिकायत पंजीकृत करवा सकते हैं।  इस के अतिरिक्त उपभोक्ता न्यायालय में भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

consumercomplaintform

टेलीकॉम कंपनी के विरुद्ध चीटिंग और कपट की शिकायत कहाँ करें?

October 11, 2013 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित
TELECOM COMPANYसमस्या-
मुम्बई, महाराष्ट्र से भूपेन्द्र सिंह ने पूछा है –

मैं रिलायंस कम्पनी का 3जी इंटरनेट का पोस्टपेड उपभोक्ता हूँ। पहले मैं 10GB का प्लान इस्तेमाल करता था और जुलाई महीने में मैंने अपना प्लान बदल कर 1GB का करने का रिक्वेस्ट दिया था जो कि मेरे अगस्त बिलिंग साइकिल से प्रभावी होना था।  इस प्लान मासिक किराया 250 रुपये है। लेकिन इसे परन्तु रिलायंस कंपनी ने मेरा रिक्वेस्ट प्रोसेस नहीं किया जिसकी वजह से मेरा 10GB वाला ही प्लान एक्टिव रह गया जिसका मासिक रेंट 950 रूपया है। अब चूँकि मैंने अपना प्लान बदला था और मैंने बहुत ही इन्टरनेट का लिमिटेड इस्तेमाल किया जो कि तकरीबन 1.5 GB था, परन्तु कंपनी के द्वारा मेरा प्लान नहीं बदले जाने के कारण मुझे 10 GB के आधार पर ही बिल भेज दिया गया। जब मैं ने कंपनी से अपने बिल का विस्तृत विवरण माँगा तो कंपनी ने मुझे ईमेल के जरिये मेरा बिल मुझे भेज जिस में एक ही दिन में एक ही डाटा यूजेज को कई बार दिखाया गया है। 1.5 GB यूजेज को 5 GB दिखाया गया है। जब कि मैंने अपने इस्तेमाल को चेक किया तो यह मात्र 1.5 GB ही है। जब मैंने इसकी शिकायत कंपनी को ईमेल के द्वारा और कस्टमर केयर पर फ़ोन करके दी तो कंपनी ने अपनी गलती मानने के बजाय उलटा मुझे ही ज्यादा इस्तेमाल करने का दोषी ठहराया और बिल प्लान को सही ठहराया। अब मैं अपने आप को ठगा हुआ और अपमानित महसूस कर रहा हूँ। मैं रिलायंस कंपनी के खिलाफ फ्रॉड और चीटिंग का केस करना चाहता हूँ। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें कि मुझे क्या करना चाहिए और कैसे और कहाँ मैं कंपनी के खिलाफ क्या करवाई कर सकता हूँ?

समाधान-

स मामले में रिलायंस ने आप के साथ पहले तो यह उपभोक्ता सेवा में त्रुटि की कि आप के अनुरोध पर भी उन्हों ने समय पर आप के प्लान को संशोधित नहीं किया। इस कारण से उपभोक्ता की सेवा में कमी का उपभोक्ता विवाद बनता है जिस की आप उपभोक्ता समस्या निवारण फोरम के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं।

स के बाद आप का कहना है कि उन्हों ने आप के यूसेज को फर्जी तरीके से बढ़ा कर दिखाया। इस तरह उन्हों ने आप को फर्जी बिल दिया और चीटिंग की। यह दोनों कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 468, 420 एवं 424 के अन्तर्गत अपराध हैं। ये तीनों अपराध संज्ञेय व अजमानतीय हैं और इन अपराधों में पुलिस कार्यवाही कर सकती है अपराधी को गिरफ्तार भी कर सकती है। यदि आप अपने दस्तावेजों तथा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड से यह साबित कर सकते हों कि कंपनी ने जो बिल और यूसेज दिखाया है वह फर्जी है तो आप अपने क्षेत्र के पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं। यदि पुलिस जाँच के बाद पाती है कि अपराध घटित हुआ है तो वह प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर के अन्वेषण आरंभ कर सकती है और अपराध प्रमाणित पाए जाने पर अपराधियों को गिरफ्तार कर के उन के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर सकती है।

दि पुलिस आप की शिकायत को लेने से इन्कार करे या उस पर एफआईआर दर्ज करने से इन्कार करे तो यह शिकायत आप उस पुलिस थाना पर अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं जहाँ आप अपने बयान और दस्तावेजी साक्ष्य से यह सिद्ध कर सकते हैं कि अपराध घटित हुआ है तो न्यायालय उस पर प्रसंज्ञान ले सकता है अथवा मामले को अन्वेषण के लिए संबंधित पुलिस थाना को प्रेषित कर सकता है।

ज कल कुछ ब्रांडों के विरुद्ध कुछ संस्थाएँ भी कार्यवाही करने का काम करती हैं इन में से एक कम्प्लेण्ट बॉक्स डॉट इन है। आप चाहें तो यहाँ भी ऑन लाइन शिकायत डाल सकते हैं।

ट्रांसपोर्टेशन में हुई क्षति की मांग के लिए नोटिस . . .

October 6, 2013 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित
Laxmi-travels-Servicesसमस्या-
नागपुर, महाराष्ट्र  से शंकर व्यास ने पूछा है –

मैंने एक टेलीविज़न सेट इंदौर से नागपुर भेजने के लिए एक ट्रेवल्स से पार्सल बुक किया।  नागपुर तक आते आते टी.वी. पूरी तरह से फूट चुका है और ट्रेवल्स वाला मुझे हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए तैयार नहीं है।  मैं उसके खिलाफ उपभोक्ता न्यायालय जाने के लिए सोच रहा हूँ,  लेकिन उस से पहले मैं उसे एक नोटिस देना चाहता हूँ।   मुझे मदद चाहिए कि उस नोटिस का प्रारूप कैसा होना चाहिए?

समाधान-

स मामले में पहले आप को देखना चाहिए कि आप के ट्रेवल्स वाले ने पार्सल बुक करते समय जो रसीद दी थी उस पर क्या शर्तें अंकित की हुई थीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि उस ने टूट-फूट की जिम्मेदारी से मुक्त होने की कोई शर्त उस पर अंकित कर रखी हो। यदि उस रसीद पर ऐसी कोई शर्त नहीं थी तो आप को जो भी हानि हुई उस की भरपाई करने की जिम्मेदारी ट्रेवल्स वाले की है। आप उसे नोटिस दे सकते हैं।

नोटिस एक साधारण पत्र की तरह हो सकता है जिस में आप लिख सकते हैं कि आप ने एक टीवी नागपुर भेजने के लिए उस के यहाँ बुक कराया था जिसे सही सलामत नागपुर पहुँचाने की जिम्मेदारी उस की थी। लेकिन उस ने लापरवाही से यह काम किया जिस के कारण टीवी टूट-फूट गया जिस से आप को रु……….. की हानि हुई है जिसे उस से प्राप्त करने के आप अधिकारी हैं। वह यह पत्र मिलने के 15 दिनों में आप को क्षतिपूर्ति की राशि अदा कर दे अन्यथा आप 12 प्रतिशत ब्याज सहित यह राशि वसूल करने के लिए सक्षम न्यायालय में कार्यवाही संस्थित करेंगे।

प्रारूप इस तरह होगा-

नागपुर, दिनांक- ……………………

प्रति

मेसर्स ……………..

………………………..

…………………………….

विषय – क्षतिपूर्ति अदा करने हेतु

महोदय,

मैं ने आप की ट्रेवल्स से एक टीवी इन्दौर से नागपुर भेजे जाने के लिए दिनांक …………… को बुक कराया था। बुकिंग रसीद सं. ……………. दिनांक ……………….. है। दिनांक ………………. को जब मैने टीवी को नागपुर में प्राप्त करना चाहा तो वह पूरी तरह से टूट फूट चुका है। इस तरह आप ने अपने काम में घोर लापरवाही की है जिस से मुझे हुए नुकसान की भरपाई करने की जिम्मेदारी आप की है। इस टीवी के टूट-फूट जाने से मुझे रु. ………………. की हानि हुई है। मैं ने आप से मुझे हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए कहा तो आप ने मना कर दिया और अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया।

इस पत्र के द्वारा मैं आप से मांग करता हूँ कि आप टीवी को हुए नुकसान की भरपाई के लिए रु. ……………….. मात्र तथा आप के व्यवहार के लिए व टीवी का उपयोग न कर पाने के मानसिक संताप व परेशानी के लिए रुपए 5000.00  मात्र कुल रुपया  ……………. मात्र इस नोटिस की प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर मुझे अदा कर के रसीद प्राप्त कर लें अन्यथा मैं उक्त राशि को प्राप्त करने के लिए आप के विरुद्ध सक्षम न्यायालय अथवा मंच के समक्ष विधिक कार्यवाही संस्थित करने को बाध्य हो जाउंगा जिस के हर्जे खर्चों के लिए भी आप जिम्मेदार होंगे।

भवदीय

शंकर व्यास, नागपुर, महाराष्ट्र  

 

बैंक सेवा में कमी या त्रुटि एक उपभोक्ता मामला है . . .

October 3, 2013 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित
SBIसमस्या-
बारसी, जिला शोलापुर, महाराष्ट्र से रमण कारंजकर ने पूछा है-

मेरी कपडे की दुकान है। मैंने जिस पार्टी से माल उधार लिया था, उसे पेमेन्ट के रुप में बैंक का चेक दिया था। बैंक ने मेरा सीसी खाता रिन्युअल नहीं किया इस गलती की वजह से वह चेक बाऊंस हो गया है। मैंने बैंक हेड ऑफिस पूना में शिकायत की तो बैंक मैनेजर ने अपनी गलती मान ली। शिकायत में मैंने शारीरिक, मानसिक नुकसान एवं बेइज्जती के लिए क्षतिपूर्ति की माँग की है। उस में क्षितपूर्ति की राशि नहीं बतायी है। अब बैंक मैनेजर बार बार मेरी दुकान पर चक्कर काटकर मामला रफा दफा करने की विनती कर रहा है और मेरी मांग पूछ रहा है। मैं उनसे कितनी रकम मांग सकता हूँ?  कृपया बतायें और अगर मुझे बैंक के खिलाफ केस दायर कर के क्षतिपूर्ति वसूल करनी हो तो मैं ज्यादा से ज्यादा कितनी रकम की मांग कर सकता हूँ। मेरा यह केस अदालत में किया जा सकता है या कंज्युमर फोरम में?

समाधान –

प बैंक के ग्राहक हैं, उपभोक्ता हैं इस कारण से आप के बैंक द्वारा जो गलती की है वह सेवा में त्रुटि/कमी है। आप का यह मामला उपभोक्ता मंच के दायरे में आता है। आप अपनी क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता मंच के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं।

हाँ तक सेवा में कमी के कारण क्षतिपूर्ति की राशि का मामला है कोई भी न्यायालय वही क्षति आप को दिला सकता है जो कि आप को वास्तविक रूप में हुई है। आप को बैंक की इस गलती के कारण जो भी क्षतियाँ हुई हैं। मसलन आने-जाने, भाग-दौड़ में हुआ खर्च, आप को जो नुकसान या ब्याज पार्टी को देना पड़ा हो। आप के धन्धे पर जो आर्थिक असर पड़ा हो और उस से जो नुकसान हुआ हो। और मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए जो भी नुकसान आप उचित समझते हों उस का आकलन तो सिर्फ आप ही कर सकते हैं। यह आकलन बहुत अधिक या बहुत कम नहीं होना चाहिए। कोई भी निष्पक्ष व्यक्ति यह समझ सके कि इतना पैसा मिलने से आप को नुकसान की भरपाई हो सकती है उतनी ही क्षतिपूर्ति आप को मिल सकेगी।

बैंक का मैनेजर इस मामले को आपस में निपटाने को इसलिए कह रहा है कि जब आप बैंक के विरुद्ध क्षतिपूर्ति का दावा करेंगे तो जो न्यायालय आप को दिलाएगा उस राशि को बैंक उसी कर्मचारी से वसूल कर सकता है और उसे इस गलती के लिए दंडित भी कर सकता है। इस तरह वह बैंक कर्मचारी उतनी राशि आप को आपसी निपटारे में दे सकता है जितना उसे नुकसान हो रहा हो। मेरा भी यह मानना है कि आप को आप की संतुष्टि की राशि मिल जाए तो उस कर्मचारी से आपस में बैठ कर निपटारा कर लेना चाहिए। क्यों कि उपभोक्ता न्यायालय से भी आप को क्षतिपूर्ति प्राप्त करने में कम से कम दो-चार वर्ष तो लग ही जाएंगे।

समस्या-

इंदौर, मध्य प्रदेश से अमित ने पूछा है-

मैंने 31.03.2005 इंदौर नगर पालिका निगम से जल सेवा प्राप्ति हेतु निगम से नल कनेक्शन लिया था। उक्त कनेक्शन लेने के एक वर्ष तक हमारे रहवासी क्षेत्र के नलों में पानी आता रहा। किन्तु श्रीमान पिछले 5 से 6 वर्षे से संपूर्ण कॉलोनी में पानी नहीं आ रहा है। मैं ने व कॉलोनी वासियों ने इस संबंध में निगम के जोन कार्यालय, एवं निगम के संबंधित अधिकारियों व कर्मचारीगणों को इस संबंध में कई बार लिखित शिकायत व निवेदन किया लेकिन इस के बावजूद भी आज तक नलों में पानी नहीं आ रहा है। मेरे व कॉलोनीवासीयों द्वारा नगर निगम इंदौर का वर्ष 2007-08 एवं 2008-09 तक जल कर का भुगतान किया गया है।  फिर भी नगर निगम द्वारा जल आपूर्ति नहीं की गई और आज भी यही स्थिति बनी हुई है। नगर निगम ने वर्ष 2010-11 व 2011-12 का फिर से जलकर भुगतान करने हेतु नोटिस दे दिए हैं। क्या नगर निगम के उक्त रवैये के विरूद्ध उपभोक्ता फोरम में परिवाद किया जा सकता है या उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है ?

समाधान-
MPLSA

म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण

ल वितरण सेवा विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22-ए के अंतर्गत एक जन-उपयोगी  सेवा है। जन उपयोगी सेवाओँ के संबंध में विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा स्थापित स्थाई लोक अदालतें सुनवाई कर सकती हैं तथा यथोचित डिक्री पारित कर सकती है। जिला न्यायाधीश जिले की स्थाई लोक अदालत का अध्यक्ष होता है, तथा जनता से दो सदस्य अध्यक्ष के साथ मिल कर सुनवाई करते हैं। आप व्यक्तिगत रूप से अथवा आप के क्षेत्र के अनेक लोग संयुक्त हो कर जिला स्थाई लोक अदालत को आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इस आवेदन को प्रस्तुत करने के लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। प्रत्येक जिला न्यायालय में एक स्थाई लोक अदालत स्थित है।

प उपभोक्ता भी हैं इस कारण से उपभोक्ता न्यायालय में भी अपना परिवाद प्रस्तुत कर सकते हैं और उच्च न्यायालय में भी नगर पालिका परिषद के विरुद्ध याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं। लेकिन स्थाई लोक अदालत सब से सुगम माध्यम है जिस में कोई भी शुल्क अदा नहीं करनी पड़ती है। आप चाहें तो स्वयं ही आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। किन्तु इस काम के लिए आप को प्रत्येक पेशी पर अदालत जाना होगा। फिर आप इस कानून से पूरी तरह से अनभिज्ञ भी हैं। इस कारण किसी वकील की सहायता लेना उत्तम रहेगा। यदि पानी न पहुँचने वाले क्षेत्र में कोई वकील स्वयं इस कष्ट को भुगत रहा है तो उस से संपर्क कर लीजिए। अन्यथा किसी भी वकील से संपर्क कर अपना आवेदन प्रस्तुत करवाइए। इस से आप को वकील को पारिश्रमिक तो देना पड़ेगा लेकिन अपने आवेदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सुविधा होगी।

समस्या-

गोण्डा, उत्तर प्रदेश से भोलानाथ ने पूछा है –

र मै नें 24 अप्रैल 2012 को लखनऊ से लेनोवो कंपनी का g570  लैपटॉप 24000 रुपए में खरीदा था जिस पर मुझे एक साल की वारण्टी मिली थी। पिछले महीने लैपटॉप का  की-बोर्ड काम नहीं कर रहा था तो मैं ने कम्पनी में फोन कर इसकी शिकायत की।  लेकिन कंपनी वालों ने अब तक कोई ध्यान नहीं दिया। जब मैनें 29 मार्च को सुबह फोन कर दोबारा लैपटाँप की बोर्ड तथा बैटरी बैकअप की शिकायत की तो पता चला कि मेरे लैपटॉँप की वारण्टी खत्म कर दी गई है।  मैं ने कहा कि मैं ने तो अप्रैल में खरीदा था तो कंपनी वालों ने कोई जवाब नहीं दिया और फोन काट दिया।  मैनें इण्टरनेट पर वारण्टी स्टेट्स चेक किया तो पता चला कि कंपनी ने 25 मार्च 2012 से ही वारण्टी दे रखी थी।  अब मैं स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा हूँ और पिछले एक महीने से शिकायत दर्ज करने पर भी कंपनी ने मेरी नहीं सुनी । मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

IBM LENOVO G570 CORE i3प ने यह नहीं बताया कि आप ने यह लैपटॉप कहाँ खरीदा था। क्या इसे ऑनलाइन खरीदा था या फिर किसी रिटेलर से खरीदा था।  फिर आप ने लैपटॉप खरीदते समय बिल और राशि की रसीद जरूर प्राप्त की होगी। यदि आप ने ऐसी रसीद प्राप्त की है तो उस पर लैपटॉप विक्रय की तिथि भी अवश्य अंकित होगी। लेकिन आप के द्वारा इंटरनेट पर चैक करने से ऐसा पता लगता है कि लैपटॉप आप ने इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन खरीदा है। यदि ऐसा है तो हो सकता है आप ने लैपटॉप 25 मार्च को खरीदा हो और वह आप को 24 अप्रेल को प्राप्त हुआ हो। यदि ऐसा है तो फिर आप की वारण्टी वास्तव में समाप्त हो चुकी है।

लेकिन आप के पास लैपटॉप खरीदने का कोई दस्तावेजी सबूत हो जिस से यह साबित हो जाए कि आप ने लैपटॉप दिनांक 24 अप्रेल 2012 खरीदा है तो आप को यह करना चाहिए कि आप तुरंत कंपनी को रजिस्टर्ड ए.डी. डाक से एक नोटिस प्रेषित करें और कहें कि आप ने लैपटॉप दिनांक 24 अप्रेल 2012 को खरीदा है और वारण्टी जारी है। वे आप को लैपटॉप बदल कर दें या फिर उस के खराब पार्ट्स बदल कर चालू कर के एक सप्ताह में दे दें। यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो आप को उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल करना होगा।

दि वे वास्तव में लैपटॉप की आप की शिकायत को दूर कर देते हैं तो ठीक है। अन्यथा आप 24 अप्रेल 2013 के पूर्व जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर दें।

समस्या-

कोरिया छत्तीसगढ़ से सत्या ने पूछा है-

मैंने गुप्ता मोबाइल केयर में नोकिया 6300 का हेंडसेट को रिपेयर कराने के लिए दिया था जिसमे सिर्फ नेटवर्क प्रॉब्लम और स्विच का प्रॉब्लम और डिस्प्ले का प्रॉब्लम था।  जिसका रिपेयर चार्ज 1000 रूपये लिया जा रहा है जो कि बाजार के अन्य दुकानों में (महज 100 से 200 रूपये तक, पूर्व में मैंने इस तरह का काम कराया था। जिसकी लागत महज 150 रु थी।) की अपेक्षा दुगुने से भी अधिक है, रसीद मांगने पर रसीद भी नहीं दी जा रही है और न ही मेरा मोबाइल फोन! मोबाइल न देने की धमकी दी जा रही है। इस घटना को हुए 3 महीने हो चुके हैं ,मुझे क्या करना चाहिए कृपया विस्तार से बताएं?

समाधान-mobile repair

हो सकता है कि जो खराबी दुरुस्त की है उस में इतना ही खर्च आया हो और केयर सेंटर वालों ने सही पैसा मांगा हो। लेकिन उन्हें रसीद देनी चाहिए। यदि यह केयर सेंटर कंपनी का है तो आप को कंपनी की वेबसाइट पर जा कर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। केयर सेंटर वालों को कहना चाहिए कि वे जो पैसा लेना चाहते हैं उस की रसीद दें। यदि वे फिर भी रसीद नहीं देते हैं तो आप पुलिस में रिपोर्ट लिखाएँ कि केयर सेंटर वाले रसीद नहीं दे रहे हैं और उन्हों ने आपका मोबाइल भी रख लिया है। इस तरह आप के साथ धोखाधड़ी की है। पुलिस वाले रिपोर्ट नहीं लिखते हैं तो उस की शिकायत आप एस.पी. को कर सकते हैं औरे पुलिस वेबसाइट पर जा कर एसपी का मेल पता तलाश कर उन्हें ई-मेल भी कर सकते हैं।

 यदि केयरसेंटर आप को रसीद व मोबाइल दे देता है तो आप नोकिया कंपनी को शिकायत कर सकते हैं कि आप से पैसे अधिक ले लिए हैं। यदि आप साबित कर सकते हैं कि केयर सेंटर ने आपसे अधिक पैसा लिया है तो आप जिला उपभोक्ता समस्या प्रतितोष मंच के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

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